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एक जानवर बना दूसरे जानवर का दुश्मन

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लच्छीवाला रेंज के सत्तीवाला गांव में एक भारी भरकम अजगर ने बन्दर को अपने लपेटे में ले लिया और जबतक बन्दर के दम नहीं निकले उसे अपने शरीर से लपेट क़र रखा।

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अजगर ने बन्दर को पूरा निगलने की कोशिश भी की लेकिन लोगों की भीड़ और शोरगुल होने  पर अजगर बन्दर को छोड़कर जंगल में चला गया।

काशीपुर, पत्थरों और धारदार हथियार से युवक की हत्या

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काशीपुर में अपराधिक वारदातें थमने का नाम नहीं ले रही है। एक बार फिर अपराधियों ने पत्थरों और धारदार हथियार से युवक की दरिंदगी से हत्या कर दी। मामला कोतवाली क्षेत्र का है, बताया जा रहा है कि फोन कॉल आने के बाद घर से निकला युवक वापस नहीं लौटा और जब सुबह उसकी तलाश की गयी तो उसका शव मैदान में पड़ा मिला। किसी ने धारदार हथियार और पत्थरों से कूचकर हत्या कर दी थी।

मोहल्ला अल्ली खां के करबला मैदान में सुबह जब बच्चे खेल रहे थे, तो उन्होंने एक युवक का शव कबाड़ी की दुकान के पास देखा। युवक की शिनाख्त मोहल्ला अल्ली खां की काली बस्ती निवासी 25 वर्षीय सलाउद्दीन पुत्र फइजुल के रूप में की गई। युवक के पेट व सीने में धारदार हथियार से हमला करने और चेहरे पर ईंट पत्थर से मारने के निशान हैं। सूचना पर मृतक के परिजन भी मौके पर पहुंचे। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव कब्जे में ले लिया।

मृतक के परिजनों का कहना है कि रात करीब नौ बजे सलाउद्दीन के मोबाइल पर कॉल आई थी। ढेला पुल से कुछ समय में आने की बात कहकर वह घर से चला गया। देर रात तक जब वह नहीं आया तो लगा की वह चैती मेला घूमने गया होगा। आज सुबह उसकी लाश मिली। सलाउद्दीन कुंडा की एक कंपनी में काम करता था। परिजनों का कहना है कि उसका किसी से कोई विवाद नहीं था।

काशीपुर- मर्दानियों ने शराब के विरोध में किया उग्र आंदोलन

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मर्दानियों का मदिरा के विरोध में प्रदर्शन दिन ब दिन उग्र होता जा रहा है। जहां दुकान हटाने को लेकर अब तक महिलाए सिर्फ नारों और विरोध तक सिमित थी वहीं अब मर्दानियों ने हाथों मे डंडे और पत्थर लेकर विरोध उग्र कर दिया है। काशीपुर में जसपुर खुर्द और मानरोड पर खुली नयी दुकानों को बंद करने के साथ ही महिलाों ने शराब की बोतलें फोड डाली और दुकान पर ताले लगा दिये। यही नहीं कुछ जगहों पर तो महिलाओं ने मार्ग जाम करते हुए डंडो अौर पत्थरों से लोगों को मारना तक शुरु कर दिया।

मर्दानियों का ये रुप देख लोग रास्ता बदलने को मजबूर हो गये। यहां तक की महिलाओं ने मीडिया कर्मियों को भी नहीं बख्शा और मोबाईल तक तोड डाले, किसी तरह से लिय़े गये ये दृश्य ही आपको बता सकते हैं कि मदिरा के खिलाफ मर्दानियों का ये विरोध प्रदर्शन कितना उग्र है।

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अंग्रेजी शराब की दुकान हटाने को लेकर महिलाएं सड़क पर बैठ गईं। उन्होंने सड़क जाम कर जमकर हंगामा काटा। महिलाओं ने दुकान हटाने के लिए एसडीएम को ज्ञापन भी दिया है। उनका आरोप है कि शराब पीकर नशे में लोग गुंडागर्दी करते हैं।मानपुर रोड स्थित आरके मिल के सामने खुली अंग्रेजी शराब की दुकान बंद कराने के लिए मोहल्ला विश्वनाथपुरम की महिलाएं शराब की दुकान के सामने एकत्रित हुईं। उन्होंने सड़क पर बैठकर दुकान बंद कराने के लिए आज करो, अभी करो के नारे लगाकर जमकर हंगामा काटा।

साथ ही महिलाओं ने क्षेत्र में धड़ल्ले से बिक रही कच्ची शराब बंद कराने की भी मांग की। उन्होंने कच्ची शराब बिकवाने के लिए पुलिस पर घूस लेने का आरोप लगाया। कहा कि जब भी कच्ची शराब माफिया के खिलाफ शराब बंद कराने का बीड़ा उठाते हैं तो पुलिस को हफ्ता देने की बात करते हैं।

सूचना पर आबकारी निरीक्षक विष्णु थापा भी मौके पर पहुंची। उन्होंने महिलाओं से बातचीत की, लेकिन महिलाओं ने एक नहीं सुनी। उन्होंने कहा कि कच्ची शराब बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई के साथ ही अंग्रेजी शराब की दुकान बंद कराई जाए। महिलाओं ने चेतावनी दी कि शराब दुकान नहीं हटाई गई तो दुकान में तोड़फोड़ की जाएगी।

लालकुआं, चिट फंड कम्पनी ने लगाया लोगों को लाखों का चुना

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लालकुआं नैनीताल, चिटफंड कम्पनी ने लगाया लोगों को लाखों का चुना और हो गयी फरार। लुभावनी स्कीमों का लालच व धोखे से क्षेत्रवासियों के करोड़ों रुपये लेकर देने में आनाकानी कर रही चिटफंड कंपनी विश्वामित्र प्रोडक्टर कंपनी लिमिटेड की गौला रोड स्थित ब्रांच प्रबंधक को ग्रामीणों ने पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।

इस दौरान ग्रामीणों ने कंपनी से पैसे दिलवाने की मांग करते हुए जमकर हंगामा काटा।गौला रोड पर विश्वामित्र प्रोडक्टर कंपनी लिमिटेड के नाम से चल रही एक चिटफंड कंपनी का कार्यालय खुला हुआ है। जिसके कर्मचारियों ने क्षेत्रवासियों को लुभावनी योजनाओं का लालच देकर करोड़ों रुपया जमा करवा लिया, लेकिन पिछले वर्ष से कंपनी स्कीम पूरी होने के बाबजूद भुगतान करने में आनाकानी करने लगी। यही नहीं कंपनी के कर्मचारियों ने ब्रांच आना भी बंद कर दिया। क्षेत्रवासी कार्यालय के चक्कर काटते-काटते थक चुके थे।

मंगलवार को पीड़ित ग्रामीणों ने ब्रांच प्रबंधक शिव शंभू कुशवाहा को बाजार में पकड़ लिया। कोतवाली पुलिस के हवाले करते हुए कार्यवाही की मांग की। ग्रामीणों ने कहा कि कंपनी के कर्मचारियों ने घर-घर जाकर अच्छी स्कीमों का लालच देकर पचास रुपये से पांच सौ रुपये रोजाना तक की स्कीमों में करोड़ों रुपये जमा किया। अब पिछले तीन महीने से कंपनी वाले कार्यालय नहीं आ रहे। क्षेत्रवासियों ने कोतवाली पुलिस से रकम वापस दिलाने एवं जिम्मेदार जालसाजों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही करने की मांग की। पीड़ित ग्रामीणों ने घोड़ानाला निवासी प्रबंध शिव शंभू कुशवाहा, केके पांडे निवासी राम मंदिर राजीव नगर, प्रदुमन सिंह निवासी बंगाली कॉलोनी, बबीता व कपिल के खिलाफ तहरीर दी।

स्वच्छ भारत जन जागरूकता कार्यक्रम में शामिल हुए सीएम

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मंगलवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत स्वामी दयानंद आश्रम एवं नगर पालिका परिषद मुनि की रेती ढ़ालवाला द्वारा आयोजित स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत जन जागरूकता कार्यक्रम में शामिल हुए।
इस अवसर पर स्वच्छ भारत अभियान को आगे बढ़ाने के लिये शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किये गये स्वच्छ भारत अभियान एवं बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ आज की आवश्यकता है। इसी प्रकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के साथ जब राजनैतिक इच्छाशक्ति जुड़ी तो पानीपत में एक वर्ष के भीतर महिला पुरूष अनुपात में एक बड़ा सुधार देखने को मिला।
उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत हमारे साइंटिस्ट सस्ते एवं आसान तरीकों का विकास कर रहे है। ताकि स्वच्छ भारत अभियान को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि कूड़े में एंजाइम छिड़कने के कुछ समय बाद ही कूड़ा खाद बनने लगता है। जिसका उपयोग हम खेतों में खाद्य के रूप में कर सकते है। उन्होंने कहा कि इसकी शुरूआत सुसवा नदी से करने जा रहे हैं। इसमें गंगोत्री, यमुनोत्री, बद्रीनाथ और केदारनाथ को भी जोड़ा जायेगा।
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचन्द अग्रवाल, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, स्वामी आत्मानंद, स्वामी विश्वेश्रानंद आदि उपस्थित थे।

खनन खुलने से प्रदेश की अर्थ व्यवस्था को लगेंगे पंख

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उत्तराखंड खनिज संपदा से संपन्न प्रदेश है। उच्च न्यायालय द्वारा खनन और चुगान पर रोक लगाई पर उच्चतम न्यायालय ने इसे खोल दिया। उत्तराखंड खनिज से संपन्न प्रदेश है। इसका प्रमाण अंग्रेजों द्वारा कराया गया सर्वेक्षण है।

उत्तराखंड 2000 में राज्य बनने के बाद आर्थिक रूप से संपन्न नहीं हो पाया। इसका कारण यहां के क्षमता का दोहन न हो पाना है। अकेले अल्मोड़ा में स्टोन क्रशर के अनियमिताओं पर 06 लाख 93 हजार 570 रुपये का जुर्माना प्रशासन द्वारा लगाया गया। इसी तरह के एक नहीं दर्जनों घटनाएं हुई हैं। सरकार बदलने के बाद ही खनन क्षेत्र सरकार का खजाना भरने वाला साबित होने लगा है।
यह आज की स्थिति है लेकिन जानकार बताते हैं कि चूना पत्थर गढ़वाल के देहरादून, टिहरी, पौड़ी, चमोली में पाया जाता है। यही स्थिति कुमाऊ मंडल के अल्मोड़ा पिथौरागढ़ और नैनीताल हैं जहां चूना पत्थर मिलता है, जहां तक मार्बल पाए जाने की बात है उसके लिए दो ही जिले महत्वपूर्ण है इनमें देहरादून और टिहरी शामिल है।
यही स्थिति मैग्नेसाइट की है गढ़वाल मंडल के चमोली में मैग्नेसाइट का विशाल भंडार है। इसी प्रकार राज्य में खड़िया देहरादून, टिहरी ,पौड़ी, चमोली, नैनीताल जिले पाए जाते हैं। टिहरी, नैनीताल में भण्डार पाए जाते हैं। डोलोमाइट देहरादून, पिथौरागढ़ में पाया जाता है। सेलखड़ी देहरादून,टिहरी तथा पौड़ी गढ़वाल जिले में पाया जाता है, जिसका उपयोग रासायनिक उर्वरक के रूप में किया जाता है। गंधक की खोज सर्वप्रथम 1957 में चमोली,नंदप्रयाग, रूपगंगा घाटी में पाया जाता है।
जिप्सम टिहरी,पौढ़ी, नैनीताल तथा अल्मोड़ा में पाया जाता है,इसका उपयोग सीमेंट,अमोनियम सल्फेट उत्तराखंड में लोहा नैनीताल ,पौढ़ी ,टिहरी तथा अल्मोड़ा जिले में पाए जाते हैं। राज्य में तांबा चमोली,पौड़ी, टिहरी, देहरादून, नैनीताल, अल्मोड़ा व पिथौरागढ़ जिले में पाया जाता है। अल्मोड़ा के झिरोली गांव,बागेश्वर थेलीपाटन में पाया जाता है। ग्रेफाइट अल्मोड़ा,पौड़ी गढ़वाल तथा नैनीताल व देहरादून में ग्रेफाइट पाया जाता है। सोना शारदा व रामगंगा के बालू में पाया जाता है, इसके अतिरिक्त अलकनंदा और पिंडर के बालू में मिलता है।
यूरेनियम राज्य के टिहरी गढ़वाल जिले में यूरेनियम की उपलब्धता के संकेत प्राप्त है। जल विद्युत योजनाएं बनीं या प्रस्तावित हुईं, केवल उन स्थानों का सर्वेक्षण हुआ, लेकिन उससे राज्य के पहाड़ों में कौन सी धातुएं तथा खनिज हैं,उसकी पूरी जानकारी नहीं प्राप्त हुई। भारत सरकार के इस क्षेत्र के सर्वेक्षण केवल सतही थे। उनसे सरसरी तौर पर केवल इतना पता लग सका कि उत्तराखंड के पहाड़ों में कौन-कौन से मुख्य खनिज हैं।
02 सौ वर्ष पूर्व जब यहां के निवासी अपने उपयोग के लिए तांबा गला कर बर्तन बनाते थे, जो अब तक इस्तेमाल हो रहे हैं। उस समय राज्य में बहुत बड़े और घने जंगल थे। पेड़ काटने पर कोई प्रतिबंध नहीं था। गांव वाले तब पेड़ काट उन्हें भट्टियों में जला, तांबें-लोहे के अयस्क गला उनसे अपनी आवश्यकता के बरतन खेती के ओजार तथा अन्य वस्तुएं बना लेते थे, लेकिन अब पेड़ काटना अपराध है ओर राज्य में बिजली इतनी नहीं है कि उसके द्वारा खनिजों को गलाया जा सके।
भारतीय भूगर्भ सर्वेक्षण विभाग ने अपनी 125वीं सालगिरह 1976 में मनाई थी। उस अवसर पर उसने उत्तराखंड के कुछ जिलों में मिली धातुओं तथा खनिजों पर बहुत छोटेए संक्षिप्त विवरण-पत्र प्रकाशित किए थेए जिनमें इन पहाड़ों में पाई जाने वाली चट्टानों को तीन भागों में बाँटा था। इसके मध्य की चट्टानों में ताँबा, सीसा तथा जस्ता मिलने की बात कही गई थी।
उस समय के दो ही विवरण पत्र मिल पाए हैं,चमोली तथा पौड़ी गढ़वाल जनपदों के जिनमें कहा गया कि चमोली जि़ल में चार प्रकार की चट्टानें पाई गई। जिनमें कुछ खनिजों के पाए जाने का विवरण है। इसके उत्तर में स्फ टिक पाए गए तथा जोशीमठ, पीपलकोटी, पोखरी तथा गौचर क्षेत्रों में ताँबा, सीसा तथा जस्ता मिला। दो शताब्दियों पूर्व मध्य हिमालय अपने तांबे तथा लोहे के लिए प्रसिद्ध था।
यहां अंग्रेजी राज्य के आरंभ 1815 तक तांबे की खानों में अच्छा काम होता था। गढ़वाल जिले में अभ्रक, गंधक, ग्रेफाइ़, जिप्सम, नीलम, विजोत्रा, शिलाजीत, गृह पाषाण जैसे अधातुक खनिजों को पाए जाने की संभावना थी। अच्छा अजबेस्तों, ऊखीमठ से कुछ दूर पर मिला था। लोहे के कारखाने की ईंटों को बनाने में वह प्रयोग होता था।
यहां सीसे की भी प्रचुरता थी लेकिन खानै दुर्गम स्थानों में थीं। यहां की नदियों के बालू में सोने के कण मिलते थे। अलकनंदा पिंडर ओर सोनगढ़ के अतिरिक्त लछमन झूला तक तथा रामगंगा की रेत में भी सोने के कण मिलते थे। धोणी लोग रेते की धुलाई कर सोने के कण निकाल लेते थे। रेत धुलाई का काम जनवरी से अप्रैल तक होता थाए जिसके लिए 25 रुपए शुल्क देना पड़ता था। धोणिए प्रति वर्ष पाँच.सात तोला सोना निकाल लिया करते थे। सोने का दाम तब 25 रुपये तोला था।
सचिव खनन शैलेश बगोली ने कहा कि खनन पर लगी रोक हटने से खासी राहत मिली है। इससे अब रुके निर्माण कार्य तेजी पकड़ेंगे। अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए सख्त नियम बनाए जा रहे हैं। विभाग इस तरह के कदम उठाएगा कि प्रदेश में कहीं भी अवैध खनन नहीं हो सकेगा।
संसदीय कार्य मंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि प्रदेश में अवैध खनन पर रोक के लिए सरकार वर्ष 2001 की खनिज चुगान नीति को लागू करेगी। खनन पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद प्रकाश पंत ने कहा कि उच्च न्यायालय ने राज्य में पिछले 05 सालों में हुए धुआंधार अवैध खनन को रोकने के लिए निर्णय दिया था, लेकिन इससे हर तरह का खनन रुक गया। उच्चतम न्यायालय से इस मामले में सरकार को राहत मिल गई है। उन्होंने कहा कि सरकार पर्यावरण संरक्षण करते हुए उप खनिज चुगान के लिए नीति लाने जा रही है ताकि अवैध खनन पर पूरी तरह अंकुश लग सके।

ऋषिकेश के जयराम आश्रम मे धूमधाम से मनाई गयी हनुमान जयंती

मंगलवार को हनुमान जयंती के मौके पर ऋषिकेश के मंदिरों में सुबह से ही हनुमान जी की पूजा कर छप्पन भोग लग रहे है ।ऋषिकेश के जयराम आश्रम में धूमधाम से हनुमानजयंती मनाई गई। दूर-दूर से श्रद्धालु भगवान के दर्शनों के लिए पहुंचे।

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जानकारों का कहना है की भगवान हनुमान के दर्शनों से सभी की मनोकामना पूरी होती है, इसके साथ-साथ श्रधालुओं ने भगवान से की चार धाम के सकुशल होने की कामना की। इस अवसर पर नगर में  भव्य शोभा यात्रा निकली गयी , वहीं जयराम आश्रम के अद्यक्ष ने चार धाम यात्रा पर सभी देश वासियो का आव्हान किया की वे उत्तराखंड आये और देवस्थान का दर्शन करे।

भारत-नेपाल के बीच बहुत नजदीकी रिश्ता: सीएम

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भारत-नेपाल के बीच सुरक्षा एवं रक्षा संबंधी मामलों पर आज दो दिवसीय संगोष्ठी का समारोहपूर्वक शुभारंभ हुअा। भारतीय वन अनुसंधान केन्द्र के सभागार में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग परिषद और भारत नीति अनुसंधान प्रतिष्ठान, नेपाल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस गोष्ठी का उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत और भारत के पूर्व विदेश सचिव शशांक तथा नेपाल के पूर्व विदेश सचिव मधु रमण आचार्य ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर शुभारंभ किया।

मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री उत्तराखंड त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने अपने संबोधन में कहा कि हमें यह बिल्कुल नहीं लगता कि नेपाल दूसरा राष्ट्र है। उत्तराखंड से तो इसका एक विशेष रिश्ता है। ऐसा रिश्ता जो बहुत नजदीकी है। उन्होंने कहा कि यहां की बेटी नेपाल में और नेपाल की बेटियां यहां ब्याही जाती हैं। उन्होंने कहा कि नेपाल सांस्कृतिक रूप से भी हमसे प्रगाढ रिश्ता रखता है। संस्कृति के यही रिश्ते इतने गहरे हैं कि दीर्घ काल तक यह बने रहेंगे।

श्री रावत ने कहा कि सुरक्षा और रक्षा के मामले में भी हमारे रिश्ते बहुत मजबूत हैं। लेकिन हम दोनों के बीच तीसरे लोग विध्न डालने की कोशिश करते हैं। उन्होंने चीन का नाम बिना लिए कहा कि यह तीसरे लोग लगातार हमें तोड़ने की कोशशि करते हैं। मगर वह इसमें कभी सफल नहीं हो सकते, क्योंकि हमारे रिश्ते बहुत मजबूत हैं।

रावत ने उम्मीद जताई कि इस संगोष्ठी के माध्यम से आम जन मानस तक हमें अपनी बात पहुंचानी होगी तभी इस गोष्ठी के दूरगामी परिणाम होंगे। उन्होंने कहा कि चाहे उत्तराखंड हो या नेपाल दोनों व्यावसायिक और सुरक्षा की दृष्टि से बलिदान और समर्पण की भावना लिए हुए हैं दोनों के बीच का जो विश्वास है उस पर पूरी दुनिया भी विश्वास करती है। इसीलिए दोनों देशों के बीच एकता का वैश्विक स्तर के लिए भी बहुत आवश्यक है।

 

सलमान ने लॉन्च की आशा पारेख की बायोग्राफी

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कल शाम मुंबई के एक पांच सितारा होटल में आयोजित एक भव्य समारोह में सलमान खान ने बीते दौर की अभिनेत्री आशा पारेख की बायोग्राफी ‘आशा पारेख- द हिट गर्ल’ का विमोचन किया। इस मौके पर बॉलीवुड की कई बड़ी हस्तियों ने इस आयोजन में हिस्सा लिया।

आने वाले खास मेहमानों में धर्मेंद्र, जीतेंद्र, वहीदा रहमान, हेलन, अरुणा ईरानी, इमरान खान, जैकी श्रॉफ, रिचा चड्ढा के अलावा संगीतकार आनंद जी और प्यारेलाल प्रमुख रहे। आशा पारेख की इस बायोग्राफी का प्रस्तावना सलमान खान द्वारा लिखा गया है। इस मौके पर अपने संबोधन में सलमान ने इस बात पर जोर दिया कि पुरानी पीढ़ी के कलाकारों में अब भी एक दूसरे के प्रति लगाव और प्यार है। नई पीढ़ी पर कटाक्ष करते हुए सलमान खान ने कहा कि हमारे पास एक दूसरे के लिए वक्त नहीं हैं और न हम वक्त निकालना चाहते हैं। सलमान ने साफ कहा कि नई पीढ़ी में लगाव और प्यार की कमी महसूस होती है।
अपने जीवन पर बायोग्राफी लिखे जाने पर सलमान ने कहा कि ये बहुत हिम्मत का काम है और उनके अंदर इतनी हिम्मत नहीं है। सलमान ने कहा कि ये बायोग्राफी उनकी पसंदीदा है।
आशा पारेख की इस बायोग्राफी से पहले हाल ही में शत्रुघ्न सिन्हा, ऋषि कपूर और फिर करण जौहर की बायोग्राफी जारी हुई हैं। आने वाले वक्त में जीतेंद्र, जैकी श्रॉफ और वहीदा रहमान पर बायोग्राफी आने की चर्चाएं हो रही हैं।

उत्तराखंड में टी-टूरिज्म, दो नए चाय बागानों के साथ

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उत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ाने के लिए नई सरकार आए दिन अलग अलग तरह की योजनाएं बना रहीं है।इस कड़ी में आगे बढ़ते हुए उत्तराखंड टी डेवलपमेंट बोर्ड ने एक नई पहल की हैं।

उत्तराखंड टी डेवलेपमेंट बोर्ड ने अभी जल्दी ही अपना नया लोगो और ब्राडिंग के लिए नए आयामों की शुरुात की है जिसके साथ चाय की बागानों वाले क्षेत्र में भी इजाफा होगा। इन चाय की बागानों से दो फायदें होंगे, एक तो पर्यटक बागानों की खूबसूरती निहारने आऐंगे,  दूसरा टी-टूरिज्म को भी इससे काफी बढ़ावा मिलेगा।

अब तक पहाड़ी राज्य में घोड़खाल और कौसानी में चाय के बगीचें थे जिससे पर्यटन विभाग को अच्छा फायदा मिलता रहां लेकिन अब यूटीडीबी के नए निर्णय में टी-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए, दो नये चाय बागानों के खुलने की राह नज़र आ रही है। चंपावत और चमोली जिले के नौटी गांव में नए टी-स्टेट बनायें जायेंगे।

हालांकि उत्तराखंड के बागानों की खुशबूदार चाय की पत्तियां सभी के मन को भाती हैं और सन 1835 से अंग्रेंजों की पसंदीदा चाय भी यही उगायी जाती थी, लेकिन कुछ कमियों की वजह से यहां की मशहूर चाय एक ब्रांड की तरह अपनी छाप नहीं छोड़ सकी जिसकी वजह कहीं ना कहीं राजनितिक मतभेद और खराब मार्केटिंग प्लान रहा है।

यूटीडीबी के डायरेक्टर बीएस नेगी ने बताया कि फिलहाल हमें अपनी चाय को भारत से बाहर विदेशों में एक्सपोर्ट करने का लाइसेंस मिल गया है और अब हमारे पास बाहरी देशों से उत्तराखंड चाय के बारे में काफी लोग पूछताच कर रहे हैं। बीएस नेगी ने बताया,  ‘हमने चाय के लिए जीआई(गवरमेंट आफ इंडिया) मार्क के लिए अप्लाई कर दिया है। हम आशा करते हैं कि आने वाले समय में चाय के बागानों के माध्यम से बड़े पैमाने पर टी-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा और चंपावत और चमोली में हमारा प्रयास सफल रहेगा। फिलहाल हमारी जरुरत नए सेटअप के लिए फंड मिलना है जिसकी मैं सरकार से उम्मीद करता हूं कि जल्दी ही मिलेगी।’