सरकार की ऐवियेशन नीति पर एक्सपर्टों ने उठाये सवाल

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हेली
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राज्य सरकार की महत्वाकांशी एयर सर्विस परियोजना शुरू से ही सरकार के लिये परेशानी का सबब बनी रही है। पहले इसके लिये आॅपरेटर चुनने के फैसले पर सवाल खड़े हुए उसके बाद डीजीसीए ने इजाज़त देेने से मना कर दिया। अब ऐवियेशन सेक्टर से जुड़े जानकार भी सरकार के कदम पर सवाल खड़े कर रहे हैं। सोमवार को प्रेस क्लब देहरादून में नागरिक उड्यन विशेषज्ञ राजीव धर ने प्रेस कांफ्रेस कर के कहा कि सर्विस आपरेशन की सुविधा को उत्तराखंड में शुरु करना बहुत ही अच्छा कदम है क्योंकि इससे सिर्फ दूर दराज़ के इलाके ही पास नही आऐंगें बल्कि इससे उन लोंगों को भी फायदा होग जो ज्यादा सफर करते हैं। उन्होंने कहा कि सिविल एविऐशन डिर्पाटमेंट ने जो तरीका अपनाया है वह सवालों के घेरे में है और डिर्पाटमेंट ने डी.जी.सी.ए की गाईडलाईन को नजरअंदाज़ किया है।

राजीव ने कहा कि भारत में लगभग 16 शेडयूल आपरेटर है जैसे कि जेट एयरवेज़, स्पाइस जेट, इंडिगो, एयर इंडिया आदि और इनके पास अपने प्राइवेट हैलीकाप्टर नहीं है जिसकी वजह से यह सारे आॅपरेटर इस कांट्रेक्ट में बोली लगाने के लिए योग्य नहीं ।केदारनाथ में पहले से 13 आपरेटर काम कर रहे थे जिसमें से केवल 1 को बिड करने का मौका मिला बाकी आपरेटरों को बिड करने का मौका तक नहीं मिला। ऐसे में डी.जी.सी.ए की गाईडलाईन के अनुसार यह कांट्रेक्ट केवल शेड्यूल आॅपरेटरों के लिए था लेकिन इसमें 4 नान शेड्यूल आपरेटरों ने आवेदन किया और इन चारों नान शेड्यूल आपरेटरों में से आई.एफ.एस.ऐ.एल को अनुमति भी मिल गई।इसके साथ ही इस कंपनी को लैंडिग और पार्किग शुल्क भी नहीं देना पड़ेगा। यह चार कंपनी जिन्होंने लाइसेंस के लिए आवेदन किया था वो इस प्रकार हैः

  • हैरिटेज एविऐशन
  • स्पैन एयर
  • डैकन चार्टर
  • आई.एफ.एस.ऐ.एल

इसके साथ ही केदारनाथ यात्रा का किराया 6000 से बढ़ाकर 9200(दोनों तरफ का) कर दिया गया है जो आम आदमी के लिए बहुत ज्यादा है। एकाएक किराया बढ़ जाने से श्रद्धालुओं के लिए यात्रा काफी महंगी हो गई है, जबकि अन्य दार्शनिक स्थल जैसे कि वैष्णों देवी, अमरनाथ, मनी महेश, आदि का किराया केदारनाथ के मुकाबले बहुत कम है। राजीव ने बताया कि यह टेंडर उन कंपनियों को दिया गया है जिनके पास न तो अपने हैलीकाप्टर है ना ही पहाड़ी क्षेत्रों में उड़ान भरने का तर्जुबा। उन्होंने बताया कि अब जब इस कंपनी के पास अपने हैलीकाॅप्टर नहीं है तो ये दूसरी कंपनी से जहाज किराये पर लेंगी जो कि टेंडर में लिखा ही नहीं है,टेंडर में लीज़ पर लेने की बात का कहीं जिक्र भी नहीं है।इस बोली में जिन कंपनियों ने भाग लिया है उनके पास अपने मशीन होने चाहिए और चुनी गई कंपनी के पास अपने मशीन नही हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड उड़ान भरने के लिए एक सेंसिटिव इलाका है, और इस क्षेत्र में अनुभव वाला पाइलट और सुरक्षा दोनों बहुत जरुरी है। ऐसे में नान शेड्यूलिंग आपरेटर को शेड्यूल आपरेटर का परमिट देना किसी खतरे से कम नही है और डी.जी.सी.ए की गाईडलाइन का उल्लंघन करके यह किया गया है।