पर्यटकों के बीच ”क्वीन ऑफ वैली” के नाम से मशहूर हैं चमोली की यह गाईड

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फूलों की घाटी में पर्यटकों के साथ अनामिका

यू तो हजारों लोग गाईड बनकर लोगों को जगह-जगह घूमाने का काम करते हैं, लेकिन जब एक लड़की यह काम करें तो बात अलग हो जाती है।जी हां चमोली के पुलना गांव निवासी अनामिका चौहान जो केवल 22 साल की है वह टूरिस्ट गाईड बनकर देश-विदेश से आए टूरिस्ट को पहाड़ों की खुबसूरती से रुबरु करा रही हैं।

2013 की आपदा में अनामिका का गांव भ्यूंडार तबाह हो गया जिसके बाद उनका परिवार पुलना में रहता है। एचएनबी गढ़वाल यूनिर्वसिटी से बॉटनी में बीएससी करने के बाद अनामिका ने गाईड प्रोफेशन को अपना करियर चुना। आज अनामिका महीने में 100 से अधिक लोगों को उचाईं वाले क्षेत्र की सैर करा रही हैं।अनामिका के पिता विनोद चौहान घांघरिया में यात्रा सीजन में होटल चलाते हैं। पिछले एक साल से अनामिका घांघरिया से गाईड का काम कर रही हैं। शायद उत्तराखंड के ऊंचें पहाड़ों में अनामिका ही अकेली ऐसी लड़की हैं जो इस काम को कर रही हैं।

अनामिका 11 हजार से 17 हजार तक की ऊचाईं वाले पहाड़ो पर चढ़ती है जिसके लिए बहुत ही मजबूत जज्बे की जरुररत होती है।अनामिका ना केवल भारतीय पर्यटक बल्कि विदेशों के पर्यटकों को भी हिमालय की खूबसूरती से रुबरु करवाती हैं।

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आनामिका से हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि वह हर साल देसी, विदेशी टूरिस्ट को फूलों की घाटी, हेमकुंड और काग भुसंडी ताल आदि उच्च हिमालयी जगहों की ट्रेकिंग कराती हैं। अनामिका ने कहा कि उनके क्षेत्र में बहुत से पुरुष गाईडिंग का काम करते हैं, “उन्हें देखकर मैनें यह सोचा क्यों ना मैं भी यह काम करुं?” बस फिर अनामिका ने अपनी राह गाईडिंग के रुप में चुनी।आज वह महीने में 200 से अधिक पर्यटकों को उच्च हिमालय की सैर कराती हैं।अनामिका ने बताया कि, “आस्ट्रेलिया,जापान,बंगाल,दक्षिण भारत और देश के अलग-अलग कोने से आने वाले टूरिस्ट को हिमालय की सैर करा चुकी हैं।” इतना ही नहीं इस क्षेत्र में इकलौती महिला गाईड होने के नाते और बॉटनी बैकग्राउंड होने के नाते उन्हें हिमालय की वनस्पतियों के बारे में आसानी होती हैं। इसके अलावा उनके काम से खुश पर्यटक उन्हें ”क्वीन ऑफ वैली” के नाम से पुकारते हैं।

अपने इस हौसले से अनामिका ने एक बात साबित कर दी हैं कि कोई भी काम मुश्किल नहीं होता अगर मन में लगन और विश्वास हो तो कठिन से कठिन काम आसान हो जाता है।अनामिका की मां को गर्व है कि उनकी बेटी एक ऐसा काम कर रही जो ज्यादातर पहाड़ो में पुरुष करते हैं।अनामिका के इस काम ना केवल उनके माता पिता गर्व महसूस करते हैं बल्कि पूरा राज्य उनके जज्बे को सलाम करता हैं।