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30 मई को नहीं मिलेंगी बाजार में दवाएं

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देश भर के दवा कारोबारियों को दवा व्यापार के लिए तय केंद्र सरकार के नए मानक रास नहीं आ रहे हैं। दवा विक्रेता केंद्र के नए कायदे कानून को अपने व्यापार की कसौटी पर परख रहे हैं। लिहाजा सरकार के नियमों का रसायन उनके धंधे के लिटमस टेस्ट में फेल हो रहा है।

ऐसे में पूरे देश के दवा विक्रेता सामूहिक विरोध जताते हुए 30 मई को अपनी दवा की दुकान बंद रखेंगे। अखिल भारतीय औषधि महासंघ के आह्वान पर उत्तराखंड औषधि महासंघ ने भी फैसले की हिमायत करते हुए बंद का ऐलान किया है। दून औषधि महासंघ के अध्यक्ष टी.एस. अग्रवाल कहना है कि होलसेल के कारोबार के लिए फार्मसिस्ट की जरूरत नहीं है लेकिन नए नियमों के मुताबिक फार्मसिस्ट को रखना जरूरी होगा।

वहीं उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि दवा की खरीद और बिक्री का रेकार्ड पोर्टल पर अपडेट किया जाए। इसके लिए कारोबारियों को स्टॉफ बढ़ाना पड़ेगा। इससे दवा व्यापारी पर कर्मचारी की पगार का अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा।

तय है कि अगर तीन दिनों में सरकार कोई फैसला नहीं ले पाई तो 30 मई को कई मरीजों की जान पर बन आएगी। लिहाजा जरूरत है वैकल्पिक व्यवस्था कि ताकि लोकतंत्र भी जिंदा रहे और दवा के जरूरतमंद मरीज भी।

पहाड़ों पर आफत की बारिश, 32% हुई सामान्य से ज्यादा बारिश

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मौसम विभाग ने उत्तराखंड में 29 मई से वर्षा की संभावना जताई थी और पहाड़ में मौसम का मिजाज बिगड़ गया है। इसके चलते पहाड़ों में  मार्च से अब तक करीब 32 प्रतिशत प्री माॅनसून की बारिश ज्यादा हुई है। इससे राज्य में सामान्य से अच्छे मानसून की उम्मीद बन गई है। मानसून के राज्य में 20 जून के आसपास दस्तक देने की उम्मीद है।

ये आंकड़ें पिछले साल के मुकाबले में बेहतर हैं। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में राज्य में मानसून के अच्छे होने की उम्मीद की जा सकती है। हांलाकि बे मौसम हुई इस बरसात से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। राज्यभर मे कियानों को बारिश और ओलो की वजह से काफी नुकसान उठाना पड़ा है। एक अनुमान के मुताबिक राज्यभर में अब तक करीब 100 करोड़ की फसल को नुकसान पहुंचा है।

मौसम विभाग के मुताबिक अभी सूबे में आंशिक रूप से लेकर आमतौर पर बादल रहेंगे और कुछ स्थानों में हल्की से मध्यम वर्षा अथवा गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है।

छ: बार एवरेस्ट फतह करने वाले पहले भारतीय बने लवराज

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बीएसएफ के सहायक सेनानी लवराज धर्मशक्तू ने छठी बार एवरेस्ट फतह किया है। दुनिया की इस सबसे ऊंची चोटी पर छह बार चढ़ने वाले वह भारत के पहले पर्वतारोही हैं। वह मुनस्यारी के बौना गांव के रहने वाले हैं।पद्मश्री लवराज इस बार तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग (ओएनजीसी) द्वारा प्रायोजित एवरेस्ट अभियान दल में शामिल थे। उनके नेतृत्व में गए इस दल में धारचूला निवासी ओएनजीसी में इंजीनियर योगेश गब्र्याल समेत उत्तराखंड के चार पर्वतारोही थे। 

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्यमंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस दल को गत 28 मार्च को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। लवराज ने फोन पर बताया कि इस दल ने शनिवार सुबह एवरेस्ट के शिखर पर चढ़ने में सफलता प्राप्त की। लवराज धर्मशक्तू ने 1998 में पहली बार एवरेस्ट फतह किया था। इसके बाद बीएसएफ में जाने के बाद वर्ष 2006, 2009, 2012, 2013 और अब 27 मई 2017 को छठी बार एवरेस्ट फतह करने में सफलता हासिल की है।

लाईट,कैमरा,एक्शन हमेशा से है पहला प्यार

उत्तराखंड का कुमाऊं क्षेत्र अपनी खूबसूरती के लिए तो मशहूर है ही, साथ ही इस क्षेत्र ने छोटे पर्दे को भी कलाकारों से नवाज़ा है। ऐसे ही एक कलाकार हैं पिथौरागढ़ के पास रैतोली गांव की प्रियंका जोशी। यूं तो प्रियंका आजकल मुंबई में अपने काम में मशगूल रहती हैं, लेकिन उनका छोटा सा परिवार जिसे कहीं ना कहीं यह आशा थी कि आने वाले समय में प्रियंका सफलता की सीढ़िया चढेंगी। आगे चलकर हुआ भी कुछ ऐसा ही, प्रियंका की मां, भारती जोशी जो पेशे से अध्यापिका वो कहती हैं कि मुझे अपनी बेटी पर पूरा भरोसा था कि वह स्टार बनेगी।

प्रियंका की मां कहती हैं कि मैंने अपनी बेटी के अंदर स्टेज पर काम करने वाली प्रतिभा पहले ही देख ली थी। भारती कहती हैं कि मुझे अपनी बेटी को एक्टिंग करते हुए देखाना बहुत पसंद था और एक्टिंग के दौरान उसका कांफिडेंस भी बेहतरीन होता था। मैंने उसको उड़ीसी डांस सीखने के लिए कहा और फिर उसको उसके सपने पूरे करने के लिए मुंबई भेजा, और आज उसने अपनी मेहनत से जो मुकाम हासिल किया हैं मुझे उस पर गर्व है। प्रियंका जोशी को अपनी लाईफ का पहला ब्रेक 22 साल की उम्र में मिला।

 

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अपने काम से कुछ समय निकालकर अपने परिवार के साथ समय बिताने के लिए प्रियंका इस समय दिल्ली में हैं। न्यूज़पोस्ट टीम से खास बातचीत में प्रियंका ने बताया कि मैंने कभी इस क्षेत्र को चुना नहीं, मैं जानती थी मैं इसी क्षेत्र में काम करने के लिए बनी हूं। प्रियकां ने बताया कि मैं हमेशा से स्टेज को इंज्वाय करती थी चाहें वह डांस या एक्टिंग हो। प्रियंका ने उड़ीसी डांस में मास्टर डिग्री ली है और जर्नलिज्म में माॅस कम्यूनिकेशन की डिग्री है।

न्यूज़पोस्ट से बातचीत में प्रियंका ने बताया कि मैने बहुत से प्रोजेक्ट पर काम किया है जैसे कि सब चैनल में ‘डा.मधुमति आॅन ड्यूटी’, दूरदर्शन के ‘एक लक्ष्य’, लाईफ ओके के लिए ‘डर सबको लगता’ है आदि, लेकिन इन सभी रोल में से उनका हाल ही में चला वेब सीरीज़ ‘बेवड़े’ काफी अलग शो था और रोल भी बहुत अलग है। वेब सीरीज़ ले लिये नैचुरल एक्टिंग की जरुरत है और इसके टारगेट आॅडियंस भी काफी अलग हैं।

प्रियंका के लिए एक्टिंग एक लिबरेटिंग अनुभव हैं। वो कहती हैं कि एक जिंदगी में एक से ज्यादा रोल निभाना और उसको जीना अपने आप में एक बड़ा चैलेंज है।

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अपनी शादी को और साथ ही जब उन्होंने खुद को टीवी की स्क्रीन पर पहली बार देखा था, इन दोनों पलों को वह अपने कभी ना भूलने वाले क्षणों में गिनती हैं और कहती हैं कि यह दोनों पल उनके लिए खास हैं। आज अपने परिवार और अपने पति के सपोर्ट से वह अपने कैरियर में और अच्छा करने के लिए प्रेरित होती हैं। अपने घर वालों के साथ छुट्टियां मनाने के बाद वह एक बार फिर लाईट, कैमरा,एक्शन की दुनिया में जाने को बेताब हैं।

 

केदारनाथ में यात्रियों को झेलनी पड़ रही खाने और रहने की किल्लत

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केदारनाथ में यात्रियों की संख्या बढ़ने से धीरे-धीरे व्यवस्थाएं पटरी से उतरने लगी हैं। धाम में रसोई गैस, खाद्यान्न व सब्जियां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। ऐसे में यात्रियों को भोजन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। बावजूद इसके गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) पर्याप्त मात्रा राशन उपलब्ध होने का दावा कर रहा है।

केदारनाथ धाम पहुंचने वाले यात्रियों की संख्या अब प्रतिदिन 12 हजार के आसपास हो गई है। इसके अलावा धाम में प्रशासन, पुलिस, अन्य विभागों के कर्मचारी, स्थानीय व्यापारी व तीर्थ पुरोहितों को मिलाकर 15 हजार से अधिक लोग रह रहे हैं। आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ सकती है। जबकि, व्यवस्थाएं यात्रियों की भीड़ के आगे लगातार सिमटती जा रही हैं।

केदार सभा के अध्यक्ष एवं व्यापारी विनोद शुक्ला का कहना है कि केदारनाथ में राशन के साथ ही रसोई गैस की किल्लत भी पैदा हो गई है। सरकार ने इस बार भी राशन की कोई नई दुकान नहीं खोली, जिससे स्थानीय व्यापारियों के सामने दिक्कतें पेश आ रही हैं।

राशन की जो दुकान खुली भी थी, यात्रियों की भीड़ के सामने वह भी फीकी पड़ गई। इसका सीधा असर यात्रियों पर पड़ रहा है और उन्हें भोजन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

व्यापार संघ गौरीकुंड के अध्यक्ष महेश बगवाड़ी ने भी प्रशासन से यात्रियों की भीड़ को देखते हुए यात्रा मार्ग पर तत्काल राशन उपलब्ध कराने को कहा है। उधर, जीएमवीएन का दावा है कि उसके पास पर्याप्त राशन उपलब्ध है, लेकिन निगम अधिक से अधिक ढाई से तीन हजार लोगों को ही खाना खिला सकता है। जबकि, केदारनाथ में लगभग आठ हजार यात्री रोजाना भोजन कर रहे हैं।

  • इस बार सरकार ने नहीं भेजा राशन

आपदा से पूर्व सरकार यात्रा मार्ग पर खाद्यान्न उपलब्ध कराती थी। साथ ही व्यापारियों के लिए अलग से यात्रा कोटा भी रखा जाता था। इसमें मिट्टी तेल भी शामिल था। लेकिन, आपदा के बाद यह व्यवस्था ठप पड़ गई। इस बार केदारपुरी समेत यात्रा पड़ावों पर स्थानीय लोग बड़ी संख्या में दुकानें संचालित कर रहे हैं, लेकिन उन्हें राशन उपलब्ध नहीं कराया जा रहा। ऐसे में यात्रा बढऩे पर समस्या गहराने लगी है।

  • लगातार रखी जा रही नजर 

रुद्रप्रयाग के जिला पूर्ति अधिकारी किशोरी लाल के मुताबिक सरकारी राशन महंगा पड़ने से राशन यात्रा मार्गों पर उपलब्ध नहीं कराया जा रहा। केदारनाथ व अन्य पड़ावों में राशन की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। वहां स्थानीय स्तर पर भी राशन की दुकानें खुली हैं।

  • पर्याप्त राशन का दावा 

जीएमवीएन के क्षेत्रीय अधिकारी डीएस नेगी के अनुसार गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) के पास पर्याप्त मात्रा में राशन उपलब्ध है। प्रतिदिन ढाई हजार से अधिक यात्रियों को निगम भोजन करा रहा है।

वहीं केदारनाथ क्षेत्र के विधायक मनोज रावत यात्रा व्यवस्था का जायजा लेने,रात के 2 बजे गौरीकुण्ड पहुँचे। उन्हें मार्ग में भारी अव्यवस्था दिखी। यात्री ठन्ड व बारिश में खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर, घोड़े खच्चर प्रीपेड काउन्टर में भारी अनियमितताएं मौजूद।इसकी वजह से यात्रीयों को भारी परेशानी उठानी पड रही है । साथ ही रास्तो में प्’ लाईट नहीं, पशु डॉक्टर नहीं, जिससे स्थानीय लोगों को हो रही परेशानी ।मनोज रावत ने कहा कि”सरकार डबल ईन्जन की उपलब्धि प्रदेश में दारू बेचने तक ही सीमित रह गयी है”।

गैंरसैण के परफेक्ट राजधानी बनने तक नहीं होगा गैंरसैण में कोई सत्र

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देहरादून में प्रेस वार्ता करते हुए अजय भट्ट ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि, कांग्रेस की मंशा गैरसैंण को राजधानी बनाने में नहीं थी बल्कि गैरसैंण प्रेम कांग्रेस का ढ़ोंग था। कांग्रेस गैरसैंण को सिर्फ चुनाव में कैश करना चाहती थी।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि जब तक गैरसैंण परफैक्ट राजधानी के रूप में विकसित नहीं हो जाती तब तक गैरसैंण मे सरकार विधानसभा सत्र नहीं करेगी।

वहीं भट्ट ने कहा कि, कांग्रेस सरकार ने गैरसैंण में विधानसभा सत्र का आयोजन करा कर सिर्फ पैसे का दुरुपयोग किया जो कि राज्यहित में ठीक नहीं है।

बहरहाल असल बात ये है कि जो लोग अब गैरसैंण को परफैक्ट राजधानी बनने के बाद ही सत्र के आयोजन की बात कर रहे हैं वो आंदोलनकारी नेता क्यों उन नारों को भूल गए हैं जो उन्होंने अलग राज्य आंदोलन की लड़ाई में लगाए थे। “कोदा झंगोरा खांएगे उत्तराखंड बनाएंगे ”

सवाल ये भी है कि गैरसैंण को परफैक्ट राजधानी बनने तक कोई सत्र आयोजित न करने की नसीहत देने वाले भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष, अपनी सरकार को ये सलाह भी दे पांएगे कि जब तक राजधानी पक्की तय नहीं हो जाती तब तक देहरादून में राजधानी के नाम पर कोई पैसा नहीं बहाया जाएगा।

झिलमिल कंजर्वेशन रिजर्व के बारहसिंघों पर लगेंगे रेडियो कॉलर

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केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने उत्तराखंड में बारहसिंघों (स्वैंप डीयर) के एकमात्र वासस्थल झिलमिल कंजर्वेशन रिजर्व में बारहसिंघों पर रेडियो कॉलर लगाने की इजाजत दे दी है। प्रथम चरण में चार बारहसिंघों पर ये कॉलर लगाए जाएंगे, जिनके जरिए भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआइआइ) के वैज्ञानिक इनके आचार-व्यवहार, माइग्रेशन, आनुवांशिकी, बीमारी समेत अन्य पहलुओं पर अध्ययन करेगें। इसमें सामने आने वाले नतीजों के आधार पर बारहसिंघों के संरक्षण को न सिर्फ उत्तराखंड बल्कि उत्‍त प्रदेश की सीमा में भी प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।

हरिद्वार वन प्रभाग की चिड़ियापुर रेंज में गंगा नदी के किनारे 37.84 वर्ग किमी में फैला है झिलझिल कंजर्वेशन रिजर्व। राज्य में सिर्फ इसी दलदली क्षेत्र में पाए जाते हैं बारहसिंघे। यहां इनकी संख्या 320 के आसपास है, लेकिन मानवीय दखल से इनके स्वछंद विचरण पर भी असर पड़ा है। यही कारण भी है कि झिलमिल से निकलकर ये उत्तर प्रदेश की सीमा तक चले जा रहे हैं। जाहिर है, इससे उनके लिए खतरा भी पैदा हो गया है।

ऐसे में वन महकमे ने भारतीय वन्यजीव संस्थान से इनके वासस्थल, व्यवहार, माइग्रेशन आदि के कारणों की पड़ताल का निर्णय लिया। प्रमुख वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डीवीएस खाती के मुताबिक इस सिलसिले में बारहसिंघों पर रेडियो कॉलर लगाने के लिए विभाग के प्रस्ताव को केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने चार बारहसिंघों पर रेडियो कॉलर लगाने की मंजूरी दे दी है। अगले माह की शुरुआत में इन्हें लगाकर वन्यजीव संस्थान अध्ययन शुरू कर देगा। जरूरत पड़ने पर अगले चरण में अन्य बारहसिंघों पर भी रेडियो कॉलर लगाने की अनुमति के लिए आवेदन किया जाएगा।

जौलासाल से मिट चुके हैं बारहसिंघेः एक दौर में उत्तराखंड में जौलासाल (तराई पूर्वी वन प्रभाग) में भी बारहसिंघों का बसेरा था। जौलासाल में इनकी बहुलता को देखते इसे बाकायदा अभयारण्य तक का दर्जा दिया गया। 60 के दशक में यहां बसागत कराने के साथ ही एग्जॉटिक फॉरेस्ट्री (दूसरे देशों की प्रजातियों के पौधरोपण) के तहत जौलासाल के दलदली क्षेत्र व घास के मैदानों में पौधरोपण हुआ। नतीजतन, धीरे- धीरे बारहसिंघों का वासस्थल खत्म होने लगा और इसी के साथ जौलासाल में ये इतिहास के पन्नों में सिमट गए।

रामनगर में प्रेमियों की हुई पिटाई

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रामनगर के गिरिजा देवी मंदिर गये समुदाय विशेष के युवक युवतियों स्थानीय लोगों ने जमकर पीटा। परिसर क्षेत्र में अशलील हरकत करने का आरोप लगाते हुए स्थानीय लोगों ने युवक युवतियों पर जमकर हाथ भी साफ किया। बजाय पुलिस के हवाले करने के स्थानीय लोगों ने पुछताछ शुरु कर दी और जिसका मन आया हाथ साफ करता नजर आया। कानून व्यवस्था की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए जहां स्थानीय लोगों ने युवक युवतियों की पिटाई की वहीं पुलिस को पुरे मामले की जानकारी ना होना बताया जा रहा है। वहीं वायरल विडियो में पुलिस साफ देखी जा सकती है,  जिसके सामने ही लोग पीटाई कर रहे हैं।

दरअसल गिरिजा देवी मंदिर क्षेत्र में अश्लील हरकत करते तीन युवक-युवतियों को लोगों ने पकड़ लिया। युवकों की जमकर धुनाई लगाई। दोबारा मंदिर न आने व माफी मांगने के बाद छोड़ दिया गया। हालांकि माफी मांगने वाला वीडियो लोगों ने व्हाटसएप पर वायरल कर दिया।

काशीपुर निवासी तीन युवतियां अपने दोस्तों के साथ गिरिजा देवी मंदिर आई थी। इस दौरान युवक-युवतियों से आपत्तिजनक हरकतें करने लगे। यह देखकर लोगों का पारा चढ़ गया। उन्होंने आसपास के लोगों को जानकारी दी। कुछ ही देर में मौके पर पहुंचकर युवकों को पकड़ लिया। गिरिजा क्षेत्र में अश्लील हरकत करने से नाराज लोगों ने युवकों पर जमकर हाथ साफ किए। इसके बाद युवतियों को भी खरीखोटी सुनाई। उन्हें पकड़कर मंदिर समिति के कार्यालय लाया गया। जहां लोगों ने उनसे काफी देर तक पूछताछ की। युवक लोगों से माफी मांगते रहे। युवक व युवतियों ने दोबारा गिरिजा नहीं आने की बात कही। आवश्यक चेतावनी देने के बाद लोगों ने उन्हें छोड़ दिया। इस मामले की जानकारी गिरिजा देवी पुलिस चौकी को नहीं दी गई।

महाभारत का मैदान बना अस्पताल

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काशीपुर के अस्पताल में उस समय माहौल महाभारत के मैदान जैसा हो गया जब वहां मौजूद दो पक्षों के लोगों में हाथापाई शुरू हो गई।दोनों पक्षों के विवाद का मामला सरकारी अस्पताल में खूनी संघर्ष में बदल गया।जहां दोनों पक्ष पहले ही चोटिल होकर इलाज के लिए पहुंचे थे वहीं दोनों पक्षों में अस्पताल में विवाद शुरु हो गया। जिसके चलते दोनों पक्ष एक दूसरे को बुरी तरह से पीटने लगे। किसी तरह से अस्पताल के कर्मचारियों ने दोनों पक्षों को अलग किया और दोनों को ही इलाज के लिए दूसरी जगह भेज दिया।

वहीं घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस को खाली हाथ ही लौटना पडा। आप देख सकते हैं अस्पताल में दोनों पक्षों के बीच हुई हाथापाई की एक्सक्लूसिव तस्वीरें। बताया जा रहा है कि दोनों ही पक्षों में पहले विवाद हो गया था जिसमें दो लोग गम्भीर रुप से घायल हो गये थे। दोनों पक्ष इलाज के लिए सरकारी अस्पताल पहुंचे मगर दोनों के समर्थक आपस में भीड़ गये।

दोनों पक्षों के बीच हुई हाथापाई का एक्सक्लूसिव विडियोः

आखिर क्यों मांग रहा यह परिवार इच्छा मृत्यु??

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पिछले दो साल से दर-बदर की ठोकरे खा रहीं देहरादून निवासी बनिता सिंह केवल एक ही जवाब चाहती हैं।सरकार से भी और भारतीय नौसेना से भी। आखिर क्या हुआ कि उनके पति की मौत अचानक हो गई और उन्हें खबर भी नहीं दी गई? इस सवाल ने बनिता और उनके दोनों बच्चों की रातों की नींद उड़ा दी हैं।

स्वर्गीय रणवीर सिंह

उस एक फोन ने उजाड़ दी बनिता की जिंदगी

बनीता की शादी लगभग 17 साल पहले नौसेना में तैनात अधिकारी रणवीर सिंह से हुई थी। शादी के बाद जीवन अच्छा खासा और खुशी से चल रहा था। अपने काम को लेकर रणवीर अक्सर बाहर जाया करते थे। ऐसे ही एक सफर पर रणवीर साल 2015 के जुलाई महीने में निकले थे और कभी वापस नहीं आए। सफर 45 दिनों का था। लिहाजा परिवार ने भी सोचा कि वो जल्द वापस आ जायेंगे लेकिन 40 दिन बाद अचानक एक फोन ने बनीता की जिंदगी ही बदल दी।

मॉरिशियस में हुई पति रणवीर सिंह की मौत
फोन पर ये कहा गया था कि मॉरिशियस में अचानक उनके पति की तबीयत बिगड़ गई है और उनको अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। नौसेना ने फौरन बनीता को मॉरिशियस भेजने की व्यवस्था की और वो जैसे ही मॉरिशियस पहुंची तो मालूम हुआ कि चार दिन पहले ही उनके पति रणवीर की मौत हो चुकी थी। उनके पति की मौत की खबर किसी ने भी उनको नहीं दी थी।बनीता बताती हैं कि ना केवल उनसे इस बात को छिपाया गया बल्कि उनके पति का पोस्टमार्टम भी रुकवाया गया और उनके पति की लाश को अकेले मॉरिशियस में छोड़ कर जहाज को उसी समय वापिस बम्बई बुला लिया गया।

पति की मौत पर पूछे सवाल का नहीं मिला जवाब

मॉरिशियस  से 4  दिन  बाद  बनिता अकेली अपने पति के लाश को भारत लेकर आई और तबसे आज तक वह अपने पति के मौत का कारण जानने के लिए दर दर भटक रही है। लेकिन उनके सवालों पर नेवी कोई  भी काम करने  के लिए तैयार  नहीं  है।बनिता ने बताया कि बोर्ड आफ ईन्कव्यायरी, पोस्टमार्टम,मौत की वजह और डैथ सार्टीफिकेट हमें कुछ नही दिया गया और हमें  नहीं  पता की मेरे  पति  की मौत कैसे  हुई है। बनीता पिछले दो साल से यह जानने की कोशिश कर रहीं कि आखिरकार घर से सही सलामत निकले उनके पति की मौत अचानक कैसे हो गयी। इसी बात को जानने के लिए वो दिल्ली में धरने पर बैठ चुकी हैं और रक्षा मंत्री से भी मिल चुकी हैं।लेकिन उन्हें अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है।

पहले पति ने की देश की लड़ाई अब इंसाफ के लिए लड़ रही हैं नौसेना अधिकारी की पत्नी
बनीता कहती हैं कि वो तब तक शांत नहीं बैठेंगी जबतक उनको ठोस जवाब नहीं मिल जाएगा। बात यहीं पर खत्म नहीं हुई है बविता जवाब मांगने चिप नेवी भी गई लेकिन वहां उनको दिमागी रुप से बीमार बोलकर अस्पताल जाने को कहा गया। बनिता कहती हैं कि इसके लिए उन्हें कुछ भी करना पड़े। अगर सरकार उन्हें इंसाफ नहीं दे सकती है तो परिवार के साथ वो इच्छामृत्यु ही दे दी जाये।

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रणवीर सिंह के बच्चे भी मांग रहें अपने पापा की मौत के कारण का जवाब
पिता की मौत के बाद रणवीर के बच्चे भी सरकार से अपने पिता की मौत का कारण पूछ रहे हैं। रणवीर की बेटी अक्षिता कहती हैं कि मौत से एक दिन पहले उनसे पापा की बात हुई थी और उन्होंने कहा था कि मारिशियस अच्छी जगह है और वो जल्द घर वापसी के लिए आने वाले थे।अक्षिता अपने पापा की इच्छा अनुसार डॉक्टर बनना चाहती हैं। वहीं, रणवीर के बेटे का कहना है कि पहले तो वो भी अपने पापा की तरह डिफेंस में जाना चाहते थे लेकिन अब वो किसी भी तरह डिफेंस का हिस्सा नहीं बनना चाहते हैं।

रणवीर की मौत के बाद से अबतक उनका परिवार नौसेना के दिए हुए मकान में रहते था लेकिन आने वाले जून महीने में उन्हें वो मकान भी खाली करना है। ऐसे में उनके सामने रहने का संकट भी आ गया है।