
गंगा को साफ और निर्मल बनाने में लगेंगे अभी और 10 साल- उमा भारती

गौरक्षा के हंगामे के बीच सीएम आवास में खुली गौशाला
शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में नवनिर्मित गौशाला का शुभारम्भ किया गया। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत व उनकी धर्मपत्नी ने गौशाला में लाई गई गाय की पूजा कर गौशाला का औपचारिक शुभारम्भ किया। फिलहाल एक गाय व उसका बछड़ा मुख्यमंत्री आवास स्थित गौशाला में लाए गए हैं। मुख्यमंत्री ने गाय व उसके बछड़े को सहलाया और गुड़ व चना खिलाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गाय हमारी संस्कृति का प्रतीक है। घर में गाय को रखने से आध्यात्मिक शांति व आनंद की अनुभूति होती है।
गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों से गाय अौर गाय रक्षा को लेकर देशभर में माहौल गर्माया हुअा है। देश के कई इलाक़ों से खास तौर पर उत्तर प्रदेश, राजस्थान अादि राज्यों से गौ रक्षा के नाम पर हिंसा की घटनायें सामने अा रही है। देश में यह बहस भी छिङी हुई है कि गौ मांस को प्रतिबन्धित करना क्या लोगों कि अाजादी पर अंकुश लगाने जैसा है? इस सबके बीच केंद्र सरकार पर इन तथाकथित गौ रक्षकों पर नरम बरताव करने का भी अारोप है।
फेसबुक, शिक्षकों के बीच शिकायत व सुझाव देने के लिए हो रहा मशहूर
सरकारी स्कूल के शिक्षक उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे के पास शिकायत दर्ज कराने के लिए फेसबुक पर तेजी से लाॅग इन कर रहे हैं।।
राज्य में लगभग 17,000 सरकारी स्कूल हैं जिसमें तकरीबन 1 लाख शिक्षक काम कर रहे हैं। आपको बता दें कि 2 जून से शुरु की गई सेवा जो सरकारी शिक्षकों के लिए अपने काम में आने वाली बाधाओं की रिपोर्ट करने के लिए शुरू की गई थी उसमें अबतक लगभग 100 शिकायत ‘शिकायत और सुझाव सेल’ के तहत प्राप्त हुई हैं। फेसबुक के माध्यम से शिकायतों के साथ उत्तराखंड में स्कूल शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए शिक्षकों के सुझाव व सिफारिशें के लिए भी आमंत्रित किया गया था ।
अधिकारियों के अनुसार अब, लगभग 70% शिकायतें फेसबुक के माध्यम से आई है। इसके अलावा 15% शिकायतें ईमेल के माध्यम से आई हैं, 13% व्हाट्सएप और 2% ट्विटर से आई हैं। लोगों के रिस्पांस से खुश अरविंद पांडे का कहना है कि आज के समय में फेसबुक बहुत जरुरी सोशल मीडियम बन चुका है और हमारे शिक्षक वास्तव में इसका पूरी तरह से उपयोग कर रहे हैं। हम ई-मेल, व्हाट्सएप, ट्विटर और पोस्ट के माध्यम से भी शिकायतें और सुझाव प्राप्त कर रहे हैं।
शिक्षा मंत्री ने वादा किया है कि पंजीकरण के 15 दिनों के भीतर शिकायतों को हल किया जाएगा, जिनके बारे में सारी सूचना सेल के माध्यम से इकट्ठा की जा सकती है। इसके अतिरिक्त, पांडेय ने स्कूल शिक्षकों को और सहायता देने के लिए एक टोल फ्री नंबर भी लॉन्च करने की योजना बनाई है। अलग-अलग तरह की शिकायत, जैसे कि पेंशन प्रावधान में अंतर, सर्व शिक्षा अभियान, पदोन्नति और स्थानान्तरण के तहत वेतन के वितरण में देरी आदि भेजी जा रही हैं। मिडिल स्कूल में सरकारी शिक्षक सोहन सिंह ने कहा “इसमें कोई संदेह नहीं है कि फेसबुक का व्यापक रूप से प्रयोग किया जाता है और यह सबसे लोकप्रिय भी है। यही कारण है कि शिक्षकों ने भी अपनी शिकायत दर्ज करने के लिए इस मंच को चुना है और इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।
सूत्रों ने बताया कि इस सेल के गठन के पीछे का उद्देश्य पक्षपातपूर्ण पोस्टिंग और प्रोन्नति के संबंध में अनियमितताओं की रिपोर्ट करना है। कुछ पोस्टिंग प्रकाश में आई है, जिसमें हरीश रावत की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार के शासन में कथित तौर पर अवैध फैसले किए गए थे।अरविंद पांडे ने पहले ही ऐसे मामलों में जांच का आदेश दिये है।
सेल के साथ काम करने वाले प्रणय बहुगुणा ने बताया कि सरकारी शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड का समर्थन करना, फेसबुक पेज पर उनके सुझाव मांगना दो प्रमुख काम हैं। “ड्रेस कोड की बात पर शिक्षकों से वाहवाही प्राप्त हुई है लेकिन, ड्रेसकोड किस प्रकार का होगा उसपर काफी सुझाव दिए गए हैं, जिन्हें अनुसरण किया जाना चाहिए।
त्रिवेंद्र सरकार ने पेश किया 39957.20 करोड़ का अपना पहला बजट
प्रचंड बहुमत से जीत कर प्रदेश की सत्ता पर काबिज नई भाजपा सरकार का पहला सालाना बजट उत्साह से लबरेज है। वर्ष 2017-18 के इस बजट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ध्येय वाक्य ‘सबका साथ, सबका विकास’ को बतौर संकल्प के रूप में लेकर भाजपा के दृष्टिपत्र को जमीन पर उतारने के लिए पांच साल का खाका भी खींचा गया है।
दृष्टिपत्र के मुताबिक भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस और सुशासन की प्रतिबद्धता को बजट में टॉप पर रखा गया। त्रिवेंद्र रावत सरकार ने जनता को राहत देते हुए 39957.79 करोड़ का करमुक्त बजट पेश किया। खास बात ये है कि नई सरकार नई लोकलुभावन घोषणाओं से गुरेज कर बीते वित्तीय वर्ष 2016-17 की तुलना में बजट आकार को 464.41 करोड़ कम रखा। सभी वर्गों, खास तौर पर किसानों, ग्रामीणों, युवाओं, महिलाओं, अनुसूचित जातियों-जनजातियों,सरकारी कार्मिकों को बजट में खास तरजीह मिली है। वहीं ढांचागत विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य में बजट में नई पहल की गई। केंद्र सरकार के राज्य में महत्वाकांक्षी चार धाम ऑलवेदर रोड और रेलवे नेटवर्क के साथ ही केंद्रपोषित योजनाओं से बजट में उम्मीदें बांधी गई हैं।
गुरुवार को विधानसभा सत्र के पहले दिन शाम को वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने नई सरकार का पहला बजट पेश किया। बजट में भाजपा के दृष्टिपत्र की छाप है। सत्तारूढ़ दल ने विधानसभा चुनाव में अपने घोषणा पत्र को दृष्टिपत्र के रूप में पेश किया था। बजट में नई योजनाओं के साथ ही पहले से चल रही योजनाओं को पूरा करने पर जोर है। बजट के कुछ रंग अलहदा नजर आए। सॉफ्ट कॉपी में पहली बार इको फ्रेंडली बजट में अब प्लान और नॉन प्लान की व्यवस्था खत्म कर दी गई है। इसका स्थान अब पूंजीगत और राजस्व मदों ने ले लिया है।
कुल बजट में राजस्व लेखा व्यय 31550.83 करोड़ और पूंजीगत लेखा व्यय 8406.96 करोड़ अनुमानित है। चालू वित्तीय वर्ष के इस बजट में कोई राजस्व घाटे का अनुमान नहीं है। यानी सरकार का कुल राजस्व खर्च राजस्व प्राप्तियों से कम रहने का अनुमान लगाया गया है। अलबत्ता राजकोषीय घाटा 5412.42 करोड़ है, लेकिन यह राज्य सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 2.37 फीसद है। राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) एक्ट की तय सीमा के अधीन ही राजकोषीय घाटा होने से सरकार राहत में है।
बजट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा का एजेंडा बखूबी झलका है। मोदी लहर के बूते प्रदेश में भारी बहुमत से सत्ता में पहुंची भाजपा सरकार ने मोदी के ध्येय वाक्य और स्थिरता के संकल्प के साथ ही अपने पहले बजट की शुरुआत की। इसमें केंद्र सरकार की योजनाओं के लक्ष्य के अनुसार प्रत्येक गांव को सड़क समेत ढांचागत सुविधाओं से जोडऩे, पेयजल व 24 घंटे बिजली मुहैया कराने, गरीबों को आवास मुहैया कराने, किसानों को आपदा से नष्ट फसल की क्षतिपूर्ति का भरोसा बंधाया गया है।
बजट के प्रमुख बिंदु:
- भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की प्रतिबद्धता
- समस्त सरकारी कार्यालयों में बायोमेट्रिक प्रणाली होगी लागू
- सीएम कार्यालय में डैश बोर्ड की स्थापना, दैनिक आधार पर प्रत्येक विभाग का अनुश्रवण
- पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने को आवासीय विद्यालयों एवं छात्रावास की स्थापना
- प्रत्येक स्कूल में बुक बैंक बनेगा, एनसीइआरटी की पुस्तकें अनिवार्य होंगी
- गरीब मेधावी छात्र-छात्राओं को मुफ्त लैपटॉप व स्मार्ट फोन वितरण को बजट प्रावधान
- सभी विश्वविद्यालयों में मुफ्त वाई-फाई
- बीपीएल एव आयकर के दायरे में न आने वाले परिवारों को स्वास्थ्य कल्याण कार्ड योजना के जरिये सहायता
- पर्वतीय क्षेत्रों में गंभीर रूप से बीमार, घायलों के लिए एयर एंबुलेंस
- मध्य हिमालयी क्षेत्रों में योग अभ्यास केंद्रों की स्थापना
- धार्मिक पर्यटन बढ़ाने को शाक्त, शैव, वैष्णव, गोलू, नागराजा व अन्य स्थलों का सर्किट के रूप में विकास
- चार धाम ऑल वेदर रोड योजना 2020 तक पूरा करेंगे
- 2019 तक हर गांव को बिजली, सभी को 24 घंटे बिजली आपूर्ति को युद्ध स्तर पर प्रयास
- 2019 तक सड़क सुविधा से जुड़ेंगे सभी गांव
- सभी किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड
- तहसील व ब्लॉक स्तर तक इंटरनेट कनेक्टिविटी की स्पीड 10 एमबीपीएस और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा
- प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 5000 मकानों का निर्माण
- नगर निकायों के लिए वार्षिक अनुदान राशि बढ़ाकर की गई 578.03 करोड़
- जखोली में सैनिक स्कूल की स्थापना
- रुद्रपुर व हल्द्वानी में कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावास
- सामान्य वर्ग के निर्धन छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति
- अनुसूचित जाति-जनजाति के लिए छात्रवृत्ति में लगातार अनियमितता की जांच और पारदर्शी वितरण व्यवस्था
- आपदा का बेहतर ढंग से सामना करने को प्रत्येक गांव के निवासियों को एसडीआरएफ से प्रशिक्षण
- स्टार्ट अप नीति के अनुरूप निवेशकों को लाभ, इसी वित्तीय वर्ष में इन्वेस्टर मीट
- राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में ट्रॉमा सेंटर की स्थापना को धन की व्यवस्था, एमबीबीएस की 50 सीटें बढ़ाने को धन
- राज्य के युवाओं को रोजगार, स्वरोजगार दक्षता को उत्तराखंड वर्कफोर्स डेवलपमेंट फॉर मॉडर्न इकोनॉमी की स्थापना
- अति निर्धन परिवारों को रसोई धुआंमुक्त करने को मुफ्त रसोई गैस
- नदियों में कटाव से निपटने के लिए उठाएंगे प्रभावी कदम
- राज्य के कई स्थानों पर धनोल्टी की तर्ज पर इको पार्क की स्थापना
- पांच वर्ष में ऊर्जा की कुल मांग का 10 फीसद वैकल्पिक ऊर्जा से पूर्ति
किसान ने खूद को मारी गोली
मूल रूप से ग्राम छतरपुर, जिला मुरादाबाद निवासी तेजपाल सिंह (54) पुत्र राजाराम यहां ग्राम फसियापुरा में अलीगंज रोड पर करीब 15 साल से परिवार के साथ रहते थे। तेजपाल गुरुवार को स्टोर रूम में करीब 11.30 बजे लाइसेंसी दो नाली बंदूक से अपने गले में गोली मार दी। किसान की मौके पर ही मौत हो गई। गोली चलने की आवाज सुनकर पत्नी रूपरानी और बेटी मौके पर पहुंची तो तेजपाल छटपटा रहे थे और कुछ ही देर में दम तोड़ दिया। सूचना पर तेजपाल के भाई व रिश्तेदार मौके पर पहुंच गए। इस बीच सीओ राजेश भट्ट मौके पर पहुंचकर घटना की जानकारी ली।

पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। तेजपाल तीन भाइयों में दूसरे नंबर के थे। पुलिस के मुताबिक परिजन बताते थे कि तेजपाल शराब ज्यादा पीते थे। गुस्से में कुछ माह पहले भी बंदूक से गोली चलाई थी, जो छत में निशान है। तेजपाल के ममेरे भाई फाल सिंह ने बताया कि पारिवारिक कलह नहीं थी, मानसिक अवसाद की स्थिति में थे, इसलिए उनका इलाज चल रहा था। उन्हें गुस्सा ज्यादा आता था। जिस तरह से तेजपाल ने आत्महत्या की है। इससे लगता है कि वह इससे पहले कई बार पैर के अंगूठे से ट्रिगर चलाने का अभ्यास किया होगा। तेजपाल ने दो नाली बंदूक में 12 बोर की गोली भरी है। नाल के मुंह को गले से सटाकर पैर के अंगूठे से ट्रिगर दबा दिया। पापा को बंदूक ने ही खा लिया। यदि बंदूक नहीं होती तो यह आज देखने को नहीं मिलता। पापा ऐसा क्यों कदम उठाया, मुझे छोड़कर चले गए यह कहते हुए तेजपाल की बेटी शिवी रोती रही। यह घटना देख हर किसी की आंखों में गम के आंसू दिखे।
तेजपाल गोली मारकर आत्महत्या करने से पहले घर से बाहर गए थे। जब उन्होंने एक दुकान से रजनीगंधा व तुलसी खरीदकर घर पहुंचे तो पास में एक युवक ने टोका कि चाचा आप तो कई बार रजनीगंधा व तुलसी छोड़ने को कह चुके हैं। इस पर तेजपाल ने कहा कि बेटा आज तो खा लेने दो, फिर कभी नहीं खाएंगे। इसके करीब 20 मिनट बाद तेजपाल ने गोली मारकर आत्महत्या कर ली। पुलिस तेजपाल की आत्महत्या की वजह का सही पता नहीं चल पाया है। बंदूक राजाराम के नाम थी। तेजपाल ने बंदूक का लाइसेंस अपने नाम विरासत में करा लिया था। मामले की जांच की जा रही है।
दहेज के लिए जान के दुश्मन बने ससुराली
दहेज के लिए आज भी बेटियों का शोषण होता है और पति की मार से सहमी बेटी आज भी दर्द में जीने को मजबूर हैं। जी हां महिला सशक्तिकरण और महिलाओं के अधिकार के भले ही कितने बडे बडे दावे किये जाते हों मगर हकीकत तो ये हैं कि आज भी बेटी ससुराल में दहेज के उत्पीडन का दंश झेलने को मजबूर है। बात काशीपुर की है जहां एएसपी कार्यलाय के बाहर हाथ पैरों पर पट्टी बांधे एक युवती न्याय मिलने का इन्तजार कर रही थी।

सैक्स रैकेट का भांडाफोड
रुद्रपुर के ट्रांजिट कैंप में पुलिस ने सेक्स रैकेट में संलिप्त तीन महिलाओं सहित सात लोगों को दबोच लिया। सीओ यातायात के नेतृत्व में हुई गोपनीय कार्रवाई से हड़कंप मच गया। पकड़े गए युवकों के परिजन भी जानकारी मिलने पर थाने पहुंच गए। पुलिस ने उनके खिलाफ अनैतिक देह व्यापार अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
ट्रांजिट कैंप थाने की नारायण कालोनी में सेक्स रैकेट की सूचना पर एसएसपी डा. सदानंद एस दाते के निर्देश पर सीओ बीएस मधवाल के नेतृत्व में पुलिस टीम ने छापामारी की। इस दौरान एक मकान में चल रहे सेक्स रैकेट का पर्दाफाश कर दिया। पुलिस ने मकान में दो महिलाओं के साथ चार युवकों और भवन स्वामी महिला को भी दबोच लिया। पकड़े गए युवकों ने अपने नाम राकेश कोली, सद्दाम, सन्नी व अनिल पाल बताया गया। सीओ बताया कि पकड़े गए लोगों से पूछताछ की जा रही है।
नारायण कालोनी निवासी महिला के पास चार कमरे है। वह उन कमरों का प्रयोग देह व्यापार के लिए करती है। उसका काम लोगों को कमरा मुहैय्या कराने का है। उसका कहना है कि युवक अपने साथ महिलाओं को लेकर आते हैं, इसकी एवज में उसको दो सौ रुपये मिलते थे।
पकड़े गए आरोपियों में सभी नई उम्र के लड़के हैं। युवकों की उम्र 20 से 24 वर्ष के बीच है। युवक दुकान में काम करने वाले हैं। पकड़े गए एक युवक की मां तो पता लगने पर थाने ही पहुंच गई। उसका कहना था कि उसका बेटा घर से बिजली का बिल जमा करने के लिए गया था।भवन स्वामी महिला ने बताया कि उसका पति मानसिक रूप से बीमार है। उसकी हरकतों के चलते उसे घर में जंजीर से बांध कर रखना पड़ता है। उसने बताया कि पिछले दो वर्ष से वह अपने घर में लोगों को अनैतिक कार्य के लिए कमरा किराए पर दे रही है।
सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन योजना क्यों रही असफल?
पिछले साल देहरादून नगर निगम की योजना के तहत शहर के भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में सैनिटरी नैपकीन के लिए वेंडिंग मशीन लगाए जाने थे, लेकिन अब तक इसपर कोई काम शुरु नहीं हुआ है। इस योजना में दून के मुख्य स्पाट पर यह मशीन लगनी थी जिसमें गांधी पार्क के पास भी एक वेंडिंग मशीन लगाई जानी थी।यह योजना स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाई गई थी।
यह मशीन से 10 रुपये में 3 सैनिटरी नैपकिन देने वाली थी जिससे आर्थिक रुप से कमजोर महिलाओं में नैपकिन के इस्तेमाल व इसके फायदे के बारे में जागरुक किया जा सकता था। इस एक मशीन को इंस्टाल करने की कीमत लगभग 60 हजार बताई गई थी। यह मशीन निगम द्वारा लगाए जानी थी जिसमें उनकी मदद सेमी गवरमेंट कंपनी हिंदुस्तान लाईफकेयर लिमिटेड करने वाली थी।
हालांकि नगर निगम का कहना है कि इस प्लान पर काम ना करने की वजह इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है। इस बारे में नगर निगम का कहना है कि इस योजना को धरातल पर लाना इतना आसान नहीं है, क्योंकि इसको चेक करने के लिए हमने पहला वेंडिंग मशीन महिला शौचालय में लगाया था। लेकिन इस मशीन को शहर के दूसरे हिस्सों में लगाना थोड़ा मुश्किल होगा क्योंकि एक तो सुलभ शौचालयों की हालत बहुत खराब होती है, दूसरा यह योजना उन क्षेत्रों में काम करेगी जहां बहुत सफाई हो और उस स्थान पर बिजली पानी की सुविधा हो क्योंकि यह मशीन बिना बिजली के नहीं चलती।
वहीं शहर के मेयर विनोद चमोली का कहना है कि हमने इस एक मशीन को एक्सपेरिमेंट के आधार पर लगाया था और इसका रिस्पांस देखना अभी बाकी है, इसके अलावा उन्होंने कहा कि मैं खुद इस योजना को देखूंगा कि इसपर काम क्यों नहीं हो रहा है।
गौरतलब है कि कुछ समय पहले रेखा आर्य उत्तराखंड की महिला कल्याण एवं बाल विकास मंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से सैनिटरी नैपकिन को टैक्स के दायरे से बाहर रखने की मांग की है। रेखा ने अपने खत में केंद्रीय वित्त मंत्री से कहा था कि राज्य में ज्यादातर महिलाएं धनाभाव में जीती हैं और उन्हें सैनिटरी नैपकिन के लिये पैसे अासानी से प्राप्त नहीं होते, इस के ऊपर सैनिटरी नैपकिन पर टैक्स इन्हें अाम महिलाअों की पहुँच से दूर कर देता है।
मन को भायेंगे यह ”रंग-बिरंगे कारपेट”
देहरादून से मसूरी तक घुमावदार सड़क पर सफर करते हुए शायद ही कोई ऐसा होगा जो सड़क के किनारे लगाए हुए रंग-बिरंगे कारपेट पर ध्यान ना दें। स्टेशन जाने के लिए घुमावदार रास्तों के लगभग 15 किलोमीटर के अंदर, आधा दर्जन कालीन विक्रेता रंग-बिरंगे, चमकीले ऊनी और सिंथेटिक कालीनों के साथ रनर; झूमर और फूट मैट दो पेड़ों के बीच रस्सी से लटका कर या नीचे बजरी पर रखे गए अलग–अलग आइटम, भरी गर्मी में मसूरी तक आने वाले पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
इस विषय में बात करने के लिए हमने एक कालीन बेचने वाले इरकान से बात करी। इरकान के परिवार मे 10 लोग है वह बताते हैं, ‘हम सभी माधवसिंह गांव, बंदायूं ,यूपी के रहने वाले हैं। पिछले 30-32 साल से देहरादून आकर यहीं बस गए हैं और कालीन का बिजनेस करने लगे। गर्मी आते ही मैदानी क्षेत्रों में यह काम नहीं चलता तो हम यहां 2 महीनों के लिए दुकान लगा लेते हैं।’

सुबह 10 बजे से शाम के 6 बजे तक कारपेट बेचने वाले दिन में 100 से लेकर 2 हजार तक कमा लेते है। अच्छें रंग, खूबसूरत डिजाईन, और अलग-अलग आकार और साइज में उपलब्ध यह कारपेट आने जाने वाले पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।हालांकि इनमे से बहुत से ऐसे हैं जो कवल दाम पूछ कर निकल जाते हैं लेकिन कुछ ऐसे भी है जो इनको खरीदते हैं। बातचीत के दौरान हमें एक खरीदार भी मिली जो हैदराबाद से थी उन्होंने हमे बताया कि इतनी अच्छी वेरायटी, इतने कम दामों में शहरों के बड़े-बड़े माल में नहीं मिलेंगी।यह एक ऐसी डील है जिसको लेने में फायदा ही फायदा है।
इसलिए अगर अगली बार आप मसूरी की रुख करें तो एक कारपेट जरुर खरीदें जो आपके लिए फायदे का सौदा तो होगा ही साथ में आपके खूबसूरत घर में यह चार चांद भी लगा देगा।
सामूहिक आर्थिक सहायता से अनाथ बालिका का विवाह
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने भानियावाला में एक स्थानीय वैडिंग प्वाईंट में क्षेत्र के निवासियों द्वारा आयोजित बालिका दीपा के विवाह समारोह में सम्मिलित हुए। उल्लेखनीय है कि अनाथ बालिका दीपा पुत्री स्वर्गीय रमेश तथा बाॅबी का विवाह ग्रामीण क्षेत्र के निवासियों द्वारा सामूहिक सहायता से करवाया गया। मुख्यमंत्री निवासियों के निमंत्रण पर उक्त विवाह समारोह में सम्मिलित होने पहुंचे।
मुख्यमंत्री रावत ने वर-वधू को आर्शीवाद दिया तथा उनकें मंगलमय वैवाहिक जीवन की कामना की साथ ही साथ मुख्यमंत्री ने कहा कि भानियावाला ग्रामीण क्षेत्र के लोगों द्वारा सामूहिक आर्थिक सहायता द्वारा अनाथ बालिका का विवाह करवाने का प्रयास समाज के लिए आदर्श तथा प्रेरणास्रोत है। दीपा का विवाह करवाकर स्थानीय लोगों ने मिसाल कायम की है। इससे यह भी संदेश मिलता है कि माॅं बाप की अनुपस्थिति में समाज मजबूती से अभिभावक की भूमिका निभाता है।
दीपा के अपने माॅ पिता नहीं है तो क्या, समाज ने उसे अकेले नहीं छोड़ा, उसका विवाह करा जन कल्याण और वसुधैव कुटुम्बकम् की धारणा को सिद्ध किया। इस प्रकार के प्रयासों को प्रोत्साहन देना चाहिए।




























































