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त्रिवेंद्र सरकार ने पेश किया 39957.20 करोड़ का अपना पहला बजट

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प्रचंड बहुमत से जीत कर प्रदेश की सत्ता पर काबिज नई भाजपा सरकार का पहला सालाना बजट उत्साह से लबरेज है। वर्ष 2017-18 के इस बजट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ध्येय वाक्य ‘सबका साथ, सबका विकास’ को बतौर संकल्प के रूप में लेकर भाजपा के दृष्टिपत्र को जमीन पर उतारने के लिए पांच साल का खाका भी खींचा गया है।

दृष्टिपत्र के मुताबिक भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस और सुशासन की प्रतिबद्धता को बजट में टॉप पर रखा गया। त्रिवेंद्र रावत सरकार ने जनता को राहत देते हुए 39957.79 करोड़ का करमुक्त बजट पेश किया। खास बात ये है कि नई सरकार नई लोकलुभावन घोषणाओं से गुरेज कर बीते वित्तीय वर्ष 2016-17 की तुलना में बजट आकार को 464.41 करोड़ कम रखा। सभी वर्गों, खास तौर पर किसानों, ग्रामीणों, युवाओं, महिलाओं, अनुसूचित जातियों-जनजातियों,सरकारी कार्मिकों को बजट में खास तरजीह मिली है। वहीं ढांचागत विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य में बजट में नई पहल की गई। केंद्र सरकार के राज्य में महत्वाकांक्षी चार धाम ऑलवेदर रोड और रेलवे नेटवर्क के साथ ही केंद्रपोषित योजनाओं से बजट में उम्मीदें बांधी गई हैं।

गुरुवार को विधानसभा सत्र के पहले दिन शाम को वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने नई सरकार का पहला बजट पेश किया। बजट में भाजपा के दृष्टिपत्र की छाप है। सत्तारूढ़ दल ने विधानसभा चुनाव में अपने घोषणा पत्र को दृष्टिपत्र के रूप में पेश किया था। बजट में नई योजनाओं के साथ ही पहले से चल रही योजनाओं को पूरा करने पर जोर है। बजट के कुछ रंग अलहदा नजर आए। सॉफ्ट कॉपी में पहली बार इको फ्रेंडली बजट में अब प्लान और नॉन प्लान की व्यवस्था खत्म कर दी गई है। इसका स्थान अब पूंजीगत और राजस्व मदों ने ले लिया है।

कुल बजट में राजस्व लेखा व्यय 31550.83 करोड़ और पूंजीगत लेखा व्यय 8406.96 करोड़ अनुमानित है। चालू वित्तीय वर्ष के इस बजट में कोई राजस्व घाटे का अनुमान नहीं है। यानी सरकार का कुल राजस्व खर्च राजस्व प्राप्तियों से कम रहने का अनुमान लगाया गया है। अलबत्ता राजकोषीय घाटा 5412.42 करोड़ है, लेकिन यह राज्य सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 2.37 फीसद है। राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) एक्ट की तय सीमा के अधीन ही राजकोषीय घाटा होने से सरकार राहत में है।

बजट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा का एजेंडा बखूबी झलका है। मोदी लहर के बूते प्रदेश में भारी बहुमत से सत्ता में पहुंची भाजपा सरकार ने मोदी के ध्येय वाक्य और स्थिरता के संकल्प के साथ ही अपने पहले बजट की शुरुआत की। इसमें केंद्र सरकार की योजनाओं के लक्ष्य के अनुसार प्रत्येक गांव को सड़क समेत ढांचागत सुविधाओं से जोडऩे, पेयजल व 24 घंटे बिजली मुहैया कराने, गरीबों को आवास मुहैया कराने, किसानों को आपदा से नष्ट फसल की क्षतिपूर्ति का भरोसा बंधाया गया है।

बजट के प्रमुख बिंदु:

  • भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की प्रतिबद्धता
  • समस्त सरकारी कार्यालयों में बायोमेट्रिक प्रणाली होगी लागू
  • सीएम कार्यालय में डैश बोर्ड की स्थापना, दैनिक आधार पर प्रत्येक विभाग का अनुश्रवण
  • पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने को आवासीय विद्यालयों एवं छात्रावास की स्थापना
  • प्रत्येक स्कूल में बुक बैंक बनेगा, एनसीइआरटी की पुस्तकें अनिवार्य होंगी
  • गरीब मेधावी छात्र-छात्राओं को मुफ्त लैपटॉप व स्मार्ट फोन वितरण को बजट प्रावधान
  • सभी विश्वविद्यालयों में मुफ्त वाई-फाई
  • बीपीएल एव आयकर के दायरे में न आने वाले परिवारों को स्वास्थ्य कल्याण कार्ड योजना के जरिये सहायता
  • पर्वतीय क्षेत्रों में गंभीर रूप से बीमार, घायलों के लिए एयर एंबुलेंस
  • मध्य हिमालयी क्षेत्रों में योग अभ्यास केंद्रों की स्थापना
  • धार्मिक पर्यटन बढ़ाने को शाक्त, शैव, वैष्णव, गोलू, नागराजा व अन्य स्थलों का सर्किट के रूप में विकास
  • चार धाम ऑल वेदर रोड योजना 2020 तक पूरा करेंगे
  • 2019 तक हर गांव को बिजली, सभी को 24 घंटे बिजली आपूर्ति को युद्ध स्तर पर प्रयास
  • 2019 तक सड़क सुविधा से जुड़ेंगे सभी गांव
  • सभी किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड
  • तहसील व ब्लॉक स्तर तक इंटरनेट कनेक्टिविटी की स्पीड 10 एमबीपीएस और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा
  • प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 5000 मकानों का निर्माण
  • नगर निकायों के लिए वार्षिक अनुदान राशि बढ़ाकर की गई 578.03 करोड़
  • जखोली में सैनिक स्कूल की स्थापना
  • रुद्रपुर व हल्द्वानी में कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावास
  • सामान्य वर्ग के निर्धन छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति
  • अनुसूचित जाति-जनजाति के लिए छात्रवृत्ति में लगातार अनियमितता की जांच और पारदर्शी वितरण व्यवस्था
  • आपदा का बेहतर ढंग से सामना करने को प्रत्येक गांव के निवासियों को एसडीआरएफ से प्रशिक्षण
  • स्टार्ट अप नीति के अनुरूप निवेशकों को लाभ, इसी वित्तीय वर्ष में इन्वेस्टर मीट
  • राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में ट्रॉमा सेंटर की स्थापना को धन की व्यवस्था, एमबीबीएस की 50 सीटें बढ़ाने को धन
  • राज्य के युवाओं को रोजगार, स्वरोजगार दक्षता को उत्तराखंड वर्कफोर्स डेवलपमेंट फॉर मॉडर्न इकोनॉमी की स्थापना
  • अति निर्धन परिवारों को रसोई धुआंमुक्त करने को मुफ्त रसोई गैस
  • नदियों में कटाव से निपटने के लिए उठाएंगे प्रभावी कदम
  • राज्य के कई स्थानों पर धनोल्टी की तर्ज पर इको पार्क की स्थापना
  • पांच वर्ष में ऊर्जा की कुल मांग का 10 फीसद वैकल्पिक ऊर्जा से पूर्ति

 

किसान ने खूद को मारी गोली

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मूल रूप से ग्राम छतरपुर, जिला मुरादाबाद निवासी तेजपाल सिंह (54) पुत्र राजाराम यहां ग्राम फसियापुरा में अलीगंज रोड पर करीब 15 साल से परिवार के साथ रहते थे। तेजपाल गुरुवार को स्टोर रूम में करीब 11.30 बजे लाइसेंसी दो नाली बंदूक से अपने गले में गोली मार दी। किसान की मौके पर ही मौत हो गई। गोली चलने की आवाज सुनकर पत्नी रूपरानी और बेटी मौके पर पहुंची तो तेजपाल छटपटा रहे थे और कुछ ही देर में दम तोड़ दिया। सूचना पर तेजपाल के भाई व रिश्तेदार मौके पर पहुंच गए। इस बीच सीओ राजेश भट्ट मौके पर पहुंचकर घटना की जानकारी ली।

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पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। तेजपाल तीन भाइयों में दूसरे नंबर के थे। पुलिस के मुताबिक परिजन बताते थे कि तेजपाल शराब ज्यादा पीते थे। गुस्से में कुछ माह पहले भी बंदूक से गोली चलाई थी, जो छत में निशान है। तेजपाल के ममेरे भाई फाल सिंह ने बताया कि पारिवारिक कलह नहीं थी, मानसिक अवसाद की स्थिति में थे, इसलिए उनका इलाज चल रहा था। उन्हें गुस्सा ज्यादा आता था। जिस तरह से तेजपाल ने आत्महत्या की है। इससे लगता है कि वह इससे पहले कई बार पैर के अंगूठे से ट्रिगर चलाने का अभ्यास किया होगा। तेजपाल ने दो नाली बंदूक में 12 बोर की गोली भरी है। नाल के मुंह को गले से सटाकर पैर के अंगूठे से ट्रिगर दबा दिया। पापा को बंदूक ने ही खा लिया। यदि बंदूक नहीं होती तो यह आज देखने को नहीं मिलता। पापा ऐसा क्यों कदम उठाया, मुझे छोड़कर चले गए यह कहते हुए तेजपाल की बेटी शिवी रोती रही। यह घटना देख हर किसी की आंखों में गम के आंसू दिखे।

तेजपाल गोली मारकर आत्महत्या करने से पहले घर से बाहर गए थे। जब उन्होंने एक दुकान से रजनीगंधा व तुलसी खरीदकर घर पहुंचे तो पास में एक युवक ने टोका कि चाचा आप तो कई बार रजनीगंधा व तुलसी छोड़ने को कह चुके हैं। इस पर तेजपाल ने कहा कि बेटा आज तो खा लेने दो, फिर कभी नहीं खाएंगे। इसके करीब 20 मिनट बाद तेजपाल ने गोली मारकर आत्महत्या कर ली। पुलिस तेजपाल की आत्महत्या की वजह का सही पता नहीं चल पाया है। बंदूक राजाराम के नाम थी। तेजपाल ने बंदूक का लाइसेंस अपने नाम विरासत में करा लिया था। मामले की जांच की जा रही है।

दहेज के लिए जान के दुश्मन बने ससुराली

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दहेज के लिए आज भी बेटियों का शोषण होता है और पति की मार से सहमी बेटी आज भी दर्द में जीने को मजबूर हैं। जी हां महिला सशक्तिकरण और महिलाओं के अधिकार के भले ही कितने बडे बडे दावे किये जाते हों मगर हकीकत तो ये हैं कि आज भी बेटी ससुराल में दहेज के उत्पीडन का दंश झेलने को मजबूर है। बात काशीपुर की है जहां एएसपी कार्यलाय के बाहर हाथ पैरों पर पट्टी बांधे एक युवती न्याय मिलने का इन्तजार कर रही थी।

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एक साल पहले कई सपने संजोकर विवाह की सारी रस्में निभाते हुए अपने पति के घर पहुंची प्रीति को शादी के एक माह तक तो सबका प्यार मिला लेकिन दहेज के लोभियों की भूख इतने में नहीं पुरी हुई और लगातार ही दहेज के लिए प्रीति पर दबाव बनाना शुरु कर दिया गया। मारपीट हुई, खरीखोटी सुनाई लेकिन किसी तरह से घर की लाज बचाती रही प्रीति, लेकिन जब पानी सर से उपर हो गया तो अपनी आप बीती अपने पिता से कह दी, जिसके बाद दहेज उत्पीडन को लेकर मामला काफी समय तक चलता रहा। किसी तरह से पुलिस महिला हेल्प लाईन की मदद से पति-पत्नी एक हुए मगर ये भी ज्यादा दिन नहीं चला और प्रीति ने आरोप लगाया कि उसके गहनों के लालच में उसे तीन मंजिले भवन से नीचे फेंक दिया गया।
एएसपी का कहना है कि उनके संज्ञान में मामला आया है वो इसकी जांच करायेंगे और दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।
पुलिस के अनुसार फिलहाल प्रीति पर ही अटेम्पट टू सुसाईड का कैस दर्ज है और उनके अनुसार प्रीति के आरोप भी बेबुनियाद है। मगर शरीर पर लगे चोटों के निशान और टूटे हाथ पैर कुछ और ही बयां कर रहे हैं जो शायद पुलिस को नहीं दिखाई देते हैं। महिला का दर्द समझने के बजाय उसके साथ कोतवाली में की गयी बर्बता से अब प्रीति को पुलिस से भी न्याय की कोई उम्मीद नहीं है, वहीं देखना होगा कि आखिर उच्च अधिकारियों के संज्ञान में मामला आने के बाद क्या कार्यवाही होती है।

सैक्स रैकेट का भांडाफोड

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रुद्रपुर के ट्रांजिट कैंप में पुलिस ने सेक्स रैकेट में संलिप्त तीन महिलाओं सहित सात लोगों को दबोच लिया। सीओ यातायात के नेतृत्व में हुई गोपनीय कार्रवाई से हड़कंप मच गया। पकड़े गए युवकों के परिजन भी जानकारी मिलने पर थाने पहुंच गए। पुलिस ने उनके खिलाफ अनैतिक देह व्यापार अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

ट्रांजिट कैंप थाने की नारायण कालोनी में सेक्स रैकेट की सूचना पर एसएसपी डा. सदानंद एस दाते के निर्देश पर सीओ बीएस मधवाल के नेतृत्व में पुलिस टीम ने छापामारी की। इस दौरान एक मकान में चल रहे सेक्स रैकेट का पर्दाफाश कर दिया। पुलिस ने मकान में दो महिलाओं के साथ चार युवकों और भवन स्वामी महिला को भी दबोच लिया। पकड़े गए युवकों ने अपने नाम राकेश कोली, सद्दाम, सन्नी व अनिल पाल बताया गया। सीओ बताया कि पकड़े गए लोगों से पूछताछ की जा रही है।

नारायण कालोनी निवासी महिला के पास चार कमरे है। वह उन कमरों का प्रयोग देह व्यापार के लिए करती है। उसका काम लोगों को कमरा मुहैय्या कराने का है। उसका कहना है कि युवक अपने साथ महिलाओं को लेकर आते हैं,  इसकी एवज में उसको दो सौ रुपये मिलते थे।

पकड़े गए आरोपियों में सभी नई उम्र के लड़के हैं। युवकों की उम्र 20 से 24 वर्ष के बीच है। युवक दुकान में काम करने वाले हैं। पकड़े गए एक युवक की मां तो पता लगने पर थाने ही पहुंच गई। उसका कहना था कि उसका बेटा घर से बिजली का बिल जमा करने के लिए गया था।भवन स्वामी महिला ने बताया कि उसका पति मानसिक रूप से बीमार है। उसकी हरकतों के चलते उसे घर में जंजीर से बांध कर रखना पड़ता है। उसने बताया कि पिछले दो वर्ष से वह अपने घर में लोगों को अनैतिक कार्य के लिए कमरा किराए पर दे रही है।

सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन योजना क्यों रही असफल?

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पिछले साल देहरादून नगर निगम की योजना के तहत शहर के भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में सैनिटरी नैपकीन के लिए वेंडिंग मशीन लगाए जाने थे, लेकिन अब तक इसपर कोई काम शुरु नहीं हुआ है। इस योजना में दून के मुख्य स्पाट पर यह मशीन लगनी थी जिसमें गांधी पार्क के पास भी एक वेंडिंग मशीन लगाई जानी थी।यह योजना स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाई गई थी।

यह मशीन से 10 रुपये में 3 सैनिटरी नैपकिन देने वाली थी जिससे आर्थिक रुप से कमजोर महिलाओं में नैपकिन के इस्तेमाल व इसके फायदे के बारे में जागरुक किया जा सकता था। इस एक मशीन को इंस्टाल करने की कीमत लगभग 60 हजार बताई गई थी। यह मशीन निगम द्वारा लगाए जानी थी जिसमें उनकी मदद सेमी गवरमेंट कंपनी हिंदुस्तान लाईफकेयर लिमिटेड करने वाली थी।

हालांकि नगर निगम का कहना है कि इस प्लान पर काम ना करने की वजह इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है। इस बारे में नगर निगम का कहना है कि इस योजना को धरातल पर लाना इतना आसान नहीं है, क्योंकि इसको चेक करने के लिए हमने पहला वेंडिंग मशीन महिला शौचालय में लगाया था। लेकिन इस मशीन को शहर के दूसरे हिस्सों में लगाना थोड़ा मुश्किल होगा क्योंकि एक तो सुलभ शौचालयों की हालत बहुत खराब होती है, दूसरा यह योजना उन क्षेत्रों में काम करेगी जहां बहुत सफाई हो और उस स्थान पर बिजली पानी की सुविधा हो क्योंकि यह मशीन बिना बिजली के नहीं चलती।

वहीं शहर के मेयर विनोद चमोली का कहना है कि हमने इस एक मशीन को एक्सपेरिमेंट के आधार पर लगाया था और इसका रिस्पांस देखना अभी बाकी है, इसके अलावा उन्होंने कहा कि मैं खुद इस योजना को देखूंगा कि इसपर काम क्यों नहीं हो रहा है।

गौरतलब है कि कुछ समय पहले रेखा आर्य उत्तराखंड की महिला कल्याण एवं बाल विकास मंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से सैनिटरी नैपकिन को टैक्स के दायरे से बाहर रखने की मांग की है। रेखा ने अपने खत में केंद्रीय वित्त मंत्री से कहा था कि राज्य में ज्यादातर महिलाएं धनाभाव में जीती हैं और उन्हें सैनिटरी नैपकिन के लिये पैसे अासानी से प्राप्त नहीं होते, इस के ऊपर सैनिटरी नैपकिन पर टैक्स इन्हें अाम महिलाअों की पहुँच से दूर कर देता है।

मन को भायेंगे यह ”रंग-बिरंगे कारपेट”

देहरादून से मसूरी तक घुमावदार सड़क पर सफर करते हुए शायद ही कोई ऐसा होगा जो सड़क के किनारे लगाए हुए रंग-बिरंगे कारपेट पर ध्यान ना दें। स्टेशन जाने के लिए घुमावदार रास्तों के लगभग 15 किलोमीटर के अंदर, आधा दर्जन कालीन विक्रेता रंग-बिरंगे, चमकीले ऊनी और सिंथेटिक कालीनों के साथ रनर; झूमर और फूट मैट दो पेड़ों के बीच रस्सी से लटका कर या नीचे बजरी पर रखे गए अलग–अलग आइटम, भरी गर्मी में मसूरी तक आने वाले पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

इस विषय में बात करने के लिए हमने एक कालीन बेचने वाले इरकान से बात करी। इरकान के परिवार मे 10 लोग है वह बताते हैं, ‘हम सभी माधवसिंह गांव, बंदायूं ,यूपी के रहने वाले हैं।  पिछले 30-32 साल से देहरादून आकर यहीं बस गए हैं और कालीन का बिजनेस करने लगे। गर्मी आते ही मैदानी क्षेत्रों में यह काम नहीं चलता तो हम यहां 2 महीनों के लिए दुकान लगा लेते हैं।’

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सुबह 10 बजे से शाम के 6 बजे तक कारपेट बेचने वाले दिन में 100 से लेकर 2 हजार तक कमा लेते है। अच्छें रंग, खूबसूरत डिजाईन, और अलग-अलग आकार और साइज में उपलब्ध यह कारपेट आने जाने वाले पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।हालांकि इनमे से बहुत से ऐसे हैं जो कवल दाम पूछ कर निकल जाते हैं लेकिन कुछ ऐसे भी है जो इनको खरीदते हैं। बातचीत के दौरान हमें एक खरीदार भी मिली जो हैदराबाद से थी उन्होंने हमे बताया कि इतनी अच्छी वेरायटी, इतने कम दामों में शहरों के बड़े-बड़े माल में नहीं मिलेंगी।यह एक ऐसी डील है जिसको लेने में फायदा ही फायदा है।

इसलिए अगर अगली बार आप मसूरी की रुख करें तो एक कारपेट जरुर खरीदें जो आपके लिए फायदे का सौदा तो होगा ही साथ में आपके खूबसूरत घर में यह चार चांद भी लगा देगा।

सामूहिक आर्थिक सहायता से अनाथ बालिका का विवाह

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मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने भानियावाला में एक स्थानीय वैडिंग प्वाईंट में क्षेत्र के निवासियों द्वारा आयोजित बालिका दीपा के विवाह समारोह में सम्मिलित हुए। उल्लेखनीय है कि अनाथ बालिका दीपा पुत्री स्वर्गीय रमेश तथा बाॅबी का विवाह ग्रामीण क्षेत्र के निवासियों द्वारा सामूहिक सहायता से करवाया गया। मुख्यमंत्री निवासियों के निमंत्रण पर उक्त विवाह समारोह में सम्मिलित होने पहुंचे।

मुख्यमंत्री रावत ने वर-वधू को आर्शीवाद दिया तथा उनकें मंगलमय वैवाहिक जीवन की कामना की साथ ही साथ मुख्यमंत्री ने कहा कि भानियावाला ग्रामीण क्षेत्र के लोगों द्वारा सामूहिक आर्थिक सहायता द्वारा अनाथ बालिका का विवाह करवाने का प्रयास समाज के लिए आदर्श तथा प्रेरणास्रोत है। दीपा का विवाह करवाकर स्थानीय लोगों ने मिसाल कायम की है। इससे यह भी संदेश मिलता है कि माॅं बाप की अनुपस्थिति में समाज मजबूती से अभिभावक की भूमिका निभाता है।

दीपा के अपने माॅ पिता नहीं है तो क्या, समाज ने उसे अकेले नहीं छोड़ा, उसका विवाह करा जन कल्याण और वसुधैव कुटुम्बकम् की धारणा को सिद्ध किया। इस प्रकार के प्रयासों को प्रोत्साहन देना चाहिए।

दून पुलिस ने धरा पुश्तैनी चोरों का गैंग

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24 मई को श्रीमती सरोज चौरसिया, नालापानी चौक, सहस्त्रधारा रोड ने सूचना दी कि दिनांक 20 मई को वह अपनी स्कूटी से पलटन बाजार सामान खरीदने गई थी और अपनी स्कूटी खड़ी कर सब्जी खरीदने लगी। इतने में किसी अज्ञात व्यक्ति ने स्कूटी में रखा पर्स, मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड आदि सामान चुरा लिया। साथ ही बताया मोबाइल फ़ोन में पेटीएम से चोर ने उनके खाते से 74,980/- रुपए निकाल लिए। इस पर कोतवाली पुलिस द्वारा गंभीरता दिखाते हुए तत्काल मुकदमा अपराध संख्या 258/17 धारा 379/420 आईपीसी पंजीकृत किया गया। उल्लेखनीय है कि इस प्रकार की अन्य घटनाएं भी कोतवाली क्षेत्र में अन्य स्थानों में घटित हुई थी। कोतवाली पर टीम का गठन किया गया तथा साइबर सेल/ एस.ओ.जी. की मदद से वादिनी के खाते से हुई निकासी के संबंध में डिटेल प्राप्त की गई, जिससे पुलिस टीम को अभियुक्त के खाते का अलर्ट मोबाइल नंबर मिल गया।

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इसी क्रम में सर्विलांस /मुखबिर की सूचना पर दिनांक 7 जून को चेकिंग के दौरान सहारनपुर रोड पर भूसा स्टोर के पास दो वाहनो, आल्टो कार डीएल 2सीएएच 0591 व वैगन आर कार एचआर 51एक्स 5024 को रोककर अभियुक्तो को गिरफ्तार किया गया। जिसमें अभियुक्तगणों द्वारा बताया गया कि यह उनका पुश्तेनी काम है और यह लोग भीड़ भाड़ वाले इलाके में इस काम को अंजाम देते हैं। चोरी का काम महिला द्वारा किया जाता है तथा साथ ही पुरुष घटना के समय साथ-साथ रहते हैं।

गैंग की मुखिया अनीशा है, जिसके निर्देशन में चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया जाता था, साथ ही यह भी बताया कि यह अपराध इस प्रकार का है कि बहुत कम लोग पुलिस को सूचना देते हैं। जिस कारण हमें कोई परेशानी नहीं होती। हमारे द्वारा देहरादून, हरिद्वार, रुड़की, मसूरी आदि स्थानों पर घटनाओं को अंजाम दिया जा चुका है।  अपराधियों की गिरफ्तारी से कई मुकदमों का माल बरामद हुआ है, जिसकी जनता तथा पुलिस अधिकारियों द्वारा भूरी भूरी प्रशंसा की गई। जिसमे एसएसपी ने टीम का मनोबल बढ़ाने हेतु ₹2500/- की धनराशि ईनाम में देने की घोषणा की।

उत्तराखंड विधान सभा का नया बोर्ड संस्कृत में

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देश में कुछ बदला हो या नहीं लेकिन रोज़ रोज़ सांकेतिक बदलाव ज़रूर देखने को मिल रहा है। इसकी ताज़ा मिसाल देखने को मिलि है उत्तराखंड में जंहा राज्य विधानसभा का बोर्ड अब संस्कृत भाषा में बदल दिया बया है।

8 तारीख से शुरु हुए राज्य विधान सभा सत्र के पहले दिन देहरादून स्थित विधान भवन पहुंचे विधायकों और अन्य लोगों को उस समय झटका लगा जब विधानसभा के ऊपर लगा हुआ बोर्ड नया मिला। इस नए बोर्ड पर हिंदी के साथ साथ संस्कृत भाषा में उत्तराखंड विधानसभा लिखा था। इस सत्र में राज्य विधानसभा के लिए और भी चीजें नई हुई हैं। राज्य में पहली बार ई-बजट यानि की पेपरलेस बजट पेश किया गया।

इस बदलाव का समर्थन करते हुए बीजेपी के मीडिया प्रवक्ता डां.देवेंद्र भसीन ने कहा कि ”संस्कृत तो हमारी पहचान है, और हमारे उत्तराखंड सरकार ने संस्कृत को दूसरी भाषा के रुप में स्वीकार किया है। मेरे हिसाब से इसमें कुछ गलत नही हैं अप अपनी सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हैं”।

वहीं कांग्रेस के प्रवक्ता सुरेंद्र अग्रवाल ने विधानभवन में लगे संस्कृत के बोर्ड पर कहा कि “जो शुरु से हो रहा वहीं एक बार फिर हुआ, संस्कृत भाषा को बढ़ावा देना ठीक है लेकिन हम उम्मीद करते हैं सरकार जुमलेबाजी से काम ना चलाए इससे बाहर आने की जरुरत हैं”।

इससे पहले बीजेपी सरकार के कार्यकाल संभालने के बाद राज्य के देहरादून जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर 100 फीट का तिरंगा फहराया गया। इसके बाद विश्वविद्धालयों में तिरंगा फहराने का कल्चर जिसमें ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी में 111 फीट तिरंगा फहराया गया था। 

संस्कृत और हिंदी भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार की यह कोशिश कितनी कारगर साबित होती है यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन एक बात तो तय है कि अगर सरकार सच में संस्कृत को बचाने के लिए कोशिश करना चाहती है तो उसे बोर्ड पर संस्कृत में लिखने से और बहुत ज्यादा करने की जरुरत है।

वीआईपी नंबर की दौड़ में आगे रहने के लिए जल्द करें आवेदन

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अगर आपको अपनी पसंदीदी गाड़ी के लिए वीआईपी नंबर चाहिये तो 15 जून तक संभागीय परिवहन कार्यालय में दस हजार रुपये का ड्राफ्ट जमा कर दें। ड्राफ्ट सहायक परिवहन आयुक्त के नाम से होगा। 15 जून के बाद कभी भी वाहन नंबरों की नीलामी होगी। इसकी जानकारी रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर दी जाएगी।
राज्य में वाहनों के वीआईपी नंबरों की ऑनलाइन बोली 15 जून से लगेगी। इसकी प्रक्रिया शुरू हो गई है। हालांकि अभी तक किसी भी ने भी ड्राफ्ट जमा नहीं किया है। लेकिन परिवहन विभाग के अधिकारियों को उम्मीद है कि 15 जून तक कई ड्राफ्ट आ जाएंगे, जिसके चलते बोली का रेट काफी बढ़ेगा।

हालांकि अभी तक लोगों में फिक्स रकम वाले नंबरों को लेकर आकर्षण ज्यादा है। संभागीय परिवहन अधिकारी सुधांशु गर्ग ने बताया कि हाल ही में ड्राफ्ट लेने शुरू किए हैं। इसलिए अभी लोगों को कम जानकारी होगी। लेकिन जैसे-जैसे लोगों को सूचना मिल रही है कार्यालय में जानकारी लेने आ रहे हैं।

नीलामी के बजाय फिक्स रकम वाले नंबरों पर रुचि दिखा रहे लोग।नीलामी के अलावा भी कई ऐसे नंबर हैं, जिनके रेट फिक्स हैं। ऐसे नंबर काफी बिक चुके हैं।

इन नंबरों की ऑनलाइन बोलीः
0001, 0002, 0003, 0004, 0005, 0006, 0007, 0008, 0009, 0011, 0022, 0033, 0044, 0055, 0066, 0077, 0088, 0099, 0100, 0101, 0777, 0786, 0999, 1111, 2222, 3333, 4444, 5555, 6666, 7000, 7070, 7272, 7777, 7979, 8888, 9000, 9191, 9999

इन नंबर के लिए देने होगे पांच हज़ार रुपयेः

0111, 0222, 0444, 0555, 0666, 0888, 1122, 1133, 1144, 1155, 1166, 1177, 1188, 1199, 1786, 1881, 2211, 2233, 2244, 2255, 2266, 2277, 2288, 2299, 2772, 2786, 3311, 3322, 3344, 3355, 3366, 3377, 3388, 3399, 3663, 3786, 4411, 4422, 4433, 4455, 4466, 4477, 4488, 4499 जैसे महत्वपूर्ण नंबरों को पांच हजार रुपये चुकाने होंगे।

इन नंबर से लिए देने होगे दस हज़ार रुपयेः

आरटीओ संधाशु गर्ग ने बताया कि इन नंबरों में 8000, 8008, 8100, 9009 9100 9200 9300 9400 9500 9600 9700 9800 9900 जैसे आकर्षक नंबर हासिल करने के लिए दस हजार रुपये चुकाने होंगे।