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सुरक्षा के लिए बनीं दीवार पर लिखेंगें केदारनाथ का इतिहास

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केदारनाथ की सुरक्षा के लिए बनाई गई 350 मीटर लंबी और 12 फीट ऊंची आरसीसी सुरक्षा दीवार पर थ्रीडी पेंटिंग से केदारनाथ का इतिहास और इसके दोबोरा निर्माण की कहानी लिखी जाएगी।इसके साथ ही 2 वाचिंग टावर की स्थापना की जाएगी जिसकी मदद से चौराबाड़ी क्षेत्र में होने वाली मौसमी गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी।

मंदिर से दो सौ मीटर पीछे की तरफ बनाई गई सुरक्षा दीवार अब केदारनाथ में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए जानकारी का खजाना बनेगी। इस दीवार पर केदारपुरी और केदारनाथ की महिमा का वर्णन किया जाएगा। धाम का पूरा इतिहास दीवार पर लिखा जाएगा। इसके अलावा यह दीवार आपदा में हुए नुकसान और 2014 से हो रहे पुनर्निर्माणकार्य की पूरी जानकारी भी इस दीवार पर अंकित की जाएगी।आपको बता दें कि नेहरु माउंटेयरिंग संस्थान ने केदारनाथ और केदारपुरी की सुरक्षा के लिए त्रिस्तरीय सुरक्षा दीवार बनाई है, जिसमें पहली गोबिन वाल, दूसरी राॅक नेट वाल और तीसरी आरसीसी वाॅल हैं।

तीनों सुरक्षा दीवारें बनाने वाली संस्था निम का दावा है कि यह सुरक्षा दीवारें साल 2013 वाले जनसैलाब को रोकने में पूरी तरह से सक्षम हैं। इन दीवारों का निर्माण आईआईटी रुड़की और सीबीआरआई के विशेषज्ञों की देखरेख में किया गया है।

दीवार पर थ्रीडी पेंटिंग का मुख्य उद्देश्य केदारनाथ पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को वहां के बारे में बेहतर से बेहतर जानकारी उपलब्ध कराना है।

तैश में आने वालों को हथियार का लाइसेंस नही

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अब हथियारों के लाइसेंस जिला प्रशासन तब जारी करेगा, जब आवेदनकर्ता की दिमागी हालात पूरी तरह स्वास्थ्य होगी। उसे बात-बात पर गुस्सा नहीं आता होगा और वो शराब का सेवन अधिक नहीं करता होगा। इसके लिए अब एलआईयू रिपोर्ट के साथ सभी तरह के मानसिक स्वास्थ्य सर्टिफिकेट प्राप्त करना जरुरी होगा। राज्य के हर जिले में इसे लागू कर दिया गया है।
अभी तक पिस्टल, रिवॉल्वर और एलजी यानी लोंग ग्राफ राइफल के लिए एलआईयू रिपोर्ट ही लगती थी। उसके बाद फाइल एसएसपी कार्यलय से होते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचती थी। वहीं पिछले दिनों देशभर में शराब पीकर हर्षफायर करने की घटनाएं बड़ी है, जिससे कई लोगो की मौत भी हुई। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तय किया कि एलआईयू की रिपोर्ट के अलावा जिला अस्पतालो में मनोचिकित्सक विभाग की रिपोर्ट भी अनिवार्य होगी। मनोचिकित्सक कई बिन्दुओ पर आवेदक की जांच करेंगे।
दून अस्पताल के सीएमओ डा. वाई.एस थपलियाल ने बताया कि कुछ दिन पूर्व ही जिला प्रशासन से पत्र आया था। उसके बाद दून अस्पताल को इस बारे में सूचित करके व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। आगे जो भी व्यवस्था बनेगी, उसके अनुसार आहे काम किया जाएगे।
दून अस्पताल में मनोचिकित्सक विभाग के अध्यक्ष डॉ. कर्नल जेएस राणा ने बताया कि मनोचिकित्सक ऐसे आवदेकों को फेल कर देते हैं, जिन्हें अत्यधिक गुस्सा आता है। वहीं जो शराब का अत्याधिक सेवन करते हैं या और किसी नशीली पदार्थ का सेवन करते हैं, ऐसे आवेदकों को भी अनफिट कर दिया जाता है। इसके अलावा कोई दिमागी बीमारी हो या डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्ति को भी फेल किया जाता है।
हथियारों के बाद ड्राइविंग लाइसेंस के लिए भी ऐसी व्यवस्था जल्द शुरू होने वाली है। केंद्र सरकार का मानना है कि वाहन चलाने के लिए स्वास्थ्य दिमाग होंना जरूरी है। वहीं, संभागीय परिवहन अधिकारी सुधांशु गर्ग ने बताया कि इस बारे में अभी मौखिक रूप से ही सुना है।

ड्रोन रखेगा वनाग्नियों पर नजर

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इस बार वनाग्नि का पता लगाने के लिए ड्रोन का भी इस्तेमाल किया जायेगा। वनों में लगने वाली आग को रोकने के लिए फायर वाचर की संख्या 3000 से 6000 कर दि गयी है।राज्य में 14 से 20 अप्रैल तक आग सुरक्षा सप्ताह मनाया जा रहा है। रिजर्व वन के साथ-साथ वन विभाग सिविल सोयल और वन पंचायतों में लगने वाली आग को रोकने की योजना वन विभाग बनायेगा। ये निर्णय मुख्य सचिव श्री एस.रामास्वामी की अध्यक्षता में लिया गया। मुख्य सचिव ने वीडियों कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलाधिकारियों को फारेस्ट फायर मैनेजमेंट प्लान पर अमल करने और सतर्क रहने के निर्देश दिये।
वनाग्नि की रोकथाम के लिए 40 मास्टर कंट्रोल रूम बनाये गये हैं, इसकेअलावा 1416 क्रू-स्टेशन, 171 वाॅच टाॅवर, 391 स्थाई सेट, 177 मोबाइल सेट, 1534 हैंडसेट, 43 रिपीटर, रेक व कटिंग, फायर फाइंडर ब्रेस हुक, मेकलाइड, पुलास्की, सावल, डबल विटेक्स, फेस मास्क हेलमेट, टार्च आदि की व्यवस्था की गई है। साथ ही 15,400 प्रशिक्षित मानव संसाधन, 40,000 एसडीआरएफ द्वारा प्रशिक्षित स्थानीय लोगो को भी आग लगने की स्थिति में तैनात किया जायेगा।
राज्य और जिला स्तर पर वनाग्नि नियंत्रण और प्रबंधन योजना बना ली गई है। संवेदनशील क्षेत्रों को चार जोन में बांटा गया है। इसमें 11280 वर्ग किमी हाई रिस्क, 15410 वर्ग किमी मीडियम रिस्क, 11144 वर्ग किमी लो रिस्क और 15648 वर्ग किमी नो रिस्क जोन में रखा गया है। फायर लाइन, पैदल, लीसा बटिया, वन मोटर मार्ग की सफाई कर दी गई है। नियंत्रित और नियमित फुकान किया जा रहा है। प्री फायर एलर्ट एसएमएस, व्हाटसअप के जरिये भेजने की व्यवस्था की गई है। लोगों को जागरूक करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम किये जा रहे हैं। 4600 फील्ड स्टाफ, 5600 फायर वाचर और वन पंचायत सदस्यों को प्रशिक्षित किया गया है।

तो अब बारात के लिए भी लेनी होगी पुलिस से इज़ाजत

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शादी के माहौल में जो बात हर किसी को खुश करती है वो है बारात में जाने की बात। शादी के माहौल में हर किसी को बारात में धूम मचाने का शौक होता है।लेकिन अब आपको इस धूम धड़ाके के लिए भी परमीशन लेनी पड़ेगी।

जी हां शादी के लिए शहर से बारात निकालनी है तो आपको पुलिस से इसकी परमीशन लेनी होगी।लेकिन घबराइए मत इस परमीशन की जिम्मेदारी आपकी नहीं बल्कि वेंडिंग प्वाइंट के संचालकों की होगी।ऐसा ना करने पर इसका खामियाजा वेडिंग संचालकों को भुगतना होगा और उन पर कार्रवाई भी की जाएगी।इसके साथ ही पार्किंग की बेहतर व्यवस्था और करने और सीसीटीवी कैमरे लगाना भी जरुरी कर दिया है।

एसएसपी स्वीटी अग्रवाल ने यह आदेश जारी कर दिए है।इसके साथ ही ट्रैफिक सुधार के लिए लेफ्ट टर्न सख्ती से खाली कराने के निर्देश दिए हैं।एसएसपी स्वीटी अग्रवाल ने ट्रैफिक सुधार को ध्यान में रखते हुए शहर के वेडिंग प्वाइंटों के लिए अलग से कार्ययोजना बनाई है।शादी के सीजन में बारातों के सड़क पर निकलने के कारण जाम के हालात बन जाते हैं।इस लिहाज से बारात को सड़क पर लाने के लिए पुलिस की परमीशन को जरुरी किया गया है।पहले से परमीशन लेने वाले क्षेत्रों में पुलिस पहले से सक्रिय होकर ट्रैफिक के लिए अलग व्यवस्था कर लेगी।वेडिंग प्वाईंट संचालकों को हिदायत दी गई है कि वह शादी के लिए मंडप को बुक करते समय ट्रैफिक नियमों का पालन और शस्त्र लाइसेंस का प्रयोग न करने का प्रमाणपत्र लें।इतना ही शादी में आने वाली गाड़ियों के पार्किंग की बी पूरी जिम्मेदारी वेडिंग प्वाइंट संचालकों की होगी।

उत्तराखंड के सितारों को मिला सम्मान

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यंग उत्तराखंड सिने अवार्ड्स 2017 की सितारों से सजी शाम दिल्ली के सर्वपल्ली आडिटोरियम में सफलता पूर्वक संपन्न हो गयी। इस समारोह में उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद् के उपाध्यक्ष हेमंत पाण्डेय बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे l वायस ऑफ़ इंडिया फेम नेहा खंकरियाल ने अपनी मौजूदगी से कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए। उनकी परफॉरमेंस पर लोग देर रात तक थिरकते रहे, उन्होंने जनता के आग्रह पर एक के बाद एक तीन प्रस्तुतियां पेश की l नेहा ने यंग उत्तराखंड के प्रयास की प्रसंशा की और यूका को सफल आयोजन की बधाईयाँ दी। इस मौके पर उत्तराखंड, दिल्ली और मुंबई के आये कई फ़िल्मी और म्यूजिकल सितारे के मौजूद रहे |

म्यूजिकल अवार्ड्स में सोभन कैंत्युरा को सर्वश्रेष्ठ गीतकार, बीना बोरा को सर्वश्रेष्ठ गायिका और जीतेन्द्र चुनार को सर्वश्रेष्ठ गायक, अजय भारती को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, और हित मेरा डंडा गौ को सर्वश्रेष्ठ एल्बम के सम्मान से नवाजा गया। इस अवसर पर पद्मश्री बंसंती बिष्ट को लाइफटाइम अचिवेमेंट अवार्ड और लोकगायक दीवान कनवाल को गोपाल बाबू गोस्वामी लेजेंड सिंगर अवार्ड से नवाजा गया। गौरतलब है की इस वर्ष जूरी सदस्यों में डॉ सतीश कलेश्वरी, सतेन्द्र पंडरियाल, सुभाष पाण्डेय शामिल थे|

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इस अवसर पर तान्वा ग्रुप दिल्ली, रजनीकांत सेमवाल, प्रीतम भारतवाण, हीरा सिंह राणा, आशु ग्रुप दिल्ली, ब्रह्म कमल संस्था, काश फ्यूजन बैंड की परफॉरमेंस हुई। किशन महिपाल और नेहा खंकरियाल की प्रस्तुतियों ने लोगों को थिरकने पर मजबूर कर दिया।इस अवसर पर मुख्य प्रायोजक दामोदर हरी फाउंडेशन के ट्रस्टी संदीप शर्मा, अम्बे फय्तो एक्स्त्रक्ट्य्स प्रायवेट लिमिटेड के निदेशक श्री हर्षपाल चौधरी, एडमिरल ओपीएस राणा, पूरन नैनवाल, आदि अतिथि के तौर पर मौजूद रहे। आयोजन समिति यंग उत्तराखंड के भाष्कर कांडपाल, नीरज रावत, अनूप डोबरियाल, किशोर रावत, राजीव बेलवाल, सुभाष कांडपाल, सोभा नेगी, विवेक पटवाल, मनोज द्विवेदी आदि मौजूद रहे।

 

मसूरी सड़क हादसे में एक की मौत, 5 लोग गंभीर रुप से घायल

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रविवार को हुए हादसे में कार का संतुलन खोने की वजह से कार गहरी खाई में गिर गई जिसमें सवार लोगों में से एक को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा वहीं बाकी 5 लोग गंभीर रुप से घायल हैं। कार में बैठे यात्री सभी प्रेमनगर देहरादून के रहने वाले है।लोकल लोगों की मदद से कार में फसे लोगों को बाहर निकाला जा सका उसके बाद 108 की इमरजेसी सेवा और लोकल पुलिस मौके पर पहुंचे। एक ऑल्टो कार हाथीपांव के पास अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई है। उक्त सूचना पर पुलिस तथा फायर ब्रिगेड की टीम द्वारा तत्काल मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य प्रारंभ किया। घायल युवक की पहचान रोहित निवासी बनियावाला प्रेमनगर उम्र 21 वर्ष के रूप में हुई है। मृतका व अन्य घायलों के संबंध में जानकारी की जा रही है। बाद जानकारी अग्रिम कार्यवाही की जाएगी।

देहरादून एक एजुकेशन हब की तरह विकसित हो रहा हैं और बगल में पहाड़ों की रानी मसूरी की खूबसूरती देखने के लिए आए दिन इन इंस्टिट्यूट के स्टूडेंट विकेंड यानि का शनिवार और रविवार को मसूरी का तरफ निकल जाते हैं।

जार्ज एवरेस्ट और हाथीपांव दोनो ही डेस्टिनेशन आजकल युवाओं की पहली पसंद बन चुका है। इन दोनों ही डोस्टिनेशन पर जाने को लिए स्टूडेंट अपनी पयंदीदा बाइक, स्कूटर और कार का सहारा लेते हैं।इन दोनों ही डेस्टिनेशन पहुचने के रास्ते सकरो हैं और यही वजह है कि पिछले कुछ सालों मे यह जगह एक्सिडेंट ज़ोन बन चुकी है।

एसएसपी उधमसिंह नगर ने सभी पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों की बैठक ली

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रूद्रपुर। उधमसिंह नगर के चौकी थानों और कोतवालियों में लंबे समय से विचाराधीन मुक़दमे और विवेचनाओं को पूरा ना करने और निष्पक्ष जांच ना करने की शिकायत पर आज एसएसपी उधमसिंह नगर सदानंद दाते ने जनपद के सभी पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों के साथ अपने सभागार में बैठक ली जहा एसएसपी ने अपने अधिनस्तो को जमकर फटकार लगाई।

वहीँ  दाते ने कहा की लापरवाही बरतने से वाले अधिकारी के खिलाफ भी कार्यवाही की जायेगी, अब तक जनपद में पुलिस ने क्या काम किया इससे मतलब नहीं है लेकिन अब पुलिस कर्मियों को बदलना होगा, कार्यों मे तेज़ी लानी होंगी।

वीकेंड पर राफ्टिंग से गुलजार हुई गंगा और ऋषिकेश

ऋषिकेश। राफ्टिंग के नए सीजन ने गंगा में एक बार फिर रौनक बढ़ा दी है, ऋषिकेश का राफ्टिंग जोन पर्यटकों को इस एडवेंचर स्पोर्ट की ओर खीचने लग गया है, जिसके चलते वीकेंड पर पर्यटक राफ्टिंग का लुफ्त उठाने पहुच रहे है। दिल्ली-हरयाणा से काफी संख्या में पर्यटक ऋषिकेश का रुख करते दिख रहे है और राफ्टिंग का रोमांच उठा रहे है। गंगा की लहरों पर सवारी के खेल का नाम है रीवर राफ्टिंग, जिसका अनुभव एक नया रोमांच दे देता है।
उत्तराखंड के साहसिक पर्यटन की पहचान बन गयी रिवर राफ्टिंग अब नयी उचाईयो को छूने लगी है। ऋषिकेश कि 140 राफ्टिंग कम्पनियों ने नए सीजन कि शुरुवात पर पर्यटकों को राफ्टिंग का रोमांच देना शुरु कर दिया, जिसके चलते एक बार फिर गंगा रंग बिरंगी राफ्टों से गुलजार हो चुकी, और यहाँ के व्यवसायी  से बड़ी उम्मीद से देख रहे है। खासकर वीकेंड पर यहाँ देश के कोने-कोने से पर्यटक इस साहसिक खेल का लुफ्त उठाने के लिए लगातार यहाँ पहुंच रहे है।
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उत्तराखंड में, रीवर राफ्टिंग पर्यटन का मुख्य आधार है, जिसने विश्व के नक़्शे पर ऋषीकेश की पहचान बनायीं है। गंगा के रैपिड पूरे विश्व में अपने रोमांच के कारण जाने जाते है। देश-विदेश से आने वाले पर्यटक इस अनुभव को लेना नहीं भूलते और बार -बार यहाँ खिचे चले आते है। लहरों कि सवारी का ये अहसास जिंदगी भर उनको रोमांच कि अनुभूति करता रहता है। ऋषिकेश को राफ्टिंग और कयाकिंग के लिए परफेक्ट जॉन मन जाता है, यही कारण है की इस एडवेंचर से रूबरू होने के लिए हर कोई ऋषिकेश का रुख करता है।

शहरों में वार्ड बढ़ाने के लिए 15 मई तक प्रस्ताव मांगे

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राज्य में शहरी विकास विभाग ने सभी जिलाधिकारियों से 15 मई तक निकायों के सीमा विस्तार मांगे हैं। अप्रैल 2018 में प्रस्तावित निकाय चुनाव 2011 की जनगणना के आधार पर होंगे। निकायों के परिसीमन में 2011 की जनगणना के आंकड़े इस्तेमाल किए जाने से सभी निकायों में वार्ड संख्या बढ़नी तय है। कारण यह है कि बीते सालो में शहरी क्षेत्रों में आबादी तेजी से बड़ी है। खासकर मैदानी क्षेत्रों के निकायों की आबादी इस दौरान कई गुना बड़ी है, जिस कारण यहां वार्ड की संख्या बढ़नी तय है।
शहरी विकास के प्रभारी सचिव अरविंद सिंह ह्यांकी ने सभी जिलाधिकारियों को नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों के सीमा विस्तार और परिसीमन का कार्यक्रम भेज दिया है। आदेश में कहा गया है कि निकायों से सटे ग्रामीण क्षेत्र अब काफी विकसित हो चुके हैं। इन्हें जरूरत के अनुसार निकायों में शामिल किया जा सकता है। स्पष्ट किया गया है कि पिछली बार निकाय चुनाव अप्रैल 2013 मव हुए थे, तब तक 2011 की जनगणना के आंकड़े सावर्जनिक नहीं हुए थे। इस कारण तब 2001 की जनगणना आकड़ो के आधार पर वार्डो का परिसीमन कराया गया। लेकिन 2018 में प्रस्तावित चुनाव के लिए परिसीमन का आधार 2011 की जनगणना के आंकड़े होंगे। क्योंकि 2011 की जनगणना में भी ओबीसी की गिनती नहीं हो पाई है, इसलिए आरक्षण तय करने से पहले सभी निकाय ओबीसी का सर्वे भी करेंगे।
नगर निगम में फिलहाल अधिकतम वार्ड की संख्या 60 है। इसे 80 करने का प्रस्ताव शुक्रवार को कैबिनेट बैठक में आ सकता है। इसके बाद सभी नगर निगमो में वार्ड बढ़ाने का निर्णय ही सकता है। ऋषिकेश को नगर निगम का दर्जा,भीमताल पालिका का सीमा विस्तार व हरिद्वार में डंडेरो को नगर पालिका का दर्जा देने का प्रस्ताव भी कैबिनेट में आ सकता है।

प्राईवेट स्कूलों ने मनमानी की तो होगा एक्शन

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अगर प्राइवेट स्कूलों ने छात्र-छात्राओं से मनमानी फीस वसूलने, कमिशन के लालच में किसी खास दुकना से किताबें खरीदने के लिए बाध्य करने के साथ स्कूलों में एनसीआरटी की पुस्तकों को लेकर सीबीएससी के नियमों का भी पालन नहीं किया तो उन पर सख़्त एक्शन लिया जायेगा।

प्राईवेट स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के मकसद से उधमसिंह नगर के डीएम डाॅ. नीरज खैरवाल ने प्राईवेट स्कूलों के प्रबन्धकों एवं प्रधानाचार्याें के साथ कलक्ट्रेट में बैठक की। उन्होंने प्राईवेट शिक्षण संस्थानों के प्रबन्धकों को हिदायत दी कि शिक्षा के मन्दिर को लूटपाट का अड्डा न बनाया जाय। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी स्कूल के खिलाफ नियमों की अनदेखी या मनमाने तरीके से काम करने की शिकायत को सही पाया गया तो सम्बन्धित संस्थान की मान्यता रद्द करवा दी जायेगी।

जिलाधिकारी ने जिलाधिकारी ने कहा कि प्राईवेट स्कूलों को मनमानी नहीं करने दी जायेगी। शिकायत मिलने पर सम्बधित शिक्षण संस्थान के खिलाफ जिला प्रशासन द्वारा सख्त कार्यवाही अमल में लायी जायेगी। उन्होने ने कहा कि यदि प्राईवेट शिक्षण संस्थान ईमानदारी से अपनी संस्था को नहीं चला पा रहे हैं तो वे अपनी शिक्षण संस्था को बन्द कर दे। जिलाधिकारी ने शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिये वे प्राईवेट स्कूलों से सीबीएससी के नियमों का कडाई से अनुपालन करवाना सुनिश्चित करें। जिलाधिकारी ने प्राईवेट स्कूलों के प्रबन्धकों एवं प्रधानाचार्याें को शिक्षण संस्था चलाने के अलावा अन्य जनहित के कार्याें से जुडने की भी नसीहत दी।