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कार दुर्घटनाग्रस्त, दो घायल

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आज सुबह 8 बजे कंट्रोल रूम से सूचना प्राप्त हुई कि धूलकोट चौकी, झाझरा, देहरादून में एक कार दुर्घटनाग्रस्त हो गयी है, जिस पर चौकी प्रभारी झाझरा पुलिस बल लेक रमौके पर रवाना हुये।

मौके पर जाकर देखा तो एक कार ब्रेज़्ज़ा नंबर DL 2C AB 6338 जो देहरादून से दिल्ली जा रही थी अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ से टकरा गई है, जिसमे पति-पत्नी सवार थे।

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दोनों घायल अवस्था मे गाड़ी के अंदर थे, मौके पर मौजूद लोगों की मदद से गाड़ी से बाहर निकालकर 108 एम्बुलेंस के द्वारा अस्पताल भेजा गया, और परिजनों को सूचित किया गया। दोनों प्रीतमपुरा दिल्ली के रहने वाले है।

मनोज वाजपेयी हुए ठीक, शूटिंग के लिए लंदन रवाना होंगे

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दो दिनों पहले लगातार सरदर्द की शिकायत के बाद मनोज वाजपेयी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां से उनको डिस्चार्ज कर दिया गया है। अस्पताल से घर लौटकर मनोज वाजपेयी ने सोशल मीडिया पर जारी संदेश में बताया कि वे अब पूरी तरह से स्वस्थ हैं और शूटिंग के लिए तैयार हैं।

मनोज का इलाज उनके निजी डॉक्टर डॉ. विशेष अग्रवाल ने किया। मनोज वाजपेयी ठीक होने के बाद अब लंदन रवाना होंगे, जहां वे नीरज पांडे की फिल्म ‘अय्यारी’ के शेड्यूल में हिस्सा लेंगे। मनोज वाजपेयी के अस्वस्थ होने के बाद आशंका जताई जा रही थी कि अगर वे ठीक नहीं हुए, तो ये शेड्यूल रद्द किया जा सकता है। अब ऐसा नहीं होगा।

खबर है कि मनोज रविवार की रात को लंदन के लिए रवाना होंगे, जहां सिद्धार्थ मल्होत्रा और पूजा चोपड़ा के साथ शूटिंग में हिस्सा लेंगे। हाल ही में रामगोपाल वर्मा की फिल्म ‘सरकार 3’ में नजर आए मनोज वाजपेयी की जल्दी ही दो फिल्में रिलीज होने वाली हैं, जिनमें ‘द शैडो’ और ‘लव सोनिया’ के नाम शामिल हैं।

चर्चा ये भी है कि इरफान की फिल्म हिंदी ‘मीडियम’ की सीक्वल में इस बार प्रमुख भूमिका मनोज निभाएंगे, लेकिन मनोज इस खबर को लेकर अभी तक चुप हैं। नीरज पांडे की ‘अय्यारी’ अगले साल 26 जनवरी को रिलीज होगी। इसी दिन अक्षय कुमार के साथ रजनीकांत की फिल्म ‘रोबोट 2.0’ भी रिलीज होगी।

 

उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी ट्यूबलाइट : कबीर खान

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ईद के मौके पर रिलीज हुई सलमान खान की फिल्म ट्यूबलाइट बाक्स आफिस पर वो कमाल करने में नाकाम रही, जिसकी उम्मीद ‘बजरंगी भाईजान’ जैसी फिल्म देने वाली जोड़ी सलमान और निर्देशक कबीर खान की फिल्म से की जा रही थी। फिल्म के रिलीज होने के लगभग एक महीने बाद इस फिल्म को लेकर निर्देशक कबीर खान की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है।

कबीर खान ने कहा है कि उनको इस बात का दुख है कि ये फिल्म उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी, लेकिन उनके लिए ये फिल्म हमेशा स्पेशल रहेगी। कबीर खान का मानना है कि किसी भी फिल्म के हिट होने या न होने को लेकर टीम कुछ नहीं कर सकती। ये दर्शकों का फैसला होता है, जिसे हर किसी को मानना पड़ता है।

कबीर खान ने माना कि फिल्म से लगी बहुत ज्यादा उम्मीदें हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती थी, जहां हम कमजोर साबित हुए। कबीर खान ने ये मानने से मना कर दिया कि फिल्म की कहानी कमजोर थी। उनका कहना था कि ये उनकी तमाम फिल्मों में से बेहतरीन कहानी थी, जहां एक युवक का भोलापन चीन के साथ युद्ध को भी रोकने के लिए उसमें विश्वास लेकर आता है।

उन्होंने फिल्म के न चलने पर किसी को दोष देने से मना कर दिया और कहा कि ऐसा कोई सोच भी नहीं सकता। दर्शकों की प्रतिक्रियाएं अपनी जगह हैं, लेकिन हमारी टीम अब भी मानती है कि ये एक बेहतरीन फिल्म थी। कबीर खान ने अपनी आगामी फिल्म की योजना को लेकर अभी कुछ कहने से मना कर दिया, लेकिन चर्चा है कि उनकी नई फिल्म में रितिक रोशन और अमिताभ बच्चन काम करने जा रहे हैं।

एक चर्चा इस बात को लेकर भी है कि कबीर खान की नई फिल्म शाहरुख खान के साथ होगी, जिन्होंने ट्यूबलाइट में जादूगर का मेहमान रोल किया था। ट्यूबलाइट के निर्माण के दौरान सलमान के साथ कबीर खान के मतभेदों को लेकर भी कई खबरें लगातार आती रहीं। एक बार तो यहां तक खबर थी कि कबीर खान की जगह निर्देशन की कमान अब्बास जाफर अली को सौंपी जाएगी, जिन्होंने सलमान के साथ ‘सुल्तान’ बनाई है और अब ‘टाइगर जिंदा है’ बना रहे हैं। कबीर खान ने इन खबरों पर कुछ भी कहने से मना कर दिया।

यह वृक्ष ही बचाएंगे हमें

प्रकृति के बिना मनुष्य के जीवन की कल्पना संभव नहीं है। जल-जंगल के बिना जन का जीवन संभव है क्या? साधारण बुद्धि का व्यक्ति भी इस प्रश्न का उत्तर जानता है। लालच से वशीभूत आदमी प्रकृति का संवर्द्धन करने की जगह निरंतर उसका शोषण कर रहा है। हालाँकि वास्तविकता यही है कि वह प्रकृति को चोट नहीं पहुँचा रहा है, वरन स्वयं के जीवन के लिए कठिनाइयाँ उत्पन्न कर रहा है। देर से ही सही, अब दुनिया को यह बात समझ आने लगी है। पर्यावरण बचाने के लिए दुनिया में चल रहा चिंतन इस बात का प्रमाण है। भारत जैसे प्रकृति पूजक देश में भी पर्यावरण पर गंभीर संकट खड़े हैं। प्रमुख नदियों का अस्तित्व संकट में है। जंगल साफ हो रहे हैं। पानी का संकट है। हवा प्रदूषित है। वन्य जीवों का जीवन खतरे में आ गया है। पर्यावरण बचाने की दिशा में गैर-सरकारी संगठन और पर्यावरणविद् एवं प्रेमी व्यक्तिगत स्तर पर कुछ प्रयास कर रहे हैं। लम्बे संघर्ष के बाद उनके प्रयासों का परिणाम दिखाई भी दिया है। पर्यावरण के मसले पर समाज जाग्रत हुआ है। प्रकृति के प्रति लोगों को अपने कर्तव्य याद आ रहे हैं। पर्यावरण चिंतकों की ईमानदार आवाजों का ही परिणाम है कि सरकारों ने भी ‘वोटबैंक की पॉलिटिक्स’ के नजरिए से शुष्क क्षेत्र पर्यावरण पर गंभीरता से ध्यान देना शुरू किया है।

नदी और वन बचाने की दिशा में मध्यप्रदेश सरकार ने सराहनीय पहल की है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अगुवाई में पहले मध्यप्रदेश की जीवनरेखा नर्मदा नदी के संरक्षण के लिए अभूतपूर्व आंदोलन चलाया गया और अब रिकॉर्ड स्तर पर नर्मदा कछार में पौधारोपण किया गया है। मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार का दावा है कि दो जुलाई को पौधरोपण के महाभियान के तहत प्रदेश में एक दिन में छह करोड़ 63 लाख से अधिक पौधे रोपे गए हैं। यह पौधे एक लाख 17 हजार 293 स्थानों पर रोपे गए हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के आह्वान पर सरकार और गैर-सरकारी संगठनों ने पौधरोपण महाभियान में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया है। सरकार ने पौधरोपण को उत्सव की तरह आयोजित कर समाज को पर्यावरण बचाने का संदेश दिया है। उल्लेख करना होगा कि यह एक विश्व कीर्तिमान है। अब तक एक दिन में इतनी बड़ी संख्या में पौधरोपण नहीं किया गया है। इससे पहले उत्तरप्रदेश की सपा सरकार ने नाम एक दिन में पाँच करोड़ पौधे लगाने का कीर्तिमान गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड में दर्ज था। उत्तरप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को प्रकट करते हुए 11 जुलाई, 2016 को छह हजार से अधिक स्थानों पर पांच करोड़ पौधे लगवाए थे।
अमूमन होता यह है कि सरकारें या स्वयंसेवी संस्थाएं जोर-शोर से बड़े पैमाने पर पौधरोपण करती हैं, लेकिन उनका परिणाम लगभग शून्य ही आता है। दरअसल, पौधे रोप तो दिए जाते हैं लेकिन रोपा गया पौधा सूखे नहीं, इसकी चिंता नहीं की जाती है। यानी पौधरोपण की योजनाएं अकसर अपूर्ण होती हैं। ऐसे में पौधरोपण खानापूर्ति होकर रह जाते हैं। मध्य प्रदेश सरकार ने जब छह करोड़ पौधे लगाने की बात कही, तब सबके मन में यही आशंका थी कि पौधे लग तो जाएंगे लेकिन बचेंगे कैसे? छह करोड़ पौधों की चिंता कौन करेगा? समर्थ होने तक इन पौधों को पानी कौन देगा? यह अच्छी बात है कि मध्यप्रदेश सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिकॉर्ड बनाने के लिए पौधरोपण कर इतिश्री नहीं की है। बल्कि उन्होंने पौधारोपण की पूर्ण योजना बनाई है। अपने इस अभियान में सरकार ने स्वयंसेवी नागरिकों को ‘पौध रक्षक’ बनाकर रोपे गए पौधों की पेड़ बनने तक रक्षा करने की जिम्मेदारी सौंपी है। महात्मा गाँधी नरेगा योजना के जॉब कार्डधारी परिवारों को भी ‘पौध रक्षक’ बनाया गया है। मनरेगा के तहत तय किए गए पौध रक्षकों को पौधे के संधारण एवं जीवित रखने के लिए तीन से पाँच वर्ष तक मजदूरी का भुगतान किया जाएगा। ग्राम पंचायतों को भी पर्यवेक्षण के लिए राशि का प्रावधान किया गया है। वैसे भी इस प्रकार के समाजोन्मुखी अभियानों की सफलता समाज की सक्रिय सहभागिता के बिना संभव नहीं है। हम उम्मीद कर सकते हैं कि सरकार के इन प्रयासों के कारण छह करोड़ 63 लाख में से अधिक से अधिक पौधे पेड़ बन पाएंगे। यदि आधे पौधे भी अपने यौवन को प्राप्त कर लेंगे, तब भी यह सरकार की बड़ी उपलब्धि होगी।
मध्यप्रदेश में नर्मदा कछार में लगाए गए छह करोड़ 63 लाख पौधे निकट भविष्य में माँ नर्मदा को सदानीरा बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। हम जानते हैं कि नर्मदा नदी का उद्गम किसी ग्लेशियर से नहीं हुआ है। नर्मदा नदी की धारा में बहने वाली जलराशि पेड़ों की जड़ से निकली बूंद-बूंद है। जंगल कम होने के कारण से नर्मदा की धार मंथर और कृषकाय हो गई है। नर्मदा मध्यप्रदेश की जीवनरेखा है। यह प्रदेश के लाखों-करोड़ों लोगों का पोषण करती है। इसलिए नर्मदा का स्वस्थ और मस्त रहना जरूरी है। नर्मदा नदी का संरक्षण पेड़ों के अभाव में हो नहीं सकता। इसलिए भी मध्यप्रदेश सरकार के इस निर्णय की सराहना की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने भविष्य में भी इसी प्रकार वृहद स्तर पर पौधरोपण की बात कही है। समाज को साथ लेकर पर्यावरण के संरक्षण की जो पहल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने प्रारंभ की है, उसके दूरगामी परिणाम प्राप्त होंगे।
नमामि देवी नर्मदे-नर्मदा सेवा यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह घोषणा की थी कि नर्मदा के संरक्षण के लिए नर्मदा कछार में छह करोड़ पौधे लगाए जाएंगे। इससे पूर्व सिंहस्थ महाकुम्भ के दौरान आयोजित अंतरराष्ट्रीय विचार महाकुम्भ में भी उन्होंने कहा था कि नर्मदा नदी और पर्यावरण को बचाने के लिए सरकार नर्मदा सहित प्रदेश की प्रमुख नदियों के किनारे समाज के सहयोग से पौधरोपण कराएगी। उन्होंने पर्यावरण सरंक्षण के प्रति गंभीरता दिखाते हुए अविलम्ब अपनी घोषणा को धरातल पर उतारकर दिखा दिया है। निश्चित ही इस प्रयास के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान साधुवाद के पात्र हैं। पौधरोपण के महाभियान में उन्होंने एक और सार्थक एवं अनुकरणीय विचार प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री ने अमरकंटक में पौधरोपण महाअभियान का शुभारंभ करते हुए कहा कि प्रदेश में अब सार्वजनिक कार्यक्रमों की शुरूआत पौधरोपण एवं कन्या-पूजन से होगी। यकीनन आज जंगल बचाने की आवश्यकता है। एक शोध के अनुसार समूची दुनिया में तकरीबन तीन ट्रिलियन पेड़ हैं। देखा जाए तो पूरी दुनिया में हर साल तकरीबन 15 अरब पेड़ काट दिए जाते हैं। मौजूदा हालात गवाह हैं कि मानव सभ्यता की शुरुआत के बाद से दुनिया में पेड़ों की संख्या में 46 फीसदी की कमी आई है। यह स्थितियाँ किसी भी प्रकार मानव समाज के लिए ठीक नहीं कही जा सकती हैं। एक दावे के मुताबिक अभी दुनिया में कुल मिलाकर 301 लाख वर्ग किलोमीटर जंगल बचा है जो दुनिया की धरती का 23 फीसदी हिस्सा है। यदि दुनिया में जंगलों के खात्मे की यही गति जारी रही तो 2100 तक समूची दुनिया से जंगलों का पूरी तरह सफाया हो जाएगा। यदि यह दावा सच साबित होता है, तब हमें यह भी मान लेना चाहिए कि जंगलों के साथ हम सब भी खत्म हो जाएंगे। जंगल हैं इसलिए जल है और जल है इसलिए जीवन है। जीवन को बचाना है, तब जंगल को बचाना बेहद जरूरी है। मध्यप्रदेश सरकार को अपनी इस पहल को आगे भी जारी रखना चाहिए और अन्य प्रदेशों की सरकारों को भी प्रेरणा लेनी चाहिए।
(लेखक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक हैं )

पुलिस की असली अग्निपरीक्षा अब होगी शुरू

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कांवड़ मेले की सोमवार से पुलिस की असली अग्नि परीक्षा शुरू होगी। हरियाणा क्षेत्र के कांवड़ियों के लौटने का सिलसिला शुरू होगा तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश से डाक कांवड़ वाहन आएंगे। इसमें दुपहिया वाहन अधिक रहते हैं। अब तक हाईवे ठीक चल रहा है लेकिन सोमवार से इस पर दबाव बढ़ने का अनुमान है। कांवड़ मेले के शुरुआती दिनों में पैदल कांवड़ियों की भीड़ रहती है। अंतिम दिनों डाक कांवड़ शुरू होती है। पहले हरियाणा, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, पंजाब, राजस्थान आदि क्षेत्रों से कांवड़ियों आते हैं। सोमवार से इनकी वापसी का क्रम शुरू होगा। सोमवार से ही पश्चिम यूपी क्षेत्र से डाक कांवड़ियों के आने का सिलसिला आरंभ होगा। यहां से आने वाले कांवड़िये पुरा महादेव मंदिर में जल चढ़ाने जाते हैं। ऐसे में सोमवार व मंगलवार को हरिद्वार में भारी भीड़ रहने का अनुमान है। एक ओर जाने वालों की कतार रहेगी तो दूसरी ओर आने वाले रहेंगे। अब तक हाईवे करीब-करीब ठीक तरीके से चला है। सब कुछ पुलिस के ट्रैफिक प्लान के अनुसार चल रहा है, लेकिन सोमवार से हाईवे पर भी दबाव बढ़ जाएगा। पुलिस की असली परीक्षा शुरू होगी तो आम शहरवासियों को भी परेशानी झेलनी होगी।

दून में मलबा आने से आधा दर्जन मार्ग बंद

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देहरादून, जिले में कई जगहों पर मलबा आने से आधा दर्जन सड़क मार्ग बन्द हो गए हैं, जिसे खोलने के लिए जेसीबी द्वारा कार्य चालू है।

आपात केन्द्र के लोनिविप्रा खण्ड देहरादून के अन्तर्गत कार्लीगाड सरोना मोटर मार्ग, एलकेडी मोटर मार्ग, हाथीबड़कला मालसी मोटर मार्ग बन्द हैं। पीएमजीएसवाई सिंचाई खण्ड देहरादून सहस्त्रधारा चामासारी मोटर मार्ग, मालदेवता मोटर मार्ग अवरुद्ध हैं। मार्ग खोलने का कार्य जेसीबी द्वारा गतिमान है।

उधर, अधिशासी निदेशक आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबन्धन केन्द्र डाॅ. पीयूष रौतेला ने जानकारी दी है कि, ‘जिले में 17 जुलाई देहरादून, उत्तकाशी व चमोली जनपदों के कुछ स्थानों पर भारी वर्षा होने की सम्भावना व्यक्त की गई है। इसे देखते हुए सभी जिलाधिकारियों को आपदा प्रबन्धन सम्बन्धित समस्त सेवाओं को तत्पर रखने जाने के साथ किसी भी आपदा की स्थिति में प्रतिवादन का उच्च स्तर बनाए रखने हेतु सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देशित करने को कहा।’

 

नियमों की धज्जियां उड़ा रहे कांवड़िये

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कांवड़ मेले में कांवड़िये तमाम नियम कानून की धज्जियां उड़ाकर सफर कर रहे हैं, जिससे हरिद्वार शहर में अव्यवस्था फैल रही है। शिवभक्त जान जोखिम में डालकर यात्रा कर रहे हैं। एक बाइक पर जहां दो आदमी बैठकर यात्रा करते हैं, वहीं कांवड़िये एक बाइक पर चार-पांच लोग एक साथ बैठकर सफर कर रहे हैं। ट्रैक्टर, ट्रक व अन्य वाहन भी ओवरलोड होकर गंतव्यों को प्रस्थान कर रहे हैं।

कांवड़ मेले का चरम काल शुरू हो गया है। लाखों की संख्या में पैदल कांवड़िये अपने गंतव्यों को रवाना हो चुके हैं। शहर में डाक कांवड़ियों का प्रवेश होने के साथ ही नियम कानून की धज्जियां उड़नी शुरू हो गर्इ है। शहर में दूर-दूर तक बाइक, हजारों छोटे-बड़े वाहन दिखाई दे रहे हैं। कांवड़िये नियम कानून ताक पर रखकर एक बाइक पर चार-पांच सवारी बैठाकर सफर रहे हैं। कांवड़िये हेलमेट लगाने तक की जहमत नहीं उठा रहे हैं।

चार पहिया वाहनों की स्थिति तो और भी खतरनाक है। ट्रैक्टर-ट्रॉली में 40-50 लोग बैठकर जल लेने आ रहे हैं। ट्रक, टैंपो, छोटा हाथी, कार आदि की स्थिति भी यही दिखाई पड़ रही है। जिसे जहां जगह मिल रही है वह वहीं बैठकर यात्रा कर रहा है। एसपी सिटी ममता बोहरा का कहना है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों का चालान किया जा रहा है।

 

नशे की जद में सरोवर नगरी की लड़कियां

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स्मैक नैनीताल के लड़कों को बर्बाद तो कर ही रहा था अब लड़कियां भी इसके चपेट में आ गई हैं। पुलिस की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि नामी संस्थानों में पढ़ रही छात्राएं नशा कर रही हैं। स्मैक लिए हर रोज 300 रुपये की जरूरत के लिए वह कुछ भी करने का तैयार हो जाती हैं। डहरिया में एक महिला स्मैक सप्लाई का धंधा कर रही है, एक संस्थान की 15 फीसदी छात्राएं भी पुलिस के रडार पर हैं। हीरानगर पुलिस ने चार दिन पहले स्मैक पी रहे युवकों का पीछा किया था, उनके साथ एक लड़की पांच फीट ऊंची दीवार फांदकर चली गई थी।

पुलिस ने दूसरे दिन उसी लड़की को टेंपो में स्मैक पीते पकड़ लिया, उसके साथ दो किशोर भी थे। पूछताछ करने पर लड़की ने बताया कि वह 11वीं में पढ़ती है। एक दिन डहरिया की एक महिला ने उसे बुलाया और स्मैक देकर कहा कि थोड़ा लो, मजा आएगा। छात्रा के अनुसार पहली बार स्मैक पीने में काफी मजा आया, नींद भी अच्छी आई। इसके बाद उसकी स्मैक पीने वाले किशोरों से दोस्ती हो गई। दो महीने में हालत ऐसी हो गई कि अब वह बिना चरस के नहीं रह सकती। छात्रा के अनुसार नशे की तलब होने पर शरीर में टूटन होने लगती है, खाना अच्छा नहीं लगता है।

चौकी प्रभारी प्रताप सिंह नगरकोटी ने बताया कि “छात्रा से पूछताछ के बाद कई महत्वपूर्ण जानकारी हाथ लगी है। एक निजी संस्थान की 15 फीसदी छात्राएं स्मैक की शिकार हो गई है। अन्य कॉलेजों की दो से चार लड़कियां भी नशा कर रही हैं। हाॅस्टल में रह रही छात्राएं भी नशे के शिकार युवकों के संपर्क में आई हैं।” एसएसपी जन्मेजय खंडूरी का कहना है कि, ‘नशे की शिकार लड़कियों को पकड़ने के लिए अधीनस्थों के साथ गोपनीय प्लान तैयार किया गया है। जल्द ही इसका खुलासा किया जाएगा।  उत्तर प्रदेश के बाराबंकी से बरेली और किच्छा में स्मैक सप्लाई हो रही है। किच्छा से स्मैक नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में तस्कर स्मैक सप्लाई कर रहे हैं।’
नैनीताल पुलिस तस्करों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए अन्य जिलों से जानकारियां इकट्ठा कर रही है।  किच्छा से स्मैक सप्लाई होने की जानकारी मिलने पर एसएसपी जन्मेजय खंडूरी ने अभियान चलाया था। अभियान के दौरान कई तस्कर पकड़े गए लेकिन बड़े तस्कर पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सके। गिरफ्तार लोगों ने बताया कि बड़े तस्कर नशेड़ियों को लालच देकर स्मैक सप्लाई कराते हैं। पहले बरेली रोड पर बसों के माध्यम से स्मैक आती थी लेकिन पुलिस का शिकंजा कसने पर तस्कर ट्रेन से स्मैक लाने लगे। ट्रेनों में पुलिस की चेकिंग बढ़ने पर तस्कर अब रामपुर रोड, कालाढूंगी रोड पर बसों के माध्यम से स्मैक सप्लाई कर रहे हैं। पुलिस ने नशेड़ियों को पकड़ने के साथ-साथ तस्करों पर शिकंजा कसने की रणनीति बनायी है।
एसएसपी का कहना है कि बड़े तस्करों को पकड़ने में पुलिस को कई बार असफलता हाथ लगी है लेकिन वे निराश नहीं है। इस मामले में समीपवर्ती जिलों के पुलिस अधिकारियों से बातचीत कर तस्करों के खिलाफ जानकारियां इकट्ठा की जा रही है।

विधानसभा और सचिवालय बनेंगे अभेद्य किले

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उत्तर प्रदेश की विधानसभा में विस्फोटक मिलने के बाद उत्तराखंड विधानसभा एवं सचिवालय की सुरक्षा चाक-चौबंद कर दी गई है। ऐसी फूल प्रूफ व्यवस्था बनाई जा रही है ताकि गैर जानकारी में परिंदा भी पर न मार सके। इसके लिए विधानसभा का हर कोना सीसीटीवी कैमरा से सजाया जा रहा है ताकि कैमरे की नजर में हर गतिविधि रहे। व्यवस्था यहां तक की जा रही है कि वाहनों के प्रवेश पर भी सख्ती रूख अपनाया जाएगा।

नई व्यवस्था के अनुसार अब विधानसभा में केवल अधिकृत वाहनों को ही प्रवेश दिया जाएगा। साथ ही विधानसभा में नियमित पास के जरिए आने वालों की एंट्री को भी बायोमेट्रिक से जोड़ी जाएगी। इसके लिए विधानसभा द्वारा व्यवस्था की जा रही है।
विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचन्द अग्रवाल द्वारा विधानसभा सभा एवं प्रशासनिक अधिकारियों की एक बैठक में इस आशय के एक निर्देश दिए गए थे। इसी संदर्भ में विधानसभा अध्यक्ष ने विधानसभा का औचक निरीक्षण भी किया ताकि कमियां उनकी जानकारी में आ सकें। यही कारण है कि उन्होंने विधानसभा सुरक्षा को दुरुस्त करने के लिए अहम कदम उठाने के निर्देश दिए थे। कर्मचारियों के अलावा अन्य व्यक्ति जो नियमित रूप से विधानसभा आते हैं और जिनका वार्षिक पास बनता है उन लोगों की भी बायोमीट्रिक एंट्री की जाएगी।
विधानसभा सचिव जगदीश चंद ने कहा कि सचिवालय सुरक्षा को लेकर पहले से ही नियम बने हैं,अब इन्हें सख्ती से लागू किया जाएगा। इसी कड़ी में सचिवालय को भी विधानसभा जैसा ही अभेद्य बनाया जाएगा ताकि अवांछित तत्व सचिवालय में प्रवेश न कर सकें। उत्तराखंड सचिवालय प्रशासन अपने कार्मिकों के अलावा अन्य विभागों के कार्मिकों, बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश के मानक सख्त कर रहा है। पत्रकारों के प्रवेश के लिए भी पुरानी व्यवस्था को बदलने की कार्यवाही शुरू हो गई है।

मेडिकल में सरप्राइज सीटों पर भी मिलेगा राज्य के होनहारों को दाखिला

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अगर आप नीट परीक्षा की बाधा पार कर चुके हैं और एमबीबीएस की सीट पर दाखिले की दौड़ में शामिल हैं, तो यह खबर आपके लिए है। अभ्यर्थियों को एमबीबीएस की राज्य कोटे की तय सीट से अलग भी राजकीय मेडिकल कॉलेजों में दाखिले का तोहफा मिल सकता है। बीते वर्षों के आंकड़ों पर गौर करें तो आल इंडिया कोटे की सीट खाली रहने पर स्टेट कोटे में तब्दील हुई हैं यानी इस बार भी सरप्राइज सीटों पर दाखिले की पूरी गुंजाइश है।

उत्तराखंड में तीन सरकारी मेडिकल कॉलेज है। इनमें श्रीनगर व हल्द्वानी में एमबीबीएस की 100-100 सीट हैं, जबकि दून मेडिकल कॉलेज में 150 सीट। इनमें 15 प्रतिशत ऑल इंडिया जबकि शेष राज्य कोटा है लेकिन अगर पिछले वर्ष के आंकड़ों पर गौर करें तो ऑल इंडिया कोटे की खाली सीटों का लाभ स्टेट कोटे पर दाखिला लेने वाले अभ्यर्थियों को मिला था। यहां अतिरिक्त सीट पर एडमीशन किए गए।
एमबीबीएस के दाखिले को मुकाबला इस साल भी कड़ा है। सरकारी व गैर सरकारी कॉलेजों में दाखिले को सैकड़ों दावेदार हैं लेकिन, उसमें विकल्प बेहद सीमित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य के मेडिकल कॉलेजों की ओर बाहरी अभ्यर्थियों के कम रुझान को देखते हुए इस बार भी ऑल इंडिया की सीटें रिक्त रहने की संभावना है। इसका फायदा राज्य के अभ्यर्थियों को होगा। मेडिकल परीक्षा के विशेषज्ञ बलूनी क्लासेज के एमडी विपिन बलूनी का कहना है कि ऑल इंडिया काउंसिलिंग में रिक्त रहने पर सीट राज्य कोटे में भरी जाती है। वर्ष 2014 में आठ और 2015 में 15 सीट वापस हुई थी। गत वर्ष भी करीब 20 सीटों पर ऐसा ही हुआ। उन्होंने बताया कि पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण बाहरी अभ्यर्थियों का यहां के कॉलेजों में रुझान कम होता है। इसका फायदा राज्य के अभ्यर्थियों को हो सकता है।