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नए साल की शुरुआत पहाड़ों की रानी मसूरी के साथ

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2016 खत्म होने को है ओर नया साल दस्तक देने वाला है। नये साल का स्वागत करने के लिये अगर आप हर साल की तरह इस साल भी दोस्तों और परिवार के साथ कहीं बाहर जाना चाहते हैं लेकिन नोटबंदी ने आपकी तैयारियों में ब्रेक लगा दिया है तो आपके पास आपके बजट को सूट करने वाले आॅप्शन भी है। अगर आपने अब तक यह नहीं सोचा है कि इस नये साल पर आप कहां जाने वाले हैं तो पहाड़ों की रानी मसूरी, आप सभी पर्यटकों के स्वागत के लिए बिल्कुल तैयार है। नये साल की शुरुआत मसूरी के साथ।

आकाश में एक मील उचे बैठे मसूरी, हिमालय की पहली पहाड़ियों में आता है, सर्दी की धूप सबसे पहले यहां बहती है। यहां का मशहूर माॅल रोड सूरज की किरणों से और य़हां के लोगों के हँसते मुस्कुरोते चेहरों से हजारों पर्यटकों को पूरे साल अपनी और आकर्षित करता है लेकिन इसका आकर्षण सबसे ज्यादा साल के अंत में होता है, लोग अपनी रोजमर्रा की भागदौड़ छोड़ कर यहां साल का आखिरी दिन मनाने के लिए आते हैं।

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जैसा कि दिल्ली के स्मिताभ और उनके दोस्त बताते हैं कि “हम सब इस साल कुछ नया करना चाहते थे, तब हम आठ लोगों ने सोचा कि हमें किसी हिल स्टेशन पर जाना चाहिए और नये साल की शुरुआत करनी चाहिए, और फिर क्या था हमने क्रिसमस की शाम से मसूरी रहने का प्लान बना लिया।” चार साल के गौरव की एक छोटी सी ख्वाहिश है कि इस बार मसूरी में बर्फ गिरे ताकि वो एक वाइट क्रिसमस मना सके और मौसम तो हम भगवान पर छोड़तें हैं, फेस्टिव सीजन के साथ शहर के सारे होटलों में एक से एक आकर्षक पैकेज दे रहे हैं। सा में एक मस्ती से भरा विकेंड देने का वादा कर रहें हैं जो कि थीम पार्टी, तोहफे, संगीत और डांस से भरा होगा। पिछले साल तक लगभग सभी होटल दिसंबर के पहले हफ्ते में ही बुक हो जाते थे, लेकिन इस साल नोटबंदी की वजह से इसमें थोड़ी कमी आई है। होटल मालिक रजत अग्रवाल बताते हैं कि “नोटबंदी ने भले ही इस सीजन में बाधा डाली है, लेकिन क्रिसमस और नया साल हमेशा की तरह इस साल भी उतने ही धूमधाम से मनाया जाएगा।” दुकानदार अपनी दुकानें सजाने में और अपना स्टाॅक भरने में व्यस्त हैं ताकि इस सीजन में ज्यादा से ज्यादा कमाई कर सकें। ज्यादातर दुकानदारों ने आॅनलाइन पेमेंट लेने के इंतजाम कर लिये हैं और जो ये नहीं कर पा रहे हैं खासतौर पर छोटे दुकानदार वो अन्य कैशलेस पेमेंट के प्लेटफाॅर्म पर जा रहे हैं।

एक और शानदार सूर्यास्त हमें नये साल की शाम के और पास ला रहा, जो रह गए उनके पास अभी भी समय है कि वो अपने बैग पैक करें और मसूरी के लिए निकल जाएं ताकि 2017 की शुरुआत वो यहां कर सकें।

पूर्व मुख्य सचिव डाॅ टोलिया का निधन; नम आंखों से दी राज्य ने विदाई

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उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव डाॅ आर.एस टोलिया का अंतिम संस्कार हरिव्दार में कर दिया गया। डा. टोलिया का निधन आज सुबह लगभग 4:30 बजे दिल्ली के अपोलो अस्पताल में हुआ। 71 साल के डाॅ टोलिया पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। डाॅ टोलिया का जन्म देहरादून में 15 नवंबर, 1947 को हुआ था। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार, भारत सरकार और उत्तराखंड सरकार में विभिन्न पदों पर कार्य किया है। उन्होंने उत्तराखंड के पहले मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर भी काम किया ।

डाॅ टोलिया ने अपने जीवन में बहुत सी उपलब्धियां प्राप्त की हैं। एनटीपीसी के अध्यक्ष होने के साथ वो दून विश्वविद्यालय के सार्वजनिक नीति के लिए काम कर रहे थे। अपना ज्यादातर समय वो पहाड़ के विकास के एजेंडे के लिए कायक्रमों से जुड़े रह कर व्यतीत करते थे और वह भारतीय पर्वतों से संबंधित कुछ समितियों के सदस्य के रूप में भी काम कर रहे थे।

डाॅ टोलिया ने विभिन्न पदों पर कई बहुपक्षीय कार्य शैक्षिक और नागरिक समाज संगठनों जैसे की इंटरनेशनल सेंटर फार इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट(आईसीआईएमओडी), काठमांडू, नेपाल, सर रतन टाटा ट्रस्ट (एसआरटीटी), मुंबई, टेरी, कुमाऊं विश्वविद्यालय, सीएचईऐ(CHEA), एसोसिएशन आफ ब्रिटिश इस्कालर इंडिया, एलआईऐआर (NIAR) में भी काम किया है।

उन्होंने कई किताबें भी लिखी हैं। जिसमें से उनकी तीन पुस्तकों की ट्राइलॅजी (i) फुड फार थाट एंड एक्शन (ii) पटवारी, घरटऔर चाय, (iii) इन्साइड उत्तराखंड टुडे बहुत लोकप्रिय रहीं है। उनकी दो किताबेंए हैंडबुक फार द पब्लिक ईंफारमेशन आफिसरऔर लोकसभा अधिकारों की हस्तपुस्तिका में उत्तराखंड के प्रशासनिक  इतिहास के कुछ पहलुओं को भी दर्शाया  है।

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पूर्व मुख्य सचिव डॉ आरएस टोलिया के निधन पर दुख व्यक्त करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की है।

नहीं रहीं “अम्मा”!! जयललिता का लंबी बीमारी के बाद निधन

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तमिलनाडु की मुख्यमंत्री और देश की ताकतवर महिला राजनेत्रियों में से एक जयललिता का चेन्नई के अपोलो अस्पताल में सोमवार रात निधन हो गया। वह 68 वर्ष की थीं और तकरीबन पिछले 3 माह से अस्पताल में भर्ती थीं। जयललिता को रविवार शाम दिल का दौरा पड़ा। इसके बाद उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया। अपोलो के डॉक्‍टरों ने उनके निधन की पुष्टि एक प्रेस रिलीज़ जारी कर किया।
जब पहली बार सितंबर में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था तो उनकी पार्टी ने कहा था कि उन्हें डिहाइड्रेशन और बुखार है लेकिन जल्द ही यह स्पष्ट हो गया कि उनकी हालत गंभीर है। उन्हें कई सप्ताह तक रेस्परटोरी सपोर्ट पर रखा गया। लंदन और दिल्ली से विशेषज डॉक्टरों को भी उनकी निगरानी के लिए बुलाया गया था। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और कई वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों भी उन्हें देखने अस्पताल आए थे।उनकी पार्टी ने कहा था कि वह महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दे रही है और कभी-कभी उनसे मिलने वाले लोगों से बात कर रही हैं।

2014 में भ्रष्टाचार के एक मामले में उनकी गिरफ्तारी हो जाने के बाद भी उनके लाखों समर्थकों का ‘अम्मा’ से भरोसा नहीं डिगा। शोक प्रकट करने के लिए सैकड़ों समर्थकों ने अपने सिर मुड़ा लिए थे और जयललिता के प्रति अपना समर्पण प्रदर्शित किया था। समर्थकों द्वारा गुस्से में आकर बसें जलाए जाने के बाद उन्होंने जेल से अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील की थी।

फिल्मी दुनिया से राजनीति की दुनिया तक का समय तय करने वाली जयललिता तमिलनाडु की चार बार मुख्यमंत्री बनीं और डीएमके पार्टी का राज्य में विकल्प बनीं। इस वर्ष मई में भारी बहुमत से जीत दर्ज करके उन्होंने इतिहास रच। पिछले तीन दशक में यह पहला मौका था जब किसी मुख्यमंत्री को लगातार दूसरी बार जीत मिली थी.

2014 में, आय से अधिक संपत्ति के मामले में उन्हें अदालत द्वारा दोषी करार दिया गया। इस केस का ट्रायल पड़ोसी राज्य कर्नाटक में चला था और उनकी प्रतिद्वंदी पार्टी डीएमके द्वारा केस दायर किया गया था। 9 माह बाद कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया। इसके बाद उन्होंने फिर से राज्य के मुख्यमंत्री का पद संभाल लिया था।

जयललिता के निधन पर राष्ट्रपति,उप राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, कांग्रेस अद्ययक्ष, उापाध्यक्ष राहुल गांधी समेत देश के तमाम नेताओं ने दुख व्यक्त किया।
जयललिता के जीवन के कुछ पड़ाव

  • जयललिता को उनके प्रशंसक और उनकी पार्टी एआईएडीएमके के नेता, समर्थक प्यार से ‘अम्मा’ या मां कहते थे। उन्हें पुरात्चि थलाइवी (क्रांतिकारी नेत्री) भी कहा जाता था।
  • जयललिता का जन्म 24 फरवरी, 1948 को कर्नाटक राज्य के मैसूर में हुआ था। उन्होंने बेंगलुरु के बिशप कॉटन गर्ल्स से हाई स्कूल की शिक्षा प्राप्त की। बाद में जब उनकी मां ने तमिलनाडु की फिल्म इंडस्ट्री में अभिनेत्री के तौर पर करियर शुरू किया तो उन्होंने चेन्नई के प्रजेंटेशन कॉन्वेंट में दाखिला लिया।
  • जयललिता के पिता ने निधन होने के बाद उनका परिवार चेन्नई में रहने लगा।
  • जयललिता पढ़ाई में अच्छी रहीं और वह वकील बनना चाहती थीं लेकिन परिवार की आर्थिक तंगी के चलते उन्हें 15 वर्ष की उम्र में फिल्म इंडस्ट्री ज्वाइन करनी पड़ी।
  • उन्होंने तमिल, कन्नड़, मलयालम और बॉलीवुड की कुछ फिल्मों में काम किया।
  • उनकी पहली फिल्म चिन्नाडा गोम्बे बहुत सफल रही थी। जयललिता ने उस समय के सुपरस्टार एमजी रामचंद्रन उर्फ एमजीआर के सथ 28 फिल्मों में काम किया जो उनके राजनीतिक मार्गदर्शक हुआ करते थे। एमजी रामचंद्रन ने ही एआईएडीएमके की स्थापना की थी।
  • 1982 में, 34 वर्ष की उम्र में जयललिता ने एआईएडीएमके पार्टी ज्वाइन कर ली। उन्हें प्रचार विभाग का सचिव नियुक्त किया गया और जल्द ही उन्हें राज्य सभा के लिए मनोनीत कर दिया गया।
  •  तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रहे एमजी रामचंद्रन की 1987 में निधन हो गया। अगले वर्ष एआईएडीएमके पार्टी टूट गई क्योंकि पार्टी के कुछ लोग रामचंद्रन की पत्नी का समर्थन कर रहे थे तो कुछ लोग जयललिता के समर्थन में थे। 1991 में जयललिता पहली बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं।
  •  इसके बाद 2001 में वह तमिलनाडु की दूसरी बार मुख्यमंत्री बनी। इसके बाद  2011 में तीसरी बार मुख्यमंत्री बनीं।
  • 2014 में, भ्रष्टाचार के आरोप में उन्हें सजा हुई। इसके चलते उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
  • बाद में उन्हें कर्नाटक हाईकोर्ट ने आरोप मुक्त कर दिया था और उन्होंने फिर से मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल ली थी।

मोदी राज में पहली बार गरीब के पीछे अमीर भाग रहा है: रविशंकर प्रसाद

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नरेंद्र मोदी सरकार की नोटबंदी के पक्ष में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि देश में हमेशा से गरीब आदमी ही अमीरों के पीछे भागता था लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी कर के न केवल करप्शन और काले धन पर ब्रेक लगाई है बल्कि पहली बार देश के गरीबों के पीछे अमीर भाग रहे हैं। प्रसाद का इशारा करोड़ों जनधन खातों में जमा हो रहे पैसे और हाल में इस पर चुनावी रैली में मोदी के बयान से जोड़कर देखा जा रहा है। मोदी ने कहा था कि जिन लोगों के जनधन खातों में दूसरों ने अपना पैसा जमा कराया है वो लोग उस पैसे को न निकाले । सरकार उस पैसे को खाताधारक का ही करने का रास्ता तलाश रही है।

यह चुटकी रविशंकर प्रसाद ने सोमवार को नैनीताल में बीजेपी की परिवर्तन यात्रा में शामिल होते वक्त ली। प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर सवाल उठाने वालों के लिये प्रसाद ने कहा कि इन्हीं यात्राओं का नतीजा है कि आज भारत विश्व मंच पर एक नई ताकत की तरह उभरा है जिसके चलते पाकिस्तान के हिमायती मुल्क चीन को भी दबे सुर में ही सही लेकिन आतंकवाद का विरोध करना पड़रहा है।

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उत्तराखंड और सेना के रिश्तों को ध्यान में रखते हुए प्रसाद ने कहा कि देश के सैनिकों के साथ, उनकी वीरता के साथ नरेंद्र मोदी खड़े हैं, बीजेपी खड़ी है और भारत का हर शख्स खड़ा है। उन्होने कहा कि जब सेना का एक अफसर शहीद होता है तो चाहे उसकी पत्नी हो, माता हो, बहन हो, पिता हो वो टी.वी पर बोलते है, मेरा एक ही बेटा हैं काश दुसरा होता तो उसको भी भेजतें, ये है भारत और खासतौर पर उत्तराखंड की परंपरा।

राज्य की हरीश रावत सरकार पर हमला बोलते हुए प्रसाद ने कहा कि राज्य भ्रष्टाचार का अड्डा बन कर रह गया है और विकास सिर्फ सपना बन गया है। उन्होने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि राज्य के पूर्ण विकास के लिये ज़रूरी है कि यहां भी केंद्र की ही तरह बीजेपी सरकार बने।

खिलाड़ियों को पूरी तरह तैयार रखना हमारी ज़िम्मेदारी है: हरीश रावत

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सोमवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत पुलिस लाईन में आयोजित 14वीं उत्तराखण्ड प्रादेशिक पुलिस एथलेटिक्स प्रतियोगिता-2016 के समापन समारोह में शामिल हुए। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों, प्रतिभागियों एवं प्रतियोगिता के आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि मनुष्य में प्रतिस्पर्धा की प्रवृत्ति होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में खेलों के विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है। पुलिस विभाग से इसमें भागीदारी की उन्हे बहुत उम्मीदें हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय खेलों में ज्यादा से ज्यादा पदक जीतने के प्रयास करना होगा। इसके लिए अधिकारियों को विशेष ध्यान देना होगा। जिलों में कप्तान स्वयं इस बात का ख्याल रखें। हमारे खिलाड़ियों को परफैक्ट रखना हमारी जिम्मेदारी है।   

इस अवसर पर विजेता खिलाड़ियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री श्री रावत ने 4 गुणा 100 रिले दौड़ के दौरान गिरकर चोटिल हुई टिहरी की महिला खिलाड़ी प्रभा को खेलभावना का सम्मान करने के लिए विशेष पुरस्कार से सम्मानित किया। साथ ही राज्य के सभी जिलों से आए खिलाड़ियों व अन्य टीमों द्वारा किये गए मार्च पास्ट की सलामी ली। उन्होंने पुलिस विभाग द्वारा आगामी 11 दिसम्बर, 2016 को आयोजित होने वाली पुलिस मैराथन के लिए पुलिस विभाग को शुभकामनाएं दी। 

कार्यक्रम के दौरान विधायक एवं संसदीय सचिव राजकुमार, पुलिस महानिदेशक एम.ए.गणपति, एडीजी अशोक कुमार, जिलाधिकारी देहरादून रविनाथ रमन सहित पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौजूज थे।

राज्य सरकार और उसके मुखिया खेल और खिलाड़ियों की मदद के लिये कदम उठाने की बातें तो काफी कर रहे हैं लेकिन इन बातों का सार्थक अर्थ तभी निकलेगा जब देहरादून के गलियारों से निकल कर ये वादे अमली जामा पहन कर राज्य के दूरदराज़ इलाकों तक पहुंच सकें। राज्य में हर खेल और स्तर पर प्रतिभऐं मौजूद हैं लेकिन ज़रूरत है कि उन खिलाड़ियों को अपने टैलेंट को निखारने का भरपूर मौका मिले न कि कोरे आशवासन

थाना स्तर पर काम करने के तरीकों में सुधार की ज़रूरत: डीजीपी

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पुलिस मुख्यालय में सोमवार से शुरु हुई दो दिन की पुलिस आफिसर्स कान्फ्रेंस के पहले दिन पुलिस की कार्य प्रणाली में  के सम्बन्ध में कार्ययोजनाओं पर बोलते हुए पुलिस महानिदेशक एम. ए. गणपति ने कहा कि जब तक थाना और चौकी स्तर की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं होगा तब तक राज्य में एक अच्छी पुलिस व्यवस्था स्थापित नहीं हो पायेगी। उन्होने कहा कि युवाओं के साथ पुलिस विभाग की संवादहीनता में सुधार करते हुए युवाओं के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने का प्रयास करना चहिऐ, यह राज्य में अपराध एवं कानून व्यवस्था बनाये रखने में भी सहायक होगा। उन्होने कहा कि हर पुलिसकर्मी को चहिए कि वह उसको कानूनी अधिकारों का प्रयोग करने के साथ साथ अपने क्षेत्र के संरक्षक के रूप में भी कार्य करें।

 डीजीपी ने कहा कि उत्तराखण्ड पुलिस के पास पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तथा आधुनिक साधन/संसाधन उपलब्ध है, राज्य गठन से अबतक पुलिस विभाग को अच्छा नेतृत्व मिला है। वीडियो कान्फ्रेंस से इस कान्फ्रेंस में पुलिस में सुधारों को लेकर विचार-विमर्श किया गया जिसमें सभी परिक्षेत्र प्रभारी, जनपद प्रभारी, सेनानायक व जनपदों के राजपत्रित अधिकारी, थाना प्रभारियों द्वारा हिस्सा लिया गया। बैठक के दौरान थाना स्तर पर पुलिस कार्यप्रणाली में एकरूपता एवं पारदर्शिता लाते हुए बेसिक सर्विस डिलिवरी में सुधार के लिये कार्ययोजना पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, पौड़ी, टिहरी, पुलिस अधीक्षक चमोली तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, ऊधमसिंहनगर, नैनीताल, पुलिस अधीक्षक पिथौरागढ़ ने संयुक्त रूप से प्रसेनटेशन दी, जबकि विभाग में आरक्षी स्तर पर क्षमता बढ़ाने के लिये कार्य योजना पर श्री पंकज गैरोला, पुलिस उपाधीक्षक, देहरादून, निरीक्षक प्रमोद शाह, ऊधमसिंहनगर ने तथा पुलिस कार्यप्रणाली में युवावर्ग को अधिक से अधिक जोड़े जाने पर तृप्ति भट्ट, सहायक पुलिस अधीक्षक,देहरादून एवं रिधिम अग्रवाल, सेनानायक 31वींवाहिनी पीएसी, ने प्रसेंटेशन की।

इसके बाद वीडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से जुड़े सभी जनपदों, वाहिनियों के राजपत्रित अधिकारियों, थानाध्यक्षों से चर्चा कर सुझाव भी मांगे गये जिसमें बड़ी संख्या में अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपने विचार दिये। 

पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी घरों पर कब्जा़ पड़ा मंहगा, हई कोर्ट ने दिये बंगले खाली करने के निर्देश

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उत्तराखंड हाी कोर्ट ने सोमवार को सरकारी बंगलों पर कब्ज़ा करे पूर्व नुख्यमंत्रियों को झटका दिया। कोर्ट ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास खाली करने के निर्देश दिये। बंगले खाली करने के लिये कोर्ट ने सभी को 15 फरवरी २०१७ तक का समय दिया है।

घौरतलब है कि राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश के बाद सरकारी बंगलों के इस्तेमाल कर रहे पूर्व मुख्यमंत्रियों को किराया जमा कराने के लिये किराये की रकम का ऐलान भी किया है। लिविंग एरिया पर फ्लैट रेंट के मुताबिक तय किए गए किराए में पूर्व मुख्यमंत्रियों पर रियायत बरतते हुए बाजार भाव को तरजीह नहीं दी गई।

इस फैसले के चलते

  • भगत सिंह कोश्यारी को 14 वर्ष आठ माह चार दिन के लिए 1,76,132 रुपये अदा करना होगा।
  • नारायणदत्त तिवारी को नौ वर्ष आठ माह एक दिन के लिए 1,39,240 रुपये
  •  भुवनचंद्र खंडूड़ी को 1200 रुपये प्रतिमाह की दर से 1,52,880 रुपये
  • डॉ रमेश पोखरियाल निशंक को पांच वर्ष एक माह 18 दिन की अवधि के लिए 67,443 रुपये
  • विजय बहुगुणा को 39,440 रुपये सरकारी कोष में जमा कराने होंगे।

सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्रियों के सरकारी आवास का किराया बाजार भाव पर तय नहीं किया है। बाजार भाव पर किराया लिया जाता तो किराया राशि कई गुना ज्यादा हो सकती थी। हांलाकि जिन सरकारी बंगलों में ये राजनेता रह रहे हैं उनका किराया इस किरायों की दरों से काफी ज्यादा है लेकिन फिर भी अदालत की सख्ती के चलते सरकारी संपत्ति का दुर्उपयोग पर रोक लगेगी। अब देखना ये होगा कि सरकार कितनी सख्ती और जल्दी किराये वसूलने के काम को अंजाम देती है।

नोटबंदी के चलते जंगल और नहर में मिले 500 और हजार के नोट

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देश में नोटबंदी के चलते जहां एक तरफ लोग अपना कैश को कन्वर्ट कराने में जुट गये हैं वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अपने कैश को कन्वर्ट कराने के जुगाड़ नही ढूंढ पा रहे हैं। इन लोगों के पास अपने कैश को डिस्पोस करने के अलावा कोई रास्ता नही बचा है। ऐसा ही कुछ मामला उत्तराखंड के काठगोदाम और हरिव्दार में सामने आया जहां काठगोदाम से कटघरिया जाने वाली नहर में 1000 और 500 रुपए के नोट बहते पाये गये।  ये खबर लगते ही इलाके में हलचल मच गई। अपनी किस्मत को चमकता देथ स्थानिय निवासियों ने नहर में कूदकर जालों की मदद से नोटों को निकालना शुरू कर दिया। मामले की जानकारी पुलिस को दे दी गई और पुलिस अब मामले की छानबीन में जुट गई है।

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वहीं हरिद्वार जिले में सिडकुल से सटे रोशनाबाद की गांव की महिलाओं को जंगल में पुराने पांच सौ एक हजार के नोटों की गड्डियां मिली। जंगल में पुराने नोट मिलने की सूचना पर पहुंची पुलिस ने महिलाओं से नगदी रिकवर की। पुलिस का कहना है चार लाख, 58 हजार, 500 की रकम महिलाओं से मिली है।

जानकारी अनुसार रविवार को रोशनाबाद गांव की महिलाएं रोज की तरह जंगल में लकड़ी बीनने गई थी। लकड़ी बीनते समय उन्हें पांच सौ और एक हजार के पुराने नोटों की गड्डियां मिली। पुलिस ने एक एक कर जंगल से लकड़ी बीनकर आई महिलाओं से नोट रिकवर किए। इसकी वीडियोग्राफी कराई जाती रही। थानाध्यक्ष ऋतुराज सिंह रावत ने बताया कि महिलाओं से मिले नोटों की गिनती की गई तो कुल रकम चार लाख, 58 हजार, 500 निकली। 

अपनी मिट्टी से दूर तुर्की के इस्तानबुल में बसा भारत

तुर्की का नाम सुनते ही कानों में कुछ घंटी सी नहीं बजीं, जब हमें यह पता लगा कि हमारा अगला पड़ाव इस्तानबुल, तुर्की है और कुछ साल के लिए ये हमारा घरौंदा बनने वाला हैं। साउथ अफ्रीका में रहने के बाद इस्तानबुल थोड़ा फीका लगा, और यहां मैं प्राकृतिक सुंदरता के बारे में बात कर रही हूँ। खैर, इस्तानबुल में आते एक बात तो त़य थी कि दिल्ली की याद इतनी नहीं आएगी क्योंकि यहां का ट्रैफिक दिल्ली के ट्रैफिक के टक्कर का है। सड़कें हमेशा खचां-खचां भरी रहती हैं और ट्रैफिक सेन्स भी कुछ भारतवासियों के जैसा ही है।

दिन बीतते गये और हमें इस्तानबुल भाने लगा। धीरे-धीरे यहां पर रह रहे भारतीयों के बारे में पता लगा। इस्तानबुल में तकरीबन ढ़ाई सौ हिन्दुस्तानी परिवार रहते हैं। ये आकड़े हमें इंडियन एंबेसी से प्राप्त हुए। यहां पर कई भारतीय परिवार बस गए हैं। कुछ 30 साल से तो कुछ 10 साल से यहीं बसे हुए हैं। मिस्टर फ्रांसीस और उनका परिवार पिछले 30 साल से इस्तानबुल में रह रहें हैं। मुंबई में इनका बचपन और जवानी बीती और कुछ काम के सिलसिले में ये भारत से बाहर निकले और कई देशों में घुमने के बाद इस्तानबुल में परिवार समेत बस गए हैं, इसी तरह मिस्टर वेंकेट उनकी पत्नी और उनके दो बच्चे 11 साल से इस्तानबुल में रह रहें हैं। मिस्टर वेंकेट इस्तानबुल के एक इंटरनेशनल स्कूल में कंम्प्यूटर टीचर हैं। उनकी बेटी ग्रेजुएशन खत्म करके अब एक अच्छी कंम्पनी में नौकरी कर रही है । मिस्टर वेंकेट का एक बेटा भी है जो इस्तानबुल में ही इंजनियरिंग पढ़ रहा हैं उनके दोनों बच्चे तुर्कीश भाषा अच्छी तरह से बोलते हैं और इस्तानबुल को ही अपना घर मानते हैं। रजनी को शुरुआत में इस्तानबुल में बिना मिर्च के खानें में थोड़ी परेशानी जरुर हुई लेकिन धीरे-धीरे उन्हें तुर्कीश खाना पसन्द आने लगा। 

इसी तरह दिया और अनिरुद्ध भी इस्तानबुल में 8 साल से रह रहे हैं और उनके मुताबिक 8 सालों में इस्तानबुल में काफी कुछ बदल गया है। दिया को इस्तानबुल के बारे में कुछ खास पता नहीं था शुरुआत में उन्हें अपने परिवार की याद आती थी लेकिन समय के साथ उन्हें यहां अच्छा लगने लगा और उनका मानना है कि इस्तानबुल का इंन्फ्रास्ट्रक्चर काफी विकसित हुआ है, मेट्रों बस,माॅल्स अभी कुछ आठ साल में ही बने हैं। लेकिन पुणे की कंचन जो कि ज़ुंबा और योगा टीचर हैं और इस्तानबुल में दो साल से हैं उनका मानना है कि इस शहर को घर बनाया जा सकता है। उन्हें इस्तानबुल भा गया है और उनका मानना है कि यहां के लोग भारतीयों को पसंद करतें हैं। उन्हें ऐसा तब लगा जब उन्हें एक तुर्कीश परिवार से शादी का रिश्ता आया, लेकिन जब तुर्कीश परिवार को पता चला कि कंचन शादी-शुदा है तो उन्हें काफी निराशा हुई। कंचन इस्तानबुल में तुर्कीश लोगों को योगा सिखाती हैं और इस्तानबुल में काफी खुश हैं।img_4972 कंचन की तरह ही मुंबई की शिवा हाथों में मेंहदीं लगाने में माहिर हैं उनकी इस्तानबुल में मेंहदीं डिजाइन्स की बहुत मांग है। शिवा के पति तुर्कीश हैं।

 

इस्तानबुल दो भागो में बंटा हुआ है एक है एशियन साईड और एक है यूरोपियन साईड। दोनो तरफ ही भारतीय बसे हुए हैं। हर महींनें भारतीय महिलाएं एक दूसरे से मिलती जरुर हैं। इसी बहाने भारतीय खाने पीने का स्वाद भी मिलता है और भारतीयों को मिलने का मौका भी।   

हर साल इस्तानबुल में दिवाली मेला जरुर लगता है। इस मेले में भारतीय खाना और भारतीय कपड़ों के स्टाॅल लगते हैं। स्टेज पर्फामेंस होते हैं जिसमें बालीवुड नंबर पर नाच-गाना होता है। ये तरीका है एक दूसरे भारतियों को जानने और मिलने का। इसी तरह हर साल 26 जनवरी और 15 अगस्त मनाया जाता है। इस्तानबुल में बालीवुड भी पीछे नही है। तुर्कीश जनता बाॅलीवुड गानों की और बाॅलीवुड स्टाईल डांस की बहुत दिवानी हैं। इस डांस की इतनी मांग हैं कि भारत के राजेश रापका और उनकी तुर्कीश बीवी दोनों मिलकर बालीवुड डांस इस्तानबुल में सिखातें हैं, साथ ही मुंबई की कृतिका भी भरतनाट्यम सिखाती हैं। कृतिका पिछले दो साल से इस्तानबुल में हैं और उन्हें इस्तानबुल बहुत पसंद है।img_4978-1

इसी तरह इस्तानबुल में रह रहे भारतीयो का आना जाना लगा रहता है।अपने देश से हजारों किलोमीटर दूर रहने के बाद भी इस्तानबुल में रह रहे भारतीयों को घर जैसा लगने लगा है ये शहर।

कुहु गर्ग ने टाटा ओपन में मिक्सड डब्लस में जीता सिलवर

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मुंबई मै चल रहे टाटा ओपन इंडिया इंटरनेशनल चैलेंज 2016 मै कुहू गर्ग मिक्कासड डब्लस के फाइनल में तो हार गई लेकिन पूरे टूर्नामेंट में अपने शानदार फार्म से कुहु ने उत्तराखंड का नाम ऊंचा किया। मिश्रित युगल के फाइनल मे कुहू ने अपने जोड़ीदार विग्नेश देवलकर के साथ खेलते हुए कड़ी टक्कर दी। मैच का स्कोर रहा 4-11, 10-12, 11-4, 11-6, 8-11।