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मंगोलिया में अपने पंच का ज़ोर दिखाऐंगी काशीपुर की बेटी प्रियंका

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मंगोलिया में 20 से 26 जून तक होने वाले उलानबातार कप आमंत्रण टूर्नामेट में अपने पंच का लोहा मनवाने के लिए काशीपुर की बॉक्सर प्रियंका चौधरी ने कमर कस ली है। इसके लिए वह दिनरात मेहनत कर रही है। टूर्नामेट में हिस्सा लेने के लिए 10 सदस्यीय टीम का चयन किया गया है। इसकी अगुआई कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक विजेता मुककेबाज एल देवेंद्र सिंह करेंगे।

देश और दुनिया में अपने पंच का लोहा मनवा चुकी आर्यनगर काशीपुर निवासी रिटायर्ड पुलिस अधिकारी व अंतरराष्ट्रीय एथलीट विजय चौधरी की बेटी प्रियंका चौधरी ने मंगोलिया में होने वाले उलानबातार कप के लिए तैयार हैं। प्रियंका ने 2004, 05, 06 और 2007 में लगातार चार बार सीनियर नेशनल में कांस्य पदक जीतकर क्षेत्र का ही नहीं देश का भी मान बढ़ाया है। उनके हर पंच पर मेडल बरसते हैं। प्रियंका का नाम दुनिया की टॉप बॉक्सरों में लिया जाता है। उन्होंने अपने नाम को अपने प्रदर्शन से साबित भी किया है। इसी प्रदर्शन को एक बार फिर साबित करने के लिए प्रियंका मंगोलिया में आयोजित होने वाले टूर्नामेट में उतरेंगी। इसके लिए वह कड़ी मेहनत कर रही हैं। 10 सदस्यीय टीम में पांच बार की विश्व चैंपियन और ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता एमसी मैरिकॉम, दो बार के किंग कप चैंपियन श्याम कुमार को भी शामिल किया गया है।

मरीजों के लिए देवदूत बने डा. प्रेम 

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चीन सीमा से लगा अति दुर्गम और बर्फीला क्षेत्र, जहां कदम-कदम पर अनहोनी घटना सामान्य बात है। बीमार पड़ने पर यहां से 50 किमी दूर धारचूला जाकर ही प्राथमिक उपचार मिल पाता है। बरसात में तो मार्ग बंद होने पर धारचूला पहुंच पाना भी संभव नहीं। ऐसे में बीमार का भगवान ही सहारा रह जाता है। ऐसे दुर्गम स्थल में डॉ. प्रेम सिंह नगन्याल देवदूत की भूमिका निभा रहे हैं।

भारतीय रेलवे में उप चिकित्सा निदेशक रहे प्रेम सिंह सेवानिवृत्ति के बाद किसी महानगर में बसने के बजाय मातृभूमि की सेवा का संकल्प लेकर गांव नागलिंग लौट आए। प्रेम ने दुर्गम क्षेत्र में 9000 फीट की ऊंचाई पर बसे गांव की दुश्वारियां झेली थीं। इसलिए सुख-सुविधा संपन्न शहरों को छोड़ उन्होंने दारमा को अपनी कर्मस्थली बनाया।

वर्तमान में वह दारमा के 14 गांवों सहित दारमा आने वाले लोगों की सेवा में जुटे हैं। ग्रामीणों के बीमार पड़ने पर प्रेम उनका स्वास्थ्य परीक्षण करने के साथ उन्हें निःशुल्क दवा देकर जीवन दे रहे हैं। उनकी पुत्री धारचूला में चिकित्सक हैं, जबकि पुत्र बैंकों में ऊंचे ओहदों पर हैं।

क्षेत्र पंचायत सदस्य मनोज नगन्याल के मुताबिक डॉ. प्रेम नगन्याल क्षेत्र के लिए किसी भगवान से कम नहीं हैं। उनके लोगों को उपचार दिए जाने से सीमा छोर के लोगों को काफी राहत मिल रही है।

हवा में घुलता फैक्ट्रियों का जहर 

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जब कोई खतरनाक रसायन लोहे को गला सकता है तो वो इन्सानी जिन्दगी के लिए कितना खतरनाक हो सकता है ये अंदाजा आप सहज ही लगा सकते हैं। यही नहीं लोगों ने अब इस खतरनाक रसायन गैस के कारण आभूषण पहनना बंद कर दिया है, क्योकि इसके कारण मंहगे और चमकदार आभूषण भी गल जाते हैं। जी हां, ये कोई चमत्कार नहीं बल्कि फैक्ट्री से निकलने वाली खतरनाक गैस है जिसने काशीपुर क्षेत्र की जनता को परेशान कर रखा है। आईजीएल कैमिकल फैक्ट्री से निकलने वाली खतरनाक गैस और गंदे पानी के कारण इन सारी समस्याओं से क्षेत्र के लोग परेशान हैं.,मगर उनकी सुनने वाला कोई नहीं है।
काशीपुर से पांच किलोमीटर की दूरी पर बने आईजीएल प्लांट में बनने वाले कैमिकल के दुषित धुंए और गंदे पानी के कारण आस पास क्षेत्र के लोग परेशान है, फैक्ट्री से सटे लोगों की जिन्दगी यहां बद से बत्तर हो चुकि है। लेकिन इनकी सुनने वाला कोई नहीं है, आईजीएल से निकलने वाले दुषित धुंए से लोगों को तमाम तरह की बिमारियां तक हो रही है वहीं फैक्ट्री के धुंए के कारण लोहे जैसी मजबूत धातू तक पिघल रहा है, जिससे लोगों ने घरों के बाहर लोहा रखना तक बंद कर दिया है, यही नहीं लोगों ने सोने चांदी के कीमती आभूशण पहनना बंद कर दिया है यही नहीं लोहे की खिडकी, एसी, बाईक, डिशटीवी की छतरी तक हानिकारक गैस से पिघलने लगते हैं जाहिर है कि खतरनाक गैस के कारण ही ये परेशानी हो रही है।
वहीं स्थानीय लोगों ने कई बार इस बात कि शिकायत प्रदूषण नियंत्रम विभाग के अधिकारियों सहित कई उच्च अधिकारियों तक की मगर नतीजा सिफर ही रहा। ऊंची रसूक वाले आईजीएल प्रबन्धन के आगे लोगों की शिकायते बोनी नजर आयी और कई सालों से लोग जहर की हवा में सांस लेने को मजबूर हैं।वहीं प्रदूषण नियंत्रण विभाग के लिए सब कुछ ठीक है।खुली हवा में स्वच्छ हवा लेना यहां के लोगों के लिए सपने जैसा है, क्योकि यहां हवा में बहता घुलता जहर लोगों की जिन्दगी बर्वाद कर रहा है ,वहीं अधिकारियों द्वारा कभी कार्यवाही ना करना भी विभाग की कार्यशैली पर कई सवाल खडे करता है।

यमुनोत्री में दो श्रदालुओं की मौत

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दिन में भैरव मंदिर में गुजरात के श्रदालु की हॉट अटैक से मौत हुई थी और साय को यमुनोत्री धाम आये श्री रामकृष्ण नारायण शिधाये पुत्र श्री – नारायण हरि शिधाये, उम्र 68 वर्ष , निवासी – रूम नं 38, सर्वोदय भवन, ‘अ’ गोखले रोड, नार्थ दादर, वेस्ट मुम्बई, की यमुनोत्री धाम से नीचे आते समय वीआईपी पार्किंग जानकीचट्टी के निकट ह्रदय गति रुकने से मृत्यु हो गयी। पुलिस पंचनामे की कार्यवाही में जुटी।

2 जून से दून में शुरु होगा ब्लाइंड क्रिकेट टूर्नामेंट

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ब्लाइंड क्रिकेट एसोसिएशन द्वारा 2 जून से 4 जून 2017 तक चौथा इंटर ज़ोनल क्रिकेट टूर्नामेंट में लगभग 15 राज्यों के 60 दृष्टीहीन खिलाड़ी भाग लेंगे।यह प्रतियोगिता देहरादून के चकराता रोड के दून स्कूल में होगी। इस प्रतियोगिता में अलग-अलग राज्यों में आए खिलाड़ीयों को चार टीमों में बांटा गया है। इन 4 टीमों के नाम ग्रीन इंडिया, येलो इंडिया, आरेंज इंडिया और ब्लू इंडिया हैं। इस क्रिकेट प्रतियोगिता का शुभारंभ दून स्कूल के हेडमास्टर करेंगे और इसका समापन 4 जून को राज्य के शिक्षा एंव खेल मंत्री अरविंद पांडे करेंगे।

इस प्रतियोगिता में सभी 15 राज्यों के 4-5 बेस्ट खिलाड़ियों को चुना जाता है और इस टूर्नामेंट के लिए तैयार किया जाता है। यह प्रतियोगिता पिछले 4 साल यानि 2013 से आयोजित की जा रही है। इस प्रतियोगिता में सबसे कम उम्र के भाग लेने वाले अनूप केवल 16 साल के हैं और वह उत्तराखंड राज्य से ही हैं। जनरल सेक्रेट्री मानवेंद्र सिंह पटवाल ने बताया कि इस प्रतियोगिता का मुख्य कारण हैं दृष्टिहीन बच्चों के कांफिडेंस और उनके आत्मविश्वास को बूस्ट करना।पटवाल ने बताया कि इस टूर्नामेंट के जरिए बच्चों को अलग-अलग राज्य के बच्चों के साथ इटरेक्ट करने का मौका मिलता है। इसके माध्यम से वह सारी जनता को यह संदेश देना चाहते हैं कि दृष्टिहीन बच्चे केवल इंडोर खेल नहीं खेल सकते अगर अनका सपोर्ट किया जाए तो वह दूसरे बच्चों की तरह आउटडोर गेम भी खेल सकते हैं। हालांकि दृष्टिहीन बच्चों को ट्रेनिंग देने के बात पर पटवाल ने कहा की सुविधाओं की कमी से इनको अलग से ट्रेनिंग नहीं दी जाती। अपने स्कूल और राज्य स्तर पर यह बच्चे खेल को सीखते हैं और इस टूर्नामेंट के जरिए अपनी प्रतिभा को सबके सामेन दिखाते हैं।

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ब्लाइंड क्रिकेट एसोसिएशन मूल रुप में दृष्टिबधित अंर्तराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के लिए मदद की अपेक्षा रखते हुए  आयोजित की जाती है। देश के अलग-अलग राज्यों में इस प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। प्रेस कांफ्रेंस में एसोसिएशन के जनरल सेक्रटरी मानवेंद्र सिंह पटवाल (इंटरनेशन खिलाड़ी) नार्थ जोन सेक्रेटरी सुभाष वर्मा और जयप्रकाश कुमार सम्मलित थे।

बगुर के पास एक यूटिलिटी खाई में गिर 4 की मृत्यु, 4 गंभीर रूप से घायल

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त्यूणी क्षेत्र के अंतर्गत पटवारी क्षेत्र बगुर के पास एक यूटिलिटी वाहन खाई में गिर गई। वाहन में 24 लोग सवार थे, जिसमें से 4 महिलाओं की मौके पर ही मृत्यु हो गई तथा 4 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। शेष 16 लोगो को मामूली चोटें आई है। मृतको के नाम है:

  • मीना,पत्नी अर्जुन उम्र 32 वर्ष।
  • पूजा, पुत्री तुला सिंह उम्र 18 वर्ष।
  • यशोदा, पुत्री तुला सिंह उम्र 16 वर्ष।
  • अंजना, पुत्री तिलक राम।                                                                                                    घायलो को उपचार के लिये सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया है, पुलिस बल मौके पर पहुँची व राहत एवं बचाव कार्य अभी भी जारी है।

अगली बार जब गांव जाएं तो सेल्फी लेकर #SelfieFromMyVillage करना ना भूलें

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पीएम मोदी के डिजीटल इंडिया के प्रयास को आगे बढ़ाते हुए सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उत्तराखंड राज्य में पलायन को रोकने के लिए नई मुहिम शुरु की है। आपको बतादें कि उत्तराखंड में पलायन को रोकने के लिए आए दिन नएं नएं प्रोग्राम की शुरुआत कर दी हैं।

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प्रदेश की जनता को दोबारा से पहाड़ों की ओर आकर्षित करने के मकसद से ये प्रयास किया गया है। सीएम का कहना है कि समय-समय पर पलायन का मुद्दा उठता रहता है। इस समस्या से निपटने के लिए सरकार के प्रति आशा अपनी जगह सही भी है और सरकार इससे निबटने को वचनबद्ध है। एक काम, जो हर प्रदेशवासी-जिसका जुड़ाव कभी ना कभी पहाड़ से रहा है, वो इन गर्मियों में कर सकता है, वो ये कि आप अपने और अपने बच्चों को अपने गांव ले जाएं।

सीएम ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि हम अगर अपने बच्चों को अपने अपने पैतृक गांव से जोड़ेंगे तो गांव से उनका नाता दोबारा से जुड़ेगा साथ ही गांव में आवागमन भी बढ़ेगा। सीएम ने सभी से अपील की है इन गर्मियों की छ्टिटयों में अपने पैतृक गांव जाएं और अपने-अपने गांव से बच्चों के साथ #SelfieFromMyVillage हैशटैग के साथ अपनी फोटो शेयर करें।

सीएम का कहना है कि हर तस्वीर एक कहानी बोलेगी और #SelfieFromMyVillage हैशटैग उत्तराखंड के एक बिलकुल अलग स्वरूप को सोशल मीडिया के माध्यम से आगे लाएगा।

अब सेल्फी लेने वालों पर पुलिस की नज़र

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उत्तराखंड पुलिस ने राज्य में सेल्फी के क्रेज़ और उनसे होने वाले हादसों पर रोक लगाने के लिये क़दम उठाने शुरू कर दिये हैं। इसी सिलसिले में पुलिस ने राज्य में कई जगहों पर सेल्फी लेने की मनाही का प्रचार शुरू किया है। इस बारे में जानकारी देते हुए रुस महानिदेशक एमए गणपति ने बताया कि “पिछले कुछ दिनों से राज्य के कई हिस्सों से सेल्फी लेने के दौरान लोगों के हादसों का शिकार होने की घटनाओं सामने आई हैं। इसके चलते पुलिस ने कुछ जगहों पर सेल्फी ने लेने की एडवाइज्री जारी की है।”

महानिदेशक ने ये भी कहा कि सेल्फी लेने के चलने को कम करने के लिये इन जगहों पर साइन बोर्ड लगाकर लोगों को जागरूक किया जायेगा। हांलाकि गणपति ने ये साफ़ कर दिया कि ये काम पुलिस का नहीं है और अंत में ख़ुद लोगों को भी अपनी सुरक्षा को लेकर सजग रहना पड़ेगा। पर क्योंकि पुलिस इस काम में मदद कर सकती है इसलिये विभाग की तरफ़ से ये क़दम उठाया जा रहा है।

जिन स्थानों पर सेल्फी लेने को रोका जायेगा उनमें हरिद्वार,देहरादून,ऋषिकेश,उत्तरकाशी,रुद्रप्रयाग के अलावा रिवर जोन,किसी भी नदी के किनारे, और कोई भी ऐसी जगह जहां सेल्फी लेने में खतरा हो वहां पर सेल्फी लेना मना हो गया है।आपकों बतादें कि कि पिछले कुछ दिनों में सेल्फी लेने के क्रेज में बहुत से लड़कें और लड़कियां अपनी जान से हाथ धो चुके हैं।

गौरतलब है कि पिछले दिनों सेल्फी लेते स गंगा में गिरने से लेकर पहाड़ से फिसलने के चलते कई लोगों को अपनी जान गँवानी पड़ी थी। इसके बाद पुलिस का ये क़दम ज़रूरी तो है ही पर लोगों को भी ख़ुद अपनी मस्ती और सुरक्षा के बीच क अंतर को लेकर जागरूक होने की ज़रूरत है।

उत्तराखंड में हुए प्रशासनिक फेरबदल, डी पांड्यन को मिली एनएच स्कैम उजागर करने की सज़ा?

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सूबे की टीएसआर सरकार ने एक बार फिर आईएएस अधिकारियों के तबादले किए हैं। इस बार आईएस अधिकारियों को छांट-छांट कर पदभार दिए गए हैं। किसी का कद बढ़ाया गया है तो किसी के पर कतरे गए हैं।

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दिलचस्प बात ये है कि किसी अधिकारी के कांधों पर कई महकमों का भारी बोझ लाद दिया है । जबकि कई अधिकारी ऐसे भी हैं जिनको काफी फुर्सत दी गई है। सरकार ने जहां भारी भरकम मंत्रालयों को संभालने वाले अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री ओमप्रकाश के कद में और इजाफा करते हुए उन्हे चिकित्सा शिक्षा की जिम्मेदारी भी दी है। गौरतलब है कि अब तक चिकित्सा शिक्षा का पदभार प्रभारी के तौर पर सैंथिल पांडियन संभाल रहे थे।

IAS-2-181x300वहीं एन एच 74 मुआवजा घोटाला मामले की रिपोर्ट तैयार करने वाले कड़क मिज़ाज आफिसर माने जाने वाले सैंथिल पाण्डियन से प्रभारी सचिव चिकित्सा शिक्षा और कुमांऊ आयुक्त का पदभार वापस ले लिया है। सैथिल पांडियन को नया पदभार सचिव (प्रभारी) परिवहन आयुक्त परिवहन दिया गया है। अब कुमांऊ आयुक्त का जिम्मा चंद्रशेखर भट्ट को सौंप दिया गया है। हालांकि भट्ट से विद्यालयी शिक्षा , प्रोढ़ शिक्षा, पंचायती राज और सूचना महानिदेशक का पदभार वापस लिया गया है।20 आईएएस व पीसीएस अफसरों के दायित्वों में बडा फेंरबदल किया गया है, सूची देखिए की टीएसआर सरकार में किस अधिकारी को किस काबिल समझा गया।

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विश्व का सबसे छोटा चरख़ा बनाने का दावा किया इस उत्तराखंडी ने

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यदि ये कहा जाये की सबसे छोटे काम करने वाले चरखे का आकार 5x5x7 मिमी हो सकता है तो शायद यकीन करना बड़ा मुश्किल होगा, लेकिन हकीकत यह है कि हलद्वानी में प्रकाश उपाध्याय ने विश्व का सबसे छोटा काम करने वाला चरखा बनाने का दावा पेश किया है जिसको लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए भेजा गया है,

हल्द्वानी के मेडीकल कॉलेज में आर्टिस्ट के पद पर तैनात ये है प्रकाश उपाधयाय, प्रकाश ने दावा किया हैं की उन्होंने विश्व का सबसे छोटा काम करने वाला चरखा तैयार किया है, जिसे उन्होंने लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने के लिए भेज दिया है, प्रकाश ने 5x5x7 मिमी का चरखा तैयार किया है, उनके मुताबिक यह विश्व का अब तक का सबसे छोटा चरखा है, अब तक यह रिकॉर्ड हरियाणा के योगेश बरनाला के नाम है।

प्रकाश के नाम पहले से ही दो रेकॉर्ड दर्ज है, जिसमे उनके हाथ से बनाई धार्मिक पुस्तक हनुमान चालीसा जिसका आकार 3x4x4 मिमी है, इसके अलावा 3x4x4 मिमी की हाथ से बनाई एक अन्य पुस्तक भी है, इन दो रेकॉर्ड के बाद प्रकाश अपने नाम एक और रेकॉर्ड बनाने को तैयार है, प्रकाश को पेंटिंग का भी ज़बरदस्त शौक है, पिछले साल नवंबर में मेरठ में तीन हज़ार पेंटरों ने विश्व की सबसे लम्बी पेंटिंग बनाकर चीन का रिकॉर्ड भारत के नाम कर गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज करवाया था, प्रकाश को अब तक दिल्ली की गांधी आर्ट गैलरी में सम्मान, नटराज कला रत्न सम्मान दिया जा चुका है,

कहते है प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती, जिसका जीता जागता उदाहरण प्रकाश उपाध्याय है, पहले ही अपने नाम दो रेकॉर्ड कर चुके प्रकाश अब एक नया कीर्तिमान बनाने को तैयार है जो उत्तराखण्ड के लिए गौरव की बात है,