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”फूलों की घाटी” के दीदार के लिए रवाना हुआ पहला दल

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विश्व धरोहर फूलों की घाटी पर्यटकों के लिए खोल दी गई। घांघरिया से 12 पर्यटकों का दल फूलों की घाटी का दीदार करने को रवाना कर दिया गया।नंदादेवी राष्ट्रीय पार्क के निदेशक मान सिंह और एसडीओ सर्वेश दुबे भी पर्यटकों के साथ रवाना हुए। इसके साथ ही अब पर्टयक फूलों की घाटी की सैर कर सकते हैं।

हेमकुंड साहिब के प्रमुख पड़ाव और फूलों की घाटी के प्रवेश द्वार घांघरिया से फूलों की घाटी करीब घाटी तीन किलोमीटर दूर है। पार्क निदेशक मान सिंह ने बताया कि पहले ही फूलों की घाटी के रास्ते पूरी तरह से दुरुस्त कर लिए गए हैं। शीतकाल में क्षतिग्रस्त पुल को भी ठीक करा लिया गया है।

उन्होंने कहा कि “इस बार जिस तरह हेमकुंड साहिब में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है, उससे उम्मीद है घाटी में सैलानियों की संख्या में भी इजाफा होगा।” निदेशक के अनुसार घाटी में इस वक्त कुरमुला, फरण, एलियम, प्रोटोलेरिया समेत कई किस्म के फूल खिलने शुरू हो गए हैं। साथ ही पार्क में कस्तूरा मृग और भूरा भालू जैसे दुर्लभ वन्य जीवों की झलक मिल सकती है।

 

उत्तराखंड के छोटे से गांव चमोली का हेमंत बना ”आईएएस”

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संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में उत्तराखंड के युवाओं ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
देर शाम तक आए नतीजों में उत्तराखंड के पांच युवाओं ने परीक्षा में कामयाबी हासिल की है।

बुधवार देर शाम तक आए नतीजों में

     नाम                  रैंक

  • हेमंत सती           88
  • सौम्या गुरुरानी      148
  • हिमाद्री कौशिक    304
  • रितेश भट्ट           361
  • मुकुल जमलोकी    609

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उत्तराखंड में चमोली जिले के एक छोटे से गांव कोठली का बेटा हेमंत सती सिविल सर्विस परीक्षा पास कर आईएएस बन गया है। परीक्षा में हेमंत ने देशभर में 88वां स्थान हासिल किया है।

हेमंत ने प्राइमरी  चौखुटिया, अल्मोड़ा के सरस्वती शिशु मंदिर से किया। जंहा उन्हें रोजाना तीन किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाना पड़ता था। इसके बाद उन्होंने राजकीय इंटर कॉलेज चौखुटिया से 12वीं पास की। और फिर  देहरादून के डीबाएस पीजी कॉलेज से बीएससी-पीसीएम किया।

इसके बाद इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय से इतिहास में एमए किया। और फिर वह सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में जुट गए। हेमंत ने 2013 की राजस्थान पीसीएस परीक्षा पास की है, जिसका परिणाम हाल ही में आया है। हेमंत को इस परीक्षा में पांचवी बार प्रयास करने पर सफलता मिली है।हेमंत से परीक्षा में उत्तराखंड आपदा प्रबंधन और पलायन जैसे विषयों पर भी सवाल पूछे गए।

हेमंत का सपना है कि वो अफसरशाही को जनता तक ले जाये और उत्तराखंड के लिए कुछ करे।

एनएच घोटाले पर सरकार की नीयत में खोटः प्रीतम

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कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने पिथौरागढ़ मे कहा कि एनएच 74 के मामले में प्रदेश सरकार यू टर्न ले चुकी है। सरकार की नियत में खोट है। कार्रवाई के नाम पर अब जांच की बात हो रही है। प्रदेश सरकार शराब माफियाओं के आगे नतमस्तक है। उनके इशारों पर नाच रही है।

प्रदेश अध्यक्ष सोमवार को पिथौरागढ़ के लोनिवि विश्राम गृह में पत्रकारों के साथ वार्ता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार तीन सालों में अच्छे दिन नहीं ला सकी है। केवल जुमलों पर सरकार चल रही है। कश्मीर अशांत है और सीमा पर जवान शहीद हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि तीन साल के भीतर देश में बेरोजगारी बढ़ी है। महंगाई भी चरम पर है। अच्छे दिनों का सपना दिखा कर सत्ता पाने वाली भाजपा सरकार हर मोर्चे पर विफल है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को कांग्रेस ने छह माह का समय दिया है। छह माह के भीतर यदि सरकार ने जनता से किए वायदे पूरे नहीं किए तो कांग्रेस सड़क से लेकर सदन तक सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल देगी। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें जिम्मेदारी सौंपी है। पार्टी कार्यकर्ताओं से मिल कर उनकी राय ली जा रही है। पार्टी के भीतर कोई गुटबाजी नहीं है। प्रत्येक जिले और ब्लॉक में कार्यकर्ताओं के सम्मेलन कर कार्यकर्ताओं की राय ली जाएगी। पिथौरागढ़ से इसकी शुरुआत की जा रही है।

टॉलीवुड नैनीताल की शुभांगी का जलवा

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उत्तराखंड सरोवरनगरी की ये मल्टीटैलेंटेड बेटी इन दिनों टॉलीवुड में छाई हुई है। न सिर्फ खूबसूरती बल्कि अपने डांस, एक्टिंग और सिंग‌िंग से भी इस बेटी ने अपनी अलग पहचान बनाई है। सरोवरनगरी की शुभांगी पंत, तेलुगू फिल्मों में अपना मुकाम बना चुकी है। तेलुगू की अनेक फिल्मों में बतौर हीरोइन किरदार निभा चुकी शुभांगी एक्टिंग के साथ ही गायन, संगीत, नृत्य में भी निपुण है।

बहुमुखी प्रतिभा की धनी शुभांगी आगामी हिंदी फिल्म ‘ऐसा भी होता है’ में श्रेया घोषाल के साथ गाना भी गाएंगी। इसके अलावा वह सुनिधि चौहान के साथ अनेक लाइव कंसर्ट्स में गीत प्रस्तुत कर चुकी हैं। अपनी मां इंद्रा पंत के साथ शुभांगी इन दिनों ननिहाल में है। यहां शुभांगी की माता, उनकी नानी हरि पंत, मामा कैलाश व संजय पंत तल्लीताल बाजार में रहते हैं। संजय हाईकोर्ट में अधिवक्ता हैं। शुभांगी के पिता रजत कुमार पंत एयरफोर्स में विंग कमांडर हैं। शुभांगी ने बताया कि हैदराबाद में पिता की पोस्टिंग के बाद वह हैदराबाद में मिस परफेक्ट तथा मिस टेलेंटेड चुनी गई थी। जिसके बाद उसे तेलुगू फिल्मों के ऑफर मिले थे। उसने तरुण फ्राम तेलुगू मीडियम, फर्स्ट नाइट नेवर एंड्स, अटू, इटू कानी हद् यम थोटी फिल्मों में नायिका के तौर पर भूमिका निभाई।

इनमें तेलुगू के स्थापित नायक जगदीश के साथ पुरी जगनाथ के निर्देशन में काम करने का मौका मिला।इसके अलावा टेन आवर्स आफ वाकिंग एज अ वुमन इन हैदराबाद डाक्यूमेंट्री और आइडिया राक इंडिया आदि सीरियलों में भी भूमिका निभाई है। शुभांगी ने हैदराबाद से प्रथम श्रेणी में बीटेक किया है। शुभांगी ने बताया कि शुरू में वह रोमन अंग्रेजी में लिखे डायलॉग और प्रोंपटिंग के जरिये डायलॉग बोलती थी। बाद में उसने तेलुगू भाषा पर पकड़ बना ली। शुभांगी की मां व पिता दोनों ही गायन और संगीत वादन की कला से जुड़े हैं।

वह स्वयं भी गिटार, हारमोनियम, तबला, बांसुरी आदि में पारंगत है। हिंदी फिल्म ऐसा भी होता है में वह गीत भी गा रही है और अनेक भूमिकाएं भी निभा रही है। हिंदी फिल्म ऐसा भी होता है में इस फिल्म के कलाकारों में नसीरुद्दीन शाह व राजपाल यादव हैं।

सीएम रावत ने दून अस्पताल में मारा छापा⁠⁠⁠⁠

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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बुधवार को दून अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री सचिवालय से सीधे दून अस्पताल पहूंचे थे। मुख्यमंत्री रावत ने 2 जूनियर रेजीडेंट डाॅक्टर्स मनीष एवं ध्रुवांचल के ड्यूटी पर उपस्थित न रहने एवं एक नर्स फातिमा द्वारा मरीजों की देखभाल में लापरवाही बरतने पर सस्पेंड करने के निर्देश दिये।
मुख्यमंत्री ने दून अस्पताल की सफाई व्यवस्था पर गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने को कहा। सीएम रावत ने मरीजों से बातचीत की एवं अस्पताल द्वारा उनके लिये की जा रही व्यवस्थाओं की भी जानकारी ली।मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मरीजों से उनकी समस्याओं के विषय पर बातचीत करते हुए उनके उचित ईलाज का आश्वासन दिया। उन्होंने डाॅक्टर्स को निर्देश दिये कि गरीबी अथवा पैसे न होने के कारण जिन मरीजों के ईलाज में समस्या आ रही है उनका एस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा जाए।
मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से ऐसे मरीजों का ईलाज कर सहायता की जाएगी। एक मरीज के आॅर्थो वार्ड के आसपास टाॅयलेट की व्यवस्था न होने पर सीएम रावत ने अस्पताल प्रशासन को इसके लिये प्रस्ताव भेजे जाने के निर्देश दिये। उन्होंने मरीजों की उचित देखभाल के भी निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि ड्यूटी पर लापरवाही बरतने वाले किसी भी कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाही की जाएगी।

मुख्यमंत्री ‘‘राज्य पुलिस एथलेटिक्स मीट‘‘ केे समापन समारोह में शामिल हुए

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मुख्यमंत्री पुलिस लाइन, देहरादून में आयोजित ‘‘राज्य पुलिस एथलेटिक्स मीट‘‘ केे समापन समारोह में शामिल हुए। राज्य पुलिस एथलेटिक्स मीट के आयोजन पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि हमारी पुलिस बहुत ही स्मार्ट है, हमारे जवानों ने, हमारी बेटियों ने बहुत ही अच्छा प्रदर्शन किया है। सामान्यता ऐसी धारणा होती है कि खेल सिर्फ पुरुषों के लिए है, परंतु जिस प्रकार आज हमारी बेटियों ने प्रदर्शन किया है, उसे देख कर यह कहा जा सकता है कि हमारी बेटियां बेटों से कम नहीं हैं। खेल केवल खेल नहीं बल्कि एक भावना है। खेल सिर्फ शारीरिक अभ्यास नहीं है, यह सफलता कायम रखने के माध्यम भी है।
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मुख्यमंत्री ने पुलिस विभाग द्वारा जूडो कराटे सिखाए जाने पर भी प्रसन्नता व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल एवं खिलाड़ियों को संरक्षण दिए जाने की जरूरत है। हमें यह देखना होगा कि ओलंपिक में हम कहां खड़े हैं। हमें आगे आने के लिए बहुत प्रयास करने होंगे।उन्होंने विजेताओं को पुरस्कार वितरित किए एवं सभी प्रतिभागियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी।

सरकार में नहीं है “आॅल इज वैल”, मुख्यमंत्री ने महाराज की चिट्ठी को किया दरकिनार

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उत्तराखंड सरकार में कलह की खबरें कुछ समय से आ रही हैं। इन अटकलों को उस समय और हवा मिल गई जब उड्डयन विभाग पर हमला करते हुए पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज की चिट्ठी पर मुख्यमंत्री ने जांच की बात को मना कर दिया। पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि “हैलीकाॅप्टर कहां लैंड होना है ये तकनीकी मामला है और पायलट इसके बारे में फैसला लेने के लिये सबसे सही व्यक्ति हैं। इसलिये सभी को उनके विवेक पर यकीन करना चाहिये” मुख्यमंत्री ने ये भी कहा कि ” हाल ही में में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का हेलीकाॅप्टर हादसे का शिकार होते होते बचा है। ऐसे में इस मामले को तूल देने की ज़रूरत नही है”

गौरतलब है कि सतपाल महाराज ने चिट्ठी लिखकर मुख्यमंत्री से उड्डयन विभाग की शिकायत करते हुए कहा ता कि जानबूझकर विभाग के अधिकारियों और पायलेट ने उनकी यात्रा के दौरान मनमाना रवैया इख्तयार किया जिसके चलते उन्हें अपने कामों में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इसके लिये बकायदा महाराज ने 10 और 23 मई को चमोली और द्रोनागिरी में हैलीकाॅप्टर को लैंड न करने के वाक्यों की ज़िक्र किया।

मुख्यमंत्री और सतपाल महाराज के बीच सब ठीक न होने की खबरों ने तब से ज़ोर पकड़ा था जब चार धाम यात्रा की शुरुआत के मौके पर पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ऋषिकेश मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। इसके पीछे मुख्यमंत्री की महारज के भाई बोले महाराज से नजदीकी को बताया जा रहा है, जिनसे खुद महाराज की नहीं बनती।

इससे पहले भी कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को बेहतर मुख्यमंत्री बता कर सरकार में सब कुछ सही न होने के संकेत दिये थे।

 

इस साल से उत्तराखंड के 4 स्पाट होंगे ”टोबैको फ्री”

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देवभूमि उत्तराखंड में अपनी छुट्टियां मनाने आने वाले टूरिस्ट और यात्रियों के लिए राज्य सरकार ने एक नई पहल की है। अपने यात्रियों को एक स्मोक फ्री वेकेशन देने के लिए सरकार ने उत्तराखंड के 4 टूरिस्ट स्पाट को चुना है। इन 4 स्पाट में हरिद्वार का हरकी पौड़ी, मसूरी का माल रोड, नैनीताल और देहरादून के पलटन बाजार को चुना गया है। पैसिव स्मोकिंग और इन क्षेत्रों में पापुल्येशन डेंसिटी के फुटफाल को ध्यान में रखते हुए इन चार स्पाट को चुना गया है। सूत्रों के अनुसार गंगा के 10 घाटों में लगभग 1 लाख लोग हर दिन डुबकी लगाते हैं।

टोबैको कंट्रोल प्रोग्राम के स्टेट नोडल आफिसर बी.एस रावत ने बताया कि सिगरेट और अदर टोबैको प्रोडक्ट एक्ट और दूसरी गाईडलाईन को इन चारों क्षेत्रों में सख्ती से लागू किया जाएगा। इन क्षेत्रों में हर रोज आने वालों की संख्या ज्यादा है और यह दिन पर दिन यह संख्या बढ़ ही रही है। इन क्षेत्रों में बच्चों और गर्भवती महिलाएं पेसिव स्मोकर की श्रेणी में आते है। इसके अलावा भीड़भाड़ वाले यह क्षेत्र बहुत से अवैध टोबैको बिज़नेस की तरफ भी बढ़ रहे है।

सीओपीटीए ने पब्लिक प्लेस पर स्मोकिंग को दिसंबर 2013 में ही बैन कर दिया था। हालांकि वर्ड लंग फाउंडेशन साउथ एशिया द्वार जारी कि गई एक रिपोर्ट में यह बात साफ की गई हैं कि उत्तराखंड राज्य में 3.1 मिलियन तम्बाकू का सेवन करने वाले लोग हैं। करोड़ों लोगों में आने वाले स्मोकर में 2020 से हर रोज 20 लोगों की जान जाएगी वो भी तम्बाकू सेवन की वजह से। तम्बाकू सेवन से जानलेवा बीमारियां जैसे कि फेफड़ा रोग, कैंसर और दिल की बीमारियां होती हैं।

स्वास्थ विभाग के रिकार्ड के अनुसार पिछले 3 सालों में सीओपीटीए के अंर्तगत लगभग 7,273 लोगों से जुर्माना लिया गया है। इस जुर्मानें से कुल 3.85 लाख जमा किए गए हैं। 18 साल से कम उम्र में लगभग 117 बच्चें पकड़े गए हैं जिनका जुर्माना 20,450 जमा हुआ है। इसके अलावा राज्य में स्कूलों से 100 मीटर के दायरे में पान मसाला के खोखे होने पर भी रोक है लेकिन इस नियम को भी अनदेखा किया जा रहा है।

उत्तराखंड राज्य की 13 जिलें में केवल तीन जिलें टिहरी,देहरादून और उधमसिंह नगर में तम्बाकू रोकथाम सेंटर हैं। इन तीनों सेंटरों में पिछले 3 सालों में केवल 3,500 लोगों की काउसलिंग की गई है।

इसी साल मई में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को शराब और तम्बाकू की रोकथाम के लिए रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी जहां चारधाम हैं ऐसे जिलों में शराब पर रोक लगाई थी। इसके अलावा रीठा साहेब और हेमकुंड साहेब के 5 किलोमीटर तक तम्बाकू के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगा दिया गया था।

राज्य के टिहरी जिले को वर्ष 2015 के केंद्र द्वारा किए गए एक सर्वे में टौबेको फ्री क्षेत्र घोषित किया गया था।हालांकि इन सभी नियमों से कुछ सुधार जरुर आया है लेकिन जिस रेट से स्मोकिंग और टोबैको का इस्तेमाल युवा कर रहे हैं इसको रोकना ज्यादा जरुरी है।

उत्तराखंड सीएम के खिलाफ अदालत में शिकायत दर्ज

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गंगा में खनन के खिलाफ अनशन (तप) कर रहे मातृसदन के स्वामी शिवानंद को आश्रम से उठाने के प्रयास के मामले में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, डीएम दीपक रावत और एसडीएम मनीष कुमार के खिलाफ कोर्ट में वाद दायर किया गया है।

मातृसदन के ब्रह्मचारी दयानंद ने सीजेएम कोर्ट में वाद दायर कर सीएम, डीएम और एसडीएम पर पवित्र स्थल की मर्यादा भंग करने और साजिश के तहत स्वामी शिवानंद सहित मातृसदन के संतों की हत्या के प्रयास का आरोप लगाया है। कोर्ट ने सुनवाई के लिए चार जून की तारीख तय की है।  बीते 13 मई को गंगा में खनन खोलने के बाद से मातृसदन का आंदोलन चल रहा है। ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद की 11 दिन तक अनशन पर रहे। इसके बाद से मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद ने पहले अनशन किया और फिर जल भी त्याग दिया।

पिछले पांच दिनों से स्वामी शिवानंद ने जल ग्रहण नहीं किया है। दो दिन तक मौन धारण करने के बाद 28 मई को प्रशासन उनके आश्रम में फोर्स फीडिंग कराने पहुंचा था। कटर से तारबाड़ व ताले काटकर आश्रम में दाखिल होने की घटना पर मातृसदन ने कड़ी आपत्ति जताई है।

सफलता के आडे नहीं आने दी शारीरिक अक्षमता 

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हौसले बुलंद हों तो शारीरिक अक्षमता भी किसी को सफलता हासिल करने से नहीं रोक सकती। ऐसी ही मिसाल श्री गुरुनानक बालिका इंटर कॉलेज, रुद्रपुर की 12वीं की छात्रा अमरीन ने पेश की है। दिव्यांग बेटी उत्तराखंड बोर्ड की परीक्षा में 12वीं में 77.2 प्रतिशत अंक हासिल कर शारीरिक रूप से अक्षम बच्चों के लिए प्रेरणस्त्रोत बन गई है। 17 वर्षीय अमरीन की गर्दन बचपन से ही अज्ञात बीमारी के कारण मुड़ी हुई है। तमाम कोशिशों के बाद भी डॉक्टर उसे ठीक नहीं कर पाए। अपनी शारीरिक अक्षमता को नजरअंदाज कर अमरीन ने शिक्षा को अपना हथियार बना लिया। भविष्य में शिक्षक बनकर अमरीन ज्ञान की ज्योति को घर-घर पहुंचाना चाहती है।

प्रतिभा किसी की मौहताज नहीं होती, प्रतिभावान बच्चे विपरीत परिस्थितियों में भी सफलता की ऊंचाईयों को छू लेते हैं। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है दिव्यांग बेटी अमरीन ने, उसने उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर ने केवल अपने माता-पिता और शिक्षकों को गौरवान्वित किया बल्कि अपने विद्यालय का नाम भी पूरे क्षेत्र में रोशन किया है। श्री गुरुनानक बालिका इंटर कॉलेज में 12वीं कला वर्ग की छात्रा अमरीन ने उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद की परीक्षा में 77.2 प्रतिशत अंक हासिल कर एक अनूठी मिसाल पेश की है। अपनी मेहनत के बल पर उसने बगैर किसी ट्यूशन के अच्छे अंकों के साथ 12 वीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कर ली है।

इंद्रा कॉलोनी, गली नं. 3, निवासी अमरीन की माता रेशमा बी गृहणी है और पिता सलीम अहमद टेलिरंग का काम कर परिवार चलाते हैं। अमरीन की चार बहनें और एक भाई है। स्कूल के अलावा अमरीन पांच घंटे घर पर पढ़ा करती थी। अपनी सफलता का श्रेय वह अपने पिता को देती हैं, पिता सलीम अहमद ने अमरीन को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया। मां रेशमा बी और बड़ी बहन हिना ने भी उसे बहुत सपोर्ट किया। इसके अलावा विद्यालय की शिक्षिका इंद्रजीत कौर ने भी कदम-कदम पर अमरीन का हौसला बढ़ाया और उसे शिक्षा के क्षेत्र में मुकाम हासिल करने की प्रेरणा दी। अमरीन भविष्य में शिक्षिका बनकर बच्चों को पढ़ाना चाहती है। पढ़ाई के अलावा वह चित्रकला में खासी रुचि रखती हैं। अमरीन ने साबित कर दिया कि दिव्यांग होना कोई अभिशाप नहीं, मेहनत और लगन के बल पर जीवन में हर मुकाम हासिल किया जा सकता है। अमरीन की इस उपलब्धि में उसके माता-पिता और शिक्षकों का सहयोग भी वाकई काबिले तारीफ है।