‘ईद-उल-फितर’ के मुबारक मौके पर राज्यपाल के ने दी हार्दिक बधाई
100 दिन सरकार के, 100 दिन विकास के: मुख्यमंत्री
- पहले ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक रेलवे लाइन की घोषणा हुई थी, लेकिन सरकार के प्रयासों से अब यह परियोजना बद्रीनाथ धाम व सोनप्रयाग तक स्वीकृत हो चुकी है। इसके साथ ही मुज्जफरनगर-देवबंद के मध्य भी रेल लाइन शीघ्र पूरी होने वाली है।
- केन्द्र सरकार ने स्थानीय युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण देने एवं उनकी आजीविका के साधनों को बढ़ाने लिये कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय का क्षेत्रीय कार्यालय भी देहरादून में खोलने का निर्णय लिया है।
- लोक निर्माण, पेयजल, जल संस्थान, सिंचाई, ग्रामीण अभियंत्रण जैसे विभागों को उनके नियमित बजट के अतिरिक्त 250 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है।
- सरकार द्वारा शीघ्र ही 200 डाॅक्टरों के पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने जा रही है। इसके लिए चिकित्सा चयन बोर्ड के माध्यम से कार्य किया जा रहा है।
- सीमांत एवं लघु किसानों को 2 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जायेगा। लक्ष्य है कि इस योजना से 1 लाख किसानों को स्वरोजगार से जोड़ा जा सके।
- मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिये है कि 2021 तक सबको आवास उपलब्ध होना चाहिए।
- साल 2017 तक प्रत्येक गांव, 2018 तक हर तोक तथा 2019 तक हर घर को बिजली से जोड़ा जाय।
- केन्द्र सरकार द्वारा राज्य में पाॅवर सेक्टर के विकास के लिए एडीबी से मिलने वाले 819.20 करोड़ रूपये के ऋण के लिए दी सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई है। इससे राज्य में नई ट्रांसमिशन लाइन के साथ नए सब स्टेशन होंगे स्थापित होंगे।
- देहरादून, हल्द्वानी एवं हरिद्वार को जल्द रिंग रोड़ मिलेगी। गढ़वाल एवं कुमाऊं की कनेक्टिविटी के लिए कंडी मार्ग खुलेगा। भारत सरकार से 22 सड़कों को राष्ट्रीय हाईवे बनाने पर सहमति मिली है।
- 5 करोड़ रुपये धनराशि तक के कार्य राज्य के मूल निवासियों को ही दिये जायेंगे। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकेंगे।
- करप्शन पर जीरो टालरेंस के सिद्धांत का कड़ाई से पालन करते हुए एनएच74 केस को सी.बी.आई. को भेजा और जब तक सी.बी.आई. ने इस केस को ले नही लिया, तब एस.आई.टी. अपना काम कर रही है।
- केन्द्र सरकार ने देहरादून को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिये भी चुना है।
बहरहाल सरकार ने अपने 100 दिन पुरे होने पर उपलबद्धियां तो कई गिनाी हैं लेकिन ये बात बी तय है कि ये 100 दिन त्रिवेंद्र सिंह रावत के लिये राजनीतिक रूप से भी काफी कक्रिय रहे हैं। पार्टी के अंदर और मंत्रीमंडल के कई सदस्यों के साथ मुख्यमंत्री का तालमेल न होना पाना जगजाहिर रहा है। चाहे वो पर्यटन मंत्री सतपाल माहराज से समन्वय न बैठने की बात हो या फिर वन मंत्री हरक सिंह रावत का खुले तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को बेहतर बताना। 100 दिनों में किसी बी सरकार या राजनेता को फेलपास करने जल्दबाजी हो सकती है पर इतना तो तय है कि मुख्यमंत्री के सामने आने वाले दिनों में राज्य को विकास का डबल इंजन देना और पार्टी और मंत्रियों की गाड़ी को भी पटरी पर रखने की चुनौती रहेगी।
अब प्लास्टिक डिस्पोजल के बजाय ईको फ्रेंडली पत्तल व दोने पर जोर
अब दोने व पत्ते पूरी तरह प्रकृति में नष्ट हो जाएंगे। इसके लिए विशेष व्यवस्था करने की कोई जरुरत नहीं होगी। नान बायो डिग्रेडेबल डिस्पोजेबल गिलास, पत्तल व दोने आदि के स्थान पर बायो डिग्रेडेबल गिलास, पत्तल व दोने आदि का प्रयोग किया जायेगा। अपर आयुक्त गढ़वाल हरक सिंह रावत ने दोना पत्तल एसोसिएशन बबूल पत्ता स्टोर हनुमान चौक, पेपर एण्ड प्लास्टिक एसोसिएशन तिलक रोड एवं जनपद के समस्त धार्मिक प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधियों के साथ आयुक्त कैम्प कार्यालय में बैठक की।
अपर आयुक्त ने कहा कि पूर्व में दोना-पत्तल इत्यादि प्लास्टिक डिस्पोजल पर प्रतिबन्ध लगाया गया था जिस पर पूरी तरह से सफलता नहीं मिल सकी। वर्तमान में कई कंपनियों द्वारा ऐसे ईको फ्रेंडली दोना पत्तल, डिस्पोजल/उत्पाद बनाये गये हैं जो आसानी से बायो-डिग्रेडेबल/आग्रेनिक खाद के रूप में निष्प्रोज्य हो जाते हैं। इसलिए ऐसे उत्पादों को अपनाने पर जोर दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि देखा जाए तो यह प्लास्टिक डिस्पोजल से औसतन सस्ता ही पड़ेगा क्योंकि प्लास्टिक निर्मित वस्तुओं का उपयोग करने से एक ओर जहां पर्यावरण प्रदूषित होता है, नालियां चोक हो जाती है, खेती योग्य भूमि बंजर हो जाती है तथा कई बार चालान के रूप में जुर्माना भी देना पड़ता है। उन्होंने कहा कि यह बायो-डिग्रेडेबल दोना पत्तल गन्ने की खोई से बनाया जाता है जो बाद में खाद का काम करता है तथा इसके उपयोग के लिए लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है।
जापानी औद्योगिक घरानों से मिले निशंक, निवेश के लिए किया आमंत्रित
पूर्व मुख्यमंत्री एवं संसदीय आश्वासन समिति के अध्यक्ष डाॅ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने जापानी औद्योगिक घरानों से मुलाकात की और उन्हें उत्तराखंड आने का निमंत्रण दिया। इस अवसर पर डाॅ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ की पुस्तक ‘परिश्रम पर विश्वास करो भाग्य पर नहीं’ के अंग्रेजी अनुवाद का विमोचन हुआ। जापानी शिष्टमण्डल द्वारा ऊर्जा, परिवहन, शिक्षा और कृषि क्षेत्रों में सहयोग की इच्छा जताई गई। व्यापारिक घरानों ने निशंक को उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया।
अपने सम्बोधन में डाॅ. निशंक ने कहा कि जापान की तरह उत्तराखण्ड के लोग प्रकृति प्रेमी, मेहनती और भावुक हैं। भारत और जापान को सामरिक सहयोगी बताते हुए आशा प्रकट की कि जापान की प्रौद्योगिकी ज्ञान-विज्ञान से जहाँ भारत लाभान्वित होगा वहीं भारत के रूप में विश्व का सबसे बड़ा बाजार जापान को मिलेगा। जापानी व्यापारिक प्रतिनिधि मण्डल का नेतृत्व दायशिन समूह के अध्यक्ष यामाशीता ने किया। करीब चार दर्जन से अधिक व्यापारिक घरानों ने डाॅ. निशंक के सम्मान में रात्रि भोज में हिस्सा लिया। जापान औद्योगिक घरानों के प्रतिनिधिमण्डल में यामाशीता दाईशिन ग्रुप, नारा लाॅजिस्टिक्स कम्पनी के हगीवारा, सेवर कम्पनी के होसी, सकुराई ट्रैवल के रमेश शर्मा, टेनरी टूरिज्म के यासुको सहित अन्य जापानी नागरिक मौजूद रहे।
एसएसबी ने भारत-नेपाल सीमा पर चलाया सघन चेकिंग अभियान
सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने पिथौरागड़ में भारत नेपाल सीमा पर शनिवार को सघन चेकिंग अभियान चलाकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। इस दौरान संदिग्धों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिये गये। एसएसबी के 55वीं वाहिनी इ-कंपनी के निरीक्षक राजेंद्र प्रसाद के नेतृत्व में एसएसबी के जवानों ने भारत-नेपाल सीमा से सटे झूलाघाट, झूलापुल,गेठीगड़ा, कानड़ी, बलतड़ी और सप्तड़ी में सघन कांबिंग की गई। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े अन्य पहलुओं ध्याने देने को कहा गया।
नेपाल में 28 जून को हो रहे चुनाव को लेकर सीमा पर एसएसबी चौकस है। चुनाव के दौरान कोई घटना घटित न हो, इसके लिए सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। निरीक्षक राजेंद्र प्रसाद ने दोनों देशों का सीमा पर आवागमन होता है। ऐसे में संदिग्ध इस रास्ते से आने के फिराक में रहते है। ऐसे संदिग्धों पर पुलिस कड़ी नजर रखेगी।
उत्तरकाशी के ऐतिहासिक गर्तांगली के दिन बहुरेंगे
रोमांच के शौकीनों के लिए समुद्रतल से 11 हजार फीट की ऊंचाई पर गर्तांगली जल्द खुल सकती है। 1962 से क्षतिग्रस्त पड़ा जाड़ गंगा घाटी में स्थित सीढ़ीनुमा यह मार्ग (गर्तांगली) दुनिया के सबसे खतरनाक रास्तों में शुमार है। क्षतिग्रस्त होने के कारण इस मार्ग पर आवाजाही बंद है। अब गर्तांगली के दिन बहुरने वाले हैं। करीब तीन सौ मीटर लंबे इस मार्ग की मरम्मत के लिए लिए शासन से जिला प्रशासन को 26.50 लाख रुपये की धनराशि मिल गई है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि गर्तांगली की मरम्मत को आई धनराशि गंगोत्री नेशनल पार्क को दी जाएगी। गर्तांगली गंगोत्री नेशनल पार्क क्षेत्र में आती है। भारत-चीन युद्ध से पहले व्यापारी इस रास्ते से ऊन, चमड़े से बने वस्त्र व नमक लेकर बाड़ाहाट (उत्तरकाशी का पुराना नाम) पहुंचते थे। युद्ध के बाद इस मार्ग पर आवाजाही बंद हो गई, लेकिन सेना का आना-जाना जारी रहा।
करीब दस वर्ष बाद 1975 में सेना ने भी इस रास्ते का इस्तेमाल बंद कर दिया। चालीस साल से मार्ग का रख-रखाव न होने से सीढियां क्षतिग्रस्त हो गई हैं। सीढियों के किनारे लगी सुरक्षा बाड़ की लकड़ियां भी खराब हो चुकी हैं। 15 अप्रैल 2017 को जिलाधिकारी डॉ. आशीष श्रीवास्तव, पर्यटन अधिकारी व गंगोत्री नेशनल पार्क के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से इस मार्ग का स्थलीय निरीक्षण किया था तथा मरम्मत के लिए शासन से धनराशि मांगी थी। जिलाधिकारी ने बताया कि जल्द से जल्द मार्ग की मरम्मत कराई जाएगी। इससे इस मार्ग को पर्यटकों के लिए खोला जा सके। इससे पर्यटकों को अहसास हो सके कि कभी किस तरह जोखिम भरे रास्तों से जीवन चलता था।
सौ दिन में उत्तराखंड सरकार के कई निर्णय जन विरोधी: प्रीतम सिंह
प्रदेश की भाजपा सरकार के 100 दिन पूरे होने के मौके पर कांग्रेस ने कहा कि इस अवधि में कई जन विरोधी निर्णय लिये हैं, जिसका असर राज्य की गरीब जनता को भुगतना पड़ा है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने उत्तराखंड की गरीब जनता को सस्ते गल्ले के माध्यम से मिलने वाले गेहूं एवं चावल के दामों में दोगुनी वृद्धि कर गरीब आदमी के पेट पर लात मारने का काम किया है। कांग्रेस शासन में गेहूं चार रुपये किलो तथा चावल नौ रुपये किलो मिलता था और अब दाम बढ़ाकर गेहूं 8.60 रुपये किलो तथा चावल के दाम 15 रुपये प्रति किलो कर दिये गये हैं।
दूसरी ओर केन्द्र सरकार द्वारा सस्ते गल्ले के माध्यम से वितरित की जाने वाली चीनी और मिट्टी के तेल पर मिलने वाली सब्सिडी को बन्द कर गरीब जनता के साथ छलावा किया गया है। सरकार ने अपने 100 दिन के कार्यकाल में दो बार बिजली के दाम, पानी, सीवर के दाम बढ़ाने के साथ-साथ गरीबों को अस्पताल में मिलने वाली सुविधा में कटौती कर पहले से महंगाई की मार झेल रही गरीब जनता की जेब पर डाका डालने का काम किया है।
चुनाव के दौरान भाजपा ने अपने दृष्टि पत्र में राज्य की जनता से वायदा किया था कि सरकार बनने की दषा में किसानों के कर्ज माफ किये जायेंगे, किसानों को ब्याज रहित ऋण दिया जायेगा तथा गन्ना किसानों का बकाया भुगतान 15 दिन के अन्दर किया जायेगा। किन्तु राज्य सरकार अपने इन तीनों वायदों से मुकर गई है तथा इसी की परिणति है कि पिथौरागढ़ के बेरीनाग ब्लाॅक के डौल डुंगर गांव के किसान सुरेन्द्र सिंह को आत्महत्या का रास्ता चुनना पड़ा। राज्य सरकार की आबकारी नीति पूर्ण रूप से शराब माफि या को संरक्षण देने, शराब की तस्करी को बढ़ावा देने तथा उत्तराखंड के गांवों में हर घर तक शराब पहुंचाने वाली है।
मुख्यमंत्री ने शराब के कारोबार को कम करने का आश्वासन देने के बावजूद राज्य सरकार द्वारा शराब से मिलने वाले राजस्व का लक्ष्य 1800 करोड़ से बढ़ाकर 2300 करोड़ कर शराब माफि या के आगे घुटने टेकने का काम किया है। भयमुक्त सरकार के अपने वायदे पर अमल करने में सरकार पूरी तरह नाकाम रही है। राज्य सरकार के 100 दिन के कार्यकाल में राज्य में हत्या, लूट,चोरी, डकैती, बलात्कार, चेन स्नैचिंग तथा टप्पेबाजी आदि अपराधों की घटनाओं में भारी वृद्धि हुई है। राज्य की जनता में भय का वातावरण व्याप्त है तथा महिलाएं अपने को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। 24 मार्च 2017 को रामनगर वन प्रभाग में कार्यरत कर्मी पहलवान सिंह की अवैध खनन में लिप्त अपराधियों द्वारा ट्रैक्टर के नीचे दबाकर हत्या कर दी गई। राज्य में चल रही चारधाम यात्रा में अव्यवस्थाओं का बोलबाला है।
अधिकारियों एवं यात्रा से सम्बन्धित विभागीय मंत्री में आपसी सामंजस्य न होने के कारण यात्रियों के पंजीकरणए यात्रा मार्ग पर परिवहन, स्वास्थ्य, दूर संचार व्यवस्थायें पूर्ण रूप से चरमराई हुई हैं। यात्रा मार्ग पर अव्यवस्थाओं के कारण अभी तक लगभग 31 यात्रियों की जान जा चुकी है, जो राज्य सरकार की चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं की पोल खोल रहे हैं। हैली टेण्डर सेवा में ऐसी कम्पनियों को राज्य में हैलीकॉप्टर उडाने की अनुमति दी गई जिनके अनुभव एवं क्रिया-कलाप पर निरंतर प्रश्न खड़े हो रहे हैं तथा राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन की जानकारी में आने के बावजूद निर्धारित दरों से दोगुनी दरों पर यात्रियों से अवैध तरीके से वसूली की जा रही है और प्रशासन मौन है। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2017 के लिए सभी क्षेत्रों में निराशाजनक बजट प्रस्तुत किया गया है। गैरसैंण उत्तराखंड राज्य आन्दोलन की भावना है।
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने उत्तराखंड राज्य निर्माण की अवधारणा को साकार रूप देने एवं जनभावनाओं के अनुरूप गैरसैंण में विधानसभा भवन का निर्माण करवाते हुए माह नवम्बर 2015 में गैरसैण में विधानसभा सत्र आहुत किया गया। इसी के साथ राज्य विधानसभा में वर्ष 2017 का बजट सत्र गैरसैंण में आहुत करने का संकल्प पारित किया गया था। परन्तु वर्तमान सरकार ने सदन की भावना के विपरीत बजट सत्र देहरादून में आहुत कर राज्य निर्माण की भावना का अपमान किया है।
सड़क सुरक्षा विज्ञापन मामले पर बुमराह ने जताई नाराजगी
जयपुर ट्रैफिक पुलिस भारतीय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह द्वारा भारत-पाकिस्तान के फाइनल मैच में फेंकी गई एक नो बॉल को सड़क सुरक्षा का विज्ञापन बनाने पर बुमराह ने नाराजगी जतायी है।बुमराह ने विज्ञापन की फोटो खींच इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘जयपुर ट्रैफिक पुलिस बहुत अच्छा, आपका यह विज्ञापन यह दर्शाता है कि आप देश के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देने वाले व्यक्ति का कितना सम्मान करते हैं। अपने दूसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा कि फिर भी कोई बात नहीं, मैं अपनी इस गलती का मजाक नहीं बनने दूंगा, क्योंकि मुझे विश्वास है कि इंसान अपनी गलतियों से ही सीखता है।’
बतादें कि जयपुर ट्रैफिक पुलिस का यह विज्ञापन इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा का विषय बन रहा है। इस विज्ञापन में जेबरा क्रॉसिंग को नहीं लांघने की हिदायत के साथ जसप्रीत बुमराह द्वारा फेंकी गई नो बॉल की तस्वीर भी लगी है। साथ में लिखा है कि ‘लाइन क्रॉस’ ना करें।
उत्तराखंड के इस गांव में कोई प्रधान बनने को तैयार नहीं
आमतौर पर गांवों में प्रधान बनने के लिए मारामारी रहती है। प्रत्याशी चुनाव जीतने के लिए धनबल के साथ हर तरह के हथकंडे अपनाते हैं, लेकिन उत्तराखंड की एक ग्राम पंचायत ऐसी भी हैं, जहां कोई प्रधान बनने को तैयार ही नहीं।
टिहरी जिले का घोघस गांव के प्रधान की एक साल पहले सड़क हादसे में मौत हो गई थी। तब से यह सीट खाली है। प्रशासन उप चुनाव के लिए दो बार अधिसूचना जारी कर चुका है, लेकिन किसी ने भी नामांकन पत्र नहीं भरा। जाखणीधार ब्लॉक की घोघस ग्राम पंचायत में 52 सामान्य जाति, 34 ओबीसी तथा 8 परिवार अनुसूचित जाति के हैं। इस गांव में ग्राम प्रधान की सीट इस समय ओबीसी उम्मीदवार के लिए आरक्षित है।
वर्ष 2014 में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में इस सीट पर गांव के मोहम्मद इब्राहिम का निर्विरोध चुनाव हुआ था, लेकिन एक साल पहले दिल्ली जाते समय मेरठ में उनकी सड़क हादसे में मौत हो गई थी। तब से यह सीट खाली चल रही है। प्रशासन यहां उपचुनाव कराने के लिए दो बार अधिसूचना जारी कर चुका है, लेकिन किसी ने भी नामांकन नहीं कराया। प्रधान के लिए लोगों का इच्छुक न होना चर्चा का विषय बना हुआ है। चर्चा यह भी है कि प्रधान की सड़क हादसे में मौत के बाद लोग सहमे हुए हैं।
ग्राम विकास अधिकारी प्रकाश चंद रतूड़ी ने बताया कि घोघस गांव में उप चुनाव के लिए दो बार अधिसूचना जारी हो चुकी है। इस बार भी 13 जून को चुनाव होना था। चुनाव की अधिसूचना पंचायत भवन पर चस्पा भी गई थी, ताकि लोग नामांकन कराए, लेकिन किसी ने भी नामांकन नहीं कराया।
उप प्रधान नंद किशोर डबराल का कहना है कि हमारे गांव में प्रधान की सीट ओबीसी आरक्षित है। ओबीसी के अधिकांश परिवार बाहर रहते हैं। करीब बीस परिवार गांव में रहते हैं, लेकिन उनमें कोई प्रधान बनने के लिए इच्छुक नहीं है। प्रधान का कार्यभार मैं खुद संभाल रहा हूं।
गलत दवा से मृत मरीज के परिजनों की पुकार पीएमओ तक
उत्तराखंड का प्रमुख चिकित्सालय श्री गुरूराम राय मेडिकल कॉलेज पर एक मरीज को गलत दवा देकर मौत के घाट उतारने का आरोप है। यह आरोप महिला श्रीमती स्व.कृष्णा वर्मा के पति एस.के.वर्मा ने लगाया है। खुड़बुड़ा निवासी एस.के.वर्मा ने इस मामले को प्रधानमंत्री कार्यालय तक भेजा है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से अनुभाग अधिकारी कुमार शैलेन्द्र ने 5 मई को प्रदेश के मुख्य सचिव को भेजे पत्र में कहा है कि 28 अप्रैल को एस.के.वर्मा की तरफ से एक पत्र मिला है जिस पर उचित कार्यवाही आवश्यक है। उन्होंने इस पत्र की प्रतिलिपि एस.के. वर्मा 9 खुड़बुड़ा मौहल्ला देहरादून को भी भेजा है। यह पत्र पीएमओपीजी/डी/2017/0206430 के माध्यम से भेजा गया है।
इस मामले की जांच स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कर रहे हैं। अब तक उन्होंने पी.एम.ओ. को जवाब नहीं भेजा है,जबकि इस मामले की गूंज राज्यपाल प्रमुख सचिव उत्तराखंड समेत सभी अधिकारियों से की गई है। वर्मा ने गुरूराम राय मेडिकल कॉलेज पर और कई गंभीर आरोप लगाए हैं और बताया है कि उनकी पत्नी श्रीमती कृष्णा वर्मा को श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में 23 मार्च को गयानोकॉलोजी विभाग में यूरिन व स्टूल की रूकावट की समस्या के कारण भर्ती कराया गया था। मेरा पुत्र राजीव वर्मा डा. लाल की बल्ड 21 मार्च को रिपोर्ट लेकर 23 मार्च को पीजीआई चण्डीगढ़ ले गया था। जहां के डा. आदित्य द्वारा आगे इलाज के लिए सलाह दी गई थी। इसके पूर्व 3 वर्ष से पीजीआई में इलाज चल रहा था। सुबह एच.ओ.डी. मेडिकल राउंड चिकित्सक विजिट पर आए तथा मरीज को वार्ड 5 के जनरल बेड पर ग्यानकोलोजिस्ट विभाग से शिफ्ट करवाया गया। पीजीआई के चिकित्सक के रिपोर्ट के अनुसार 1 यूनिट बल्ड बैंक अस्पताल से चढ़ाया गया तथा 24 मार्च को भी एक और यूनिट चढ़ा दिया गया। 25 मार्च को बल्ड प्लेटलेट्स को मांग कर रखे गए। पी.जी.आई. चंडीगढ़ के अनुसार अधिल ब्लड और प्लेटलेट्स नहीं दिए जाने थे। रात्रि 11 बजे ब्लड ट्रांसफ्यूजन रोक दिया गया। रात्रि 8:30 बजे नई बल्ड केंसर से सम्बंधित दवाई बी-नॉट 400 एमजी (इमटना ए.बी.),हाइप्रा 500 एमजी की की जगह दी गई,जबकि पीजीआई के डा. आदित्य ने मरीज की शारीरिक स्थिति के अनुसार हाईपावर मेडिसन नहीं दी जानी थी संभव है कि यह दवा भी उनकी मृत्यु के कारण हो सकती है। रात्रि की दवा के बाद ही मरीज की हालत बिगड़ी। उन्होंने तीन दिनों में लगभग 60 हजार रूपए व्यय किया गया। इन्दिरेश हॉस्पिटल के 3 चिकित्सक जो मरीज को 23 से 26 तारीख तक देख रहे थे। पी.जी.आई.अस्पताल की फाइल को ले गए और उससे समझते रहे, लेकिन इलाज अपने ही तरीके से किया। 4 दिन रात लगातार वहां रहा और सभी कुछ मेरे सामने हुआ। उन्होंने बताया कि अस्पताल के चिकित्सकों की मनमानी व लापरवाही तथा बीमारी को सही तरीके से न समझ पाने के कारण इनका इलाज सफल नहीं हो पाया और उनका देहांत हो गया।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने दिया गोलमोल जवाब
इस संदर्भ में श्री गुरूराम राय मेडिकल कॉलेज के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. वी.के. विहारी से बातचीत की गई। डा. विहारी बड़ी मुश्किल से फोन पर आए और गोलमोल जवाब दिया। उनका कहना था कि हम इस प्रकरण की अन्तरिक जांच करा रहे हैं,जो परिणाम होगा उसे प्रधानमंत्री कार्यालय को भेज दिया जाएगा। यह पूछे जाने पर कि इस मामले में लापरवाही हुई है उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। मेडिकल कॉलेज द्वारा बताया गया कि डा.वी.के. विहारी नहीं हैं। उनके स्थान पर विनय राय या डा. गर्ग से संपर्क किया जा सकता है। मेडिकल कॉलेज के पीआरओ भूपेन्द्र रतूड़ी से पूछा गया तो कहीं जाकर डा. विहारी से बात हुई,लेकिन उनका जवाब भी गोलमोल रहा।





























































