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आपरेशन स्माइल के तहत आठ बच्चे मिले

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नेपाल का बालक कुंडा थाना क्षेत्र के ग्राम गोविंदपुर, काशीपुर में मिला। पुलिस ने एक जून से ऑपरेशन इस्माइल अभियान चला रखा है। इसके तहत अभी तक 8 बच्चे मिले चुके हैं। कुंडा पुलिस को ग्राम गोविंदपुर स्थित गुरुद्वारा के पास नौ साल का बालक मिला। पूछताछ में बालक ने अपना नाम जीवन, पुत्र राम सिंह बताया। बताया कि वह ट्रक में 8 जून को काशीपुर आया था और बुधवार रात एक वाहन में सो गया और यहां वाहन चालक ने उसे छोड़ दिया। वह कक्षा दो में पढ़ता है, बालक इससे ज्यादा नहीं बता पाया। कुमाऊं सेवा समिति की परियोजना निदेशक जया मिश्रा ने बताया कि चाइल्ड लाइन की टीम कुंडा थाने भेजी गई थी।

मिश्रा ने बताया कि नेपाल की माइटी नामक संस्था के साथ उनकी समिति का टाइअप है। जब माइटी से मोबाइल पर संपर्क किया गया तो नवीन ने बालक का जो पता बताया था, वह गलत पाया गया है। इससे मामला संदिग्ध लग रहा है, बाल कल्याण समिति के निर्देश पर चाइल्ड लाइन में बालक को रखा गया है। जब तक बच्चे का सही पता नहीं चल पाता है, तब तक यहां पर बच्चे को रखा जाएगा। लगता है कि घर में काम कराने के लिए बालक को नेपाल से लाया गया है। पूछताछ में भाषा की समस्या आ रही है। बच्चा हिंदी नहीं बोल पा रहा है, फिलहाल बच्चे का सही पता कराया जा रहा है।

डगर कठिन पर हौंसले की मिसाल है मल्लिका विर्दी

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मन में कुछ कर गुजरने की हसरत हो तो कोई भी डगर कठीन नहीं होती, जरुरत है तो सिर्फ दृड़ निश्चय करने की। कुछ ऐसे ही दृड़ निश्चय से पर्यावरण के प्रति संकल्प लेने वाली पंजाब की बेटी ने उत्तराखण्ड के पिथौरागढ़ के दुर्गम पहाडी क्षेत्रों को संवारने का बीड़ा उठाया और हरियाली से विमुख हो चुके वनों को फिर से हरा बनाने के लिए काम शुरु किया। साथ ही लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरुक करके आज वनों को हरियाली से लवरेज करने का श्रेय भी पंजाब कि इस बेटी को मिलता है। कौन है ये पंजाब कि बेटी और कैसे आया पहाडों को संवारने का ख्याल पढिये यंहा।

पहाड़ का पर्यावरण संवारने का बीड़ा पंजाब की बेटी व केरल की बहू मल्लिका विर्दी ने उठा रखा है। मनोरंजन के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का उनका अनूठा प्रयास रंग ला रहा है। उनकी मुहिम से ग्रामीणों का लगाव जंगल के प्रति बढ़ने लगा है। नतीजा, क्षेत्र में वृक्षविहीन हो चुके कुछ स्थल अब घने जंगल में तब्दील हो गए हैं। मुनस्यारी में पिछले एक दशक में पर्यटकों की आवाजाही खासी बढ़ी है। इसी के साथ बढ़ता चला गया कंक्रीट का जंगल और घटती चली गई हरियाली। इसी दौर में पंजाब की बेटी मल्लिका विर्दी यहां पर्यटक के रूप में पहुंची। यहां की स्थिति देख उन्होंने मुनस्यारी से सटे सरमोली गांव को संवारने की जिम्मेदारी उठाई।

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इसी दौरान उनकी मुलाकात केरल निवासी पर्यावरण प्रेमी थियो से हुई। थियो के साथ शादी के बाद मल्लिका ने मुनस्यारी में ही घर बसा लिया। तब से वह लोगों को  जल-जंगल के प्रति जागरूक कर रही हैं। उन्होंने यहां के लोगों को होम स्टे के प्रति भी प्रेरित किया। आज मुनस्यारी में सौ से अधिक लोग होम स्टे के माध्यम से आत्मनिर्भर बन चुके हैं। होम स्टे पर्यटकों से गुलजार रहते हैं। इसकी परिणति यह हुई कि सरमोली के ग्रामीणों ने अपनी बेटी की तरह मल्लिका को सिर-आंखों पर बैठा लिया।

यही नहीं, उन्होंने मल्लिका को 2007 में गांव का सरपंच भी चुना। यहीं से शुरू हुई मल्लिका विर्दी की दूसरी पारी।  उन्होंने जंगल, वन्य जीव व पक्षियों के संरक्षण के लिए वन कौथिग (जंगल मेला ) शुरू  किया, जिसका पिछले 11 साल से मई में नियमित रूप से आयोजन हो रहा है। हर वर्ष कौथिग में विषय भी बदल जाते हैं और त्यौहार भी। कभी पक्षी त्यौहार तो कभी स्थानीय खानपान विषय होते हैं।  पर्यावरण को लोक प्रदर्शन के साथ जोड़कर उसे आकर्षक बनाया जाता है। गुजरे वर्ष तितलियों के संरक्षण के लिए तितली त्यौहार मनाया गया।

तीन ग्राम पंचायतों के लगभग दस गांवों के लोग वन कौथिग मनाते हैं। इस दौरान वह ग्राम पंचायत व वन विभाग की भूमि पर पौधे भी रोपते हैं।वसरपंच रहने के दौरान जब जंगल में श्रमदान से चल रहा कार्य संपन्न हुआ तो मल्लिका को मन में वन कौथिग के विचार ने जन्म लिया। इसके तहत ग्रामीणों से वार्ता कर प्रतिवर्ष वन कौथिग मनाने का निर्णय लिया गया। एक दशक के मध्य वन कौथिग की ऐसी धूम रही कि अब लोग एक माह पूर्व से ही इस मेले की तैयारियों में जुट जाते हैं।

कौन है मल्लिका
दिल्ली विश्वविद्यालय से एमफिल की पढ़ाई पूरी करने के बाद मल्लिका विर्दी ने प्रोफेसर-अध्यापक बनने का सपना छोड़कर पिथौरागढ़ जिले का रुख कर लिया और वहां सरपंच बनने के बाद उन्होंने महिला अधिकारों की लड़ाई लड़ी तथा पहाड़ी समाज में जागरूकता फैलाई। उन्होंने इको टूरिज्म को बढ़ाने में स्थानीय लोगों को सहयोग दिया।

हरिद्वार में पुलिस ने जमीन खोद के निकाली शराब की पेटियां

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धर्मनगरी में शराब तस्करी का अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहां सरकारी अस्पताल में गड्ढे में शराब तस्करों ने शराब की पेटियां छिपाई हुई थी। इतना ही नहीं अस्पताल से सटे राजाजी नेशनल पार्क के जंगल से भी पुलिस ने लोहे का ट्रंक बरामद किया। दोनों जगह से पुलिस ने कुल 21 पेटी शराब बरामद की है। वहीं, मामले में अस्पताल कर्मियों की मिलीभगत से भी इन्कार नहीं किया जा रहा है।

हरिद्वार के नगर निगम क्षेत्र में शराब पर प्रतिबंध है। बावजूद इसके आए दिन शराब तस्करी के मामले शहर में सामने आ रहे हैं। शराब तस्करी के मामले ने पुलिस को भी हैरत में डाल दिया। पुलिस को किसी ने सूचना दी कि मेला अस्पताल और राजाजी नेशनल पार्क में तस्करों ने गड्ढे में शराब छुपाकर रखी है।

इस पर पुलिस ने दोनों स्थानों पर कार्रवाई करते हुए मेला अस्पताल के गटर में छुपा कर रखी गई शराब की पेटियां बरामद की। कोतवाली निरीक्षक चंद्रभान सिंह ने बताया कि इसके बाद राजाजी पार्क में भी जमीन के अंदर ट्रंक में छुपाई गई शराब की पेटियां बरामद की गई।

 

आपदा से बचाने के लिये सरकार करेगी गांवों को “रीलोकेट”

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उत्तराखंड सरकार ने आपदा के लिहाज से संवेदनशील गांवों को विस्थापिकत करने की तैयारी कर ली है। इस बारे में गुरुवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जिलाधिकारियों से बात की। इस प्राॅजेक्ट के पहले चरण में हर जिले से कुछ गांवों को चिह्नित किया गया है। इसके बाद इनके विस्थापन से जुड़ी प्रक्रिया शुरू की जायेगी। सरकार की इस कदम से करीब 400 ऐसे गांवों को विस्थापित करना है जो आपदा के लिहाज से अति संवेदनशील हैं और आपदा आने के समय में न सिर्फ वहां जान और माल का नुकसान ज्याद होने की संभावना है बल्कि दुर्गम इलाकों में होने के कारण वहां राहत और बचाव कामों में भी परेशानी हो सकती है।

इस प्रक्रिया में

  • 31 परिवारों वाले बागेशवर के 73 गांव
  • पिथौरागड़ के 21 गांव जिनमे 582 परिवार रहते हैं
  • 158 परिवार वाले नैनीताल के 3 गांव
  • 84 परिवार वाले अलमोड़ा के 3 गांव
  • 638 परिवार वाले उत्तरकाशी के 11 गांव
  • 507 परिवार वाले टिहरी के 8 गांव
  • 92 परिवार वाले रुद्रप्रयाग के 7 गांव
  • 888 परिवार वाले चमोली के 17 गांवों की पहचान की गई है।

इसके लिये एक डीटेलड प्राॅजेक्ट रिपोर्ट भी राज्य सरकार को दे दी गई है।इस प्राॅजेक्ट से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इस काम में लागत तो ज्यादा आयेगी ही लेकिन साथ ही साथ इतनी बड़ी तादाद में लोगों को विस्थापित करना अपने आप में आसान काम नही होगा। मुआवजे की रकम तय करने के साथ साथ इन परिवारों के लिये नये आशियाने तलाशना भी सरकार के लिये आसान नहीं होगा। राज्य के मैदानी जिलों मे ंपहले से ही जमीन की कमी हैं और पहाड़ी इलाकों में वन विभाग आदि से हरी झंडी लेना आसान काम नहीं होगा।

 

मिस इंडिया प्रतियोगी अनुकृति ने इन उत्तराखंडी व्यंजनों से जीता जजों का दिल

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अनुकृति गुसाईं शुरु से ही मिस इंडिया प्रतियोगिता में उत्तराखंड के जलवे बिखेर रही हैं।पहले उन्होंने पहाड़ी पोशाक से जजों का दिल जीता फिर पहाड़ी व्यंजन से। मिस इंडिया उत्तराखंड अनुकृति गुसाईं ने गढ़वाल की मशहूर डिश चौंसा और कुमाऊं की डिश झोली बनाकर मिस इंडिया 2017 के कुकिंग सब कांटेस्ट में जजों का दिल जीत लिया। जजों ने अनुकृति की बनाई इस डिश की काफी वाह-वाही की।

मुंबई में चल रही मिस इंडिया प्रतियोगिता में बुधवार को कुकिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। इसमें हर स्टेट के प्रतिभागी को अपने राज्य की डिश बनानी थी।

अनुकृति ने बताया कि जब मुझे इस कांटेस्ट के बारे में पता चला तो मैंने गढ़वाल में मशहूर चौंसा और कुमाऊं की झोली बनाने का निर्णय लिया। इसके साथ ही झंगोरे की खीर में जजों को परोसने का फैसला किया। पर, मेरे सामने सबसे बड़ी समस्या थी कि मुंबई में झंगोरा कहां से लाऊं, लेकिन यहां रहने वाले गढ़वाली लोगों ने मेरी मदद की।

उन्होंने बताया कि जब मैंने यह डिश बनाकर परोसी तो कुकिंग सब कांटेस्ट के जज रोहित खंडेलवाल और मिस इंडिया 2016 प्रियदर्शिनी चटर्जी ने इसकी काफी तारीफ की। दोनों ने मुझसे इसकी रेसिपी भी पूछी। अनुकृति की मां कुमाऊं से और पिता गढ़वाल से ताल्लुक रखते हैं। मिस इंडिया प्रतियोगिता का ग्रैंड फिनाले 25 जून को मुंबई में होगा।

 

उत्तराखंड आपदा के चार साल: पटरी पर लौटती चारधाम यात्रा

उत्तराखंड में आई 2013 की आपदा को चार साल बीत चुके है लेकिन आज भी आपदा के वो जख्म हरे हैं। 2013 के बाद जहाँ एक तरफ उत्तराखंड में यात्रा पर एक ब्रेक सा लग गया था तो वहीँ पर्यटन पर भी इसका बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ा। बड़ी संख्या में गाँव के गाँव खाली हैं। हालात जस के तस बने हुए हैं। उत्तराखंड में आई आपदा से सबसे बड़ा असर अगर पड़ा है तो वो यहाँ के इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ साथ यहाँ के मुख्य व्यवसाय पर्यटन और परिवहन पर पड़ा। लेकिन जिस तरह से पिछले दो सालों में यात्री पहुंचे उससे एक बार फिर प्रदेश में पर्यटन वापस पटरी पर आना शुरू हो गया है। 2017 में तो रिकॉर्ड तोड़ यात्री चार धाम यात्रा में दर्शन करने पहुंचे रहे हैं।  चार धाम यात्रा पर अब यात्रियों का विश्वास साफ़ देखा जा सकता है लेकिन फिर भी आज का दिन उस त्रासदी को याद दिला देता है। आपदा के दंश झेल रहे उत्तराखंड में आपदा के चार साल बाद भी जिंदगी को पटरी पर लाने की जद्दोजहद जारी है। आज भी आपदा के जख्म हरे हैं और कई ऐसे गांव जो आपदा के कारण अपनी पहचान खो गए थे आज भी वहां जीवन को दोबारा नहीं बसाया जा सका है। हांलाकि 2017 की चार धाम यात्रा उम्मीद लेकर आई है जिससे मायूसी के 4 साल बीतने का संकेत मिलने लगे हैं। व्यापार ने तेज़ी पकड़ी है और यात्रा में लोगो का विश्वास बना है।

चार धाम यात्रा के लिए ऋषिकेश पहुँच रहे यात्री व्यवस्थाओं को लेकर खुश हैं। उनका मानना है की 2013 के बाद व्यवस्थाओं में काफी सुधार हुआ है जिससे लोग विश्वास के साथ चार धाम यात्रा में आ रहे है। चार धाम यात्रा उत्तराखंड में पर्यटन का मुख्य साधन है, हालाँकि आपदा के बाद प्रदेश में पर्यटन ठप पड़ गया था लेकिन 2017 की यात्रा पर्यटन की दृष्टि से काफी अच्छी रही। इस बार चार धाम यात्रा में यात्रियों की संख्या ने पहले के कई रिकॉर्ड तोड़े। यदि यात्रा के अब तक के आंकड़ों की बात की जाए तो अभी तक यह आंकड़ा 15 लाख के पार पहुँच चुका है। यात्रा में बढ़ी यात्रियों की संख्या से पर्यटन को एक नई गति मिली है जिसने आपदा के जख्मों पर मरहम का काम किया है।  

उत्तराखंड की त्रासदी जनहानि के साथ साथ यहाँ के इन्फ्रास्ट्रक्चर को भी पूरी तरह से तबाह कर गयी थी। सबसे बड़ी मार यहाँ के पर्यटन और ट्रेडिंग उद्योग पर पड़ी है जो पूरी तरह से यात्रा पर निर्भर करता था। आपदा के 4 साल बाद हालात काफी सुधरे और इसका प्रमुख कारण है की इस साल चार धाम यात्रा में रिकॉर्ड तोड़ यात्री आये हैं। राज्य की अर्थव्यवस्था की बेहतरी के लिये उम्मीद यही की जायेगी कि ये ट्रेंड आने वाले सालों में ऐसा ही रहे।

रामनगर में सिंचाई विभाग की लापरवाही से हजारों मछलियां मरी

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कोसी बैराज का गेट खोलने से हजारों मछलियां बह गई। इस दौरान नदी के कम पानी में मछलियों ने तड़पकर दम तोड़ दिया। वन विभाग की नाराजगी के बाद सिचाईं विभाग ने गेट को फिर से बंद करा दिया। सिचाईं विभाग ने गेट नंबर एक में मरम्मत का कार्य कराना था। कर्मचारियों ने गेट खोला तो पानी में मौजूद हजारों मछलियां बह गई।

आगे नदी में पानी फैलने से मछलियां मरने लगी। गेट खोलने की जानकारी मिलने पर वन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने गेट बंद करा दिया। साथ ही क्षेत्र के लोग भी नदी में पहुंच गए। लोग मछलियां नदी से उठाकर ले गए। इस घटना से नाराज वन विभाग सिचाईं विभाग के अधिकारियों के खिलाफ केस काटने की तैयारी कर रहा है।

बद्री-केदार मंदिर समिति को भंग करने पर हाई कोर्ट का दोबारा स्टे

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बद्रीनाथ केदार नाथ समिति के मामले में उत्तराखंड सरकार को एक बार फिर हाई कोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने एक बार फिर सरकार के समिति कोे भंग करने के फैसेल पर स्टे लगा दिया है। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने अप्रैल के महीने में बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति को भंग कर दिया था। इसके बाद समिति के कुछ सदस्य कोर्ट पहुंचे और कोर्ट ने 30 मई को राज्य सरकार को समिति को बहाल करने के आदेश दिये थे। हांलाकि 8 जून को सरकार ने स्पेशल क्लाॅज का हवाला देते हुए समिति को दोबारा भंग कर दिया था। हाई कोर्ट ने गुरुवार को इस पर स्टे लगा दिया।
राज्य सरकार ने समिति एक्ट के क्लाॅज 2 ए, सेक्शन 11 का हवाला देते हुए इसे दोबारा भंग किया था। भंग करने करने के प्रमुख कारणों में से एक था सात मनोनीत सदस्यों का चयन जो कि सरकार के अनुसार समिति के संविधान के सेक्शन 5 के तहत नहीं हुआ। हांलाकि याचिकाकर्ता ने दलील दी कि ये कारण वैध नहीं है और समिति के किसी भी काम काज पर आज तक कोई विवाद नहीं खड़ा हुआ है।
गौरतलब है कि कांग्रेस सरकार के समय गठित हुई समिति में ज्यादातर सदस्य और पदाधिकारी कांग्रेस से ताल्लुक रखते हैं जिसमें सबसे पहले समिति के चेयरमैन उस समय के कांग्रेसी विधायक गणेश गोदियाल हैं।

ऋषिकेश डबल मर्डर पुलिस ने सुलझाया

ऋषिकेश में गुरुवार को उस समय सनसनी फैल गई जब श्यामपुर पुलिस चौकी के पास रहने वाली एक महिला की दो मासूम बेटियों की अज्ञात लोगों ने गला घोट कर निर्मम हत्या कर दी। इससे क्षेत्र में दहशत बनी हुई है। महिला श्रमिक सीता देवी आज सुबह आठ बजे काम पर गई थी। घर वापस आकर देखा तो कमरे में दोनों बच्चियां मृत मिली। दोनों मासूमों में एक 13 साल की थी और एक 4 साल की। सूचना पाकर एसपी देहात सरिता डोभाल कोतवाली प्रभारी एसपी निहारिका भट्ट घटनास्थल पर पहुंचे। देहरादून से फॉरेंसिक एक्सपर्ट की टीम बुलाई गई। पुलिस ने बताया कि महिला का पति सूरज किसी मामले में फिलहाल सुद्धोवाला जेल में है।

फौरेंसिक टीम द्वारा घटनास्थल की जांच करने के बाद ऐसा लग रहा था कि मृतका ने अपने बचाव के लिये काफी संघर्ष किया था। फौरंसिक टीम ने मौके पर मिले सफेद बालों और दीवार, गद्दे आदि पर लगे खून एवं खून लगे कपड़ों को जांच  के लिये कब्जे में लिया । बच्चियों की मां ने बताया कि दोनो बेटियां शौच व नहाने धोने के लिये गुरूद्वारे में जाती थी इस कारण गुरूद्वारे में काम करने वाला सेवक सरदार परवान सिंह बच्चियों को तंग व परेशान करता था।

IMG-20170615-WA0005सन्देह के आधार पर सरदार परवान सिंह से पूछताछ की गयी तो सरदार परवान सिंह की हथेली पर दांत के कटे का निशान व मांस उखड़ा, और बांयी आंख के नीचे नाखुनों की खुरच के निशान मिले।सख्ती से पूछताछ करने पर सरदार परवान सिंह ने अपना गुनाह कबूल कर लिया। उसने कहा कि सुबह मैने नहाते समय अपनी पगड़ी उतारकर किनारे रखी तो बड़ी लड़की मनीषा ने मेरी पगड़ी में लात मारी, जिससे मुझे गुस्सा आ गया। थोड़ी देर बाद वो बच्चो के घर गया। उसने बड़ी लड़की मनीषा की हाथ से गला दबाकर हत्या कर दी तथा छोटी बच्ची के शोर करने पर मैने उसे भी वहां पास में पड़ी बैल्ट से गला दबाकर मार दिया और मैं वहां से चला गया।
परवान सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसे कोर्ट में पेश किया जायेगा। निहारिका भट्ट की अगुवाी में बनी पुलिस टीम ने कुछ घंटों में ही इस केस को सुलझा कर काबिले तारीफ काम किया है।

एम्स प्रवेश परीक्षा में ऋतिक बने उत्तराखंड टाॅपर

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एम्स में एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा का परिणाम बुधवार देर रात जारी कर दिया गया। उत्तराखंड से ऋतिक चौहान ने परीक्षा में 55 वीं रैंक हालिस कर स्टेट टाप किया है।

जवाहर लाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (जिपमर) की मेडिकल प्रवेश परीक्षा में भी ऋतिक चौहान ने ऑल इंडिया 41वीं रैंक हासिल की है। ऋतिक ने गत वर्ष सेंट थॉमस स्कूल से 12वीं पास की है।

अविरल क्लासेज के निदेशक डीके मिश्रा ने बताया कि ऋतिक ने इसके बाद से उनके संस्थान में कोचिंग शुरू की। पहली बार उत्तराखंड का कोई छात्र जिपमर में चयनित हुआ है। यह अविरल क्लासेस के साथ पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने बताया कि ऋतिक मेधावी छात्र है। उन्होंने संभावना जताई है कि आने वाली मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में भी ऋतिक अच्छा प्रदर्शन करेगा। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में एमबीबीएस दाखिलों के लिए 28 मई को हुई प्रवेश परीक्षा में देहरादून से 1700 से ज्यादा अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था।

कंप्यूटर आधारित इस परीक्षा को कठिनतम मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में गिना जाता है। रिजल्ट आने के बाद तीन से छह जुलाई के बीच दाखिलों को पहले चरण की काउंसिलिंग आयोजित की जाएगी। एम्स की 700 सीटों पर दाखिले का मौका मिलेगा।