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चीन में दिखाई गई मधुर की शॉर्ट फिल्म ‘मुंबई मिस्ट’

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मधुर भंडारकर द्वारा मुंबई की जीवन शैली पर बनाई गई शॉर्ट फिल्म ‘मुंबई मिस्ट’ की स्क्रीनिंग चीन में हुए ब्रिक्स देशों के फिल्म फेस्टिवल में की गई। इस मौके पर शामिल होने के लिए मधुर विशेष रूप से बीजिंग पहुंचे थे, जहां इस शॉर्ट फिल्म की स्क्रीनिंग की गई। वहां से मधुर ने इस आयोजन से अभिभूत होकर बताया कि फिल्म खत्म होने के बाद काफी देर तक तालियां बजाकर सबने खुशी जाहिर की।

समारोह के लिए आयोजकों ने मधुर को पांच ऐसे फिल्मकारों के पैनल में चुना था, जिनको शॉर्ट फिल्म बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी। 18 मिनट की अवधि वाली इन शॉर्ट स्टोरीज की थीम थी- वेह्यर हैज टाइम गौन। 23 जून से शुरू हुआ ये फेस्टिवल 27 जून तक चलेगा और इसमें भारत का प्रतिनिधित्व मधुर भंडारकर कर रहे हैं। मधुर के अलावा ब्राजील, चीन, साउथ अफ्रीका और रूस के फिल्मकारों ने भी इस फेस्टिवल के लिए शॉर्ट फिल्में बनाई हैं।

मधुर की फिल्म में अन्नू कपूर और देवरथ मुद्गल ने प्रमुख भूमिकाएं निभाई। इस फिल्म की कहानी एक ऐसे अधेड़ उम्र के व्यक्ति के बारे में है, जिसे एक अनाथ बच्चे से लगाव हो जाता है। इस रिश्ते के साथ मुंबई महानगर की बनती-बदलती जीवन शैली को दिखाया गया है। संजय छैल इस शॉर्ट फिल्म के लेखक हैं। मधुर इन दिनों अपनी नई फिल्म ‘इंदु सरकार’ के निर्माण को अंतिम रूप देने में बिजी हैं। 28 जुलाई को रिलीज होने जा रही ये फिल्म 1975 के आपातकाल के बारे में है और फिल्म की प्रमुख भूमिकाओं में कीर्ति खुल्लर, नील नितिन मुकेश तथा अनुपम खेर हैं।

उत्‍तराखंड के इस गांव के लोग सीख रखे हैं अंग्रेजी, जानिए क्‍यों

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उत्तरकाशी जिले के अगोड़ा गांव में फर्राटेदार अंग्रेजी बोल रहीं 28 साल की माया देवी को देख कोई भी हैरत में पड़ सकता है। माया 12वीं पास हैं और गांव में ही रहती हैं। माया ऐसी अकेली शख्स नहीं, गांव में 50 लोग इन दिनों अंग्रेजी भाषा का ज्ञान ले रहे हैं। मकसद है पर्यटकों से सीधा संवाद। प्रसिद्ध डोडीताल का बेसकैंप होने के कारण यहां हर माह 40 से 50 विदेशी पर्यटक आते हैं। इस दौरान ग्रामीणों को उनसे बातचीत के लिए गाइड की मदद लेनी पड़ती है। अब शायद उन्हें गाइड की जरूरत न पड़े।

समुद्रतल से 3024 मीटर की ऊंचाई पर स्थित डोडीताल की उत्तरकाशी से दूरी 40 किलोमीटर है। इसमें से 22 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। यह खूबसूरत पर्यटक स्थल चारों ओर से पहाड़ व घने जंगल से घिरा हुआ है। डोडीताल के बेसकैंप अगोड़ा गांव तक पहुंचने के लिए भी छह किलोमीटर पैदल ही नापने पड़ते हैं।

इसी को देखते हुए अब उत्तराखंड ग्रामीण पर्यटन विकास योजना के तहत एक जून से ग्रामीणों को पर्यटन व्यवसाय चलाने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। सुबह-शाम दो-दो घंटे की कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। ग्रामीणों को अंग्रेजी का प्रशिक्षण दे रहे समर फाउंडेशन ट्रस्ट के जिला समन्वयक संजय पंवार भी अगोड़ा के ही रहने वाले हैं। वह कहते हैं, सभी लोग मनोयोग से  अंग्रेजी सीख रहे हैं। ग्रामीण जानते हैं कि इससे वे अपनी आर्थिकी बेहतर तरीके से संवार सकेंगे। पंवार कहते हैं कि ‘इस कोशिश ने ग्रामीणों दशा एवं दिशा, दोनों बदल दी। अब वे अच्छे गाइड साबित होंगे।’

अगोड़ा से डोडीताल की दूरी 14 किलोमीटर है। इसलिए यहां पहुंचने वाला हर पर्यटक अगोड़ा गांव को अपने पड़ाव में शामिल करता है। नतीजा, अगोड़ा में देशी-विदेशी पर्यटकों की खासी चहलकदमी रहती है। बावजूद इसके 120 परिवार वाले अगोड़ा गांव के ग्रामीण पर्यटन को अपने व्यवसाय नहीं बना पाए।

अंग्रेजी सीख रहे हाईस्कूल पास 31 वर्षीय राजवीर ने बताया कि वह पर्यटकों को ट्रैकिंग पर ले जाता है। अब तक अंग्रेजी न बोल पाने के कारण विदेशी पर्यटकों से इशारे में ही बातचीत होती थी, लेकिन अंग्रेजी सीखने के बाद यह समस्या दूर हो गई। बीए पास पवित्रा कहती है कि इंटर व बीए में वह अंग्रेजी नहीं पढ़ पाई, लेकिन प्रशिक्षण ने उसकी मुराद पूरी कर दी।

वहीं, उत्तरकाशी के जिला पर्यटन अधिकारी केएस नेगी का कहना है कि उत्तरकाशी जिले में उत्तराखंड ग्रामीण पर्यटन विकास योजना के तहत दो गांवों का चयन किया गया है। अगोड़ा के अलावा मोरी ब्लॉक के मोताड़ में भी कैंप लगाया जाएगा। भविष्य में इस योजना के तहत अन्य गांवों को भी लिया जाएगा। फिलहाल यह कैंप एक माह का है, जरूरत पड़ने पर अवधि को बढ़ाया भी जा सकता है

40 दिन 20 हजार रुपये अौर एक मिशन पर है ये नौजवान

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आपको हर रोज देखने को नहीं मिलता की एक 21 साल की उम्र का लड़का,जो इंजीनियरिंग के तीसरे वर्ष का छात्र है और अपनी किताबों से दूर अापको घूमता मिले। लेकिन यह युवा लड़का केवल घूमने नहीं बल्कि एक मिशन पर है। जी हां 40 दिनों के दौरान देश की यात्रा के लिए उसने 20,000/रुपये का बजट रखा है।

उड़ीसा के कमल सुबुधी ने ‘ड्रॉप बीट्स, नाॅट बाम्बस,’ अभियान के तहत अपने जीवन का मिशन बनाया है। उनका निरंतर साथी, उनका फोन और बैकपैक है अौर जब भी वह अपने गंतव्य पर पहुंचते है तब अपने एफबी पेज पर दिन का बजट अौर फोटोंस के अपडेट करते है।

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कमल जब मसूरी पहुँचे तब उन्होंने न्यूज़पोस्ट टीम से बातचीत में बताया कि उन्हें अपने मिशन मे सभी तरह की सवारियां करीं है; बस, ट्रेन, हिच-हायकिंग, ट्रेकिंग करके कमल ने वारनगल से नागपुर, बनारस, लखनऊ, इलाहाबाद, हल्द्वानी, नैनीताल, देहरादून, मसूरी और हिमाचल प्रदेश के कसोल तक का सफर किया हैं। उन्होंने बताया कि, ‘मैं हर जगह घूमा हूं और मुझे हर जगह एक अलग भाव देखने को मिलता है। मैं बहुत सारे लोगों के मिला हूँ और बहुत कुछ सीखा हैं।

वह मानते हैं कि भारत में विकलांग सैनिकों के सराहना कम की जाती है अौर इस यात्रा के जरिए वह लोगों में विकलांग सैनिकों के लिए जागरूकता व धन जुटाने के लिया निकले है।  वह 7 जून को वारंगल से निकले थे और दिल्ली में 16 जुलाई को अपनी यात्रा समाप्त करेंगे। कमल चाहते है कि यात्रा समाप्त होने पर पहले विकलांग सैनिक को इस यात्रा से इकट्ठा किये गये पैसे किसी के जीवन को शायद ही बदले, लेकिन कमल के अपने लक्ष्य की अोर एक सरहानीय कदम होगा।

मालसी डिअर पार्क की शोभा बढ़ायेंगे गुलदार के दो शावक

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ऋषिकेश वन विभाग ने गुलदार के दो शावकों को पकड़ा। ऋषिकेश वन विभाग को सूचना मिली कि टीएचडीसी आवासीय कॉलोनी स्थित गोदाम में बंदर कुछ जंगली जानवरों के पीछे पड़े हैं। सूचना पर रेंजर गंगासागर नोटियाल वनकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे। जहां उन्होंने गुलदार के दो नन्हें शावकों को देखा। 

उन्होंने शावकों को पकड़कर पिंजरे में कैद किया। रेंजर गंगासागर नोटियाल ने बताया की नन्हें शावकों की उम्र करीब एक माह की है। तथा एक नर और दूसरा मादा है। उन्होंने बताया कि वह उन्हें देहरादून स्थित मालसी डिअर पार्क में छोड़ दिये गये हैं। आपको बता दे की अभी तक शावकों की माँ वन विभाग की पकड़ में नहीं आया जिससे लोगो में दहशत का माहौल है। 

नए दौर में भारत-अमेरिका के संबंध

अमेरिका के साथ भारत के राजनीतिक, कूटनीतिज्ञ, सामाजिक और सांस्‍कृतिक संबंध समय-समय पर किस तरह से बदलते रहे हैं, यह किसी से छिपा नहीं है। इसके बाद भी इतना तय रहा है कि प्रतिभावान भारतीयों के लिए अमेरिका की धरती किसी स्‍वर्ग से कम नहीं रही है। कुछ नकारात्‍मक घटनाओं को छोड़ दिया जाए तो प्राय: जो युवा वहां नौकरी के लिए गए अधिकांश नागरिकता लेकर वहीं बस गए। जो भारत वापस भी आए या जिन्‍होंने अब तक इन दो देशों के बीच आना-जाना जारी रखा है, वे लगातार भारत को आर्थ‍िक रूप से समृद्ध करने का ही कार्य कर रहे हैं। वर्तमान राष्‍ट्रपति के पूर्व के राष्‍ट्रपति ओबामा के साथ भारत के कितने मधुर संबंध हो गए थे, यह बात आज समुची दुनिया जानती है। डोनाल्ड ट्रंप के 45वें अमेरिकन राष्ट्रपति बनने के बाद भारत अमेरिका संबंधों को लेकर जो स्‍थ‍ितियां बनीं, उसके बीच जिस तरह से इन दिनों फिर अमेरिका, भारत के करीब आ रहा है उससे आज इन दो देशों के बीच पहले से ओर ज्‍यादा अच्‍छे संबध बनने की आाशा बलवती हो उठी है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ट्रंप के राष्‍ट्रपति बनने के बाद से पहली अमेरिका यात्रा भी हो रही है।
डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकन राष्ट्रपति बनते ही जिस तरह से एक के बाद एक निर्णय लिए थे, उसके बाद एकबारगी तो यह लगने लगा था कि उनकी ओर से जा रहे निर्णय भारत को सबसे अधिक नुकसान पहुँचाने वाले हैं। किंतु जब हम एक अमेरिका के राष्‍ट्रपति का अपने देश के हित में लिए गए निर्णय के हिसाब से सोचते हैं तो लगता है कि उनके सभी निर्णय उनके अपने देश के हित में तो अवश्‍य हैं, भले ही फिर उनसे दूसरे देशों को कितना भी फर्क क्‍यों न पड़ता हो । अब समय के साथ बहुत कुछ बदलने लगा है। वस्‍तुत: जो स्‍थ‍ितियां वर्तमान में दिखाई दे रही हैं, वह पूरी तरह भारत के पक्ष में जा रही हैं। फिर वह आतंकवाद पर अमेरिकन नजरिया हो, पाकिस्‍तान को आर्थ‍ि‍क मदद न दिए जाने के लिए संसद में विधेयक का आना, उसका आतंकवाद प्रायोजक देश घोषित करने का बिल संसद में पेश होना हो, आर्थ‍िक संबंधों में विशेष व्‍यापारिक और पेशेवर नौकरियों में भारतियों के साथ प्रमुखता से जुड़ी बातें हों या अन्‍य इसी प्रकार के संबंधों से जुड़े मामले हों। इन सभी मसलों पर देखा जाए तो अमेरिका आज भारत के हित में खड़ा दिखाई दे रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के पहले ही भारत को दो मोर्चों पर बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है। दोनों को लेकर भारत सरकार लंबे समय से राजनयिक स्तर पर अमेरिका पर दबाव बना रही थी। पहला यह कि अमेरिका ने भारत को 22 अमेरिकी ‘गार्जियन ड्रोन’ के सौदे को मंजूरी दे दी है। ये ड्रोन अभी सिर्फ अमेरिकी सेना इस्तेमाल करती है, जिसे कि प्राप्‍त करने के लिए भारत लम्‍बे समय से प्रयासरत था। इस सौदे को लेकर ट्रंप के पूर्ववर्ती ओबामा प्रशासन ने वादा भी किया था। किंतु अपने कार्यकाल के दौरान ओबामा अपना किया वादा पूरा नहीं कर पाए थे जो अब जाकर ट्रम्‍प काल में पूरा होने जा रहा है। इसके साथ यह भी जानना जरूरी है कि भारत पहला ऐसा गैर नाटो गठबंधन देश है, जिसे अमेरिका अपनी ड्रोन तकनीक सौंपेगा। इन टोही विमानों को शामिल किए जाने से भारतीय समुद्री सुरक्षा को लेकर नौसेना की खुफिया, निगरानी और टोही क्षमता बढ़ेगी। तत्‍काल इसका लाभ यह है कि ‘गार्जियन ड्रोन’ से भारत को हिंद महासागर में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने में काफी आसानी हो जाएगी।
भारत को दूसरी राजनयिक सफलता पाकिस्तान के मोर्चे पर मिली है। अमेरिकी कांग्रेस में पाकिस्तान को लेकर एक विधेयक लाया गया है। इसमें उसके ‘अहम गैर-नाटो सहयोगी (एमएनएनए)’ का दर्जा रद्द करने की सिफारिश की गई है। इसमें भी विशेष जानने योग्‍य सभी के लिए यह है कि विधेयक रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, अमेरिका की दोनों प्रमुख राजनीतिक पार्टियों की ओर से लाया गया है। इससे भविष्‍य में पाकिस्‍तान की मुश्‍किलें बढ़ेंगी ही, तो वहीं भारत को इसका अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर व्‍यापक लाभ मिलेगा।
इसके बाद जो शेष बचता है वह है ट्रम्‍प के सत्‍ता में आते ही लिए गए उस निर्णय पर विचार, जो पेशेवर आईटी भारतीयों को अमेरिका में रोजगार के अवसरों को सीमित करता है। सभी जानते हैं कि ट्रंप ने अमेरिकन राष्‍ट्रपति बनते ही अपने पहले भाषण में कहा था कि सबसे पहले हम अमेरिका की सोचेंगे। चाहे वो इमिग्रेशन हो, व्यापार हो, कुछ भी हो सबसे पहले अमेरिका और अमेरिकियों के हितों का ख्याल । हम अपने रोजगार, अपनी दौलत, अपने सपनों को फिर से वापस लाएंगे। हम दूसरों के साथ भी संपर्क बनाएंगे लेकिन पहले अपना हित देखेंगे।
यहां ट्रंप ने यह भी कहा था कि हमने ट्रिलियन डॉलर खर्च कर दूसरे देशों को अमीर बनाया लेकिन हमारा विश्वास कम हो गया। हमारे कारखाने बंद होते चले गए, यहां तक कि जो लाखों अमेरिकन काम करने वाले थे वो पीछे रह गए। हमने जितनी दौलत थी उसे दुनिया को बांटा लेकिन अब इसे रोकना है। आज ट्रंप के शासन में आने के 6 माह के भीतर परिस्‍थि‍तियां बहुत कुछ बदल चुकी हैं। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस अमेरिका यात्रा से साबित भी हो गया है। आज भारत की अहमियत को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रम्‍प समझ रहे हैं। वह भारत की प्रशंसा कर रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप मानते हैं कि भारत अच्छे उद्देश्यों के लिए काम कर रहा है।
इसके बाद भारत अपने हित में यह उम्‍मीद भी बनाए रख सकता है कि अमेरिकन ट्रंप प्रशासन एच-1बी वीजा प्रणाली को कड़ा बनाने के कदम से अवश्‍य ही पीछे हटेगा, जिससे कि भारतीय पेशेवरों द्वारा अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में निभाए जाने वाली अहम भूमिका को तो बल मिलेगा ही उससे भारत भी आर्थ‍िक रूप से समृद्ध होगा। निश्‍चित ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह विदेश यात्रा भारत-अमेरिका के नए दौर के संबंधों को लेकर बहुत मायने रखती है।

शहीद स्थल को पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित करने के लिए समिति गठित

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उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने दर्शनी गेट स्थित शहीद महाराज प्रदुम्मन शाह की समाधि स्थल पर खुड़बुड़ा युद्ध के 83 शहीदों की आत्मा की शांति के लिए आयोजित यज्ञ में शामिल होकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर महाराज ने कहा कि खुड़बुड़ा युद्ध के सभी 83 वीर शहीदों के लिए सोमवार का दिन ऐतिहासिक है तथा हम सभी लोग इन योद्धाओं की आत्मा की शांति के लिए यज्ञ कर रहें है। उन्होंने कहा कि इस शहीद स्थल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए एक समिति का गठन करेंगे, जो इस युद्ध में शहीद हुए वीर सैनिकों तथा उससे सम्बन्धित जुड़ी हुई सत्यता की जांच करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ऑथेंटिक दस्तावेजों के साथ आगे कार्य करेगी। उन्होंने कहा कि यह वीर योद्धा सभी के लिए प्रेरणा स्त्रोत हैं, जिन्होंने अपनी मातृभूमि तथा क्षेत्र की अखण्डता व आन के लिए अपना बलिदान दिया।
इस अवसर पर शहीद महाराजा स्मारक निर्माण समिति के अध्यक्ष शीशपाल गुसांई ने अवगत कराया कि 14 मई 1804 ई0 (ऐतिहासिक पुस्तकों के अनुसार लड़ाई 26 जून 1804 तक चली) में अपनी भूमि को बचाने के लिए गोरखों से गढ़वाल के 54वें महाराजा प्रदुम्मन शाह ने खुड़बुड़ा का ऐतिहासिक युद्ध लड़ा था तथा अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने सिंहासन तक बेच दिया था। इस अवसर पर शहीद महाराजा प्रदुम्मन शाह स्मारक समिति के सचिव भवानी प्रताप सिंह, पार्षद झण्डा मौहल्ला अजय सिंघल, भाजपा मण्डल अध्यक्ष विशाल गुप्ता सहित सम्बन्धित सदस्य उपस्थित रहे।

कोविंद भाजपा सांसदों, विधायकों से मिले, दो निर्लदीय विधायकों ने भी दिया समर्थन

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राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी रामनाथ कोविंद ने सोमवार को देहरादून में बीजेपी सांसदों और विधायकों के साथ बैठक की। इस बैठक में दो निर्दलीय विधायकों ने भी एनडीए उम्मीदवार को समर्थन देने का ऐलान किया।बैठक के बाद राज्य के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कोविंद की जीत का विश्वास दिलाते हुए बद्रीनाथ आने का निमंत्रण दिया। सोमवार दोपहर में रामनाथ कोविन्द ने मुख्यमंत्री आवास में बीजेपी सांसदों और विधायकों के साथ बैठक की। हालांकि इस बैठक में भाजपा के सिर्फ़ दो ही सांसद अजय टम्टा और माला राजलक्ष्मी शाह ही शामिल हुए। बताया जा रहा है जो भाजपा के सांसद शामिल नही हुए वे शहर से बाहर है। बैठक में प्रदेश के दो निर्दलीय विधायक प्रीतम पंवार और राम सिंह कैड़ा भी शामिल हुए और उन्होंने एनडीए प्रत्याशी को समर्थन देने का ऐलान किया।
राष्ट्रपति चुनाव के लिए एनडीए के प्रत्याशी रामनाथ कोविंद सोमवार को देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचे। इस दौरान केंद्रीय मंत्री थावर चंद गहलोत भी उनके साथ थे। कोविंद एयरपोर्ट से सड़क मार्ग से सीएम आवास पहुंचे, जहां कोविंद ने विधायक मंडल दल की बैठक में शिरकत की। पूरे शहर में स्वागत के लिए रास्ते भर बैनर पोस्टर लगाये गये थे।
इस मौके पर जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट, कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक और केंद्रीय कपड़ा राज्यमंत्री अजय टमटा सहित भाजपा के दर्जनों नेता स्वागत के लिए मौजूद रहे।

हरिद्वार का सेंट मेरी स्कूल क्यों है सुर्खियों में?

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हरिद्वार का एक शिक्षण संस्था, सेंट मेरी ज्वालापुर अच्छी खासी सुर्खियां बटोर रहा है। हर वर्ष तो यह संस्था अभिभावको के दृष्टिकोण से इसलिए चर्चा में रहती थी कि हर कोई अपना बच्चा इस स्कूल में पढ़ाना चाहता था। बच्चे का एडमिशन एक बडी समस्या अभिभावको के लिए बनी रहती है, शहर के बीच स्थित यह स्कूल सभी की पहली पसंद है, लेकिन वर्तमान में यह स्कूल मैनेजमेंट व शिक्षकों के विवाद के कारण चर्चा में है।

आज मध्य हरिद्वार में अभिभावक  संघ की एक बैठक हुई जिसकी अध्यक्षता ओमप्रकाश पावा द्वारा की गई। काफी संख्या में जुटे छात्र छात्राओं के माता पिता सेंट मेरी स्कूल के चल रहे विवाद को लेकर खासे परेशान नजर आए। सबसे ज्यादा परेशानी उन माता पिता को है जिनके बच्चे सेंट मेरी स्कूल में दसवीं और बारहवीं की परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। उन का कहना है कि सेंट मेरी स्कूल में जितना भी सीनियर स्टाफ है उसमें से 7 वरिष्ठ शिक्षक को सेंट मेरी मैनेजमेंट द्वारा तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया है जिसके कारण बच्चों के माता-पिता ना तो बच्चों को स्कूल से निकाल सकते हैं ना ही किसी अन्य शिक्षकों पर भरोसा कर सकते हैं।

अभिभावक संघ सेंट मेरी स्कूल के इस तुगलकी फरमान के कारण लोग रोष में है अौर कहते है कि स्कूल की यह कार्रवाई हमको 25 जून 1975 की याद दिलाती है, सन 1975 में आज के दिन भारत सरकार द्वारा आपातकाल लगाया गया था। लोगों का कहना है कि आज भी 25 जून है, आपातकाल का एहसास हमको आज हो रहा है। सेंट मेरी स्कूल की मनेजमेंट न जाने क्या नजीर पेश करना चाहती है। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल मैनेजमेंट अगर अपने इस रुख पर  कायम रही  तो शुरुआती सत्र बहुत ही हंगामे दार होने जा रहा है। शहर के प्रबुद्ध नागरिकों के बार-बार प्रयास करने के बाद भी स्कूल मैनेजमेंट वरिष्ठ शिक्षकों से कोई भी वार्ता करने को तैयार नहीं है।

अभिभावको का कहना है कि इसाई मिशनरी कि इस मैनेजमेंट को उदारता का परिचय देते हुए शिक्षक छात्र छात्राओं के भविष्य के बारे में सोचना चाहिए। लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आजादी संवेधानिक हक देती है केंद्र सरकार द्वारा दिए गए सातवे वेतन आयोग अनुसार शिक्षको द्वारा वेतन की मांग करना कोई जुर्म नहीं है जिसकी इतनी कठोर सजा दी जाए। अभिभावक संघ के सदस्यों का कहना है कि यह नैतिक मूल्यों की लड़ाई है, अच्छा होगा कि दोनों पक्ष मिल बैठकर कोई स्थाई समाधान शीघ्र ही निकाल ले ताकि आने वाला सत्र शांतिपूर्ण तरीके से पूर्व की भांति चलता रहे।

‘ट्यूबलाइट’ की समीक्षाओं को खारिज किया ‘भाईजान’ ने

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अपनी नई रिलीज फिल्म ‘ट्यूबलाइट’ को लेकर सलमान खान ने मीडिया में आई फिल्म की समीक्षाओं को खारिज कर दिया है। शुक्रवार को ‘ट्यूबलाइट’ सिनेमाघरों में रिलीज हुई और सलमान खान एक समारोह में हिस्सा लेने पहुंचे, जहां उनका सामना मीडिया से हुआ।

मीडिया ने जब फिल्म को लेकर रिव्यूज को लेकर उनकी राय जाननी चाही, तो सलमान पहले मुस्करा दिए और फिर उन्होंने कहा कि वे कभी भी मीडिया के रिएक्शन पर ध्यान नहीं देते। उनका कहना था कि फिल्म बनाकर इसे रिलीज करके हमने अपना काम कर दिया। मीडिया अपना काम कर रहा है और पब्लिक अपना काम करेगी।

सलमान ने कहा कि वे पब्लिक रिव्यूज को जरूर महत्वपूर्ण मानते हैं और इस बात से वे खुश हैं कि उनको पब्लिक से फिल्म को लेकर अच्छा फीडबैक मिल रहा है। सलमान ने कहा कि वे मीडिया की समीक्षाओं को लेकर इसलिए रिएक्ट नहीं करते, क्योंकि वे मिली जुली होती हैं और हर कोई अपनी सोच से लिखता है।

सलमान ने कहा कि उनकी फिल्म को लेकर अगर अच्छे रिव्यूज आते हैं, तो भी वे ज्यादा खुश नहीं होते और अच्छे रिव्यूज नहीं आए, तो परेशान भी नहीं होते। उनको उम्मीद है कि पब्लिक उनकी इस फिल्म को पसंद करेगी और यही बात उनके लिए सबसे ज्यादा अहम रखती है।

मीडिया में ज्यादातर समीक्षाओं में ‘ट्यूबलाइट’ को एक कमजोर फिल्म माना गया है। खास तौर पर ‘बजरंगी भाईजान’ के मुकाबले इस फिल्म को ज्यादा कमजोर माना जा रहा है। रिलीज के पहले दिन दर्शकों की भी इस फिल्म को लेकर मिली जुली प्रतिक्रियाएं ही सामने आई हैं।

‘नीरजा’ के निर्माताओं के खिलाफ परिवार पहुंचा कोर्ट

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राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाली फिल्म ‘नीरजा’ को लेकर निर्माता और नीरजा भनोत के परिवार के बीच टकराव और ज्यादा बढ़ गया है। भनोत परिवार ने आपराधिक साजिश का आरोप लगाते हुए फिल्म के निर्माताओं के खिलाफ हरियाणा-पंजाब हाईकोर्ट में केस दायर किया है। इसमें परिवार की ओर से फिल्म के निर्माताओं पर अपने वादे से मुकरने और दोनों के बीच हुए करार का पालन न करने के आरोप लगाए गए हैं।

परिवार का कहना है कि सितम्बर 2013 में फिल्म के बनने से पहले फिल्म के निर्माताओं के साथ लिखित में इस बात को लेकर एग्रीमेंट साइन किया गया था कि रिलीज के बाद फिल्म को होने वाली कमाई का 10 प्रतिश्त हिस्सा परिवार के सदस्यों को दिया जाएगा। परिवार द्वारा दायर याचिका के मुताबिक, उस वक्त निर्माताओं ने परिवार को 7.5 लाख रुपये दिये थे। परिवार कहता है कि कंपनी तीन साल में उनको सिर्फ 24 लाख रुपये देना चाहती है, जिसे लेने से परिवार ने मना कर दिया और इस पेशकश को खारिज करते हुए कोर्ट का रुख किया।

परिवार का आरोप है कि फिल्म की टीम अनुबंध की शर्तों का पालन करने से मुकर रही है। परिवार ने अपनी याचिका में फिल्म का निर्माण करने वाली कंपनी और इसके मार्केटिंग राइट्स रखने वाली कॉरपोरेट कंपनी फॉक्स स्टार इंडिया को आरोपी बनाया है। याचिका में कहा गया है कि फिल्म 21 करोड़ की लागत से बनी और अब तक 135 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर चुकी है।

अदालत ने इस मामले की सुनवाई जुलाई में करने का फैसला किया है, लेकिन अभी इसके लिए कोई तारीख तय नहीं हुई है। फिल्म निर्माताओं की ओर से भनोत परिवार के आरोपों को पहले ही खारिज किया जा चुका है। परिवार द्वारा कोर्ट में किए गए केस को लेकर कंपनी के प्रवक्ता का कहना है कि अभी तक उनको अदालत का कोई नोटिस नहीं मिला है। कंपनी के कानूनी जानकारों की टीम नोटिस मिलने के बाद अगले कदम के बारे में कोई फैसला करेगी। प्रवक्ता ने कहा कि हम कोर्ट का सम्मान करते हैं और चाहते हैं कि कोर्ट से हमें इंसाफ मिले।