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कानून व्यवस्था पर पुलिस कर्मियों की तय होगी जवाबदेही: अशोक कुमार

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कानून व्यवस्था बनाये रखने में, ट्रैफिक पर काबू रखने आदि पर काम कर रहे सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जायेगी। औऱ इसी के आधार पर उनके प्रदर्शन के आंका जायेगा। इसकी जानकारी हाल ही में राज्य के लाॅआॅर्डर की कमान संभालने वाले एडीजी अशोक कुमार ने दी। शुक्रवार को देहरादून में अधिकारियों की समीक्षा बैठक हुई। इस बैठक में कुमार ने कंट्रोल रूम से लेकर, मोबाइल युनिट और थानों के कार्यों की समीक्षा की।

बैठक में वरिष्ट अधिकारियों की मौजूदगी में ये तय हुआ कि

  • जिले में लगे ट्रैफिक कैमरों, डायल 100 पर आने वाली कॉलो, और वाहनों पर लगे जीपीएस ट्रेकिंग सिस्टम के बारे में नियमित जानकारी ली।
  • सीपीयू अपनी निर्धारित यातायात बीट में चैकिंग के अलावा यातायात व्यवस्था पर भी ध्यान देगी, किसी तरह के ट्रैफिक जाम होने पर सम्बन्धित सीपीयू यूनिट की जिम्मेदारी तय की जायेगी।
  • जो लोग अपनी पार्किंग जगहों को किसी और व्यापार आदि के लिये प्रयोग कर रहे हैं उनके विरुद्ध एमडीडीए के माध्यम से सीलिंग की कार्यवाही की जायेगी।
  • जाम लगने वाले स्थानों पर पुलिस नियुक्त करने, सार्वजनिक स्थानो पर अतिक्रमण करने व सडको पर निर्माण सामाग्री डालने वालों के खिलाफ कार्यवाही होगी।
  • सभी थाना प्रभारियों के कार्यों का आंकलन उनके थाना क्षेत्र से आने वाले शिकायती प्रार्थना पत्रो की संख्या के आधार पर भी किया जायेगा
  • सभी थाना प्रभारियों को सख्त निर्देश दिये गये की सोशल मीडिया से सम्बन्धित शिकायतों पर पीडित व्यक्ति को अनावश्यक परेशान न करते हुए उसका तुरन्त एक्शन लें।

ईलाज के लिए आये युवक की एम्स में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत

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चित्रः कृष्णा रावत

ऋषिकेश एम्स में उस वक़्त हड़कंप मच गया जब इलाज करने आये एक युवक की यहाँ संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गयी जिस के बाद परिजनों ने एम्स अस्पताल में जम के हंगामा किया।परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगते हुए कहा की 6 तारीख को मृतक एम्स में पट्टी करने आया था लेकिन डॉक्टरों ने युवक को भर्ती कर दिया जिस के बाद आज देर रात डॉक्टर ने परिजनों को फ़ोन में युवक की मौत की जानकारी दी।

जिसके बाद परिजनों ने एम्स अस्पताल में आकर जम के हंगामा किया। परिजनों ने एम्स प्रशासन पर ये भी आरोप लगाए की जब मरीज को रेफर करने को कहा तो डॉक्टरों ने रेफर करने से माना करते हुए कहा की अगर इस मरीज को यहाँ से ले गए तो अस्पताल की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।

आपको बता दे की ये ऋषिकेश एम्स का कोई पहला मामला नहीं है इससे पहले भी कई लोगो की एम्स में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबर आई है, फिलहाल अस्पताल प्रशासन मामले से पल्ला झड़ने की कोशिश करता दिख रहा है।

 

विधानसभा अध्य्क्ष ने किया निर्माणाधीन म्यूसियम का निरीक्षण

उत्तराखंड में निर्माण कार्य किस गति से हो रहे है इसका एक नमूना ऋषिकेश स्तिथ बस अड्डे में बन रहे म्यूजियम के हाल से बयां होता है, जहां एक गंगा एवं हिमालय पर आधारित हिमालय संघ्रालय बजट के अभाव के चलते 2014 से अधूरा लटका हुआ है।

समय-समय पर नेताओं ओर मंत्रियों के निरीक्षण के बावजूद कार्या आज भी थमा पड़ा है, आपको बता दे कि गंगा एवं हिमालय पर आधारित म्यूज़ियम भारत सरकार दवरा 2014 में 12 करोड़ 20 लाख की लागत से प्रस्तावित हुआ था जिसे 2 साल में बनकर तैयार होना था लेकिन सही समय पर बजट नही मिलने के कारण कार्य कछुए की चाल में चल रहा है।

अब विधानसभा अध्य्क्ष प्रेम चन्द अग्रवाल ने भी निर्माणाधीन म्यूसियम का निरीक्षण कर काम को जल्द पूरा करने की बात कही है। उन्होंने बताया कि कार्य अपने निर्धारित समय पर पूरा नही हो पाया है लेकिन अब इसे जल्द से जल्द पूरा किया जाएगा। लेकिन हक़ीक़त ये है की राज्य सरकार के पास अभी तक इस तरह के कार्यों को करने के लिए बजट का अभाव बना हुआ है ।

इस म्यूजियम के लिए भारत सरकार दवरा 80 प्रतिशत राशि देने और उत्तराखंड सरकार द्वारा 20 प्रतिशत राशि देने की बात कही गयी थी लेकिन इस बात को विधानसभा अध्यक्ष इस बात को स्वीकार रहे है की सरकार के पास बजट की कमी बनी हुयी है, हालात ये है की उत्तराखंड अपने हिस्से का 20 प्रतिशत राशि का भी भुक्तान नहीं कर प् रहा है ऐसे में सवाल उठता है की आखिर कब तक ये निर्माण कार्य पूरा होता है ?

 

वन भूमि के लंबित मामलों की सीएम ने की समीक्षा, अधिकारियों को दिए निर्देश

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मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने गुरुवार को सचिवालय में वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये प्रदेश के सभी जिलों में वन भूमि के लंबित प्रकरणों की समीक्षा की।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि जिन प्रकरणों में ‘काॅम्पनसेटरी लैण्ड’ का म्यूटेशन वन विभाग के नाम से होना है, उसे तत्काल पूरा किया जाए। जिन मामलों में एनपीवी जमा करना है उसे तुरंत जमा किया जाए। जिलाधिकारी व्यक्तिगत रूचि लेते हुए इसका अनुश्रवण करें। वन भूमि प्रकरण होने के चलते विकास योजनाओं में देरी होना उचित नहीं है। जिलाधिकारी सुनिश्चित करें कि विभाग वन भूमि हस्तांतरण के जो भी प्रस्ताव भेजे वह सही हों। छोटी-छोटी लिपिकीय त्रुटियों की वजह से विकास योजनाएं महीनों विलंबित हो जाती हैं।
बैठक में सुझाव प्राप्त हुआ कि सड़कों और अन्य विकास योजनाओं में वन भूमि के बदले दो गुनी भूमि देने की बाध्यता पर राजस्व विभाग, न्याय विभाग और वन विभाग की एक संयुक्त समिति बनाई जाए, जो सभी कानूनोें-नियमों के आलोक में अपनी संस्तुति दे। पीएमजीएसवाई जैसी केन्द्र पोषित योजनाओं के लिये दो गुनी भूमि देने के स्थान पर डिग्रेडेड फॉरेस्ट में वनीकरण के लिये दो गुना मुआवजा देने की अनुमति हेतु अनुरोध किया जाए। वन भूमि हस्तांतरण के लिए तैनात नोडल आॅफिसर को विभिन्न वन भूमि हस्तांतरण के प्रकरणों में आवश्यक नक्शे के निर्माण के लिये कुमाऊ एवं गढ़वाल में कुछ रीजनल केन्द्र बनाने को कहा गया। यह केन्द्र एटीआई नैनीताल, कुमाऊं विश्व विद्यालय और अन्य उच्च शिक्षण-शोध संस्थाओं में खोले जा सकते हैं।
सचिव ऊर्जा राधिका झा ने बताया कि उत्तरकाशी में 17 ग्रामों का विद्युतीकरण वन क्षेत्र में आने की वजह से प्रभावित हो रहा है, जिस पर नोडल अधिकारी को विशेष अनुमति हेतु प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिये गये। सीईओ पीएमजीएसवाई उत्तराखंड ग्रामीण सड़क एजेन्सी डाॅ. राघव लंगर ने बताया कि प्रदेश में वन भूमि हस्तांतरण के कुल 310 प्रस्ताव हैं, जिनमें 164 प्रस्तावों में सैद्धांतिक सहमति प्राप्त हो गई तथा 146 अवशेष प्रस्ताव है। 164 प्रस्तावों में 28 को विधिवत स्वीकृति प्राप्त हो गई है तथा 114 में म्यूटेशन प्रक्रिया हो गई है। 12 प्रकरण ऐसे है जिनसे एक से कम सीमा में आने के कारण म्यूटेशन की जरुरत नहीं हैं। 66 प्रकरणों को सभी औपचारिकताएं पूर्ण कर विधिवत स्वीकृति हेतु भेजा गया है। जनपद वार वन भूमि हस्तांतरण प्रकरणों में पिथौरागढ़ में 46, बागेश्वर में 23, चमोली में 33, रूद्रप्रयाग में 12, उत्तरकाशी में 31, चम्पावत में 27, अल्मोड़ा में 54, नैनीताल में 16, टिहरी में 21, पौड़ी गढ़वाल में 26, देहरादून में 20 तथा हरिद्वार 01 प्रस्ताव है।

दून के बाद अब डीयू के ‘दंगल’ में जुटे छात्र नेता

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दिल्ली यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव के लिए संगठनों ने अपने पत्ते खोल दिए हैं। डीयू की दोनों मुख्य पार्टियां एबीवीपी और एनएसयूआई ने अपने-अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है। इसी क्रम में अब जेएनयू और डीयू में चुनावी जमीन को मजबूती देने में उत्तराखंड के छात्र नेता भी जुट गए हैं।
उत्तराखंड में छात्र संघ चुनावों का महासंग्राम थम चुका है। अब बारी है दिल्‍ली यूनिवर्सिटी और जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव की। आठ सितंबर को जेएनयू और फिर 12 सितंबर को डीयू में छात्र संघ चुनाव होने हैं। चुनाव में अपने संगठनों को मजबूत करने के मकसद से उत्तराखंड के छात्र नेताओं ने भी दिल्ली में डेरा डाल दिया है। प्रदेश के विभिन्न कॉलेजों में छात्र संघ पदों पर जीतकर आए छात्र डीयू और जेएनयू के चुनावों के प्रचार में जुटे हैं। संगठन से जुड़े कार्यकर्ता दलों में बंटकर कॉलेजों और यूनिवर्सिटी कैंपस में चुनाव अभियान में जोर शोर से लगे हैं।
एबीवीपी की बात करें तो लगातार दो कॉलेजों में करारी शिकस्त के बाद राज्य के सबसे बड़े कॉलेज डीएवी पीजी कॉलेज में जीत का परचम लहराने और इससे पूर्व डीबीएस मेें भारी मतों से जीत हासिल की। इसके बाद गढ़वाल विश्वविद्यालय के छात्र महासंघ चुनाव में भी सभी पदों पर शानदार जीत दर्ज कर संगठन के कार्यकर्ताओं के हौसले बुलंद हैं। अब प्रदेश में एबीवीपी से जुड़े छात्र दिल्ली यूनिवर्सिटी के चुनाव प्रचार में जुटे हैं। डीएवी छात्र संघ अध्यक्ष शुभम सिमल्टी का कहना है कि हर साल दिल्ली यूनिवर्सिटी के चुनाव में संगठन को मजबूती देने के लिए कार्यकर्ता यहां जमा होते हैं। इस साल भी अपनी पूरी ताकत से चुनाव जिताने के लिए मेहनत करेंगे।

उत्तराखंड मूल के छात्रों की संख्या है ज्यादा
दिल्ली यूनिवर्सिटी की बात करें तो अकेले दिल्ली में उत्तराखंड मूल के परिवारों की संख्या काफी ज्यादा है। यूनिवर्सिटी चुनाव में उत्तराखंड मूल के छात्रों की संख्या भी चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। ऐसे में दिल्ली और उत्तराखंड से जाकर डीयू के कॉलेजों में दाखिला लेने वाले नए छात्रों तक पहुंच बनाने में उत्तराखंड के छात्र नेताओं की अहम भूमिका रहती है। इसके अलावा छात्र राजनीति में डीयू का अपना एक अलग अस्तित्व है। यहां राजनीतिक जमीन तैयार करने का एक बड़ फायदा यह भी है कि यहां से देश की राजनीति के बड़े नेताओं तक पहुंच बनाना आसान हो जाता है। यही कारण है कि प्रदेश भर के छात्र नेता इन दिनों दिल्ली में डटे हैं।

दक्षिण अफ्रीका टूर पर हाईकोर्ट में सुनवायी

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हाईकोर्ट ने इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के बहाने दक्षिण अफ्रीका टूर घोटाले के मामले में सुनवाई की। सुनवार्इ के दौरान हार्इकोर्ट ने अगली सुनवाई चार अक्टूबर को नियत कर दी है। पूर्व में कोर्ट ने इस मामले में जवाब दाखिल नहीं करने पर सरकार पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया था।

गाजियाबाद निवासी जयप्रकाश डबराल ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि 2006 में कांगे्रस सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन कैबिनेट मंत्री नवप्रभात और विधायक शैलेंद्र मोहन सिंघल समेत तीन वनाधिकारी इको पर्यटन को बढ़ावा देने के मकसद से दक्षिण अफ्रीका गए थे। इस दौरे में सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। साथ ही उच्च न्यायालय की निगरानी में मामले की जांच की मांग की। पूर्व में पूर्व विधायक शैलेंद्र मोहन सिंघल को नोटिस जारी किया गया था। बुधवार को प्रमुख वन्य जीव प्रतिपालक डीबीएस खाती के अधिवक्ता द्वारा अदालत में हलफनामा देकर मामले में अतिरिक्त समय मांगा। मामले की सुनवाई न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की खंडपीठ में हुई।

हादसे से सहमे हैं परिजन, वाहनों की जांच शुरु

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काशीपुरः अलीगंज रोड पर हुएदर्दनाक हादसे से सभी की रुह कांप उठी है, तेज गति से आ रही बस ने ओवर टेक करते हुए स्कूली बच्चों से भरे टेम्पो को जिस तरह से सामने से टक्कर मारी उससे टेम्पो के चिथरे उड गये, सड़क हादसे में टेंपो चालक व छात्रा की मौत के बाद परिवहन विभाग भी हरकत में आ गया। अभियान चलाकर बुधवार को स्कूलों की सेहत परखी। मानक के विरुद्ध होने पर तीन बसों सहित 13 वाहनों को सीज कर दिया गया। जबकि 17 वाहनों का चालान किया गया।

सोमवार को अलीगंज रोड पर निजी बस ने बच्चों को स्कूल ले जा रहे टेंपो को टक्कर मार दी थी। इससे टेंपो चालक व एक छात्रा की इलाज के दौरान मौत हो गई और आठ बच्चे घायल हो गए। एआरटीओ प्रशासन अनिता चंद ने बुधवार को अलीगंज व दढियाल रोड पर स्कूली वाहनों के खिलाफ अभियान चलाया। उन्होंने तीन स्कूली बस, तीन टेंपो, चार वैन को सीज कर दिया। जबकि 17 वाहनों का चालान कर दिया। इसमें एक भार वाहन था। किसी के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था, किसी वाहन का परमिट व फिटनेस नहीं था। किसी ने बीमा जमा नहीं किया था। एआरटीओ चंद ने बताया कि मानक के खिलाफ संचालित वाहनों पर कार्रवाई की जाएगी।

जिस तरह सड़क हादसे बढ़ रहे हैं। इसे देखते हुए परिवहन विभाग चालकों को प्रशिक्षण देगा। जिससे सड़क हादसों को रोका जा सके। कई ऐसे चालक हैं, जिनके पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है। फिर भी हैवी वाहन चलाते हैं, जो दुर्घटना का कारण बनता है। हादसों पर अंकुश लगाने के लिए विभाग ने चालकों को प्रशिक्षण देगा कि वाहन चलाने का नियम क्या है, किस रफ्तार से वाहन चलाया जा सके। एआरटीओ प्रशासन अनिता चंद ने बताया कि चालकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के लिए स्थान का जल्द चयन कर लिया जाएगा।

संस्कृत के बिना भारत को समझना मुश्किल : मुख्यमंत्री

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उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गुरुवार को विश्वनाथ धाम आश्रम में देववाणी परोपकार मिशन द्वारा आयोजित छठा संस्कृत सम्मेलन का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया।

संस्कृत के महत्व को बताते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि संस्कृत के बिना भारत को समझना अत्यंत कठिन है, क्योंकि भारत का ज्ञान भारत का विज्ञान सब संस्कृत में लिखा गया है। उन्होंने कहा कि आज बहुत से आविष्कार ऐसे हैं जिनका हमारे वेदों में संस्कृत भाषा में बहुत पहले ही बता दिया गया था। संस्कृत के विषय में सिर्फ संस्कृत के विद्यार्थी एवं अध्यापकों को ही नहीं विचार करना है, बल्कि यह एक सामूहिक चिंता का विषय है, लेकिन मैं एक बात कहना चाहता हूं की आने वाला भविष्य संस्कृत का ही है।
उन्होंने बताया कि पोलैंड से आए एक दल ने हमें बताया था कि उनके यहां संस्कृत पढ़ाई जा रही है, धीरे-धीरे आने वाले समय में उसे अनिवार्य कर दिया जाएगा। दल ने बताया कि संस्कृत अहिंसा को पैदा करती है, हिंसा की प्रवृत्ति को रोकती है, इसलिए आज संस्कृत की मान्यता बढ़ती जा रही है।

मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि संस्कृत को कंप्यूटर के लिए सबसे उपयुक्त भाषा बताया गया है। आज हमें संस्कृत के ज्ञाताओं की आवश्यकता है। उन्होंने संस्कृत के संरक्षण के लिए ठोस कार्य योजनाओं बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि यह सरकार की जिम्मेदारी है कि सरकार संस्कृत को संरक्षण दे, बढ़ावा दे, और सरकार इसके लिए प्रयासरत है।

बहुमत के आधार पर होगा ड्रेस कोड का निर्धारण

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गुरुवार को सूबे के उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय डाकपत्थर में शौर्य दीवार का अनावरण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि महाविद्यालयों में छात्र-छात्राओं के लिए ड्रेस कोड का निर्धारण बहुमत के आधार पर किया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक महाविद्यालय में तीन ड्रेस भेजी जाएंगी, जिनमें से बहुमत के आधार पर छात्र-छात्राओं की पसंद की ड्रेस को लागू किया जाएगा।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. रावत ने बताया कि 12 वर्ष से अधिक समय से एक ही महाविद्यालय में जमे शिक्षकों का तबादला किया जाएगा। उन्होंने छात्र-छात्राओं को स्वतंत्रता सैनानियों व वीर शहीदों के जीवन से प्रेरणा लेने की सलाह दी। शौर्य दीवार पर परमवीर चक्र प्राप्त 21 शहीदों के चित्र व उनका जीवन परिचय अंकित किया गया है।
डॉ. रावत ने कहा कि प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा में सुधार व गुणात्मकता लाना प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए धरातल पर कार्य किया जा रहा है। शीघ्र ही परिणाम सामने आएगा। उन्होंने कहा कि महाविद्यालयों में विश्वस्तरीय शिक्षा मुहैया कराकर युवा पीढ़ी को वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार किया जाएगा।
क्षेत्रीय विधायक मुन्ना चौहान ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की चुनौती का सामना युवाओं को ही करना है। लिहाजा युवाओं को किताबी ज्ञान से इतर संपूर्ण व्यक्तित्व विकास की ओर ध्यान देना होगा। इसके लिए छात्रों को शिक्षा की आधुनिक तकनीक से जुड़ना होगा। साथ ही उन्होंने छात्र-छात्राओं को देश के वास्तविक इतिहास की जानकारी लेने की सलाह भी दी। 

शनिवार को गंगा में विसर्जित की जाएंगी लावारिसों की अस्थियां

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धर्मयात्रा महासंघ के तत्वावधान में प्रतिवर्ष होने वाले लावारिसों के अस्थि विसर्जन कार्यक्रम के तहत इस बार श्रीलंका से पांच सौ लावारिस लोगों की अस्थियां हरिद्वार लाकर गंगा में विसर्जित की जाएंगी।

धर्मयात्रा महासंघ के प्रांतीय संरक्षक रविन्द्र गोयल ने बताया कि महासंघ पिछले 15 वर्ष से देश भर के विभिन्न शमशानों से लावारिस लोगों की अस्थियां एकत्र कर पूरे विधि विधान से गंगा में विसर्जित कर रहा है। इस बार देश के अलावा श्रीलंका से भी करीब पांच सौ लावारिस लोगों की अस्थियां हरिद्वार लाकर गंगा में प्रवाहित की जाएंगी।
उन्होंने बताया कि शनिवार को प्रातः नौ बजे निष्काम सेवा ट्रस्ट से बैण्ड बाजों व झांकियों के साथ अस्थि कलश यात्रा रवाना होगी। सैकड़ों लोगों के साथ अस्थि कलश यात्रा शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए कनखल स्थित सती घाट पहुंचेगी। जहां संत महात्माओं, समाज सेवियों की मौजूदगी में 100 किलो दूध के साथ पूरे विधि विधान के साथ गंगा में विसर्जित की जाएंगी।