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विश्व बाॅडी बिल्डिंग चैम्पियनशीप में उत्तराखंड की भूमिका ने जीता मिस वर्ल्ड का खिताब

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एक और भारतीय मिस वर्ल्ड बन चुकी है और इस मिस वर्ल्ड के पास लोगों को दिखाने के लिए अच्छी खासी मांसपेशियों भी है। जी हां बाॅडी बिल्डर भूमिका ने उत्तराखंड को एक नई उपाधि से नवाजा है।देहरादून की भूमिका शर्मा ने तीन श्रेणियों में सबसे अधिक अंक हासिल किए- व्यक्तिगत रूप से पोज़ करने में, बॉडी के प्रदर्शन में और अंत में उन्हें मिस वर्ल्ड का खिताब और वेनिस में पिछले सप्ताह हुए विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक का मेडल भी मिला है।

“भूमिका ने कहा कि “भारतीय टीम में कुल 27 सदस्य थे। मैं अकेली महिला बॉडी बिल्डर थी मैंने सभी तीन राउंड में पर्याप्त अंक हासिल किए और देश को गर्व महसूस करवाया है। चैंपियनशिप ने विभिन्न देशों के 50 प्रतियोगियों ने भाग लिया।

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लेकिन बाॅडी बिल्डिंग उनकी मूल पसंद नहीं थी उनके माता-पिता-हंसा मनरल शर्मा, जो भारतीय महिला वेटलिफ्टिंग टीम के प्रमुख कोच और एक कारोबारी विश्वविजय शर्मा, चाहते थे कि वे शूटर बनें, लेकिन भाग्य ने उनके लिए कुछ और ही सोच रखा था।तीन साल पहले नई दिल्ली में एक शूटिंग के दौरान, एक बाॅडी बिल्डर कोच के साथ मुलाकात का मौका मिलने से इस 21 साल की लड़की के जीवन को बदल कर रख दिया। इस मुलाकात के बाद उन्होंने शूटिंग छोड़ कर, बाॅडी बिल्डिंग को चुना और उसके बाद नियमित रूप से पदक जीतने लगी।

अपने माता पिता की इकलौती औलाद होने के बाद भूमिका के लिए अपने माता-पिता को बाॅडी बिल्डिंग के लिए जाने की अनुमति लेना बिल्कुल आसान नहीं था।शुरुआती मनमुटाव के बाद, उसके माता-पिता ने अंततः उन्हें अपने जुनून को जारी रखने के लिए मंजूरी दे दी। उनकी मां उनके समय-सारिणी पर नजर रखती थी और समय-समय पर अपनी बेटी से आवश्यक चीजें शेयर करती रहती थी।इसके साथ ही उनके कोच, भूपेंद्र शर्मा ने सुनिश्चित किया कि वह हमेशा प्रभावशाली रहे।

वह एक दिन में सात घंटे तक जिम में एक सज़ा को मानते हुए एक्सरसाइज करती थी। भूमिका अब बाॅडी बिल्डिंग के लिए मिस यूनिवर्स खिताब में अपनी जगह निर्धारित कर चुकी है। भूमिका उत्तराखंड की एकमात्र महिला बॉडी बिल्डर है जिन्होंने राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में एक जगह बनाई है। उन्होंने बताया कि “मैं इस वर्ष दिसंबर में आयोजित होने वाली मिस यूनिवर्स चैम्पियनशिप के लिए कड़ी मेहनत कर रही हूं”।

यूनाइटेड किंगडम के राष्ट्रीय एमेच्योर बॉडी-बिल्डर्स एसोसिएशन (एनएबीबीए) द्वारा आयोजित, मिस एंड मिस्टर यूनिवर्स खिताब के लिए 60 देशों के बॉडी बिल्डर भाग लेंगे।

बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे सैंकड़ों अस्पताल

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A patient waits outside a doctor's clinic at a residential area in Mumbai December 24, 2012. REUTERS/Danish Siddiqui

उधमसिंह नगर के काशीपुर में सैकड़ों निजी अस्पताल चल रहे हैं, मगर सीएमओ कार्यालय में सिर्फ 26 निजी अस्पताल पंजीकृत हैं। इसका खुलासा सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई सूचना से हुआ। पंजीकृत न कराने वाले अस्पताल संचालक मरीजों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। यही नहीं, अस्पतालों में अंट्रेंड लोग काम भी कर रहे हैं।

हैरानी की बात यह है कि 26 अस्पतालों को छोड़कर सभी अस्पताल बिना पंजीयन के चल रहे हैं। इन अस्पतालों में अंट्रेंड लोग मरीजों को इंजेक्शन लगा रहे हैं और रोगों से संबंधित जांच भी रह रहे हैं। ऐसे में मरीजों का सही तरीके से इलाज नहीं हो पा रहा है। पंजीकृत न होने से झोलाछाप डॉक्टर मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। मरीज के इलाज में लापरवाही बरतने के मामले में आए दिन किसी न किसी अस्पताल में हंगामा होता रहता है। क्लीनिकल स्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत पंजीयन जरूरी है। स्थायी पंजीयन तब होता है, जब अस्पताल पूरे मानक पर खरा उतरता है। पांच साल के लिए पंजीयन होता है और हर साल नवीनीकरण कराया जाता है। खास बात यह है कि एक्ट तो बन गए, मगर पंजीयन न कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का नोटिफिकेशन नहीं हुआ है। एक भी अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में अस्पताल में मनमानी तरीके से इलाज किया जा रहा है। एक्ट के तहत पंजीयन होने पर अस्पतालों में ट्रेंड लोगों को काम के लिए रखा जाएगा। इससे मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी।

आरटीआइ कार्यकर्ता आसिम अजहर ने स्वास्थ्य विभाग से पंजीकृत सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों की सूचना मांगी तो अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डा. अविनाश खन्ना ने उपलब्ध कराई सूचना में जिला रजिस्ट्रीकरण प्राधिकरण के तहत 26 अस्पताल पंजीकृत हैं। इनमें आठ स्थायी पंजीकृत हैं। बाकी अनंतिम हैं।

आपातकालीन सेवा 108 में लगे वाहन अब दम तोड़ने लगे

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जनता को तत्काल उपचार दिलाने के लिए चलाई गई 108 चिकित्सा वाहन सुविधा खुद बीमार नजर आ रही है। मानकों से अधिक चल चुके वाहन रास्ते में ही खराब होने लगे हैं। रोगियों को बीच रास्ते से वाहन बुक कर अस्पताल तक पहुंचना पड़ रहा है। ऐसा ही एक मामला रविवार को बेरीनाग तहसील में देखने मिला। गर्भवती को लेने जा रही 108 एंबुलेंस रास्ते में ही खराब हो गई और गर्भवती कहारती रही। बाद में गर्भवती की हालत बिगड़ने लगी तो निजी वाहन से उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। रविवार शाम चार बजे राईआगर क्षेत्र में गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा हुई तो परिजनों ने 108 चिकित्सा सेवा को कॉल किया। कॉल आते ही चिकित्सा वाहन बेरीनाग से आठ किमी दूर राईआगर के लिए निकला। बेरीनाग से मात्र तीन किमी दूर बना बैंड के पास एंबुलेंस खराब हो गई।
उधर, खराब पड़ा 108 चिकित्सा वाहन अब तक साढ़े तीन लाख किमी चल चुका है। पर्वतीय क्षेत्र में दो लाख किमी चलने के बाद वाहन अनफिट घोषित किया जाता है। सरकार साढ़े तीन लाख किमी चल चुके बूढ़े वाहनों से लोगों को त्वरित उपचार देने का दावा कर रही है। आए दिन 108 चिकित्सा वाहन के खराब होने से रोगियों को इसकी सुविधा नहीं मिल रही है। व्यवस्था का संचालन कर रही जेवीके कंपनी द्वारा वाहनों के रखरखाव के लिए कोई खर्च नहीं दिया जा रहा है।
108 वाहन में कार्य करने वाले कर्मचारियों को दो माह से वेतन नहीं मिला है। पूर्व विधायक एवं कांग्रेसी नेता नारायण राम आर्य ने कहा है कि सौ दिन पूरे होने का जश्न मना रही प्रदेश की भाजपा सरकार को जन स्वास्थ्य की कोई चिंता नहीं है।

धमाके से दहल उठा गांव

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सितारगंज के बाराकोली रेंज के जंगल से सटे शक्तिफार्म के अर्विंदनगर में तड़के हुए तेज धमाके के बाद ग्रामीण दहल गए। इसकी चपेट में एक कुत्ता आ गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने छानबीन की। ग्रामीणों ने बताया कि शनिवार रात को भी गांव से कुछ दूरी पर विस्फोट हुआ था। आशंका जताई जा रही है जंगली जानवरों के शिकार के बनाए गए बम से धमाका हुआ।

ग्राम अरविन्दनगर में रविवार की तड़के जोरदार धमाका हुआ। धमाके की आवाज सुनकर ग्रामीण घरों से बाहर निकले। इस दौरान कैलाश हालदार पुत्र शैलेंद्र का पालतू कुत्ता दरवाजे के निकट खून से लथपथ जमीन में तड़प रहा था। कुत्ते का मुंह वाला हिस्सा पूरी तरह फट चुका था। ग्राम प्रधान भवतोष आचार्य ने इसकी सूचना चौकी प्रभारी आरसी तिवारी को दी। उन्होंने मौके पर पहुंचकर छानबीन की। भवतोष आचार्य ने बताया कि घटनास्थल के धागा, कागज मिला है। उन्होंने कहा कि शनिवार की रात भी गांव से कुछ दूरी पर धमाका हुआ था। दो दिन में दो धमाके होने के बाद ग्रामीण चिंताग्रस्त है। उन्होंने संभावना जताई कि वन्य जीवों का शिकार करने के लिए देसी बम बनाए जा रहे हैं। शक्तिफार्म चौकी प्रभारी आरसी तिवारी ने बताया कि बम के धमाके से कुत्ते की मौत हुई है। उनका कहना है कि इस तरह के बम जंगली जानवरों के शिकार के लिए बनाए जाते हैं। साथ ही जंगली जानवरों को भगाने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। बाराकोली रेंज के रेंजर प्रदीप कुमार ने बताया कि किसी भी प्रकार के बम का प्रयोग जंगल में करना गैरकानूनी है। उन्होंने बताया कि इसकी जांच कराई जा रही है।

केदारनाथ में गर्मी से हुए लोग बेहाल!!!

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समुद्र तल से साढ़े तीन हजार मीटर ऊंचाई पर बसे केदारनाथ धाम का मौसम अक्सर ठंडा रहता है। लेकिन आप यह जानकार चौंक जाएंगे की इस ठंडे इलाके में भी तीर्थयात्री गरमी से हांफने लगे हैं।

बीते शनिवार को उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में काफी गर्मी हुई। इसका असर केदारनाथ धाम में भी देखने को मिला। यहां अचानक तापमान में उछाल आ गया। दोपहर डेढ़ बजे केदारनाथ में 31 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। हालांकि शाम साढ़े छह बजे केदारनाथ का तापमान 15.5 डिग्री तक गिर गया। शनिवार को केदारनाथ में सुबह से ही तेज धूप खिली रही। धूप के कारण केदारनाथ में यात्रियों के साथ ही यहां रहने वाले कर्मचारियों को गर्मी का अहसास हुआ।

केदारनाथ पुनर्निर्माण में जुटे निम के देवेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि यहां तापमान मापने के यंत्र में लगाए गए हैं। इसमें शनिवार को अधिकतम तापमान 31 डिग्री रिकार्ड किया गया। जबकि न्यूनतम तापमान 21 डिग्री रहा। वहीं रुद्रप्रयाग में भी पारा काफी अधिक रहा। रुद्रप्रयाग में दोपहर 39 डिग्री तापमान रिकार्ड किया गया। डीएम मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि केदारनाथ में तापमान रिकार्ड करने के लिए निम के पास मौसम और तापमान मापक यंत्र है, जिसकी मदद से उन्हें केदारनाथ के तापमान की जानकारी मिलती है। बता दें कि इस समय चारधाम यात्रा चरम पर है। केदारनाथ धाम में आपदा के बाद रिकार्ड यात्री दर्शन कर चुके हैं।

उत्तराखंड में एक और किसान ने की कर्ज से तंग आकर आत्महत्या

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प्रदेश में कर्ज में डूबे काश्तकारों के आत्महत्या करने की कड़ी में एक और नाम जुड़ गया है। खटीमा के कंचनपुरी गांव के 45 वर्षीय काश्तकार रामअवतार पुत्र रामप्रसाद ने शनिवार की रात पेड़ पर गमछे से फंदा लगाकर जान दे दी। प्रदेश में कर्ज में डूबे काश्तकार द्वारा आत्महत्या करने का यह दूसरा मामला है। इसके बाद प्रशासनिक अमले में खलबली मची हुई है।हांलाकि अबी प्रशासन ने किसान की आत्महत्या की वजह कर्ज होने की पुष्टी नहीं की है।

कंचनपुर गांव का किसान रामअवतार शनिवार रात खेत में पानी लगाने की बात कहकर घर से निकला था। दो दिन पूर्व उसे बैंक से नोटिस जारी किया गया था। राम अवतार पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का एक लाख 97 हजार व बैंक ऑफ बड़ौदा का पौने दो लाख रुपये कृषि ऋण बकाया था। इसको लेकर वह तनाव में चल रहा था।

शनिवार की रात उसने अपने ही खेत में यूके लिप्टिस के पेड़ पर फंदा लगाकर और उस पर झूलकर अपनी जान दे दी। मृतक की 7 पुत्रियां वह एक बेटा है। इस घटना से उसके परिवार में कोहराम मचा हुआ है। बताया जाता है कि राम अवतार के पास ढाई एकड़ जमीन थी, जिससे उसके परिवार की आजीविका चलती थी।

गौरतलब है कि 17 जून को  पिथौरागढ़ के बेरीनाग तहसील के पुरानाथल गांव के सरतोला तोक निवासी सुरेंद्र सिंह ने कर्ज के चलते उसने जहर पीकर आत्महत्या कर ली थी।  घटना के बाद ग्रामीणों व कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बेरीनाग में ऋण माफी की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया।

मुख्यमंत्री रावत ने किसान की मौत का संज्ञान लेते हुये दुःख व्यक्त किया अौर साथ ही सीएम ने मजिस्ट्रेट जाँच के आदेश दिए। ऊधमसिंह नगर जनपद की पुलिस ने किसान की मौत को पारिवारिक कलह क़रार दिया था।

उत्तराखंड में पक्ष-विपक्ष की तल्खी का रंग सियासत में दिखने लगा

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प्रचण्ड बहुमत की भाजपा सरकार को कांग्रेस सियासी पटखनी देने में कोई चूक नहीं करना चाहती। भाजपा अपने सौ दिनों के कामकाज का बखान करने में जुटी है तो कांग्रेस प्रदेश सरकार के कार्यों को सिरे से खारिज कर रही है। एक-दूसरे की धुर विरोधी भाजपा और कांग्रेस उपलब्धियों व नाकामियों को गिनाने में पीछे नहीं रहना चाहती। यही कारण है कि भाजपा जहां सौ दिन की अपनी सरकार के कार्यों का बखान करने में जुटी है, तो कांग्रेस इसे असफल बताने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाह रही है।


सौ दिन पर भाजपा और कांग्रेस एक दूसरे की उपलब्धियों और नाकामियों की अलग-अलग पटकथाएं तैयार कर रही है। इसके पीछे कहीं प्रचंड जीत का आत्म विश्वास है तो कहीं हार के बावजूद विजेताओं को चैन नहीं लेने देने का संकल्प।हालांकि राज्य निर्माण से लेकर अब तक प्रदेश का जिस गति से उत्थान होना चाहिए वो हो नहीं हो पाया। सियासी पार्टियों की राजनीतिक अड़ंगेबाजी से राज्य का हाल बेहाल है। अब तक राज्य में भाजपा और कांग्रेस की सरकारें बदलती रही हैं। हर बार सरकार कुछ करने के लिए एक्शन में आती है, लेकिन धरातल पर काम का असर देखने को नहीं मिलता। अगर धरातल पर काम होता तो सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य उत्तराखंड से पलायन की नौबत नहीं आती।


कांग्रेस हर मुद्दों को सड़क से लेकर सदन में रखकर सरकार को आईना दिखाने का काम कर रही है, तो सत्तारूढ़ दल भाजपा सौ दिन की उपलब्धियां गिनाने के लिए रणनीति के तहत आगे बढ़ना चाह रही है। पक्ष और विपक्ष की इस रस्साकसी ने राज्य में सियासत को गर्मा दिया है।

निरंकारी स्वंयसेवी कर रहे मसूरी ट्रैफिक कंट्रोल करने में मदद

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सुबह के 7 बजे मसूरी की व्यस्त सड़कों पर मेरी मुलाकात हिमांशु रावत से हुई, 2 महीने की छुट्टियों में वह अपने घर चंबा से मसूरी अाया हैं और उनके आने की वजह है उनका निरंकारी मंडल में स्वंयसेवक होना। 19 वर्षीय हिमांशु 13 स्वयंसेवकों में से एक है जो मसूरी के तीन व्यस्त चौराहें क्लॉक टॉवर से लाइब्रेरी तक 2 शिफ्ट में काम करते है, केवल यह सुनिश्चित करने के लिए कि यातायात की कोई समस्या ना रहें और वह निरंतर चलता रहे।

हर साल, मई और जून का महीना मसूरी शहर के लिए सबसे व्यस्त महीना होता है क्योंकि इस समय देशभर के टूरिस्ट गर्मी से बचने के लिए पहाड़ो में आते हैं। इन दो महीनों में ट्रैफिक की समस्या ना केवल टूरिस्ट के लिए बल्कि क्षेत्रीय लोगों के लिए भी बड़ी समस्या है। यह स्वंयसेवक खाकी यनिफार्म, जैकेट और हाथ में सीटी लिए इस काम को बखूबी निभा रहे हैं।

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स्थानीय निवासी दुर्गेश रतुड़ी बताते हैं, ‘अगर हमारे पास और अधिक निस्वार्थ निष्ठावान स्वयंसेवक होते तो मसूरी की ज्यादातर समस्याओं का हल हो जाता। विनम्र और सादगी भरा व्यवहार होने के कारण ये इन युवाओं द्वारा किया जा रहा काम और अधिक सराहनीय है।’ अपने व्यस्त काम में से थोड़ा समय निकालकर हिमांशु ने हमारी टीम से बातचीत में बताया, ‘यह तो निर्स्वाथ सेवा है, नोकं झोंक होती है,लेकिन हम प्यार से समझाते हैं और जो अगर ज्यादा तंग करता है तो उसे ट्रैफिक पुलिस समझा देती है।’

हरभजन सिंह, मसूरी ज़ोनल इंचार्ज कहते हैं कि, ‘पिछले 4-5 साल से निरंकारी मंडल सेवा दल स्थानीय मुद्दों में सहायता कर रहा है, जिससे जैसे ट्रैफिक, सफाई आदि।’ वहीं पुलिस कांस्टेबल रोशन बताते हैं कि, ‘यह लोग बड़ी मदद करते हैं, इनका स्वभाव अच्छा है, यह हमारा अच्छे से साथ देते हैं और हमारा सहयोग करते हैं।

हर बीतते साल में मसूरी के हालात खराब से बदतर होती जा रहीं है। हिमांशु जैसे स्वयंसेवकों ने मसूरी में फैले अराजकता को कुछ सुलझाने में मदद की है, और संभवत: स्थानीय लोगों को उनका शुक्रिया अदा जरुर करना चाहिए।

‘गुलाब जामुन’ में काम के लिए ऐश्वर्या ने कर दी ‘ना’

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अनुराग कश्यप ने कुछ दिनों पहले अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय की जोड़ी के साथ ‘गुलाब जामुन’ नाम से फिल्म बनाने के संकेत दिए थे। अब खबर मिल रही है कि ऐश्वर्या राय ने इस फिल्म में काम करने से मना कर दिया है और इसकी वजह बताई गई है कि उनको अपना रोल पसंद नहीं आया है। कहा जा रहा है कि अनुराग ने ऐश्वर्या से थोड़ा वक्त मांगा है, ताकि वे उनके रोल पर फिर से काम कर सकें।

सूत्र बताते हैं कि ऐश्वर्या राय ने अभी इसे लेकर रिस्पॉन्स नहीं दिया है, जबकि अनुराग ने उनके रोल पर फिर से काम करना शुरू कर दिया है। दूसरी ओर, संकेत मिले हैं कि ऐश्वर्या राय ने अभिषेक के साथ मणिरत्नम की नई फिल्म के प्रोजेक्ट को हरी झंडी दिखा दी है। ऐश्वर्या और अभिषेक ने पिछली बार मणिरत्नम की ही फिल्म ‘रावण’ में एक साथ काम किया था, जो 2010 में रिलीज हुई थी। मणिरत्नम की धीरूभाई अंबानी की जिंदगी पर बनी फिल्म ‘गुरु’ में भी दोनों ने साथ काम किया था।
ऐश्वर्या राय को लेकर एक और खबर ये है कि राकेश मेहरा द्वारा बनाई जाने वाली फिल्म ‘फन्ने खान’ में वे अनिल कपूर की हीरोइन के तौर पर काम करने जा रही हैं, जो इस साल अक्टूबर में शुरू होने वाली है। अनिल के साथ ऐश्वर्या राय बच्चन 17 साल के गैप के बाद किसी फिल्म में काम करने जा रही हैं। 17 साल पहले फिल्म ‘हमारा दिल आपके पास है’ में काम किया था, जबकि 1999 में आई सुभाष घई की फिल्म ‘ताल’ में भी दोनों ने साथ काम किया था। अनुराग कश्यप की बात है, तो रणबीर कपूर के साथ ‘बॉम्बे वेलवेट’ बनाने के बाद बतौर निर्देशक उनकी हालत खराब है।

शौचालय निर्माण तो हो गया, पर नहीं हुआ भुगतान

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भले ही केंद्र सरकार उत्तराखंड में स्वच्छ भारत अभियान के तहत खुले में शौच मुक्त हेतु सभी घरों में शौचालय बनाने की योजना को परवान चढ़ने के दावे करती हो, लेकिन फिलहाल स्वच्छ भारत का ये सपना उधार की नींव पर खड़ा है। क्योंकि, स्वजल ने योजना के तहत लोगों से शौचालय तो बनवा दिए, लेकिन भुगतान अब तक नहीं किया गया।

चूंकि, ये योजना आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी बीपीएल के लिए शुरू की गई है तो इनमें अधिकांश परिवार ऐसे हैं, जिन्होंने उधार या कर्ज के पैसे से शौचालयों का निर्माण तो करा लिया, लेकिन भुगतान नहीं होने के कारण इन लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। वर्तमान की स्थिति पर गौर करें तो स्वजल प्रदेश में ऐसे 90 हजार शौचालयों का निर्माण स्वयं भवन स्वामियों से कराया जा चुका है जिनका अब तक भुगतान नहीं किया गया। इन लोगों को प्रति शौचालय 12 हजार रुपये का भुगतान किया जाना है। ऐसा नहीं है कि विभाग ने भुगतान का प्रयास नहीं किया, बल्कि स्वजल की ओर से इन लाभार्थियों को भुगतान करने के लिए 107 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर केंद्र को भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक बजट नहीं भेजा गया है। जबकि, दूसरी ओर शौचालय निर्माण का भुगतान न होने से परेशान लोग आए दिन अफसरों के पास पहुंच रहे हैं। उदाहरण के तौर पर दून के सेवली गांव, निवासी राजकुमार बताते हैं कि अधिकारियों के कहने पर उन्होंने उधार के पैसे लेकर शौचालय तो बनवा लिया, लेकिन अब तक पैसे नहीं दिए गए, जबकि उधार देने वाले लगातार वसूली के लिए घर के चक्कर काट रहे हैं।

वहीं, स्मिथनगर निवासी, जगदीश ने बताया कि पहले जब अधिकारी बार-बार गांव आकर शौचालय बनवाने को कहते थे तो उन्होंने कर्ज के पैसों से शौचालय बनवा लिया। अब तक न ही उन्हें भुगतान किया गया और न अब अधिकारी गांव में आते हैं। स्वजल परियोजना के निदेशक राघव लंगर ने बताया कि जिन लोगों से व्यक्तिगत रूप से शौचालयों का निर्माण कराया गया है, उन्हें अभी 107 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना है। इस संबंध में केंद्र को पत्र भेजा जा चुका है, जैसे ही बजट मिलेगा लोगों का भुगतान कर दिया जाएगा।