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चम्पावत में छापेमारी में मिले 115 कर्मचारी अधिकारी नदारद

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डीएम के निर्देश पर एडीएम और एसडीएम ने चम्पावत में सरकारी विभागों में व्यापक छापेमारी अभियान चलाया। अभियान में 115 अधिकारी-कर्मचारी विभागों से नदारद मिले। जलागम में तो एक भी कर्मचारी नहीं था। जबकि होम्योपैथिक में एक कर्मी सोया हुआ मिला। दोनों अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट डीएम को सौंप दी है।

उपजिलाधिकारी सदर, सीमा विश्वकर्मा दस बजे तहसील परिसर स्थित अपने कार्यालय में पहुंचने के बाद छापेमारी अभियान के लिये निकली। सबसे पहले सवा दस बजे तहसील स्थित  आबकारी कार्यालय में छापा मारा तो वहां जिला आबकारी अधिकारी, निरीक्षक, तीन कांस्टेबल सहित एक अन्य कर्मी अनुपस्थित मिला। दो कर्मी कार्य में लगे हुए थे। सीएमओ कार्यालय में 28 में से 17 कर्मी अनुपस्थित मिले। सीएमओ, एसीएमओ भी नदारद थे। सेवायोजन में तीन में से एक, जिला चिकित्सालय दो, होम्योपैथिक में तीन कर्मी अनुपस्थित मिले। यहां एक कर्मी सोया हुआ मिला। जल संस्थान में एक, लोनिवि में 19 में से पांच अनुपस्थित मिले।

वन क्षेत्राधिकारी कार्यालय में उपस्थिति पंजिका बनी नहीं थी। एसडीएम ने फटकार लगाते हुए पंजिका बनाने के निर्देश दिए। होमगार्ड कार्यालय में लिपिक रवींद्र प्रसाद बिना अवकाश स्वीकृत कराए जिला मुख्यालय से बाहर हैं। यहां चार में से दो अनुपस्थित पाए गए। यूपीसीएल कार्यालय में 16 में से तीन और नगर पालिका में 15 से में 8 अनुपस्थित मिले। चौंकाने वाला वाकया तब सामने आया जब जलागम कार्यालय में एक भी कर्मी नहीं मिला। एसडीएम ने बताया कि जलागम डीपीडी व एक कर्मी अवकाश में हैं। जबकि अन्य सभी नदारद मिले।

एडीएम हेमंत वर्मा को जिला विकास कार्यलय में आठ, कृषि विभाग में कृषि अधिकारी, पंचायती राज में दो, डीआरडीए में पांच, उद्यान में आठ, अल्पबचत में एक, डीएसटीओ में पांच, सीवीओ में 11, सहकारिता में सात और डीपीआरओ कार्यालय में पांच कर्मचारी अनुपस्थित मिले। एडीएम व एसडीएम सदर ने अपने निरीक्षण की रिपोर्ट बनाकर डीएम को सौंप दी है। डीएम डॉ.अहमद इकबाल का कहना है कि प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त बनाने के लिए छापेमारी अभियान चलाया गया और भविष्य में भी इसी तरह के अभियान चलाए जाएंगे। नदारद रहने वाले कर्मियों पर जांच के बाद कार्यवाही होगी।

चारधाम यात्रा को 1 दिन शेष,तैयारियां जोरों पर

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चारधाम यात्रा प्रदेश के साथ ही देश और विदेश से आने वाले यात्रियों के लिए बेहद अहम होती है। इस वर्ष की चारधाम यात्रा शुरू होने में महज एक दिन का समय शेष है। तमाम विभाग यात्रा की सफलता के लिए दिन-रात जुटे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के आने की सूचना ने तैयारियों की स्पीड और बढ़ा दी है। हालांकि, चारधाम यात्रा नई सरकार के लिए एक चुनौती है, पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज का दावा है कि इस बार यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

राज्य में प्रचंड बहुमत से जीतने वाली नई सरकार के सत्ता संभालने के बाद कुछ अच्छे बदलाव की उम्मीद भी की जा रही है।सभी अधिकारी भी इसके अनुसार ही तैयारियों में जुटे है। यमुनोत्री व गंगोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ इस साल की चारधाम यात्रा 28 अप्रैल से शुरू होगी। इसके बाद तीन मई को केदारनाथ और छह मई को बदरीनाथ के कपाट खुलेंगे। केदारनाथ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन मई को, बदरीनाथ में राष्ट्रपति छह मई को दर्शन करेंगे। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के दौरे के कारण चारधाम यात्रा को लेकर पूरी फौज दिन-रात तैयारियों में जुटा हुआ है। कोशिश है कि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या कमी इस दौरान देखने को न मिले।

बीते अनुभवों पर गौर करें तो चारों धामों और चारधाम यात्रा मार्ग पर अव्यवस्थाएं यात्रा के दौरान आफत बनती रही हैं। खासतौर पर मानसून के दौरान भूस्खलन और मार्ग अवरुद्ध होने की समस्या यात्रियों और प्रशासन के लिए किसी चुनौती से कम नहीं। हालांकि, सरकार का दावा है कि यात्रा मार्ग पर इसके लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज का कहना है कि इस बार केदारनाथ धाम में दो हजार अतिरिक्त यात्रियों के लिए व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही यात्रियों की भीड़ के कारण परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासन की कोशिश होगी कि एक ही दिन में यात्रियों को दर्शन करा वापस भेजा जाए। इनके अलावा यात्रा मार्ग पर पेयजल, खानपान, ट्रैफिक जाम और बिजली जैसी परेशानियों से बचने के लिए ठोस रणनीति बनाई गई है। सरकार ने भी बीते अनुभवों के आधार पर ही यात्रा तैयारियों का खाका तैयार किया है।

पर्यटन मंत्री ने कहा कि यात्रियों के रजिसट्रेशन के लिए हरिद्वार और ऋषिकेश में कुल 15 काउंटर लगाए गए हैं। इनके साथ ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था भी की गई है। यात्रा मार्ग पर भारी वाहनों के प्रवेश को प्रतिबंधित किया गया है। बिजली, संचार, पेयजल और सुरक्षा के लिए भी सरकार ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। यात्रियों की मदद के लिए टूरिस्ट पुलिस गाइड की भूमिका में मौजूद रहेगी।

उत्तराखंड में ऐसी फसल जो बचाए मलेरिया से

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उत्तराखंड राज्य के उधमसिंह नगर में बहुत से किसान जो पहले कैश क्राप उगाते थे उन्होंने अपनी खेतों में मेडिसिनल प्लांट यानि की औषधिय फसलें उगानी शुरु कर दी है।जी हां, यहां के किसानों ने मलेरिया की दवाई में इस्तेमाल होने वाला आर्टेमिसिया की फसल को उगाने का काम शुरु कर दिया है।इस उत्पाद से जहां एक तरफ इनकी आमदनी बढ़ी हैं वहीं यह अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि है कि कहीं पर किसानों द्वारा औषधिय फसल को उगाया जा रहा है।

यह फसल मध्य प्रदेश के एन्ट्रोप्रेन्योर्स को सप्लाई की जाती है जिससे यह कंपनी एंटी-मलेरियल दवाईयों बनाते हैं और उसे दुनिया के हर कोने में एक्सपोर्ट करते हैं।उधमसिंह नगर के दोहारा अंजनिया गांव के किसान विनोद सिंह कहते हैं कि मैं 1 एकड़ ज़मीन में आर्टेमिसिया का उत्पादन करता हूं और सिर्फ 3 महीने में लगभग 12 क्विंटल उपज मिलती है। एक क्विंटल से मुझे 3,400/- रुपये मिलते है जो मेरे पहले की फसल और सब्जियों से बहुत ज्यादा है, और बचे महीनों में मैं कैश क्राप का उत्पादन करता हूं।

वहीं एक और किसान जग्याराम कहते हैं कि किसानों को यह फसल बेचेने में कोई दिक्कत भी नहीं होती।जग्याराम बताते हैं कि सभी किसानों को फसल लगाने से पहले कंपनी से रेट की गारंटी और फसल के खराब होने का मुआवजा पहले से तय हो जाता है।यह फसल लेने वाले रत्लाम के एन्ट्रोप्रन्योर अपनी फसल खुद ही खेतों से ट्रांसपोर्ट करवा लेते हैं, तो यह चिंता भी किसानों की नहीं होती।इसके साथ ही आर्टेमिसिया की फसल को ज्यादा पानी और केयर की जरुरत नहीं होती और यह फसल जानवर भी नहीं खाते। एंटी-मलेरियल ड्रग्स के बहुत बड़े एक्सपोर्टर धर्म चंद जैन कहते हैं कि इस समय भारत 70 प्रतिशत एंटी-मलेरियल दवाईयां पैदा करने वाला देश है जो दुनियाभर में यह दवाएं सप्लाई करता है।2014 तक 99 प्रतिशत दवाएं भारत को चाईना सप्लाई करता था लेकिन गुजरात,उत्तर प्रदेश,मध्य प्रदेश और उत्तराखंड के प्रयासों से यह प्रतिशत लगभग घट चुका है।

उत्तराखंड के किसानों और दि नेशनल मेडिसिनल प्लांट बोर्ड के प्रयासों से यह औषधिय पेड़ों का उत्पादन देश के साथ-साथ किसानों के लिए भी फायदेमंद है।

लच्छीवाला ठंडा-ठंडा, कूल-कूल

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अब जब देहरादून का तापमान 35 डिग्री से ऊपर जा चुका है तब देहरादूनवासियों ने एक बार फिर भूले हुए पिकनिक स्पाट लच्छीवाला को याद किया है, जिससे गर्मी को मात दिया जा सके।लच्छीवाला, देहरादून से लगभग 10 किमी की दूरी पर एक ऐसी जगह है जहां गर्मी से राहत और ठंडे पानी मे डूबकी लगाने का मौका मिलता है वो

यह जगह बढ़ते तापमान से राहत के लिए सबसे अच्छा विकल्प है।लच्छीवाला वाटर कैनाल में अलग-अलग जगहों से लोग यहां गर्मी से राहत के कुछ पल बिताने आते हैं। ऐसे ही गर्मी से राहत के लिए डोईवाला से पहुंचे पंकज बताते हैं कि जब गर्मी ज्यादा बढ़ती हैं तो सबसे पहले लच्छीवाला की याद आती है क्योंकि यहां राहत हैं, ऊपर से यहा इंन्जाय करने के लिए पानी भी है जो गर्मी को कम करने में सबसे मददगार है। वहीं बिजनौर से आए आतीफ कहते हैं कि यहां आकर बहुत अच्छा लगता है,यहां का वातावरण बहुत अच्छा है और यहां आकर हम गर्मी को मानो भूल ही जाते हैं।

प्राकृतिक सुंदरता से हरी भरी यह जगह, गर्मियों के समय में लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय है।लच्छीवाला लोगों के बीच एक टूरिस्ट डेस्टिनेशन की तरह मशहूर है।लच्छीवाला में हर किसी के लिए कुछ ना कुछ है, बच्चों के लिए ट्यूब राईड,रेस्टोरंट और बहुत कुछ।यहां आने वालों में उम्र की कोई सीमा नहीं है, हर उम्र के लोग यहां आते है और इंन्जाय करते हैं।

तो अगर आप भी सूरज की तपिश से कुछ समय के लिए राहत चाहते हैं तो लच्छीवाला का ठंडा-ठंडा,कूल-कूल पानी गर्मी से राहत का रामबाण है।

यहां देखें लच्छीवाला में एन्जाय करते लोगः

पीएम मोदी ने विडियो कांफ्रेंसिंग से की समीक्षा

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प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से प्रगति(प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इंप्लीमेंटेशन) की समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव एस.रामास्वामी ने हरिद्वार-देहरादून मार्ग के फोर लेनिंग, अमृत, इंद्रधनुष और स्वच्छता कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी। हरिद्वार-देहरादून मार्ग के चार लेन बनाये जाने के बारे में मुख्य सचिव ने बताया कि 16 दिसम्बर, 2016 को एचटी लाइन की शिफ्टिंग का कार्य हो गया था। नवम्बर, 2016 को आरबीएम(रीवर बेड मैटेरियल) आदि की अनुमति दे दी गई थी। 31 मार्च 2018 तक फोर लेनिंग का कार्य पूर्ण हो जायेगा।
अमृत(अटल मिशन फाॅर रिजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफार्मेशन) की प्रगति के बारे में मुख्य सचिव ने प्रधानमंत्री को बताया कि मिशन की कार्ययोजना बना ली गई है। इस तरह से उत्तराखंड 68 प्रतिशत कार्य पूर्ण कर देश में नौवें स्थान पर है। गौरतलब है कि स्वच्छ पेयजल मिशन के लिए 2017-2022 तक की कार्ययोजना बनाई गयी है। मिशन शहरों की क्रेडिट रेटिंग के लिए निविदा जारी कर दी गई है। सभी मिशन शहरों में पम्प रिप्लेसमेंट के लिए ऊर्जा आॅडिट का कार्य मई के अंत तक हो जायेगा। स्ट्रीट लाइट के ईएसएल(एनर्जी सेविंग लाइट) के लिए एग्रीमेंट हो गया है। मुख्य सचिव ने मिशन इंद्रधनुष के बारे में बताया कि 8000 परिवारों के 12740 बच्चों का मिशन के अंतर्गत टीकाकरण किया गया है। यह टीकाकरण नियमित होने वाले टीकाकरण अभियान से अलग है।
वीडिया कांफ्रेंसिंग के दौरान अपर मुख्य सचिव श्री ओम प्रकाश, सचिव लोनिवि श्री अरविंद सिंह ह्यांकी, अपर सचिव स्वास्थ्य श्री नितिन भदौरिया सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

उत्तराखंड को मिली आईटी की सौगात

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सूचना एवं प्रसारण मंत्री भारत सरकार, श्री रवि शंकर प्रसाद ने बुधवार को मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से भेंट की। मुख्यमंत्री श्री रावत एवं केन्द्रीय मंत्री श्री प्रसाद के बीच राज्य में सूचना प्राॅद्योगिकी के विस्तार के संबंध में चर्चा की गयी।केंद्रीय मंत्री श्री रवि शंकर प्रसाद ने बताया कि ई-हेल्थ योजना के अंतर्गत राज्य के 6 बड़े अस्पतालों को ई-अस्पताल के रूप में विकसित किया जाएगा। आगामी 5-6 माह में इसे लागू कर दिया जाएगा। इससे राज्य के किसी भी क्षेत्र से आम व्यक्ति इन अस्पतालों में रजिस्ट्रेशन करा सकेगा। केवल मोबाईल से ही इन अस्पतालों में चेकअप के लिए समय लिया जा सकेगा। एनआईसी इसमें अपना वैज्ञानिक व तकनीकी सहयोग देगा। देश के 70 अस्पतालों में इसे लागू कर दिया गया गया है।
राज्य की 30 पंचायतों को ई-विलेज योजना के अंतर्गत स्मार्ट विलेज बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि देश भर के 1000 गांव इस योजना में सम्मिलित किये गए हैं। उन्होंने सी.जे.एम., भारत संचार निगम लिमिटेट को निर्देश दिये कि राज्य के सभी अस्पतालों सहित नेटवर्क से वंचित क्षेत्रों को शीघ्र ही इंटरनेट सुविधा उपलब्ध करायी जाए। देश भर के छोटे कस्बों व शहरों में बीपीओ खोले जा रहे हैं। उत्तराखण्ड को 400 सीट बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (बी.पी.ओ.) की दी गयी हैं। इसका पहला सेंटर देहरादून में खोला जाएगा। इसमें प्रति सीट केंद्र सरकार 1 लाख रूपए सब्सिडी देगी। इनमें भी महिलाओं, स्थानीय प्रतिभाओं व दिव्यांगों को प्राथमिकता दी जाएगी। देहरादून में बीपीओ से सहायक उद्योग भी विकसित होंगे और युवाओं को रोजगार मिलेगा।
राज्य में साईबर सुरक्षा का फोरेंसिक सेंटर भी स्थापित किया जाएगा। सीडैक के वैज्ञानिकों द्वारा फाॅरेंसिक टूल सेवा के प्रशिक्षण तहत 800 पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।  वर्ष 2019 में सेंटर उŸाराखण्ड सरकार को सौंप दिया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री श्री प्रसाद ने कहा कि देहरादून के आई.टी. पार्क को सशक्त बनाने के साथ-साथ पंतनगर में एक साॅफ्टवेयर टेक्निोलाॅजी पार्क विकसित किया जाएगा। जिसके लिये भूमि राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध करायी जाएगी। वर्तमान में देहरादून के आईटी पार्क से केवल 80 करोड़ रूपए का निर्यात होता है। इसे बढ़ाए जाने की जरूरत है। इसके साथ ही प्रदेश में नेशनल इंस्टीट्यूट आॅफ इलेक्ट्राॅनिक्स एंड इनफाॅरमेशन टेक्नोलाॅजी ¼NIELIT½  सेंटर खोले जाएंगे। नेशनल इंस्टीट्यूट आॅफ इलेक्ट्राॅनिक्स एंड इनफाॅरमेशन टेक्नोलाॅजी का एक सेंटर हरिद्वार में खोला जाएगा इसके साथ ही अल्मोड़ा में एक सब सेंटर भी खोला जाएगा। उत्तराखंड में एनआईसी का क्लाउड सिस्टम भी विकसित किया जाएगा। इसमें लाखों-करोड़ों दस्तावेज सुरक्षित रहेंगे। यह सिस्टम डाटा सेंटर के तौर पर काम करेगा। सी-डैक द्वारा एक ऐसा साफ्टवेयर भी विकसित किया जा रहा है जिससे सभी सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध दवाओं का डाटाबेस रहेगा। एक जगह से ही माॅनिटरिंग की जा सकेगी। सभी बड़े अस्पताल इससे जोड़े जाएंगे।
मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने केंद्रीय मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश को बड़ी सौगात दी गई है। विभिन्न सेंटरों के लिए राज्य सरकार जल्द से जल्द भूमि उपलब्ध करवा देगी। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हाल ही में भुवनेंश्वर दौरे के समय केंद्रीय मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद से भेंट कर राज्य में आईटी के क्षेत्र में असीम सम्भावनाओं को देखते हुए सहयोग किए जाने का अनुरोध किया था।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री श्री रावत ने बताया कि राज्य के 90 प्रतिशत भाग में नेटवर्क कनेक्टिविटी हो गयी है परन्तु पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्र अभी भी कनेक्टिविटी से वंचित हैं। पर्यावरण एवं ईको सेंसिटिव जोन घोषित होने से राज्य की बहुत सी परियोजनाएं अधूरी हैं। मुख्यमंत्री श्री रावत ने यह भी बताया कि आधार कार्ड के क्षेत्र में उत्तराखण्ड राज्य काफी तेजी से कार्य कर रहा है। दिव्यांगों के आधार कार्ड बनवाने में आँखों की पुतली की स्कैनिंग समस्याएं आ रही हैं। उन्होंने इसके लिये कोई अन्य विकल्प रखे जाने की बात कही।

नेशनल हाइवे को स्टेट हाइवे करने के फ़ैसले को कोर्ट में चुनौती

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उत्तराखण्ड सरकार द्वारा राजकीय राजमार्ग (स्टेट हाईवे) को जिला मार्ग (डिस्ट्रिक्ट रोड) में परिवर्तित करने वाले 8 अप्रैल 2017 के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। बागेश्वर निवासी समाजसेवी और पी.यू.सी.एल.के उपाध्यक्ष नंदा बल्लभ भट्ट ने जनहित याचिका डालकर राज्य सरकार को दी है चुनौती।

याची ने न्यायालय से प्रार्थना की है कि पूर्व के सभी राजमार्गों और अब जिला मार्गों से शराब की दुकान व् बारों को हटाने के निर्देश दें । साथ ही याची ने न्यायालय से ये भी मांग की है कि वो मध्य निषेध विभाग को सक्रीय करते हुए नशे से होने वाली दुश्वारियों के बारे में बताकर इससे पीड़ित लोगों का पुनर्वास करें । मामले में कल यानी 27 अप्रैल को उच्च न्यायालय में होगी सुनवाई ।

लाखों की डकैती के साथ डकैतों ने उतारा एक मौत के घाट

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काशीपुर से सटे ग्राम पसियापुरा स्थित, विकास नगर कॉलोनी में देर रात यानी आज सुबह तड़के हथियारबंद बदमाशों ने एक घर में घुसते हुए डकैती को दिया अंजाम। डकैतों ने लगभग 13 से 14 लाख रुपए की नगदी पर हाथ किया साफ, यही नहीं हथियारबंद बदमाशों ने मकान स्वामी पृथ्वी सिंह (45 वर्ष) द्वारा जब वारदात का विरोध किया गया तो बदमाशो ने मकान स्वामी को मार कर उतारा मौत के घाट।

इस दुस्साहसिक घटना को अंजाम देते हुए डकैतों ने ना केवल जमकर तांडव मचाया बल्कि पृथ्वी सिंह की युवा पुत्री को अपहरण कर ले गए। इस सनसनीखेज वारदात से जहां क्षेत्र में दहशत का माहौल है,  वही क्षेत्रीय पुलिस सहित जनपद उधमसिंह नगर की पुलिस में मचा हड़कंप। SSP उधमसिंहनगर सहित आला अधिकारियों ने घटनास्थल पर पहुंच कर किया मौका मुआइना।

गर्मी के चरम पर होते ही याद आई बिजली की मरम्मत

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यूं तो राजधानी के नाम पर देहरादून शहर में नई-नई योजनाएं शुरु हो रही हैं लेकिन जो समस्या पहले से है उसकी तरफ किसी का ध्यान भी नहीं जा रहा। गर्मी से राहत पाने के लिए लोग सड़कों पर कम निकलकर अपने अपने घरों में घुस रहें और सड़कें और बाज़ार उन लोगों से भरा है जिनका बाहर निकलना जरुरी है।

जी हां, गर्मी का आलम ही कुछ ऐसा है, तापमान 37 डिग्री पार कर चुका है, लोग गर्मी से पस्त है और इसी गर्मी में ऊर्जा निगम ने बिजली की लाईनों और उपकरणों की मरम्मत का काम शुरु कर दिया है।शहर के लगभग हर क्षेत्र में दिनभर में कई घंटे बिजली की कटौती हो रही है। अब सवाल यह उठता है कि जो लोग गर्मी से परेशान होकर घरों में थे वो कहां जाएं और यह मरम्मत इस वक्त ही क्यों जब तापमान अपने चरम पर है? आखिर ऊर्जा निगम को इस बात की खबर तो रही होगी की बिजली के उपकरणों की मरम्मत होनी है तो इस वक्त का इंतजार क्यों हो रहा था?

शहर के लगभग हर क्षेत्र में बिजली सुधार के नाम पर ऊर्जा निगम ने अलग-अलग स्थानों पर लाईनों को सही करना, ट्रांसफार्मर की मरम्मत, सेक्शेनाइजर और सर्किट ब्रेकर लगाने आदि का कार्य शुरु कर दिया है।अब मरम्मत तो बिजली की हो रही है पर चोट शहर के निवासियों को लग रही और यह चोट है गर्मी की चोट। घंटों लोगों को बिजली कटौती से जूझना पड़ रहा है।बीते कुछ दिनों से शहर के बड़े हिस्से में 7-8 घंटे तक की बिजली गुल रहने लगी है।

इस बिजली की मार से परेशान हैं नेशविला रोड स्थित चुक्खुवाला मोहल्ला भी है जहां कभी-कभी बिजली की कटौती लोगों को उठाने वाले अलार्म का काम कर रही है। सुबह आंख खुलने से पहले बिजली गुल, फिर वापस आने का कोई पता नहीं।चुक्खुवाला कालोनी की अर्पिता जो डीएवी पीजी कालेज में बीएसई की छात्रा है वह बताती हैं, आज कल मेरे फाईनल एग्जाम चल रहें है लेकिन बिजली की कटौती ने नाक में दम कर दिया हैं।सुबह से लेकर रात तक दिन भर किश्तों में बिजली कटती है जिसकी वजह से पढ़ाई में बहुत नुकसान होता हैं, साथ ही गर्मी से बहुत उलझन होती है। अर्पिता जैसी बहुत सी लड़कियां इस कालोनी में रहती है जिनके एग्जाम चल रहे लेकिन बिजली की कटौती से हर कोई परेशान है।

ऊर्जा निगम के निदेशक एवं प्रवक्ता पी.सी. धयानी ने बताया कि आगे आने वाले बरसात और आंधी तूफान में पेड़ की टहनियों के तारों पर गिरने की आशंका के चलते टहनियों की छटाई का काम भी चल रहा है।इसके अलावा कुछ और जरुरी काम भी चल रहे हैं।पेड़ की काट-छांट का काम बरसात से पहले की तैयारी है लेकिन गर्मी से पहले की तैयारी के नाम पर ऊर्जा निगम ने कुछ नहीं किया और अब शहर के लगभग 90 प्रतिशत इलाकों में घंटों बिजली कटौती कर मरम्मत का काम चल रहा है।

आने वाले दिनों में बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं जहां बिजली की कटौती होगी, और इन इलाकों का शेड्यूल कुछ इस तरह हैः

  • 27 अप्रैलः दून विहार, जाखन, भागीरथीपुरम, मालसी गांव, अंसल ग्रीन,सिनोला,मसूरी डायवर्जन, आदि जगहों पर 11 बजे से चार घंटे बिजली कट सकती है।
  • 28 अप्रैलः नालापानी रोड,सीमेंट रोड,खटीक मोहल्ला,अंबेडकर कालोनी,वर्कशाप स्ट्रीट,ओल्ड डालनवाला,डीएवी कालेज रोड,करनपुर मार्केट,राजपुर रोड,नेशविला रोड,अजंता एन्क्लेव,ओल्ड सर्वे रोड मे 11 बजे से शाम तीन बजे तक बिजली की कटौती।

शहर में दिन-रात तो पहाड़ पर केवल 6 घंटे खुलेगा ठेका

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प्रदेश में जहां एक ओर महिलाएं  शराब की दुकानों का जबरदस्त विरोध कर रही हैं वहीं दूसरी ओर सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शराब माफियाओं पर लगाम लगाने के लिए एक और फैसला लिया है। सीएम ने कहा कि शराब की दुकानों को छह घंटे तक खोलने का आदेश मैदानी जनपदों पर लागू नहीं होगा। मतलब अब शहरों में 12 घंटे तो पहाड़ों में केवल 6 घंटे खुलेंगे ठेके।

यह फैसला रोकेगा शराब की तस्करी ः

गौरतलब है कि प्रदेश में शराब की दुकानों का महिलाएं पुरजोर विरोध कर रही है। एक तरफ महिलाओं का तेवर देखकर शासन-प्रशासन में खलबली मची हुई है। वहीं सीएम ने शराब माफियाओं पर लगाम लगाने के लिए यह फैसला लिया है।उत्तराखंड सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया है ताकि शराबबंदी से पड़ोसी राज्यों से शराब की तस्करी न बढ़ने पाए। छह घंटे तक शराब की दुकानें खोलने का आदेश सिर्फ पर्वतीय जनपदों के ठेकों पर लागू होगा। यहां ठेके दिन के वक्त छह घंटे के खुलेंगे।

आपको बता दैं कि सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रदेश में आंशिक शराबबंदी लागू करने के लिए कुछ दिन पहले शराब की दुकानों को छह घंटे तक खोले जाने की घोषणा की थी। सीएम ने कहा था कि उत्तराखंड में शराब की दुकाने दोपहर बाद 3 बजे से रात 9 बजे तक खुलेंगी। विभागीय मंत्री और अधिकारियों से विचार-विमर्श के बाद इस योजना में बदलाव कर दिया गया है।सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बताया कि यह आदेश अब सिर्फ प्रदेश के पर्वतीय जनपदों में स्थित शराब के ठेकों पर लागू होगा। पर्वतीय जनपदों में ठेके दिन के वक्त छह घंटे के लिए खुलेंगे। शाम होते ही ठेकों को बंद कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि जनभावनाओं और सड़क दुर्घटना को कम करने के लिहाज से यह फैसला लिया गया है। उत्तराखंड सरकार की मंशा धीरे-धीरे शराबबंदी लागू करने की है। गौरतलब है कि उत्तराखंड में जगह-जगह महिलाएं लामबंद होकर शराब की दुकानों का विरोध कर रही हैं। महिलाओं में शराब की दुकानों को लेकर आक्रोश इस कदर बढ़ चुका है कि महिलाओं ने बीते दिनों शराब की दुकान को आग के हवाले कर दिया वहीं। शराब की दुकानों पर जमकर पथराव हुआ। प्रदेश के कई हिस्सों में महिलाएं शराब की दुकान की रात को भी निगहबानी कर रही है। महिलाओं ने  प्रशासन से दो टूक कहा कि वह अपने क्षेत्रों में शराब का संचालन नहीं होने देंगी।