श्रीनगर मेडिकल कॉलेज सेना को सौंपने की कवायद फिर शुरू

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देहरादून। राज्य सरकार ने फिर एक बार श्रीनगर मेडिकल कॉलेज को सेना को सौंपने की कवायद शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पीबीओआर पूर्व सैनिक वेलफेयर एसोसिएशन के स्थापना दिवस पर कहा कि इस विषय में थल सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत से बात हुई है। वह 18 मार्च को दून आ रहे हैं। यह प्रयास किया जा रहा है कि श्रीनगर मेडिकल कॉलेज, देश को दूसरा आर्म्ड फोर्सेस मेडिकल कॉलेज बनाया जाए।

दरअसल, बीते साल भी सरकार ने श्रीनगर मेडिकल कॉलेज को सेना को सौंपे जाने की कवायद की थी। उस समय सेना की मेडिकल कोर की टीम ने श्रीनगर मेडिकल कॉलेज का जायजा भी लिया। जिसके बाद सेना ने इसे लेने से मना कर दिया था। इससे सरकार की मुहिम को भी झटका लगा था। अब मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने फिर इसे लेकर प्रयास शुरू किए हैं। उन्होंने कहा कि 18 मार्च को थल सेना अध्यक्ष दून आएंगे। वह यहां गढवाल राइफल के हॉस्टल का शुभारंभ करेंगे। उनसे बात की है। यह प्रयास रहेगा कि वह खुद श्रीनगर मेडिकल कॉलेज का जायजा लें। सीएम ने कहा कि उत्तराखंड एक सैन्य बहुल क्षेत्र है। राज्य सरकार का यह प्रयास है कि श्रीनगर मेडिकल कॉलेज देश का दूसरा अम्र्ड फोर्सेस मेडिकल कॉलेज बने। इससे पहाड़ की स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार होगा। बता दें कि देश का एक मात्र एएफएमसी पुणे में संचालित हो रहा है। जहां नीट के माध्यम से प्रवेश होते हैं। हालांकि श्रीनगर मेडिकल कॉलेज को एएफएमसी में तब्दील करने से राज्य के युवाओं को नुकसान उठाना पड़ सकता है। क्योंकि श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 100 सीट में 85 राज्य कोटे की हैं। जबकि एएफएमसी में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।