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उत्तराखंड में पक्ष-विपक्ष की तल्खी का रंग सियासत में दिखने लगा

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प्रचण्ड बहुमत की भाजपा सरकार को कांग्रेस सियासी पटखनी देने में कोई चूक नहीं करना चाहती। भाजपा अपने सौ दिनों के कामकाज का बखान करने में जुटी है तो कांग्रेस प्रदेश सरकार के कार्यों को सिरे से खारिज कर रही है। एक-दूसरे की धुर विरोधी भाजपा और कांग्रेस उपलब्धियों व नाकामियों को गिनाने में पीछे नहीं रहना चाहती। यही कारण है कि भाजपा जहां सौ दिन की अपनी सरकार के कार्यों का बखान करने में जुटी है, तो कांग्रेस इसे असफल बताने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाह रही है।


सौ दिन पर भाजपा और कांग्रेस एक दूसरे की उपलब्धियों और नाकामियों की अलग-अलग पटकथाएं तैयार कर रही है। इसके पीछे कहीं प्रचंड जीत का आत्म विश्वास है तो कहीं हार के बावजूद विजेताओं को चैन नहीं लेने देने का संकल्प।हालांकि राज्य निर्माण से लेकर अब तक प्रदेश का जिस गति से उत्थान होना चाहिए वो हो नहीं हो पाया। सियासी पार्टियों की राजनीतिक अड़ंगेबाजी से राज्य का हाल बेहाल है। अब तक राज्य में भाजपा और कांग्रेस की सरकारें बदलती रही हैं। हर बार सरकार कुछ करने के लिए एक्शन में आती है, लेकिन धरातल पर काम का असर देखने को नहीं मिलता। अगर धरातल पर काम होता तो सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य उत्तराखंड से पलायन की नौबत नहीं आती।


कांग्रेस हर मुद्दों को सड़क से लेकर सदन में रखकर सरकार को आईना दिखाने का काम कर रही है, तो सत्तारूढ़ दल भाजपा सौ दिन की उपलब्धियां गिनाने के लिए रणनीति के तहत आगे बढ़ना चाह रही है। पक्ष और विपक्ष की इस रस्साकसी ने राज्य में सियासत को गर्मा दिया है।

निरंकारी स्वंयसेवी कर रहे मसूरी ट्रैफिक कंट्रोल करने में मदद

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सुबह के 7 बजे मसूरी की व्यस्त सड़कों पर मेरी मुलाकात हिमांशु रावत से हुई, 2 महीने की छुट्टियों में वह अपने घर चंबा से मसूरी अाया हैं और उनके आने की वजह है उनका निरंकारी मंडल में स्वंयसेवक होना। 19 वर्षीय हिमांशु 13 स्वयंसेवकों में से एक है जो मसूरी के तीन व्यस्त चौराहें क्लॉक टॉवर से लाइब्रेरी तक 2 शिफ्ट में काम करते है, केवल यह सुनिश्चित करने के लिए कि यातायात की कोई समस्या ना रहें और वह निरंतर चलता रहे।

हर साल, मई और जून का महीना मसूरी शहर के लिए सबसे व्यस्त महीना होता है क्योंकि इस समय देशभर के टूरिस्ट गर्मी से बचने के लिए पहाड़ो में आते हैं। इन दो महीनों में ट्रैफिक की समस्या ना केवल टूरिस्ट के लिए बल्कि क्षेत्रीय लोगों के लिए भी बड़ी समस्या है। यह स्वंयसेवक खाकी यनिफार्म, जैकेट और हाथ में सीटी लिए इस काम को बखूबी निभा रहे हैं।

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स्थानीय निवासी दुर्गेश रतुड़ी बताते हैं, ‘अगर हमारे पास और अधिक निस्वार्थ निष्ठावान स्वयंसेवक होते तो मसूरी की ज्यादातर समस्याओं का हल हो जाता। विनम्र और सादगी भरा व्यवहार होने के कारण ये इन युवाओं द्वारा किया जा रहा काम और अधिक सराहनीय है।’ अपने व्यस्त काम में से थोड़ा समय निकालकर हिमांशु ने हमारी टीम से बातचीत में बताया, ‘यह तो निर्स्वाथ सेवा है, नोकं झोंक होती है,लेकिन हम प्यार से समझाते हैं और जो अगर ज्यादा तंग करता है तो उसे ट्रैफिक पुलिस समझा देती है।’

हरभजन सिंह, मसूरी ज़ोनल इंचार्ज कहते हैं कि, ‘पिछले 4-5 साल से निरंकारी मंडल सेवा दल स्थानीय मुद्दों में सहायता कर रहा है, जिससे जैसे ट्रैफिक, सफाई आदि।’ वहीं पुलिस कांस्टेबल रोशन बताते हैं कि, ‘यह लोग बड़ी मदद करते हैं, इनका स्वभाव अच्छा है, यह हमारा अच्छे से साथ देते हैं और हमारा सहयोग करते हैं।

हर बीतते साल में मसूरी के हालात खराब से बदतर होती जा रहीं है। हिमांशु जैसे स्वयंसेवकों ने मसूरी में फैले अराजकता को कुछ सुलझाने में मदद की है, और संभवत: स्थानीय लोगों को उनका शुक्रिया अदा जरुर करना चाहिए।

‘गुलाब जामुन’ में काम के लिए ऐश्वर्या ने कर दी ‘ना’

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अनुराग कश्यप ने कुछ दिनों पहले अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय की जोड़ी के साथ ‘गुलाब जामुन’ नाम से फिल्म बनाने के संकेत दिए थे। अब खबर मिल रही है कि ऐश्वर्या राय ने इस फिल्म में काम करने से मना कर दिया है और इसकी वजह बताई गई है कि उनको अपना रोल पसंद नहीं आया है। कहा जा रहा है कि अनुराग ने ऐश्वर्या से थोड़ा वक्त मांगा है, ताकि वे उनके रोल पर फिर से काम कर सकें।

सूत्र बताते हैं कि ऐश्वर्या राय ने अभी इसे लेकर रिस्पॉन्स नहीं दिया है, जबकि अनुराग ने उनके रोल पर फिर से काम करना शुरू कर दिया है। दूसरी ओर, संकेत मिले हैं कि ऐश्वर्या राय ने अभिषेक के साथ मणिरत्नम की नई फिल्म के प्रोजेक्ट को हरी झंडी दिखा दी है। ऐश्वर्या और अभिषेक ने पिछली बार मणिरत्नम की ही फिल्म ‘रावण’ में एक साथ काम किया था, जो 2010 में रिलीज हुई थी। मणिरत्नम की धीरूभाई अंबानी की जिंदगी पर बनी फिल्म ‘गुरु’ में भी दोनों ने साथ काम किया था।
ऐश्वर्या राय को लेकर एक और खबर ये है कि राकेश मेहरा द्वारा बनाई जाने वाली फिल्म ‘फन्ने खान’ में वे अनिल कपूर की हीरोइन के तौर पर काम करने जा रही हैं, जो इस साल अक्टूबर में शुरू होने वाली है। अनिल के साथ ऐश्वर्या राय बच्चन 17 साल के गैप के बाद किसी फिल्म में काम करने जा रही हैं। 17 साल पहले फिल्म ‘हमारा दिल आपके पास है’ में काम किया था, जबकि 1999 में आई सुभाष घई की फिल्म ‘ताल’ में भी दोनों ने साथ काम किया था। अनुराग कश्यप की बात है, तो रणबीर कपूर के साथ ‘बॉम्बे वेलवेट’ बनाने के बाद बतौर निर्देशक उनकी हालत खराब है।

शौचालय निर्माण तो हो गया, पर नहीं हुआ भुगतान

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भले ही केंद्र सरकार उत्तराखंड में स्वच्छ भारत अभियान के तहत खुले में शौच मुक्त हेतु सभी घरों में शौचालय बनाने की योजना को परवान चढ़ने के दावे करती हो, लेकिन फिलहाल स्वच्छ भारत का ये सपना उधार की नींव पर खड़ा है। क्योंकि, स्वजल ने योजना के तहत लोगों से शौचालय तो बनवा दिए, लेकिन भुगतान अब तक नहीं किया गया।

चूंकि, ये योजना आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी बीपीएल के लिए शुरू की गई है तो इनमें अधिकांश परिवार ऐसे हैं, जिन्होंने उधार या कर्ज के पैसे से शौचालयों का निर्माण तो करा लिया, लेकिन भुगतान नहीं होने के कारण इन लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। वर्तमान की स्थिति पर गौर करें तो स्वजल प्रदेश में ऐसे 90 हजार शौचालयों का निर्माण स्वयं भवन स्वामियों से कराया जा चुका है जिनका अब तक भुगतान नहीं किया गया। इन लोगों को प्रति शौचालय 12 हजार रुपये का भुगतान किया जाना है। ऐसा नहीं है कि विभाग ने भुगतान का प्रयास नहीं किया, बल्कि स्वजल की ओर से इन लाभार्थियों को भुगतान करने के लिए 107 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर केंद्र को भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक बजट नहीं भेजा गया है। जबकि, दूसरी ओर शौचालय निर्माण का भुगतान न होने से परेशान लोग आए दिन अफसरों के पास पहुंच रहे हैं। उदाहरण के तौर पर दून के सेवली गांव, निवासी राजकुमार बताते हैं कि अधिकारियों के कहने पर उन्होंने उधार के पैसे लेकर शौचालय तो बनवा लिया, लेकिन अब तक पैसे नहीं दिए गए, जबकि उधार देने वाले लगातार वसूली के लिए घर के चक्कर काट रहे हैं।

वहीं, स्मिथनगर निवासी, जगदीश ने बताया कि पहले जब अधिकारी बार-बार गांव आकर शौचालय बनवाने को कहते थे तो उन्होंने कर्ज के पैसों से शौचालय बनवा लिया। अब तक न ही उन्हें भुगतान किया गया और न अब अधिकारी गांव में आते हैं। स्वजल परियोजना के निदेशक राघव लंगर ने बताया कि जिन लोगों से व्यक्तिगत रूप से शौचालयों का निर्माण कराया गया है, उन्हें अभी 107 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना है। इस संबंध में केंद्र को पत्र भेजा जा चुका है, जैसे ही बजट मिलेगा लोगों का भुगतान कर दिया जाएगा।

‘ईद-उल-फितर’ के मुबारक मौके पर राज्यपाल के ने दी हार्दिक बधाई

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राज्यपाल डाॅ. कृष्ण कांत पाल ने ‘ईद-उल-फितर’ के मुबारक मौके पर राज्य के सभी नागरिकों खासकर मुस्लिम समुदाय को त्यौहार की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी।
रमजान के पवित्र महीने के अन्त में आने वाले इस त्यौहार की पूर्व संध्या पर अपने संदेश में राज्यपाल ने कहा कि हमारे देश में विभिन्न धर्म और समुदायों में मनाये जाने वाले त्यौहार हमें आपस में मिलजुल कर एक दूसरे की खुशियों को बांटने का अवसर प्रदान करते हैं। ‘ईद-उल-फितर’ का त्यौहार भी हम सबको प्यार-मुहब्बत, आपसी भाई-चारे तथा मदद की भावना का संदेश देता है। मुझे विश्वास है कि यह पर्व समाज में अमन-चैन और सौहार्दपूर्ण वातावरण का निर्माण कर समाज में समरसता और भाई-चारे की भावना को और मजबूत करे।
राज्यपाल ने समाज के सभी सामथ्र्यवान लोगों से गुजारिश की कि खुशी के इस त्यौहार में निहित संदेश का सम्मान करते हुए दरियादिली से जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए आगे आकर त्यौहार की खुशियों और जश्न में इजाफा करें।

100 दिन सरकार के, 100 दिन विकास के: मुख्यमंत्री

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18 मार्च, 2017 को प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कार्यभार संभाला। राज्य गठन के बाद विधान सभा चुनाव में पहली बार किसी पार्टी को इतना प्रचंड बहुमत मिला है। प्रचंड बहुमत मिलने पर सरकार से जनता की अपेक्षाएं अधिक बढ़ जाती है। ऐसे में जनता की अपेक्षाओं और राज्य के विकास के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार करना वर्तमान सरकार की प्राथमिकता बन जाती है। मुख्यमंत्री ने नेतृत्व में वर्तमान राज्य सरकार 25 जून, 2017 को 100 दिन पूरे  किये। इन 100 दिन में यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि राज्य सरकार की प्राथमिकता क्या है और वह किस दिशा में आगे बढ़ रही है। अपना सरकार की फैसलों के बारे में मुख्यमंत्री ने बताया कि:
  • पहले ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक रेलवे लाइन की घोषणा हुई थी, लेकिन सरकार के प्रयासों से अब यह परियोजना बद्रीनाथ धाम व सोनप्रयाग तक स्वीकृत हो चुकी है। इसके साथ ही मुज्जफरनगर-देवबंद के मध्य भी रेल लाइन शीघ्र पूरी होने वाली है।
  • केन्द्र सरकार ने स्थानीय युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण देने एवं उनकी आजीविका के साधनों को बढ़ाने लिये कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय का क्षेत्रीय कार्यालय भी देहरादून में खोलने का निर्णय लिया है।
  • लोक निर्माण, पेयजल, जल संस्थान, सिंचाई, ग्रामीण अभियंत्रण जैसे विभागों को उनके नियमित बजट के अतिरिक्त 250 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है।
  • सरकार द्वारा शीघ्र ही 200 डाॅक्टरों के पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने जा रही है। इसके लिए चिकित्सा चयन बोर्ड के माध्यम से कार्य किया जा रहा है।
  • सीमांत एवं लघु किसानों को 2 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जायेगा। लक्ष्य है कि इस योजना से 1 लाख किसानों को स्वरोजगार से जोड़ा जा सके।
  • मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिये है कि 2021 तक सबको आवास उपलब्ध होना चाहिए।
  • साल 2017 तक प्रत्येक गांव, 2018 तक हर तोक तथा 2019 तक हर घर को बिजली से जोड़ा जाय।
  • केन्द्र सरकार द्वारा राज्य में पाॅवर सेक्टर के विकास के लिए एडीबी से मिलने वाले 819.20 करोड़ रूपये के ऋण के लिए दी सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई है। इससे राज्य में नई ट्रांसमिशन लाइन के साथ नए सब स्टेशन होंगे स्थापित होंगे।
  • देहरादून, हल्द्वानी एवं हरिद्वार को जल्द रिंग रोड़ मिलेगी। गढ़वाल एवं कुमाऊं की कनेक्टिविटी  के लिए कंडी मार्ग खुलेगा। भारत सरकार से 22 सड़कों को राष्ट्रीय हाईवे बनाने पर सहमति मिली है।
  • 5 करोड़ रुपये धनराशि तक के कार्य राज्य के मूल निवासियों को ही दिये जायेंगे। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकेंगे।
  • करप्शन पर जीरो टालरेंस के सिद्धांत का कड़ाई से पालन करते हुए एनएच74 केस को सी.बी.आई. को भेजा और जब तक सी.बी.आई. ने इस केस को ले नही लिया, तब एस.आई.टी. अपना काम कर रही है।
  • केन्द्र सरकार ने देहरादून को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिये भी चुना है।

बहरहाल सरकार ने अपने 100 दिन पुरे होने पर उपलबद्धियां तो कई गिनाी हैं लेकिन ये बात बी तय है कि ये 100 दिन त्रिवेंद्र सिंह रावत के लिये राजनीतिक रूप से भी काफी कक्रिय रहे हैं। पार्टी के अंदर और मंत्रीमंडल के कई सदस्यों के साथ मुख्यमंत्री का तालमेल न होना पाना जगजाहिर रहा है। चाहे वो पर्यटन मंत्री सतपाल माहराज से समन्वय न बैठने की बात हो या फिर वन मंत्री हरक सिंह रावत का खुले तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को बेहतर बताना। 100 दिनों में किसी बी सरकार या राजनेता को फेलपास करने जल्दबाजी हो सकती है पर इतना तो तय है कि मुख्यमंत्री के सामने आने वाले दिनों में राज्य को विकास का डबल इंजन देना और पार्टी और मंत्रियों की गाड़ी को भी पटरी पर रखने की चुनौती रहेगी।

अब प्लास्टिक डिस्पोजल के बजाय ईको फ्रेंडली पत्तल व दोने पर जोर

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अब दोने व पत्ते पूरी तरह प्रकृति में नष्ट हो जाएंगे। इसके लिए विशेष व्यवस्था करने की कोई जरुरत नहीं होगी। नान बायो डिग्रेडेबल डिस्पोजेबल गिलास, पत्तल व दोने आदि के स्थान पर बायो डिग्रेडेबल गिलास, पत्तल व दोने आदि का प्रयोग किया जायेगा।  अपर आयुक्त गढ़वाल हरक सिंह रावत ने दोना पत्तल एसोसिएशन बबूल पत्ता स्टोर हनुमान चौक, पेपर एण्ड प्लास्टिक एसोसिएशन तिलक रोड एवं जनपद के समस्त धार्मिक प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधियों के साथ आयुक्त कैम्प कार्यालय में बैठक की।


अपर आयुक्त ने कहा कि पूर्व में दोना-पत्तल इत्यादि प्लास्टिक डिस्पोजल पर प्रतिबन्ध लगाया गया था जिस पर पूरी तरह से सफलता नहीं मिल सकी। वर्तमान में कई कंपनियों द्वारा ऐसे ईको फ्रेंडली दोना पत्तल, डिस्पोजल/उत्पाद बनाये गये हैं जो आसानी से बायो-डिग्रेडेबल/आग्रेनिक खाद के रूप में निष्प्रोज्य हो जाते हैं। इसलिए ऐसे उत्पादों को अपनाने पर जोर दिया जाना चाहिए।


उन्होंने कहा कि यदि देखा जाए तो यह प्लास्टिक डिस्पोजल से औसतन सस्ता ही पड़ेगा क्योंकि प्लास्टिक निर्मित वस्तुओं का उपयोग करने से एक ओर जहां पर्यावरण प्रदूषित होता है, नालियां चोक हो जाती है, खेती योग्य भूमि बंजर हो जाती है तथा कई बार चालान के रूप में जुर्माना भी देना पड़ता है। उन्होंने कहा कि यह बायो-डिग्रेडेबल दोना पत्तल गन्ने की खोई से बनाया जाता है जो बाद में खाद का काम करता है तथा इसके उपयोग के लिए लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है।

जापानी औद्योगिक घरानों से मिले निशंक, निवेश के लिए किया आमंत्रित

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पूर्व मुख्यमंत्री एवं संसदीय आश्वासन समिति के अध्यक्ष डाॅ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने जापानी औद्योगिक घरानों से मुलाकात की और उन्हें उत्तराखंड आने का निमंत्रण दिया। इस अवसर पर डाॅ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ की पुस्तक ‘परिश्रम पर विश्वास करो भाग्य पर नहीं’ के अंग्रेजी अनुवाद का विमोचन हुआ। जापानी शिष्टमण्डल द्वारा ऊर्जा, परिवहन, शिक्षा और कृषि क्षेत्रों में सहयोग की इच्छा जताई गई। व्यापारिक घरानों ने निशंक को उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया।


अपने सम्बोधन में डाॅ. निशंक ने कहा कि जापान की तरह उत्तराखण्ड के लोग प्रकृति प्रेमी, मेहनती और भावुक हैं। भारत और जापान को सामरिक सहयोगी बताते हुए आशा प्रकट की कि जापान की प्रौद्योगिकी ज्ञान-विज्ञान से जहाँ भारत लाभान्वित होगा वहीं भारत के रूप में विश्व का सबसे बड़ा बाजार जापान को मिलेगा। जापानी व्यापारिक प्रतिनिधि मण्डल का नेतृत्व दायशिन समूह के अध्यक्ष यामाशीता ने किया। करीब चार दर्जन से अधिक व्यापारिक घरानों ने डाॅ. निशंक के सम्मान में रात्रि भोज में हिस्सा लिया। जापान औद्योगिक घरानों के प्रतिनिधिमण्डल में यामाशीता दाईशिन ग्रुप, नारा लाॅजिस्टिक्स कम्पनी के हगीवारा, सेवर कम्पनी के होसी, सकुराई ट्रैवल के रमेश शर्मा, टेनरी टूरिज्म के यासुको सहित अन्य जापानी नागरिक मौजूद रहे।

एसएसबी ने भारत-नेपाल सीमा पर चलाया सघन चेकिंग अभियान

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सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने पिथौरागड़ में भारत नेपाल सीमा पर शनिवार को सघन चेकिंग अभियान चलाकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। इस दौरान संदिग्धों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिये गये। एसएसबी के 55वीं वाहिनी इ-कंपनी के निरीक्षक राजेंद्र प्रसाद के नेतृत्व में एसएसबी के जवानों ने भारत-नेपाल सीमा से सटे झूलाघाट, झूलापुल,गेठीगड़ा, कानड़ी, बलतड़ी और सप्तड़ी में सघन कांबिंग की गई। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े अन्य पहलुओं ध्याने देने को कहा गया।


नेपाल में 28 जून को हो रहे चुनाव को लेकर सीमा पर एसएसबी चौकस है। चुनाव के दौरान कोई घटना घटित न हो, इसके लिए सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। निरीक्षक राजेंद्र प्रसाद ने दोनों देशों का सीमा पर आवागमन होता है। ऐसे में संदिग्ध इस रास्ते से आने के फिराक में रहते है। ऐसे संदिग्धों पर पुलिस कड़ी नजर रखेगी।

उत्तरकाशी के ऐतिहासिक गर्तांगली के दिन बहुरेंगे

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रोमांच के शौकीनों के लिए समुद्रतल से 11 हजार फीट की ऊंचाई पर गर्तांगली जल्द खुल सकती है। 1962 से क्षतिग्रस्त पड़ा जाड़ गंगा घाटी में स्थित सीढ़ीनुमा यह मार्ग (गर्तांगली) दुनिया के सबसे खतरनाक रास्तों में शुमार है। क्षतिग्रस्त होने के कारण इस मार्ग पर आवाजाही बंद है। अब गर्तांगली के दिन बहुरने वाले हैं। करीब तीन सौ मीटर लंबे इस मार्ग की मरम्मत के लिए लिए शासन से जिला प्रशासन को 26.50 लाख रुपये की धनराशि मिल गई है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि गर्तांगली की मरम्मत को आई धनराशि गंगोत्री नेशनल पार्क को दी जाएगी। गर्तांगली गंगोत्री नेशनल पार्क क्षेत्र में आती है। भारत-चीन युद्ध से पहले व्यापारी इस रास्ते से ऊन, चमड़े से बने वस्त्र व नमक लेकर बाड़ाहाट (उत्तरकाशी का पुराना नाम) पहुंचते थे। युद्ध के बाद इस मार्ग पर आवाजाही बंद हो गई, लेकिन सेना का आना-जाना जारी रहा।


करीब दस वर्ष बाद 1975 में सेना ने भी इस रास्ते का इस्तेमाल बंद कर दिया। चालीस साल से मार्ग का रख-रखाव न होने से सीढियां क्षतिग्रस्त हो गई हैं। सीढियों के किनारे लगी सुरक्षा बाड़ की लकड़ियां भी खराब हो चुकी हैं। 15 अप्रैल 2017 को जिलाधिकारी डॉ. आशीष श्रीवास्तव, पर्यटन अधिकारी व गंगोत्री नेशनल पार्क के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से इस मार्ग का स्थलीय निरीक्षण किया था तथा मरम्मत के लिए शासन से धनराशि मांगी थी। जिलाधिकारी ने बताया कि जल्द से जल्द मार्ग की मरम्मत कराई जाएगी। इससे इस मार्ग को पर्यटकों के लिए खोला जा सके। इससे पर्यटकों को अहसास हो सके कि कभी किस तरह जोखिम भरे रास्तों से जीवन चलता था।