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उत्तराखंड के सभी स्कूलों में लागू हो सकती है एनसीआरटी की किताबें

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उत्तराखंड ने स्कूलों में शैक्षिक अनुसंधान प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की किताबों को सभी स्कूलों में चाहे वह एफिलियेटेड हो या ना हो हर जगह अनिवार्य करने की योजना बनाई है। इसके जरिए शिक्षा में एकरूपता लाने और निजी स्कूलों और प्रकाशकों की गठजोड़ को खत्म करने में सरकार को काफी मदद मिलेगी।

अगर यह योजना सफल होती है तो अगले शैक्षणिक सत्र से एनसीईआरटी किताबें कक्षा 3 से 12 के लिए शुरु कर दी जाऐंगी। सरकार ने उत्तराखंड में किताबें प्रकाशित करने की योजना के लिए एनसीईआरटी अधिकारियों से बातचीत करना शुरु कर दिया है।

एनसीईआरटी अधिकारियों के साथ बैठक के बाद, स्कूल शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने इन पुस्तकों को राज्य में प्रकाशित करने और उन डीलरों को आपूर्ति करने के लिए मंजूरी दी जो इसके बाद उन्हें स्कूलों में डिस्ट्रीब्यूट करेंगे।

वर्तमान में, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और उत्तराखंड बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन (यूबीएसई) से संबद्ध स्कूल एनसीईआरटी किताबों का पालन करते हैं। लेकिन इस आदर्श का उपवाद निजी स्कूल हैं जिनमें से अधिकांश भारतीय स्कूल प्रमाणपत्र परीक्षा (सीआईएससीई) के लिए आईसीएसई बोर्ड से संबद्ध रखते हैं।

पांडे ने बताया, ’हमने किताबें प्रकाशित करने के लिए एनसीईआरटी अधिकारियों की सहमति ली है।हमारी यह योजना है कि सभी बोर्ड उसी किताबों (एनसीआरटी) को अपनाए। इससे प्राईवेट प्रकाशकों की जांच करने में मदद मिलेगी और साथ ही उनकी भी जो निजी स्कूलों के छात्रों को महंगी किताबें बेच रहे हैं। इससे शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार होगा “।

राज्य सरकार हर साल किताबों को प्रकाशित करने में लगभग 8 करोड़ रुपये खर्च करती है। इस फंड में पाठ्यक्रम, शोध और अन्य विवरणों के पुन: मूल्यांकन की लागत शामिल है। यदि सभी स्कूलों द्वारा एनसीईआरटी पुस्तकों को स्वीकार किया जाता है, तो सरकार प्रकाशन के लिए और राज्य स्तर के अनुसंधान और प्रशिक्षण के लिए इस व्यय को खत्म करने में सक्षम हो जाएगी।

प्राइवेट स्कूल अपने महंगे पाठ्यपुस्तकों को निर्धारित करने के बदले निजी प्रकाशकों को हाई कमीशन पर तैयार करते हैं जो एक सच्ची बात है। सूत्रों का दावा है कि कुछ बड़े निजी स्कूलों इस कारोबार से 5 करोड़ रुपये सालाना कमाते हैं।

पांडे ने अपने स्तर पर एनसीईआरटी पुस्तकों को स्कूलों में शुरु करने के लिए कुछ निजी स्कूलों के साथ बातचीत की है। दून के बाला हिसार अकादमी के प्रिंसिपल माधुलिक संधू ने कहा कि एनसीईआरटी की किताबें विज्ञान और गणित के लिए अच्छी हैं लेकिन अंग्रेजी पुस्तकों को अपग्रेड करने की जरूरत है।उन्होंने कहा कि “मैंने व्यक्तिगत रूप से एनसीईआरटी पुस्तकों में गलतियां पाई हैं। एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम प्रतियोगिताओं के लिए अच्छा हो सकता है, लेकिन लैंग्वेज और विशेष रूप से अंग्रेजी को अपग्रेड करने की आवश्यकता है।”

“सीआईएससीई के संयोजक, देहरादून, पीएस कालरा ने कहा कि यह फैसला “सीआईएससीई की केंद्रीय इकाई का है बाकी हम यहां केवल परीक्षा करवाने के लिए बाध्य हैं। साथ ही, सरकार स्कूलों में ‘बुक बैंक’ को बढ़ावा देगी। इसके सफल क्रियान्वयन के लिए, स्कूल के पाठ्यक्रम को बदलने के लिए निर्धारित अंतर कम से कम पांच साल होगा। यह, स्कूल विभाग के सूत्रों का कहना है कि, गरीब और जरूरतमंद छात्रों की मदद के लिए आएंगे जो पुरानी दान वाली किताबों का उपयोग कर सकते हैं।

पांडेय ने कहा कि “एक वर्ष के बाद, किताबें बर्बाद हो जाती हैं।अगर हर बोर्ड के पाठ्यक्रम में एनसीईआरटी पुस्तकों का इस्तेमाल होने लगेगा तो एक साल के बाद, हम ज़रूरतमंद छात्रों के लिए पुरानी किताबें रख सकते हैं। इसके साथ, हम पेपर के इस्तेमाल में कमी लाऐंगे और एक स्वस्थ ईकोसिस्टम में योगदान कर पाऐगे।”

तो ये है उत्तारखंड के 8 मुख्यमंत्रियों की घोषणाओं का रिपोर्ट कार्ड

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हल्द्वानी के एक कार्यकर्ता द्वारा दायर आरटीआई के एक प्रश्न के उत्तर में पता चला है कि पिछले 17 सालों में राज्य के 8 मुख्यमंत्रियों द्वारा किए गए कुल 7,888 घोषणाओं में से केवल 3,128 पूर्ण हुए है जो, केवल 40 प्रतिशत है।

वादे करके पूरे ना करने वालों में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत लिस्ट में पदों की सूची में सबसे ऊपर हैं, जिन्होंने अपने ढाई साल के दौरान किए गए 3,814 घोषणाओं के साथ सबसे ज्यादा घोषणा की थी, जिसमें से केवल 1300 से ज्यादा कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। उनके पहले विजय बहुगुणा ने 1340 घोषणाएं कीं जिनमें से 678 पूरे हुए । मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के कार्यकाल में द्वारा किए गए 1140 घोषणाएं हुईं जिनमें से 450 को पूरा किया गया। एनडी तिवारी, राज्य के एकमात्र मुख्यमंत्री, जिन्होंने 5 साल का कार्यकाल पूरा किया और उस दौरान, 895 घोषणाएं हुई जिसमें से केवल 311 घोषणा पूरी हुई।

आरटीआई उत्तर के अनुसार, मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) बीसी खंडूरी ने अपने 2 बार मुख्यमंत्री पद के दौरान 617 घोषणाएं कीं, जिनमें से 336 को लागू किया गया। राज्य के पहले मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी और उनके उत्तराधिकारी भगत सिंह कोश्यारी ने सबसे कम घोषणाएं की (33 और 11), जिनमें से कोई भी घोषणा सफल नहीं हुई। वर्तमान मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने अब तक के अपने कार्यकाल के में आज तक 38 घोषणाएं की हैं, जिनमें से 10 पर काम हुआ है ।

गुरविंदर चढ्ढा, एक एक्टिविस्ट है जिन्होंने आरटीआई में सवाल दायर किया था, उन्होंने कहा, “आंकड़े खुद के लिए बोलते हैं और साथ ही यह भी दर्शाते हैं कि एक से एक घोषणा करने वाले मुख्यमंत्री कितनी गंभीरता से अपनी घोषणाओं पर काम करते हैं। उन्होंने कहा कि, ‘राज्य सरकार द्वारा प्राप्त उत्तर के अनुसार राज्य के मुख्यमंत्रियों द्वारा कुल 7,888 घोषणाएं की गईं, जिनमें से 2,477 घोषणाओं पर अभी भी काम चल रहा हैं।’

डेटा पर प्रतिक्रिया देते हुए नैनीताल के एक कार्यकर्ता अजय सिंह रावत ने कहा, “हमारे सार्वजनिक कर्मचारियों यानि की नेताओं को लोगों के प्रति अपनी कर्तव्य का पालन करना चाहिए। झूठे वादों का निर्माण करना एक बुरा उदाहरण और राजनीतिक नेताओं में लोगों के भरोसे को ठेस पहुंचाता है। लोकलुभावनें वादों के बजाय ऐसे वादे करने चाहिए जो आसानी से पूरे किए जा सकें।

इस बीच, कांग्रेस के राज्य प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी ने मुख्यमंत्रीयों द्वारा कि गई घोषणाओं को सही ठहराया है।उन्होंने कहा कि “ऐसे कई अवसर आते हैं जब एक मुख्यमंत्री को स्थानीय लोगों की मांग या स्थानीय लोक प्रतिनिधियों के अनुरोध पर घोषणा करनी ही होती है।” उन्होंने कहा कि, “सीएम द्वारा किए गए सभी घोषणाओं के 100 प्रतिशत पूरा होने की उम्मीद नहीं की जा सकती क्योंकि कुछ परियोजनाएं और योजनाएं पूरा होने में कई साल लगते हैं।”

मर्डर की ये तस्वीर देख दहल जायेंगे आप

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नैनीताल जिले के रामनगर में भारत गैस एंजेसी मालिक विशाल गोयल की उसके ही कर्मचारी ने हत्या कर दी । हत्या की खबर से व्यापारियों में रोष देखने को मिला । रामनगर के मुख्य बाजार में सन्नाटा छा गया है । गौरतलब है की रामनगर के व्यापारी विशाल गोयल का अपने ही कर्मचारी नरेंद्र कड़ाकोटी से सैलरी को लेकर विवाद चल रहा था, जिसके चलते गैस एजेंसी डीलर विशाल ने उसे दो दिन पूर्व नौकरी से निकाल दिया था। गैस एजेंसी मालिक विशाल आज सुबह जब गैस एजेंसी पहुंचा तो अचानक आरोपी नरेंद्र वहां आ धमका और अपनी सैलरी को लेकर पूर्व मालिक से झगड़ने लगा । आरोपी नरेंद्र ने अचानक चाकू निकाल लिया और उसपर वार करने लगा । जिससे बचने की भी उसने भरपूर कोशिश की । विशाल ने ताबड़तोड़ वार से बचने के लिए एजेंसी कार्यालय से बाहर दौड लगा दी। लेकिन आरोपी भी उसके पीछे भागा और कई हमले कर दिये। जिससे विशाल गंभीर रुप से घायल हो गया। विशाल को नगर के ही एक चिकित्सालय में भर्ती कराया गया जहां उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे काशीपुर रैफर कर दिया गया। बाद में काशीपुर में व्यापारी विशाल गोयल ने दम तोड दिया। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ जारी है। 

मालसी डियर पार्क में जू एक्वेरियम एवं 3डी थियेटर का लोकार्पण

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‘मालसी डियर पार्क, देहरादून को होने वाली आय का 50 प्रतिशत यहां रहने वाले प्राणियों के कल्याण के लिए व्यय किया जाएगा,’ यह घोषणा मुख्यमंत्री रावत ने मालसी डियर पार्क में निर्मित देहरादनू जू एक्वेरियम एवं 3डी थियेटर का लोकार्पण के अवसर पर किया। पूर्व में यह 20 प्रतिशत था।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि आज अत्यन्त शुभ दिन है जहाॅं एक ओर खूबसूरत व प्राकृतिक वातावरण में बने, मालसी डियर पार्क में जू एक्वेरियम एवं 3डी थियेटर का लोकापर्ण किया गया वहीं राज्य के ग्रामीण क्षेत्र को खुले में शौच की प्रथा से भी मुक्त घोषित किया गया है। ‘हमने संकल्प लिया है कि चालू वितीय वर्ष में राज्य के नगरीय क्षेत्र को भी ओडीएफ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से मालसी डियर पार्क में जू विकसित किया गया है वह प्रशंसनीय है। इससे निश्चित रूप से यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या बढे़गी।’
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्री हरक सिंह रावत, विधायक श्री गणेश जोशी, श्री उमेश शर्मा काऊ आदि भी उपस्थित थे।

सतोपंथ एक्सपेडिशन का फ्लैग-इन प्रोग्राम

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पुलिस लाईन देहरादून में सतोपंथ expedition का फ्लैग-इन प्रोग्राम आयोजित किया गया जिसमें मुख्य अतिथि श्री एम.ए. गणपति, ङीजीपी उत्तराखण्ड रहे। राज्य में हिमालय क्षेत्रों में होने वाली किसी भी दुर्घटना, खोज, एवं बचाव अभियानों के दौरान होने वाली मानव क्षति न्यूनीकरण की सफलता की दर को बढाने एवं तकनीकी कार्यशैली एवं कार्यक्षमता बढाये जाने के दृष्टिगत एस.डी.आर.एफ की 17 सदस्यीय माउण्टेनियरिंग टीम को उच्च तुगंता क्षेत्रों में प्रशिक्षण के लिये 18 मई को ङीजीपी उत्तराखण्ड ने पुलिस मुख्यालय से सतोपंथ पर्वत (उचाई 23263 फीट) अभियान के लिये फ्लैग-आफ किया गया था। 

10.06.2017 को  एस.डी.आर.एफ टीम ने विषम परिस्थितियों में 23263 फीट ऊची चोटी संतोपंथ का आरोहण किया। जून  को वासुकीताल से 8 किमी आगे करीब 5200 मीटर की ऊंचाई पर 6 सदस्यी पर्वतारोही दल के एक पर्वतारोही  प्रयांग चौधरी के एडवांस बैस कैम्प व कैम्प 1 के बीच मौजूद सुराले ग्लेशियर में 50 फीट गहरे कैरावास में गिर जाने पर एस.डी.आर.एफ. की हाई एल्टिट्यूड रेस्क्यू टीम (एचएआरटी) द्वारा विषम भौगोलिक परिस्थिति में भी साहस का परिचय देते हुयें 50 फीट गहरे कैरावास से चोटिल पर्वतारोही को निकाला गया व मौके पर प्राथमिक उपचार प्रदान किया गया।

आयोजन के दौरान मुख्य अतिथि श्री गणपति द्वारा माउण्टेनियरिंग दल के सभी सदस्यों को प्रशस्ति पत्र दिये गयें  व एसडीआरएफ के कार्यो के सराहना की एवं बताया कि भविष्य में भी एसडीआरएफ माउन्टेनिंग टीम के द्वारा इसी प्रकार के एक्सपेडिशन किये जायेगे जिससे उच्च तुगंता क्षेत्रों में रेस्क्यू कार्यो को मजबूती प्रदान हो सके।

रानीगंज खदान कांड पर बनने वाली फिल्म में अजय देवगन

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सरगढ़ी के युद्ध पर ‘संस ऑफ सरदार’ (सन ऑफ सरदार पार्ट 2) बनाने की घोषणा के बाद अजय देवगन एक और बायोपिक फिल्म बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं।
अक्षय कुमार की फिल्म ‘रुस्तम’ का निर्देशन करने वाले टीनू सुरेश देसाई की नई फिल्म में अजय प्रमुख भूमिका में नजर आएंगे। बताया जाता है कि इस फिल्म की कहानी 1989 के रानीगंज में कोयला खदान के बचाव में आगे आए एक एडीशनल माइनिंग इंजीनियर जे एस गिल की जिंदगी पर होगी, जिन्होंने अपनी जिंदगी दांव पर लगाकर खदान में फंसे 64 मजदूरों की जिंदगी बचाने का साहसिक काम किया था। देश भर में चर्चित हुए इस कांड में छह मजदूरों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
कहा जाता है कि देसाई ने पहले इस फिल्म में अक्षय कुमार को कास्ट करने की कोशिश की थी, लेकिन दूसरी फिल्मों में बिजी होने के कारण अक्षय ने इसमें काम करने से मना कर दिया, तो उन्होंने अजय देवगन से संपर्क किया और अजय ने इस फिल्म में काम करने के लिए सहमति दे दी। खबर के अनुसार, इस फिल्म का निर्माण अभिनव शुक्ला और अजय देवगन मिलकर करेंगे। इसकी पटकथा पर काम शुरू हो चुका है। इस साल के आखिर तक इस फिल्म के सेट पर जाने की उम्मीद है। अजय इस साल एक सितम्बर को रिलीज होने जा रही मिलन लथूरिया की फिल्म बादशाहो में नजर आएंगे और फिर दीवाली पर रोहित शेट्टी के साथ उनकी फिल्म ‘गोलमाल 4’ रिलीज होगी।

शराबबंदी को लेकर अब सामुहिक आत्मदाह की चेतावनी

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शराब की दुकानों को लेकर महिलाों का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है लगातार हो रहे दुकान कुलने के विरोेध के चलते शराब व्यापारियों में जहां हडकम्प है वहीं एक दुसरे को देख हर जगह आंदोलन की चिंगारियां जल रही है। हरिनगर से शराब की दुकान नहीं हटने से आक्रोशित महिलाएं उग्र होने लगी हैं। महिलाओं ने एसडीएम एपी वाजपेयी और एसपी सिटी अमित श्रीवास्तव से मिलकर शराब की दुकान हटाने की मांग की। साथ ही 36 घंटे में कार्रवाई नहीं होने पर सामूहिक आत्मदाह और आमरण अनशन शुरू करने का एलान किया है।

ब्लॉक प्रमुख भोला दत्त भट्ट, ग्राम प्रधान माया तिवारी व ग्रामीण व्यापार मंडल अध्यक्ष भुवन भट्ट के नेतृत्व में दोनों अफसरों से मिलने पहुंचीं महिलाओं का कहना है कि हरिनगर में शराब की दुकान हर हाल में बंद कराकर रहेंगे। दुकान के आगे आंदोलन करते-करते एक पखवाड़े से अधिक समय बीत गया है। एसडीएम, जिला आबकारी अधिकारी के साथ ही जिलाधिकारी से गुहार लगा चुके हैं। इसके बावजूद प्रशासन जनभावनाओं की सुध नहीं ले रहा है। क्षेत्रवासियों ने 36 घंटे के भीतर शराब की दुकान नहीं हटने पर सड़क जाम, तोड़फोड़ व सामूहिक आत्मदाह करने की चेतावनी दी है। इसके बाद दोनों अफसरों को ज्ञापन भी सौंपा गया।

जब एक मैनराईट ने अपने पहियों से थाईलैंड में बढ़ाई उत्तराखंड की शान

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सेंट जॉर्जेस कॉलेज, मसूरी के लिये खेल के क्षेत्र में पुरस्कार जीतना कोई नई बात नहीं है, और इस समृद्ध परंपरा को जीवित रखते हुए कक्षा 7 के छात्र सिद्धार्थ चावला ने 3rd इंटरनेशनल रोलर रिले स्केटिंग प्रतियोगिता मे रिले रेस, रोड रेस और नार्मल रेस में गोल्ड जीता। यह प्रतियोगिता 13-15 जून को बैंकाक और पटाया, थाईलैंड में आयोजित की गई थी।

सिद्धार्थ एक पैशनेट रोलर स्केटर हैं। उन्होंने 5 साल की कम उम्र में स्केटिंग करना शुरु कर दिया था। एक बार जब उन्होंने अपने पैरों मे रोलर स्केट्स डाल दिये और तो बस उसके बाद यह उनका जुनून बन गया। यहां तक कि स्कूल में भी स्केटिंग में उत्साह रखता देख, उनके लिए स्केटिंग रिंक में रोज़ाना करीब 1-2 घंटे तक प्रेक्टिस चलाया गया और अपनी कला को तराशने का कौशल भी सिखाया गया।

अपनी उपलब्धि के बारे में बताते हुए युवा लड़के ने न्यूज़पोस्ट से बात की और बताया कि, “मैं अंडर 12-14 की श्रेणी में था, रूस, भारत और थाईलैंड से लगभग 20-25 अन्य प्रतिभागी थे। चूंकि यह मेरा पहली अंतरार्ष्ट्रीय कंपटिशन था, मैं नर्वस होने के साथ साथ उत्साहित भी था। वह कहते हैं, “जब मैं शुरूआती लाईन पर खड़ा था और अन्य खिलाड़ियों को देख रहा था तो मुझे बहुत अच्छा लगा। इस प्रतियोगिता के बाद मैंने स्केटिंग तकनीक के बारे में और अधिक सीखा। “

अब के लिए सिद्धार्थ अपने पीई अध्यापक और कोच सर विक्टर की देखरेख में देश और विदेश दोनों में स्केटिंग के जरिए जीत हासिल करने की योजना बना रहे हैं। आज स्कूल को और उनके कोच को अपने छात्र की उपलब्धि पर बहुत गर्व है। सिद्धार्थ ने कहा, ‘विक्टर सर की देखरेख और प्रशिक्षण के बिना शायद यह संभव नहीं होता। अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कंपटिशन के बारे में मुझे बताने के साथ-साथ उन्होंने मुझे हर तरह से सहयोग किया है। हर संभव तरीके से विक्टर सर ने मुझे सहायता प्रदान की और मुझे प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित भी किया ‘

हम न्यूपोस्ट डेस्क की तरफ से सिद्धार्थ को उनको उनके आने वाले कंपटिशन के लिए ढेर सारी बधाईंयां देते है और उन्हें शुभकानाएं देते हैं कि वह रोलर स्केटिंग की दुनिया में अपनी छाप बनाने के लिए आगे बढ़ते रहें।

एसिड फेंकने वाले को दस साल की सजा

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उच्च न्यायालय ने युवती पर एसिड अटैक मामले मे निचली कोर्ट का फैसला पलटते हुए न केवल दोषमुक्त को दोषी करार दिया बल्कि उसे दस साल कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही पीड़िता को पांच लाख मुआवजा देने का भी आदेश पारित किया।
दरअसल 18 दिसंबर 2009 को रुड़की मे एक युवती पर मोहम्मद आजम नामक युवक ने एसिड फेंक दिया। जिससे युवती गंभीर रूप से झुलस गई थी। निचली कोर्ट से आरोपी बरी हो गया तो सरकार द्वारा हाईकोर्ट में विशेष अपील दायर की गई। पिछले दिनों वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व जस्टिस शरद शर्मा को खंडपीठ ने आरोपी को दोषी करार दिया साथ ही कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए। गुरुवार को हरिद्वार पुलिस दोषी आजम को लेकर कड़ी सुरक्षा में नैनीताल पहुंची और उसे कोर्ट में पेश किया गया। इस फैसले में अदालत ने एसिड पीड़ित को दिव्यांग श्रेणी में शामिल करने, नौकरी में आरक्षण देने, ऐसे अभियोगों का निस्तारण तीन माह में करने समेत अन्य अहम दिशा-निर्देश जारी किए थे।

देहरादून में अतिक्रमण हटाओं अभियान के चलते घंटाघर से टर्नर रोड तक बिजली व पानी आपूर्ति ठप

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पुलिस-प्रशासन की ओर से चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान घंटाघर से टर्नर रोड तक बिजली व पेयजल आपूर्ति ठप हो गई। ऊर्जा निगम ने अतिक्रमण के चलते विद्युत आपूर्ति पर रोक लगाई हुई थी, जिससे इस मार्ग पर जल संस्थान के न ही सात नलकूप चल पाए और न क्षेत्र में पानी की सप्लाई हो पाई। परेशान लोग दिनभर जल संस्थान व ऊर्जा निगम के अधिकारियों को शिकायत करते रहे। लेकिन, रात तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। हालांकि, जल संस्थान ने कुछ जगहों पर टैंकर भेजकर पानी की आपूर्ति की, लेकिन इससे भी लोगों को राहत नहीं मिली।

जल संस्थान के निरंजनपुर स्थित नलकूप संख्या एक, दो, तीन व चार सभी दिनभर बंद रहे। इन नलकूपों से झंडा चौक स्थित ओवरहैड टैंक भरा जाता है, जिससे पटेलनगर, सहारनपुर रोड समेत तमाम इलाकों में पानी की सप्लाई होती है। लेकिन, गुरुवार को यह सप्लाई ठप रही। वहीं, तहसील परिसर का नलकूप भी सुबह से रात तक चालू नहीं हो पाया, जिस कारण धामावाला, पल्टन बाजार व तहसील के आसपास के इलाके की पेयजल आपूर्ति ठप रही। तिब्बती मार्केट का नलकूप भी बंद होने से करीब चार हजार की आबादी को दिनभर पानी नहीं मिला। जबकि, ओल्ड डालनवाला का नलकूप ठप होने से अधोईवाला क्षेत्र के लोग पानी को तरस गए। इसके अलावा मातावाला बाग, माजरा, निरंजनपुर, शिमला बाईपास, आईएसबीटी, टर्नर रोड, गांधी रोड, प्रिंस चौक, झंडा बाजार समेत तमाम इलाकों में पानी की सप्लाई नहीं हो पाई। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता यशवीर मल्ल ने बताया कि जैसे ही विद्युत आपूर्ति बहाल होगी, वैसे ही पानी की आपूर्ति सुचारू कर दी जाएगी।
ऊर्जा निगम के मुख्य अभियंता एवं प्रवक्ता एके सिंह ने कहा कि अतिक्रमण अभियान के दौरान यदि किसी उपभोक्ता की सर्विस लेन क्षतिग्रस्त हुई है तो शिकायत आने पर उसका तुरंत निस्तारण कर दिया जाएगा।

शहर को अतिक्रमण से मुक्त करने की कवायद गुरुवार से शुरू हो गई। इस अभियान की शुरुआत सुबह सात बजे से छह स्थानों पर एक साथ हुई। विरोध को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। बतादें कि साढ़े छह किमी लंबे आइएसबीटी से घंटाघर मार्ग तक हर जगह अतिक्रमण पसरा हुआ है। व्यापारियों ने दुकानों को सड़क तक बढ़ा दिया है। साथ ही, ठेली और फड़ वालों ने सड़क पर अतिक्रमण कर रखा है। अतिक्रमणकारियों को कई बार मोहलत देने के बाद आखिरकार प्रशासन ने गुरुवार सुबह से अतिक्रमण मुक्त दून अभियान शुरू कर दिया। यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।

राज्य सरकार के आदेश पर शासन द्वारा आज अतिक्रमण हटाओ अभियान के चलते आईएसबीटी से घंटाघर तक सड़क किनारे दुकानों को तोड़ा गया, जिसका तत्काल संज्ञान मिलने पर राजपुर रोड़ से पूर्व विधायक राजकुमार द्वारा घंटाघर पर जाकर व्यापारीयों से मुलाकात की गई । उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के इस कदम से व्यापारीयों को ठेस पहुंची है, व्यापारीयों का कहना है कि बिना नोटिस इस प्रकार की कार्यवाही निन्दनीय है। इस कठोर कदम से पूर्व सरकार को व्यापारीयों के साथ बैठक कर वार्ता करनी चाहिए थी, तदोपरान्त निष्कर्ष निकलने पर ही उचित कार्यवाही की जानी चाहिए थी, लेकिन राज्य सरकार एक तरफ यह अभियान चला रही है, दूसरी तरफ उन्हीं के लोग सरकार के विरोध में उतर रहे हैं जो कि मात्र एक दिखावा है।

उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार की मनमानी इस कदम चरम पर आ गई है कि वे हर वर्ग, तबके के लोगों को किसी न किसी बहाने से परेशान करने पर उतारू है, चाहे वह व्यापारी हों या किसी अन्य वर्ग के। उन्होंने इसको राज्य सरकार की हिटलरशाही करार दिया। उन्होंने कहा इस अभियान का नेतृत्व करने वाले शहरी आवास मंत्री ने पीड़ितों द्वारा फोन करने पर अपना फोन उठाना ही बन्द कर दिया है। इस मौके पर नेता प्रतिपक्ष नीनू सहगल, अशोक वर्मा, पार्षद अशोक कोहली, प्रदेश सचिव सोमप्रकाश वाल्मीकि, सुमित वासुदेव, मनोज कुमार आदि उपस्थित थे।