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फ्लिपकॉर्ट में 9100 करोड़ का निवेश, ईबे इंडिया को खरीदा

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भारतीय ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकॉर्ट में 9100 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। फ्लिपकॉर्ट में माइक्रोसॉफ्ट, ईबे और टेन्सेंट निवेश कर रही है। इसके अलावा अब फ्लिपकॉर्ट ने ईबे इंडिया का अधिग्रहण कर लिया है।

फ्लिपकार्ट में फिलहाल टाइगर ग्लोबल मैनेजमेंट, नैप्सटर, एस्सेल पार्टनर और डीएसटी ग्लोबाल का निवेश है। इस तरह इन कंपनियों के निवेश से अब फ्लिपकार्ट की कुल बाजार परिसंपत्तियां 75 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुकी हैं।

मनरेगा घोटाले में अपर विकास अधिकारी गिरफ्तार

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महात्मा गांधी के नाम पर चलाई जा रही रोजगार योजना घोटाले का बायस बनती जा रही है। छोटे से लेकर बड़े अधिकारी तक इस घोटाले में आकंठ डूबे हुए हैं। पिछले दिनों से कांग्रेस से जुड़ी महिला ग्राम प्रधान लीला शर्मा पर मनरेगा के नाम पर गबन का बड़ा आरोप लगा था।जिसके विरूद्ध मुख्यमंत्री हरीश रावत, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय समेत कांग्रेस के वरिष्ठ कांग्रेसियों ने कैंट थाना पर धरना दिया था और उन पर लगे आरोपों को झूठा बताया था और कहा था कि भाजपा सरकार आने पर कांग्रेस से जुड़े लोगों पर चुन-चुनकर दंडित करने की कार्यवाही चल रही है। अब पुलिस ने आरोपी सहायक विकास अधिकारी डी.एस. राना को गिरफ्तार कर इस मामले में खुलासा करने का मन बना लिया है।
ग्राम प्रधान लीला शर्मा सहायक विकास अधिकारी डीएस राणा तथा कई अन्य अधिकारियों की भी इस मामले में अच्छी खासी मिली भगत हो सकती है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता। जानकार सूत्रों का मानना है कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक स्वीटी अग्रवाल ने बताया कि अपराध संख्या 54/16 5 मई 2016 को लीला शर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ था। खूबी तो यह कि 05 मई 2016 को कांग्रेस सरकार अस्तित्व में थी।
2017 में हुए चुनाव के बाद भाजपा सरकार शासन में आई,लेकिन अपनी ही सरकार में दर्ज हुए मुकदमें पर कांग्रेसियों ने जिस तरह से होहल्ला मचाया था कि वह इस बात का संकेत है कि दाल में काला है। अब इस मामले पर एडीओ की गिरफ्तारी मामले को और संगीन बना रही है। इस प्रकरण की जांच थाना प्रभारी शंकर सिंह विष्ट स्वयं कर रहे हैं ताकि दूध का दूध पानी का पानी हो सके। एडीओ राणा को रविवार को देर रात गिरफ्तार किया गया था।

यूपी व उत्तराखण्ड के लम्बित मामलों का निस्तारण जल्द

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सूबे के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सोमवार को लखनऊ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके आवास पर शिष्टाचार भेंट की। योगी जी ने उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री रावत का गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने राज्य में उनकी सरकार द्वारा प्रारम्भ किए गए कार्यों की जानकारी साझा की। मुख्यमंत्री रावत ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी को उनके द्वारा लिए गए विभिन्न निर्णयों की प्रशंसा की। सीएम रावत ने कहा कि भ्रष्टाचार विकास के मार्ग की सबसे बड़ी बाधा है। इसलिए उत्तराखण्ड में जीरो टाॅलरेंस आॅन करप्शन की नीति अपनाई गई है।
मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि वर्तमान उत्तर प्रदेश सरकार व उत्तराखण्ड सरकार की मंशा सकारात्मक है। केंद्र सरकार का भी सहयोगी रूख है। एक दूसरे के सहयोग से दोनों ही राज्यों में विकास कार्यों में तेजी आएगी। यूपी सीएम योगी ने सीएम रावत को यथासम्भव सहयोग के प्रति आश्वस्त किया।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री व उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री ने दोनों राज्यों के मध्य लम्बित विभिन्न मामलों पर विस्तार से चर्चा की। यह तय किया गया कि लगभग सोलह वर्षों से अधिक समय से लम्बित चले आ रहे मामलों का निस्तारण टाईम बाउन्ड तरीके से किया जाए।
सभी मामलों का एक कम्पलीट नोट तैयार किया जाए, जिसमें दोनों राज्यों का पक्ष दर्ज हो। जल्द ही दोनों राज्यों के मुख्य सचिव स्तर की बैठक कर जिन मामलों में सहमति बन जाती है, उन पर अंतिम निर्णय ले लिया जाए। जहां आवश्यक होगा, वहीं संबंधित विभागीय मंत्रियों के स्तर पर सहमति बनाई जाएगी।
वहां से भी निस्तारित नही होने वाले मामलों पर निर्णय मुख्यमंत्री स्तर से कराया जाए। दोनों ही पक्षों में सहमति बनी कि लम्बित विभिन्न मामलों को अब समयबद्ध तरीके से सुलझा लिया जाए। यदि कुछ ऐसे मामले फिर भी रह जाते हैं जिन पर मतभेद हों तो भारत सरकार के स्तर से निर्णय करा लिया जाए। वहां से होने वाला निर्णय दोनों पक्षों को मान्य होगा।
बैठक में टिहरी बांध परियोजना से उत्पादित ऊर्जा में हिस्सेदारी, सिंचाई विभाग की परिसम्पत्तियों जिनमें आवासीय अनावासीय भवनों, खाली पड़ी भूमि, हरिद्वार कुम्भ क्षेत्र में भूमि शामिल है के हस्तांतरण, जमरानी बांध, विभिन्न जलाशयों, उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग पर बकाया बिजली के बिल, परिवहन विभाग के तहत पेसेंजर टैक्स के भुगतान, किच्छा बस स्टेशन के हस्तांतरण, पेंशन दायित्वों की पूर्ति सहित पर्यटन, वन, शिक्षा, सहकारिता आदि विभागों के मामलों पर भी चर्चा की गई। बैठक में उत्तराखण्ड प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट, उत्तराखण्ड के अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश व उत्तरप्रदेश के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

जापानी तकनीक से होगा उत्तराखंड में भूस्खलन का इलाज

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जापान इंटरनेशनल कोआॅपरेशन एजेन्सी (JICA) द्वारा उत्तराखण्ड के वन क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं के कारण होने वाली क्षति, खासतौर पर वन क्षेत्रों में लैण्ड-स्लाइड्स के उपचार के लिये तकनीकी मदद देने पर सहमति हुई है। इस संबंध में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सोमवार को सचिवालय में बैठक जिसमे “जायका” परियोजना ने जापान से आये विशेषज्ञों शिन्गो किटौरा तथा साओरी मियाजिमा का परिचय कराते हुए तकनीकी सहायता परियोजना के विषय में जानकारी दी। 

जून 2013 में उत्तराखण्ड में आयी भीषण आपदा के बाद JICA परियोजना में वन क्षेत्रों में भूस्खलन के उपचार के लिये कम्पोनेन्ट शामिल किया गया था, जिसमें छोटे भूस्खलन का उपचार विभागीय स्तर पर किया जाना था। बड़े भूस्खलन, जिसमें विशेष तकनीकी इनपुट की आवश्यकता है, के उपचार के लिए विशेषज्ञ तकनीकी सलाहकारों की सेवाऐं ली जानी थी। अन्तरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों एवं तकनीकी सलाहकारों के चयन के लिए प्रयास किये गये परन्तु कुछ खास हासिल नहीं हुआ। इस संबंध में JICA से विचार-विमर्श के बाद एक नयी ‘तकनीकी सहायता परियोजना’ के लिये जापान से अनुरोध किया गया। 

इस नयी परियोजना में जापान

  • अपने विशेषज्ञों को भेजकर वन क्षेत्रों में भूस्खलन के उपचार कार्य का काम और तकनीकी डिजाइन तैयार करेगा
  • इसके साथ-साथ वन विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी देगा।
  • जायका द्वारा 4 चिन्हित भूस्खलन के उपचार के लिए तकनीकी डिजाइन तैयार किये जाएंगे तथा
  • निर्माण एवं उपचार कार्य के लिए ज़रूरी मशीनरी और उपकरण भी उपलब्ध कराये जायेंगे।

बाद में विभिन्न विभागों एवं अन्य हिमालयी राज्यों को भी इन तकनीकों को दिया जायेगा। इस परियोजना का खर्च जापान द्वारा शत प्रतिशत अनुदान के रूप में किया जाएगा। 

तकनीकी सहायता परियोजना के लिए वन विभाग 03 टास्क टीम बनायेगी। जिसके लिए वन संरक्षक स्तर के एक अपर परियोजना निदेशक, प्रभागीय वनाधिकारी स्तर के टास्क मैनेजर के साथ-साथ उप प्रभागीय वनाधिकारी, रेंज अधिकारी तथा उप वन रेंजर तथा वन दरोगा स्तर के अधिकारियों की तैनाती की जानी है। इसके अलावा अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव वन की अध्यक्षता में एक संयुक्त समन्वय समिति का गठन किया जाएगा। प्रमुख वन संरक्षक उत्तराखण्ड, मुख्य परियोजना निदेशक, जायका के विशेषज्ञ, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, भारत सरकार के प्रतिनिधि तथा भारत में जायका मुख्यालय के प्रतिनिधि इस समिति के सदस्य होगें।

वहीं जापान से 02 प्रकार के विशेषज्ञ इस परियोजना में कार्य करेंगे। लम्बी अवधि के विशेषज्ञों द्वारा अपना योगदान दे दिया गया है तथा अल्प अवधि के विशेषज्ञों द्वारा भी आवश्यकतानुसार समय-समय पर अपना योगदान दिया जायेगा, जो विशेष रूप फील्ड सर्वे, भूस्खलन के उपचार के लिये तकनीकी डिजाइन तैयार करने, विभिन्न इंजीनियरिंग कार्यों का प्राक्कलन तैयार करने, इन कार्यों के लिए उपयुक्त फर्मों के चयन तथा फील्ड कार्यों का पर्यवेक्षण आदि का कार्य करेंगे।

खनन रोक पर सुप्रीम कोर्ट का स्टे

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पिछले कुछ दिनों से खनन को लेकर नई सरकार परेशान थी और हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, और सोमवार देर रात सुप्रीम कोर्ट ने इसपर अपना फैसला दे दिया है।सु्प्रीम कोर्ट से त्रिवेंद्र सरकार को आज बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश की खंडपीठ ने आज हाईकोर्ट के उस आदेश पर स्टे लगा दिया है, जिसमें खनन पर चार महीने के लिए रोक लगा दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब उत्तराखंड में सरकारी रूप से खनन किया जा सकेगा। आपको बता दें कि हाईकोर्ट के खनन पर रोक के बाद उत्तराखंड सरकार ने हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। जिसके बाद आज सरकार के हक में ये फैसला आया है। जहां फैसला आने के बाद  मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सुप्रीम कोर्ट का शुक्रिया अदा किया है तो वहीं कुछ लोग इस फैसले के बाद थोड़ा चिंतित हैं।

18 मार्च को  खनन से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य में खनन पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। कोर्ट ने राज्य में खनन और पर्यावरण पर सुझाव देने के लिए एक हाई पावर्ड कमेटी बना दी थी। जिसे चार महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा था।

 

पिछली सरकार ने नहीं किया वादा पूरा, त्रिवेंद्र सरकार से बड़ी उम्मीदें

पर्यटन नगरी ऋषिकेश में लक्ष्मण झूला-राम झूला अपनी विशेष पहचान रखते है , लेकिन ये दोनों पुल पैदल आने जाने का साधन है। काफी लम्बे समय से क्षेत्र में एक अन्य पुल की मांग की जा रही थी, जिसका शिलान्यास पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने अपने कार्यकाल में किया था। जिसका नाम जानकी पुल रखा गया लेकिन बजट के अभाव में इस पुल का काम लटका हुआ है लेकिन त्रिवेंद्र सरकार से लोगों को रक बार फिर उम्मीद जगी है।

ऋषिकेश से स्वर्गाश्रम, नीलकंठ महादेव को जोड़ने के लिए जानकी पुल का निर्माण होना है जिसका शिलान्यास तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने किया था, जिससे नीलकंठ कावड़ यात्रा में जाने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। ऋषिकेश से 35 करोड़ 53लाख की लागत से बनने वाला जानकी पुल पैदल के साथ साथ हल्के वाहनों के लिए भी प्रयोग में आएगा लेकिन अभी तक इस पुल के निर्माण के लिए कार्य बड़ी धीमी गति से चल रहा है और तो और पिछले तीन महीनों से कार्य बंद पड़ा हुआ है जिससे लोगों में नाराजगी है।

जानकी पुल का निर्माण ऋषिकेश के पूर्णानंद घाट से वेद निकेतन घाट के बीच होना है जिस से स्वर्गाश्रम जाने वाले यात्रियों को लगभग तीन किलो मीटर की दुरी और लगभग पैदल जाने का १ घंटे का समय बचेगा। पिछली सरकार द्वारा भी इस पुल के लिए वादे किये गए थे लेकिम कार्य पूरा नहीं हो सका। ऐसे में बीजेपी सरकार के आने से एक बार फिर लोगों में पुल के प्रति उम्मीद जगी है। वहीँ मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी आस्वाशन दिया है कि जल्द से जल्द इस कार्य को किया जायेगा।

पर्यटन के क्षेत्र में अपनी विशेष पहचान बना चुके लक्ष्मण झूला – राम झूला के बाद अब जानकी पुल का बेसब्री से इंतज़ार है जिसके बनने से इन दोनों पुलो पर दुपहिया वाहनो और भीड़भाड़ का दबाव कम होगा, और तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को भी सहूलियत मिलेगी। अब देखने लायक होगा की बेजीपी सरकार इस थमी योजना को कब तक पूरा कर पाते है।

सुरक्षा के लिए बनीं दीवार पर लिखेंगें केदारनाथ का इतिहास

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केदारनाथ की सुरक्षा के लिए बनाई गई 350 मीटर लंबी और 12 फीट ऊंची आरसीसी सुरक्षा दीवार पर थ्रीडी पेंटिंग से केदारनाथ का इतिहास और इसके दोबोरा निर्माण की कहानी लिखी जाएगी।इसके साथ ही 2 वाचिंग टावर की स्थापना की जाएगी जिसकी मदद से चौराबाड़ी क्षेत्र में होने वाली मौसमी गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी।

मंदिर से दो सौ मीटर पीछे की तरफ बनाई गई सुरक्षा दीवार अब केदारनाथ में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए जानकारी का खजाना बनेगी। इस दीवार पर केदारपुरी और केदारनाथ की महिमा का वर्णन किया जाएगा। धाम का पूरा इतिहास दीवार पर लिखा जाएगा। इसके अलावा यह दीवार आपदा में हुए नुकसान और 2014 से हो रहे पुनर्निर्माणकार्य की पूरी जानकारी भी इस दीवार पर अंकित की जाएगी।आपको बता दें कि नेहरु माउंटेयरिंग संस्थान ने केदारनाथ और केदारपुरी की सुरक्षा के लिए त्रिस्तरीय सुरक्षा दीवार बनाई है, जिसमें पहली गोबिन वाल, दूसरी राॅक नेट वाल और तीसरी आरसीसी वाॅल हैं।

तीनों सुरक्षा दीवारें बनाने वाली संस्था निम का दावा है कि यह सुरक्षा दीवारें साल 2013 वाले जनसैलाब को रोकने में पूरी तरह से सक्षम हैं। इन दीवारों का निर्माण आईआईटी रुड़की और सीबीआरआई के विशेषज्ञों की देखरेख में किया गया है।

दीवार पर थ्रीडी पेंटिंग का मुख्य उद्देश्य केदारनाथ पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को वहां के बारे में बेहतर से बेहतर जानकारी उपलब्ध कराना है।

तैश में आने वालों को हथियार का लाइसेंस नही

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अब हथियारों के लाइसेंस जिला प्रशासन तब जारी करेगा, जब आवेदनकर्ता की दिमागी हालात पूरी तरह स्वास्थ्य होगी। उसे बात-बात पर गुस्सा नहीं आता होगा और वो शराब का सेवन अधिक नहीं करता होगा। इसके लिए अब एलआईयू रिपोर्ट के साथ सभी तरह के मानसिक स्वास्थ्य सर्टिफिकेट प्राप्त करना जरुरी होगा। राज्य के हर जिले में इसे लागू कर दिया गया है।
अभी तक पिस्टल, रिवॉल्वर और एलजी यानी लोंग ग्राफ राइफल के लिए एलआईयू रिपोर्ट ही लगती थी। उसके बाद फाइल एसएसपी कार्यलय से होते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचती थी। वहीं पिछले दिनों देशभर में शराब पीकर हर्षफायर करने की घटनाएं बड़ी है, जिससे कई लोगो की मौत भी हुई। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तय किया कि एलआईयू की रिपोर्ट के अलावा जिला अस्पतालो में मनोचिकित्सक विभाग की रिपोर्ट भी अनिवार्य होगी। मनोचिकित्सक कई बिन्दुओ पर आवेदक की जांच करेंगे।
दून अस्पताल के सीएमओ डा. वाई.एस थपलियाल ने बताया कि कुछ दिन पूर्व ही जिला प्रशासन से पत्र आया था। उसके बाद दून अस्पताल को इस बारे में सूचित करके व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। आगे जो भी व्यवस्था बनेगी, उसके अनुसार आहे काम किया जाएगे।
दून अस्पताल में मनोचिकित्सक विभाग के अध्यक्ष डॉ. कर्नल जेएस राणा ने बताया कि मनोचिकित्सक ऐसे आवदेकों को फेल कर देते हैं, जिन्हें अत्यधिक गुस्सा आता है। वहीं जो शराब का अत्याधिक सेवन करते हैं या और किसी नशीली पदार्थ का सेवन करते हैं, ऐसे आवेदकों को भी अनफिट कर दिया जाता है। इसके अलावा कोई दिमागी बीमारी हो या डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्ति को भी फेल किया जाता है।
हथियारों के बाद ड्राइविंग लाइसेंस के लिए भी ऐसी व्यवस्था जल्द शुरू होने वाली है। केंद्र सरकार का मानना है कि वाहन चलाने के लिए स्वास्थ्य दिमाग होंना जरूरी है। वहीं, संभागीय परिवहन अधिकारी सुधांशु गर्ग ने बताया कि इस बारे में अभी मौखिक रूप से ही सुना है।

ड्रोन रखेगा वनाग्नियों पर नजर

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इस बार वनाग्नि का पता लगाने के लिए ड्रोन का भी इस्तेमाल किया जायेगा। वनों में लगने वाली आग को रोकने के लिए फायर वाचर की संख्या 3000 से 6000 कर दि गयी है।राज्य में 14 से 20 अप्रैल तक आग सुरक्षा सप्ताह मनाया जा रहा है। रिजर्व वन के साथ-साथ वन विभाग सिविल सोयल और वन पंचायतों में लगने वाली आग को रोकने की योजना वन विभाग बनायेगा। ये निर्णय मुख्य सचिव श्री एस.रामास्वामी की अध्यक्षता में लिया गया। मुख्य सचिव ने वीडियों कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलाधिकारियों को फारेस्ट फायर मैनेजमेंट प्लान पर अमल करने और सतर्क रहने के निर्देश दिये।
वनाग्नि की रोकथाम के लिए 40 मास्टर कंट्रोल रूम बनाये गये हैं, इसकेअलावा 1416 क्रू-स्टेशन, 171 वाॅच टाॅवर, 391 स्थाई सेट, 177 मोबाइल सेट, 1534 हैंडसेट, 43 रिपीटर, रेक व कटिंग, फायर फाइंडर ब्रेस हुक, मेकलाइड, पुलास्की, सावल, डबल विटेक्स, फेस मास्क हेलमेट, टार्च आदि की व्यवस्था की गई है। साथ ही 15,400 प्रशिक्षित मानव संसाधन, 40,000 एसडीआरएफ द्वारा प्रशिक्षित स्थानीय लोगो को भी आग लगने की स्थिति में तैनात किया जायेगा।
राज्य और जिला स्तर पर वनाग्नि नियंत्रण और प्रबंधन योजना बना ली गई है। संवेदनशील क्षेत्रों को चार जोन में बांटा गया है। इसमें 11280 वर्ग किमी हाई रिस्क, 15410 वर्ग किमी मीडियम रिस्क, 11144 वर्ग किमी लो रिस्क और 15648 वर्ग किमी नो रिस्क जोन में रखा गया है। फायर लाइन, पैदल, लीसा बटिया, वन मोटर मार्ग की सफाई कर दी गई है। नियंत्रित और नियमित फुकान किया जा रहा है। प्री फायर एलर्ट एसएमएस, व्हाटसअप के जरिये भेजने की व्यवस्था की गई है। लोगों को जागरूक करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम किये जा रहे हैं। 4600 फील्ड स्टाफ, 5600 फायर वाचर और वन पंचायत सदस्यों को प्रशिक्षित किया गया है।

तो अब बारात के लिए भी लेनी होगी पुलिस से इज़ाजत

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शादी के माहौल में जो बात हर किसी को खुश करती है वो है बारात में जाने की बात। शादी के माहौल में हर किसी को बारात में धूम मचाने का शौक होता है।लेकिन अब आपको इस धूम धड़ाके के लिए भी परमीशन लेनी पड़ेगी।

जी हां शादी के लिए शहर से बारात निकालनी है तो आपको पुलिस से इसकी परमीशन लेनी होगी।लेकिन घबराइए मत इस परमीशन की जिम्मेदारी आपकी नहीं बल्कि वेंडिंग प्वाइंट के संचालकों की होगी।ऐसा ना करने पर इसका खामियाजा वेडिंग संचालकों को भुगतना होगा और उन पर कार्रवाई भी की जाएगी।इसके साथ ही पार्किंग की बेहतर व्यवस्था और करने और सीसीटीवी कैमरे लगाना भी जरुरी कर दिया है।

एसएसपी स्वीटी अग्रवाल ने यह आदेश जारी कर दिए है।इसके साथ ही ट्रैफिक सुधार के लिए लेफ्ट टर्न सख्ती से खाली कराने के निर्देश दिए हैं।एसएसपी स्वीटी अग्रवाल ने ट्रैफिक सुधार को ध्यान में रखते हुए शहर के वेडिंग प्वाइंटों के लिए अलग से कार्ययोजना बनाई है।शादी के सीजन में बारातों के सड़क पर निकलने के कारण जाम के हालात बन जाते हैं।इस लिहाज से बारात को सड़क पर लाने के लिए पुलिस की परमीशन को जरुरी किया गया है।पहले से परमीशन लेने वाले क्षेत्रों में पुलिस पहले से सक्रिय होकर ट्रैफिक के लिए अलग व्यवस्था कर लेगी।वेडिंग प्वाईंट संचालकों को हिदायत दी गई है कि वह शादी के लिए मंडप को बुक करते समय ट्रैफिक नियमों का पालन और शस्त्र लाइसेंस का प्रयोग न करने का प्रमाणपत्र लें।इतना ही शादी में आने वाली गाड़ियों के पार्किंग की बी पूरी जिम्मेदारी वेडिंग प्वाइंट संचालकों की होगी।