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बिना खाने के जंगल में सरवाइवल के गुर सीखेगी उत्तराखंड पुलिस

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उत्तराखंड पुलिस को जंगल सर्वाइवल के लिये ट्रेन किया जायेगा। इसके तहत पुलिस कर्मियों को टुकड़ियों में एक सप्ताह तक बिना राशन पानी के जंगलों में भेजा जाएगा। इन्हें अपनी जिंदगी बचाने के लिए कुछ उपकरण दिए जाएंगे ताकि ये खुद ही जंगलों में अपने भोजन पानी की व्यवस्था करने के साथ ही खुद को सुरक्षित रख सकें।

उत्तराखंड का 71 प्रतिशत इलाका जघने जंगलों से बना है। पिछले कुछ सालों से देखा गया है कि जंगल अपराधियों के छुपने का जरिया बनते जा रहे हैं। खासतौर पर माओवादी गतिविधियों के जंगलों में संचालित होने की खबरें तेजी से सामने आ रही हैं। वन तस्करों का तो काम करने का इलाका ही ऐसे घने जंगल हैं। पुलिस महानिदेशक एमए गणपति का कहना है कि “मौजूदा समय में पुलिस को जंगल ट्रेनिंग की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इस लिए यह कदम उठाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगले दस दिनों के भीतर यह ट्रेनिंग शुरू करा दी जाएगी।”

अपराधियों का जंगल में आना-जाना लगा रहता है इस कारण वे पुलिस को आसानी से चकमा देने में सफल रहते हैं। जंगलों के हालातों से अंजान पुलिस फोर्कीस के लिये इन जंगलों में जाना और अपराधियों को पकड़ना टेढ़ी खीर साबित हो जाता है।

इस वजह से दिन में ही जंगलों में काॅंबिंग करना पुलिस की मजबूरी बन जाता है।और इसका फायदा एपराधी जुर्म को अंजाम दे भागने में उठाते हैं। अब पुलिस का मकसद ऐसे जवान तैयार करना है जो कुछ दिनों तक जंगलों में अपराधियों की खोजबीन कर सकें।इसके लिए पुलिस मुख्यालय अब पीएसी की तीन और आइआरबी की दो कंपनियों में से तीस-तीस की टुकड़ी में पुलिस कर्मचारियों को प्रशिक्षण देगा। पीएसी की 31वीं वाहिनी को ऊधमसिंह नगर, 46वीं वाहिनी को नैनीताल, 40वीं वाहिनी को हरिद्वार, आइआरबी वन को अल्मोड़ा व आइआरबी-टू को देहरादून के जंगलों में प्रशिक्षण दिया जाएगा।

इन टुकड़ियों को प्रशिक्षण के दौरान पौंछू, ड्रेगन ड्रेगर, छोटे कांटे, बरसात में जलने वाली माचिस, चकमक पत्थर, जूते, सोलर पैनल व फस्र्ट एड किट आदि दिया जाएगा। पुलिस मुख्यालय की ओर से इन दिनों इन उपकरणों की खरीद चल रही है। एक सप्ताह में यह खरीद पूरी होने की उम्मीद है।

पंतनगर विश्वविद्यालय से खेती की शिक्षा लेंगे विदेशी

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इंडो-फ्रेंच एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत फ्रांस का एक आठ सदस्यीय दल पंतनगर विश्वविद्यालय पहुंचा है। यह दल एक महीने तक यहां कृषि संबंधी जानकारी लेगा। दल में फ्रांस के कृषि संस्थानों के तीन प्रोफेसर एवं पांच विद्यार्थी शामिल हैं। इस एक्सचेंज प्रोग्राम के अंतर्गत अभी तक 27 विद्यार्थी पंत विश्वविद्यालय से फ्रांस के संस्थानों में भ्रमण एवं अध्ययन तथा 45 विद्यार्थी फ्रांस से पंत विश्वविद्यालय में अध्ययन कर चुके हैं।

फ्रांस से आए प्राध्यापक एवं इंडियन कोऑर्डिनेटर जौ क्रस्टोफ, प्रो. क्रस्टोफ कोरिल एवं प्रो. विन्शन ने विवि के अंतरराष्ट्रीय कृषि महाविद्यालय में कुलपति डा.जे.कुमार एवं अधिष्ठाताओं के साथ बैठक कर इंडो फ्रेंच एक्सचेंज प्रोग्राम को और अधिक प्रभावशाली बनाने के उपायों पर चर्चा की।

बैठक में निर्णय लिया गया कि नवंबर 2017 में पंत विश्वविद्यालय के स्थापना सप्ताह के आयोजन में फ्रांस के विभिन्न कृषि संस्थानों के निदेशक एवं प्राध्यापकों का 20 सदस्यीय दल भाग लेगा तथा जनवरी-फरवरी 2018 में पंत विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों का एक दल फ्रांस जाकर संस्थानों का भ्रमण करेगा। कुलपति डा. जे. कुमार ने इस इंडो-फ्रेंच एक्सचेंज प्रोग्राम को विवि का सबसे सफल एक्सचेंज प्रोग्राम बताया है।

बैठक के बाद फ्रांस से आए प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों के दल ने सिडकुल स्थित इंडो-फ्रेंच कम्पनी, रौकेट रिद्धि-सिद्धि प्रा.लि. का भ्रमण कर कंपनी द्वारा बनाए जा रहे उत्पादों की जानकारी ली। अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय डा. एनएस मूर्ति ने समस्त विभागाध्यक्षों एवं नोडल अधिकारी कृषि महाविद्यालय, इंडो-फ्रेंच एक्सचेंज प्रोग्राम डा. एसएन तिवारी के साथ फ्रास से आए दल का स्वागत करते हुए बताया कि फ्रांस से आए 5 विद्यार्थियों में से 4 विद्यार्थी स्नातक द्वितीय वर्ष फूड साइंस एवं टेक्नोलॉजी तथा एक विद्यार्थी प्रक्षेत्र प्रबंधन का है, जो कृषि महाविद्यालय में आगामी एक माह तक अध्ययन एवं भ्रमण करेंगे।

साथ ही उन्हें विवि के आसपास के उद्योगों एवं कृषकों के प्रक्षेत्रों का भी भ्रमण कराया जाएगा। विद्यार्थियों में अजिज, लूइस, लूआ, मारगो एवं समीरा हैं। ज्ञात हो कि इंडो फ्रेंच एक्सचेंज प्रोग्राम वर्ष 2006 में पंत विश्वविद्यालय के मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय ने प्रारंभ किया।

देहरादून समेत राज्य के 5 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी

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मौसम के करवट बदलने के साथ ही उत्तराखंड में वर्षा का क्रम शुरू हो गया। पिथौरागढ़ जिले के तमाम हिस्सों में जोरदार बारिश हुई। इस दौरान डीडीहाट में दीवार ढहने से मलबा एक घर की छत पर आ गिरा, जिससे अफरातफरी मच गई। हालांकि, घर को मामूली नुकसान पहुंचा। वहीं चंपावत, चमोली और देहरादून जनपदों में कहीं दोपहर बाद तो कहीं शाम को झमाझम बौछारें पड़ीं।

उधर, मौसम विभाग के मुताबिक राज्य में अधिकांश स्थानों में हल्की से मध्यम वर्षा हो सकती है। देहरादून, चमोली, रुद्रप्रयाग, नैनीताल और पिथौरागढ़ जिलों में कुछ स्थानों पर भारी वर्षा की चेतावनी भी जारी की गई है।

राज्यभर में कहीं आंशिक तो कहीं आमतौर पर बादलों की मौजूदगी बनी रही। पिथौरागढ़ जिले के डीडीहाट में गैस गोदाम रोड पर बारिश के दौरान एक पेड़ के उखड़कर गिरने से सुरक्षा दीवार ढह गई। इसके मलबे के साथ ही पेड़ का एक हिस्सा एक घर की दीवार पर गिरा। इससे दीवार को आंशिक रूप से नुकसान पहुंचा।

इस दौरान घर के भीतर मौजूद परिजनों के चीखने चिल्लाने पर पास स्थित एसएसबी क्वार्टर से जवान मौके पर पहुंचे और उन्होंने पेड़ व मलबा हटाया।

 

दून में यहां मिलेगा पारंपरिक पहाड़ी खाना नये अंदाज़ में

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पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी यहीं के काम आए इससे अच्छा कुछ हो भी नहीं सकता। ऐसे ही कुछ लोग इस युक्ति को सच कर रहे हैं।यूं तो पलायन उत्तराखंड राज्य की बड़ी समस्या है लेकिन अभी भी बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्होंने बड़ी डिग्रियों के बाद भी पहाड़ को आगे बढ़ाने का सपना देखा और उसपर काम कर रहें हैं।

देहरादून में खाने के शौकिन लोग जरुर इसको पढ़ेगे। मसूरी डायवर्जन पर बनी ”पेसिफिक हिल्स” की बिल्डिंग अपने थीम बेस्ड आउटलेट के लिए जानी जाती है। इसी कड़ी में एक थीम बेस्ड आउटलेट है ”देसी चूल्हा”। जी हां नाम से ही देसी लगने वाला यह आउटलेट अपने खाने के जरिए आपको पहाड़े के स्वादिष्ट भोजन की याद दिला देगा। देसी चूल्हा के मालिक से कुछ खास बातचीत के अंश यहां पढ़ें।

सुरेंद्र अंथवाल

घंसाली टिहरी के पास बसे अंथवाल गांव के 28 साल के सुरेंद्र दत्त अंथवाल ने बिजनेस मैनेजमेंट यानि की एमबीए किया है। वह देसी चूल्हा के मालिक हैं। पेशे से एक बिजनेसमैन है और उनके शौक के बारे में पूछने पर सुरेंद्र ने बताया कि उन्हें बिजनेस करने के अलावा,कुछ नया करना,घूमना फिरना और हमेशा कुछ अलग करना पसंद है। एक बिजनेस बैकग्राउंड होने की वजह से सुरेंद्र हमेशा से एक पैसे वाला व्यापारी बनने की चाह रखते थे। लेकिन समय के साथ उन्होंने महसूस किया कि जिंदगी में पैसा होना सबकुछ नहीं होता बल्कि एक अच्छा सैटअप होना जरुरी है।कुछ ऐसा होना जिससे लोग आपको पहचाने और आपके काम की सराहना करें।

इस समय सुरेंद्र अपना सारा ध्यान अपने पसंदीदा रेस्टोरेंट देसी चूल्हा पर लगा कर रहें और इसके अलावा अपने दूसरे होटल और रेस्टोरेंट की देखरेख करते है। अपने सभी कामो में देसी चूल्हा उनके लिए खास है क्योंकि सुरेंद्र के मुताबिक कुछ ऐसा करना जो आपकी परंपरा और संस्कृति को जिवित करे उसका मज़ा ही अलग है।

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सुरेंद्र अपनी संस्कृति को दूर-दूर तक लोगों में पहुंचाना चाहते है और इसके लिए उन्होंने काम करना शुरु कर दिया है। भविष्य में देसी चूल्हा को लेकर उनके क्या प्लान है के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि ”अब मैं देसी चूल्हा की फ्रेंचाइजी यानि की शाखाएं खोलने की सोच रहा हूं ”। उत्तराखंड के अलग-अलग शहरों जैसे कि नैनीताल, ऋषिकेश, हरिद्वार,श्रीनगर, और बहुत सी जगहें सुरेंद्र के दिमाग में है जहां देसी चूल्हा को खोला जा सकता है।उत्तराखंड तो केवल शुरुआत है वह इस काम को पूरे देश में भी फैलाना चाहते हैं। इसके अलावा सुरेंद्र ने बताया कि देसी चूल्हा को यूरोप में खोलने के लिए भी उनकी बात किसी से हो रही जैसे ही यह फाइनल होगा वह इसकी जानकारी देंगे।

सुरेंद्र से यह पूछने पर कि उन्होंने देसी चूल्हा रेस्टोरेंट ही क्यों चुना। उन्होंने बताया कि दो साल पहले जब उन्होंने अपने बड़े भाई का होटल और रेजार्ट का बिजनेस ज्वाइन किया तब उन्होंने सोचा कि हर राज्य का कुछ मशहूर खाना होता है।लेकिन हमारे राज्य में यह मशहूर खाना कहीं नहीं मिलता।आधे से ज्यादा आउटलेट पर चाइनिज,स्पेनिष,साउथ इंडियन और तरह तरह के फूड आइटम मिलते हैं। लेकिन उत्तराखंड में रहकर उत्तराखंडी खाना मिलना मुश्किल होता है।बस इसी सोच के साथ सुरेंद्र और उनके भाई ने मिलकर देसी चूल्हा को शुरु किया।आज देसी चूल्हा उत्तराखंड राज्य के विशेष खाने को लोगों के बीच लेकर आया है और लोग उसे पसंद कर रहें हैं।

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सुरेंद्र से यह पूछने पर कि आपको अपने काम में बारे में सबसे अच्छी चीज क्या लगती है। इसपर उनका जवाब था कि शायद आने वाले कुछ सालों में पहाड़ी व्यंजन का स्वाद लोगों को भूल जाता और लोग अलग-अलग तरह के खानों की आदत डाल चुके होते। लेकिन मेरे प्रयास और मेहनत से इस समय हर कोई पहाड़ी खाने के बारे में जान रहा है और यह मेरे लिए बड़ी उपलब्धि है।बस यहीं करके मुझे सबसे ज्यादा खुशी मिलती है।

सुऱेंद्र का कभी ना भूलने वाला वो पल है जब वह देसी चूल्हा के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे।उनके परिवार का सर्पोट उन्हें हमेशा मिला लेकिन उनके माता मिता को कहीं ना कहीं यह डर था कि खाने के मेन्यू में केवल पहाड़ी क्यूजिन रखना कहीं सुरेंद्र को भारी ना पड़े।इसके अलावा उस दौरान कुछ दुकान के मालिकों ने उन्हें यह कहकर दुकान देने से मना कर दिया कि पहाड़ी खाने का कोई भविष्य नहीं है उन्हें चाइनिज या किसी और तरह के खाने का आउटलेट शुरु करना चाहिए।

इन सबके बाद आज सुरेंद्र अपने फूड आउटलेट देसी चूल्हा से बहुत खुश है और इसे और जगहों पर शुरु करने की सोच रखते हैं।देसी चूल्हा ना केवल पहाड़ी लोगों के बीच लोकप्रिय है बल्कि दूसरे राज्य से आए लोग भी इसको उतना ही पसंद करते हैं।बातचीत के दौरान आई विजीटर सीमा ने बताया कि ”मैं लखनऊ की रहने वाली हूं और मुझे तो देसी चूल्हा नाम ही बहुत पसंद आया और जब मैनें यहां का कंडाली का साग,मंडूएं की रोटी,रायता,झोली,चावल खाया तो यह मुझे और ज्यादा पसंद आया। सीमा कहती हैं कि महीने में एक बार यहां पहाड़ी खाना खाने जरुर आती हूं”। ऐसे बहुत से लोग है जिन्हें उत्तराखड की संस्कृति के बारे में कम जानकारी है ऐसे में देसी चूल्हा पहाड़ के खाने के माध्यम से लोगों में अपनी परंपरा को बनाए रखने का एक सराहनीय प्रयास है।

टीम न्यूजपोस्ट की तरफ से सुरेंद्र अंथवाल को उनके आगे आने वाले प्रोजेक्ट के ढेर सारी शुभकामनाएं और देसी चूल्हा के लिए बधाईयां ।

 

तो योग भी करेंगे फौज में भर्ती की तैयारी करने वाले छात्र

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देश के विशिष्ट योग आचार्यों के मार्गदर्शन में देहरादून में 21 जून की सुबह 9 से 11 बजे तक देश का अनोखा सैनिक योग समारोह होगा जिसे प्रदेश की प्रसिद्द योग आचार्य चन्द्राणी मोना सिन्हा आयोजित कर रहीं हैं। इसका उद्घाटन पूर्व सांसद तरुण विजय करेंगे।

उनका कहना है कि प्रत्येक सैनिक मुद्रा- चाहे वे हथियार उठा रहे हैं, गोली चला रहे हैं , दुश्मन पर निशाना साध रहे हैं- और विजय के बाद तिरंगा फहरा रहे हैं-हर मुद्रा योग का ही आसन है। योग उनको सफलता प्राप्त करने और विजय प्राप्त करने में मदद करेगा

इसमें मुख्यतः वे छात्र भाग ले रहे हैं जो फौज में भर्ती होने के लिए तैयारी कर रहे हैं और उनके साथ जनजातीय छात्र रहेंगे जो अन्य उत्तर और पूर्वांचल के राज्यों से यहां आएं हैं। यह कार्यक्रम लॉर्ड वेंकटरेश्वर कल्याण मंडपम, सचिवालय के सामने आयोजित किया जाएगा।

एक साथ 28 जोड़ों ने एक ही मंडप में रचाई शादी

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एक पंडाल के नीचे 28 दुल्हन हाथों में मेंहदी रचा कर बरात का इंतजार कर रही थी। तभी एक साथ 28 दूल्हे बरात लेकर वहां पहुंचे। फिर सभी 28 जोड़ो ने सात फेरे लेकर सात जन्मों तक साथ देने की कमम भी खाई। यह नजारा था देहरादून में श्री श्री बालाजी सेवा समिति की ओर से आयोजित सामूहिक विवाह सामारोह का। यहां 28 निर्धन कन्याओं का विवाह धूमधाम से कराया गया। समिति ने कन्याओं को जरूरत का सामान दान के रूप में दिया। वरमाला से लेकर फेरों तक मांगल गीत से पांडाल गुंजायमान रहा। इस मौके पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल, विधायक गणेश जोशी, खजानदास ने भी नव दपंतियों को आशीर्वाद दिया।

रविवार सुबह घोसी गली स्थित श्री पंचायती मंदिर से 28 दूल्हे घोड़ी पर सवार होकर बैंडबाजों के साथ कारगी रोड स्थित विवाह स्थल के लिए रवाना हुए। दूल्हों के परिवार के लोग, रिश्तेदार और मित्र नाचते हुए चल रहे थे। सामूहिक बरात का नाजारा ऐसा था, हर कोई आकर्षित हो गया। विवाह स्थल पहुंचने पर बरातियों का समिति के पदाधिकारियों ने फूलों की वर्षा कर स्वागत किया।

इसके बाद वरमाला की रस्म हुई और फिर फेरे। शाम करीब पांच बजे कन्याओं की विदाई की गई। इस क्षण सभी आंखें नम हो गईं। इससे पहले समिति से जुड़े अखिलेश अग्रवाल ने बताया कि कन्यादान महादान है। यह कार्य सभी के सहयोग से पूरा हो सका। समिति के सदस्य सचिन गुप्ता ने बताया कि जिन 28 कन्याओं की शादी हुई है, वह प्रदेश के अलग-अलग जिलों से हैं। वर सभी परिवारों ने खुद ही तलाश किए।

सामूहिक विवाह में दूल्हों को वरमाला के लिए करीब डेढ़ घंटे इंतजार करना पड़ा। दरअसल, सभी 22 दुल्हनों का मेकअप एक ही ब्यूटी पार्लर में हुआ। इससे वक्त ज्यादा लग गया।

 

विवाह के जश्न में सौदेबाजी का खलल

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टेंट के तय किराए से अधिक की रकम वसूलने का विरोध करने पर टेंट स्वामी ने कुछ लोगों की मदद से दूल्हे के पिता को बुरी तरह पीट दिया। आरोप है कि हमलावर दुल्हन के जेवरात भी लूटकर ले गए। पीड़ित ने इसकी तहरीर पुलिस को सौंपकर न्याय की गुहार की है।

पीलीभीत रोड ,साल बोझी नंबर तीन, के श्याम लाल ने पुलिस को तहरीर सौंपते हुए कहा कि उसके पुत्र का विवाह था। जिसमें टेंट, डीजे और लाईट की व्यवस्था एक टेंट हाऊस से की गई थी। जिसका किराया नौ हजार रुपये तय था। उन्होंने आरोप लगाया कि रविवार को टेंट हाऊस स्वामी अपने कर्मचारियों व सात अन्य लोगों को साथ लेकर उसके घर में घुस आए।

टेंट स्वामी ने किराए के पंद्रह हजार रुपये और देने को कहा। इस पर एतराज जताने पर उन लोगों ने मारपीट कर दी। जिसमें उसके सिर में गंभीर चोट आई। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि वह पुत्रवधु के नाक व कान के करीब 22 हजार मूल्य के सोने के आभूषण लूटकर धमकी देते हुए चले गए। पीड़ित की तहरीर लेकर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। कोतवाल चंचल शर्मा ने बताया कि मामले की जांच कराई जा रही है।

रसोई में लटका मिला महिला का शव

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वेलेजली लॉज,हल्द्वानी के निकट एक घर की रसोई में महिला का शव फांसी पर लटकता मिला। इस मामले को संदिग्ध मानते हुए पुलिस ने महिला के पति को हिरासत में ले लिया।

वेलेजली लॉज निवासी राजकुमार त्यागी के घर पर विक्रम त्रिपाठी किराये पर रहता है। विक्रम मंडी बाईपास पर हर्षित रेस्टोरेंट पर काम करता है। रोज की तरह विक्रम काम पर गया था, घर पर उसकी मां भारती त्रिपाठी, पत्नी सीमा और चार साल का बेटा देव थे।

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सीमा बृज लाल हॉस्पिटल में आया का काम करती थी। करीब आठ बजे वह घर पर पहुंची और खाना बनाने रसोई में चली गई। कुछ देर बाद सास भारती रसोई पर गई तो सीमा को उसने रसोई के रोशनदान पर दुपट्टे के सहारे लटके देखा। इस पर उसने हल्ला मचाया तो आसपास के लोगों की भीड़ जुट गई। इसी दौरान विक्रम भी घर पर पहुंचा। दुपट्टा काटकर सीमा को परिजन ओर आसपास के लोग बेस अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। चौकी प्रभारी ने बताया कि सीमा की शादी चार साल पहले हुई थी। उसका मायका उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में है। शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी गई है। पति को हिरासत में लिया गया है।

पर्यटक उठा रहे हैं रिवर राफ्टिंग के अंतिम दिनों का मजा

रिवर राफ्टिंग ने ऋषिकेश की पहचान देश-विदेश में बनायीं है, लेकिन पिछले कुछ सालो से यहाँ के राफ्टिंग जोन में हादसे रुकने का नाम नहीं ले रहे है।  बीते कुछ सालो में इस साहसिक खेल पर हादसों का ऐसा धब्बा लग गया है जिस में मोजमस्ती के लिए आया पर्यटक अपनी जान तक गवा चुके है लेकिन हादसे है की रुकने के नाम नहीं ले रहे है, फिर भी पर्यटक  पहुंचकर राफ्टिंग का मजा ले रहे है।
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उत्तराखंड के साहसिक पर्यटन  की पहचान बन गयी  रिवर राफ्टिंग अब नयी उचाईयो को छूने लगी है, अभी तक आपने अगर रिवर राफ्टिंग का मजा नहीं लिया है तो चले आईये ऋषिकेश क्योकि अब रिवर राफ्टिंग के कुछ ही दिन बाकि बचे है। आम तोर पर गंगा का जलस्तर बढ़ते ही 25 जून के आस पास रिवर राफ्टिंग सीजन का समापन हो जाता है, पर्यटक लगातार वीकेंड पर वाइट रिवर राफ्टिंग का ऋषिकेश में मजा ले रहे है। 
उत्तराखंड में रीवर राफ्टिंग पर्यटन का मुख्य आधार है जिस ने विश्व के नक़्शे पर ऋषीकेश की पहचान बनायीं है। गंगा के रेपिड पूरे विश्व में अपने रोमांच के कारण जाने जाते है। लहरों कि सवारी का ये अहसास जिदगी भर उनको रोमांच कि अनुभूति करता रहता है, लेकिन मुनाफे का ये सौदा अब धीरे धीरे पर्यटकों की जान पर भरी पड़ता जा रहा है, आंकड़ों की तरफ देखा जाये तो पिछले पांच सालों में गंगा में डूबने से 140 पर्यटकों की जान गयी है।

वॉक फ़ॉर योगा में क़दम बढ़ाये उत्तराखंड पुलिस ने

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अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौक़े पर योग को बढ़ावा देने और लोगों को योग के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से रविवार सुबह सात बजे उत्तराखण्ड पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तथा पुलिस बल ने पुलिस लाईन रेसकोर्स में “वाॅक फोर योगा” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के तहत सभी ने पुलिस लाईन रेसकोर्स से बन्नू स्कूल के चारों तरफ वांक करते हुए वापस पुलिस लाईन स्टेडियम पहुचे।

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इसके बाद मां योगा आश्रम, तपोवन, ऋषिकेश के योगी श्री अम्रतराज जी द्वारा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तथा कर्मचारियों को योगाभ्यास कराया गया। उत्तराखण्ड पुलिस ने 21 जून को मनाये जाने वाले अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के लिये एक पहल की और सन्देश दिया कि वर्तमान जीवन शैली में योग का क्या महत्व है।

इस वॉक में डी.जी.पी. एम.ए.गणपति, ए.डी.जी.(प्रशासन) अशोक कुमार, आई.जी.संजय गुंज्याल, आई.जी. दीपम सेठ, आई.जी. इन्ट ए.पी. अंशुमान, एस.एस.पी. देहरादून निवेदिता कुकरेती व अन्य पुलिस अधिकारीगण ने भाग किया।  इस कार्यक्रम में पतंजलि हरिद्वार से भी सदस्यों ने हिस्सा लिया ।