लॉक डाउन में हिमालय के ग्लेशियरों को मिली संजीवनी

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लॉक डाउन
(उत्तरकाशी)  नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग के प्रिंसिपल कर्नल अमित बिष्ट का मानना है कि कोरोना काल में हुआ लॉक डाउन प्रकृति के लिए वरदान साबित हुआ है। लॉक डाउन से हिमालय के पिघल रहे ग्लेशियरों को संजीवनी मिली है।
उन्होंने बताया कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे थे। मगर दो साल से हिमालय क्षेत्र में हुई भारी बर्फबारी से ग्लेशियर रिचार्ज हो गए हैं। कोरोना काल में हुई तालाबंदी  हिमालय के सबसे बड़े गोमुख ग्लेशियर के लिये बेहद फायदेमंद साबित हुई है। वह इस सीजन में हुई भारी बर्फबारी को शुभ संकेत मानते हैं।
कर्नल बिष्ट ने कहा कि गर्मी में उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों में हो रही भारी बर्फबारी गंगोत्री ग्लेशियर और जलाशयों के लिए अच्छी है। हिमपात से ग्लेशियरों का बढ़ना, न केवल गंगोत्री हिमनद के लिए अच्छा है बल्कि उत्तरकाशी और अन्य जिलों में गंगा नदी से भरने वाले जलाशयों के लिए भी शुभ संकेत है। इस सीजन की बर्फबारी से ढके क्षेत्र में 60 फीसद का विस्तार होने की प्रबल संभावना है। इसका अर्थ है कि हिमनद क्षेत्र में तापमान लंबे समय तक जमाव बिंदु के नीचे रहेग। बर्फ आच्छादित क्षेत्र के विस्तार से न केवल गर्मियों में गंगोत्री ग्लेशियर के पिघलने की रफ्तार में में कमी आएगी, बल्कि गंगा नदी के जल से भरने वाले जलाशय भी अच्छी तरह लबालब रहेंगे।
प्रिंसिपल कर्नल अमित बिष्ट ने बताया है कि ग्लेशियर इंसानी हलचल से प्रभावित न हों, इसके लिए पहले प्रतिदिन 150 लोगों को जाने की अनुमति थी। इस बार किसी को भी गोमुख जाने की अनुमति नहीं है। उन्होंने बताया कि पर्वतारोही तो स्वच्छता का विशेष ध्यान रखते हैं पर अन्य तरह की इंसानी हलचल से ग्लेशियर को नुकसान पहुंचता है। उन्होंने बताया कि पर्वतारोही तिलक सोनी उत्तराखंड के ज्यादातर ग्लेशियर पर चढ़ चुके हैं। बर्फबारी से ग्लेशियरों में बढ़ोतरी हुई है। इस बार उन जगहों पर भी बर्फबारी हुई है जहां उम्मीद भी नही थी।