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सौ दिन में उत्तराखंड सरकार के कई निर्णय जन विरोधी: प्रीतम सिंह

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प्रदेश की भाजपा सरकार के 100 दिन पूरे होने के मौके पर कांग्रेस ने कहा कि इस अवधि में कई जन विरोधी निर्णय लिये हैं, जिसका असर राज्य की गरीब जनता को भुगतना पड़ा है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने उत्तराखंड की गरीब जनता को सस्ते गल्ले के माध्यम से मिलने वाले गेहूं एवं चावल के दामों में दोगुनी वृद्धि कर गरीब आदमी के पेट पर लात मारने का काम किया है। कांग्रेस शासन में गेहूं चार रुपये किलो तथा चावल नौ रुपये किलो मिलता था और अब दाम बढ़ाकर गेहूं 8.60 रुपये किलो तथा चावल के दाम 15 रुपये प्रति किलो कर दिये गये हैं।


दूसरी ओर केन्द्र सरकार द्वारा सस्ते गल्ले के माध्यम से वितरित की जाने वाली चीनी और मिट्टी के तेल पर मिलने वाली सब्सिडी को बन्द कर गरीब जनता के साथ छलावा किया गया है। सरकार ने अपने 100 दिन के कार्यकाल में दो बार बिजली के दाम, पानी, सीवर के दाम बढ़ाने के साथ-साथ गरीबों को अस्पताल में मिलने वाली सुविधा में कटौती कर पहले से महंगाई की मार झेल रही गरीब जनता की जेब पर डाका डालने का काम किया है।


चुनाव के दौरान भाजपा ने अपने दृष्टि पत्र में राज्य की जनता से वायदा किया था कि सरकार बनने की दषा में किसानों के कर्ज माफ किये जायेंगे, किसानों को ब्याज रहित ऋण दिया जायेगा तथा गन्ना किसानों का बकाया भुगतान 15 दिन के अन्दर किया जायेगा। किन्तु राज्य सरकार अपने इन तीनों वायदों से मुकर गई है तथा इसी की परिणति है कि पिथौरागढ़ के बेरीनाग ब्लाॅक के डौल डुंगर गांव के किसान सुरेन्द्र सिंह को आत्महत्या का रास्ता चुनना पड़ा। राज्य सरकार की आबकारी नीति पूर्ण रूप से शराब माफि या को संरक्षण देने, शराब की तस्करी को बढ़ावा देने तथा उत्तराखंड के गांवों में हर घर तक शराब पहुंचाने वाली है।
मुख्यमंत्री ने शराब के कारोबार को कम करने का आश्वासन देने के बावजूद राज्य सरकार द्वारा शराब से मिलने वाले राजस्व का लक्ष्य 1800 करोड़ से बढ़ाकर 2300 करोड़ कर शराब माफि या के आगे घुटने टेकने का काम किया है। भयमुक्त सरकार के अपने वायदे पर अमल करने में सरकार पूरी तरह नाकाम रही है। राज्य सरकार के 100 दिन के कार्यकाल में राज्य में हत्या, लूट,चोरी, डकैती, बलात्कार, चेन स्नैचिंग तथा टप्पेबाजी आदि अपराधों की घटनाओं में भारी वृद्धि हुई है। राज्य की जनता में भय का वातावरण व्याप्त है तथा महिलाएं अपने को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। 24 मार्च 2017 को रामनगर वन प्रभाग में कार्यरत कर्मी पहलवान सिंह की अवैध खनन में लिप्त अपराधियों द्वारा ट्रैक्टर के नीचे दबाकर हत्या कर दी गई। राज्य में चल रही चारधाम यात्रा में अव्यवस्थाओं का बोलबाला है।


अधिकारियों एवं यात्रा से सम्बन्धित विभागीय मंत्री में आपसी सामंजस्य न होने के कारण यात्रियों के पंजीकरणए यात्रा मार्ग पर परिवहन, स्वास्थ्य, दूर संचार व्यवस्थायें पूर्ण रूप से चरमराई हुई हैं। यात्रा मार्ग पर अव्यवस्थाओं के कारण अभी तक लगभग 31 यात्रियों की जान जा चुकी है, जो राज्य सरकार की चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं की पोल खोल रहे हैं। हैली टेण्डर सेवा में ऐसी कम्पनियों को राज्य में हैलीकॉप्टर उडाने की अनुमति दी गई जिनके अनुभव एवं क्रिया-कलाप पर निरंतर प्रश्न खड़े हो रहे हैं तथा राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन की जानकारी में आने के बावजूद निर्धारित दरों से दोगुनी दरों पर यात्रियों से अवैध तरीके से वसूली की जा रही है और प्रशासन मौन है। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2017 के लिए सभी क्षेत्रों में निराशाजनक बजट प्रस्तुत किया गया है। गैरसैंण उत्तराखंड राज्य आन्दोलन की भावना है।


पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने उत्तराखंड राज्य निर्माण की अवधारणा को साकार रूप देने एवं जनभावनाओं के अनुरूप गैरसैंण में विधानसभा भवन का निर्माण करवाते हुए माह नवम्बर 2015 में गैरसैण में विधानसभा सत्र आहुत किया गया। इसी के साथ राज्य विधानसभा में वर्ष 2017 का बजट सत्र गैरसैंण में आहुत करने का संकल्प पारित किया गया था। परन्तु वर्तमान सरकार ने सदन की भावना के विपरीत बजट सत्र देहरादून में आहुत कर राज्य निर्माण की भावना का अपमान किया है।

सड़क सुरक्षा विज्ञापन मामले पर बुमराह ने जताई नाराजगी

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जयपुर ट्रैफिक पुलिस भारतीय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह द्वारा भारत-पाकिस्तान के फाइनल मैच में फेंकी गई एक नो बॉल को सड़क सुरक्षा का विज्ञापन बनाने पर बुमराह ने नाराजगी जतायी है।बुमराह ने विज्ञापन की फोटो खींच इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘जयपुर ट्रैफिक पुलिस बहुत अच्छा, आपका यह विज्ञापन यह दर्शाता है कि आप देश के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देने वाले व्यक्ति का कितना सम्मान करते हैं। अपने दूसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा कि फिर भी कोई बात नहीं, मैं अपनी इस गलती का मजाक नहीं बनने दूंगा, क्योंकि मुझे विश्वास है कि इंसान अपनी गलतियों से ही सीखता है।’
बतादें कि जयपुर ट्रैफिक पुलिस का यह विज्ञापन इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा का विषय बन रहा है। इस विज्ञापन में जेबरा क्रॉसिंग को नहीं लांघने की हिदायत के साथ जसप्रीत बुमराह द्वारा फेंकी गई नो बॉल की तस्वीर भी लगी है। साथ में लिखा है कि ‘लाइन क्रॉस’ ना करें।

उत्तराखंड के इस गांव में कोई प्रधान बनने को तैयार नहीं

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आमतौर पर गांवों में प्रधान बनने के लिए मारामारी रहती है। प्रत्याशी चुनाव जीतने के लिए धनबल के साथ हर तरह के हथकंडे अपनाते हैं, लेकिन उत्तराखंड की एक ग्राम पंचायत ऐसी भी हैं, जहां कोई प्रधान बनने को तैयार ही नहीं।

टिहरी जिले का घोघस गांव के प्रधान की एक साल पहले सड़क हादसे में मौत हो गई थी। तब से यह सीट खाली है। प्रशासन उप चुनाव के लिए दो बार अधिसूचना जारी कर चुका है, लेकिन किसी ने भी नामांकन पत्र नहीं भरा। जाखणीधार ब्लॉक की घोघस ग्राम पंचायत में 52 सामान्य जाति, 34 ओबीसी तथा 8 परिवार अनुसूचित जाति के हैं। इस गांव में ग्राम प्रधान की सीट इस समय ओबीसी उम्मीदवार के लिए आरक्षित है।

वर्ष 2014 में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में इस सीट पर गांव के मोहम्मद इब्राहिम का निर्विरोध चुनाव हुआ था, लेकिन एक साल पहले दिल्ली जाते समय मेरठ में उनकी सड़क हादसे में मौत हो गई थी। तब से यह सीट खाली चल रही है। प्रशासन यहां उपचुनाव कराने के लिए दो बार अधिसूचना जारी कर चुका है, लेकिन किसी ने भी नामांकन नहीं कराया। प्रधान के लिए लोगों का इच्छुक न होना चर्चा का विषय बना हुआ है। चर्चा यह भी है कि प्रधान की सड़क हादसे में मौत के बाद लोग सहमे हुए हैं।

ग्राम विकास अधिकारी प्रकाश चंद रतूड़ी ने बताया कि घोघस गांव में उप चुनाव के लिए दो बार अधिसूचना जारी हो चुकी है। इस बार भी 13 जून को चुनाव होना था। चुनाव की अधिसूचना पंचायत भवन पर चस्पा भी गई थी, ताकि लोग नामांकन कराए, लेकिन किसी ने भी नामांकन नहीं कराया।

उप प्रधान नंद किशोर डबराल का कहना है कि हमारे गांव में प्रधान की सीट ओबीसी आरक्षित है। ओबीसी के अधिकांश परिवार बाहर रहते हैं। करीब बीस परिवार गांव में रहते हैं, लेकिन उनमें कोई प्रधान बनने के लिए इच्छुक नहीं है। प्रधान का कार्यभार मैं खुद संभाल रहा हूं।

गलत दवा से मृत मरीज के परिजनों की पुकार पीएमओ तक

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उत्तराखंड का प्रमुख चिकित्सालय श्री गुरूराम राय मेडिकल कॉलेज पर एक मरीज को गलत दवा देकर मौत के घाट उतारने का आरोप है। यह आरोप महिला श्रीमती स्व.कृष्णा वर्मा के पति एस.के.वर्मा ने लगाया है। खुड़बुड़ा निवासी एस.के.वर्मा ने इस मामले को प्रधानमंत्री कार्यालय तक भेजा है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से अनुभाग अधिकारी कुमार शैलेन्द्र ने 5 मई को प्रदेश के मुख्य सचिव को भेजे पत्र में कहा है कि 28 अप्रैल को एस.के.वर्मा की तरफ से एक पत्र मिला है जिस पर उचित कार्यवाही आवश्यक है। उन्होंने इस पत्र की प्रतिलिपि एस.के. वर्मा 9 खुड़बुड़ा मौहल्ला देहरादून को भी भेजा है। यह पत्र पीएमओपीजी/डी/2017/0206430 के माध्यम से भेजा गया है।
इस मामले की जांच स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कर रहे हैं। अब तक उन्होंने पी.एम.ओ. को जवाब नहीं भेजा है,जबकि इस मामले की गूंज राज्यपाल प्रमुख सचिव उत्तराखंड समेत सभी अधिकारियों से की गई है। वर्मा ने गुरूराम राय मेडिकल कॉलेज पर और कई गंभीर आरोप लगाए हैं और बताया है कि उनकी पत्नी श्रीमती कृष्णा वर्मा को श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में 23 मार्च को गयानोकॉलोजी विभाग में यूरिन व स्टूल की रूकावट की समस्या के कारण भर्ती कराया गया था। मेरा पुत्र राजीव वर्मा डा. लाल की बल्ड 21 मार्च को रिपोर्ट लेकर 23 मार्च को पीजीआई चण्डीगढ़ ले गया था। जहां के डा. आदित्य द्वारा आगे इलाज के लिए सलाह दी गई थी। इसके पूर्व 3 वर्ष से पीजीआई में इलाज चल रहा था। सुबह एच.ओ.डी. मेडिकल राउंड चिकित्सक विजिट पर आए तथा मरीज को वार्ड 5 के जनरल बेड पर ग्यानकोलोजिस्ट विभाग से शिफ्ट करवाया गया। पीजीआई के चिकित्सक के रिपोर्ट के अनुसार 1 यूनिट बल्ड बैंक अस्पताल से चढ़ाया गया तथा 24 मार्च को भी एक और यूनिट चढ़ा दिया गया। 25 मार्च को बल्ड प्लेटलेट्स को मांग कर रखे गए। पी.जी.आई. चंडीगढ़ के अनुसार अधिल ब्लड और प्लेटलेट्स नहीं दिए जाने थे। रात्रि 11 बजे ब्लड ट्रांसफ्यूजन रोक दिया गया। रात्रि 8:30 बजे नई बल्ड केंसर से सम्बंधित दवाई बी-नॉट 400 एमजी (इमटना ए.बी.),हाइप्रा 500 एमजी की की जगह दी गई,जबकि पीजीआई के डा. आदित्य ने मरीज की शारीरिक स्थिति के अनुसार हाईपावर मेडिसन नहीं दी जानी थी संभव है कि यह दवा भी उनकी मृत्यु के कारण हो सकती है। रात्रि की दवा के बाद ही मरीज की हालत बिगड़ी। उन्होंने तीन दिनों में लगभग 60 हजार रूपए व्यय किया गया। इन्दिरेश हॉस्पिटल के 3 चिकित्सक जो मरीज को 23 से 26 तारीख तक देख रहे थे। पी.जी.आई.अस्पताल की फाइल को ले गए और उससे समझते रहे, लेकिन इलाज अपने ही तरीके से किया। 4 दिन रात लगातार वहां रहा और सभी कुछ मेरे सामने हुआ। उन्होंने बताया कि अस्पताल के चिकित्सकों की मनमानी व लापरवाही तथा बीमारी को सही तरीके से न समझ पाने के कारण इनका इलाज सफल नहीं हो पाया और उनका देहांत हो गया।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने दिया गोलमोल जवाब
इस संदर्भ में श्री गुरूराम राय मेडिकल कॉलेज के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. वी.के. विहारी से बातचीत की गई। डा. विहारी बड़ी मुश्किल से फोन पर आए और गोलमोल जवाब दिया। उनका कहना था कि हम इस प्रकरण की अन्तरिक जांच करा रहे हैं,जो परिणाम होगा उसे प्रधानमंत्री कार्यालय को भेज दिया जाएगा। यह पूछे जाने पर कि इस मामले में लापरवाही हुई है उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। मेडिकल कॉलेज द्वारा बताया गया कि डा.वी.के. विहारी नहीं हैं। उनके स्थान पर विनय राय या डा. गर्ग से संपर्क किया जा सकता है। मेडिकल कॉलेज के पीआरओ भूपेन्द्र रतूड़ी से पूछा गया तो कहीं जाकर डा. विहारी से बात हुई,लेकिन उनका जवाब भी गोलमोल रहा।

फर्जी दिव्यांगों से 25 लाख वसूलने में नाकाम

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समाज कल्याण विभाग की कार्य शैली देखिए, खुद तो फर्जी पेंशनर्स पकड़ नहीं रहे और सोशल ऑडिट में जो फर्जी पेंशनर्स सामने आते हैं, विभाग उनसे वसूली की कार्रवाई भी नहीं कर पा रहा।

इसी का नतीजा है कि पिछले साल ऑडिट में सामने आए 203 फर्जी दिव्यांग पेंशन ले रहे लोगों से अधिकारी अब तक 25 लाख रुपये की वसूली नहीं कर पाए हैं। अब मामले को संज्ञान में लेते हुए आयुक्त निशक्तजन न्यायालय ने समाज कल्याण विभाग को नोटिस भेजते हुए जवाब मांगा है। दरअसल, शासन की ओर से पिछले साल चलवाए गए पेंशन के सोशल ऑडिट में ऐसे 203 लोग सामने आए थे। जो दिव्यांग न होते हुए भी दिव्यांग पेंशन का लाभ उठा रहे थे या फिर इनमें से कई लोगों की सालों पहले मृत्यु हो चुकी थी और समाज कल्याण विभाग की ओर से उनके खातों में अभी भी दिव्यांग पेंशन भेजी जा रही थी।
ऑडिट में मामला सामने आने के बाद समाज कल्याण ने इन पेंशनर्स का रिकाॅर्ड खंगाला तो उनसे 25 लाख रुपये वसूली करने का मामला सामने आया। इसके बाद शासन ने निर्देश दिए थे कि इन सभी लोगों से पेंशन की रिकवरी करने के साथ ही अपात्र लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही मृत लोगों के खातों से पेंशन के पैसे की रिकवरी की जाए लेकिन, अफसरों की सुस्ती भारी पड़ी और अब तक ये रिकवरी नहीं हो पाई है। शासन की सूचना के बाद आयुक्त निशक्तजन न्यायालय ने मामले का संज्ञान लिया है। इस संबंध में न्यायालय ने समाज कल्याण विभाग को नोटिस जारी कर दिया है।
न्यायालय ने पूछा है कि विभाग ने ये लापरवाही क्यों की है और भविष्य में कब तक विभाग ये वसूली पूरी कर लेगा। अपर सचिव समाज कल्याण मनोज चंद्र ने बताया कि बीते साल 203 लोग ऐसे मिले थे, या तो जिनकी मृत्यु हो चुकी थी या फिर अपात्र होने के बावजूद वह दिव्यांग पेंशन का लाभ ले रहे थे। इस संबंध में अधिकारियों को शीघ्र वसूली पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

एमडीडीए वीसी से मिले मसूरी विधायक जोशी

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मसूरी विधायक गणेश जोशी ने पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों संग मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विनय शंकर पाण्डे से मसूरी में विकास कार्य कराये जाने के सम्बन्ध में भेंट की।
शनिवार को क्षेत्र की समस्याओं को लेकर मसूरी विधायक गणेश जोशी एमडीडीए वीसी से भेंट कर बंद पड़े कार्यो को चालू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए निविदायें कई बार जारी की गई लेकिन राजनीतिक दबाव के कारण वह काम आज तक धरातल पर नहीं उतर सका। उन्होनें प्राधिकरण के उपाध्यक्ष से क्षेत्र की कुछ महत्वपूर्ण कार्य एवं मुख्यमंत्री की घोषणाओं को प्राथमिकता पर निष्पादित किये जाने की बात कही।
प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विनय शंकर पाण्डेय ने विधायक जोशी को विश्वास दिलाते हुए कहा कि पूर्व में निरस्त निविदाओं को दोबारा से लगाया जाएगा और मसूरी क्षेत्र के महत्वपूर्ण कार्य एवं मुख्यमंत्री घोषणाओं को प्राथमिकता के आधार पर निष्पादित किया जाएगा। इस अवसर पर मंडल अध्यक्ष पूनम नौटियाल, महामंत्री सुरेन्द्र राणा, दीपक पुण्डीर, ग्राम प्रधान राकेश शर्मा सहित एमडीडीए के अधीक्षण अभियंता अनिल त्यागी, अधिशासी अभियंता एसएस नेगी उपस्थित रहे।

अनोखे ढंग से किया कांग्रेस ने विरोध

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जगह-जगह मोबाइल वैन से शराब बिक्री के मामले में कांग्रेस के प्रदेश महासचिव व पूर्व सीएम हरीश रावत के पुत्र आनंद रावत ने कार्यकर्ताओं के साथ सरकार के फैसले का अनूठे अंदाज में विरोध किया। मुखानी चौराहे से आनंद खुद वाहन चलाते हुए गली-गली घूमे। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सीएम और मंत्रियों के मुखोटे पहनकर व्यंगात्मक तरीके से जनता को शराब बिक्री के लिए सरकार के बारे में बताया।

unnamedमोबाइल वैन से आनंद रावत ने खुद शराब बेचने का नाटक करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार की गलत नीति के खिलाफ जनता को प्रदेशभर में जागरूक किया जाएगा। आनंद ने तंज कसा कि त्रिवेंद्र रावत सरकार ने जिस तरह आवासीय क्षेत्र की गलियों में शराब की दुकानें खुलवा दी हैं, उसे देखते हुए अब शराब की होम डिलीवरी के लिए टोल फ्री नंबर ही जारी करना शेष रह गया है। यह वाहन मुखानी, हीरानगर, पीलीकोठी, नैनीताल रोड, लालडांठ, दमुवाढूंगा होते हुए काठगोदाम तक घुमाया गया। इस कार्यक्रम में राहुल सोनकर, डॉ सुष्मिता पंत, हेमंत कोठारी, पुष्कर दानू सहित करीब 50 कार्यकर्ता शामिल रहे।

धर्म परिवर्तन से शादी कर कोर्ट से मांगी सुरक्षा

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हाईकोर्ट ने धर्म परिवर्तन कर शादी करने वाली युवती व उसके पति समेत परिवारवालों को सुरक्षा मुहैया कराने के आदेश दिए हैं। युवती ने हिंदू युवक से विवाह किया है।

हरिद्वार जिले के बहादराबाद की रहने वाली आरोही उर्फ शबाना पत्नी आसित गोला ने अदालत में दिए प्रार्थना पत्र में खुद को बालिग बताया। कहा कि  इसी माह 20 जून को उसने हिंदू धर्म अपनाया और आसित से हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार विवाह किया।  21 जून को रजिस्ट्रार लक्सर से विवाह प्रमाण पत्र भी प्राप्त किया है।

युवती के अनुसार गैर मजहब में शादी करने के कारण उसका भाई शाहरुख व बिरादरी के अन्य लोग उसे और पति को जान से मारने की नियत से तलाश रहे हैं। पति की जान को खतरा है।

न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ ने मामले को सुनने के बाद हरिद्वार के एसएसपी को दंपती व परिवारवालों को सुरक्षा मुहैया कराने के आदेश दिए।

संसद में होगा फिल्म ‘रागदेश’ का ट्रेलर लॉन्च

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पहली बार देश की संसद में किसी फिल्म का ट्रेलर लॉन्च होने जा रहा है। निर्माता-निर्देशक तिग्मांशु धूलिया की नई फिल्म ‘रागदेश’ का ट्रेलर लॉन्च संसद भवन में होगा। हालांकि अब तक इस समारोह के लिए कोई तारीख का एेलान नहीं हुआ है, लेकिन तिग्मांशु धूलिया ने इसे अपने लिए सम्मान मानकर खुशी जाहिर की है।

तिग्मांशु की ये फिल्म इंडियन नेशनल आर्मी के तीन सेना अधिकारियों को ब्रिटिश राज में कोर्ट मार्शल किए जाने की घटना पर आधारित है। दिल्ली के एेतिहासिक लालकिले में चले इस कोर्ट मार्शल के बाद तीनों अधिकारियों को सजा-ए-मौत सुनाई गई थी। कुणाल कपूर, जो अमिताभ बच्चन के छोटे भाई अजिताभ के दामाद हैं के साथ हाल ही में रामगोपाल वर्मा की फिल्म ‘सरकार-3’ में नजर आए अमित साद और मोहित मारवाह इन अधिकारियों के रोल कर रहे हैं।

राज्यसभा टीवी ने पहली बार फिल्म निर्माण में उतरते हुए इस फिल्म को बनाया है। गुरदीप सिंह सप्पल इसके निर्माता हैं। तिग्मांशु धूलिया 2013 में आई अपनी फिल्म ‘पान सिंह तोमर’ के लिए नेशनल अवॉर्ड जीत चुके हैं। ‘रागदेश’ के बाद वे अपनी फिल्म ‘साहेब बीवी और गैंगस्टर’ की तीसरी कड़ी शुरू करने जा रहे हैं, जिसमें पहली बार वे संजय दत्त के साथ काम करने जा रहे हैं। बतौर अभिनेता तिग्मांशु ने अनुराग कश्यप की फिल्म ‘गैंग ऑफ वासेपुर’ और सलमान खान की कंपनी में बनी फिल्म ‘हीरो’ में काम किया है।

आशिकी 3′ में आलिया के साथ नजर आएंगे सिद्धार्थ

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हाल ही में फिल्म ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ के रिलीज होने के बाद निर्देशक मोहित सूरी ने अब आशिकी सीरिज की तीसरी फिल्म की तैयारियों को आगे बढ़ाया है और खबर मिली है कि ‘आशिकी 3’ में आलिया भट्ट के साथ सिद्धार्थ मल्होत्रा काम करने जा रहे हैं। 90 के दशक में बनी राहुल राय और अनु अग्रवाल की जोड़ी की ‘आशिकी’ की सीक्वल के तौर पर बनी मोहित सूरी की ‘आशिकी 2’ में आदित्य राय कपूर और श्रद्धा कपूर की जोड़ी ने काम किया था और हिट संगीत की बदौलत इस फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर भारी सफलता मिली थी।

‘आशिकी 3’ को लेकर काफी दिनों से आलिया और सिद्धार्थ के साथ काम करने को लेकर अफवाहों का बाजार गर्म था, लेकिन अब ये खबर सच साबित होती जा रही है। मोहित सूरी के हवाले से इस खबर को सही माना गया है और यहां तक संकेत दिए गए हैं कि इस साल के अंत तक ‘आशिकी 3’ की शूटिंग शुरू हो जाएगी।

आलिया भट्ट और सिद्धार्थ के करियर की शुरुआत एक ही फिल्म ‘स्टूडेंट्स ऑफ द ईयर से हुई थी’। इसके बाद करण जौहर के ही बैनर में बनी फिल्म कपूर एंड संस में साथ काम किया था। निजी जिंदगी में दोनों एक दूसरे के काफी करीब माने जाते हैं और दोनों के अफेयर को लेकर वक्त-वक्त पर चर्चा रहती है।

कुछ ही दिनों पहले दोनों दस दिनों तक बाली के समुद्र किनारे छुट्टियां बिताकर लौटे हैं। आलिया जल्दी ही मेघना गुलजार की फिल्म में काम करने जा रही हैं, जबकि सिद्धार्थ इन दिनों नीरज पांडे की फिल्म ‘अय्यारी’ में काम कर रहे हैं।