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राज्य आपदा प्रतिवादन बल का 6 जिलों में प्रशिक्षण

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आने वाले 6 मार्च से राज्य आपदा प्रतिवादन बल जौलीग्रांट द्वारा राज्य के उत्तराखंड के 6 जिले टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली, ऊत्तरकाशी, बागेश्वर, पिथोरागढ़ के 30 ब्लॉक में विशेष जनजागरूकता अभियान के तहत दो-दो दिवसीय शिविर का आयोजन किया जायेगा। इस हेतु एसडीआरएफ की दस सदस्यीय 06 टीमों को विशेष् प्रशिक्षण दिया गया है।

दो चरणों में चलने वाले इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्राम चौकीदारों, ग्राम प्रहरी, रेड क्रॉस, महिला मंगल दल, नेहरू युवा दल, भूतपूर्व सैनिक एवम क्षेत्रीय जन मानस को आपदा से बचाव के तरीकों (विशेषता भूकम्प और भूस्खलन) से अवगत कराया जायेगा। जिससे वे आपदा के दौरान प्रभावी रूप से कार्य कर सके और पूर्व तैयारी और लड़ने में सक्षम हो सके ।

प्रशिक्षण के पश्चात ग्राम चौकीदारों ग्राम प्रहरियों को एक एक रेस्क्यू किट भी प्रदान की जायेगी।एसडीआरएफ द्वारा आपदा से लड़ने हेतु एक गाइडलाइंस बुक “एसडीआरएफ एक परिचय” भी इस हेतु तैयार की गयी हे एक रेस्क्यू किट दी जायेगी। एक माह चलने वाला यह प्रशिक्षण 06 अप्रैल को समाप्त होगा।

किसी भी प्रकार की आपदा में त्वरित एंव प्रभावी तरीके से योजनानुसार राहत एंव बचाव कार्य करना। जन सामान्य को आपदा के पश्चात बचाव हेतु प्रशिक्षित एंव जागरूक करना है साथ ही सामाजिक क्रियाकलापों के माध्यम से समय-समय पर गरीबो, असहायों एंव दिव्यांगों के हित में कार्य करना पर्यावरण बचाने हेतु वर्षारोपर्ण में सहभागिता करना।

एसडीआरएफ द्वारा किए गए रेस्क्यू कार्यों का विवरणः

  • वर्ष            रेस्क्यू         जीवित       मृत
  • 2014        17          212         17
  • 2015        92          1821       61
  • 2016        89          1159       96
  • कुल योग     189         3192        180

योगा फेस्टिवल में उठी गंगा को साफ़ और निर्मल रखने की आवाज

योगनागरी ऋषिकेश में चल रहे अंतराष्ट्रीय योग महोत्सव में आये योग साधकों और योग प्रेमियों योग के साथ-साथ अब गंगा को साफ़ रखने के लिए भी एक कदम उठाया है। नमामि गंगे परियोजना द्वारा गंगा के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए एक पद यात्रा का आयोजन किया गया जिसमें योग सिखने आये बच्चों और योग प्रेमियों ने बड़-चड़कर हिस्सा लिया। धरती की सबसे पावन और जीवनदायनी नदी गंगा जिसकी स्वतच्छता को लेकर एक तरफ सरकार तमाम प्रयास कर रही है तो वहीँ अब लोगों को जागरूक करने के लिए योग प्रेमियों ने भी अपने कदम आगे बढ़ाए है। ऋषिकेश में चल रहे इंटरनेशनल योगा फेस्टिवल में पहुँचे योगाचार्यों और योग प्रेमियों ने गंगा की सफ़ाई के लिए जन जागरूकता रैली निकाली। नमामि गंगे परियोजना के तहत रैली गढ़वाल मंडल विकास निगम से त्रिवेणी घाट तक निकाली गई जिसमे बहुत से लोगों ने हिस्सा लिया। ऋषिकेश में देश के कोने-कोने से योग सिखने आये योग प्रेमियों ने इस पद यात्रा के दौरान गंगा घाटों की भी सफ़ाई की। अंतराष्ट्रीय योग महोत्सव में जहाँ लोगो को योग गुर सिखने का मौका मिला है तो वहीँ गंगा की स्वतच्छता के लिए भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। नमामि गंगे परियोजना के डायरेक्टर राघव लंगर ने बताया कि नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत इस जन जागरूकता रैली का आयोजन किया गया है जिसमें योगा डेलीगेट्स ने काफी संख्या में हिस्सा लिया। मोदी की गंगा के संगरक्षण को लेकर मुहीम रंग लाने लगी है ,ऋषिकेश में योग सिखने आये योग प्रेमियों को भी अब स्वत्छ गंगा की मुहिम से जोड़ा जा रहा है ताकि हर कोई गंगा के संग्रक्षण के प्रति जागरूक हो सके।

अल्मोड़ा के दिवाकर बिष्ट मिस्टर इंडिया के फाईनल्स तक पहुंचे

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उत्तराखंड के बेटे दिवाकर बिष्ट ने अपनी मातृभूमि का नाम रोशन कर दिया है।जी हां मिस्टर इंडिया के फाइनल्स तक अपनी जगह बनाने वाले दिवाकर अब अपने घर वापस रानीकेत,अल्मोड़ा आ चुके है।

दिवाकर से हुई बातचीत के कुछ अंश आपके लिए एक्सक्लूसिव न्यूज़पोस्ट की तरफ से।

दिवाकर उत्तराखंड के अल्मोड़ा शहर से एक मध्यम वर्गीय परिवार से हैं।दिवाकर ने बताया कि इस पुरी प्रतियोगिता के दौरान मुझे अपने परिवार और अपने शहर का पुरा साथ मिला वरना शायद मेरे लिए यह राह और मुश्किल होती।दिवाकर कहते हैं सफर अभी रुका नहीं है और वह अल्मोड़ा शहर को बहुत आगे लेकर जाऐंगे।मिस्टर इंडिया की प्रतियोगिता में तीन राउंड निकालकर दिवाकर फाईन्लस तक पहुंचे थे।

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अल्मोड़ा जिला के दिवाकर बिष्ट एस.एस.जे कैंपस से फाईन आर्टस के चौथे साल के छात्र हैं।दिवाकर ने बहुत कम उम्र में मिस्टर इंडिया प्रतियोगिता में अपनी जगह बनाई और पूरी प्रतियोगिता में शानदार प्रर्दशन के बाद अब दिवाकर आने वाले सभी चुनौतियों के लिए तैयार हैं।उनेस बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि इस प्रतियोगिता में भाग लेना उनके लिए अच्छा अनुभव रहा।दिवाकर के लिए यह बहुत अच्छा प्लेटफार्म था लोगों से मिलने व माडलिंग की दुनिया को समझने का।

दिवाकर बताते हैं कि इसके जरिए उन्हें लोगों से मिलने,उनको जानने व समझने का मौका मिला,इस पूरे प्रतियोगिता में एक बात जो अहम थी वह था दिवाकर का अपने काम के प्रति एकाग्रता।दिवाकर सबको यही कहना चाहते हैं कि जिंदगी में कुछ हासिल करना हो तो फोकस बहुत जरुरी है।दिवाकर कहते हैं कि मेरे लिए यह सिर्फ एक इवेंट नहीं था इसमें भाग लेने के बाद मुझमें और मेरी जिंदगी में बहुत सारे बदलाव आऐ हैं।

परिवार से सर्पोट मिलने पर दिवाकर ने बताया कि मेरे परिवार ने मुझे हमेशा सर्पोट किया और आज मैं जो कुछ भी हूं अपने परिवार की वजह से हूं।दिवाकर के लिए यह सफर कितना मुश्किल रहा इसपर दिवाकर ने कहा कि सफर मुश्किल ना हो तो मंजिल तक पहुंचने का मज़ा नहीं आता लेकिन उनके लिए यह सफर बहुत अच्छा रहा और उनके साथ साथ इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों के ले यह सफर अच्छा रहा और सबने इस प्रतियोगिता में अपना सौ प्रतिशत दिया है।आगे अपनी पढ़ाई पुरी करने के बाद दिवाकर अपने मिस्टर इंडिया बनने के सपने को पुरा करने की चाह रखते है।टीम न्यूज़पोस्ट की तरफ से दिवाकर को  हार्दिक बधाईंया और आगे आने वाले सभी प्रतियोगिताओं के लिए शुभकामनाएं।

शानदार इमारत के लिए प्रसिद्ध है एफआरआई

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हिमालय की गोद में उत्तराखंड के देहरादून जिले में वन अनुसंधान (एफ आर आई) फारेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया कौलागढ़ रोड स्थित प्रमुख अनुसंधान संस्थान है।एफ आर आई सन 1906 में स्थापित किया गया था और लगभग 450 हेक्टेयर के एक बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है। एफ आर आई अपनी शानदार इमारत से पूरे देश में प्रसिद्ध है देहरादून में लोगो की पहली पसन्द  एफ आर आई की इमारत है। यह इमारत ब्रिटिशर्स के समय की बनी हुई है। इसके अलावा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी भी यही स्थित है साथ ही (आई एफ एस) इंडियन फारेस्ट सर्विसेज से  चुने हुए छात्र यहाँ ट्रेनिंग कर ऑफिसर्स  तैयार  कराता  है।
एफ आर आई परिसर में फारेस्ट से सम्बंधित छह  म्यूजियम है जिसमे फारेस्ट साइंस , सामाजिक विज्ञान, विकृति विज्ञानं, गैर-लकड़ी, लकड़ी और कीट विज्ञानं के किस्मो का प्रदर्शन प्रदर्शित करते हैं। म्यूजियम के अलावा एक सुंदर वनस्पति उघान भी है। ये ऐसी जगह है जहाँ पर पर्यटक दूर-दूर से आकर आनंद लेते हैं और यहाँ के इतिहास से भी रूबरू  होते हैं। एफ आर आई सन 1878 में ब्रिटिश इम्पीरियल फारेस्ट स्कूल के तौर पर स्थापित हुआ था पर बाद में वह सन 1906 में दुबारा स्थापित कर फारेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट बनाया गया और सन 1991 में डीम्ड विश्विद्यालय घोषित कर दिया गया।
इसके अलावा यहां आये  पर्यटक  इमारतों को देख लुफ्त उठाते हैं व फोटोग्राफी का भी आनंद लेते हैं।
वहां पर आये एक चंडीगढ़ से पर्यटक  रचना  से बात करते हुए उन्होंने बताया कि वे जब भी देहरादून आती  हैं तो ऍफ़ आर आई की इमारत देखे बिना नहीं जाते हैं। साथ ही हिन्दी फिल्म सिनेमा में भी एफ आर आई की इमारत बहुत प्रसिद्ध है। कहीं फिल्म निर्माता अपनी फिल्म की शूटिंग के लिए इस इमारत को  पहली पसन्द मानते हैं। जैसे स्टूडेंट ऑफ़ दी ईयर, रहना है तेरे दिल में, देहरादून डायरी और विज्ञापन की क्षेत्र में बॉर्नविटा की भी शूटिंग यहां पर हुई है  यह भी एक वजह है कि एफ आर आई पुरे विश्व में प्रसिद्ध होता  जा रहा  है। साथ ही ऍफ़ आर आई भारत के लिए गौरव  की बात है क्योंकि यह हमारे मुख्य इतिहास से जोड़ता है देश आजाद होने से पहले जो इमारते बनती होगी उससे भी वाकिफ करवाता है। इस इमारत ने देश की आजाद होने से लेकर कहीं ऐसी चीजों की याद दिला देता है जो लोगो के लिए बहुमूल्य है। देहरादून के लिए एफ आर आइ एक विरासत है ऐसी प्रतिष्ठा संस्थान का पूर्ण रूप से इज्जत व ख्याल रखना चाहिए। ऍफ़ आर आई एक प्रमुख वन संस्थान है जो भारत के लिए प्रतिष्ठा प्रधान करता है।

गढ़वाल विवि में एबीवीपी और आईसा कार्यकर्ताओं में मारपीट

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दिल्ली के रामजस कॉलेज में हुए विवाद की आंच शनिवार को केंद्रीय गढ़वाल विश्वविद्यालय के बिडला परिसर तक पहुंच गई। यहां आल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आइसा) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) कार्यकर्ताओं के बीच जमकर लात घूंसे चले। कालेज के गेट से मुख्य हाईवे तक चला हंगामा पुलिस हस्तक्षेप पर शांत हुआ।
घटनाक्रम में दो छात्राओं समेत आधा दर्जन को चोटें आई हैं। इनमें तीन का पुलिस ने मेडिकल भी कराया। दोनों ही पक्षों ने एक दूसरे के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार छात्र संगठन आइसा के कार्यकर्ता शनिवार दोपहर रामजस कालेज प्रकरण का लेकर परिसर के मुख्य गेट पर पुतला दहन कर रहे थे। इस दौरान गढ़वाल विवि छात्रसंघ में छात्रा प्रतिनिधि शिवानी पांडे और अंकित उछोली के नेतृत्व में यहां प्रदर्शन कर रहे आइसा कार्यकर्ता नारेबाजी कर रहे थे।
कुछ ही दूरी पर एबीवीपी कार्यकर्ताओं की टोली उनके नारों के विरोध में आवाज बुलंद कर रही थी। इस बीच, दोनों पक्षों में कहासुनी हो गई। देखते ही देखते दोनों संगठनों के कार्यकर्ताओं में हाथापाई होने लगी। मौके पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह मामला संभाला।
आइसा कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे पुतला फूंकने के बाद नारेबाजी कर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे तभी अभाविप कार्यकर्ताओं ने उनके साथ मारपीट और गाली गलौज शुरू कर दी। उधर, विद्यार्थी परिषद के प्रदेश मंत्री सुधीर जोशी ने कहा कि घटना स्थल पर विद्यार्थी परिषद के खिलाफ नारे लगा रहे थे। उन्हें रोकने की कोशिश की तो आइसा कार्यकर्ता मारपीट करने लगे।
गढ़वाल विवि छात्रसंघ में छात्रा प्रतिनिधि शिवानी पांडे और कृष्णा मिश्रा ने महिला आयोग से शिकायती पत्र भेज कर मामले की जांच करवाने का अनुरोध किया है। कृष्णा मिश्रा का आरोप है कि मारपीट के दौरान वह बीच बचाव का प्रयास कर रही थी, तभी उन पर हमला किया गया और गाली गलौज की गई।

देश के टॉप एयरपोर्ट की लिस्ट में देहरादून का जॉलीग्रांट

 उत्तराखंड जैसे छोटे पर्वतीय राज्य का एक मात्र जोलीग्रांट में स्तित देहरादून एयरपोर्ट अपनी साफ़ सफाई को लेकर देश के 10 बड़े एयरपोर्ट की टॉप टेन सूची में शुमार हो गया है। इससे भी महत्वपूर्ण बात ये है कि जिन टॉप टेन एयरपोर्ट को देश के सबसे अधिक स्वच्छ एयरपोर्ट की सूचि में शामिल किया गया है ,उसमे सभी एयरपोर्ट नेशनल और इंटनेशनल स्तर की श्रेणी के है ऐसे में दून एयरपोर्ट का नाम शामिल होना राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि है। देहरादून एयरपोर्ट अभी डोमेस्टिक एयरपोर्ट की कैटेगरी में आता है एयरपोर्ट आथॉरिटी ऑफ इण्डिया की विजिट की रिपोर्ट और यात्रियों के फीडबैक के आधार पर देश के टॉप टेन एयरपोर्ट में से एक को नंम्बर एक एयरपोर्ट के ईनाम से नवाज जायेगा। इसके लिए एयरपोर्ट आथॉरिटी ऑफ इण्डिया ने देश के 120 एयरपोर्ट के सर्वे रिपोर्ट और यात्रियों के फीडबैक के आधार पर देश के 10 एयरपोर्ट को चुना है।जिसमे देहरादून एयरपोर्ट भी शामिल है इसके अलावा कोलकत्ता ,भुनेश्वर ,लखनऊ ,पुणे ,रायपुर ,जोधपुर ,उदयपुर ,त्रिवेंद्रम और श्रीनगर शामिल है जिसमे से देहरादून एयरपोर्ट को टॉप टेन एयरपोर्ट की सूचि में शामिल करते हुए देश के सबसे साफ सुथरे एयरपोर्ट के लिए नामित किया गया है।

उत्तरकाशी में फाॅर्मेसी की छात्रा के साथ चार युवकों ने किया दुष्कर्म, तीन गिरफ्तार

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उत्तरकाशी में एक युवती के साथ चार युवकों ने सामूहिक दुष्कर्म किया। पुलिस ने आरोपी तीन युवकों को गिरफ्तार कर लिया है जबकि एक फरार युवक की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है।
शुक्रवार की रात उत्तरकाशी जनपद के इन्द्रावती पुल के पास एक युवती के साथ चार युवकों ने सामूहिक दुष्कर्म किया। सुबह जब युवती युवकों के चंगुल से भागकर निकली तथा अपने परिजनों को घटना की जानकारी दी। उत्तरकाशी जिले के एक संस्थान में फार्मेसी की पढ़ाई करने वाली एक युवती शुक्रवार को अपनी सहेली के घर आई थी। शुक्रवार की रात को युवती को मिलने के उसका एक दोस्त आया। रात को भोजन करने के बाद दोनों इन्द्रवती पुल की ओर घूमने के लिए निकले। तभी वहां शराब पी रहे चार युवकों ने इन दोनों साथियों का रास्ता रोका और युवती के दोस्त को पीटने लगे।
पीटते-पीटते उन्होंने युवती के दोस्त को वहां से भगाया जिसके बाद युवती को लेकर चारों युवक इन्द्रवती नदी की ओर गए जहां चारों युवकों ने सामूहिक दुष्कर्म किया। यही नहीं युवक युवती को बंधक बनाकर अपने कमरे में ले गए। वहां भी इन युवकों ने युवती के साथ दुष्कर्म किया।
सुबह जब युवती इन युवकों के चंगुल से भाग निकली तो अपनी सहेली के यहां पहुंची तथा अपनी सहेली और अपने दोस्त को इस घटना की आपबीती सुनाई। पीड़ित युवती ने अपने परिजनों को इस घटना के बारे में बताया और उत्तरकाशी बुलाया।
परिजन पीड़ित युवती को लेकर उत्तरकाशी कोतवाली पहुंचे। जहां युवती ने मनीष अवस्थी निवासी कोटियाल गांव, आशीष बिजल्वाण पुत्र भीमदत्त बिजल्वाण निवासी ग्राम जोशियाड़ा, विजय शंकर पुत्र हरी शंकर निवासी ग्राम कोटी लदाड़ी, अजय भट्ट पुत्र भीमशंकर भट्ट निवासी ग्राम जसपुर पर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म करने का आरोप लगाया।
इस मामले में पुलिस ने चारों युवकों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज की है। चार युवकों में से आशीष बिजल्वाण, विजय शंकर, अजय भट्ट को देर शाम पुलिस ने गिरफ्तार किया। जबकि चैथा आरोपी मनीष अवस्थी अभी फरार चल रहा है।
इन सभी आरोपी युवकों की उम्र 20 से 22 साल के बीच में हैं। इन आरोपियों में अजय भट्ट ने होटल मैनेजमेंट का कोर्स किया है। विजय शंकर बीए की पढ़ाई कर रहा है।

मिरिंडा का सैंपल जांच में फेल

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जिले में पेप्सिको कंपनी के उत्पाद मिरिंडा का सैंपल जांच में फेल पाए जाने पर एडीएम न्यायालय में मुकदमा दायर कराया गया है। आरोप साबित होने पर कंपनी पर तीन लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है। जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी महिमानंद जोशी ने बताया कि अक्टूबर महीने में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने लक्सर तहसील के नगरीय व ग्रामीण क्षेत्र की कई दुकानों से पेप्सिको कंपनी के मिरिंडा पेय पदार्थ का सैंपल एकत्र किया था।
इन नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजा गया। रिपोर्ट आने पर पेय पदार्थ मानको पर फेल पाए गए। इसके आधार पर शनिवार को एडीएम न्यायालय में केस दायर किया गया है। कहा कि मामले में तीन लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।

ऋषिकेश आर्ट एंड फिल्म फेस्टिवल में बिखरेंगे विदेशी संस्कृति के रंग

ऋषिकेश में इन दिनों देशी-विदेशी पर्यटकों की भीड़ देखने लायक है, 29वें अंतराष्ट्रीय योग महोत्सव के साथ ही अब ऋषिकेश में 10 दिवसीय आर्ट एंड फिल्म फेस्टिवल की भी शुरुवात हो चुकी है।जिसमें सात समुन्दर पार से आए विदेशी कलाकार हिस्सा ले रहे है और यहाँ अपनी संस्कृति को डांस और म्यूजिक की परफॉरमेंस के जरिये ऋषिकेश आए योग डेलीगेट्सऔर सैलानियों का मन मोह रहे हैं। गंगा तट पर म्यूजिक और डांस ओपेरा की प्रस्तुति देखने लायक  है।तीर्थनगरी ऋषिकेश इन दिनों विदेशी मेहमानों से गुलजार है, जहाँ एक तरफ अंतराष्ट्रीय योग महोत्सव की धूम है तो वहीँ अब ऋषिकेश आर्ट एंड फिल्म फेस्टिवल का भी आगाज हो चूका है।10 दिनों तक चलने वाले इस फेस्टिवल में इंडोनेशिया जापान और कई अलग अलग देशो से आये कलाकार गंगा किनारे प्रस्तुति देने पहुँचे है।

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फेस्टिवल मुनि की रेती स्तिथ शत्रुघ्न घाट पर आयोजित हुआ है जिसे देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक ऋषिकेश पहुँच रहे है और इस फेस्टिवल का जमकर लुफ्त उठा रहे है। ऋषिकेश पहुँच रहे विदेशी कलाकारों में काफी उत्साह देखा जा रहा है। इंडोनेशिया से आयी ”सोप ओपेरा कलाकार इंद्रा उदयाना का कहना है कि ऋषिकेश हमेशा से ही उनका पसन्दीदा स्पॉट रहा है जंहा के गंगा तट मन में नयी ऊर्जा भर देते है” इसलिए विश्व के कोने कोने से लोग यहाँ शांति और आध्यात्म के लिए पहुचते है।10 दिवसीय इस फेस्टिवल का उददेश्य योगा केपिटल ऋषिकेश और उत्तराखंड में इंडोनेशिया पर्यटन को बढ़ावा देना है जिससे वहां की संस्कृति को यहाँ लोग समझ पाएंगे। फेस्टिवल के कोडिनेटर मनन द्विवेदी ने बताया कि 10 दिनों तक चलने वाले इस फेस्टिवल में विदेशी कलाकार गंगा किनारे डांस,ड्रामा के जरिये अपनी संस्कृति को दिखाएंगे इसके साथ ही डॉक्यूमेंट्री फिल्मों से भी ये मैसेज देने का काम करेंगे। गंगा के किनारे चल रहे आर्ट एंड फिल्म फेस्टिवल को देखने के लिए देश के कोने-कोने से लोग यहाँ पहुँच रहे है।फेस्टिवल में उन्हें इंडोनेशिया की संस्कृति को देखने और समझने का मौका मिल रहा है।

खुबसूरत फूलों की खुशबू वाले वसंतोत्सव का आगाज़

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राजभवन में आज दो दिवसीय वसंतोत्सव का रंगारंग आगाज हो गया है।इस मौके पर पुष्प प्रदर्शनी, पेंटिंग, फिलैटली प्रतियोगिताएं आयोजित की गई।इस मौके पर कुमाऊं की हिल यात्रा और आईटीबीपी के जवानों ने खुखरी प्रदर्शन के साथ वसंत्सोत्व में मौजूद लोगों का ध्यान सुरक्षा की तरफ आकर्षित किया।राजभवन में राज्यपाल केके पाल ने रिबन काटकर दो दिवसीय वसंतोत्सव का शुभारम्भ किया।

इस वर्ष आयोजित होने वाले वसन्तोत्सव में राजभवन उद्यान शाखा व उत्तरखण्ड उद्यान विभाग के प्रयासों से राजभवन में लगाये गये विभिन्न प्रकार के फूलों के साथ-साथ वर्टिकल गार्डन, हर्बल गार्डन, एरोमैटिक गार्डन, स्पाइस गार्डन मशरूम व ताजे पुष्प, रंगोली, हैंगिंग पॉट्स, स्कूल चिल्ड्रन पेंटिंग प्रतियोगिता, कट फ्लावर, लूज फ्लावर प्रबंधन, फूलों के पॉटेड प्लान्ट्स आदि विशेष आकर्षण थे।

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इस मौके पर राज्यपाल ने डाक तार विभाग का टिकट जारी किया जिस पर उत्तराखंड की विशेष प्रजाति की बद्री तुलसी के चित्र को दर्शाया गया है।इस वर्ष बद्री तुलसी के फूल को विशेष आवरण के लिए चुना गया।बद्री तुलसी तीव्र सुंगधीय,बहुवार्षिक,औषधीय और धार्मिक महत्तव का राजा पौधा है और उत्तराखंड के समुद्र तल से 2000-3000 मीटर की ऊंचाईं वाले क्षेत्रों में पाया जाता है।

वसंतोत्सव में हर आयु वर्ग के लिए आकर्षण केंद्र का माध्यम था,कहीं रेशम के स्टाल तो कहीं मशरुम उत्पादन के,कहीं बच्चों की पेंटिंग प्रतियोगिता चल रही तो कहीं फ्रेश पैटल रंगोली प्रतियोगिता।हर उम्र के लोग वसंतोत्सव का आनंद उठाते हुए दिखाई दे रहे थे।कालेज के बच्चों से लेकर छोटे छोटे बच्चे भी रंगबिरंगे फूलों के बीच फोटो खिंचाते हुए नजर आए।

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साल 2013 से यह उत्सव हर साल आयोजित किया जाता है।इसका मुख्य उद्देश्य जनमानस,फूल उत्पादकों,विकास अधिकारियों,नीति निर्धारकों आदि लोगों को पुष्प उत्पादन के बारें में जानकारी देना।आंकड़ो के मुताबिक उत्तराखंड राज्य के निर्माण से पहले केवल 150 हेक्टेयर में पुष्प उत्पादन होता था लेकिन वर्तमान में लगभग 1400 हेक्टेयर में पुष्प उत्पादन का काम हो रहा है।आपको बता दें कि कट फ्लावर के क्षेत्र में भारतवर्ष में उत्तराखंड राज्य का आठवां स्थान है।यह उत्पादन मुख्यतः देहरादून,हरिद्वार,उधमसिंह नगर,नैनीताल और अल्मोड़ा जनपदों में किया जाता है।

अपनी खुबसूरती के लिए मशहूर उत्तराखंड के वसंतोत्सव को देखने के बाद हर एक पर्यटक कह सकता है कि उत्तराखंड वाकई बहुत ही खुबसूरत व प्राकृतिक के करीब ले जाने वाला राज्य है।