गार्ड को पीटने वाले हिरासत में
किसानों के समर्थन में केन्द्र का फूंका पुतला
अपनी आवाज न सुने जाने से आक्रोशित किसान संसद भवन के सामने निर्वस्त्र होकर, सडक़ पर चावल-सांभर परोसकर और स्वमूत्र सेवन कर विरोध कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि देश का दुर्भाग्य है कि स्वनामधन्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी केवल चंद कारर्पोरेट्स घरानों के हितों और मीडिया मैनेजमेंट में ही कार्य कर रहे हैं। उन्हें न तो संसद भवन के सामने विरोध प्रदर्शन करते किसान दिखते हैं, न रोजाना भूख से मर रहे किसान। और केंद्र सरकार गूंगी बेहरी बनकर बैठी है।
उत्तराखंड ने ग्रीन बोनस के साथ मांगे 7650 करोड़
उत्तराखंड हर साल देश और दुनिया को 40 हजार करोड़ रुपये की पर्यावरणीय सेवाएं देता है। ऐसे में राज्य को इसके बदले कम से कम 10 फीसद, यानी 4000 करोड़ रुपये सालाना ग्रीन बोनस के रूप में मिलना चाहिए। नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इसके अलावा 14वें वित्त आयोग की संस्तुतियों से हुई हानि की क्षतिपूर्ति के रूप में 2000 करोड़ सालाना व लंबित जलविद्युत परियोजनाओं से हो रही हानि की क्षतिपूर्ति के रूप में 1650 करोड़ रुपये सालाना की मांग केंद्र सरकार से की।
राष्ट्रपति भवन में रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री रावत ने पर्वतीय राज्यों के लिए अलग मंत्रालय या नीति आयोग में ही प्रकोष्ठ बनाए जाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति, अंतरराष्ट्रीय सीमा एवं संवेदनशीलता, सामरिक महत्व को देखते हुए राज्य में अवस्थापना सुविधाओं के विकास की जरूरत है। इसके लिए भूमि अधिग्रहण अधिनियम को व्यवहारिक बनाया जाना चाहिए।
डिजिटल उत्तराखंड पर मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि
- राज्य में ई-गवर्नेंस के तहत सभी 13 जनपदों में ई-डिस्ट्रिक्ट सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।
- राज्य में 1,04,06000 लोगों के आधार कार्ड बनाए जा चुके हैं।
- निर्वाचन, सेवायोजन, परिवहन, जल, ऊर्जा आदि विभाग तमाम सेवाएं ऑनलाइन मुहैया करा रहे हैं।
- जीएसटी को पूरी तरह से लागू करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है।
- अभी तक राज्य के 78 फीसद व्यापारियों को वैट से जीएसटी में पंजीकृत किया जा चुका है।
- जल्द जीएसटी विधानसभा में पारित किया जाएगा।
- औद्योनिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन, डेरी विकास आदि की योजनाओं के माध्यम से 2022 तक कृषकों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य है।
- राज्य सरकार का लक्ष्य राज्य का शत प्रतिशत उर्जीकरण, लोगों को 24 घंटे सस्ती दरों पर विद्युत आपूर्ति देने का है। इसके लिए जलविद्युत, सौर ऊर्जा, गैस आधारित ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का इस्तेमाल किया जाएगा।
- राज्य की तमाम परियोजनाएं केंद्र से प्रतिबंधित होने के कारण राज्य को सालाना 1650 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
- इसके अलावा उन्होंने भगीरथी इको सेंसटिव जोन में 20 डिग्र्री से अधिक के स्लोप को स्टीप स्लोप माने जाने के नियम में संशोधन की मांग भी की। उन्होंने कहा कि इससे राज्य के बड़े क्षेत्र में विकास अवरुद्ध हो रहा है।
- सीमांत क्षेत्र के 337 गांवों को विस्थापित करने के लिए वन भूमि के प्रयोग में शिथिलता और इस पर व्यय होने वाली राशि के सहयोग की मांग भी केंद्र से की।
- राज्य के 16793 गांवों में से 3086 गांव अभी मोबाइल कनेक्टिविटी से अछूते हैं। मुख्यमंत्री रावत ने नीति आयोग की बैठक में कहा कि इन गांवों को डिजिटल इंडिया के तहत मजबूत करने के लिए सबसे पहले दूरसंचार से जोड़ना होगा। इसके लिए उन्होंने केंद्र सरकार से सहयोग की मांग की।
नीति आयोग की बैठक में 15 वर्षीय विजन के तहत मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि राज्य में इसके लिए छह ग्रोथ इंजन चिह्नित किए हैं। इनमें बागवानी, जैविक कृषि, पर्यटन, ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी, वानिकी व जड़ी-बूटी-आयुष शामिल हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान उच्च आर्थिक विकास दर को बनाए रखने, अंतरक्षेत्रीय विषमताओं को दूर करने, दीर्घकालिक आजीविका व्यवस्था को मजबूत करने पर सरकार का फोकस है।
शहर में दिखेगा एटीएम जैसा डस्टबिन
स्वस्छ भारत के नारे के साथ उत्तराखंड सरकार भी मजबूती से काम कर रही है। इसी कड़ी में आगे बढ़ते हुए देहरादून नगर निगम ने कुछ नए फैसले लिए हैं। उत्तराखंड के देहरादून नगर क्षेत्र में कूड़े के रख रखाव के लिए नगर निगम करीब 32 जगहों पर 80 अंडरग्राउंड डस्टबिन लगाने जा रहा है। ये अंडरग्राउंड डस्टबिन तीन प्रकार के होंगे। इनमें डेढ़ टन, ढाई टन और साढ़े तीन टन कूड़ा आ सकता है।
डस्टबिन की बनावट नार्मल कूडे़दान से हटकर होगी। इस तरीके का डस्टबिन शायद देहरादून में पहली बार लगाया जाएगा।
आइए बताते है कि किस तरह का होगा यह डस्टबिनः
डस्टबिन की आउटर लेयर कंक्रीट की होगीः
इन डस्टबिन में सबसे खास बात यह होगी कि इसकी आउटर लेयर कंक्रीट की होगी और जमीन से ऊपर यह एटीएम की तरह दिखेगी। लोग जब कूड़ा डालने आएंगे तो ऊपर लगी प्लेट को हटाएंगे और उसमें कूड़ा डालेंगे। वहीं इस बाबत देहरादून नगर निगम की आयुक्त रवनीत चीमा ने बताया कि शहर में कूड़ा निस्तारण की सबसे बड़ी समस्या है। इस डस्टबिन से शहरवासियों को कूड़े से कुछ हद तक निजात मिलेगी।
निगम की दो स्पेशल क्रेन से उठाया जाएगा डस्टबिनः
कूड़ा जमीन के अंदर बने डस्टबिन में गिर जाएगा. इन अंडरग्राउंड डस्टबिन को उठाने के लिए निगम ने दो स्पेशल क्रेन भी मंगवाई हैं, जिनकी मदद से डस्टबिन को उठाकर गाड़ी में डाला जाएगा। इस प्रक्रिया में कूड़ा सड़कों पर यहां-वहां नहीं फैलेगा। जानकारी के मुताबिक 30 अप्रैल तक सभी इलाकों में डस्टबिन लगाने का समय निर्धारित किया गया है। इसलिए इस दिशा में काम भी तेजी से किया जा रहा है।
सैनिकों की कदम ताल से बनेगी बिजली
आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिकों को खास सफलता हाथ लगी है जिससे भारतीय सेना के जवानों के कदम ताल से उत्पन्न होने वाली एनर्जी को विशेष तरह के जूतों के माध्यम से एकत्रित करके बिजली तैयार की जाएगी। इतना ही नहीं दिल्ली में मेट्रो ट्रेन एवं फ्लाईओवर पर वाहनों से उत्पन्न होने वाले कंपन से भी बिजली तैयार करने में पहली सफलता मिली है। इससे हर रोज लाखों जवानों की होने वाली परेड में कई मेगावाट बिजली बन सकती है।
पीएचडी स्कॉलर्स अभिषेक ने इस तकनीक का किया प्रयोग:
उल्लेखनीय है कि आईआईटी दिल्ली के सिविल व इलेक्ट्रिकल विभाग के वैज्ञानिक और प्रोफेसर सुरेश भल्ला की अध्यक्षता में पीएचडी स्कॉलर्स अभिषेक ने इस तकनीक को प्रयोग किया है। वहीं अभिषेक के मुताबिक, इसमें पिजोइलेक्ट्रिक एनर्जी हारवेस्टिंग का प्रयोग किया गया है, जिसे शू एनर्जी हारवेस्टिंग का नाम दिया गया है। इसके लिए एनर्जी हारवेस्टर सेंसर बनाया गया है, जो जूते के अंदर फिट होगा। इसी के साथ शू कैपेशिटर भी लगा होगा। जैसे ही पैर का पंजा और एंडी चलने के दौरान जमीन को छूएंगे, सेंसर उसे एनर्जी में तब्दील करते हुए कैपेशिटर में एकत्रित कर बिजली बनाएगा।
सीमा पर जवान कर सकेंगे इस बिजली का उपयोग:
एक कैपेसिटर में करीब पांच वोल्ट तक बिजली स्टोर हो सकती है। जूते के बाहर की ओर मोबाइल की तर्ज पर प्लग होगा और वहां से बिजली को दूसरी ओर कंनवर्ट कर दिया जाएगा। वैज्ञानिकों का दावा है कि बीस हजार कदम चलने पर इस जूते में पांच वोल्ट की बिजली तैयार होगी और खर्चा महज दो सौ रुपये बैठेगा। इसी टीम ने फ्लाईओवर पर वाहनों के कंपन से इसी तर्ज पर बिजली तैयार करने की भी तकनीक ईजाद की है। इस पर फाइनल शोध जारी है। हालांकि पहली सफलता मिल गई है। इसी शोध को मेट्रो ट्रेन के कंपन में ट्रायल करना है। मेट्रो ट्रेन ऐलिवेटिड कॉरिडोर या फ्लाईओवर में पिजोइलेक्ट्रिक एनर्जी हारवेस्टिंग फरोम ट्र्रैफिक इंनडयूस्ड ब्रिज वाइवरेशन का नाम दिया है। इन जूतों को सेना के जवानों को उपलब्ध कराया जाएगा जिससे जवान सीमा की सुरक्षा के वक्त अपने खास कार्यों को कर सकें।
शराब आंदोलन के बहाने माओवादियों की दस्तक
थ्री यू सेक यानी उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश व उत्तरी बिहार में ‘रेड कॉरिडोर’ की साजिश के सूत्रधार माओवादी थिंक टैंक प्रशांत सांगलेकर उर्फ प्रशांत राही व पहली पांत के कमांडार हेम मिश्रा को उम्र कैद के बाद ठंडे पड़े माओवादी फिर छटपटाने लगे हैं। सूत्रों की मानें तो भूमिगत दूसरी व तीसरी पंक्ति के नेताओं के इशारे पर प्रदेश भर में शराबबंदी के ज्वलंत मुद्दे को कैश कर आंदोलनकारियों के बीच पैठ बनाने की रणनीति बना ली गई है। शुरुआत शराब के प्रबल विरोध वाले द्वाराहाट ब्लॉक में भड़काऊ पोस्टरों से कर दी गई है। इसमें राष्ट्रविरोध तो नहीं है मगर मदिरालयों में आगजनी व हिंसा की अपील कर कानून व्यवस्था बिगाड़ने की साजिश जरूर रची गई है। अलबत्ता पुलिस प्रशासन हरकत में आ गया है।
दो प्रमुख कमांडरों को उम्र कैद की सजा के बाद शांत बैठे माओवादी करीब डेढ़ माह बाद अपनी फितरत के अनुसार फिर सिर उठाने लगे हैं। खास बात कि अबकी राज्य भर में शराब के खिलाफ चल रहे आंदोलन को हवा देने के बहाने माओवादी जनता के बीच पैठ बनाने की तैयारी कर चुके हैं। उत्तराखंड जोनल कमेटी की ओर से पहले चरण में शराब के खिलाफ लामबंद द्वाराहाट ब्लॉक को चुना गया है।
विकासखंड के बिंता, कामा, बगवलीपोखर आदि क्षेत्रों में माओवादियों ने दीवारों में शराब विरोध के बहाने लोगों के बीच खुद को स्थापित करने का कुचक्र रचा है। पर्चो व पोस्टरों में हालांकि राष्ट्रविरोध तो नहीं है, मगर प्रतिबंधित भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के हवाले से महिलाओं के शराब विरोध को समर्थन, शराब की दुकानों में आग लगाने व कारोबार से जुड़े लोगों को जान से मार देने की धमकी देकर कानून हाथ में लेने के लिए आंदोलनकारियों को उकसाने की कोशिश की गई है। कामा की प्रधान पार्वती देवी व सामाजिक कार्यकर्ता कुंदन नेगी ने बताया कि सार्वजनिक भवनों व एएनएम सेंटर की दीवारों पर पोस्टर चस्पा कर लाल रंग से भड़काऊ अपील भी लिखी गई है।
डीएस कुंवर एसएसपी ने बताया कि माओवादियों ने साजिशन शराब विरोधी आंदोलन के बहाने खुद को मजबूत करने की कोशिश की है। पोस्टरों व दीवारों पर लिखे गए नारों में देशद्रोह की बातें नहीं हैं लेकिन शराब के खिलाफ लोगों को उकसाने की अपील को गंभीरता से लिया जा रहा है। कानून व्यवस्था किसी भी सूरत में बिगड़ने नहीं दी जाएगी।
पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने किया ई-आफिस का उद्घाटन
देश के पर्यटन मानचित्र पर उत्तराखंड को उकेरने की कवायद जारी है। डिजिटल उत्तराखंड, डिजिटल पर्यटन डिपार्टमेंट की दिशा में बढ़ते हुए सोमवार को राज्य के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने पर्यटन विभाग के ई आफिस का उद्घाटन किया।
एनआईसी के सहयोग से तैयार हुई पर्यटन महकमें की वेबसाइट के जरिए पर्यटन विभाग की फाइलें अब आनलाइन देखी जा सकेंगी।
इस मौके पर सतपाल महाराज ने ई आफिस की वेबसाइट पर पंडित दीन दयाल की तस्वीर लगाने और गरीब कल्याण योजना की जानकारी देने के निर्देश महकमे के अधिकारियों को दिए।
उत्तराखंड में खुलेगा निफ्ट?
एसएसपी सदानंद दाते ने ट्रांजिट कैंप में मारा छापा
उधम सिंह नगर के एसएसपी सदानंद दाते ने ट्रांजिट कैम्प में छापा मारा।एसएसपी ने यह छापा प्राइवेट वर्दी में मारा, जिसके बाद पता चला कि भारी मात्रा में अवैध शराब की बिक्री हो रही थी।इसके साथ ही कई जगहो पर चल रहा था सट्टे का कारोबार। एसएसपी ने कई लोगो को किया गिरफ्तार साथ ही ट्रांजिट कैम्प थाने के एसओ सुशील कुमार को निलंबित कर दिया और कहा आगे भी जारी रहेगी कार्यवाही।
भारत नेपाल सीमा पर अलर्ट
भारत नेपाल सीमा पर साधु संतों के वेश में आतंकवादियों की घुसपैठ की आशंका को देखते हुए एसएसबी व पुलिस ने सघन चेकिंग अभियान चलाया। उन्होंने आने जाने वालो की पहचान भी पूछी।
प्रशिद्ध पूर्णागिरी मंदिर के आस पास सतर्कता बड़ा दी है। डॉग स्क्वाड, बम निरोधक दस्ते ने भी चेकिंग अभियान चलाया। बनबसा, शारदा बेराज में भी पेट्रोलिंग की गई। पुलिस अधीक्षक रामचंद्र राजगुरु ने बताया की सीमा पर अलर्ट किया गया है। सभी अधिकारीयों को दिशा निर्देशित किया गया है। किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी नजर नही आई है।




























































