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जाम से निपटने को ड्यूटी में बदलाव करेगी पुलिस

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शहर मे बढ़ते जाम पर लगाम कसने के लिए पुलिस कर्मचारी अब चौक बूथ पर खड़े होकर ड्यूटी नहीं करेंगे। बल्कि जाम लगने वाले चौक पर तैनात पुलिस कर्मचारियों को एक-एक रोड संभालनी होगी। चौक से निकलने के तुरंत बाद वाहन रुकने से ट्रैफिक बाधित न हो और चौक से पहले लेफ्ट टर्न फ्री रहे, इसकी जिम्मेदारी उक्त पुलिस कर्मचारी की होगी।
एसएसपी स्वीटी अग्रवाल ने कुछ दिन पहले जाम पर नियंत्रण के लिए पीक ऑवर में थाना-चौकी प्रभारियों की जिम्मेदारी तय की थी। इसके बाद सहारनपुर रोड पर तो कुछ हद तक राहत है, लेकिन शहर की अधिकांश प्रमुख सड़के पीक ऑवर में जाम रहती हैं। पिछले कुछ दिनों में धर्मपुर चौक, राजपुर रोड, ईसी रोड पर जाम रहा है। इसमें सुधार के लिए देर रात एसएसपी स्वीटी ने दून पुलिस की बैठक ली। उन्होंने कहा कि जिन चौराहों पर ट्रैफिक लाइट लगी है, वहां भी पुलिस कर्मचारी चौक के बूथ या पीकेट पर खड़े रहते हैं। जबकि चौराहों पर लेफ्ट टर्न को चौक से गुजरने वाले वाहन घेरे रहते हैं।इसके साथ ही सिटी बस और विक्रम संचालक चौक से निकलते ही वाहन रोककर सवारी बैठाने-उतारने लगते हैं, इससे यातायात बाधित होता है। उन्होंने इसके लिए ट्रैफिक लाइट से चलने वाले चौक पर पुलिस कर्मचारियों को बूथ के बजाए, एक-एक सड़क पर खड़े होकर ड्यूटी करने का निर्देश दिया है। बैठक में जाम को लेकर थाना-चौकी प्रभारियों को भी सख्त हिदायत दी गई है।
शादी का सीजन शुरू होते ही एसएसपी ने वेडिंग पॉइंट संचालको को भी हिदायत दी है। बिना पार्किंग शादी- समारोह वाले वेडिंग पॉइंट का पुलिस चलान करेगी। साथ ही उन्होंने बिना अनुमति बारात निकलने या बारात निकलने वक्त यातायात बाधित करने पर भी कार्रवाई को कहा है।

इस बार रफ़्तार पकड़ेगी चार धाम यात्रा

उत्तराखंड की आस्था की चार धाम यात्रा में श्रधालुओं का उत्साह यात्रा से पहले देखने को मिल रहा है। बड़ी संख्या में देश विदेश के तीर्थ यात्री चार धाम यात्रा के लिए वाहनों की बुकिंग कराने में जुटे हैं । उत्तराखंड की आर्थिकी का सबसे बड़ा साधन पर्यटन से है इसलिए हर साल होने वाली चार धाम यात्रा यहाँ के स्थानीय निवासी और व्यापारियों के साथ-साथ यात्रियों में भी देखने को मिल रहा है। 2013 की जल आपदा के बाद धीरे धीरे उत्तराखंड का पर्यटन रफ़्तार पकड़ने लगा है लेकिन इस बार की यात्रा अभी से रफ़्तार पकड़ने लगी है।

2013 में आये जल प्रलय के बाद उत्तराखंड की चार धाम यात्रा धीरे धीरे रफ़्तार पकड़ने लगी है लेकिन 2017 की चार धाम यात्रा में पिछली यात्रा के सभी रिकॉर्ड टूटने की उम्मीद की जा रही है मई माह से शुरू होनी वाली चार धाम यात्रा के लिए अभी से  संयुक्त रोटेशन यात्रा व्यवस्था समिति को  से 1200 से अधिक वाहनों की एडवांस बुकिंग मिल गयी  है बीते साल के मुकाबले  इस साल यात्रा में रिकॉर्ड श्रदालुओ के आने के संकेत मिलने लगे है।

इस साल की चार धाम यात्रा को सुरु होने में अभी एक माह का समय है, श्रदालुओ में देव धामों के दर्शन के प्रति बढ़ता उत्साह एडवांस बुकिंग से ही लगाया जा सकता है।  संयुक्त रोटेशन के अध्यक्ष सुधीर रॉय ने बताया की इस साल की चार धाम यात्रा में श्रदालुओ की संख्या में भारी वृद्धि की संभावना है अब तक 1200 से अधिक वाहनों की एडवांस बुकिंग की जा चुकी है इनमें सबसे ज्यादा बुकिंग बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री के लिए मिली है, पिछले साल तक इस समय कोई बुकिंग नहीं होती थी जिससे ये उम्मीद की जा रही है कि पिछले साल की तुलना इस बार की यात्रा में बड़ी  संख्या में श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचेगे ,जिसे देखते हुए परिवहन कंपनिया यात्रियों की सुविधा के लिए पर्याप्त बसों के लिए कुमाऊ मंडल के अलावा सिटी बसों को भी यात्रा बेड़े शमिल कर रही है।

2017 चार धाम यात्रा के लिए नयी उम्मीद लेकर आ रहा है व्यवसायी, वाहन स्वामी और छोटे मोटे व्यवसायी सभी बड़ी उम्मीद से यात्रा से ठप्प पड़े बिजनेस को गति पकड़ने की आस में बैठे हुए हुए है। तीर्थ यात्रियों ने  यात्रा के प्रति विश्वास और श्रद्धा के संकेत अभी से मिलने लगे है इस बार बड़ी संख्या में यात्री दर्शनों के लिए पहुचेंगें।

 

ट्रिपल रोल में बाहुबली

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जिस फिल्म बाहुबली-2 के रिलीज होने का बेसब्री से इंतजार हो रहा है, उसे लेकर अब एक और खुलासा हुआ है। अब तक खबर थी कि बाहुबली बने प्रबास इस पार्ट-2 में डबल रोल में नजर आएंगे। अब खबर मिली है कि इस फिल्म में प्रबास के दो नहीं, 3 रोल हैं। हालांकि तीनों रोल आमने सामने वाले नहीं हैं। एक रोल में वे बेटे हैं, तो दूसरे में पिता बने हैं और अब कहा जा रहा है कि तीसरा रोल दादा का है और ये भी प्रबास ने ही निभाया है। इस फिल्म को लेकर कितनी हाईप है, इस बात का अंदाज इस बात से लगाया गया है कि बाहुबली 2 के रिलीज होने से तीन सप्ताह पहले पहली वाली बाहुबली को बड़े पैमाने पर रिलीज किया गया, ताकि फिल्म दूसरी फिल्म की कहानी को समझ सकें और बाक्स आफिस रिपोर्ट कहती हैं कि दूसरी बार परदे पर आई बाहुबली की पहली कड़ी को अच्छा रेस्पांस मिल रहा है। 28 अप्रैल को रिलीज होने वाली इस फिल्म से देश को इस सवाल का जवाब मिलेगा कि कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा था। फिल्म की प्रमुख भूमिकाओं में प्रबास के साथ साथ राणा दुग्गपति, सुदीप, अनुष्का शेट्टी, रमैया, तमन्ना भाटिया और चेन्नई एक्सप्रेस में दीपिका के पिता का रोल करने वाले सत्यराज नजर आएंगे।

अब अक्षय खन्ना सामने आए पापा की हेल्थ के लिए

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पिछले 31 मार्च से विनोद खन्ना मुंबई के एक अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। अपने पापा की हेल्थ को लेकर उनके बड़े बेटे अक्षय खन्ना पहली बार सामने आए हैं। अपने पापा को लेकर जूनियर खन्ना ने सोशल मीडिया पर संदेश दिया है कि पापा की हेल्थ अच्छी हो रही है और उम्मीद है कि डाक्टर जल्दी ही उनको घर जाने की परमीशन दे देंगे। अक्षय ने अपने पिता की सेहत की कामना करने वाले शुभचिंतकों के लिए भी आभार माना है और कहा है कि हमारा परिवार आभारी है। आगे भी दुआएं करते रहिए। दूसरी ओर, बालीवुड के कई लोग विनोद खन्ना की सेहत का हालचाल लेने रविवार को अस्पताल पंहुचे। रमेश सिप्पी, असरानी, बिंदू, जावेद अख्तर और टीनू आनंद सहित कई लोग अस्पताल गए। सलमान खान बड़े सितारों में अकेले हैं, जो विनोद खन्ना से मिलने पंहुचे और उनको विनोद खन्ना से मिलवाया गया। बाकी लोग रिसेप्शन पर विनोद खन्ना के परिवार से मिलकर लौट जाते हैं। दूसरी ओर, चर्चा तेज है कि खन्ना परिवार ने डाक्टरों से उनको अमेरिका शिफ्ट करने के लिए परमीशन देने की मांग की है। अभी तक डाक्टरों ने इस बारे में कोई फैसला नहीं लिया है। सूत्रों का कहना है कि डाक्टरों ने परिवार को जल्दबाजी न करने की सलाह दी है और उनको डिस्चार्ज करने का फैसला भी टाल दिया है।

फ्लिपकॉर्ट में 9100 करोड़ का निवेश, ईबे इंडिया को खरीदा

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भारतीय ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकॉर्ट में 9100 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। फ्लिपकॉर्ट में माइक्रोसॉफ्ट, ईबे और टेन्सेंट निवेश कर रही है। इसके अलावा अब फ्लिपकॉर्ट ने ईबे इंडिया का अधिग्रहण कर लिया है।

फ्लिपकार्ट में फिलहाल टाइगर ग्लोबल मैनेजमेंट, नैप्सटर, एस्सेल पार्टनर और डीएसटी ग्लोबाल का निवेश है। इस तरह इन कंपनियों के निवेश से अब फ्लिपकार्ट की कुल बाजार परिसंपत्तियां 75 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुकी हैं।

मनरेगा घोटाले में अपर विकास अधिकारी गिरफ्तार

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महात्मा गांधी के नाम पर चलाई जा रही रोजगार योजना घोटाले का बायस बनती जा रही है। छोटे से लेकर बड़े अधिकारी तक इस घोटाले में आकंठ डूबे हुए हैं। पिछले दिनों से कांग्रेस से जुड़ी महिला ग्राम प्रधान लीला शर्मा पर मनरेगा के नाम पर गबन का बड़ा आरोप लगा था।जिसके विरूद्ध मुख्यमंत्री हरीश रावत, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय समेत कांग्रेस के वरिष्ठ कांग्रेसियों ने कैंट थाना पर धरना दिया था और उन पर लगे आरोपों को झूठा बताया था और कहा था कि भाजपा सरकार आने पर कांग्रेस से जुड़े लोगों पर चुन-चुनकर दंडित करने की कार्यवाही चल रही है। अब पुलिस ने आरोपी सहायक विकास अधिकारी डी.एस. राना को गिरफ्तार कर इस मामले में खुलासा करने का मन बना लिया है।
ग्राम प्रधान लीला शर्मा सहायक विकास अधिकारी डीएस राणा तथा कई अन्य अधिकारियों की भी इस मामले में अच्छी खासी मिली भगत हो सकती है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता। जानकार सूत्रों का मानना है कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक स्वीटी अग्रवाल ने बताया कि अपराध संख्या 54/16 5 मई 2016 को लीला शर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ था। खूबी तो यह कि 05 मई 2016 को कांग्रेस सरकार अस्तित्व में थी।
2017 में हुए चुनाव के बाद भाजपा सरकार शासन में आई,लेकिन अपनी ही सरकार में दर्ज हुए मुकदमें पर कांग्रेसियों ने जिस तरह से होहल्ला मचाया था कि वह इस बात का संकेत है कि दाल में काला है। अब इस मामले पर एडीओ की गिरफ्तारी मामले को और संगीन बना रही है। इस प्रकरण की जांच थाना प्रभारी शंकर सिंह विष्ट स्वयं कर रहे हैं ताकि दूध का दूध पानी का पानी हो सके। एडीओ राणा को रविवार को देर रात गिरफ्तार किया गया था।

यूपी व उत्तराखण्ड के लम्बित मामलों का निस्तारण जल्द

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सूबे के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सोमवार को लखनऊ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके आवास पर शिष्टाचार भेंट की। योगी जी ने उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री रावत का गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने राज्य में उनकी सरकार द्वारा प्रारम्भ किए गए कार्यों की जानकारी साझा की। मुख्यमंत्री रावत ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी को उनके द्वारा लिए गए विभिन्न निर्णयों की प्रशंसा की। सीएम रावत ने कहा कि भ्रष्टाचार विकास के मार्ग की सबसे बड़ी बाधा है। इसलिए उत्तराखण्ड में जीरो टाॅलरेंस आॅन करप्शन की नीति अपनाई गई है।
मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि वर्तमान उत्तर प्रदेश सरकार व उत्तराखण्ड सरकार की मंशा सकारात्मक है। केंद्र सरकार का भी सहयोगी रूख है। एक दूसरे के सहयोग से दोनों ही राज्यों में विकास कार्यों में तेजी आएगी। यूपी सीएम योगी ने सीएम रावत को यथासम्भव सहयोग के प्रति आश्वस्त किया।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री व उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री ने दोनों राज्यों के मध्य लम्बित विभिन्न मामलों पर विस्तार से चर्चा की। यह तय किया गया कि लगभग सोलह वर्षों से अधिक समय से लम्बित चले आ रहे मामलों का निस्तारण टाईम बाउन्ड तरीके से किया जाए।
सभी मामलों का एक कम्पलीट नोट तैयार किया जाए, जिसमें दोनों राज्यों का पक्ष दर्ज हो। जल्द ही दोनों राज्यों के मुख्य सचिव स्तर की बैठक कर जिन मामलों में सहमति बन जाती है, उन पर अंतिम निर्णय ले लिया जाए। जहां आवश्यक होगा, वहीं संबंधित विभागीय मंत्रियों के स्तर पर सहमति बनाई जाएगी।
वहां से भी निस्तारित नही होने वाले मामलों पर निर्णय मुख्यमंत्री स्तर से कराया जाए। दोनों ही पक्षों में सहमति बनी कि लम्बित विभिन्न मामलों को अब समयबद्ध तरीके से सुलझा लिया जाए। यदि कुछ ऐसे मामले फिर भी रह जाते हैं जिन पर मतभेद हों तो भारत सरकार के स्तर से निर्णय करा लिया जाए। वहां से होने वाला निर्णय दोनों पक्षों को मान्य होगा।
बैठक में टिहरी बांध परियोजना से उत्पादित ऊर्जा में हिस्सेदारी, सिंचाई विभाग की परिसम्पत्तियों जिनमें आवासीय अनावासीय भवनों, खाली पड़ी भूमि, हरिद्वार कुम्भ क्षेत्र में भूमि शामिल है के हस्तांतरण, जमरानी बांध, विभिन्न जलाशयों, उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग पर बकाया बिजली के बिल, परिवहन विभाग के तहत पेसेंजर टैक्स के भुगतान, किच्छा बस स्टेशन के हस्तांतरण, पेंशन दायित्वों की पूर्ति सहित पर्यटन, वन, शिक्षा, सहकारिता आदि विभागों के मामलों पर भी चर्चा की गई। बैठक में उत्तराखण्ड प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट, उत्तराखण्ड के अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश व उत्तरप्रदेश के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

जापानी तकनीक से होगा उत्तराखंड में भूस्खलन का इलाज

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जापान इंटरनेशनल कोआॅपरेशन एजेन्सी (JICA) द्वारा उत्तराखण्ड के वन क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं के कारण होने वाली क्षति, खासतौर पर वन क्षेत्रों में लैण्ड-स्लाइड्स के उपचार के लिये तकनीकी मदद देने पर सहमति हुई है। इस संबंध में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सोमवार को सचिवालय में बैठक जिसमे “जायका” परियोजना ने जापान से आये विशेषज्ञों शिन्गो किटौरा तथा साओरी मियाजिमा का परिचय कराते हुए तकनीकी सहायता परियोजना के विषय में जानकारी दी। 

जून 2013 में उत्तराखण्ड में आयी भीषण आपदा के बाद JICA परियोजना में वन क्षेत्रों में भूस्खलन के उपचार के लिये कम्पोनेन्ट शामिल किया गया था, जिसमें छोटे भूस्खलन का उपचार विभागीय स्तर पर किया जाना था। बड़े भूस्खलन, जिसमें विशेष तकनीकी इनपुट की आवश्यकता है, के उपचार के लिए विशेषज्ञ तकनीकी सलाहकारों की सेवाऐं ली जानी थी। अन्तरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों एवं तकनीकी सलाहकारों के चयन के लिए प्रयास किये गये परन्तु कुछ खास हासिल नहीं हुआ। इस संबंध में JICA से विचार-विमर्श के बाद एक नयी ‘तकनीकी सहायता परियोजना’ के लिये जापान से अनुरोध किया गया। 

इस नयी परियोजना में जापान

  • अपने विशेषज्ञों को भेजकर वन क्षेत्रों में भूस्खलन के उपचार कार्य का काम और तकनीकी डिजाइन तैयार करेगा
  • इसके साथ-साथ वन विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी देगा।
  • जायका द्वारा 4 चिन्हित भूस्खलन के उपचार के लिए तकनीकी डिजाइन तैयार किये जाएंगे तथा
  • निर्माण एवं उपचार कार्य के लिए ज़रूरी मशीनरी और उपकरण भी उपलब्ध कराये जायेंगे।

बाद में विभिन्न विभागों एवं अन्य हिमालयी राज्यों को भी इन तकनीकों को दिया जायेगा। इस परियोजना का खर्च जापान द्वारा शत प्रतिशत अनुदान के रूप में किया जाएगा। 

तकनीकी सहायता परियोजना के लिए वन विभाग 03 टास्क टीम बनायेगी। जिसके लिए वन संरक्षक स्तर के एक अपर परियोजना निदेशक, प्रभागीय वनाधिकारी स्तर के टास्क मैनेजर के साथ-साथ उप प्रभागीय वनाधिकारी, रेंज अधिकारी तथा उप वन रेंजर तथा वन दरोगा स्तर के अधिकारियों की तैनाती की जानी है। इसके अलावा अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव वन की अध्यक्षता में एक संयुक्त समन्वय समिति का गठन किया जाएगा। प्रमुख वन संरक्षक उत्तराखण्ड, मुख्य परियोजना निदेशक, जायका के विशेषज्ञ, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, भारत सरकार के प्रतिनिधि तथा भारत में जायका मुख्यालय के प्रतिनिधि इस समिति के सदस्य होगें।

वहीं जापान से 02 प्रकार के विशेषज्ञ इस परियोजना में कार्य करेंगे। लम्बी अवधि के विशेषज्ञों द्वारा अपना योगदान दे दिया गया है तथा अल्प अवधि के विशेषज्ञों द्वारा भी आवश्यकतानुसार समय-समय पर अपना योगदान दिया जायेगा, जो विशेष रूप फील्ड सर्वे, भूस्खलन के उपचार के लिये तकनीकी डिजाइन तैयार करने, विभिन्न इंजीनियरिंग कार्यों का प्राक्कलन तैयार करने, इन कार्यों के लिए उपयुक्त फर्मों के चयन तथा फील्ड कार्यों का पर्यवेक्षण आदि का कार्य करेंगे।

खनन रोक पर सुप्रीम कोर्ट का स्टे

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पिछले कुछ दिनों से खनन को लेकर नई सरकार परेशान थी और हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, और सोमवार देर रात सुप्रीम कोर्ट ने इसपर अपना फैसला दे दिया है।सु्प्रीम कोर्ट से त्रिवेंद्र सरकार को आज बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश की खंडपीठ ने आज हाईकोर्ट के उस आदेश पर स्टे लगा दिया है, जिसमें खनन पर चार महीने के लिए रोक लगा दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब उत्तराखंड में सरकारी रूप से खनन किया जा सकेगा। आपको बता दें कि हाईकोर्ट के खनन पर रोक के बाद उत्तराखंड सरकार ने हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। जिसके बाद आज सरकार के हक में ये फैसला आया है। जहां फैसला आने के बाद  मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सुप्रीम कोर्ट का शुक्रिया अदा किया है तो वहीं कुछ लोग इस फैसले के बाद थोड़ा चिंतित हैं।

18 मार्च को  खनन से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य में खनन पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। कोर्ट ने राज्य में खनन और पर्यावरण पर सुझाव देने के लिए एक हाई पावर्ड कमेटी बना दी थी। जिसे चार महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा था।

 

पिछली सरकार ने नहीं किया वादा पूरा, त्रिवेंद्र सरकार से बड़ी उम्मीदें

पर्यटन नगरी ऋषिकेश में लक्ष्मण झूला-राम झूला अपनी विशेष पहचान रखते है , लेकिन ये दोनों पुल पैदल आने जाने का साधन है। काफी लम्बे समय से क्षेत्र में एक अन्य पुल की मांग की जा रही थी, जिसका शिलान्यास पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने अपने कार्यकाल में किया था। जिसका नाम जानकी पुल रखा गया लेकिन बजट के अभाव में इस पुल का काम लटका हुआ है लेकिन त्रिवेंद्र सरकार से लोगों को रक बार फिर उम्मीद जगी है।

ऋषिकेश से स्वर्गाश्रम, नीलकंठ महादेव को जोड़ने के लिए जानकी पुल का निर्माण होना है जिसका शिलान्यास तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने किया था, जिससे नीलकंठ कावड़ यात्रा में जाने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। ऋषिकेश से 35 करोड़ 53लाख की लागत से बनने वाला जानकी पुल पैदल के साथ साथ हल्के वाहनों के लिए भी प्रयोग में आएगा लेकिन अभी तक इस पुल के निर्माण के लिए कार्य बड़ी धीमी गति से चल रहा है और तो और पिछले तीन महीनों से कार्य बंद पड़ा हुआ है जिससे लोगों में नाराजगी है।

जानकी पुल का निर्माण ऋषिकेश के पूर्णानंद घाट से वेद निकेतन घाट के बीच होना है जिस से स्वर्गाश्रम जाने वाले यात्रियों को लगभग तीन किलो मीटर की दुरी और लगभग पैदल जाने का १ घंटे का समय बचेगा। पिछली सरकार द्वारा भी इस पुल के लिए वादे किये गए थे लेकिम कार्य पूरा नहीं हो सका। ऐसे में बीजेपी सरकार के आने से एक बार फिर लोगों में पुल के प्रति उम्मीद जगी है। वहीँ मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी आस्वाशन दिया है कि जल्द से जल्द इस कार्य को किया जायेगा।

पर्यटन के क्षेत्र में अपनी विशेष पहचान बना चुके लक्ष्मण झूला – राम झूला के बाद अब जानकी पुल का बेसब्री से इंतज़ार है जिसके बनने से इन दोनों पुलो पर दुपहिया वाहनो और भीड़भाड़ का दबाव कम होगा, और तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को भी सहूलियत मिलेगी। अब देखने लायक होगा की बेजीपी सरकार इस थमी योजना को कब तक पूरा कर पाते है।