राज्यसभा चुनावः कल्पना का नाम लोगों की कल्पना से परे

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भाजपा आलाकमान कब कौन-सा फैसला कर सबको चौंका दे, कहा नहीं जा सकता। उत्तराखंड से राज्यसभा की एकमात्र सीट पर डॉ. कल्पना सैनी को प्रत्याशी घोषित करके भाजपा आलाकमान ने जो किया है, वह लोगों की कल्पना तक में नहीं था। इस सीट के दावेदारों में डॉ. कल्पना सैनी का नाम दूर दूर तक शामिल नहीं था। सब कयासों को खारिज करते हुए भाजपा आलाकमान ने राज्य पिछडा वर्ग आयोग की अध्यक्ष डॉ. कल्पना सैनी पर भरोसा जताकर राज्यसभा का टिकट पकड़ा दिया।

पहली बार स्थानीय महिला चेहरे को सामने लाया है भाजपा आलाकमान

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत समेत कई अन्य दिग्गजों का नाम राज्यसभा की एकमात्र सीट के लिए प्रमुखता से सामने आ रहा था। ये कयास भी लगाए जा रहे थे कि किसी महिला नेत्री की किस्मत भी खुल सकती हैं। इनमें दीप्ति रावत से लेकर स्वराज विद्वान के नामों की चर्चा थी। लेकिन डॉ. कल्पना सैनी के जिस नाम की किसी ने कल्पना भी नहीं की थी, वह हकीकत में भाजपा प्रत्याशी घोषित हो गईं । डॉ. कल्पना सैनी के पिता पृथ्वी सिंह उत्तर प्रदेश में मंत्री रह चुके हैं।

यह नई बात नहीं है कि किसी महिला को भाजपा ने उत्तराखंड से राज्यसभा में भेजने का फैसला किया है। इससे पहले (स्व.) श्रीमती सुषमा स्वराज उत्तराखंड कोटे से राज्यसभा में जा चुकी हैं। इस बार नई बात यह है कि पहली बार एक ऐसे स्थानीय महिला चेहरे को भाजपा ने आगे किया है, जिसकी उत्तराखंड की सियासत में कोई खास पहचान अभी तक स्थापित नहीं हो पाई है। भले ही वह पिछड़ा वर्ग आयोग की अध्यक्ष हैं।

डॉ. कल्पना सैनी को अवसर देकर भाजपा ने उत्तराखंड में अपने धुर विरोधी सियासी दल कांग्रेस को जवाब दिया है। जवाब इस मायने में कि राज्यसभा के लिए वह स्थानीय महिला चेहरे को आगे लाई है। कांग्रेस इससे पहले हरीश रावत सरकार के जमाने में दिवंगत मनोरमा शर्मा डोबरियाल कोे राज्यसभा का टिकट दे चुकी है।

राज्यसभा केे चुनाव के लिए टिकट का ऐलान हो जाने के बाद सवाल पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के एडजस्टमेंट को लेकर भी फिर से उठ रहा है। डेढ़ साल से त्रिवेंद्र सिंह रावत को कोई जिम्मेदारी पार्टी के स्तर से नहीं दी गई है। हालांकि वह अपने स्तर पर लगातार सक्रिय बने हुए हैं