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कांग्रेस ने बंद कमरे में पीके पर उतारा गुस्सा

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विधानसभा चुनाव का नतीजे चाहे जो भी हो, मगर इलेक्शन कैंपेन गुरु पीके को लेकर कांग्रेस प्रत्याशियों की नाराजगी सामने आने लगी है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी की बैठक राजधानी में जुटे कांग्रेस के कई प्रत्याशीयो ने पीके के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली है। कुछ प्रत्याशी तो यह शिकवा करने से भी नहीं हिचके की पीके का कैम्पेन प्रत्याशीयों के बजाय मुख्यमंत्री पर फोकस रहा। कांग्रेस की बैठक में पार्टी प्रत्याशियों ने जम कर पीके की शिकायत की। प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रत्याशियों ने संसाधनो की कमी का मुद्दा उठाया। पार्टी के सह प्रभारी संजय कपूर ने कहा कि चुनाव के नतीजे आने के बाद पार्टी विरोधी गतिविधियों से घिरे लोगो को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।
प्रत्याशियों ने चिंता जताई कि पूरे चुनाव में सीएम से लेकर अध्यक्ष तक कोई भी अंदरूनी महफूज नहीं रहा। कई पार्टी नेता और कार्यकर्ता चुनाव प्रचार में जुटने के बजाय घर बैठ गए थे। कइयों ने दूसरे चुनाव क्षेत्रों का रुख कर लिया। मगर कई ऐसे भी थे जिन्होंने पार्टी प्रत्याशी को हराने के लिए कहीं बीजेपी तो कहीं अन्य दलों या निर्दलीय प्रत्याशियों के लिए काम किया है। सभी ने ऐसे अंदरूनी लोगो को कड़ा सबक सिखाने की मांग की है। बंद कमरे में करीब तीन घंटे तक चली बैठक में प्रत्याशियों ने प्रशांत किशोर पर निशाना साधा। एक प्रत्याशी ने कहा कि उन्हें पीके के प्रचार से कोई फायदा नहीं हुआ क्योंकि वह पूरी तरह से सीएम पर फोकस था। हरिद्वार जनपद के प्रत्याशी का कहना है कि सीएम और प्रदेश अध्यक्ष के साथ टीम पीके की मौजूदगी ने एक तीसरा कोण बना दिया था,जिससे हर जगह उलझाव की स्थिति पैदा हो गई थी। कुछ प्रत्याशियों ने फण्ड ना मिलने की भी शिकायत की उनका कहना है कि प्रचार के समय प्रयाप्त सामग्री संगठन को नही मिली।

उत्तराखण्ड में दर्जनों सीटों पर हार जीत ना के बराबर

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उत्तराखण्ड गठन के बाद यह चौथी विधानसभा का चुनाव है और अब तक तीन विधानसभा के चुनाव परिणामों में प्रत्याशियों की जीत के अंतर में भी बहुत ज्यादा फर्क नहीं रहा, जबकि कुछ सीटें तो ऐसी रही हैं जहां जीत और हार का अंतर ना के बराबर रहा है।
वर्ष 2012 के विधानसभा चुनावों की बात करें तो कांग्रेस की जीत में भी केवल एक सीट का फर्क रहा था। इस चुनाव में दर्जनों सीटों पर उम्मीदवारों की जीत में एक प्रतिशत से भी मामूली वोटों के अंतर से चुनाव में पराजय को देखना पड़ा।
उत्तरखण्ड के अल्मोड़ा के रानीखेत सीट जहां से भाजपा के अजय भट्ट (बीजेपी) के कांग्रेस के करना माहरा को 0.20% के अंतर से चुनाव हराया। भाजपा को और कांग्रेस को 35.88% फीसद मत मिला था।
चमोली के कर्णप्रयाग सीट पर क्रांगेस के अनसुया प्रसाद मैखुरी को 22.78 और निर्दलीय प्रत्याशी सुरेन्द्र नेगी 22.31 फीसद मत मिला था जिसमें 0.47% से मैखुरी चुनाव जीते।
वही देहरादून के रायपुर सीट उमेश शर्मा (कांग्रेस)- 39.05% तथा भाजपा के त्रिवेंद्र सिंह रावत को 38.43% मिला जिसमें 0.22 प्रतिशत वोट पाकर काउं विधायक बने।
हरिद्वार के ज्वालापुर सीट चंद्र शेखर (बीजेपी) के 30.26% तथा मदन लाल (बसपा)- 29.46% मात्र 0.80% के अंतर से मदन लाला चुनाव हार गये।
टिहरी के नरेंद्र नगर सीट सुबोध उनियाल (कांग्रेस) के 43.47% और ओम गोपाल रावत (बीजेपी) के 42.65% पाकर 0.82% फीसद से चुनाव में पराजय का सामना करना पड़ा।
टिहरी सीट निर्दलयी प्रत्याशी दिनेश धनै 29.77 प्रतिशत तथा उनके प्रतिद्धंदी कांग्रेस के किशोर उपाध्याय 28.83% पाकर 0.95 फीसद के अंतर से चुनाव हार गये।
हरिद्वार के मंगलौर सीट बसपा के सरवत करीब अंसारी 34.03% वोट मिला वहीं कांग्रेस के काजी मो. निजामुद्दीन 33.07% फीसद पाकर 0.96 प्रतिशत से पीछे रह गये।
चमोली के थराली सीट जीत राम (कांग्रेस) के 32.86% तथा मगन लाल (बीजेपी) के 31.59% पाकर 1.27% के मामूली अंतर से चुनाव हार गये।
हरिद्वार के रूड़की सीट से कांग्रेस के प्रदीप बत्रा 37.77% फीसद मत पाये वहीं सुरेश चंद्र जैन (बीजेपी) के 36.47% फीसद पाकर 1.30% से चुनाव हार गये।
टिहरी के प्रतापनगर सीट विक्रम सिंह नेगी (कांग्रेस) के 31.38% प्रतिशत वोट मिले वहीं
विजय सिंह (बीजेपी) 29.98% पाकर 1.40% के अंतर से चुनाव में पराजय का सामना करना पड़ा।
देहरादून के डोईवाला सीट पर भाजपा के पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक 30.68% पाये जबकि उनके प्रतिद्वंदी कांग्रेस के हीरा सिंह बिष्ट 29.01% फीसद मत पाये जिन्हें 1.67% प्रतिशत के अंतर से चुनाव हारना पड़ा।

पिथौरागढ़ को लोक प्रशासन के क्षेत्र में मिला प्रधानमंत्री पुरस्कार

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सीमांत जिले पिथौरागढ़ को इस वर्ष बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। जिले को लोक प्रशासन के क्षेत्र में प्रधानमंत्री पुरस्कार के लिए चुना गया है। जिले में 20.48 फीसद किसानों ने इस योजना के तहत अपनी फसलों का बीमा कराया था।प्रदेश में इस वर्ष कुल 7.51 फीसद किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा कराया था। केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत किसानों को अतिवृष्टि, आपदा या अन्य कारणों से फसलों के बर्बाद होने पर मुआवजा दिए जाने का प्राविधान है।
योजना के व्यापक प्रचार प्रसार के बावजूद प्रदेश के अन्य जिलों के किसानों ने जहां इसमें कोई खास रुचि नहीं दिखाई वहीं सीमांत जिले के 16394 किसानों ने योजना के तहत अपनी फसलों का बीमा करवाया जो जिले के कुल किसानों का 20.48 फीसद है। बीते वर्ष जिले के मात्र 2.21 फीसद किसानों ने ही योजना में बीमा करवाया था। बड़ी उपलब्धि पर सीमांत जिले को लोक प्रशासन के क्षेत्र में प्रधानमंत्री पुरस्कार के लिए चुना गया है।
मुख्यकृषि अधिकारी अभय सक्सेना ने पुरस्कार के लिए चयनित होने की जानकारी देते हुए बताया कि शुक्रवार को भारत सरकार के दो उच्चाधिकारी पिथौरागढ़ पहुंचकर फसल बीमा योजना पर अधिकारियों से चर्चा करेंगे। जिले को यह पुरस्कार लोक प्रशासन के क्षेत्र में दिया जाएगा।

बराबरी करने के इरादे से उतरेगी भारतीय टीम

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पुणे टेस्ट में मिली 333 रनों की शर्मनाक हार को भुलाते हुए भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चार टेस्ट मैचों की श्रृंखला के दूसरे मैच में बराबरी करने के इरादे से उतरेगी भारतीय टीम ने ऐसे कम मौके देखे हैं जबकि घरेलू टेस्ट श्रृंखला में उसे शुरू में ही हार का सामना करना पड़ा हो और इसलिए चिन्नास्वामी स्टेडियम में होने वाला मैच अधिक दिलचस्प बन गया है।

कोहली और उनकी टीम का चिंतित होना और साथ ही सतर्कता बरतना जायज है क्योंकि पुणे की स्पिन लेती पिच पर स्टीव ओकीफी की स्पिन गेंदबाजी के सामने भारतीय बल्लेबाजों ने नतमस्तक होने में देर नहीं लगाई और टीम को 333 रन के भारी अंतर से हार का सामना करना पड़ा। इस हार से भारतीय टीम का 19 मैचों तक चला अजेय अभियान भी समाप्त हो गया और अब पिछली हार से सबक लेकर नए सिरे से शुरुआत करने का समय है। अनिल कुंबले की देखरेख में खेल रही टीम चिन्नास्वामी की पिच पर जीत दर्ज करके 4 मैचों की श्रृंखला में वापसी करने की कोशिश करने के लिए प्रतिबद्ध है। यहां की पिच पुणे की तुलना में कुछ बेहतर दिख रही है।

भारतीय बल्लेबाजों को आस्ट्रेलिया की नई स्पिन जोड़ी नाथन लियोन और ओकीफी से तो निबटना होगा साथ ही तेज गेंदबाजी की जोड़ी मिशेल स्टार्क और जोश हेजलवुड के खिलाफ भी सतर्कता बरतनी होगी जो उनके लिए परेशानी खड़ी कर सकते हैं। इसी तरह से भारतीय अभी तक स्टीव स्मिथ को सस्ते में आउट करने का तरीका नहीं ढूंढ पाए हैं। आस्ट्रेलियाई कप्तान ने पहले मैच की मुश्किल पिच पर दूसरी पारी में शतक जड़ा और वह अपनी इस फार्म को जारी रखना चाहेंगे।

दीवार तोड़कर कॉलोनी में घुसा हाथी, दहशत में लोग

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सप्तऋषि क्षेत्र में कॉलोनी की दिवार तोड़कर अंदर घुसे हाथी ने जमकर उत्पात मचाया। क्षेत्र के लोग दहशत में हैं। हाथी ने सफलों को भी नुकसान पहुंचाया। कॉलोनी के लोगों ने शोर मचाकर बमुश्किल हाथी को जंगल की ओर खदेड़ा।

शांतिकुंज और सप्तऋषि पुलिस चैकी के सामने राजाजी पार्क का जंगल है। वहीं हाइवे से कुछ दूरी पर कई कालोनी बनी हुई है। गुरुवार देर रात हाथी ने सप्तऋषि पुलिस चैकी के सामने यूपी हैंडीक्राफ्ट की कॉलोनी में जमकर उत्पात मचाया। पहले हाथी ने कॉलोनी की दीवार को तोड़ अंदर प्रवेश किया। उसके बाद उसने कॉलोनी के दूसरे छोर में लगे लोहे का गेट भी तोड़ दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगल से लगा होने के कारण अक्सर कालोनी में हाथी घुसकर उत्पात मचाता है।

एक बार फिर ले सकेंगे गंगा किनारे कैंपिंग का मज़ा

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एनजीटी ने गुरुवार को ऋषिकेश में गंगा नदी के किनारे 25 जगहों पर शिविर लगाने को मंजूरी देते हुए कहा कि यह पूरी तरह से व्यवसायिक आधार पर ज्यादा पर्यावरण के अनुकूल तरीके से की जानी चाहिए।एनजीटी के प्रमुख स्वतंत्र कुमार के नेतृत्व वाली पीठ ने उत्तराखंड सरकार द्वारा सौंपी गयी प्रबंधन योजना एवं नियामक व्यवस्था स्वीकार करते हुए दिसंबर, 2015 में लगा प्रतिबंध हटा दिया है।

अधिकरण ने नियामक व्यवस्था के कामकाज तक कौड़ियाला से ऋषिकेश के बीच पूरे क्षेत्र में कैंप संबंधी गतिविधि पर रोक लगा दी थी गई थी लेकिन अब सरकार द्वारा सिफारिश की गयी जिसके बाद 33 में से 25 जगहों पर इसकी मंजूरी दे दी गई है।

पीठ ने यह कहते हुए आठ जगहों को नामंजूर कर दिया कि वे सूखे मौसम के नदी के प्रवाह के दौरान बीच से 100 मीटर के दायरे में आते हैं।एनजीटी ने साथ ही संबंधित अधिकारियों को उन 25 स्थलों की निगरानी करने का आदेश दिया ताकि यह देखा जा सके कि वे उसके निर्देशों का पालन कर रहे हैं या नहीं।

एनजीटी ने साथ ही राज्य प्रशासन के पास हर छह महीने पर शिविर एवं राफ्टिंग की गतिविधियों की रिपोर्ट सौंपने का भी निर्देश दिया है।

पुलिस सर्वोदय योजना

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वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदया द्वारा पुलिस लाइन देहरादून के सम्मेलन कक्ष में सर्वोदय योजना को लेकर स्कूलों के प्रबंधकों के साथ एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी के दौरान उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदया द्वारा बताया गया की सर्वोदय योजना को स्कूल, कॉलेज, शिक्षण संस्थानों, सिविल सोसाइटी, स्वयं सेवी संस्थानों के मध्य क्रियान्वित किया जा सकता है। उनके द्वारा बताया गया कि सर्वोदय योजना के प्रारंभिक चरण सभी स्कूल-कॉलेजों, शिक्षण संस्थानों, सिविल सोसाइटी तथा स्वयं सेवी संस्थानों को साथ लेकर रोड सेफ्टी, महिला सशक्तिकरण, साइबर अपराधों के प्रति जागरुकता तथा नशे के विरुद्ध जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

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इस अभियान को स्कूल, कॉलेजों व शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत छात्र छात्राओं के मध्य चलाने का मुख्य उद्देश्य बच्चों को इसके प्रति जागरुक करना है ताकि वह अपने परिवार व अन्य लोगो को इस संबंध में जागरूक कर सके। उनके द्वारा बताया गया कि इस योजना को क्रियान्वित करने का मुख्य उद्देश्य दंडात्मक नहीं अपितु सुधारात्मक प्रयास करना है। गोष्टी के दौरान उपस्थित लोगों द्वारा सर्वोदय योजना के विषय में अपने सुझाव रखे गए तथा इस प्रयास के प्रशंसा करते हुए बताया कि सभी लोगों के समन्वित प्रयास से ही इस मिशन के परिणाम सकारात्मक हो सकते हैं। उक्त कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधीक्षक यातायात/नगर/ग्रामीण, क्षेत्राधिकारी सदर व स्कूलों के पदाधिकारीगण उपस्थित रहे।

उत्तराखण्ड सरकार का सबसे बडा घोटाला,भूमि अधिगृहण के नाम पर करोडों का खेल

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कहने को उत्तराखण्ड भले ही छोटा प्रदेश हो मगर घोटालों में उत्तराखण्ड ने कई बडे प्रदेशों को भी पीछे छोड दिया है,जिसमें कुम्भ,आपदा,जल विद्युत परियोजना,शराब जैसे कई बड़े घोटालों ने देवभूमि को जहां शर्मशार किया वहीं अब उससे भी बडा घोटाला सामने आया है, करीब सात सौ करोड का ये घोटाला कौन सा है? क्या है ये घोटाला? कैसे किया गया घोटाला जिसका नाम है बैक डेट में 143।

आइए आपको बताते हैं कि आखिर 143 का यह महाघोटाला है क्या-सितारगंज से लेकर जसपुर तक फोरलेन सहित बाईपास के हाईवों के निर्माण में जिन लोगों की जमीनें रास्ते में आ रही हैं उनकी जमकर चाँदी हुई है, मतलब जिस जगह को सरकारी फ़ाइल में आवासीय भवन के रूप में दिखाया गया है वहां आज भी कृषि हो रही है।लेकिन अधिकारियों ने आंखें मूंद कर फाईलों का कोरम पुरा कर दिया। ये हुआ इसलिए कि कृषि भूमि के मुकाबले आवासीय भवन का 10 गुना मुआवजा होता है।मतलब जिसकी जमीन एक करोड़ रूपए की है तो उसे 10 करोड़ रुपए का सरकारी मुआवजा मिलेगा।रुद्रपुर,गदरपुर,किच्छा, सहित जसपुर तहसील में बड़ा गोलमाल हुआ और है,जबकि इस अरबों के पूरे गोलमाल को ऊपर के नेताओं और नौकरशाहों के इशारे पर जिले में तैनात एक बड़े रसूख दार पीसीएस अधिकारी ने बड़ी ही चतुराई से किया है सवाल तो इन्कमटैक्स अधिकारियों की कार्येशेली पर भी उठेंगे। जहाँ इतना बड़ा लेनदेन होने पर टैक्स के पाँच पैसे भी वसूल नहीं सके।

कुमाऊं कमिश्नर ने इस बात को स्वीकार किया है कि बैक डेट में गलत तरीके से कृषि भूमि को व्यवसायिक भूमि दिखाकर नेशनल हाइवे से दस गुना मुआवजा लिया गया है।जिससे केन्द्र सरकार को करोडों का चूना लगाने का काम उत्तराखण्ड के सफेदपोशों और अधिकारियों ने किया है।
यहाँ तक कि कई बार उपजिलाधिकारियों को मामले की जाँच दी गयी। मगर सभी ने मामले से पल्ला झाड़ लिया। साथ ही अब तो अधिकारियों ने 143 से रिलेटिव फाइलों को कपड़े में बांध कर सीज कर दिया है ताकि फाइलें किसी के हाथ ना लगें।
उधर भाजपा नेताओं को मिले इस मुद्दे के बाद घोटालों की जांच की मांग की है ।साथ ही प्रदेश सरकार पर केन्द्र सरकार के धन के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया है।
आये दिन घोटालों को लेकर विवादों में रहने वाली कांग्रेस सरकार के लिए एक बार फिर उधमसिंहनगर में सामने आये इस घोटाले पर जवाब देना भारी पड सकता है वहीं बाजपा के लिए घर बैठे बैठे ही चुनावी मुद्दा भी मिल गया है।पर सवाल हमेशा  की तरह उठता है कि ऐसे घोटाले बाज नेताओं और अधिकारियों पर कब गाज कार्यवाही होगी?

चंपावत और रानीखेत में हार-जीत पर आज भी बना है मिथक

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उत्तराखण्ड के कई विधानसभा चुनावों में सीटों की हार-जीत पर सत्ता और सरकार का समीकरण आज भी मिथक बना हुआ है।उत्तरप्रदेश से अलग होने के बाद उत्तराखण्ड के कुमाऊं की रानीखेत और चम्पावत सीट पर ऐसा ही पिछले कई विधानसभाओं में मिथक देखने को मिला है। वैसे तो चुनाव में हार जीत वोटरों पर निर्भर करता है लेकिन चुनावी सियासत को देखें तो जिस पार्टी का उम्मीदवार रानीखेत से जीतता है, उस पार्टी की सत्ता से दूर रहती है। वहीं चम्पावत में जिस पार्टी की जीत मिलती है उस पार्टी की प्रदेश में सरकार बनती है।
वर्ष 2012 विधानसभा चुनाव में भाजपा के अजय भट्ट को जीत मिली थी, लेकिन कांग्रेस की सरकार बन गयी। जबकि इससे पहले कांग्रेस के करण माहरा जुनाव जीते थे तो भाजपा की सरकार बनी थी। प्रदेश के चम्पावत विधानसभा का इतिहास इसके उलट है यहां 2002 और 2012 में कांग्रेस के हीमेश खर्कवाल जीते तो उनकी पार्टी सत्ता में आई लेकिन 2007 में भाजपा की बीना माहराना जीती तो उनकी पार्टी ने राज्य में अपना कार्यकाल पूरा किया।

गढ़वाल, कुमाऊं और मैदान के सियासी गणित पर टिकी भाजपा-कांग्रेस

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उत्तराखंड में विधानसभा की 70 विधानसभा सीटों में से गढ़वाल की 41 और कुमाऊं की 29 सीटों पर भाजपा कांग्रेस के सियासी समीकरण का गणित बदलते रहते हैं।राज्य में भाजपा और कांग्रेस के बीच गढ़वाल, कुमाऊं मंडल में सीटों पर उठापठक होता रहता है। गढ़वाल के मैदानी जिले हरिद्वार और कुमाऊं के उधमसिंह नगर में 20 सीटें हैं। इर सीटों पर बसपा किंग मेंकर की भूमिका में रही है।
वर्ष 2002 के पहले विधानसभा चुनाव में बसपा को 7 सीटें मिली थी तो 2007 के दूसरे चुनाव में बसपा को सर्वाधिक 8 सीटों पर जीत दर्ज की थी वहीं 2012 में बसपा को हरिद्वार में 3 मात्र तीन सीट ही मिल पायी लेकिन बसपा को 11 फीसदी के करीब मत मिले थे। सीट कम हो या ज्यादा सरकार बनाने में बसपा की अहम भूमिका होती है। वर्तमान कांग्रेस सरकार को भी बसपा का समर्थन से ही पांच साल पूरा की।
वर्ष 2012 विधानसभा चुनाव में कुमाऊं के मैदानी जिले उधमसिंह नगर में 9 सीटें हैं जिनमें से भाजपा को 7 और कांग्रेस को मात्र 2 सीटें मिली। बाद में हुए उपचुनाव में कांग्रेस को यहां एक सीट और मिल गई थी। हरिद्वार और उधमसिंह नगर की 20 सीटों पर मुस्लिम और दलितों की खासी आबादी है जिसका फायदा कांग्रेस और बसपा को मिलता है।
वर्ष 2012 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 33.79 फीसदी तो भाजपा को 33.13 प्रतिशत मत मिले यानी मामूली 0.66 फीसदी स्विंग से कांग्रेस ने सरकार बनाई। ऐसे में इस बार भी दोनों दलों में सीधी टक्कर है।
पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने मैदानी जिलों, हरिद्वार और उधमसिंहनगर में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था। इस बार आक्रामण रणनीति अपनाते हुए सीएम हरीश रावत हरिद्वार ग्रामीण और उधमसिंहनगर की किच्छा सीट से खुल मैदान में हैं।
माना जा रहा है कि हरिद्वार में खुद सीएम के मैदान में उतरने से आसपास की चार-पांच सीटों पर इसका कांग्रेस को लाभ मिल सकता है लेकिन भाजपा इसे नही मान रही है।
भाजपा का कहना है कि सीएम हरीश रावत डर के मारे से दो जगहों से चुनाव लड़े है और दोनों जगहों से उनका हार तय है।