उत्तराखंड: बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त

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    उत्तराखंड

    उत्तराखंड के मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों में मंगलवार से हो रही बरसात से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बुधवार को कई स्थानों पर पेड़ गिरने, पुल ढहने और सड़क धंसने से यातायात बंद हो गया है। राज्य के नदी-नाले उफान पर हैं। सरकारी अमला युद्धस्तर पर बंद हाइवे और सड़कों को खोलने में जुटा हुआ है।

    कई स्थानों पर भारी भूस्खलन हुआ है। इस वजह से बदरीनाथ, केदारनाथ और यमुनोत्री हाइवे के साथ तमाम ग्रामीण संपर्क मार्ग बंद हो गए हैं। मौसम विज्ञान विभाग ने अगले 48 घंटे के लिए देहरादून और नैनीताल समेत सात जिलों के लिए आरेंज अलर्ट जारी किया है। एक अगस्त तक मौसम के मिजाज में बदलाव की उम्मीद नहीं है।

    प्रदेश की राजधानी देहरादून में रातभर हुई बारिश से जलभराव हो गया है। ऋषिकेश में चीला बैराज पर नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। हरिद्वार में भी गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। फिलहाल यह अभी खतरे के निशान से कुछ दूर है। मसूरी में कैंपटी फाल ने विकराल रूप ले लिया है। पुलिस ने फॉल के आसपास की दुकानों को खाली करवा लिया है। पर्यटकों के कैंपटी फॉल जाने पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।

    देहरादून के रायपुर के मालदेवता में मलबा सड़क पर आ गया है। बकरावाला क्षेत्र में एक पुल टूट गया है। सौंग नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। ऋषिकेश-बदरीनाथ और रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाइवे मलबा आने से बंद है। बीआरओ बंद मार्ग खोलने में जुटा हुआ है। नैनीताल, रुद्रप्रयाग, टिहरी और चमोली में भी जमकर बारिश हुई है।

    मौसम विज्ञान केंद्र ने 30 जुलाई तक के लिए लिए उत्तरकाशी, देहरादून, टिहरी, पौड़ी, बागेश्वर नैनीताल और पिथौरागढ़ के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। केंद्र के मुताबिक 31 जुलाई को देहरादून, टिहरी, चमोली, नैनीताल, चंपावत, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। एक अगस्त को चमोली, नैनीताल, चंपावत, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिले में भारी बरसात होने के आसार हैं। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक विक्रम सिंह का कहना है कि राज्य में 1 अगस्त तक मौसम में बदलाव के आसार नहीं हैं। स्थानीय नागरिक नदी, नालों से दूरी बनाने के साथ बारिश के समय यात्रा न करें।

    राज्य में खराब मौसम के बीच भूस्खलन और पत्थर गिरने से बुधवार सुबह 11 बजे तक प्रदेश के 128 छोटे-बड़े मार्ग बंद हो गए थे। इन मार्गों को खोलने का काम जारी है। देहरादून-मसूरी रोड पर भी भारी भूस्खलन हुआ है। राजपुर पुलिस ने जेसीबी की मदद से मार्ग साफ कराया है। उत्तरकाशी में ऋषिकेश-गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग 108 धरासू, रतूड़ीसैरा, बंदरकोट, बड़ेथि और नेताला के पास मलबा आने के कारण बंद है। ऋषिकेश-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग -94 खरादी के पास मलबा आने के कारण बाधित है। यही स्थिति लमगांव-घनसाली-तिलवाड़ा मोटर मार्ग (साडा मार्ग) की भी है।

    देहरादून में एक मुख्य मार्ग, चार राजमार्ग और 18 ग्रामीण मोटर मार्ग बंद हैं। चमोली जिले में ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग-58 सिरोबगड़ और घोलतीर के पास मलबा आने से बंद है। चमोली में 21 ग्रामीण मोटर मार्ग अवरुद्ध हैं। रुद्रप्रयाग में राष्ट्रीय राजमार्ग -107 सौड़ी, रामपुर के पास मलबा आने के कारण बंद है। पौड़ी में 23 ग्रामीण सड़कें अलग-अलग स्थानों पर बंद हैं। जनपद टिहरी में दो राजमार्ग और 10 ग्रामीण मोटर मार्ग अवरुद्ध हैं। बागेश्वर में 20 और नैनीताल में राजमार्ग भवाली-नैनीताल-टॉकी पंगटू बंद है। इसके अलावा दो ग्रामीण मोटर मार्ग अवरुद्ध हैं। अल्मोड़ा में एक ग्रामीण मोटर मार्ग अवरुद्ध है। चंपावत में टनकपुर-चंपावत राष्ट्रीय राजमार्ग-9 स्वाला और भारतोली के पास भूस्खलन की वजह से बंद है। चार अन्य ग्रामीण मोटर मार्ग भी अवरुद्ध हैं। पिथौरागढ़ में दो बॉर्डर रोड और सात ग्रामीण मोटर मार्ग बंद हैं।

    नई टिहरी के तहसील घनसाली राजस्व क्षेत्र देवठ ग्राम ज्युदाडु में मंगलवार रात तेज बरसात से किशन सिंह पुत्र थेपडू की गोशाला ढह गई। इसके मलबे में दबने से एक बैल की मृत्यु हो गई। हरिद्वार में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब है। प्रशासन ने तटीय इलाकों में अलर्ट जारी किया है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा कैंतुरा के मुताबिक हरिद्वार और लक्सर तहसील के तटीय इलाकों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। बालावाली, खानपुर, लक्सर में सिंचाई विभाग को तटबंधों की निगरानी के आदेश दिए हैं। बाढ़ चौकियों को अलर्ट पर रखा गया है।