पीएम मोदी ने विडियो कांफ्रेंसिंग से की समीक्षा
उत्तराखंड को मिली आईटी की सौगात
नेशनल हाइवे को स्टेट हाइवे करने के फ़ैसले को कोर्ट में चुनौती
उत्तराखण्ड सरकार द्वारा राजकीय राजमार्ग (स्टेट हाईवे) को जिला मार्ग (डिस्ट्रिक्ट रोड) में परिवर्तित करने वाले 8 अप्रैल 2017 के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। बागेश्वर निवासी समाजसेवी और पी.यू.सी.एल.के उपाध्यक्ष नंदा बल्लभ भट्ट ने जनहित याचिका डालकर राज्य सरकार को दी है चुनौती।
याची ने न्यायालय से प्रार्थना की है कि पूर्व के सभी राजमार्गों और अब जिला मार्गों से शराब की दुकान व् बारों को हटाने के निर्देश दें । साथ ही याची ने न्यायालय से ये भी मांग की है कि वो मध्य निषेध विभाग को सक्रीय करते हुए नशे से होने वाली दुश्वारियों के बारे में बताकर इससे पीड़ित लोगों का पुनर्वास करें । मामले में कल यानी 27 अप्रैल को उच्च न्यायालय में होगी सुनवाई ।
लाखों की डकैती के साथ डकैतों ने उतारा एक मौत के घाट
काशीपुर से सटे ग्राम पसियापुरा स्थित, विकास नगर कॉलोनी में देर रात यानी आज सुबह तड़के हथियारबंद बदमाशों ने एक घर में घुसते हुए डकैती को दिया अंजाम। डकैतों ने लगभग 13 से 14 लाख रुपए की नगदी पर हाथ किया साफ, यही नहीं हथियारबंद बदमाशों ने मकान स्वामी पृथ्वी सिंह (45 वर्ष) द्वारा जब वारदात का विरोध किया गया तो बदमाशो ने मकान स्वामी को मार कर उतारा मौत के घाट।
इस दुस्साहसिक घटना को अंजाम देते हुए डकैतों ने ना केवल जमकर तांडव मचाया बल्कि पृथ्वी सिंह की युवा पुत्री को अपहरण कर ले गए। इस सनसनीखेज वारदात से जहां क्षेत्र में दहशत का माहौल है, वही क्षेत्रीय पुलिस सहित जनपद उधमसिंह नगर की पुलिस में मचा हड़कंप। SSP उधमसिंहनगर सहित आला अधिकारियों ने घटनास्थल पर पहुंच कर किया मौका मुआइना।
गर्मी के चरम पर होते ही याद आई बिजली की मरम्मत
यूं तो राजधानी के नाम पर देहरादून शहर में नई-नई योजनाएं शुरु हो रही हैं लेकिन जो समस्या पहले से है उसकी तरफ किसी का ध्यान भी नहीं जा रहा। गर्मी से राहत पाने के लिए लोग सड़कों पर कम निकलकर अपने अपने घरों में घुस रहें और सड़कें और बाज़ार उन लोगों से भरा है जिनका बाहर निकलना जरुरी है।
जी हां, गर्मी का आलम ही कुछ ऐसा है, तापमान 37 डिग्री पार कर चुका है, लोग गर्मी से पस्त है और इसी गर्मी में ऊर्जा निगम ने बिजली की लाईनों और उपकरणों की मरम्मत का काम शुरु कर दिया है।शहर के लगभग हर क्षेत्र में दिनभर में कई घंटे बिजली की कटौती हो रही है। अब सवाल यह उठता है कि जो लोग गर्मी से परेशान होकर घरों में थे वो कहां जाएं और यह मरम्मत इस वक्त ही क्यों जब तापमान अपने चरम पर है? आखिर ऊर्जा निगम को इस बात की खबर तो रही होगी की बिजली के उपकरणों की मरम्मत होनी है तो इस वक्त का इंतजार क्यों हो रहा था?
शहर के लगभग हर क्षेत्र में बिजली सुधार के नाम पर ऊर्जा निगम ने अलग-अलग स्थानों पर लाईनों को सही करना, ट्रांसफार्मर की मरम्मत, सेक्शेनाइजर और सर्किट ब्रेकर लगाने आदि का कार्य शुरु कर दिया है।अब मरम्मत तो बिजली की हो रही है पर चोट शहर के निवासियों को लग रही और यह चोट है गर्मी की चोट। घंटों लोगों को बिजली कटौती से जूझना पड़ रहा है।बीते कुछ दिनों से शहर के बड़े हिस्से में 7-8 घंटे तक की बिजली गुल रहने लगी है।
इस बिजली की मार से परेशान हैं नेशविला रोड स्थित चुक्खुवाला मोहल्ला भी है जहां कभी-कभी बिजली की कटौती लोगों को उठाने वाले अलार्म का काम कर रही है। सुबह आंख खुलने से पहले बिजली गुल, फिर वापस आने का कोई पता नहीं।चुक्खुवाला कालोनी की अर्पिता जो डीएवी पीजी कालेज में बीएसई की छात्रा है वह बताती हैं, आज कल मेरे फाईनल एग्जाम चल रहें है लेकिन बिजली की कटौती ने नाक में दम कर दिया हैं।सुबह से लेकर रात तक दिन भर किश्तों में बिजली कटती है जिसकी वजह से पढ़ाई में बहुत नुकसान होता हैं, साथ ही गर्मी से बहुत उलझन होती है। अर्पिता जैसी बहुत सी लड़कियां इस कालोनी में रहती है जिनके एग्जाम चल रहे लेकिन बिजली की कटौती से हर कोई परेशान है।
ऊर्जा निगम के निदेशक एवं प्रवक्ता पी.सी. धयानी ने बताया कि आगे आने वाले बरसात और आंधी तूफान में पेड़ की टहनियों के तारों पर गिरने की आशंका के चलते टहनियों की छटाई का काम भी चल रहा है।इसके अलावा कुछ और जरुरी काम भी चल रहे हैं।पेड़ की काट-छांट का काम बरसात से पहले की तैयारी है लेकिन गर्मी से पहले की तैयारी के नाम पर ऊर्जा निगम ने कुछ नहीं किया और अब शहर के लगभग 90 प्रतिशत इलाकों में घंटों बिजली कटौती कर मरम्मत का काम चल रहा है।
आने वाले दिनों में बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं जहां बिजली की कटौती होगी, और इन इलाकों का शेड्यूल कुछ इस तरह हैः
- 27 अप्रैलः दून विहार, जाखन, भागीरथीपुरम, मालसी गांव, अंसल ग्रीन,सिनोला,मसूरी डायवर्जन, आदि जगहों पर 11 बजे से चार घंटे बिजली कट सकती है।
- 28 अप्रैलः नालापानी रोड,सीमेंट रोड,खटीक मोहल्ला,अंबेडकर कालोनी,वर्कशाप स्ट्रीट,ओल्ड डालनवाला,डीएवी कालेज रोड,करनपुर मार्केट,राजपुर रोड,नेशविला रोड,अजंता एन्क्लेव,ओल्ड सर्वे रोड मे 11 बजे से शाम तीन बजे तक बिजली की कटौती।
शहर में दिन-रात तो पहाड़ पर केवल 6 घंटे खुलेगा ठेका
प्रदेश में जहां एक ओर महिलाएं शराब की दुकानों का जबरदस्त विरोध कर रही हैं वहीं दूसरी ओर सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शराब माफियाओं पर लगाम लगाने के लिए एक और फैसला लिया है। सीएम ने कहा कि शराब की दुकानों को छह घंटे तक खोलने का आदेश मैदानी जनपदों पर लागू नहीं होगा। मतलब अब शहरों में 12 घंटे तो पहाड़ों में केवल 6 घंटे खुलेंगे ठेके।
यह फैसला रोकेगा शराब की तस्करी ः
गौरतलब है कि प्रदेश में शराब की दुकानों का महिलाएं पुरजोर विरोध कर रही है। एक तरफ महिलाओं का तेवर देखकर शासन-प्रशासन में खलबली मची हुई है। वहीं सीएम ने शराब माफियाओं पर लगाम लगाने के लिए यह फैसला लिया है।उत्तराखंड सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया है ताकि शराबबंदी से पड़ोसी राज्यों से शराब की तस्करी न बढ़ने पाए। छह घंटे तक शराब की दुकानें खोलने का आदेश सिर्फ पर्वतीय जनपदों के ठेकों पर लागू होगा। यहां ठेके दिन के वक्त छह घंटे के खुलेंगे।
आपको बता दैं कि सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रदेश में आंशिक शराबबंदी लागू करने के लिए कुछ दिन पहले शराब की दुकानों को छह घंटे तक खोले जाने की घोषणा की थी। सीएम ने कहा था कि उत्तराखंड में शराब की दुकाने दोपहर बाद 3 बजे से रात 9 बजे तक खुलेंगी। विभागीय मंत्री और अधिकारियों से विचार-विमर्श के बाद इस योजना में बदलाव कर दिया गया है।सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बताया कि यह आदेश अब सिर्फ प्रदेश के पर्वतीय जनपदों में स्थित शराब के ठेकों पर लागू होगा। पर्वतीय जनपदों में ठेके दिन के वक्त छह घंटे के लिए खुलेंगे। शाम होते ही ठेकों को बंद कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि जनभावनाओं और सड़क दुर्घटना को कम करने के लिहाज से यह फैसला लिया गया है। उत्तराखंड सरकार की मंशा धीरे-धीरे शराबबंदी लागू करने की है। गौरतलब है कि उत्तराखंड में जगह-जगह महिलाएं लामबंद होकर शराब की दुकानों का विरोध कर रही हैं। महिलाओं में शराब की दुकानों को लेकर आक्रोश इस कदर बढ़ चुका है कि महिलाओं ने बीते दिनों शराब की दुकान को आग के हवाले कर दिया वहीं। शराब की दुकानों पर जमकर पथराव हुआ। प्रदेश के कई हिस्सों में महिलाएं शराब की दुकान की रात को भी निगहबानी कर रही है। महिलाओं ने प्रशासन से दो टूक कहा कि वह अपने क्षेत्रों में शराब का संचालन नहीं होने देंगी।
विदेशों में लगेगी चम्पावत की चाय की चुस्की
जिले में उत्पादित चाय अब विदेशी प्यालों की शान बढ़ा रही है। 18 ग्राम पंचायतों की 202 हेक्टेयर जमीन पर इसकी फसल लहलहा रही है। पिछले दो सालों में यहां 80 हजार किलो चाय पत्ती का उत्पादन हुआ है। इससे ग्रामीणों की आय बढ़ने के साथ ही रोजाना करीब चार सौ श्रमिकों को भी रोजगार मिल रहा है।
दो सौ साल पहले अंग्रेजों ने चम्पावत क्षेत्र में चाय की खेती शुरू की थी। 1995-96 में टी-बोर्ड के गठन के बाद पर्वतीय क्षेत्रों में चाय विकास योजना को लागू करने के प्रयास शुरू हुए। जनपद की सिलंगटाक ग्राम पंचायत में चाय बागान की शुरुआत की गई। 2004 में इस दिशा में काम और आगे बढ़ा।
ग्राम पंचायतों में काश्तकारों की भूमि पर चाय बागान लगाने के काम में तेजी आई। 2007 में छीड़ापानी में नर्सरी बनने के साथ ही इसके रोपण में तेजी आ गई। वर्तमान में सिलंगटाक, छीड़ापानी, मुड़ियानी, मौराड़ी, मझेड़ा, चौकी, च्यूरा खर्क, भगाना भंडारी, नरसिंह डांडा, कालूखाण, गोसनी, फुंगर, लमाई, चौड़ा राजपुर, खेतीगाड़, बलाई आदि ग्राम पंचायतों की 202 हेक्टेयर भूमि पर चाय के बागान हैं।
टी-बोर्ड के स्थानीय प्रबंधक डैसमेंड बताते हैं कि यहां चाय की नर्सरी तैयार होने से चार सौ से अधिक लोगों को प्रतिदिन रोजगार मिल रहा है। ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना के तहत भी इसकी खेती को प्रोत्साहित करने से अब कई किसान सामने आने लगे हैं। टी बोर्ड द्वारा चाय के पौधों के रोपण के साथ ही तीन साल तक लगातार इनकी देखभाल की जाती है। सात साल बाद भू-स्वामी को पूरा स्वामित्व दे दिया जाता है। पिछले दो वर्षों में यहां 80 हजार किलो एक्सपोर्ट क्वालिटी की जैविक चाय का उत्पादन हुआ। इस वर्ष साल 50 हजार किलो उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
उत्तराखंड टी-बोर्ड इस चाय पत्ती को फिलहाल 1200/- रुपये प्रति किलो की दर से बेच रहा है। इस जैविक चाय की मार्केटिंग कोलकाता में होती है। पैरामाउंट मार्केटिंग कंपनी इस चाय को जर्मनी, इंग्लैंड सहित कई यूरोपीय देशों को निर्यात करती है। टी बोर्ड के निदेशक डॉ. बीएस नेगी का कहना है कि चाय की खेती को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों में इसका विस्तार हो रहा है। मनरेगा के जरिए भी इसके बागान तैयार करने को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
मसूरी में नाबालिग के साथ बलात्कार
उत्तराखंड के मसूरी शहर की एक नाबालिग से बलात्कार की घटना सामने आई है। पीड़िता के परिजनों ने कोतवाली में लिखित तहरीर देकर आरोपी युवक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
12वीं क्लास में पढ़ने वाली पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उसके जान पहचान के एक युवक ने बाइक मे उसे घर छोड़ने के लिए कहा। इसके बाद युवक ने उसे बहला फुसलाकर कोल्ड ड्रींक में नशीला पदार्थ मिलाकर किशोरी को पीला दिया, जिससे वह बेहोश हो गई। इसके बाद उसने किशोरी के साथ बलात्कार किया और नाबालिग को जंगल में छोड़कर खुद फरार हो गया।
युवती के घरवाले उसे ढ़ूढते हुए घटनास्थल पर पहुंचे और जब युवती को होश आया तो उसने अपनी आपबीती परिवार वालों को सुनाई जिसके बाद परिजनों ने कोतवाली में लिखित तहरीर में दुष्कर्म का आरोप लगाया है।
एसआई बीडी जुयाल ने कहा कि इस घटना के बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी युवक दीप राज को गिरफ्तार कर लिया है और आईपीसी 376, 328 और चाईल्ड सेक्शुल हरासमेंट के अंर्तगत 3/4 के तहत मुकदमा दर्ज कर दिया गया है। पीड़िता को मेडिकल के लिए देहरादून भेजा गया है।
प्रदेश सरकार को शराब बंदी पर राहत, याचिका खारिज
शराब की दुकानें बंद करने की मांग को लेकर महिलाओं के प्रदर्शन के बाद जनहित याचिका ने सरकार की मुसीबतें बढ़ा दी थीं। हालांकि सोमवार को हाई कोर्ट ने उत्तराखंड में शराबबंदी लागू करने की मांग की जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। इससे सरकार को बड़ी राहत मिली है।
राज्य में शराब की दुकानों के खिलाफ जगह-जगह मातृशक्ति सड़क पर है। महिलाओं के रुख को देखते हुए प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष सरिता आर्य ने भी प्रदेश में शराबबंदी लागू करने की मांग की है। इधर, दो माह पहले हाई कोर्ट ने उत्तराखंड के चारधाम वाले तीन जिलों उत्तरकाशी, चमोली व रुद्रप्रयाग में शराबबंदी का आदेश पारित कर दिया।
इस आदेश के बाद भतरौंजखान निवासी, समाजसेवी प्रमोद नैनवाल ने भी जनहित याचिका दायर कर इस फैसले को पूरे उत्तराखंड में लागू करने का आदेश पारित करने का आग्रह किया था। याचिका में कहा गया था कि शराब की बिक्री की वजह से जनस्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।
साथ ही सामाजिक तानाबाना बिगड़ रहा है। सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता, परेश त्रिपाठी ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि उत्तराखंड में आबकारी अधिनियम के तहत शासनादेश जारी किए गए हैं। राज्य सरकार द्वारा इस मामले में अपने अधिकारों का प्रयोग किया गया है।
वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति वीके बिष्ट व न्यायमूर्ति एसके गुप्ता की कोर्ट ने मामले को सुनने के बाद याचिका को खारिज कर दिया। यहां उल्लेखनीय है कि हाई कोर्ट के तीन जिलों में शराबबंदी के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे दिया है।
गुस्साये छात्र ने कर्मचारियों पर छिड़का पेट्रोल
कुमाऊं विवि में बीए प्रथम व्यक्तिगत परीक्षा का फार्म नही मिलने पर युवक ने परीक्षा नियंत्रक, प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी के ऊपर पेट्रोल उड़ेल दिया। साथ ही आत्मदाह की कोशिश कर डाली। जिससे विवि प्रशासनिक भवन में हड़कंप मच गया है। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। विवि की ओर से मल्लीताल कोतवाली में तहरीर सौंप दी है।
वाकिया दोपहर 1 बजकर 40 मिनट का है। हल्द्वानी तिकोनिया निवासी, सुदर्शन परमार, विवि पहुंचा और परीक्षा फार्म मांगने लगा। जब परीक्षा नियंत्रक ने तीन अप्रैल को खरीदने व 6 अप्रैल को जमा करने की अंतिम तिथि बीतने की बात की तो वह आग बबूला हो गया और पेट्रोल छिड़क दिया।
सूचना पर कोतवाल अरुण कुमार, एसएसआई कश्मीर सिंह व अन्य पुलिस कर्मी विवि पहुंचे और युवक को पकड़कर थाने ले आये। परमार के अनुसार वह कई दिन से फार्म के लिए विवि आ रहा था। वह इंटर पास की अंकतालिका भी लाया था, मगर नहीं दिया। उसने विवि पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप भी लगाया।
इधर, मामले की सूचना पर तमाम छात्र नेता कोतवाली व विवि कर्मी पहुंच गए। कर्मचारी संघ संरक्षक एनएस रजवार ने कहा कि जब तक गोपन विभाग में सुरक्षा नहीं होगी, कोई कर्मचारी काम नहीं करेगा।


























































