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केन्द्रीय मंत्री ने जानी मनरेगा की जमीनी हकीकत

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केंद्रीय कपड़ा राज्य मंत्री अजय टम्टा ने गुरुवार को पिथौरागढ़ जिला में सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक ली। बैठक में तमाम विकास योजनाओं पर चर्चा हुई और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। जिला कार्यालय सभागार में मनरेगा की समीक्षा करते हुए कपड़ा राज्य मंत्री ने कहा कि प्रत्येक जॉब कार्डधारक को 100 दिन का रोजगार देने के लिए कार्य योजना तैयार की जाए। श्रमिकों का भुगतान अब सीधे उनके बैंक खातों में किया जाए। मुख्य विकास अधिकारी आशीष चैहान ने बताया कि जिले में मनरेगा योजना के तहत 76,850 जॉब कार्ड जारी किए गए हैं।
मार्च माह तक 45,267 लोगों की रोजगार की मांग के सापेक्ष 43,154 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। मार्च 2017 तक 3,372 परिवारों को 100 दिन का रोजगार दिया गया, जबकि पिछले वर्ष 1,824 परिवारों को रोजगार दिया गया था। स्वच्छ भारत मिशन की समीक्षा में नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी ने बताया कि 320 शौचालयों के सापेक्ष 222 शौचालयों का निर्माण करा लिया गया है।
केंद्रीय कपड़ा राज्य मंत्री ने लीड बैंक अधिकारी को केंद्र सरकार की योजनाओं के समुचित प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए। खेती को नुकसान पहुंचा रहे बंदरों को पकड़ने के लिए उन्होंने प्रभागीय वनाधिकारी को निर्देशित किया।
आंवलाघाट पेयजल योजना के लिए केंद्र सरकार से धनराशि जारी किए जाने की जानकारी देत हुए उन्होंने कहा कि योजना का निर्माण जल्द से जल्द पूरा कराया जाए।

नेपाल को देवभूमि से जोड़ने की पहल करेगी सरकार

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 उत्तराखंड से नेपाल के लिए बस सेवा निकट भविष्य में शुरू होने की उम्मीद है। जुलाई में उत्तराखंड और नेपाल के अधिकारियों के बीच प्रस्तावित बैठक में बस सेवा के रूट को लेकर चर्चा होने की संभावना है। अभी नेपाल के लिए बस सेवा केवल दिल्ली से ही चलाई जा रही है। यहां से तीन बसें चल रही हैं। इनमें दो बसें उत्तर प्रदेश रोडवेज की और एक बस उत्तराखंड रोडवेज की है।

बताते चले कि उत्तराखंड में नेपाली मूल के काफी लोग निवास करते हैं। कई राजनीतिक दल व संगठनों की ओर से उत्तराखंड से सीधे नेपाल तक बस सेवा चलाने की मांग उठती रही है। इसे देखते हुए बीते वर्ष दिल्ली से नेपाल के लिए बसों का संचालन शुरू किया गया। ये बसें नेपाल के महेंद्रनगर तक संचालित की जाती हैं। ये बस सेवाएं सीधे देश की राजधानी से संचालित हो रही हैं, इस कारण इनके मार्ग का निर्धारण केंद्र सरकार द्वारा ही किया गया।
अब उत्तराखंड सरकार भी नेपाल बस संचालित करने पर विचार कर रही है। इसके लिए नेपाल से वार्ता भी की गई। इस बस का मार्ग क्या होगा, यह निर्णय उत्तराखंड और नेपाल के परिवहन अधिकारी बैठ कर तय करेंगे। इसके लिए जुलाई माह में उत्तराखंड और नेपाल के अधिकारियों की बैठक प्रस्तावित है। जानकारों की मानें तो बैठक में यदि बसों के संचालन पर सहमति बनती है तो फिर इसी आधार पर मार्गो का निर्धारण भी किया जाएगा।
राज्य परिवहन प्राधिकरण के जरिये इन मार्गो का नोटिफिकेशन किया जाएगा और इसके बाद इन पर बसों का संचालन किया जाएगा। इन बसों का संचालन होने से नेपाल जाने वाले लोगों को खासी सहूलियत मिलने की उम्मीद है।

जॉन अब्राहम की फिल्म पोखरण का पहला लुक जारी

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देश में 1998 में सत्ता संभालने वाली अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार द्वारा किए गए साहसिक फैसले के तहत राजस्थान के पोखरण में हुए परमाणु परीक्षण की ऐतिहासिक घटना पर बन रही जॉन अब्राहम की फिल्म परमाणु-द स्टोरी आफ द पोखरण का पहला पोस्टर रिलीज कर दिया गया है।

हाल ही में फिल्म की शूटिंग का पहला शेड्यूल शुरू हुआ है। इसका निर्देशन अभिषेक शर्मा कर रहे हैं, जो इससे पहले तेरे बिन लादेन का निर्देशन कर चुके हैं और पहली बार जान अब्राहम के साथ फिल्म बना रहे हैं। नीरजा का लेखन करने वाली लेखिका संयुक्ता फिल्म की स्क्रिप्ट लिख रही हैं। जॉन अब्राहम के साथ साथ फिल्म की प्रमुख भूमिका में डायना पेंटी हैं, जो पहली बार जॉन की जोड़ीदार बन रही हैं। सैफ अली के साथ चाकलेट और इसके बाद हैप्पी घर से भाग जाएगी फिल्मों में डायना काम कर चुकी हैं। उनके अलावा फिल्म की सहायक भूमिका में बोमन ईरानी भी होंगे।

फिल्म को इसी साल 8 दिसंबर को रिलीज करने की योजना है। याद रहे कि भारत द्वारा परमाणु परीक्षणों के बाद विश्व व्यापी प्रतिक्रिया हुई थी और अमेरिका सहित पश्चिम के कई देशों ने भारत पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए थे, लेकिन भारत सभी चुनौतियों का सामना करते हुए परमाणु शक्ति बनने में सफल रहा।

पांच किलो हाथी दांत के साथ दो तस्‍कर गिरफ्तार

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थाना नरेंद्रनगर पुलिस ने पांच किलो हाथी दांत के साथ दो तस्‍करों को गिरफ्तार किया है। मुखबिर से मिली सूचना पर गुरुवार दोपहर करीब दो बजे ओनी बैंड से एसओजी और थाना पुलिस नरेंद्रनगर की टीम ने दो लोगों को हिरासत में लिया। तलाशी में उनके पास से दो हाथी दांत मिले, जिनका वजन करीब पांच किलो है। इस पर पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपियों ने अपने नाम बुंदु पुत्र सतीक और सईद पुत्र वीरू निवासी बिजनौर (यूपी) बताया।
पुलिस ने बताया कि सईद पहले भी टाइगर की हड्डियों के साथ 2015 में दिल्ली में पकड़ा गया था। दोनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।

रजनीकांत के जन्मदिन पर आएगा रोबोट 2.0 का ट्रेलर

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सुपर स्टार रजनीकांत और अक्षय कुमार की फिल्म रोबोट 2.0 का ट्रेलर आगामी 12 दिसंबर को रजनीकांत के जन्मदिन के मौके पर रिलीज किए जाने की खबर है। खबर के मुताबिक, 12 दिसंबर को दिग्गज सितारे के 67वें जन्मदिन के मौके पर फिल्म का ट्रेलर लांच किया जाएगा।

ये भी संकेत मिल रहे हैं कि रजनीकांत इस बार जन्मदिन दुबई में मनाएंगे और वहीं भव्य समारोह में ट्रेलर लांच किया जाएगा। इस समारोह में अक्षय कुमार सहित फिल्म की पूरी कास्ट मौजूद होगी। ये फिल्म अगले साल 26 जनवरी के मौके पर रिलीज होगी। पहले इसे दीवाली के मौके पर रिलीज करने की घोषणा की गई थी, लेकिन कहा गया कि फिल्म का तकनीकी काम पूरा न हो पाने की वजह से रिलीज डेट को आगे खिसकाया गया।

रजनीकांत और ऐश्वर्या राय बच्चन को लेकर रोबोट बना चुके निर्देशक शंकर की इस फिल्म का बजट दो गुना किया गया है और फिल्म में पहली बार रजनीकांत के साथ अक्षय कुमार होंगे, जो फिल्म में विलेन के रोल में होंगे। कुछ दिनों पहले मुंबई में फिल्म का पहला पोस्टर लांच करने के लिए बड़ा समारोह हुआ था, जिसमें रजनीकांत और अक्षय शामिल हुए थे।
रजनीकांत ने हाल ही में मुंबई में अपनी नई फिल्म काला की शूटिंग शुरू की है, जिसमें रजनीकांत मुंबई आकर अंडरवर्ल्ड डॉन बनने वाले एक तमिलेयिन के रोल में नजर आएंगे।

हनक भी नहीं आयी काम और मंत्री के भतीजे का कटा चालान

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”उप्र का सिंचाई मंत्री बोल रहा हूं, जिसको आपने पकड़ा है वह मेरा भतीजा है, उसे तत्काल छोड़ दो। कुछ इसी अंदाज में उप्र के सिंचाई मंत्री धर्मपाल ने सीपीयू को फोन कर दवाब में लेने का प्रयास किया”। जी हां उत्तर प्रदेश के मंत्री ने अपनी हनक दिखाने में उत्तराखण्ड को भी नहीं छोडा और नियमों की धज्जियां उडा रहे अपने भतीजों को छुडाने के लिए पुलिस पर जमकर रौब झाड डाला।

सीपीयू कर्मी, डीडी चौक पर वाहनों की जांच कर रहे थे। इसी दौरान यूपी 25 एएच 2074 बाइक पर तीन युवक बैठे जा रहे थे। सीपीयू ने उनको रोक कागज मांगे तो वह कागज तो दूर ड्राइविंग लाइसेंस, बीमा कुछ न दिखा सके और उप्र के मंत्री का भतीजा होने का रौब सीपीयू पर गांठने लगे।सिंचाई मंत्री के भतीजे बताने वाले युवकों की बाइक पर लगी नंबर प्लेट में नंबर भी साफ नहीं लिखा था। बाइक का नंबर उप्र 25 एएच 2074 था, लेकिन उसमें न तो एच साफ दिख रहा था और न ही आखिरी नंबर चार दिखाई दे रहा था।सीपीयू कर्मियों ने उनकी एक नहीं सुनी और वाहन सीज कर दिया।

इसी बीच खुद को सिंचाई मंत्री का भतीजा बताने वाले यादराम, पुत्र बृजलाल,गुलड़िया उपरोल, थाना सिरोली बरेली ने अपने मोबाइल से फोन लगाकर सीपीयू कर्मी के हाथ में थमा दिया और कहा मंत्री जी से बात कर लो। सीपीयू कर्मी ने मोबाइल पर बात की तो सामने से बात करने वाले ने खुद को सिंचाई मंत्री धर्मपाल बताया और बाइक को छोड़ने की हिदायत दी।

आखिर कब तक मरता रहेगा देश का किसान

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मध्यप्रदेश के मंदसौर में आंदोलन कर रहे किसानों पर हुई पुलिस फायरिंग में 6 किसानों की मौत के बाद देश का राजनीतिक माहौल लगातार गरमा रहा है। देश में किसानों के नाम पर राजनीति तेज हो गयी है। हालांकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सभी मृतकों के परिजनों को तत्काल एक-एक करोड़ रुपये की आर्थिक मदद देने, घायलों को 5-5 लाख रुपये देने के साथ उनका मुफ्त इलाज करवाने, साथ ही मृतकों के परिवार में से एक सदस्य को नौकरी भी देने की घोषणा की। उन्होंने स्वयं भी भोपाल में दो दिनों तक अनशन कर किसान आन्दोलन को ठंडा करने का प्रयास किया।

एक समय तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने जय जवान, जय किसान का नारा दिया था। शास्त्री जी इस नारे के जरिये समाज में यह एक संदेश पहुंचाना चाहते थे कि किसान और जवान देश की दशा और दिशा तय करते हैं। अगर ये नहीं होंगे तो देश की दुर्दशा हो जाएगी। जहां जवान देश की रक्षा करता है, वहीं किसान खेती के जरिये देश को अनाज देता है। अगर किसान नहीं होगा तो देश में अन्न के टोटे पड़ जायेगें। आज हम जब जय किसान का नारा सुनते हैं तो कुछ अजीब सा लगता है। आज किसान की जय नहीं बल्कि पराजय हो रही है। किसान भूखा और कमजोर हो रहा है। फसल बर्बाद होने की वजह से किसान आत्महत्या कर रहे हैं। कृषि और किसान भारतीय परम्परा के वाहक हैं। जब परम्परा मरती है तो देश मरता है। किसानों की खुशहाली से ही देश व सम्पूर्ण मानवता की खुशहाली होगी। किसान खुशहाल नहीं होंगे तो देश को दुखी होने से कोई नहीं रोक पायेगा।

हमारे देश में किसानों की आत्महत्या एक राष्ट्रीय समस्या का रूप धारण कर चुकी है। आये दिन देश के किसी ना किसी हिस्से से किसानों के आत्महत्या करने की खबरें मिलती रहती है। देश की प्रगति एवं विकास में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने के बाद भी किसानों को जिन्दगी से निराश होकर ऐसे कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। सर्वाच्च न्यायालय ने देश में किसानों की आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए हाल ही में केंद्र सरकार को ऐसी घटनाओं पर विराम लगाने के लिए एक रोडमैप बनाने का निर्देश दिया था। सर्वाच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जगदीश सिंह केहर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि सिर्फ मरने वाले किसान के परिवार को मुआवजा देना काफी नहीं है। आत्महत्या के कारणों को पहचानना और उनका हल निकालना जरूरी है। न्यायालय ने किसानों की हालात का जिक्र करते हुए कहा कि अभी तक किसान बैंक से कर्ज लेता है और न चुकाने की स्थिति में वो आत्महत्या कर लेता है। सरकार किसान को मुआवजा देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी करती है। इसका हल मुआवजा नही है। आप ऐसी योजनाएं बनाएं जिससे किसान आत्महत्या करने के बारे में न सोचे। अगर बम्पर फसल होती है तो भी किसान को फसल के उचित दाम क्यों नही मिलते हैं।


भारत में किसान आत्महत्या 1990 के बाद पैदा हुई स्थिति है ,जिसमें प्रति वर्ष दस हजार से अधिक किसानों के द्वारा आत्महत्या की रपटें दर्ज की गई हैं। भारतीय कृषि बहुत हद तक मानसून पर निर्भर है तथा मानसून की असफलता के कारण नकदी फसलें नष्ट होना किसानों द्वारा की गई आत्महत्याओं का मुख्य कारण माना जाता रहा है। मानसून की विफलता, सूखा, कीमतों में वृद्धि, ऋण का अत्यधिक बोझ आदि परिस्तिथियां समस्याओं के एक चक्र की शुरुआत करती हैं। बैंकों, महाजनों, बिचौलियों आदि के चक्र में फंसकर भारत के विभिन्न हिस्सों के किसानों ने आत्महत्याएं की हैं।

प्रारम्भ मे किसानों द्वारा आत्महत्याओं की रपटें महाराष्ट्र से आईं। जल्दी ही आंध्रप्रदेश से भी आत्महत्याओं की खबरें आने लगी। शुरुआत में लगा की अधिकांश आत्महत्याएं महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के कपास उत्पादक किसानों ने की है। जल्द ही महाराष्ट्र के राज्य अपराध लेखा कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों को देखने से स्पष्ट हो गया कि पूरे महाराष्ट्र में कपास सहित अन्य नकदी फसलों के किसानों की आत्महत्याओं की दर बहुत अधिक रही है। आत्महत्या करने वाले केवल छोटी जोत वाले किसान नहीं थे बल्कि मध्यम और बड़े जोतों वाले किसानों भी थे। राज्य सरकार ने इस समस्या पर विचार करने के लिए कई जांच समितियां बनाईं। बाद के वर्षों में कृषि संकट के कारण महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, आंध्रप्रदेश, पंजाब, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी किसानों ने आत्महत्याएं की।

दिसम्बर 2016 में जारी राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो की रिपोर्ट ‘एक्सिडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड इन इंडिया 2015’ के मुताबिक साल 2015 में 12,602 किसानों और खेती से जुड़े मजदूरों ने आत्महत्या की है। 2014 की तुलना में 2015 में किसानों और कृषि मजदूरों की कुल आत्महत्या में दो फीसदी की बढ़ोतरी हुई। साल 2014 में कुल 12360 किसानों और कृषि मजदूरों ने आत्महत्या की थी। गौर करने वाली बात ये है कि इन 12,602 लोगों में 8,007 किसान थे जबकि 4,595 खेती से जुड़े मजदूर थे। साल 2014 में आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या 5,650 और खेती से जुड़े मजदूरों की संख्या 6,710 थी। इन आंकड़ों के अनुसार किसानों की आत्महत्या के मामले में एक साल में 42 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। वहीं कृषि मजदूरों की आत्महत्या की दर में 31.5 फीसदी की कमी आई है।

किसानों के आत्महत्या के मामले में सबसे ज्यादा खराब हालत महाराष्ट्र की रही। राज्य में साल 2015 में 4291 किसानों ने आत्महत्या कर ली। महाराष्ट्र के बाद किसानों की आत्महत्या के सर्वाधिक मामले कर्नाटक 1569, तेलंगाना 1400, मध्य प्रदेश 1290, छत्तीसगढ़ 954, आंध्र प्रदेश 916 और तमिलनाडु 606 में सामने आए। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के रिपोर्ट के अनुसार किसानों और कृषि मजदूरों की आत्महत्या का कारण कर्ज, कंगाली, और खेती से जुड़ी दिक्कतें हैं। आंकड़ों के अनुसार आत्महत्या करने वाले 73 फीसदी किसानों के पास दो एकड़ या उससे कम जमीन थी।

किसानों की आत्महत्या को लेकर महाराष्ट्र बदनाम है लेकिन देश के दूसरे राज्यों में भी स्थिति कमोबेश यही है। मध्य प्रदेश और राजस्थान की सरकारों ने स्वीकार किया है कि हाल के दिनों में कई किसानों ने खुदकुशी की है। मध्य प्रदेश में प्रतिदिन औसतन तीन किसान एवं कृषि मजदूर विभिन्न कारणों से अपना जीवन समाप्त कर रहे हैं। मध्य प्रदेश विधानसभा में लिखित जवाब में गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह ठाकुर ने ये जानकारी दी है। भूपेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि प्रदेश में 16 नवम्बर, 2016 के बाद से प्रश्न पूछे जाने के दिन तक यानी लगभग तीन महीने की अवधि में कुल 106 किसान और 181 कृषि मजदूरों ने मौत को गले लगाया है।
राजस्थान विधानसभा में सरकार द्वारा दिए गए आंकड़े भी किसानों की बदहाली की तस्वीर पेश करते हैं। सरकार के अनुसार पिछले 8 साल में 2870 किसान खुदकुशी कर चुके हैं। गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने लिखित जवाब में बताया कि साल 2008 से 2015 के दौरान 2870 किसानों ने पारिवारिक और धन की तंगी के कारण आत्महत्या की है। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो रेकॉर्ड के अनुसार किसानों की आत्महत्या के बढ़ते मामले के पीछे फसल की बर्बादी, कृषि उत्पादों का उचित मूल्य न मिलना, बैंक कर्ज न चुका पाना है। इसके अलावा देश में किसानों को आत्महत्या करने के लिए गरीबी, बीमारी भी लोगों को आत्महत्या करने पर मजबूर कर देती है।
सत्ता में कोई भी रहे किसानों के लिए कोई भी दल गंभीर नहीं है। उत्तर प्रदेश के चुनाव में किसानों की बदहाली मुद्दा तो है लेकिन आरोप प्रत्यारोप से आगे कोई चर्चा नहीं होती। 2022 तक किसान की आमदनी को दो गुना करने के अपने सपने को साझा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी जनसभाओं में कहते हैं कि राज्य में सरकार बनते ही किसानों का कर्ज माफ हो जाएगा। इस पर किसानों का कहना है कि ये नेता सिर्फ घडियाली आंसू बहते हैं। ना पिछली यूपीए सरकार गंभीर थी और ना ही वर्तमान मोदी सरकार। यानी किसान अब सच्चाई समझने लगे हैं, और शायद बड़े सपने देखने से कतराने भी लगे हैं।

कृषि क्षेत्र में निरंतर मौत का तांडव दोषपूर्ण आर्थिक नीतियों का नतीजा है। दोषपूर्ण आर्थिक नीतियों के चलते कृषि धीरे-धीरे घाटे का सौदा बन गई है, जिसके कारण किसान कर्ज के दुष्चक्र में फंस गए हैं। पिछले एक दशक में कृषि ऋणग्रस्तता में 22 गुना बढ़ोतरी हुई है। अत: सरकार को किसानों के लिये प्रभावी नीतियों का निर्माण करना होगा। सबसे बढक़र इन नीतियों का कार्यान्वयन सुनिश्चित करना होगा।

किसानों की बेहतरी के लिए सरकारों ने अभी तक कई समितियां बनार्इं। इन समितियों ने अच्छी सिफारिशें भी प्रस्तावित कीं, फिर भी किसानों के हालात में कोई सुधार नहीं आया है। किसानो की खुदकुशी रोकने के लिये यदि सरकार वाकई संजीदा है, तो वह जल्द से जल्द एक ऐसी योजना बनाए जिसमें किसानों के हितों का खास खयाल रखा जाए। किसानों के सामने ऐसी नौबत ही न आए कि वे खुदकुशी की सोचें। उनके लिए फसल बीमा, फसलों का उच्च समर्थन मूल्य एवं आसान ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी तभी किसानों की स्थिति सुधरेगी और उन्हें आत्महत्या करने से रोका जा सकेगा।

गांव में निकला 8 फीट लंबा किंग कोबरा

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पिथौरागढ़ के गांव आमबाग में मंडी समिति में किंग कोबरा दिखने से हड़कंप मच गया। सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम ने आठ फिट लंबे किंग कोबरा को पकड़कर जंगल में छोड़ दिया।

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गुरुवार को सायं पांच बजे आमबाग मंडी समिति में संजय अग्रवाल के गोदाम में सांप निकलने से कार्य कर रहे लोगों में अफरा-तफरी मच गई। सूचना के बाद मौके पर पहुंचे वन विभाग के सांप पकड़ने में माहिर कर्मी विजय वेंशन ने सांप को पकड़ लिया। उन्होंने बताया कि सांप ब्लैक कोबरा है। यह बहुत ही खतरनाक तथा जहरीला होता है। विजय अब तक 150 से अधिक सांप पकड़ चुके हैं। विजय ने बताया कि उन्होंने सांप पकड़ने की कला डिस्कवरी चैनल को देखकर सीखी है।

हाई कोर्ट ने लगाई शिक्षा विभाग पर एसी, गाड़ियां खरीदने पर रोक

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प्राथमिक विद्यालयों में गिरते शैक्षणिक स्तर के मामले में हाई कोर्ट ने आदेशों का अनुपालन नहीं होने पर गंभीर रुख अपनाया है। कोर्ट ने शुक्रवार को फिर से शिक्षा सचिव व वित्त सचिव को व्यक्तिगत तौर पर अदालत में पेश होने के आदेश दिए हैं। साथ ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों के लग्जरी सामान जैसे कार, एसी, वाटर प्यूरीफायर आदि सामान की खरीद फरोख्त पर रोक लगा दी।

देहरादून निवासी दीपक राणा ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि उत्तराखंड के प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा का स्तर निचले स्तर तक पहुंच गया है। विद्यालयों में पठन-पाठन सामग्री का अभाव है। शिक्षकों की कमी है। विद्यालय भवन जीर्णशीर्ण हालत में हैं। शौचालय हैं न बैठने के लिए कुर्सी मेज। कोर्ट ने पूर्व में इन कमियों को दूर करने के लिए सरकार को दस बिन्दुओं की गाइडलाइन जारी की थी। आदेश का अनुपालन नहीं होने पर अधिवक्ता ललित मिगलानी द्वारा कोर्ट में हलफनामा पेश किया गया। जिस पर सुनवाई करते हुए शिक्षा सचिव को कोर्ट में तलब किया गया था। गुरुवार को शिक्षा सचिव चंद्रशेखर भट्ट कोर्ट में पेश हुए और उन्होंने प्राथमिक शिक्षा में सुधार के लिए उठाए गए कदमों का ब्योरा प्रस्तुत किया। कोर्ट ने सरकार के जवाब से असंतुष्ट होकर शुक्रवार को फिर से शिक्षा सचिव के साथ ही वित्त सचिव को तलब कर लिया। साथ ही शिक्षा विभाग में लग्जरी सामान की खरीद फरोख्त पर रोक लगा दी। मामले की सुनवाई वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ में हुई।

एनएच घोटाले की जांच उलझी लाॅकर में

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भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले की जांच डबल लॉक में रखी गयी फाईलों के चलते उलझ गई है। शासन से अनुमति न मिल पाने के कारण जहां जांच प्रभावित हो रही है वहीं शासन की अनुमति ही जांच की रफ्तार दे सकती है। अनुमति न मिलने तक एसआइटी की जांच भी प्रभावित होगी।

एन एच घोटाले का जिन्न बाहर आते ही तत्कालीन कुमाऊं आयुक्त डी सेंथिल पांडियन ने मुआवजे से संबंधित फाइलों को उप कोषागार के डबल लॉक में सुरक्षित रखवा दिए गए थे। दस्तावेज डबल लॉक में सुरक्षित रखवाने के आदेश के बाद से ही भूमि अधिग्रहण संबंधित मुआवजे का सारा काम ठप पड़ गया। इसके चलते किसान भी मुआवजे के लिए परेशान घूम रहे हैं। बीते दिनों काशीपुर से गायब फाइलों के जसपुर से बरामद होने के बाद एसआइटी जांच ने जब अपनी रफ्तार पकड़ी तो मामला एक बार फिर गर्मा गया। इस प्रकरण में एसआइटी पूर्व एलएलएओ सहित एनएनएआइ के अफसरों व काश्तकारों के बयान दर्ज कर चुकी है। एसआइटी द्वारा बयान दर्ज करने के बाद उनकी सत्यता को परखने के लिए अधिग्रहण संबंधित दस्तावेजों की जरूरत पड़ने लगी है। लेकिन डबल लॉक में बंद दस्तावेज प्रमुख सचिव के आदेश के बिना बाहर निकालना संभव नहीं है। जिसके चलते एसएवपी डा. सदानंद एस दाते ने जिलाधिकारी को पत्र लिख दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए लिखा था। जिसे शासन की अनुमति के लिए देहरादून भेज दिया गया है। लेकिन अभी तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। दस्तावेजों के बिना एसआइटी की जांच के प्रभावित होने की संभावनाओं से इन्कार नहीं किया जा सकता है।

जबकि इस मामले में एसएसपी सदानन्द दाते ने बताया कि जांच को आगे बढ़ाने के लिए दस्तावेज हासिल करना जरूरी है। डबल लॉक में बंद दस्तावेज हासिल करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया को पूरा करने के लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखा गया है। जरूरत पड़ने पर इसमें पुलिस महानिदेशक स्तर पर भी सहयोग से पीछे नहीं हटा जाएगा। जिससे जल्द दस्तावेज हासिल कर जांच को और गतिशील किया जा सके।