पलायन से खाली हुए घरों में कर रहे मशरूम का उत्पादन

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मशरूम
(पौड़ी) गांवों में पलयान से खाली हुए घरों में मशरूम उत्पादित कर महिलाओं ने स्वरोजगार की नई मिसाल कायम की है। लॉक डाउन के दौरान जहां काम-धंधे बंद होने से तमाम लोग आर्थिक संकट हैं, वहीं ग्रामीण महिला समूहों ने मशरूम उत्पादन से अपनी आर्थिकी मजबूत की है। इस दौरान लोगों ने जमकर महिला समूहों के मशरूम को खरीदा है।
– महिला समूहों ने मशरूम उत्पादन से कमाए करीब एक लाख रुपये 
– जलागम परियोजना के तहत दिया गया मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण 
इन महिला समूहों को जलागम परियोजना के अंतर्गत मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया गया था। जलागम की ग्राम्या परियोजना के पौड़ी प्रभाग की ओर से एकेश्वर एवं पौखड़ा प्रभाग विभिन्न रोजगारपरक योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन विकासखंडों के 61 परिवारों के 10 समूहों को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया गया था। पौड़ी की मशरूम गर्ल सोनी बिष्ट ने गांवों में जाकर महिला समूहों को प्रशिक्षण दिया। मशरूम गर्ल सोनी बिष्ट ने बताया कि पिछले तीन महीनों में पोखड़ा व एकेश्वर विकासखंड के 10 महिला समूहों ने 450 किलोग्राम से अधिक मशरूम उत्पादन कर एक लाख रुपये की धनराशि अर्जित की है।
महिला समूह गांवों में पलायन से खाली हुए भवनों को मशरूम उत्पादन के लिए प्रयोग कर रहे हैं। लॉक डाउन के दौरान लोगों ने बाहर से आने वाली सब्जियों के बजाय गांवों में उत्पादित मशरूम को प्राथमिकता दी है। सोनी बिष्ट ने बताया कि लॉक डाउन के दौरान मशरूम की खपत बढ़ने से मशरूम उत्पादन कर रही महिलाओं को खासा फायदा हुआ है।