हवा-हवाई सन्देश साबित हुआ पुलिस मिशन महाव्रत

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बीते शुक्रवार को जहां उत्तराखंड पुलिस को पुलिस के ही महाव्रत मिशन का अंदेशा था वहीं शनिवार को यह मिशन हवा-हवाई साबित हुआ। जी हां पुलिस को मिले सिपाहियों के गुमनाम पत्र जिसके मुताबिक शनिवार को महाव्रत आंदोलन का निर्णय लिया गया था वह केवल एक अफ़वाह साबित हुई।

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6 जनवरी 2018 यानि शनिवार को उत्तराखण्ड पुलिस का मिशन महाव्रत पूरी तरह हवा-हवाई साबित हुआ। सभी जनपदों में आज का दिन सामान्य दिन की तरह ही रहा। सभी जवान हर रोज़ की तरह ही अपनी ड्यटी कर रहे थे।मिशन महाव्रत के बारे में हमने कुछ पुलिस के जवानों से बात भी की तो उन्होंने भी कहा कि महाव्रत जैसी कोई बात नहीं है। हमें अपने उच्च अधिकारियों पर पूरा विश्वास है। हम भली-भांति समझते हैं कि और हमें ठीक तरह से मालूम है कि समस्याओं का निस्तारण सिर्फ विभागीय स्तर पर ही हो सकता है। हमारी समस्याएँ हमारे कर्तव्यों से बड़ी नहीं हो सकती है। हमें अपने अनुशासित पुलिस विभाग पर गर्व है।

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अशोक कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक,अपराध एवं कानून व्यवस्था उत्तराखण्ड ने बताया कि ”पुलिस एक अनुशासित बल है और हमे अपने अनुशासन पर गर्व है। पुलिस कर्मी भी इसकी गरिमा को समझते हैं। हम समाज में अनुशासन लाते हैं, जो अपने पथ से भटक जाते हैं, उन्हें सही रास्ता दिखाते हैं। मिशन महाव्रत जैसी कोई बात नहीं है। यह केवल कुछ शरारती तत्वों द्वारा पुलिस विभाग की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से किया गया कार्य है। यदि कोई बाहरी व्यक्ति इसमें संलिप्त पाया जाता है, तो उसके विरूद्ध ’’राष्ट्रीय सुरक्षा कानून’’ के अन्तर्गत कार्यवाही की जाएगी।”

इसके साथ ही देहरादून पुलिस हेडक्वाटर के मेस में खाना खाने वाले सिपाहियों ने रोज की तरह समय से खाना खाया और सारे दिन की दिनचर्या रोज़ जैसी रही।हालांकि पुलिस ने पहले ही कहा था शनिवार को खाना खाने वालों पर विशेष नजर रहेगी।अनुशासन को तोड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। आंदोलन करना पुलिस का काम नहीं है। पहले से ही सभी मांगें पूरी कर ली गई हैं।