उत्तराखंड के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पर लगे युवक को थाने में बुलाकर पीटने के आरोप

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(देहरादून) राजधानी दून से चौंकाने व शर्मसार करने वाली खबर सामने आई है। आरोप है कि उत्तराखंड के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ने सोमवार दोपहर कैंट थाना क्षेत्र की बिंदाल चौकी में 11वीं में पढने वाले छात्र को अन्य पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर जमकर पीटा। इसके साथ ही अमानवीय हरकतें कर के, फोटो खींचने के साथ साथ मुंह बंद रखने की धमकी दी। पिटाई के निशान पीठ पर साफ तौर पर दिखते है। इतना ही नही युवक को सिगरेट से भी दागा गया। इस घटना के बाद इसे सुबह से ही मैनेज करने की तमाम कोशिशें भी धराशाई हो गई। पीड़ित परिवार ने ने मामले की शिकायत पुलिस मुख्यालय में डीजी कानून व्यवस्था से की है।

देहरादून के रहने वाले 18 साल के अंगद अरोड़ा काफी सदमे मे हैं। उसकी पीठ पर चोट के गंभीर निशान अंगद की तकलीफ साफ बताते हैं। अंगद अपने परिजनों के साथ पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था, अशोक कुमार से शाम छह बजे मिलने पंहुचे। अंगद ने बताया है कि सोमवार दोपहर को उन्हे इस अधिकारी का फोन आया और उसे बिंदाल चौकी पंहुचकर कुछ जरूरी बात करने को कहा गया। इस पर अंगद ने कहा कि वो अपने पिता को साथ लेकर आयेगा, पर इस पर अधिकारी ने कहा कि पिता को लाने की कोई जरूरत नही है पांच मिनट बात करनी है कुछ फिर चले जाना। इसके बाद अधिकारी ने अंगद के पंहुचते ही साथी पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर मारपीट करने के साथ साथ कपडे उतारकर फोटो तक लिये और कई अमानवीय हरकतें करने के साथ साथ मुंह बंद रखने अन्यथा पूरे परिवार को फंसाने की धमकी दी।

मामले में डीजी कानून व्यवस्था के साथ साथ डीआईजी दून से भी परिजन मिले। डीआईजी दून अरूण महोन जोशी जोशी ने मामले की गंभीरता को देखते हुये जांच एसपी सिटी श्वेता चौबे को सौंप दी। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जायेगी।

“मामला मेरे संज्ञान में है। इस प्रकरण की जांच एसपी सिटी को दी गई है। जांच के बाद ही अगली कोई कार्रवाई की जा सकती है।”– अरुण मोहन जोशी, डीआईजी, देहरादून।

“पुलिस चौकी में युवक से मारपीट में मामले की शिकायत पुलिस मुख्यालय में आई है। एसएसपी देहरादून को मामले की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।” -अशोक कुमार, डीजी, कानून व्यवस्था।

बहरहाल रिपोर्ट आने के बाद स्थिति साफ हो जायेगी लेकिन इस मामले में थाना चौकी पुलिस की क्या भूमिका रही इसकी भी जांच की जायेगी। क्या थाने चौकी में कोई भी इस तरह किसी के साथ बर्ताव कर सकता है? देखना होगा कि क्या आरोपों से घिरे वरिष्ठ अधिकारी भी जांच के दायरे में आयेंगें? क्या जूनियर अफसर सीनियर अफसर पर लगे आरोपो की जांच कर पायेंगी? यह कुछ ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब आने वाले समय में ही मिलेगा, लेकिन उत्तराखंड पुलिस की रिपोर्ट का इंतजार अंगद और उसके परिवार के साथ साथ राज्य की जनता को भी रहेगा।