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मोदी सुनामी में बह गया बहन जी का हाथी, नहीं खुला खाता

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उत्तराखंड के जन्म के साथ ही यहां किंगमेकर के तौर स्थापित रही रही बहुजन समाज पार्टी इस बार मोदी सुनामी में जड़ से ही उखड़ गई। पार्टी का प्रदेश में खाता भी नहीं खुल पाया। जी हां इस बार के चुनाव में राज्य में तीसरी सियासी ताकत रही बहुजन समाज पार्टी का सूपड़ा साफ हो गया है। पिछले तीन चुनाव में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने वाली बसपा इस चुनाव में कोई खास प्रदर्शन नहीं कर पाई। हरिद्वार और उधमसिंह नगर में मजबूत मानी जाने वाली बसपा इस चुनाव में चारों खाने चित हो गई। पार्टी के सबसे मजबूत क्षत्रप सरवत करीम अंसारी भी मंगलौर से चुनाव नहीं जीत पाए।
बताते चले कि उत्तराखंड राज्य गठन के बाद बसपा 2002 के चुनाव में सात सीटों पर विजयी हुई। उस समय बसपा ने यह नारा दे डाला कि उत्तराखंड में बसपा बैलेंस ऑफ पावर की भूमिका में आएगी। विशेषकर हरिद्वार और उधमसिंह नगर में बसपा को बड़ी सफलता मिली। इन्हीं दो जिलों में बसपा ने जनाधार बढ़ाने की दृष्टि से फोकस किया।
इसका नतीजा यह रहा कि 2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा की सीटें बढ़कर आठ हो गईं। यह अलग बात है कि इस दौरान बसपा के बीच सियासी उठापटक भी बनी रही। लेकिन, 2012 के चुनाव में बसपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिली और पार्टी हरिद्वार तक ही सिमट गई। हरिद्वार से बसपा के तीन विधायक जीतकर आए, लेकिन बाद में दो विधायकों को बसपा से निष्कासित कर दिया गया।
इस बार बसपा को विधायकों की संख्या बढ़ने की अपेक्षा थी और सभी सीटों पर बसपा ने प्रत्याशी भी उतारे थे। लेकिन, बसपा एक भी सीट पर जीत दर्ज नहीं कर पाई। इसके संकेत साफ हैं कि उत्तराखंड की राजनीति कांग्रेस और भाजपा के इर्द-गिर्द की निकट भविष्य में रहने वाली है। बसपा अब इस झटके से कैसे उभरती है यह उसके लिए बड़ी चुनौती से कम नहीं है।

कांग्रेस के कप्तान हरीश रावत अपनी सीट तक नहीं बचा सके, प्रतिष्ठा भी हारी

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कांग्रेस के एकमात्र चेहरे हरीश रावत पर ही पूरी उत्तराखंड कांग्रेस की उम्मीदें टिकी थीं लेकिन लगता है इसबार जनता ने कांग्रेस को पूरी तरह नकारने का मन बना लिया था। हरीश रावत की तमाम कोशिशों के बावजूद कांग्रेस कुछ खास नहीं कर पाई। हालात ये हैं कि मुख्यमंत्री हरीश रावत अपनी दोनों सीटें नहीं बचा सके हैं। जहां हरिद्वार ग्रामीण से बीजेपी उम्मीदवार स्वामी यतीश्वरानंद ने हरीश रावत को 12 हजार के ज्यादा वोटों से हराया। वहीं, किच्छा सीट पर बीजेपी के राजेश शुक्ला ने रावत को करारी शिकस्त दी।

इस बार एग्जिट पोल सर्वे सही साबित हुए हैं। एग्जिट पोल सर्वे पहले ही ये इशारा कर चुके थे कि राज्य में बीजेपी की सरकार को पूर्ण बहुमत मिलने जा रहा है लेकिन जितना अच्छा बीजेपी का रिजल्ट रहा है उसकी तो शायद बीजेपी को भी उम्मीद नहीं रही होगी। बीजेपी ने राज्य में वो कारनामा कर दिखाया है जो राज्य के इतिहास में दर्ज हो गया है। इतनी बंपर जीत यहां आजतक किसी पार्टी को नसीब नहीं हुई।
बीजेपी के इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत कांग्रेस एकदम हाशिये पर चली गई है। हालात ये हैं कि कांग्रेस को हर सीट जिताने का जिम्मा संभालने वाले हरीश रावत खुद अपनी दोनों सीटें नहीं बचा पाए हैं। ये हरीश रावत की नहीं बल्कि राज्य के इतिहास में कांग्रेस की सबसे बड़ी हार है। इसबार जनता ने एकतरफा वोट कर बीजेपी को सत्ता की चाभी सौंप दी है साथ ही राज्य में मोदी लहर को भी पुख्ता कर दिया है।

राज्य के वाहनों की डिजिटल जानकारी होगी तैयार

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राज्य की सड़कों पर दौड़ते वाहनों की डिजिटल जानकारी जल्द ही तैयार की जाएगी। राज्य परिवहन विभाग एक चिप में वाहनों की कुंडली को उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रहा है। इसके तहत वाहन की जानकारी कंप्यूटर स्क्रीन पर एक चिप के माध्यम से उपलब्ध होगी। इस चिप में रजिस्ट्रेशन, वाहन का बीमा और फिटनेस से संबंधित सभी जानकारियां दर्ज होंगी। विंड स्क्रीन अथवा दुपहिया पर आगे की ओर चस्पा चिप को टोल बैरियर पर लगे स्कैनर आसानी से ट्रैस कर लेंगे।
सड़क सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार के नए प्रस्तावों में इसका प्रावधान किया गया है। इसी क्रम में उत्तराखंड में जल्द ही नई तकनीक का प्रयोग शुरू कर दिया जाएगा। रजिस्ट्रेशन के वक्त लगाई जाने वाली इस चिप का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि अब वाहन स्वामी को कागजात रखने के झंझट से भी निजात मिल जाएगी।
संभागीय परिवहन अधिकारी सुधांशु गर्ग ने बताया कि रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआइडी) प्रोजेक्ट के लिए परिवहन संभाग को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। उन्होंने बताया कि वाहनों की सुरक्षा की दृष्टि से यह एक कारगर कदम होगा। गर्ग के अनुसार वर्तमान में हाई-सिक्योरिटी नंबर प्लेट का प्रचलन है, लेकिन इससे उतना लाभ नहीं मिल पाया जितनी उम्मीद थी।
वजह यह कि एक तो यह नंबर प्लेट सिर्फ नए वाहनों में लगाई जा रही थी, पुराने वाहनों की तरफ ध्यान नहीं दिया गया। दूसरा जिन कंपनियों को नंबर प्लेट लगाने का जिम्मा सौंपा गया, वह समय से प्लेट उपलब्ध कराने में नाकामयाब रहीं। जबकि इस चिप को नए पुराने सभी वाहनों में लगाना अनिवार्य होगा। उन्होंने बताया कि संभागीय परिवहन अधिकारी के मुताबिक चेकिंग के दौरान हैंड मशीन से भी चिप में दर्ज सूचना पढ़ी जा सकती है। रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस और फिटनेस खत्म होने पर चिप को अपडेट कराना होगा। पुलिस व परिवहन विभाग को चेकिंग के दौरान आरआइएफडी स्कैनर साथ रखने होंगे।
उन्होंने बताया कि नई तकनीक से वाहन चोरी का खतरा भी कम हो जाएगा। सड़क पर दौड़ते चोरी के वाहन को चिप की मदद से आसानी से ट्रेस किया जा सकेगा। अगर कोई इस चिप को उतार कर वाहन चलाएगा तो भी वाहन के बारे में तहकीकात होगी और मामला पकड़ में आ जाएगा।

कड़ी सुरक्षा के बीच राज्य में विधानसभा चुनाव की मतगणना प्रारंभ

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राज्य की 70 विधानसभा सीटों के लिए शनिवार सुबह आठ बजे से 15 मतगणना केंद्रों पर वोटों की गिनती शुरू हो गई है। राज्य की निर्वाचन मशीनरी ने पारदर्शी और सुरक्षित मतगणना के लिए भारी सुरक्षा इंतजाम किए हैं। केंद्रीय बलों की 10 व पीएसी की 14 कंपनियों के साथ ही करीब चार हजार स्थानीय पुलिस कर्मी सुरक्षा में लगाए गए हैं।

सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों और जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को आयोग के निर्देशों के अनुसार मतगणना संपन्न कराने के निर्देश दिए गए हैं। उधर, राज्यपाल ने भी देर रात आला अधिकारियों के साथ बैठक कर मतगणना और नई सरकार के गठन की तैयारियों का जायजा लिया।
राज्य की मुख्य निर्वाचन अधिकारी राधा रतूड़ी ने बताया कि प्रदेश के सभी 13 जनपदों में कुल 15 मतगणना केंद्र स्थापित किए गए हैं। उत्तरकाशी में राजकीय कीर्ति इंटर कॉलेज, चमोली में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज गोपेश्वर, रुद्रप्रयाग में बहुद्देशीय क्रीड़ा भवन अगस्त्यमुनि, टिहरी में राजकीय आइटीआइ भवन नई टिहरी, देहरादून में स्पोर्ट्स कालेज रायपुर, हरिद्वार में कलेक्ट्रेट भवन रोशनाबाद और विकास भवन रोशनाबाद, पौड़ी में राजकीय इंटर कॉलेज पौड़ी, पिथौरागढ़ में राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बागेश्वर में पंडित बद्रीदत्त पांडे स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अल्मोड़ा में राजकीय होटल मैनेजमेंट एवं कैटरिंग संस्थान चिलकापिटा अल्मोड़ा, चम्पावत में वन पंचायत हॉल और रैन बसेरा हॉल, नैनीताल में एमबीपी गर्ल्स कालेज भवन हल्द्वानी, ऊधमसिंहनगर में न्यू मंडी समिति बगवाड़ा रुद्रपुर को मतगणना केंद्र बनाया गया है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी राधा रतूड़ी ने बताया कि सभी 70 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के लिए कुल 864 मतगणना टेबल लगाई गई हैं। इन पर सभी 10885 बूथों की मतगणना होगी। उन्होंने बताया कि सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को मतगणना प्रक्रिया भारत निर्वाचन आयोग के दिशा निर्देश के अनुसार संपन्न कराने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। पूरी मतगणना प्रक्रिया की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी भी कराई जा रही है।
राज्य पुलिस नोडल अधिकारी व आइजी दीपम सेठ ने बताया कि मतगणना शातिपूर्वक संपन्न कराने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में मतगणना के दौरान केंद्रीय सुरक्षा बलों की 10 कंपनिया, पीएसी की 14 कंपनिया, 3000 कास्टेबल, 350 हेड कास्टेबल, 550 सब इंस्पेक्टर, 50 इंस्पेक्टर और 30 राजपत्रित पुलिस अधिकारी तैनात किए गए हैं।
उधर, राज्यपाल डॉ. केके पॉल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी राधा रतूड़ी, मुख्य सचिव एस रामास्वामी, पुलिस नोडल अधिकारी व आइजी दीपम सेठ के साथ बैठक कर परिणाम आने के बाद नई सरकार के गठन की तैयारियों पर चर्चा की। इस दौरान अधिकारियों ने राज्यपाल को सरकार के गठन के लिए की गई तैयारियों का ब्योरा दिया।

उत्तराखण्ड में मतों का प्रतिशत बिगाड़ सकता है खेल

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उत्तराखंड में 2012 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से कांग्रेस मात्र आधा प्रतिशत अधिक वोट पाकर तत्कालीन भाजपा सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया था।
पिछले विधानसभा चुनाव की तरह इस बार भी प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस की सीधी टक्कर है। लेकिन इस बार दोनों दलों के बागियों द्वारा मैदान में ताल ठोकना राष्ट्रीय पार्टियों के लिए चुनौती बना हुआ है। हालांकि कई सीटों पर निर्दलीय भी टक्कर देते हुए दिखाई पड़ रहे है। अब ऐसे में स्थानीय मुद्दे और प्रत्याशी का चुनाव मत निर्णायक साबित होंगे।
उस वक्त भाजपा से कांग्रेस एक सीट अधिक यानी 32 सीटें लेकर राज्य के बड़े दल के रूप में उभरी और बसपा, निर्दलीयों के सहारे प्रदेश में सरकार बना ली। अगर मत प्रतिशत की बात की जाये तो कांग्रेस को 33.79 और भाजपा को 33.13 फीसदी मत मिले थे।

नन्हें मुन्ने बच्चों की आवाज बनकर उनकी जिंदगी संवारती – आदिती

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‘’जिंदगी और कुछ भी नहीं तेरी मेरी कहानी है’’

कहानी किसी की भी इसमें दम होना चाहिए,और ऐसी ही कहानी है- गैर सरकारी संस्था पर्वतीय बाल मंच की संयोजक अदिती पी कौर की।वैसे तो हमारे आस पास बहुत से संस्था काम कर रहे हैं लेकिन यह खास है क्योंकि यह उन नन्हें मुन्ने बच्चों के लिए काम कर रहा जिनकी आवाज भीड़ में ही दबी रह जाती है।

आइये अदिती से जानते हैं कुछ उनके बारे में, कुछ उनकी संस्था के बारे में।

अदिती देहरादून की रहने वाली हैं।इन्होंने स्कूल की पढ़ाई खत्म करने के बाद होटल मैनेजमेंण्ट की डिग्री ली और कुछ समय होटल में काम भी किया हैं।इस दौरान अदिती की मुलाकात एस0बी0एम0ए0 अंजनीसैंण,टिहरी गढ़वाल में संस्था के सचिव सिरिल आर. रैफियल से हुई।यह शायद इनकी जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट था, सिरिल जी से मिलने के बाद अदिती को सामाजिक क्षेत्र में कार्य कर रही संस्थाओं के बारे में पता चला और सामाजिक क्षेत्र में काम करने का इनका नया सफर यहीं से शुरू हुआ।

अदिती कहती हैं कि जैसे कि किसी भी नए काम को शुरु करने में हजारों चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, मुझे भी संस्था में काम करते हुए काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा क्योंकि यह मेरे लिए नया अनुभव था।साल 2002 में अन्तर्राष्ट्रीय पर्वतीय वर्ष के अवसर पर ’’पर्वतीय बच्चों का अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन’’ (आईसीएमसी) आयोजित किया गया, जहां विभिन्न पर्वतीय देशों के बच्चों ने प्रतिभाग किया तथा अपने लिए एक ऐसा मंच बनाने की बात की जहां पर वो अपनी बात रख सके।बस फिर क्या था मैंने ठान ली कि अब मुझे इन बच्चों की आवाज आगे तक पहुंचानी हैं।

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अदिती कहती हैं कि मेरा मुख्य काम था कि पर्वतीय बच्चों की बात को आगे बढ़ाया जाए। मुझे लगा कि बच्चों के लिए एक ऐसी जगह होनी चाहिए जिसके माध्यम से वो अपनी बात अपने समुदाय और सरकार तक पहुंचा सके।इसी सोच के साथ अदिती ने वर्ष 2003 में पर्वतीय बाल मंच (माउण्टेन चिल्ड्रन्स फाउण्डेशन) की शुरूआत कि जो बच्चों के अधिकारों को संरक्षित करते हुए बाल संरक्षण, बाल सहभागिता के माध्यम से बालक एवं बालिका के बीच भेदभाव, स्वच्छता एवं सफाई जैसे मुद्दों पर काम कर रहा है।इसके जरिए बच्चे अपने अधिकारों एवं कर्तव्य के प्रति जिम्मेदार हो रहे हैं और समुदाय को जागरूक करने में अपनी भागीदारी निभा रहे हैं। आज पर्वतीय बाल मंच अपनी सहयोगी संस्थाओं के माध्यम से लगभग 15000 बच्चों से जुड़ा हुआ है।

आज अदिती ने इन सभी बच्चों के लिए एक ऐसा मंच तैयार कर दिया है जिसके माध्यम से नन्हें मुन्ने बच्चों को अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने का मौका मिला है।

 

उत्तराखण्ड में आने वाली नई सरकार के सामने होंगी आर्थिक चुनौतियां

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उत्तराखण्ड में11 मार्च को ईवीएम (इलेक्शन वोटिंग मशीन ) चुनाव परिणाम आने के बाद चाहे जिसकी सरकार बने लेकिन नयी सरकार के लिए आर्थिक संकट एक बड़ी चुनौती के रूप में उभरेगा। एक बात तो सच है कि जिस आर्थिक अराजकता का परिचय वर्तमान सरकार ने दिया है उससे नई सरकार के सामने विकास के रास्ते को छूना आसान काम नही है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में अकेले स्टाम्प और रजिस्ट्री से होने वाली कमाई में 10 प्रतिशत की कमी आयी है। इसी तरह शराब के ठेके हाइवे से हटाने के कोर्ट के आदेश के बाद अब आबकारी से होने वाली आय भी कम होगी। वैसे आबकारी को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष ने लंबे अरसे से वाद छिड़ा रहा है।
नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट मानते हैं कि वर्तमान मुख्यमंत्री ने कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकार को करोड़ों का चूना लगाया, जबकि सत्तापक्ष इसे उपलब्धि मानता है। उनका कहना है कि उन्होंने शराब के कारोबार से अच्छी उपलब्धि हासिल की है पर यह अर्धसत्य है। लगभग 40 हजार करोड़ के कर्ज से जूझ रहे प्रदेश को नोटबंदी से बड़ा झटका लगा है। उससे पहले सरकार के उपायों ने भी प्रदेश को आर्थिक गर्त में ढकेला है।
आंकड़े बताते हैं कि अकेले स्टांप और रजिस्ट्री शुल्क से ही सरकार को इस वित्तीय वर्ष में 1200 करोड़ रुपये की आय का अनुमान था किन्तु फरवरी महीने में वह 554 करोड़ रुपये पर ही पहुंच सकी है, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में इस महीने 683 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित हो चुका था। पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में इस बार की कमाई 10 प्रतिशत कम है। रजिस्ट्री में भारी गिरावट आने के कारण यह कमी आई है। इसके कई कारण बताए जा रहे हैं।
कांग्रेस ने सत्ता में आने के 100 दिन में बेरोजगारी भत्ता देने और नई नौकरियां खोलने का वादा किया है। इन दो पमुख घोषणाओं को कंपलीट में लगभग 200 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। पात्रों की संख्या बढ़ी तो खर्च और भी बढ़ेगा।
कांग्रेस ने अपने संकल्प पत्र में जहां कई वादे किए हैं और लोगों को सब्जबाग दिखाने का काम किया है। जिनमें महिला मंगलदलों को स्टार्टअप के तौर पर 20 हजार तथा सामूहिक खेती के लिए एक लाख तक अनुदान शामिल है। इसी प्रकार युवाओं के लिए ढाई हजार प्रति युवाओं को ढाई हजार रूपए तथा सौ दिन का रोजगार दिए जाने की बात कही है। इससे भाजपा कहीं कम नहीं है।
भाजपा ने भी मेधावी छात्र-छात्राओं के लिए नि:शुल्क लैपटॉप, स्मार्टफोन वितरित करने जैसे वादे किए हैं जो उत्तराखंड जैसे आर्थिक रूप से सम्मान राज्य के लिए बहुत उपयोगी नहीं है।
कुल मिलाकर जहां सरकार के कामों से जहां आर्थिक क्षरण हुआ है। वहीं दो-दो दलों द्वारा सक्षम अर्थ नीति का अनुपालन न करना भी अर्थ नीति के लिए अच्छा नहीं माना जाएगा, जो इस बात का संकेत है कि उत्तराखंड की आर्थिक स्थिति आने वाले सरकार के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगी।

होली मिलन का आयोजन, फूलों के साथ खेली होली

होली के लिए अब कछ दिन ही बचे हैं,और उसकी तैयारियां भी शूरू हो चुकी है।ऋषिकेश स्तिथ बस अड्डे पर ऋषिकेश प्रेस क्लब द्वरा होली मिलान समारोह का आयोजन किया गया जिसमे छेत्र के पत्रकारों के साथ-साथ आम लोगों ने भी बड़ चढ़कर हिस्सा लिया। होली के इस समारोह में लोगों ने फूलों को रंग के रूप में इस्तेमाल किया वहीँ ऋषिकेश वुमन्स क्लब ने भी होली मिलान समारोह का आयोजन किया जिसमे बड़ी संख्या में महिलायों ने हिस्सा लिया और नाच-गानों के साथ होली का त्यौहार मनाया।  देर शाम तक चले इस कर्यक्रम में लोगों के जमकर लुफ्त उठाया और फूलों की होली खेली। ऋषिकेश वुमन्स क्लब की महासचिव पूनम शर्मा ने बताया की उनका क्लब हर त्यौहार को समारोह की तरह मनाता है और होली मिलन समारोह हर बार की तरह इस बार भी बड़ी धूम-धाम से मनाई गयी है।

15 केंद्रों पर होगी 70 विधानसभा सीटों के लिए मतगणना

लंबे इंतज़ार के बाद आखिरकार वो वक़्त पास आ ही गया,जब प्रदेश की 70 विधानसभा सीटों पर भाग्य आजमाने उतरे 637 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला कल दोहपर तक सबके सामने होगा।
11 मार्च को देश के पांच राज्यो के विधानसभा चुनावों के परिणाम सामने आएंगे। उत्तराखण्ड में मतगणना के लिए 15 केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों पर करीब 11 हजार कर्मी मतगणना कार्य में लगेंगे। यह संख्या सुरक्षा कर्मियों से अलग है। वोट काउंटिंग के लिए 864 टेबल लगाई गई हैं। राज्य की निर्वाचन मशीनरी ने मतगणना के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं।
उत्तराखंड में देश के चार अन्य राज्यों के साथ 11 मार्च को सुबह आठ बजे से मतगणना शुरू हो जाएगी। राज्य में 69 सीटों पर 15 फरवरी को वोटिंग हुई थी, जबकि एक सीट पर 9 मार्च को मतदान हुआ था। सभी 70 सीटों के परिणाम 11 मार्च को घोषित किए जाएंगे। राज्य की सभी 70 सीटों पर 62 महिला व दो तिहाई ट्रांसजेंडर प्रत्याशियों समेत कुल 637 प्रत्याशी मैदान में हैं। राज्य में कुल 10854 पोलिंग बूथों पर मतदान किया गया था।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी की माने तो सभी मतगणना केन्द्रों पर सारी तैयारियां पूरी हो गई है। सबसे अधिक 22 राउंड में मतगणना कर्णप्रयाग सीट पर होगी, जबकि करीब आधा दर्जन सीटों पर 10-10 राउंड में ही वोटिंग की गिनती निपट जाएगी। सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तु दास ने बताया कि एक बार आरओ द्वारा परिणाम की घोषणा होने के बाद दोबारा मतगणना की अपील स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि शांतिपूर्ण और पारदर्शी मतगणना के लिए आयोग के निर्देशों के पालन के लिए मतगणना केंद्रों पर मतगणना एजेंटों और मतगणना कर्मियों को अलग रखने और ईवीएम की सुरक्षा के लिए बेरिकेडिंग की गई है और काटे वाली तारो से घेरा बनाया गया है। इसके साथ ही सभी केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं साथ ही किसी भी प्रकार के विवाद से बचने के लिए मतगणना केंद्रों पर पूरी प्रक्रिया की वीडीयोग्राफ़ी भी की जाएगी। इवीएम ले जाने वाले कर्मीयों की पहचान के लिए उन्हें रंगीन बैज देने की व्यवस्था भी की गई है। सभी सम्बंधित अधिकारियो ने जायजा ले लिया है और उनके हिसाब से सभी तैयारियां पूरी हो चुकी है।

उत्तराखंड के चुनावी नतीजे के एक्जिट पोल सर्वे ने निकाली पीके की हवा

उत्तराखंड विधानसभा के चुनावों के एक्जिट पोल ने पहाड़ पर बीजेपी का परचम लहराकर सरकार बनाने की कयासबाजी को हवा दे दी है। 2017 के विधान सभा चुनाव में से पहले से विभिन्न सर्वेक्षणों में पीछे चल रही कांग्रेस को एक बड़ा झटका अलग-अलग चुनावी रुझानों के एक्जिट पोल से लगा है। जिसकी गाज अब चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर पर पड़नी शुरू हो गयी है। लगातार पहाड़ों पर कार्यकर्ताओ की नाराजगी समय समय पर पीके को लेकर सामने आयी और कार्यकर्ताओं ने इसका गुस्सा जाहिर किया।ऋषिकेश में राहुल गाँधी की जनसभा सिर्फ कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में तब्दील हो गयी जिसमे अपेक्षा अनुसार भीड़ नहीं जुट पायी। कार्यकर्ताओ ने उस समय भी पीके की टीम को लेकर नाराजगी उठायी जिसे संगठन ने दबा दिया था क्योंकि सूबे के मुख्यमंत्री पीके के जादुई चमत्कार से प्रभावित थे और प्रशांत किशोर को बढ़ती उम्र में टॉनिक और  ‘‘च्यवनप्राश’’ का नाम देकर बस उसके सहारे चुनावी वैतरणी पार करने की सोच रहे थे। लेकिन एक्जिट पोल के रुझानों ने कार्यकर्ताओ को बोलने का मौका दे दिया है।

अब कांग्रेसी कार्यकर्ता मुख्यमंत्री हरीश रावत के प्रशांत किशोर को ‘च्यवनप्राश’ बताने वाले बयान पर सीधा निशाना साध रहे है। गौरतलब है मुख्यमंत्री ने कहा था कि ‘‘बढ़ती उम्र में ऐसे टॉनिकों का सहारा लेना पड़ता है।’’ हरिद्वार -ऋषिकेश और देहरादून में प्रशांत किशोर को लेकर लगातार कार्यकर्ता नाराजगी जाहिर करते रहे जिस से आने वाले नतीजो 11 मार्च को अगर कांग्रेस को बहुमत नहीं मिलता तो प्रशांत किशोर की न केवल पहाड़ में हवा निकल जाएगी और ये सबसे बड़ा झटका हरीश रावत के साथ साथ विजयी रथ पर निकले प्रशांत किशोर उर्फ़ पीके के लिए भी होने जा रहा है।हरीश रावत ने एक्जिट पोल के सर्वे को लेकर पूछे प्रश्नों में इन रुझानों को सिरे से ख़ारिज कर दिया है और कहा है कि पहले भी पहाड़ की जनता इन सभी सर्वे को गलत साबित कर चुकी है और अब भी यही होने जा रहा है 11 तारीख को सब आपके सामने होगा।