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उत्तराखंड को मिलेगी हाॅस्पिटेलिटी युनिवर्सिटी: पीयूष गोयल

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रविवार को सीएम कैम्प कार्यालय में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत व केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल की बैठक हुई। बैठक में राज्य के विकास को लेकर चर्चा हुई और तय किया गया कि:

  • उत्तराखंड में हाॅस्पिटेलिटी यूनिवर्सिटी की स्थापना की जाएगी।
  • टिहरी बांध की ऊंचाई 825 मीटर तक सीमित रखी जाएगी।
  • प्रतापनगर में डोबरा-चांटी पुल के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर की कंसल्टेंसी से डिजायन तैयार करवाया जाएगा। पुल की लागत का 50 प्रतिशत टीएचडीसी व 50 प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।
  • राज्य में रूफ-टाॅप सोलर को और अधिक प्रोत्साहित किया जाएगा।
  • देहरादून सहित प्रदेश के महत्वपूर्ण धार्मिक व पर्यटन महत्व के शहरों में केंद्र सरकार की आईपीडीएस (इंटीग्रेटेड पावर डेवलपमेंट स्किम) के तहत अंडर ग्राउंड केबलिंग का कार्य किया जाएगा।
  • प्रदेश में बिजली से वंचित 1 लाख 25 हजार परिवारों को आॅफ-ग्रिड बिजली उपलब्ध करवाई जाएगी।

हाॅस्पिटेलिटी युनिवर्ससिटी की लागत का 75 प्रतिशत टीएचडीसी सहित केंद्र सरकार के विभिन्न उपक्रमों द्वारा जबकि 25 प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। प्रदेश के युवाओं के कौशल विकास में यह यूनिवर्सिटी महत्वपूर्ण साबित होगी।देहरादून सहित राज्य के धार्मिक व पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण शहरों में केंद्र सरकार की आईपीडीएस (इंटीग्रेटेड पावर डेवलपमेंट स्किम) के तहत अंडर ग्राउंड केबलिंग का कार्य किया जाएगा। इससे तारों के जंजाल से मुक्ति मिलेगी। प्रदेश में वर्तमान में 1 लाख 25 हजार परिवार ऐसे हैं जिन्हें बिजली नहीं मिल पाई है। ये परिवार ऐसे स्थानों पर रह रहे हैं जहां मुख्य ग्रिड से बिजली पहुंचाना सम्भव नहीं हो पाया है। इन परिवारों को अरूणाचल प्रदेश की तर्ज पर आॅफ-ग्रिड बिजली (सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा आदि) उपलब्ध करवाई जाएगी।

महीने भर में बदलेगी देहरादून में सफाई की तस्वीर: मदन कौशिक

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केंद्र सरकार से स्वच्छता सर्वेक्षण में उत्तराखंड के फिस्सडी साबित होने पर सूबे की सरकार ने कमर कसने का इरादा जाहिर किया है। राज्य के शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने देहरादून में प्रेस वार्ता कर इस बारे में जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि सरकार को एक महीने का समय दीजिए राज्य में स्वच्छता अभियान कुलांचे मारने लगेगा। कौशिक ने कहा कि स्वच्छता अभियान यूं तो पूरे राज्य में जारी है लेकिन कुछ कमियां हैं  उनको दूर कर उत्तराखंड को साफ सुथरा बनाया जाएगा। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि स्वच्छ, सुंदरीकरण अभियान की शुरूआत देहरादून से की जाएगी।

इसके साथ ही कौशिक ने कहा की चारधाम यात्रा एकदम सुरक्षित है, इसका अंदाजा आप खुद लगा सकते हैं कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केदारनाथ धाम आए और राष्ट्रपति बद्रीनाथ आए। यह अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि है। आने वाले समय में हम कोशिश करेंगे की यूपी के साथ बड़े मामले सुलझाऐंगे।

शराबबंदी की गुहार पहुंची पीएमओ तक

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डोईवाला दुधली के अजय कुमार ने शराबबंदी को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखा है जिसमें पीएमओ ने संज्ञान लेते हुए राज्य के मुख्य सचिव को उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। यह शायद पहला मौका है जब राज्य में शराबबंदी का मामला पीएमओ तक पहुंचाया गया है और पीएमओ ने इस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

उत्तराखण्ड में शराब बंदी को लेकर माहौल गरमाया हुआ है।राज्य के अलग-अलग जिलों में महिलाओं ने शराब के विरोध में आवाज बुलंद की हुई है। ऐसी संघर्षशील मातृशक्ति को अब पीएमओ ने भी मान लिया है ।एक तरफ महिलायें शराबबंदी को लेकर आंदोलनरत हैं और सरकार इस जुगाड़ में जुटी है कि शराब से होने वाली मोटी कमाई को कैसे बरकरार रखा जाये।महिलाएं तो महिलाए अब पुरुष भी शराब का कारोबार रोकने के लिए आगे आ रहे हैं।

वैसे तो उत्तराखण्ड में पहले भी शराब के विरोध में महिलाओं ने बड़े आंदोलन चलाये गये हैं। जिसका बहुत कुछ हद तक सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिला। लेकिन शराब लाॅबी महिलाओं के शांत होते ही फिर से अपने पैर जमाने लगती हैं। अभी कुछ दिन पहले ही रुद्रप्रयाग के तल्लानागपुर क्षेत्र की महिलाओं ने चोपता बाजार में शराब की पांच दुकानों में छापामारी की। दुकानों में रखी शराब की पेटियां सड़क पर लाकर तोड़ी गई। आक्रोशित महिलाओं ने कड़ी चेतावनी देते हुए शराब कारोबारियों को भगा दिया। वहीं सतेराखाल की महिलाओं ने भी सड़कों पर उतरीं और बड़ी रैली निकालकर धरना प्रदर्शन किया । महिलाओं के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए पुलिस प्रशासन में भी हड़कंप मचा हुआ। उसके बाद धनौल्टी की एक घटना जिसमें 65 साल की एक महिला ने अन्य महिलाओं के साथ शराब की दुकान में घुसकर तोड-फोड़ की थी। शराब विरोधी आंदोलन लगभग पूरे उत्तराखण्ड में अपने चरम पर है। कहीं नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे से ठेके हटाने के आदेश का कड़ाई से पालन करने की मांग है। कहीं रिहायशी क्षेत्रों में शराब की दुकानें खोलने का विरोध हो रहा है तो कहीं कालोनी में लोग शराब के खिलाफ साथ मिल कर खड़े हैं।

हरिद्वार के इस स्कूल में किताबों से नहीं कुंजी से होती है पढ़ाई

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अपने तेज तर्रार अंदाज के लिये मशहूर नैनीताल के पूर्व डीएम दीपक रावत हरिद्वार में भी डीएम का चार्ज लेते ही एक्शन में आ गये हैं। दीपक रावत ने शनिवार को हरिद्वार स्थित पन्ना लाल भल्ला म्युनिसिपल इंटर कॉलेज का अचानक निरीक्षण किया ।जिलाधिकारी ने शौचालयों और क्लास का निरिक्षण कर बच्चों से परेशानी की जानकारी ली और शिक्षकों की स्थिति की जानकारी प्राप्त की। जांच करने पर डीएम ने पाया कि क्लास में किताबों की जगह पर गाइड से पढ़ाई कराई जा रही है। इस पर रावत ने स्कूल प्रशासन से नाराजगी जताई। काॅलेज प्रिंसिपल ने माना कि उनके स्कूल में गाइड से शिक्षकों द्वारा पढ़ाई करवाई जा रही थी जबकि उनके द्वारा इस संबंध में साफ तौर पर मना किया गया है। उनके मुताबिक उनके सामने भी यह मामला आज ही सामने आया है और वे इसको लेकर कार्यवाही करेंगे ।

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इसके अलावा शौचालयों में टोटी नहीं होने और क्लास में पंखे नहीं चलने पर भी डीएम ने नाराजगी जताई।डीएम ने चेतावनी दी है और कहा है कि अगर सुविधायों में सुधार नहीं हुआ तो कड़ी करवाई की जायेगी ।डीएम ने कॉलेज के शौचालय में भी जाकर निरिक्षण किया और वह बहती टोटी और टूटे डिब्बों पर नाराजगी जताई ।

दीपक रावत इससे पहले नैनीताल के डीएम थे और अपने कार्यकाल के दौरान छापेमारी और कड़क तेवरों के लिये जाने जाते थे। अब देखना ये होगा कि हरिद्वार में व्यवसथाऐं सुधारने में रावत कितने कामयाब होते हैं।

हरीश रावत आज भी हैं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री!!

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हाल ही में खत्म हुए विधानसबा चुनावों में कांग्रेस को बीजेपी के हातों करारी हार का सामना करना पड़ा। हार इतनी करारी और गहरी थी कि खुद कांग्रेस के चुनावी चेहरा और तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत अपनी दोनों सीटों से चुनाव हार गया। नया निजाम आये कुछ महीने भी गुज़र गये लेकिन हरीश रावत ये कम से कम उनकी सोसल मीडिया टीम के लिये वो ही आज भी सूबे के मुख्यमंत्री हैं। 2014 के आम चुनावों में जिस तरह बीजेपी ने और खासतौर पर प्रधानमंत्री मोदी ने सोसल मीडिया को लोगों से जुड़ने का साधन बनाया उसके बाद से मानों सोशल मीडिया पर छाने की होड़ सी मच गई।सभी पार्टियों के नेता इसे लोगों से सीघे संवाद का माध्यम मान कर खुद या अपनी टाम द्वारा ऐक्टिव होने लगे। हरीश रावत बी पेसबुक और ट्वीटर पर खासे एक्टिव हैं। यही नही कुर्सी जाने के बाद बी रावत फेसबुक और ट्वीटर के माधयम से गाहे बगाहे त्रिवेंद्र सिंह रावत और उनकी सरकार पर निशाना साधते रहते हैं। लेकिन आस्चर्य की बात ये है कि अगर आप हरीस रावत का ट्वीटर हैंडल देखें तो वो अभी भी “@harishrawatcmuk” के नाम से ही चल रहा है। यानि कम से कम ट्वीटर पर तो हरीश रावत खुद को अभी भी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हैं। हांलाकि रावत के परिचय में पूर्व मुख्यमं६ी लिखा गया है लेकिन ट्वीटर पर अपने ट्वीटर हैंडल का यूसरनेम बदलने की भी सुविधा है।

 

छेडछाड़ का किया विरोध तो किया एसिड अटैक

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पांचवीं की छात्रा से छेड़छाड़ करने से मना करने पर दबंगों ने दुस्साहसिक वारदात को अंजाम दे डाला। रम्पुरा क्षेत्र, रुद्रपुर में घर में घुसकर महिलाओं पर एसिड फेंक दिया। हमले में मासूम सहित उसकी मां व बुआ घायल हो गई। घायलों को जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। साथ ही पुलिस चौकी में मामले की तहरीर दी गई। बावजूद पुलिस ने एफआइआर दर्ज नहीं की।

रम्पुरा चौकी अंतर्गत, वार्ड नंबर छह, भूतबंगला निवासी हमजदी बेगम के घर पर उसकी बहू वसीम जहां सहित एक वर्ष का पोता अयूष, पुत्री नाजिश घर पर थी। शुक्रवार रात पड़ोसियों ने उनके घर में घुस कर हमला बोल दिया। इस दौरान सबकी बेरहमी से पिटाई की गई। साथ ही पोते आयूष, बहू वसीम जहां व पुत्री नाजिश पर ज्वलनशील पदार्थ डाल दिया। इस वजह से वह बुरी तरह झुलस गई, उनको उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। हमजदी बेगम ने बताया कि कक्षा पांच में पढ़ने वाली उसकी बेटी को मोहल्ले के कुछ युवक छेड़ते थे। जिसका उन्होंने विरोध किया, इसके बाद पूरे परिवार ने मिलकर हमला बोल दिया। इस दौरान घर के पुरुष काम पर गए थे। देर रात लौटने पर उनको घटना की जानकारी हुई। घटना की सूचना पुलिस को देने के बाद भी कोई कार्रवाई पुलिस द्वारा नहीं की गई है।

जल्द होगा देश में बुलेट ट्रेन का सपना साकार

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देश में बुलेट ट्रेन का सपना साकार करने की दिशा में केंद्र व रेलवे जुट गया है। केंद्र ने बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए कॉरपोरेशन बनाने के साथ प्रबंध निदेशक की नियुक्ति कर दी है। इसके बाद प्रोजेक्ट में तेजी आने की उम्मीद है। इसके अलावा आम यात्रियों को आरामदायक व सुविधाजनक सफर कराने के लिए अंत्योदय रेल चलाई जा रही है।

रेलवे बोर्ड के सदस्य (रोलिंग) रवींद्र गुप्ता ने शुक्रवार को नैनीताल में रेलवे के मुख्य यांत्रिक अधिकारियों संग बैठक की। इस दौरान हादसों को न्यूनतम करने के लिए सुरक्षा बढ़ाने पर चर्चा की गई। गुप्ता ने कहा कि रेल में पुराने कोच का उपयोग अगले साल से बंद हो जाएगा। ऐसे कोच लगाए जाएंगे, जो किसी भी तरह का हादसा होने पर एक दूसरे के ऊपर ना टकराएं।

हादसे न्यूनतम करना ही रेलवे की प्राथमिकता है। नैनीताल क्लब में मीडिया से मुखातिब गुप्ता ने कहा कि मुख्य यांत्रिक अधिकारियों की बैठक में पिछले वर्ष के रोडमैप की समीक्षा के साथ भावी कार्ययोजना तैयार की जा रही है। शीघ्र हाईस्पीड तेजस ट्रेन का संचालन भी आरंभ होने जा रहा है। इसमें डबल डेकर उदय कोच लगाए जा रहे हैं।

गुप्ता ने बताया कि हमसफर ट्रेन में यात्री सुविधा एवं सुरक्षा का खास ख्याल रखा गया है। इनमें बायो टॉयलेट्स, यात्री सूचना सिस्टम, सीसीटीवी कैमरे तथा फायर सेफ्टी अलार्म भी लगाए गए हैं। यही नहीं रेल मंत्री सुरेश प्रभु की पहल से अंत्योदय रेल आरंभ की गई है। इसमें जनरल क्लास के लिए बर्थ में एलईडी लाइटिंग, केबिन में चार्जर व वाटर प्यूरीफायर लगाया गया है। जनरल कोच को अन्य कोचों से कनेक्ट करते हुए पूरी ट्रेन में वैंडर्स पहले से अंतिम कोच तक जा सकते हैं।

रेलवे बोर्ड सदस्य गुप्ता ने कहा कि एप कोच मित्र के माध्यम से यात्री लाइट, पंखा व एससी की गड़बड़ी की शिकायत कर सकते हैं। आधे घंटे के भीतर उनकी समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।

जल्द गिरेगी चार सौ विद्यालयों पर गाज

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दस से कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों के बंद करने के फैसले का सबसे अधिक असर सीमांत जिला पिथौरागढ़ में पड़ने वाला है। वर्षो से स्कूल चलो अभियान से लेकर मध्याह्न भोजन देने के बाद भी सरकारी प्रावि और जूहा में छात्र संख्या घटती जा रही है।

सरकारी सुविधाओं के बाद आउटपुट कुछ भी नहीं मिलने से अभिभावकों का सरकारी विद्यालयों से मोहभंग हो चुका है। जिसकी पुष्टि जिले के 411 प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल कर रहे हैं। जिले में 356 प्राथमिक विद्यालय और 55 जूनियर हाईस्कूल बंद होने के कगार पर हैं। प्रदेश के शिक्षा मंत्री द्वारा इन विद्यालयों को बंद करने के निर्णय से दूर दराज के अति निर्धन बच्चों का भविष्य लटक सकता है। जिले में 10 से कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों की संख्या विकास खंड मुनस्यारी में सर्वाधिक है।

10 से कम छात्र संख्या वाले प्रावि – 356

विकासखंड वार 10 से कम छात्र संख्या वाले प्रावि

बेरीनाग 47,डीडीहाट 54,कनालीछीना 56,गंगोलीहाट 34,मूनाकोट 35,बिण 22

मुनस्यारी 62,धारचूला 41,

10 से कम छात्रसंख्या वालो की संख्या

बेरीनाग 03, डीडीहाट 02, कनालीछीना 03,गंगोलीहाट 04,मूनाकोट 09,बिण 02

मुनस्यारी 15, धारचूला 07 है। जिनपर जल्द ही शिक्षा महकमा बडा निर्णय लेने का मन बना रहा है।

तो ये कहते हैं इन मशहूर कंपनियों के लोगो

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हर कंपनी अपने लिए हर मामले में बेहतर ही सोचती है। चाहें वह कंपनी का लोगो ही क्यों ना हो। लोगो केवल यह सोच कर नहीं तैयार किया जाता कि वह किसी कंपनी की पहचान है बल्कि लोगो को बनाते समय इस बात का भी ध्यान रखा जाता है कि कस्टमर तक उनके मैसेज को पहुंचा दिया जायें।

चलिए आपको कुछ ऐसे ही लोगों के मतलब के बारे में बताते हैं।

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ऐपलः रौब जेनअफ, जिसने ऐपल का यह मशहूर ‘लोगो’ ङिजान किया वो बताते हैं कि: एक दिन मैं एक बैग भरकर सेब खरीद कर लाया और उनको एक कटोरे में रखकर उनका स्कैच बनाने लग गया और थोड़ी देर बाद एक सेब उठाकर उसमें से एक बाईट लिया और ऱख दिया और फिर बाद में मैने सोचा कि यह बाईट कंम्पयूटर में इस्तेमाल शब्द बाईट से काफी मिलता है, बस फिर इस तरह से दुनिया में मशहूर एेपल का लोगो निजात हुआ। ऐसा कहा जाता है कि शुरुआत में यह एेपल का लोगो मल्टी कलर की लाइनिंग से बना होता था क्योंकि यह कंपनी मल्टी कलर स्क्रीन कंम्प्यूटर बनाती है। लेकिन 1998 में स्टीव जाब के वापस आने पर जब एेपल ने नए जेनेरेशन के कंम्प्यूटर को मार्केट में लांच किया उसके साथ ही एेपल का मोनोक्रोम लुक यानि की ब्लैक एंड वाइट वर्जन लांच किया गया जो आज भी हर किसी की पहली पसंद है।

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एमेजोनः ऐमेजोन के लोगो को देख कर यह बिल्कुल नहीं लगता कि इसमे कुछ स्पेशल है या कुछ अलग है। लेकिन अगर आप लोगो ध्यान से देखें तो इंग्लिश में लिखे ऐमेजोन शब्द के नीचे ‘एक पीला ऐरो’’ यानि की एक निशान है जो एक ‘स्माइली’ बनाता है मतलब कंपनी अपने कस्टमर की मुस्कान का पूरा ध्यान रखती है और दूसरा यह निशान ‘ए’ अल्फाबेट से शुरु होकर ‘जेड’ पर खत्म होता है इसका मतलब है ऐमेजोन पर आपको ‘ए टू जेड’’ सब कुछ मिलेगा।

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बीएमडब्लूः ऐसा कहते है कि बीएमङब्लू ने सबसे पहले एयरक्राफ्ट क्षेत्र में अपना काम शुरु किया था और कहीं ना कहीं उनका लोगो इस बात को दर्शाता है। ऐसा कहते है कि बीएमङब्लू के लोगों में सफेद लाईन आसमानी लाईन को काट रहा जैसे नीले आसमान में सफेद एयरक्राफ्ट चलते हुए आसमान को चीरता हुआ जाता है ठीक वैसे ही। कुछ मानते है कि बीएमङब्लू का लोगो बेवेरियन झंडे से लिया गया है जिसमें नीले और सफेद रंग की पट्टिया मौजूद होती हैं।

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मर्सिडिज़ बैंन्ज़ः मर्सिडिज़ बैंन्ज़ के लिए मान्यता है कि इसका लोगो कंपनी के कांफिडेन्स और परफेक्शन को दर्शाता है।ऐसा कहते हैं कि मर्सिडिज़ के लोगों के तीनों नुकीले स्टार यानि तारें हर क्षेत्र में डामिनेट करते हैं चाहें वह पृथ्वी हो, पानी या फिर हवा।

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फेडएक्सः अगर आप फेडएक्स का लोगो ठीक से देखें तो ई और एक्स शब्द के बीच एक ऐरो दिखाई देगा जिसका मलतब स्पीड और एक्यूरेसी है। यह दोनों ही चीजें किसी भी कंपनी को सफलता दिलाने के मूल मंत्र हैं।

4421673803_7d7c2ba9b3_zफार्मूला 1: अगर आप एफ1 का लोगो ध्यान से देखेंगे तो काले से लिखे एफ और लाल लाईन के बीच में एक 1 बनता नजर आएगा जो स्पीड का सूचक है। इस लोगो को डिजाईन करने वाले ने स्पीड के बारे में सोच कर इसको बनाया है और फार्मूला वन स्पीड के लिए ही जाना जाता है।

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एनबीसीः ऐसा माना जाता है कि आरसीए कंपनी ही दि नेशनल ब्राडकास्टिंग कंपनी को चलाती थी। उसके बाद सन 1950 ने इस कंपनी ने टीवी प्रोडक्शन में कलर टीवी के नाम से प्रोडक्शन का काम शुरु किया।ऐसा कहा जाता है कि रंगीन पंखों वाले इस लोगो से उन्हें क्राउड टारगेट किया जाता है जो लोग ब्लैक एंड वाईट टीवी देख रहे है और कलर टीवी ना देख कर बहुत कुछ नहीं देख पा रहें।

यूनीलिवरः यूनीलिवर एक ऐसी कंपनी है जो अलग-अलग तरह के प्रोडक्ट बनाती है और यहीं उनके लोगो का मुख्य संदेश है।इस कंपनी के लोगो में लगभग 25 आइकन को इस्तेमाल किया गया है जो कंपनी के लिए काफी महत्तव 432992865_1280x720रखते हैं। उदाहरण के लिए लोगो में इस्तेमाल हार्ट यानि दिल का मतलब है प्यार,मोहब्बत और केयर और चिड़िया का मतलब है फ्री यानि रोज-रोज की जिंदगी से फ्री होकर कुछ पल केवल अपने लिए।

सोनी वायोः सोनी वायो के लोगो के माध्यम से डिजाईनर बहुत ही खूबसूरती से दो अलग अलग टेक्नालिजी को मिलाया है। वी और ए को एनालाग वेव की भाषा में लिखा गया है वहीं आई और ओ को बाईनरी vaiologo-2डिजीटल टेक्नालिजी में लिखा गया है।

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पावर आनः पावर आन का सिंबल तो लगभग हर इलेक्ट्रानिक डिवाईस में देखने को मिलेगा लेकिन बहुत कम लोग इसका मतलब जानते हैं। दरअसल ऐसा कहते हैं कि 1940 में इंजिनीयर ने अलग-अलग स्वीच की पहचान के लिए बाईनरी सिंबल का प्रयोग किया था जहां 1 का मतलब था स्विच आन और 0 का मतलब था स्विच आफ। इसको ध्यान में रखते हुए मार्डन समय मे जो साइन बना उसमें जीरो और वन दोनो का प्रयोग करके पावर आन का साईन बनाया गया।

बास्किन रोबिनः अगर आप इस लोगो Baskin-Robbins_logo.svgको ध्यान से देखेंगे तो पाऐंगे कि बी का पिछला हिस्सा नंबर 3 बना रहा जो गुलाबी रंग का है और आर की पहली गुलाबी लाईन 1 बना रही इस तरह से यह दोनो मिलकर बनाऐंगे 31। ऐसा माना जाता है कि बास्किन रोबिन ने सबसे पहले 31 फ्लेवर में अपनी आइसक्रीम लांच की थी।

समझ से परे क्यों होती जा रही है सरकारी हिंदी?

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चमोली के पोखरी गांव के बाहर एक बोर्ड पर लिखा है “सर्व शिक्षा अभियान से अच्छादित” जहां पहले तीन चार शब्द तो आम बोल चाल की भाषा के थे वहीं “अच्छादित” ने मुझे उलझन में डाल दिया।क्या इस शब्द का मतलब अच्छा है या बुरा? इन ख्यालों ने डाॅ पुरोहित को असमंजस मे डाल दिया।

मैं डाॅ पुरोहित की बात को बिलकुल समझ सकती हूं। डेढ़ दशक के अपनी मीडिया के सफर के दौरान मैं लगातार सरकारी प्रेस रिलीज़ और आॅर्डरों की काॅपी से जूझती रही हूं। इन सब में हिंदी भाषा के ऐसे इस्तेमाल किया जाता है जो संस्कृत भाषा से मिलता जुलता है। ये शब्दावली हिंदी का सबसे शुद्ध रूप तो है लेकिन क्या ये आज के ज़माने में अन्य भाषाओं ख़ासतौर पर अंग्रेज़ी से अपने वर्चस्व की लड़ाई लड़ रही हिंदी को बचाने में कारगर है? बहरहाल अपना काम आसान करने के लिये मुझे सरकारी हिंदी मीडियम स्कूल से रिटायर्ड अपनी मां का सहारा मिल जाता है। मां बताती हैं कि ” सरकारी हिंदी भाषा ने पिछले कई सालों में संस्कृत की छाप वाली हिंदी से आम लोगों के बोलचाल की हिंदी तक का सफर तय नहीं किया है। अपने 37 साल की सरकारी नौकरी मे मैंने एक भी ऐसा सरकारी पत्र नहीं देखा जिसे पढ़ने और समझने में परेशानी नहीं हुई हो”

मेरे हिसाब से तो सरकारी आदेश, पत्र आदि लिखते हुए ऐसा लगता है कि मानो मुकाबला हो रहा हो सबसे कठिन और जटिल शब्द कौन ढूंढ के ला सकता है। और शायद ये ही कारण है कि राजभाषा होने के बावजूद हिंदी आज भी अंग्रेज़ी से मात खा रही है।अाज जब देश लिखित से डिजिटल दौर की तरफ बढ़ चुका है ऐसे मे दौर चीज़ों को फटाफट और आसान तरीके से बताने और समझाने का है। हिंदी को बचाने और युवाओं के बीच में बढ़ावा देने के लिये कई विभाग हैं, सम्मेलन होते हैं, डिबेट होती हैं लेकिन शायद ही किसी ने इस पहलू पर ध्यान दिया है कि रोज़ाना लाखों लोगों को जिस माध्यम से हिंदी से रूबरू होना पड़ता है कहीं वो हिंदी को लोगों से दूर तो नहीं ले जा रहा?

खुद सरकारी अधिकारी भी इस बात से इत्तेफ़ाक रखते हैं। एसएसपी उधमसिंह नगर सदानंद दात्ते कहते हैं कि “शुद्ध हिंदी को ज़रूरत से ज्यादा महत्व दिया जाता है। हिंदी अपने आप मे वही आम लोगों के बोलचाल की भाषा है लेकिन सरकारी कामों में इस्तेमाल होने वाली हिंदी काफी जटिल होती है, इसे आम लोगों के लिये और आसान बनाने की ज़रूरत है।”

नेता भी किस बात को मानते हैं कि सरकारी कामों में इस्तेमाल होने वाली हिंदी काफी जटिल है। कांग्रेस के प्रदेश अधयक्ष किशोर उपाध्याय कहते हैं कि “जानभूझकर सरकारी कामों और आदेशों में हिंदी को इतना जटिल रखा जाता है ताकि वो ज्यादातर लोगों को समझ में न आये।”     

बोलचाल की हिंदी और कागज़ों में लिखे जाने वाली हिंदी के बीच की दूरी हर सरकारी पत्राचार के साथ बढ़ती जा रही है। शायद अब वो समय आ गया है कि वास्तव में हिंदी को लोगों की पसंदीदा भाषा बनाने के लिये कुछ ज़मीनी कदम उठाये जायें।आम आदमी सराकरी कामकाज में इस्तेमाल होने वाली हिंदी नहीं समझ पाता है और ये एक बड़ा कारण है कि आज हिंदी सरलता से दूर “क्लिशत” होती जा रही है।