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मुख्यमंत्री का सचिवालय पर छापा,कर्मियों में हड़कंंप

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सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सचिवालय का औचक निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री लगभग 9ः35 पर अचानक सचिवालय पहुंचे और विभिन्न विभागों में जाकर अधिकारियों व कर्मचारियों की उपस्थिति की जांच की। निरीक्षण के दौरान गृह अनुभाग 1,2,5,6 व 7, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अनुभाग 3,4 व 5, उच्च शिक्षा अनुभाग 3, ऊर्जा अनुभाग 1, कार्मिक अनुभाग 1 व 2 के अनुभाग अधिकारी अनुपस्थित पाए गए। अनुभाग अधिकारियेां के साथ-साथ कुछ अनुभागों के समीक्षा अधिकारी, सहायक समीक्षा अधिकारी व कम्प्यूटर आपरेटर भी अनुपस्थित पाए गए। कुछ अनुभागों में सफाई भी ठीक नहीं थी। जबकि कुछ अनुभागों में पत्रावलियों का रख-रखाव ठीक प्रकार से नहीं था।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों की अनुपस्थिति पर नाराजगी जाहिर करते हुए मुख्य सचिव को निर्देशित किया कि सचिवालय का प्रथम निरीक्षण था, इसलिए सभी अनुपस्थित अनुभाग अधिकारियों को सचेत किया जाए और भविष्य में इस प्रकार की गलती न दोहराई जाए। सचिवालय में प्रत्येक प्रमुख सचिव/सचिव समय-समय पर सचिवालय में  संबंधित अनुभागों का निरीक्षण करना सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को फाईलों के रख-रखाव व सफाई व्यवस्था में सुधार करवाए जाने के भी निर्देश दिए।

35 से अधिक सीटर बस नहीं आयेंगी नैनीताल

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हाई कोर्ट ने नैनीताल में यातायात व पार्किग से संबंधित रिपोर्ट सोमवार तक कोर्ट में पेश करने के आदेश पारित किए हैं। साथ ही नैनीताल आने वाली 35 सीट से अधिक वाली बसों को काठगोदाम व कालाढूंगी में रोकने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट के आदेश के बाद नैनीताल में 35 से अधिक सीटों वाली बसों के संचालन पर रोक लग गई है।

गुरुवार को न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धुलिया व न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की खंडपीठ के समक्ष मंडलायुक्त डी सैंथिल पांडियन, डीएम दीपेंद्र चौधरी, एसएसपी जन्मेजय खंडूड़ी, झील विकास प्राधिकरण सचिव श्रीष कुमार, पालिका ईओ रोहिताश शर्मा व रोडवेज के अधिकारी कोर्ट में पेश हुए और उन्होंने यातायात व पार्किग व्यवस्था को लेकर उठाए गए कदमों की जानकारी दी। मंडलायुक्त ने कहा कि शहर में छोटी-छोटी पार्किग बनाने की कवायद आरंभ की जा चुकी है। नैनीताल निवासी अजय रावत ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि सूखाताल में अतिक्रमण से नैनीताल शहर व झील के अस्तित्व पर खतरा पैदा हो गया है।

प्राथमिक विद्यालय सिरोलीकला में मिड-डे मील में गड़बड़ी

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प्राथमिक विद्यालय सिरोलीकला, किच्छ में मिड-डे मील में गड़बड़ी पाए जाने के बाद जिलाधिकारी के आदेश पर प्रधानाध्यापक खलीक अहमद का तबादला प्रशासनिक आधार पर राजकीय प्राथमिक विद्यालय हसनपुर सितारगंज कर दिया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक डीसी सती ने इस आशय का आदेश जारी कर दिया है। वहीं, प्रधानाध्यापक जार्ज दिए बिना ही चिकित्सा अवकाश पर चले गए हैं।

ग्राम सिरोलीकला के ग्रामीणों ने विद्यालय के प्रधानाध्यापक पर मिड-डे मील में हेराफेरी के साथ ही विद्यालय में तमाम वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगा कुमाऊं आयुक्त से शिकायत की थी। इस पर उप शिक्षा अधिकारी डा. गुंजन अमरोही ने मामले की जांच की तो शिकायत सही पाई गई। इसके बाद अपर निदेशक डा. नीता तिवारी ने जांच की तो आरोपों की पुष्टि हो गई।

जांच रिपोर्ट के आधार पर 29 अप्रैल को जिलाधिकारी के आदेश पर प्रधानाध्यापक के तबादले के आदेश दे दिए। आदेश के मिलते ही प्रधानाध्यापक विद्यालय का चार्ज किसी वरिष्ठ शिक्षक को देने के बजाय लंबे चिकित्सकीय अवकाश पर चले गए हैं। इससे विद्यालय की व्यवस्था संभालने के साथ ही विद्यार्थियों के मिड-डे मील की व्यवस्था को लेकर समस्या उत्पन्न हो गई है।

प्रधानाध्यापक द्वारा किसी अन्य शिक्षक को न देने का खामियाजा गुरुवार को यहां अध्यनरत 810 बच्चों को खाली पेट रह भुगतना पड़ा, विद्यालय के शिक्षकों के पास मिड-डे मील की सामग्री खरीदने को बजट न होने पर यहां मिड -डे मील नहीं पक सका है। शिक्षकों ने विद्यालय के हालत की रिपोर्ट विभाग के जिम्मेवार अधिकारियों को एक दिन पहले ही भेज दी थी, बावजूद अधिकारियों के कानों में जूं तक नहीं रेंगी। तबादले के बाद प्रधानाध्यापक जाते समय मिड-डे मील के लिए कुछ रुपये विद्यालय की वरिष्ठ शिक्षिका नाजिस हसन को थमा गए, जो बुधवार को ही खत्म हो गए। गुरुवार को विद्यालय के स्टॉक में मिड-डे मील के नाम पर दाल व चावल ही थे। मसाले व सब्जी आदि खरीदने के शिक्षकों के पास रुपये नहीं थे। इसके चलते गुरुवार को मिड-डे मील नहीं पकाया गया।

विद्यालय की शिक्षिका नाजिस हसन ने बताया कि खलीक अहमद ने उन्हें मिड-डे मील के लिए जो बजट दिया था वह बुधवार को ही समाप्त हो चुका था, गुरुवार को मिड़ -डे मील नहीं पक सकेगा इसकी सूचना उप शिक्षा अधिकारी गुंजन अमरोही व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डी सी सती को लिखित रूप से बुधवार को ही दे दी गयी थी। उनका साफ कहना है कि जब तक बजट नहीं मिलता विद्यालय में तब तक सिर्फ चावल पका कर विद्यार्थियों को खिला पाना उचित नहीं है।

डीसी सती, जिला शिक्षा अधिकारी, बेसिक, ने बताया कि विद्यालय के शिक्षकों ने बजट न होने की सूचना दी थी, पर गुरुवार को मिड-डे मील नहीं पका इसकी अभी तक कोई लिखित सूचना उन्हें नहीं मिली है। मिड-डे मील का बजट न होने पर जिम्मेदार शिक्षक बिल के आधार पर सामग्री बाजार से क्रय कर व्यवस्था कर सकते थे। मिड-डे मील क्यों नहीं पका इसकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

सैनिटरी नैपकिन के विषय में रेखा आर्य ने अरुण जेटली को लिखा पत्र

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सैनिटरी नैपकिन पर किसी तरह का कर नहीं लगना चाहिए और राज्य में इसको बढ़ावा दिया जाना चाहिए, लिहाजा उत्तराखंड की महिला कल्याण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से सैनिटरी नैपकिन को टैक्स के दायरे से बाहर रखने की मांग की है।

इसके लिए राज्य की महिला कल्याण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने वित्त मंत्री को एक खत लिखा है। जिसमें रेखा आर्य ने केंद्रीय वित्त मंत्री के सामने राज्य की कठिन परिस्थितयों का हवाला दिया है।

रेखा ने अपने खत में केंद्रीय वित्त मंत्री से कहा है कि राज्य में ज्यादातर महिलाएं धनाभाव में जीती हैं और उन्हें सैनिटरी नैपकिन के लिये पैसे असानी से प्राप्त नहीं होते, इस के ऊपर सैनिटरी नैपकिन पर टैक्स इन्हें अाम महिलाअों की पहुँच से दूर कर देता है जिस की वजह से उनके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसलिये सैनिटरी नैपकिनस को टैक्स के दायरें से बाहर रखना चाहिये, जिससे पहाड़ की महिलांए इसका ज्यादा इस्तेमाल आसानी से कर सकेंगी।

सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया के दोषियों को दी ”सजा-ए-मौत”

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NEW DELHI, INDIA - DECEMBER 16: Indian students take part in a candle-light vigil at Jantar Mantar mark the first anniversary of Delhi gang rape on December 16, 2013 in New Delhi, India. A 23-year-old woman was gang-raped on a moving bus in Delhi December 16, 2012, beaten and then pushed out onto the street along with her male companion. She died two weeks later amid an outpouring of anger across India. Four men were sentenced to death while a teenager was sentenced to juvenile custody. (Photo by Mohd Zakir/Hindustan Times via Getty Images)

सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया केस में चारों दोषियों को ”सजा-ए-मौत” का फैसला सुनाया। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के बैंच में आसीन तीन जज जस्टिस दीपक मिश्रा, जज जस्टिस आर.भानुमती और जस्टिस अशोक भूषण ने सुनाया। इस पूरी सजा में दो फैसले हैं एक जस्टिस दीपक मिश्रा और दूसरा जस्टिस आर.भानुमती द्वारा। कोर्ट में मौजूद लोगों ने इस फैसले का स्वागत तालियां बजाकर किया और निर्भया की मां की आंखों में आंसू अा गये। आज जिन 4 दोषियों की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया वो हैं मुकेश, विनय, पवन और अक्षय हैं, इस मामले में कुल 6 आरोपी थे। एक आरोपी राम सिंह की मुकदमे के दौरान मौत हो गई जबकि एक आरोपी नाबालिग था। इसलिए, उसे बाल सुधार गृह भेजा गया। वो 3 साल सुधार गृह में बिताकर रिहा हो चुका है।

कोर्ट के मुताबिक जिस तरह से यह पूरा केस हुआ उसको सुनकर ऐसा लगा जैसे यह इस दुनिया की बात नहीं किसी और जगह की बात हों। बहुत ही दरिंदगी से इस पूरी घटना को अंजाम दिया गया था, वहीं सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक इन सारे दोषियों को निर्भया की जान लेने की भूख थी जो अंततः हो ही गया।

दिल्ली पुलिस हमेशा से इस पूरे केस में दोषियों के लिए सजा-ए-मौत ही चाहती थी जबकि इन दोषियों के वकील राजू रामचंद्रन और संजय हेंगड़े चाहते थे कि दोषियों की सजा को कम कर उम्र कैद कर दिया जाए। निर्भया के माता-पिता भी कोर्ट से इनके लिए सजा-ए-मौत ही मुक्कर्र कराना चाहते थे।

देश की राजधानी दिल्ली में निर्भया गैंगरेप की घटना ने सब को हिला कर रख दिया था। इस घटना के बाद लोग दिल्ली के सड़कों पर उतर आए थे। निर्भया के दोषियों को सजा की मांग को लेकर लोग कई दिनों तक लामबंद रहे। 16 दिसंबर 2012 दिल्ली गैंगरेप मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने आज फैसला दोपहर 2 बजे दिया। देश को झकझोर कर रख देने वाले इस मामले के चारों दोषियों को ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट दोनों ने फांसी की सज़ा ही दी थी।

पूरा मामला 

16 दिसंबर 2012 को 23 साल की फिजियोथेरेपी छात्रा अपने एक दोस्त के साथ फिल्म ‘लाइफ ऑफ़ पाई’ देखने गई। रात साढ़े 9 बजे मुनिरका में वो एक चार्टर बस में सवार हुई। बस में सवार ड्राइवर समेत 6 लोग दरअसल मौज-मस्ती के इरादे से निकले थे। उनके पास उस रुट में बस चलाने का परमिट नहीं था। वो थोड़ी देर पहले भी बस में बढ़ई का काम करने वाले एक शख्स को बिठाकर लूट चुके थे। नाबालिग आरोपी ने निर्भया और उसके दोस्त को देखकर बस में बैठने के लिए आवाज़ लगाई। दोनों बस में सवार हो गए। उस वक़्त बस राम सिंह चला रहा था। उसने बस को बताए गए रास्ते से अलग दिशा में डाल दिया। निर्भया के दोस्त ने जब सवाल किया तो बाकी पाँचों उनसे पूछने लगे कि दोनों साथ में क्यों घूम रहे हैं। सवाल पर एतराज़ करने पर उन्होंने दोस्त की जम कर पिटाई की और उसे बस में एक किनारे डाल दिया। इसके बाद वो लड़की को बस के पिछले हिस्से में ले गए। जहाँ सब ने बारी-बारी से उसके साथ बलात्कार किया।

रात 11 बजे उन्होंने निर्भया और उसके दोस्त को बस से धक्का दे दिया। राम सिंह ने निर्भया को कुचलने की भी कोशिश की लेकिन उसके दोस्त ने उसे किनारे कर के बचा लिया। उन्हें सड़क किनारे पड़ा देख कर कुछ लोगों ने पुलिस को फोन किया। निर्भया को बेहद गंभीर हालत में एम्स में भर्ती किया गया। उसे बेहतर इलाज के लिए केंद्र सरकार के खर्चे पर सिंगापुर ले जाया गया। वहां 29 दिसंबर को उसकी मौत हो गयी। दिल्ली पुलिस ने तेज़ी से कार्रवाई करते हुए 17 दिसंबर को बस को जब्त कर लिया। बस की पहचान में सड़क पर लगे सीसीटीवी कैमरे से काफी मदद मिली। बस में खून से सना रॉड और कई और फोरेंसिक सबूत मिले। निर्भया से लूटे गए फोन की लोकेशन से अपराधियों का पता लगाने में मदद मिली। राम सिंह और मुकेश को राजस्थान से पकड़ा गया। विनय और पवन दिल्ली में गिरफ्तार हुए। नाबालिग आरोपी आंनद विहार बस अड्डे पर पकड़ा गया। अक्षय की गिरफ्तारी बिहार के औरंगाबाद से हुई।

मोबाइल एप से रोका जायेगा अवैध खनन

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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अवैध खनन पर पूरी तरह से रोक लगाने और नये तकनीक का इस्तेमाल कर खनन के संचालन करने के निर्देश दिये हैं।गौरतलब है कि राज्य में खनिजों के आवाजाही के लिये इस्तेमाल होने वाले मैनुअल रवन्ना की जगह पर शासन ने ई-रवन्ना की व्यवस्था पूरे राज्य मे लागू कर दी है। सचिव, खनन श्री शैलेश बगोली ने बताया कि
  • पर्वतीय क्षेत्रों में खनन क्षेत्रों के आस-पास इन्टरनेट सुविधा उपलब्ध ना होने की समस्या का भी विशेष ध्यान रखते हुए यह व्यवस्था दी गयी हैं कि खनन व्यवसायी जहाॅ कही भी इन्टरनेट उपलब्ध वहाॅ से ही ई-रवन्ना जारी कर सकते हैं तथा ई-रवन्ना जारी होते ही एक एस.एम.एस. उस वाहन चालक के मोबाईल पर पहुॅच जाता हैं, जिसे खनिज सामग्री ले जाने की अनुमति खनन व्यवसायी देना चाह रहा हों। मैसेज में ई-रवन्ना की समस्त जानकारी उपलब्ध होती हैं। एस.एम.एस प्राप्त होते ही वाहन चालक अपने गन्तव्य के ओर प्रस्थान कर सकता हैं तथा मार्ग में जाॅच दलों को ई-रवन्ना के रूप में एस.एम.एस दिखा सकता हैं।
  • लगातार ई-रवन्ना व्यवस्था की माॅनिटरिंग हो रही है और साॅफ्टवेयर को अधिक से अधिक व्यवहारिक बनाने पर जोर है।
  • ई-रवन्ना व्यवस्था के चलते खनन व्यापारियों की सुविधा के लिए एक कन्ट्रोल रूम भी देहरादून में खोला हुआ हैं।हेल्पलाईन नम्बर 8192802345 एवं 8192802320 हैं तथा ई-मेल आई0डी0 [email protected]  हैं।
  • ई-रवन्ना को लेकर समय -समय पर स्कैन ई-रवन्ने, डुप्लीकेट रवन्ने की शिकायते भी शासन को प्राप्त होती रहती हैं, जिसके समाधान के लिये ‘मायनिंग गार्ड’ के नाम से एक एन्ड्रोइड मोबाईल एप्लीकेशन तैयार कर ली गयी हैं, जिसे गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता हैं।
  • मोबाईल एप्लीकेशन में वाहन सॅख्या अंकित करने पर यदि उस वाहन के पास उस समय विशेष के लिये कोई ई-रवन्ना जारी हो रखा होगा तो उस ई-रवन्ने की पूरी जानकारी मिल सकेगी।
साल 2016-17 में खनन से 335 करोड़ का राजस्व सरकारी खजाने में गया। इस साल के लिए शासन ने 550 करोड के आॅकडें को पार करने का लक्ष्य रखा है। खनन राज्य की सभी सरकारों के लिये दोधारी तलवार बनी रहती है। सरकार को खनन से राजस्व तो मिलता है लेकिन न सिर्फ अऴैध  खनन से पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचता है बल्कि ये एक उबलता राजनीतिक और चुनावी मुद्दा भी बन गया है। ऐसे मे ंये देखना दिलचस्प होगा कि त्रिवेंद्र सरकार किस तरह खनन, पर्यावरण और राजनीति में तालमेल बिठा पाती है।

साफ-सफाई में उत्तराखंड टाॅप 100 शहरों में भी नही

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शहरों में साफ-सफाई की व्यवस्था को लेकर करवाए गए केंद्र सरकार के स्वच्छ सर्वेक्षण में उत्तराखंड का कोई शहर देश के 100 साफ शहरों में भी नही आ पाया है । जबकि पडोसी हिमाचल प्रदेश के कई शहरों ने इस सूची में स्थान पाया है। वार्षिक प्रतियोगिता में भाग लेने वाले 500 में से आज 434 शहरों की जारी सूची में उत्तराखंड के छह शहरों का नाम आया है । इनमें तुलनात्मक रूप से सबसे अच्छा प्रदर्शन हरिद्वार के रूडकी शहर का रहा जिसे सूची में 218वां स्थान मिला जबकि तीर्थ नगरी हरिद्वार को 244वा, राजधानी देहरादून पिछड कर 316वें स्थान पर ही रह गई । इससे बेहतर तो उत्तर प्रदेश के पडोसी मैदानी शहर सहारनपुर, 295वां स्थान पर रहा जहां अभी बिना मेयर का नगर निगम चल रहा है। कुमांऊ के तीन शहरों को भी इस सूची में जगह जरूर मिली रूद्रपुर 325वें स्थान पर, 330वें स्थान पर नैनीताल और 395वें स्थान पर हल्द्वानी-काठगोदाम रहा।

केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वैकैया नायडू की जारी इस सूची में मध्य प्रदेश का इंदौर शहर सबसे साफ साबित हुआ है। साल 2017 के स्वच्छ सर्वेक्षण के मुताबिक, स्वच्छता रैंकिंग में इंदौर पहले पायदान पर रहा, तो वहीं मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल दूसरे नंबर पर रहा। वहीं सफाई के मामले में यूपी सबसे फिसड्डी साबित हुआ। देश के दस सबसे गंदे शहरों पर चार यूपी के ही थे।

434 स्वच्छ शहर की सूची में उत्तराखंड के राजधानी समेत 6 शहर रूड़की, हरिद्वार, काशीपुर, नैनीताल और हल्द्वानी-काठगोदाम को शामिल किया गया था । देहरादून का 29 राजधानी शहरों में 28वे नंबर पर आना न सिर्फ हमारे नगर निगम के कुशासन और कुनीतियों का परिणाम है बल्कि आम जन मानस के स्वच्छता के प्रति तिरस्कार को भी बयान करता है। देहरादून के शिक्षित छात्रों के अलग-अलग संगठनों के मुताबिक हम इस नतीजे से व्यक्तिगत तौर पर लज्जित महसूस करते है। हम नगर निगम शासन से पुनः आग्रह करेंगे की वह हमारे द्वारा उन्हें प्रेषित की गयी स्वच्छता रिपोर्ट, पोस्टर्स रिपोर्ट एवं खाली प्लाटों का कूड़ाघर बनने की रिपोर्ट पर जल्दी अमल करें और साथ गई साथ पुनः चक्रीकरण की व्यवस्था जल्दी शुरू करें। अपने स्वयं सेवी अभियानों जैसे सफाई एवं जागरूकता अभियान, गन्दी पेशाब युक्त दीवारों का कायाकल्प अभियान के माध्यम से हम लोगों में सफाई को लेकर स्वाभाव परिवर्तन का अभियान और तेज़ गति से चलाएंगे।

डेडलाइन पर काम नहीं तो खैर नहीं: त्रिवेंद्र सिंह

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लगता है कि राज्य में सचिवालय और अधिकारियों का आरामपसंद तरीके से काम करने के अंदाज़ का स्वाद सूबे के मुख्यमंत्री को भी चखने को मिल गया है। इसके चलते मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने तौर तरीके बदलने के आदेश दे दिये हैं। रावत ने निर्देश दिए हैं कि

  • निर्माण कार्यों में एक समय सीमा तय की जाय।
  • जन समस्याओं के निदान हेतु सचिवालय में मिलने वालों के लिए एक दिन सुनिश्चित किया जाय।
  • प्रभारी मंत्री एवं प्रभारी सचिव अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर निरीक्षण करेंगे।
  • प्रभारी सचिव एवं मंत्री के दौरे के समय उन क्षेत्रों में जनता मिलन का कार्यक्रम भी रखा जाए। इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
  • किसी भी कार्य को करने के लिए एक समय सीमा तय की जाय।
  • उन्होंने निर्देश दिए कि राज्य के सभी अधिकारी व कर्मचारी समय पर कार्यालय में उपस्थित हो इसके लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति की व्यवस्था की जाए।
  • उन्होंने सचिवालय एवं सभी विभागों की कार्यप्रणाली को बदलने पर बल देते हुए कहा कि फाईल प्रोसेस को छोटा किया जाना चाहिए।
  • किसी भी फाइल को 4 स्तरों से अधिक स्तर पर ना गुजरना पड़े, इसका विशेष ख्याल रखा जाना चाहिए। इसके लिए ई-फाइलिंग की शुरुआत की जाए।
  • साथ ही फाइल ट्रेकिंग सिस्टम को लागू किया जाए। किसी भी फाईल की किसी भी स्तर पर एक निश्चित समय-सीमा तय की जाय। 

मुख्यमंत्री के तेवर तो काफी तीखे हैं पर देखना ये होगा कि सालों से चींटी की रफ्तार से काम करने के आदि हो चुके सरकारी कर्मचारियों पर सूबे के मुखिये के इन तेवरों का कितना असर पड़ता है।

कल बद्रीनाथ आऐंगे राष्ट्रपति,मौसम रहेगा साफ

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केदारनाथ दौरे के बाद, अब सरकारी मशीनरी बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के मौके पर, दर्शन के लिए पहुंच रहे राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के कार्यक्रम की तैयारियों में जुट गई है। चमोली के जिलाधिकारी विनोद कुमार सुमन और पुलिस अधीक्षक तृप्ति भट्ट ने बदरीनाथ धाम में डेरा डाल दिया है। राष्ट्रपति के बदरीनाथ दौरे का कार्यक्रम प्रशासन को मिल गया है।

इसके अनुसार राष्ट्रपति सुबह साढ़े आठ बजे बदरीनाथ पहुंचेंगे और डेढ़ घंटे बदरीनाथ रुकेंगे। इस दौरान वह अखंड ज्योति के दर्शन करने के बाद सुबह दस बजे देहरादून के लिए रवाना हो जाएंगे। राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पुलिस फोर्स तैनात रहेगी। करीब डेढ़ घंटे तक तीर्थयात्रियों और स्थानीय श्रद्धालुओं को भी बदरीनाथ परिसर से हटा दिया जाएगा। बदरीनाथ में कपाट खुलने के दिन बदरीनाथ के निर्वाण (बिना श्रृंगार के) दर्शन होते हैं। इस दिन अखंड ज्योति के दर्शन का महत्व है।

कहीं मौसम न डाल दे खलल: एक पखवाड़े से बदरीनाथ धाम में मौसम पल-पल बदल रहा है। बृहस्पतिवार दोपहर बाद धाम में अचानक मौसम खराब हो गया। बृहस्पतिवार को दोपहर साढ़े बारह बजे तक बदरीनाथ में बारिश रही, जबकि 3 मई को भी दिनभर मौसम खराब रहा। हालांकि, मौसम विभाग के मुताबिक छह मई को मौसम साफ रहेगा।

बदरीनाथ के कपाट खुलने के दिन धाम में कई वीआईपी मौजूद रहेंगे। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चंद्र अग्रवाल, पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. धन सिंह रावत और बदरीनाथ विधायक महेंद्र भट्ट के धाम में पहुंचने का कार्यक्रम है। सूबे के राज्यपाल केके पाल और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी राष्ट्रपति के दौरे को लेकर धाम में पहुंच सकते हैं।

महिला को दस साल का कारावास

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विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस/प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश शंकर राज की कोर्ट, नैनीताल ने चरस के साथ पकड़ी गई हल्द्वानी की महिला को दस साल का कारावास व एक लाख जुर्माने की सजा सुनाई है। कोर्ट के फैसले के बाद महिला को जेल भेज दिया गया।  अभियोजन के अनुसार 22 अक्टूबर 2011 को अपराह्न सवा तीन बजे एसआइ अरुण कुमार, एसआइ श्वेता नेगी व पुलिस कर्मी मंगलपड़ाव चौकी हल्द्वानी के समीप गश्त पर थे। तभी मुखबिर ने सूचना दी कि गौलापुल के पास एक महिला पांच किलो से अधिक चरस के साथ खड़ी है।

पुलिस टीम मुखबिर को भी साथ ले गई। महिला ने पुलिस टीम को देखा तो वह कंधे पर लटके बैग को साड़ी के पल्लू से छिपाने लगी। सूचना पर तत्कालीन एएसपी पी रेणुका देवी व एसआइ मोहम्मद अकरम भी पहुंच गए। महिला विजेता उर्फ विजललक्ष्मी को पकड़ लिया गया। उसके पास पांच किलो 104 ग्राम चरस निकली। पुलिस ने एनडीपीएस में मामला दर्ज करने के बाद उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेजा। एसआइ अकरम द्वारा चरस को विधि विज्ञान प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा और कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी घनश्याम पंत द्वारा पांच गवाह पेश किए गए।

उन्होंने अदालत में सुप्रीम कोर्ट की करनैल सिंह बनाम राजस्थान सरकार की क्रिमिनल लॉ से संबंधित नजीर पेश की। जिसमें कहा गया है कि एनडीपीएस केस हत्या व हत्या के प्रयास के अपराध से भी अधिक गंभीर है। एडीजीसी ने महिला होने के बाद भी तस्करी करने को और भी गंभीर बताते हुए कठोर सजा की मांग की। अभियोजन व बचाव पक्ष की दलील सुनने तथा साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने विजेता उर्फ विजललक्ष्मी, पत्नी मुन्ना सोनकर, मोहल्ला गांधीनगर हल्द्वानी को सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर दो साल का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।