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बद्रीनाथ धाम के खुले कपाट,राष्ट्रपति ने की पूजा अर्चना

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विधि विधान व वैदिक मंत्रोचारण के बीच भगवान बदरीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। राष्ट्रपति डॉ. प्रणब मुखर्जी ने बदरीनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की । ब्रह्ममुहूर्त में 4.15 बजे श्रद्धालुओं के लिए बदीरनाथ मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही चार धाम यात्रा पूरी तरह से शुरू हो चुकी है। अब आगामी छह माह तक भगवान बदरी विशाल की पूजा यहीं होगी।

बदरीनाथ धाम में आधी रात के बाद ही मंदिर में प्रवेश करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगनी शुरू हो गई थी। कपाट खुलते ही भगवान बदरी विशाल के जयकारों से बदरीनाथ धाम गूंज उठा। इस दौरान सेना के बैंड की धुन के साथ ही श्रद्धालु भगवान के जयकारे लगाते रहे। इस मौके पर करीब दस हजार श्रद्धालुओं की भीड़ थी। वहीं, राजभवन में विश्राम करने के बाद सुबह करीब सवा सात बजे राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचे। यहां से वह सुबह करीब सवा सात बजे सेेना के विशेष विमान से बदरीनाथ के लिए रवाना हुए थे। सुबह करीब 8.25 पर उनके हेलीकॉप्टर ने बदरीनाथ धाम में बनाए गए सेना के हेलीपैड पर लैंड किया। उनके साथ प्रदेश के राज्यपाल डॉ. केके पॉल, उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र रावत भी थे।

unnamed (5)बदरीनाथ में राष्ट्रपति की सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए थे। सुबह करीब सवा सात से मंदिर परिसर को जीरो जोन कर दिया गया और मंदिर परिसर से श्रद्धालुओं को हटा दिया गया। साथ ही आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन रोक दिए गए थे। राष्ट्रपति के लौटने के बाद ही श्रद्धालु फिर से दर्शन कर रहे हैं।
शुक्रवार को राष्ट्रपति आइजीएनएफए के दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिए देहरादून पहुंचे थे। यहां उन्होंने राजभवन में रात बिताई। आज सुबह राष्ट्रपति बदरीनाथ के लिए रवाना हुए। बदरीनाथ में पूजा-अर्चना के बाद वह सीधे जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचें और वहां से दिल्ली रवाना हुए।

यहां देखे राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी पहुंचे बद्रीनाथः

देवभूमि को बारी फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट फिल्म का खिताब

सर्बियन डायरेक्टर गोरान पैसकलविच द्वारा निर्मित फिल्म देवभूमि जिसमें विक्टर बैनर्जी ने मुख्य किरदार निभाया है, इस फिल्म ने ईटली के बारी फिल्म फेस्टिवल में इंटरनेशनल पैनोरामा कंपटिशन में बेस्ट फिल्म का खिताब जीता है।

इस फिल्म मे हिन्दी, गढ़वाली व अंग्रेजी भाषा का प्रयोग किया गया हैं। पूरी फिल्म गढ़वाल के गुप्तकाशी क्षेत्र में शूट की गई है।फेस्टिवल में अवार्ड मिलने के बाद डायरेक्टर के काम को सराहा गया साथ ही एक बेहतरीन सिनेमा का प्रदर्शन करने के लिए भी बहुत वाह-वाही लुटाई गई। यह फेस्टिवल 23-29 अप्रैल के बीच ईटली में हुआ। ईटली में हुए इस फेस्टिवल में ज्यूरी ने दुनियाभर से आई लगभग 30 फिल्मों को चुना गया।

देवभूमि हिमालय के गांवों की पृष्ठभूमि पर आधारित एक ऐसी फिल्म है जिसमें पहाड़ के सामाजिक विषयों को दिखाया गया है जैसे कि जेंडर असमानताएं,जातिवाद आदि। इस फिल्म में गीतांजलि थापा, उत्तर बोआकार और वी.के शर्मा ने काम किया है।

प्रोफेसर ङी.आर पुरोहित जो इस फिल्म के प्री-प्रोडक्शन से लेकर पूरी शूटिंग तक रिसर्चर और स्क्रीप्ट कन्सल्टेंट के तौर पर जुङे रहें बतातें है, ‘फिल्म लगभग 50 दिनों तक गुप्तकाशी के पास देवल,त्यूनी, जागधार, सुराईटोटा गाँव मे शूट हुई, यह खिताब उत्तराखंड फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक पाजिटिव साईन है। इस अवार्ड से बहुत से डायरेक्टरस जैसे कि तिगमांशु धुलिया, विशाल भारद्वाज, संजयलीला भंसाली इन सभी को उत्तराखंड की वादियों को एक नये नजिरये से दिखाने का मौका मिलेगा, यहा बहुत से सामाजिक मुद्दे और थीम है जिन पर फिल्में बन सकती है।’

गुरुद्वारे के दानपात्र से चोरी सीसीटीवी में कैद हुई हरकत

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रुद्रपुर के बगवाड़ा गांव के गुरुद्वारे में घुसकर देर रात दो युवकों ने गुल्लक पर हाथ साफ कर दिया। चोरी की इस घटना से इलाके में दहशत है। मौके पर पहुंची पुलिस ने सीसीटीवी की फुटेज देखी तो उसमें दो युवक कैद मिले। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर बदमाशों की तलाश कर रही है। शुक्रवार की सुबह सिख समाज के लोग गुरुद्वारे में मत्था टेकने पहुंचे तो वहां का नजारा देखकर हैरान रह गए। गुरुद्वारे की गुल्लक (दानपात्र) गायब थी। यह खबर तेजी से फैली तो सिख समाज के तमाम लोग गुरुद्वारा पहुंच गए।

आप देख सकते है सीसीटीवी कैमरे की फुटेज जिसमें दो युवक चेहरे पर नकाब पहनकर गुरुद्वारा में घुसते दे रहे हैं। जिनमें से एक युवक के हाथ में सरिया है। इसके बाद का नजारा सीसीटीवी से गायब हो गया। संभवत: चोरी से पहले ही नकाबपोश युवकों ने कैमरे के साथ छेड़छाड़ की और उससे बचने के प्रयास किए। इस बीच सूचना पाकर बगवाड़ा पुलिस चौकी के सिपाही भी मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने भी सीसीटीवी की फुटेज देखी। रुद्रपुर सीओ हिमांशु शाह का कहना है सीसीटीवी फुटेज के अनुसार चोरी की घटना रात एक से डेढ बजे के बीच हुई है। पुलिस ने सीसीटीवी की फुटेज लेकर दोनों युवकों की पहचान कर गिरफ्तारी के प्रयास शुरू कर दिए हैं।

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने राजभवन में किया रात्रि भोज

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राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के दो दिन के उत्तराखंड दौरे पर आने के बाद उनके स्वागत में रात के भोजन का आयोजन किया गया।  राष्ट्रपति के राजभवन में आगमन के अवसर पर रात्रि भोज का आयोजन किया गया, जिसमें राज्यपाल डा कृष्ण कान्त पाल सहित मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, विधायक चमोली, पुष्कर सिंह धामी, मुख्य सचिव एस रामास्वामी व बाबा रामदेव उपस्थित रहे।

इस अवसर पर राज्यपाल डा.कृष्ण कान्त पाल के साथ सीएम त्रिवेंद्र,बाबा रामदेव व विधायक चमोली ने राष्ट्रपति को बद्रीनाथ रेप्लिका यानि मिनी बद्रीनाथ भेंट किया।

मुख्यमंत्री का सचिवालय पर छापा,कर्मियों में हड़कंंप

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सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सचिवालय का औचक निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री लगभग 9ः35 पर अचानक सचिवालय पहुंचे और विभिन्न विभागों में जाकर अधिकारियों व कर्मचारियों की उपस्थिति की जांच की। निरीक्षण के दौरान गृह अनुभाग 1,2,5,6 व 7, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अनुभाग 3,4 व 5, उच्च शिक्षा अनुभाग 3, ऊर्जा अनुभाग 1, कार्मिक अनुभाग 1 व 2 के अनुभाग अधिकारी अनुपस्थित पाए गए। अनुभाग अधिकारियेां के साथ-साथ कुछ अनुभागों के समीक्षा अधिकारी, सहायक समीक्षा अधिकारी व कम्प्यूटर आपरेटर भी अनुपस्थित पाए गए। कुछ अनुभागों में सफाई भी ठीक नहीं थी। जबकि कुछ अनुभागों में पत्रावलियों का रख-रखाव ठीक प्रकार से नहीं था।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों की अनुपस्थिति पर नाराजगी जाहिर करते हुए मुख्य सचिव को निर्देशित किया कि सचिवालय का प्रथम निरीक्षण था, इसलिए सभी अनुपस्थित अनुभाग अधिकारियों को सचेत किया जाए और भविष्य में इस प्रकार की गलती न दोहराई जाए। सचिवालय में प्रत्येक प्रमुख सचिव/सचिव समय-समय पर सचिवालय में  संबंधित अनुभागों का निरीक्षण करना सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को फाईलों के रख-रखाव व सफाई व्यवस्था में सुधार करवाए जाने के भी निर्देश दिए।

35 से अधिक सीटर बस नहीं आयेंगी नैनीताल

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हाई कोर्ट ने नैनीताल में यातायात व पार्किग से संबंधित रिपोर्ट सोमवार तक कोर्ट में पेश करने के आदेश पारित किए हैं। साथ ही नैनीताल आने वाली 35 सीट से अधिक वाली बसों को काठगोदाम व कालाढूंगी में रोकने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट के आदेश के बाद नैनीताल में 35 से अधिक सीटों वाली बसों के संचालन पर रोक लग गई है।

गुरुवार को न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धुलिया व न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की खंडपीठ के समक्ष मंडलायुक्त डी सैंथिल पांडियन, डीएम दीपेंद्र चौधरी, एसएसपी जन्मेजय खंडूड़ी, झील विकास प्राधिकरण सचिव श्रीष कुमार, पालिका ईओ रोहिताश शर्मा व रोडवेज के अधिकारी कोर्ट में पेश हुए और उन्होंने यातायात व पार्किग व्यवस्था को लेकर उठाए गए कदमों की जानकारी दी। मंडलायुक्त ने कहा कि शहर में छोटी-छोटी पार्किग बनाने की कवायद आरंभ की जा चुकी है। नैनीताल निवासी अजय रावत ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि सूखाताल में अतिक्रमण से नैनीताल शहर व झील के अस्तित्व पर खतरा पैदा हो गया है।

प्राथमिक विद्यालय सिरोलीकला में मिड-डे मील में गड़बड़ी

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प्राथमिक विद्यालय सिरोलीकला, किच्छ में मिड-डे मील में गड़बड़ी पाए जाने के बाद जिलाधिकारी के आदेश पर प्रधानाध्यापक खलीक अहमद का तबादला प्रशासनिक आधार पर राजकीय प्राथमिक विद्यालय हसनपुर सितारगंज कर दिया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक डीसी सती ने इस आशय का आदेश जारी कर दिया है। वहीं, प्रधानाध्यापक जार्ज दिए बिना ही चिकित्सा अवकाश पर चले गए हैं।

ग्राम सिरोलीकला के ग्रामीणों ने विद्यालय के प्रधानाध्यापक पर मिड-डे मील में हेराफेरी के साथ ही विद्यालय में तमाम वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगा कुमाऊं आयुक्त से शिकायत की थी। इस पर उप शिक्षा अधिकारी डा. गुंजन अमरोही ने मामले की जांच की तो शिकायत सही पाई गई। इसके बाद अपर निदेशक डा. नीता तिवारी ने जांच की तो आरोपों की पुष्टि हो गई।

जांच रिपोर्ट के आधार पर 29 अप्रैल को जिलाधिकारी के आदेश पर प्रधानाध्यापक के तबादले के आदेश दे दिए। आदेश के मिलते ही प्रधानाध्यापक विद्यालय का चार्ज किसी वरिष्ठ शिक्षक को देने के बजाय लंबे चिकित्सकीय अवकाश पर चले गए हैं। इससे विद्यालय की व्यवस्था संभालने के साथ ही विद्यार्थियों के मिड-डे मील की व्यवस्था को लेकर समस्या उत्पन्न हो गई है।

प्रधानाध्यापक द्वारा किसी अन्य शिक्षक को न देने का खामियाजा गुरुवार को यहां अध्यनरत 810 बच्चों को खाली पेट रह भुगतना पड़ा, विद्यालय के शिक्षकों के पास मिड-डे मील की सामग्री खरीदने को बजट न होने पर यहां मिड -डे मील नहीं पक सका है। शिक्षकों ने विद्यालय के हालत की रिपोर्ट विभाग के जिम्मेवार अधिकारियों को एक दिन पहले ही भेज दी थी, बावजूद अधिकारियों के कानों में जूं तक नहीं रेंगी। तबादले के बाद प्रधानाध्यापक जाते समय मिड-डे मील के लिए कुछ रुपये विद्यालय की वरिष्ठ शिक्षिका नाजिस हसन को थमा गए, जो बुधवार को ही खत्म हो गए। गुरुवार को विद्यालय के स्टॉक में मिड-डे मील के नाम पर दाल व चावल ही थे। मसाले व सब्जी आदि खरीदने के शिक्षकों के पास रुपये नहीं थे। इसके चलते गुरुवार को मिड-डे मील नहीं पकाया गया।

विद्यालय की शिक्षिका नाजिस हसन ने बताया कि खलीक अहमद ने उन्हें मिड-डे मील के लिए जो बजट दिया था वह बुधवार को ही समाप्त हो चुका था, गुरुवार को मिड़ -डे मील नहीं पक सकेगा इसकी सूचना उप शिक्षा अधिकारी गुंजन अमरोही व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डी सी सती को लिखित रूप से बुधवार को ही दे दी गयी थी। उनका साफ कहना है कि जब तक बजट नहीं मिलता विद्यालय में तब तक सिर्फ चावल पका कर विद्यार्थियों को खिला पाना उचित नहीं है।

डीसी सती, जिला शिक्षा अधिकारी, बेसिक, ने बताया कि विद्यालय के शिक्षकों ने बजट न होने की सूचना दी थी, पर गुरुवार को मिड-डे मील नहीं पका इसकी अभी तक कोई लिखित सूचना उन्हें नहीं मिली है। मिड-डे मील का बजट न होने पर जिम्मेदार शिक्षक बिल के आधार पर सामग्री बाजार से क्रय कर व्यवस्था कर सकते थे। मिड-डे मील क्यों नहीं पका इसकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

सैनिटरी नैपकिन के विषय में रेखा आर्य ने अरुण जेटली को लिखा पत्र

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सैनिटरी नैपकिन पर किसी तरह का कर नहीं लगना चाहिए और राज्य में इसको बढ़ावा दिया जाना चाहिए, लिहाजा उत्तराखंड की महिला कल्याण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से सैनिटरी नैपकिन को टैक्स के दायरे से बाहर रखने की मांग की है।

इसके लिए राज्य की महिला कल्याण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने वित्त मंत्री को एक खत लिखा है। जिसमें रेखा आर्य ने केंद्रीय वित्त मंत्री के सामने राज्य की कठिन परिस्थितयों का हवाला दिया है।

रेखा ने अपने खत में केंद्रीय वित्त मंत्री से कहा है कि राज्य में ज्यादातर महिलाएं धनाभाव में जीती हैं और उन्हें सैनिटरी नैपकिन के लिये पैसे असानी से प्राप्त नहीं होते, इस के ऊपर सैनिटरी नैपकिन पर टैक्स इन्हें अाम महिलाअों की पहुँच से दूर कर देता है जिस की वजह से उनके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसलिये सैनिटरी नैपकिनस को टैक्स के दायरें से बाहर रखना चाहिये, जिससे पहाड़ की महिलांए इसका ज्यादा इस्तेमाल आसानी से कर सकेंगी।

सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया के दोषियों को दी ”सजा-ए-मौत”

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NEW DELHI, INDIA - DECEMBER 16: Indian students take part in a candle-light vigil at Jantar Mantar mark the first anniversary of Delhi gang rape on December 16, 2013 in New Delhi, India. A 23-year-old woman was gang-raped on a moving bus in Delhi December 16, 2012, beaten and then pushed out onto the street along with her male companion. She died two weeks later amid an outpouring of anger across India. Four men were sentenced to death while a teenager was sentenced to juvenile custody. (Photo by Mohd Zakir/Hindustan Times via Getty Images)

सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया केस में चारों दोषियों को ”सजा-ए-मौत” का फैसला सुनाया। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के बैंच में आसीन तीन जज जस्टिस दीपक मिश्रा, जज जस्टिस आर.भानुमती और जस्टिस अशोक भूषण ने सुनाया। इस पूरी सजा में दो फैसले हैं एक जस्टिस दीपक मिश्रा और दूसरा जस्टिस आर.भानुमती द्वारा। कोर्ट में मौजूद लोगों ने इस फैसले का स्वागत तालियां बजाकर किया और निर्भया की मां की आंखों में आंसू अा गये। आज जिन 4 दोषियों की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया वो हैं मुकेश, विनय, पवन और अक्षय हैं, इस मामले में कुल 6 आरोपी थे। एक आरोपी राम सिंह की मुकदमे के दौरान मौत हो गई जबकि एक आरोपी नाबालिग था। इसलिए, उसे बाल सुधार गृह भेजा गया। वो 3 साल सुधार गृह में बिताकर रिहा हो चुका है।

कोर्ट के मुताबिक जिस तरह से यह पूरा केस हुआ उसको सुनकर ऐसा लगा जैसे यह इस दुनिया की बात नहीं किसी और जगह की बात हों। बहुत ही दरिंदगी से इस पूरी घटना को अंजाम दिया गया था, वहीं सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक इन सारे दोषियों को निर्भया की जान लेने की भूख थी जो अंततः हो ही गया।

दिल्ली पुलिस हमेशा से इस पूरे केस में दोषियों के लिए सजा-ए-मौत ही चाहती थी जबकि इन दोषियों के वकील राजू रामचंद्रन और संजय हेंगड़े चाहते थे कि दोषियों की सजा को कम कर उम्र कैद कर दिया जाए। निर्भया के माता-पिता भी कोर्ट से इनके लिए सजा-ए-मौत ही मुक्कर्र कराना चाहते थे।

देश की राजधानी दिल्ली में निर्भया गैंगरेप की घटना ने सब को हिला कर रख दिया था। इस घटना के बाद लोग दिल्ली के सड़कों पर उतर आए थे। निर्भया के दोषियों को सजा की मांग को लेकर लोग कई दिनों तक लामबंद रहे। 16 दिसंबर 2012 दिल्ली गैंगरेप मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने आज फैसला दोपहर 2 बजे दिया। देश को झकझोर कर रख देने वाले इस मामले के चारों दोषियों को ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट दोनों ने फांसी की सज़ा ही दी थी।

पूरा मामला 

16 दिसंबर 2012 को 23 साल की फिजियोथेरेपी छात्रा अपने एक दोस्त के साथ फिल्म ‘लाइफ ऑफ़ पाई’ देखने गई। रात साढ़े 9 बजे मुनिरका में वो एक चार्टर बस में सवार हुई। बस में सवार ड्राइवर समेत 6 लोग दरअसल मौज-मस्ती के इरादे से निकले थे। उनके पास उस रुट में बस चलाने का परमिट नहीं था। वो थोड़ी देर पहले भी बस में बढ़ई का काम करने वाले एक शख्स को बिठाकर लूट चुके थे। नाबालिग आरोपी ने निर्भया और उसके दोस्त को देखकर बस में बैठने के लिए आवाज़ लगाई। दोनों बस में सवार हो गए। उस वक़्त बस राम सिंह चला रहा था। उसने बस को बताए गए रास्ते से अलग दिशा में डाल दिया। निर्भया के दोस्त ने जब सवाल किया तो बाकी पाँचों उनसे पूछने लगे कि दोनों साथ में क्यों घूम रहे हैं। सवाल पर एतराज़ करने पर उन्होंने दोस्त की जम कर पिटाई की और उसे बस में एक किनारे डाल दिया। इसके बाद वो लड़की को बस के पिछले हिस्से में ले गए। जहाँ सब ने बारी-बारी से उसके साथ बलात्कार किया।

रात 11 बजे उन्होंने निर्भया और उसके दोस्त को बस से धक्का दे दिया। राम सिंह ने निर्भया को कुचलने की भी कोशिश की लेकिन उसके दोस्त ने उसे किनारे कर के बचा लिया। उन्हें सड़क किनारे पड़ा देख कर कुछ लोगों ने पुलिस को फोन किया। निर्भया को बेहद गंभीर हालत में एम्स में भर्ती किया गया। उसे बेहतर इलाज के लिए केंद्र सरकार के खर्चे पर सिंगापुर ले जाया गया। वहां 29 दिसंबर को उसकी मौत हो गयी। दिल्ली पुलिस ने तेज़ी से कार्रवाई करते हुए 17 दिसंबर को बस को जब्त कर लिया। बस की पहचान में सड़क पर लगे सीसीटीवी कैमरे से काफी मदद मिली। बस में खून से सना रॉड और कई और फोरेंसिक सबूत मिले। निर्भया से लूटे गए फोन की लोकेशन से अपराधियों का पता लगाने में मदद मिली। राम सिंह और मुकेश को राजस्थान से पकड़ा गया। विनय और पवन दिल्ली में गिरफ्तार हुए। नाबालिग आरोपी आंनद विहार बस अड्डे पर पकड़ा गया। अक्षय की गिरफ्तारी बिहार के औरंगाबाद से हुई।

मोबाइल एप से रोका जायेगा अवैध खनन

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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अवैध खनन पर पूरी तरह से रोक लगाने और नये तकनीक का इस्तेमाल कर खनन के संचालन करने के निर्देश दिये हैं।गौरतलब है कि राज्य में खनिजों के आवाजाही के लिये इस्तेमाल होने वाले मैनुअल रवन्ना की जगह पर शासन ने ई-रवन्ना की व्यवस्था पूरे राज्य मे लागू कर दी है। सचिव, खनन श्री शैलेश बगोली ने बताया कि
  • पर्वतीय क्षेत्रों में खनन क्षेत्रों के आस-पास इन्टरनेट सुविधा उपलब्ध ना होने की समस्या का भी विशेष ध्यान रखते हुए यह व्यवस्था दी गयी हैं कि खनन व्यवसायी जहाॅ कही भी इन्टरनेट उपलब्ध वहाॅ से ही ई-रवन्ना जारी कर सकते हैं तथा ई-रवन्ना जारी होते ही एक एस.एम.एस. उस वाहन चालक के मोबाईल पर पहुॅच जाता हैं, जिसे खनिज सामग्री ले जाने की अनुमति खनन व्यवसायी देना चाह रहा हों। मैसेज में ई-रवन्ना की समस्त जानकारी उपलब्ध होती हैं। एस.एम.एस प्राप्त होते ही वाहन चालक अपने गन्तव्य के ओर प्रस्थान कर सकता हैं तथा मार्ग में जाॅच दलों को ई-रवन्ना के रूप में एस.एम.एस दिखा सकता हैं।
  • लगातार ई-रवन्ना व्यवस्था की माॅनिटरिंग हो रही है और साॅफ्टवेयर को अधिक से अधिक व्यवहारिक बनाने पर जोर है।
  • ई-रवन्ना व्यवस्था के चलते खनन व्यापारियों की सुविधा के लिए एक कन्ट्रोल रूम भी देहरादून में खोला हुआ हैं।हेल्पलाईन नम्बर 8192802345 एवं 8192802320 हैं तथा ई-मेल आई0डी0 [email protected]  हैं।
  • ई-रवन्ना को लेकर समय -समय पर स्कैन ई-रवन्ने, डुप्लीकेट रवन्ने की शिकायते भी शासन को प्राप्त होती रहती हैं, जिसके समाधान के लिये ‘मायनिंग गार्ड’ के नाम से एक एन्ड्रोइड मोबाईल एप्लीकेशन तैयार कर ली गयी हैं, जिसे गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता हैं।
  • मोबाईल एप्लीकेशन में वाहन सॅख्या अंकित करने पर यदि उस वाहन के पास उस समय विशेष के लिये कोई ई-रवन्ना जारी हो रखा होगा तो उस ई-रवन्ने की पूरी जानकारी मिल सकेगी।
साल 2016-17 में खनन से 335 करोड़ का राजस्व सरकारी खजाने में गया। इस साल के लिए शासन ने 550 करोड के आॅकडें को पार करने का लक्ष्य रखा है। खनन राज्य की सभी सरकारों के लिये दोधारी तलवार बनी रहती है। सरकार को खनन से राजस्व तो मिलता है लेकिन न सिर्फ अऴैध  खनन से पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचता है बल्कि ये एक उबलता राजनीतिक और चुनावी मुद्दा भी बन गया है। ऐसे मे ंये देखना दिलचस्प होगा कि त्रिवेंद्र सरकार किस तरह खनन, पर्यावरण और राजनीति में तालमेल बिठा पाती है।