टेली रेडियोलाॅजी पद्धति दूर करेगी विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी
दून के भाई-बहन ने कोरिया में दिखाया कमाल
अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में दून के दो खिलाड़ियों ने पदक जीतकर प्रदेश का मान बढ़ाया है। दक्षिण कोरिया के चुनचाइन शहर में आयोजित इस प्रतियोगिता में 41 एवं 29 किलो वर्ग में शिवांग चौधरी और स्नेहा चौधरी ने रजत पदक हासिल किया, दोनों भाई-बहन हैं।
प्रतियोगिता में 182 देशों के खिलाडिय़ों ने हिस्सा लिया। 41 किलो वर्ग में दून के शिवांग चौधरी का फाइनल मुकाबला रुस, ड्रेनमा एवं कोरिया के खिलाड़ियों के साथ हुआ। जबकि, स्नेहा की भिड़ंत इंडोनेशिया, कोरिया एवं रुस के खिलाड़ियों के साथ हुई, जहां दोनों ने रजत पदक जीता।
स्नेहा पूर्व में थाईलैंड में आयोजित एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड जीत चुकी हैं। शिवांग चौधरी उत्तराखंड स्टेट लेवल पर सब जूनियर चैंपियन रहे हैं। उनके अलावा सीनियर वर्ग के 58 किलो भार वर्ग ग्रुप में बागेश्वर के गजेंद्र परिहार ने कांस्य पदक जीतकर प्रदेश का मान बढ़ाया है।
मनरेगा कार्यो में नियमित भुगतान न होने से आक्रोश
उत्तराखंड के जनपद चमोली में मनरेगा योजना में मजदूरी का भुगतान नियमित न होने से मनरेगा श्रमिकों को इस योजना को लेकर अविश्वास की स्थिति पैदा होने लगी है। जबकि विकास विभाग के अधिकारियों का दावा है कि उनके द्वारा वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए 68 करोड़ 40 लाख का भुगतान कर दिया गया है।
चमोली जनपद में मनरेगा कार्यों के लिए वित्तीय वर्ष 2016-17 में लगभग 93 करोड़ 34 लाख के कार्य किए गए हैं। जिसके सापेक्ष में विकास विभाग द्वारा 68 करोड़ 40 लाख का श्रमिकों का भुगतान किये जाने तथा 21 करोड़ की सामग्री के लिये भुगतान किये जाने का दावा किया जा रहा है। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा श्रमिक खातों में धनराशि न आने की शिकायत कर रहे हैं। मनरेगा भुगतान को लेकर कई बार ग्राम पंचायत प्रतिनिधि प्रदर्शन और आंदोलन भी कर चुके हैं। लेकिन वर्तमान तक भी मामले का निस्तारण नहीं किया गया है।
ग्राम पंचायत मैड़-ठेली के प्रधान सुरेंद्र सिंह का कहना है कि, ‘ग्राम पंचायत में वर्ष 2016 में हुए गोठ सुधार कार्य का अभी तक भुगतान नहीं हो पाया है। जबकि ब्लॉक के अधिकारियों की ओर से खातों में भुगतान करने की बात कही जा रही है। चमोली जिले के जिला विकास अधिकारी आनंद सिंह का कहना है कि, ‘मनरेगा योजना के तहत हुए कार्यों में श्रमिको की मजदूरी का 68 करोड़ 40 लाख की धनराशि भुगतान किया जा चुका है। लेकिन श्रमिकों की भुगतान न होने शिकायत के बाद अब बैंक और पोस्ट ऑफिस के अधिकारियों के साथ बैठक की जा रही है। साथ ही ग्राम प्रधानों से भुगतान से छूटे श्रमिकों की सूची मांगी गई है। शीघ्र समस्या का निस्तारण कर लिया जाएगा।’
नारी निकेतन में संवासिनियों का हंगामा, तोड़फोड़
बीते वर्ष कई बार यौन शोषण के मामले में विवादों में रहे नारी निकेतन देहरादून में गुरुवार रात को एक बार फिर जमकर हंगामा हुआ जो आधी रात के बाद भी जारी रहा और पीएसी व प्रशासनिक अधिकारियों के आने के बाद किसी तरह मामला शांत हुआ।
गुरुवार को घर जाने की जिद पर अड़ी कुछ संवासिनियों ने नारी निकेतन देहरादून में देर रात जमकर बवाल किया। इस मांग को लेकर संवासिनियां उग्र हो गई। उन्होंने पथराव कर निकेतन की खिड़कियों व दरवाजों के शीशे चकनाचूर कर दिए और फर्नीचर भी तोड़ डाला। पहले तो नारी निकेतन प्रशासन मामले को दबाने में जुटा रहा, मगर हालात बिगड़ने पर पीएसी बुलानी पड़ी। पीएसी ने किसी तरह हालात पर काबू पाया।
सूत्रों ने बताया कि मामला गत देर शाम करीब सात बजे शुरू हुआ, जब कुछ संवासिनियों ने निकेतन की अधीक्षक कंचन आर्य से घर जाने देने की जिद की तो आर्य ने उन्हें धमका कर भगा दिया। आरोप है कि आर्य ने उन्हें बंद करने की चेतावनी दी, इस पर संवासिनियों का पारा चढ़ गया। रात करीब नौ बजे संवासिनियों ने नारेबाजी शुरू कर दी, लेकिन निकेतन प्रशासन ने उन्हें हटा दिया। देर रात करीब 11 बजे मामला फिर बिगड़ गया और संवासिनियां नारेबाजी करते हुए पथराव करने लगीं। नारी निकेतन कर्मियों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो दोनों पक्षों में जमकर हाथापाई हुई। हालात बेकाबू होने पर नेहरू कॉलोनी पुलिस को सूचना दी गई।
एक कंपनी महिला पीएसी मौके पर भेजी गई। सिटी मजिस्ट्रेट जीएस मर्तोलिया व जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट भी मौके पर पहुंचे और किसी तरह रात करीब एक बजे हालात पर काबू पाया गया। बता दें कि अक्सर विवादों में रहने वाला दून नारी निकेतन दो साल पहले यौन शोषण मामले में भी काफी किरकिरी झेल चुका है। एडीजी राम सिंह मीणा के मुताबिक, ‘हालात काबू में हैं। कुछ संवासिनियों ने घर जाने की जिद को लेकर हंगामा किया है। फिलहाल पुलिस बल मौके पर तैनात रहेगा।’
जिलाधिकारी देहरादून एसए मुरुगेसन ने बताया कि सिटी मजिस्ट्रेट को मौके पर भेजा गया था। मामले में नारी निकेतन प्रशासन की लापरवाही उजागर हुई है, जिला प्रशासन को कोई सूचना नहीं दी गई, जो बेहद गंभीर है। दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सर्वदलीय धरने का आंठवा दिन,सीएमएस के कार्यालय पर जड़ा ताला
उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के प्रवेश द्वार ऋषिकेश के एक मात्र सरकारी अस्पताल के हाल सरकार के तमाम वादों की हकीकत बताने के लिए काफी है। यहाँ काफी लंबे समय से डाक्टर की कमी के चलते मरीजों को काफी दिक्केतें हो रही है। डॉक्टर्स की नियुक्ति को लेकर लोगों का सर्वदलीय धरना आंठवे दिन भी जारी रहा। जिस बाद लोगों ने सी.एम.एस के कार्यालय पर ताला जड़ दिया और जोरदार प्रदर्शन किया।
मीडिया से बात करते हुए प्रदेश कांग्रेस, जिलाध्यक्ष जयेन्द्र रमोला ने बताया कि, ‘ऋषिकेष के एकमात्र सरकारी अस्पताल में पिछले कई समय से डॉक्टर्स की कमी है बावजूद इसके अभी तक यहां डॉक्टर्स के खाली पड़े पद नहीं भरे है जिससे लोगों को काफी दिक्कतें हो रही है, उन्होंने बताया कि अगर यहां जल्द से जल्द डॉक्टर्स की नियुक्ति नही की गई तो वो शहर में चक्काजाम तक किया जाएगा।
अब भी निश्चित नहीं है कहां बनेगा उत्तराखंड का ”नेशनल गेम विलेज”
38वें राष्ट्रीय खेल को होने में अब 1 साल ही बचा हैं, लेकिन अभी भी उत्तराखंड सरकार यह निर्णय नहीं ले पाई है कि आखिर खिलाड़ियों के लिए र्स्पोटस विलेज कहां पर बनाया जाएगा। तैयारियां लगभग पूरी हैं लेकिन र्स्पोटस विलेज अभी भी निश्चित नहीं है। ये खेल गढ़वाल क्षेत्र के देहरादून और कुमाऊं के हल्दवानी क्षेत्र में आयोजित किया जाएगा। देशभर के एथलिट्स लगभग 32 इवेंट में भाग लेगें।
उत्तराखंज में 2015 की सत्ताधर सरकार यानि की कांग्रेस सरकार ने इसका निष्कर्ष निकाला था की सहस्त्रधारा रोड पर स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड के पास र्स्पोटस विलेज का निर्माण कराया जा सकता है। दरअसल योजना यह थी कि ट्रेंचिंग ग्राउंड को शहर से दूर शिशमबरा में शिफ्ट कर दिया जाएगा और फिर उस भूमि पर र्स्पोटस विलेज बनाया जाए। लेकिन समय के साथ यह योजना भी अधूरी रह गई।
खेल मंत्री अरविंद पांडे ने कहा कि, ‘अलग से र्स्पोट विलेज बनाने से बेहतर विकल्प है कि जो प्राईवेट बिल्डिंग इस्तेमाल में नहीं आ रही हों वह लेकर उसका प्रयोग र्स्पोट विलेज के लिए किया जाए।’ पांडे ने कहा कि, ‘हमारी अधिकारियों से बात चल रही है कि प्राइवेट बिल्डिंग को किराये पर लेकर फिलहाल उसको ही इस्तेमाल किया जाए।’ पांडे ने कहा कि, ‘या तो हम बिल्डर को कारपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलीटी के माध्यम से काम करने को कहेंगे या फिर हम उन्हें उनके बिल्डिंग का किराया देंगे।’
सरकार के इस आधे-अधूरे योजना पर लोगों का मानना है कि खेल को लेकर सरकार का जो रवैया है वह बिल्कुल ही ढीला और गलत है। उम्मीद की जा रही थी कि नेशनल गेम से उत्तराखंड को एक अलग पहचान मिलेगी लेकिन आधी-अधूरी तैयारियों के साथ ना केवल उत्तराखंड में बल्कि पूरे देश के सामने राज्य का नाम खराब होगा।
सड़क बंद होने की वजह से 108 में दिया बच्ची को जन्म
जौनसार-बावर में एक तो पहले से ही स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है, ऊपर से आए दिन बंद हो रहे मार्ग की कीमत कब किस मरीज को जान देकर चुकानी पड़े, कहा नहीं जा सकता। डिलीवरी के लिये सीएचसी चकराता, पहुंची गर्भवती को पर्याप्त सुविधाओं के अभाव में हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। लेकिन, कालसी-चकराता मार्ग पर पेड़ गिरा होने के कारण 108 एंबुलेंस को बीच में ही रोकना पड़ा। महिला की हालत बिगड़ती देख ईएमटी उपेंद्र सिंह व चालक श्याम सिंह ने फोन पर चकराता सीएचसी के चिकित्सकों से बात कर महिला का प्रसव कराया अौर साहिया, के पास महिला ने बच्ची को जन्म दिया फिर उसे सीएचसी विकासनगर में भर्ती कराया गया। ईएमटी ने बताया कि पिछले साल विनीता का रसोली का आपरेशन हुआ था, खतरा देख चिकित्सकों ने महिला को दून रेफर किया था।
चकराता छावनी बाजार के एक रेस्टोरेंट में काम करने वाले गज्जू की पत्नी विनीता को गत शाम प्रसव पीड़ा हुई। गज्जू की पत्नी को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चकराता ले जाया गया। जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद गर्भवती विनीता को हायर सेंटर रेफर कर दिया। सीएचसी चकराता से 108 गर्भवती महिला को लेकर दून के लिए चली, लेकिन, कालसी-चकराता मार्ग पर पेड़ गिरा होने पर 108 की गाड़ी बीच रास्ते में ही फंस गई। अन्य कोई वैकल्पिक मार्ग न होने के कारण 108 ने एसडीआरएफ की टीम को सूचना दी। टीम ने किसी तरह मशक्कत के बाद पेड़ को थोड़ा सरका कर 108 की गाड़ी को निकाला।
लापता सिख श्रद्धालुओं के वाहन का मिला सुराग
अमृतसर,पंजाब से हेमकुंड तीर्थ यात्रा के लिए आए 8 सिख तीर्थ यात्रियों का दल 6 जुलाई से कार सहित लापता था। इस संबंध में एक लिखित तहरीर यात्रियों के परिजन ने थाना गोविंदघाट को दी थी, अब इस मामले में पुलिस को सुराग हाथ लगे है। जिसमें गाड़ी के लोगो समेत साइड बीडिंग मिली है।
टैइया पुल से 200 मी गोविंद घाट की तरफ, लापता आठ सिख श्रद्धालुमय वाहन की तलाश में सर्च अभियान के दौरान पुलिस को सड़क पर टायर मार्क व सड़क से नीचे झाडियां मे टूटी दिखाई दी हैं। पुलिस और एसडीआरएफ द्वारा मौके पर सड़क के नीचे तलाश कर रही है।
थानाध्यक्ष गोविंदघाट द्वारा बताया गया है कि सड़क नीचे सर्च अभियान से पुलिस व एसडीआरएफ को दो पगड़ी, इनोवा गाड़ी का लोगो व गाड़ी की साइड विडिंग मिली है। परिजनों द्वारा पगड़ी व साइड बीडिंग (जो उसी इनोवा गाड़ी पर अलग से लगाई गई थी) की पहचान की है। उक्त स्थान पर अलकनंदा का बहाव बहुत तेज है, जनपद पुलिस ,एसडीआरएफ द्वारा सर्च अभियान जारी है।
स्मेक के साथ 4 अभियुकत गिरफ्तार
13/14-7 की रात को एसएसपी के निर्देशन में देहरादून में नशे के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के अन्तर्गत थानाध्यक्ष प्रेमनगर के नेतृत्व में संदिग्ध व्यक्तियों एवम वाहनों आदि का चेकिंग अभियान कर दौरान 4 अभियुकत प्रकाश पंत, रिक्की, ब्रजेश व नीरज को सिध्दहोवाला से अवैध 30 ग्राम स्मेक (मॉर्फिन) सहित एनडीपीएस एक्ट में गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की गई।
अभियुक्तगण द्वारा प्रारम्भिक पूछताछ में बताया कि चारों छात्र जोकि 20-23 साल के है, लगभग 7-8 महीने से नशा करने के आदि थे अौर अपनी इसी लत को पूरा करने के लिए मुरादाबाद से सस्ते दाम पर स्मेक लाकर देहरादून में पढ़ने वाले छात्रों को मोटे दाम पर बेचकर अपने नशे की लत को पूरा करना बताया।
अभियुकतगण द्वारा पूछताछ पर देहरादुन एवम उसके आस पास के कई नशा तस्करो के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है जिस पर जल्द कार्यवाही की जाएगी।
याचिका दायर होते ही दौड़े अफसर
कालाढूंगी रोड, हल्द्वानी पर जलभराव की दिक्कत तो कई साल से है लेकिन समाजसेवी हेम चंद्र कपिल ने बीते बुधवार को जब इस मामले को लेकर हाई कोर्ट में पीआइएल दाखिल की तो आनन-फानन में अधिकारी निरीक्षण के लिए दौड़ पड़े। गुरुवार को एडीएम हरबीर सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट पंकज उपाध्याय और ईई लोनिवि रणजीत सिंह रावत की संयुक्त टीम कालाढूंगी रोड पर पहुंची और निरीक्षण कर जलभराव की दिक्कत का समाधान कैसे हो, इसकी संभावनाएं तलाशी।
जीजीआइसी चौराहा, मुखानी चौराहा और पीलीकोठी के पास जलभराव की दिक्कत कई साल से बनी है, मगर सरकारी मशीनरी ने इसे लेकर कागजी प्रयास के अलावा और कुछ नहीं किया। जलभराव से जूझते स्थानीय व्यापारियों और लोगों ने इसकी शिकायत न जाने कितनी बार अफसरों से की, लेकिन अधिकारियों ने कोई सुध नहीं ली।
इधर, समाजसेवी कपिल ने बुधवार को जनहित याचिका हाई कोर्ट में दाखिल की। इसके बाद गुरुवार को एडीएम हरबीर सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट पंकज उपाध्याय, लोनिवि के ईई रणजीत सिंह रावत के साथ ही सिंचाई विभाग के लोग कालाढूंगी रोड रोड पहुंचे और वहां मुखानी चौराहा होते हुए पीलीकोठी तक निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने यह देखा कि रोड पर जलभराव के क्या कारण हैं और उसका निस्तारण किस तरह से किया जा सकता है।
इसे लेकर लोनिवि के अधिशासी अभियंता रणजीत सिंह रावत ने बताया कि, ‘मुखानी चौराहे से रकसिया नाले के बीच रोड का चौड़ीकरण कर बीच में नाला निर्माण और सड़क के दोनों तरफ नालियों का बहाव इस नाले से जोड़कर जलभराव की दिक्कत से छुटकारा पाया जा सका है।’ सिटी मजिस्ट्रेट पंकज उपाध्याय, ने बताया कि, ‘इस मामले को लेकर शनिवार को डीएम की अध्यक्षता में कैंप कार्यालय में संबंधित अधिकारियों की मीटिंग होगी। इसमें कालाढूंगी रोड पर जलभराव से निपटने की कार्ययोजना पर चर्चा की जाएगी।’





























































