अब आपके शहर देहरादून में मिलेंगे देसी गाय के शुद्ध डेयरी प्रोडक्ट

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(देहरादून) कालसी स्थित उत्तराखंड लाइवस्टॉक डेवलपमेंट बोर्ड इस वक्त लगभग 600 बेहतरीन देसी नस्ल की लाल सिंधी गायों के प्रजनन का एवं इस प्रजाति की गायों को और बेहतर बनाने के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहा हैं वहीं दूसरी तरफ लोगों को इसके जरिये रोजगार भी मिल रहा है।

हमारी आज की कहानी भी ऐसे ही एक ऑन्ट्रप्रेन्योर की है। देहरादून के मनीष कुकरेती यूएलडीबी की मदद से देहरादून वासियों के लिए बेहतरीन क्वालिटी का दूध, छाछ एवं उत्कृष्ट देसी घी आदि उपलब्ध करा रहे हैं।मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के कृषि मंत्री कार्यकाल के दौरान उन्होंने ना केवल देसी गायों की देखभाल बल्कि उनकी प्रजाति बढ़ाने के साथ साथ गायों के स्वास्थ्य पर भी ध्यान देने की बात भी कही थी।

देसी गायों के प्रमोशन को दिमाग में रखकर यूएलडीबी गाय के स्वास्थ पर पहला फोकस रखता है वहीं गाय से मिलने वाला दूध एक बाई-प्रोडक्ट की तरह निविदा द्वारा बेचा जाता है। लेकिन इन नस्ल के गायों के दूध को ठीक उसी क्वालिटी में आप तक पहुंचाने का जिम्मा उठाय़ा है मनीष ने। जनवरी 2019 से मनीष लाल सिंधी गाय का दूध देहरादून के निवासियों के लिए बाजार में ला चुके हैं।आपको बता दें कि यह शुद्ध दूध अगर आप दिल्ली एनसीआर में खरीदते हैं तो इसकी कीमत 160 रुपये प्रति लीटर तक है। वहीं लाल सिंधी गाय के दही की कीमत 320 रुपये प्रति किलो तक, एवं छाछ 130 रुपये लीटर तक है। यह तो बात हो गई दिल्ली की लेकिन अगर आप यह सारे शुद्ध डेयरी प्रोडक्ट देहरादून में खरीदना चाहते हैं तो दिल्ली के मुकाबले बहुत ही कम दाम में आपको यह सब कुछ दून में मिल सकता है।

मनीष कुकरेती की यह कंपनी किमाया प्योर एग्री प्रोडक्ट्स, ‘अन्नपूर्णा स्तुति’ नाम से उत्तराखंड सरकार द्वारा रजिस्टर्ड शुद्ध एग्री उत्पाद उपलब्ध कराती है।

इसके बारे में और बात करने के लिए जब हमने मनीष के ग्राहक से संपर्क किया तो हमें नीरज कर्णवाल ने बताया कि,”मैं पिछले तीन महीने से लाल सिंधी गाय का दूध मनीष से ले रहा हूं और यह दूध एकदम शुद्ध है। मैंने और मेरी पत्नी ने यह देखा है कि इस दुध से ना केवल हमें शुद्धता मिल रही बल्कि हमारे बच्चों की इम्यूनिटी भी बेहतर हो रही है। जहां हम पहले बाजार से प्लास्टिक के पैकेट वाले दूध पीते थे उसमें हमें नही पता होता था कि दूध में कहीं पाउडर तो नहीं , या किस गाय भैंस का है, वहीं इस दूध की शुद्धता का कोई मुकाबला नहीं है।बिना मिलावट शुद्ध दूध हमें अब जाकर मिला है।’ इस दूध की कीमत देहरादून में फिलहाल इंट्रोडक्टरी प्राइस 60 रुपए प्रति किलो है वहीं शुद्ध देसी घी की कीमत 2700 रुपये किलो है। इन सभी उत्पादों की खास बात यह है कि इनमें किसी भी तरह की मिलावट नहीं की जाती। यहां तक कि दूध भी पर्यावरण की दृष्टि से कांच की बोतलों में घर पहुंचाया जाता है।

वहीं इसके बारे में और बात करते हुए यू.एल.डी.बी के सीईओ डॉ.एमएस नयाल ने हमें बताया कि,”जिस तरह का काम मनीष कुकरेती ने एटू दूध के साथ शुरु किया है वह वाकई काबिले तारीफ है। हमारे पास देसी नस्ल की गायें तो बहुत हैं लेकिन उसकी मार्केटिंग में कमी होने की वजह से इसके फायदे लोगों तक नही पहुंच पा रहे जिसकी वजह से किसानों को भी नुकसान हो रहा है। हमारे राज्य उत्तराखंड को फिलहाल एटू मिल्क के बारे में और जानने की जरुरत है।इसके बहुत से फायदे हैं जैसे की यह शरीर के अंदर लिक्विड प्रोफाईल को ठीक करता है,इसके अलावा यह एन्टी कैंसरस भी है।उन्होंने कहा कि हम मानते हैं कि आने वाले समय में एटू डेयरी प्रोडक्ट किसानों के लिए एक गेम चेंजर साबित होगा और हम आशा करते हैं कि इससे पलायन भी कम होगा।हमारे पहाड़ी गांव के किसानों को अगर उनके प्रोडक्ट्स की सही कीमत मिलेगी तो वह पलायन नहीं करेंगे।उन्होंने कहा कि मनीष जैसे लोगों का देसी गायों के लिए कुछ इस तरह का काम करना कहीं ना कहीं इसके प्रमोशन में मददगार साबित होगा।”

ये तो रही लाल सिंधी देसी गाय की बात,इसके अलावा उत्तराखंड के पहाड़ों में पाई जाती है एक और देसी नस्ल जिसका नाम है बद्री गाय। चंपावत के नरियाल गांव में पाई जाने वाली इस गाय का दूध भी एटू क्वालिटी का होता है। अपनी अगली कहानी में हम आपको बद्री गाय के बारे में और जानकारी देंगे।