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नेगी की सेहत स्थिर,राज्य सरकार ने किया इलाज का ख़र्च उठाने का फ़ैसला

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लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी की हालत में कुछ सुधार हो रहा है। डॉक्टरों ने उनके स्वास्थ्य के लिए अगले 48 घंटे बहुत ही अहम बताएं हैं।इसी बीच मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बताया है कि लोक गायक श्री नरेन्द्र सिंह नेगी और राज्यआन्दोलकारी सुशीला बलोंनी के मैक्स  हॉस्पिटल मे इलाज का सारा खर्चा राज्य सरकार  वहन करेगी

बुधवार को उन्हें सिने में दर्द के चलते सीएमआई अस्पताल ले जाया गया था लेकिन हालत नाजुक देखते हुए उन्हें मैक्स अस्पताल में रेफर किया गया। कल से वे जिंदगी और मौत से लड़ रहे हैं। अस्पताल के बाहर प्रशंसकों का तांता लगा है। सब हाथ उठाकर उनकी सलामती की दुआ मांग रहे हैं।

उत्तराखंड के मशहूर लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी को हार्ट अटैक आने की खबर से हर कोई दुखी हैं। सोशल मीडिया पर उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए हर कोई मैसेज पोस्ट कर रहा है। वहीं, अस्पताल में उनका हाल जानने वालों का तांता लगा हुआ है। मैक्स अस्पताल के बाहर नेगीदा के प्रशंसकों की भारी भीड़ जुटी हुई है। गुरुवार को कई सांसद, मंत्री और विधायक समेत प्रदेश के कई प्रतिष्ठित लोग उनका हाल जानने अस्पताल पहुंचे।

सोशल मीडिया पर गलत सूचना पर नाराजगी सोशलमीडिया पर लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी को लेकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है। इसे लेकर प्रशंसकों में रोष है। कई लोग ऐसे लेकर सोशलमीडिया पर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। साथ ही नेगीदा के सलामत होने की जानकारी दे रहे हैं। उधर, नेगीदा के स्वास्थ्य लाभ की कामना के लिए सोशलमीडिया पर लोग दुआएं कर रहे हैं। मंदिरों में भी प्रार्थनाएं हो रही हैं।

पहले उन्हें पेट दर्द के साथ सीने में हल्के दर्द था, लेकिन बुधवार को तबियत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें सीएमआई अस्पताल लाया गया। जहां देर शाम कार्डियोलॉजिस्ट डा.जगजीत सिंह की देखरेख में तीन सदस्यीय टीम की देखरेख में एनजियोग्राफी की गई।  लोकगायक नेगी के अस्पताल में भर्ती होने की सूचना पर उन्हें देखने पूर्व सीएम हरीश रावत, केदारनाथ विधायक मनोज रावत के साथ ही लोक गायक प्रीतम भरतवाण भी पहुंच गए। अस्पताल में उन्होंने नेगी के स्वास्थ्य की जानकारी ली। लोकगायक नेगी के साथ अस्पताल में उनकी पत्नी उषा नेगी और बेटा कविलाश नेगी और बहू भी हैं।

एसडीएम को आया गुस्सा भड़क उठे शिकायतकर्ता

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रानीखेत सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जाच को पहुंचे उपजिलाधिकारी गौरव चटवाल शिकायत करने वालों पर ही भड़क उठे। क्षेत्रवासी जहां डामरीकरण के कुछ ही दिन बाद ही सड़क उखड़ने का कारण पूछते रहे, वहीं एसडीएम जांच पूरी होने के बाद ही कार्रवाई की बात पर अड़े रहे। शुरुआती चरण में डामर की गुणवत्ता को सही करार देते हुए एसडीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि कार्यदायी संस्था को क्लीन चिट नहीं दी गई है।

अगले चरण में अनियमितता मिली तो बख्शा नहीं जाएगा। इधर, नाराज नरचौकोट सामाजिक एवं विकास परिषद के पदाधिकारी ने एसडीएम पर अभद्रता का आरोप लगा किसी अन्य तकनीकी विभाग से कराए जाने की मांग उठाई है।  नरचकोट सामाजिक एवं विकास परिषद तथा ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से वलमरा केदार मोटर मार्ग के निर्माण कार्यो पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की थी। शिकायत की तह तक जाने के लिए एसडीएम गौरव चटवाल, एडीबी व प्रशासनिक टीम जाच के लिए बुधवार को मौके पर पहुंची। इसी बीच परिषद अध्यक्ष हृदयेश मेहरा ने शिकायत दोहराई कि डामरीकरण के कुछ ही दिन सड़क उखड़ गई। फिर पैचवर्क कराया गया। वह भी नहीं टिका। लगातार कारण पूछते रहने पर एसडीएम परिषद अध्यक्ष पर ही बिफर पड़े। तीखी तकरार के बीच जहां जहां डामर उखड़ने की शिकायत की गई, एसडीएम ने एडीबी अधिकारियों से जांच कराई। उन्होंने कहा कि मोटरमार्ग पर दो सेमी गहराई का डामर सही पाया गया है। आगे 15 किमी लंबी रोड की जांच की जानी है। यदि अनियमितता मिली तो कार्यदायी संस्था के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाएंगे।

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परिषद अध्यक्ष हृदयेश मेहरा व व्यापार मंडल अध्यक्ष दिनेश जोशी आदि ने सड़क निर्माण में अनियमितता का आरोप दोहराया है। उन्होंने किसी अन्य विभाग के तकनीकी अधिकारियों से नए सिरे से जांच पर जोर दिया है। आरोप लगाया कि प्रशासन व एडीबी धांधली पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहा। इस मौके पर सत्य प्रकाश मिश्रा, एसपी मिश्रा, रघुवीर सिंह, बसंती आर्या आदि मौजूद रहीं।

एसडीएम गौरव चटवाल ने कहा कि  अभद्रता का सवाल ही नहीं है। शिकायतकर्ता ऊंची आवाज में बार-बार एक ही सवाल उठाते रहे। हमने तो समझाया कि जांच का पहला दिन है। अभी 15 किमी तक जांच करेंगे। जहां-जहां कहा, वहीं पर सड़क खोदकर दिखाया। गुणवत्ता ठीक पाई गई। अभी हमने कार्यदायी संस्था को क्लीन चिट भी नहीं दी है। आगे गड़बड़ी मिली तो कार्रवाई करेंगे।

डकैती का खुलासा न होने पर मौन धरना-प्रदर्शन

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मानव विहार,काशीपुर में प्रॉपर्टी डीलर सुमित जैन के घर करीब एक सप्ताह पूर्व हुई डकैती की वारदात का खुलासा न होने पर व्यापारी भड़क उठे। उन्होंने एएसपी कार्यालय में मौन धरना-प्रदर्शन कर रोष जताया। साथ ही घटना का जल्द खुलासा करने की मांग की। व्यापारियों ने चेतावनी दी कि एक सप्ताह के अंदर घटना का खुलासा नहीं किया गया तो वह अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे।

व्यापारियों ने 23 जून को एएसपी जगदीश चंद्र से मिलकर मानव विहार कालोनी निवासी प्रॉपर्टी डीलर सुमित जैन के घर में 19 जून की रात हुई डकैती की घटना का खुलासा करने की मांग की थी। ज्ञात हो इस वारदात में हथियारबंद करीब आधा दर्जन बदमाशों ने प्रॉपर्टी डीलर के घर धावा बोल उन्हें तथा उनकी मां सुधा को बुरी तरह xघायल कर दिया था। इसके बाद बदमाश कीमती जेवरात लूट ले गए थे। व्यापारियों ने एएसपी को वारदात का खुलासा करने के लिए 28 जून तक की मोहलत दी थी।

डकैती का नौ दिन बाद भी खुलासा न होने पर व्यापारी व कालोनीवासी पीडि़त सुमित जैन के साथ बुधवार को एएसपी कार्यालय पर एकत्र हुए। वहां उन्होंने मौन धरना प्रदर्शन कर रोष जताया। साथ ही घटना का जल्द खुलासा करने की मांग की। चेतावनी दी कि एक सप्ताह में घटना का खुलासा नहीं किया तो बेमियादी धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। जिसकी जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की होगी। इस दौरान बांसफोड़ान चौकी इंचार्ज जसविंदर सिंह ने व्यापारियों को समझा-बुझाकर धरने से उठाया। साथ ही डकैती का जल्द खुलासा करने का आश्वासन दिया।

‘संसाधनों, भौगोलिक विषमताओं के हिसाब से नीति बनाने की जरूरत’

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पूरे देश को विकास के एक ही चश्मे से देखना उचित नहीं है। खासकर उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्यों के लिए उनके संसाधनों और भौगोलिक विषमताओं के हिसाब से अलग नीति बनाने की जरूरत है। यही वजह है कि दिल्ली से देश के लिए चलने वाली एक जैसी योजनाएं हिमालयी राज्यों में आकर फेल हो जाती हैं। ऐसे राज्यों के लिए जल्द अलग नीति व उसके अनुरूप योजनाएं तैयार की जाएंगी। यह बात देहरादून स्थित वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के स्वर्ण जयंती समारोह में नीति आयोग के सदस्य व डीआरडीओ (डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन) के पूर्व सचिव डॉ. वीके सारस्वत ने कही।

डॉ. सारस्वत ने कहा कि हिमालयी राज्यों के लिए अलग नीति बनाने के लिए आयोग हर राज्य में दौरा कर रहा है। इस कड़ी में जल्द उत्तराखंड का दौरा कर ‘सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल पर मुख्यमंत्री की मौजूदगी में बैठक की जाएगी।
उत्तराखंड के मौजूदा हालात पर प्रकाश डालते हुए डॉ. सारस्वत ने कहा कि यहां चीड़ की पत्तियां जंगलों में आग का कारण बन रही है, जबकि इनका इस्तेमाल ऊर्जा उत्पादन में किया जा सकता है। बायोमास गैसिफिकेशन या बायो मिथेनाइजेशन के माध्यम से इस तरह के जैव संसाधनों का प्रयोग ऊर्जा तैयार करने में किया जा सकता है।
इसके अलावा उत्तराखंड में इकोटूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं और जरूरत इस बात की है कि टूरिज्म को इकोफ्रेंडली टूरिज्म से जोड़ा जा सके। राज्य के निचले हिस्सों में फसल उगाने व ऊंचाई वाले हिस्सों में हॉर्टिकल्चर व फ्लोरीकल्चर की संभावनाओं को तलाशा जा सकता है। उत्तराखंड जैसे राज्य में रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए दोहरी शिक्षा व्यवस्था लागू किए जाने की जरूरत है, जिसमें वोकेशनल कोर्स भी साथ-साथ चलते रहे हैं।
उद्योग सेक्टर के लिहाज से भी उत्तराखंड में आमूलचूल परिवर्तन किए जाने की जरूरत है, यहां फार्मा इंडस्ट्री की जगह आइटी पर फोकस किए जाने की जरूरत है। सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल की बैठक में इन्हीं तमाम संभावनाओं को लेकर विस्तृत मंथन किया जाएगा। बैठक में नीति आयोग की तरफ से तय किए गए तीन, पांच और सात साल के विजन डॉक्यूमेंट पर भी बात होगी। हालांकि इसको लेकर सभी राज्यों के मुख्य सचिव से नियमित तौर पर भी बात की जाती है।

एम्स छात्रा की मौत के मामले में सीबीआई जांच के आदेश

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हाईकोर्ट ने एम्स ऋषिकेश में छात्रा की मौत के मामले में सीबीआई जांच करने के आदेश दिये हैं। मामले के अनुसार 24 जून 2014 कुमारी युक्ति (नर्सिंग प्रथम ) एम्स की छात्रा थी जिसकी मौत एम्स में ही पंखे पर लटकर हुई थी। जिसकी रिपोर्ट उसके पिता द्वारा ऋषिकेश थाने में लिखायी गई थी किन्तु पुलिस द्वारा उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। न ही उनकी एफआईआर लिखी गई।

नौ महीने के बाद मृतका के पिता ने कोर्ट में सीआरपीसी की धारा 156(3) में प्रथर्नापत्र दिया जिस पर कोर्ट ने पुलिस को एफआईआर लिखने के आदेश दिए। जिस पर जांच अधिकारी द्वारा जांच की गई। इस जांच से असंतुष्ट होकर जांच सीबीसीआईडी को सौप दी। इनकी भी जांच से असंतुष्ट होकर सीबीसीआईडी ने मामले को बन्द कर दिया। 

मृतका के पिता ने कोर्ट से इस मामले में सीबीआई से जांच करने की मांग की गई परन्तु सीबीआई ने जांच करने से मना इस आधार पर कर दिया गया कि उनके पास काम का बोझ बहुत अधिक है इसलिए इसकी जांच नही कर सकते है। जिसके खिलाफ उन्होंने हाई कोर्ट में सीबीआई से जांच कराने के लिए याचिका दायर की। मामले को सुनने के बाद न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकलपीठ ने मामले की जांच सीबीआई से करने के आदेश दिए।

”हसीना पार्कर” में नज़र आऐंगे दून के हीरो ”चरणप्रीत सिंह”

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”झुक सकता है आसमां भी अगर तबियत से पत्थर उछाले कोई और हो सकती है मुश्किले आसान अगर दिल से दुआ मांगे कोई” जी हां कुछ ऐसे ही अपने मंजिल तक पहुंचे है देहरादून के युवा चरणप्रीत सिंह।

उत्तराखंड यूं तो देवभूमि के नाम से मशहूर है लेकिन प्रतिभाओं में भी उत्तराखंड का कोई जवाब नहीं है।देवभूमि ने हिंदी सिनेमा को एक से एक अदाकार दिए हैं। इसी कड़ी में हमारी आज की कहानी है बालीवुड के एक ऐसे सितारे की जिनको आपने बहुत सी सुपरहिट फिल्मों में देखा होगा।

न्यूज़पोस्ट टीम से खास बातचीत में चरणप्रीत ने अपने जीवन के अहम पहलूओं पर काफी कुछ बताया है। आज के हमारे एक्टर हैं 30 साल के चरणप्रीत सिंह। चरणप्रीत टिहरी गढ़वाल में पले-बड़े है और शुरुआती पढ़ाई भी टिहरी से पूरी की है। इसके बाद परिवार देहरादून में बस गया, परिवार में माता पिता और एक छोटा भाई है।

चरणप्रीत एक मिलनसार व्यवहार के मालिक होने के साथ बचपन से ही एक्टिंग करने को अपने शौक में गिनते है।इसके अलावा उन्हें फिल्में देखना, क्रिकेट खेलना,फोटोग्राफी, आर्किटेक्चर,पेंटिंग और सभी क्रिएटिव काम करने का शौक है।

हमेशा अपने काम में मशगूल रहने वाले चरणप्रीत के जिंदगी का लक्ष्य एक सिंपल जिंदगी जीना है और अपने एक्टिंग में हमेशा अच्छा करना है।चरण कहते हैं कि, ‘एक आर्टिस्ट का मुख्य काम है अपनी कला को हर मौके पर तराशना ।’

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भविष्य में उनके आने वाले प्रोजेक्टस में हसीना पार्कर फिल्म मुख्य है। चरण हसीना पार्कर फिल्म में अहम भूमिका में है जो 18 अगस्त को रिलीज़ होने वाली है। आजकल चरण अपनी डायरेक्शन की पहली फिल्म पर जी जान से काम कर रहे हैं। चरण बताते हैं कि इस फिल्म की शूटिंग इस साल आने वाली सर्दियों में उत्तराखंड में ही की जाएगी।इस फिल्म के लिए चरणप्रीत सिंह बहुत उत्साहित है क्योंकि एक तो यह फिल्म बतौर निर्देशक उनकी पहली फिल्म है दूसरा इस फिल्म के कैमरामैन फ्रेंच है। चरण कहते हैं कि, ‘इस फिल्म के कास्ट से एक बात पक्की है कि अगले साल यह फिल्म कैंन्स फिल्म फेस्टिवल में दिखाई जाएगी।’

चरणप्रीत सिंह की एक के बाद एक बहुत सी फिल्में आई हैं और हर फिल्म में उन्होंने अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं हैं। चरण की कुछ फिल्में हम सब ने देखी भी है और फिल्मों को सराहा भी है, दि ट्रेन, ऊंगली, साहेब बिबी और गैंग्स्टर रिर्टन, सरबजीत और जल्द ही आने वाली उनकी फिल्म हसीना पार्कर उनकी बड़ी फिल्मों में से एक है।

चरण से यह पूछने पर कि उन्होंने फिल्मी दुनिया को अपनी करियर क्यों चुना इसपर उनका जवाब काफी हटकर था।उन्होंने बताया कि, ‘मुझे बचपन से अलग-अलग स्टाईल और कैरेक्टर में तैयार होना बहुत पसंद था, इसके अलावा हमेशा अलग रोल प्ले करना पसंद करता था।’ इसी सोच के साथ उन्होंने अपने शौक को अपनी जूनुन बना लिया और आज वह अपने करियर में अच्छा काम कर रहे हैं।

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अपने काम को करने में चरण को सबसे ज्यादा एनर्जी और एक्साइटमेंट कहां से मिलती है इसपर उनका जवाब था कि अलग-अलग अभिनय करना, बेस्ट टेक्निशियन और आर्टिस्ट के साथ काम करना, नई जगहों पर शूटिंग करना, नई कहानियों की लिए खुद को वैसा बनाना।चरण का कहना है कि, ‘यह दुनिया का एक ऐसा प्रोफेशन है जिसमें किसी के बोर होने का कोई चांस नहीं है जैसे दूसरी 9-5 की नौकरियों में होता है।’

चरण ने यू तों बहुत से अच्छे फिल्मों में काम किया है लेकिन उनके कभी ना भूलने वाले पल हैं उनका शाहरुख,सलमान,ऐश्वर्या राय बच्चन और रणदीप हुड्डा के साथ काम करना।इसके अलावा टाईगर श्राफ,जैकलिन फर्नानडेज,अर्जुन कपूर को ट्रेनिंग देना भी उनके लिए यादगार पल रहेंगे।चरण का मानना है कि इस करियर में समय के साथ नई यादें जोड़ते जाते हो और आपकी जिंदगी के कभी ना भूलने वाले पल बन जाते हैं।

चरणप्रीत से आखिरी सवाल पूछने पर कि क्या वह रस्किन बांड पर कोई फिल्म बना रहें हैं उनका जवाब था आफिशियली इसपर कोई निर्णय नहीं लिया गया हैं लेकिन भविष्य में उन्हें अगर मौका मिलेगा तो वह जरुर इसपर काम करेंगे।

न्यूज़पोस्ट डेस्क की तरफ से चरणप्रीत सिंह को उनकी आने वाली फिल्म हसीना पार्कर के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं।

सफाई के मामले में पहले नंबर पर रहा दून रेलवे स्टेशन

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देहरादून का रेलवे स्टेशन 150 उन रेलवे स्टेश्नों में सफाई व्यवस्था में अव्वल रहा है, जिन 150 रलवे स्टेशनो का निरीक्षण रेलवे की पैसेंजर सर्विस कमेटी कर चुकी है। रेलवे स्टेशन का निरीक्षण करने पहुंची पैसेंजर सर्विस कमेटी ने देहरादून रेलवे स्टेशन को सफाई के मामले में उन रेलवे स्टेशन में सबसे स्वच्छ माना है।

इसके अलावा कमेटी ने निरीक्षण के दौरान देहरादून रेलवे स्टेशन पर विकालांगो के लिए अलग से शौचालय बनने के भी निर्देश दिए है, साथ ही देहरादून, हरिद्धार और ऋषिकेश रेलवे स्टेशन को धार्मिक महत्व के चलते वर्ल्ड क्लास स्टेशन बनाने के लिए भी निर्देश दिए है।

आपको बतादे कि 10 सदसीय पैसेंजर सर्विसस कमेटी ने कई रेलवे स्टेशनो का निरीक्षण करने के बाद उत्तराखंड पहुंची है।कमेटी के अध्यक्ष और पूर्व सांसद लाल बिहारी तिवारी भी थे जिनके नेतृत्व में देहरादून और हरिद्धार रेलवे स्टेशन की व्यवस्थाओ का निरीक्षण किया जा चुका है। कमेटी के निरीक्षण करने के बाद और देहरादून रेलवे स्टेशन को सफाई के मामले में नम्बर एक स्थान दिए जाने से देहरादून रेलवे के अधिकारियों और कर्मचारियों का जहां हौसला बढा है, वहीं कहा जा सकता है कि देहादून का रेलवे स्टेशन प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत के सपने को साकार कर रहा है।

वहीं देहरादून के स्टेशन सुप्रीटेंडेंट करतार सिंह ने कहा कि “गुरुवार को आई निरिक्षण टीम ने देहरदून को सफाई में पहला स्थान दिया है।उन्होंने कहा कि इस बात से मुझे बहुत खुशी है क्योंकि इस जगह पर पहुंचने के लिए हमने बहुत कोशिश की है और निरंतर रहे है।इसके अलावा जब आप कोई प्रयास करते हो तो उसका रिर्वाड आपको जरुर मिलता है।”

 

ओडीएफ घोषित उधमसिंह नगर के दावे फेल

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ऊधमसिंह नगर में एनएच मुआवजा घोटाले के बाद अब शौचालय निर्माण में बड़ा घोटाला सामने आया है। स्वच्छ भारत अभियान और मनरेगा के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में आधे-अधूरे शौचालय बनाकर लाखों-करोड़ों रुपये का गोलमाल किया गया है। इन गांवों में ग्रामीण अब भी खुले में शौच कर रहे हैं। जबकि यूएस नगर और उत्तराखंड को ओडीएफ भी घोषित कर दिया गया है।

काशीपुर से महज 17 किलोमीटर दूर कुंडेश्वरी न्याय पंचायत में एक गांव पड़ता है गुलजारपुर। इस गांव के अंतर्गत आने वाली जगतपुर राज कॉलोनी में करीब 40 परिवारों के पिछले छह महीने में शौचालय बनवाए गए हैं। लेकिन, अब तक किसी भी व्यक्ति का शौचालय शुरू नहीं हुआ है। खानापूर्ति के नाम पर सिर्फ दीवारें खड़ी कर टॉयलेट सीट लगा दी गई हैं। न ही गटर बनाये गए हैं, न ही कनेक्शन शुरू किये गए हैं। यही हाल गुलजारपुर गांव के अंतर्गत आने वाली सेमलपुरी कॉलोनी का है। यहां तो हालत और भी बदतर हैं। चार-पांच महीने पहले खड़ी की गई शौचालय की दीवारें आंधी-तूफान में ही गिर गई। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार ने रेत में मानक के मुताबिक सीमेंट ही नहीं मिलाया इससे दीवार भरभराकर गिर गई।

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जगतपुर राज कॉलोनी के मंगली सिंह ने बताया कि करीब छह महीने पहले गांव में कुछ लोग आए। खुद को सरकारी अधिकारी बताकर शौचालय बनाने के लिए कहा। हमने जगह दिखाई और कुछ ही घंटे में उन्होंने शौचालय की दीवार खड़ी कर दी। मंगली ने बताया कि ठेकेदार ने गटर के नाम पर गड्ढा भी मात्र दो फीट खोदा। कनेक्शन भी चालू नहीं किया। उनका परिवार अब भी खुले में शौच करने को मजबूर है। मंगली के ही भाई प्रेम सिंह के यहां भी ठेकेदार ने शौचालय के नाम पर दीवार खड़ी कर दी। इसमें भी कनेक्शन नहीं हुआ। और तो और गटर भी नहीं बनवाया। जगतपुर कॉलोनी के रामकिशोर, हेतराम के यहां भी ऐसे ही शौचालय की दीवार खड़ी की गई है। रामकिशोर ने बताया कि ठेकेदार ने एक दिन में ही गांव के पांच-पांच लोगों के शौचालय बना दिये। लेकिन, चालू किसी का भी नहीं हुआ।

सेमलपुरी निवासी मेघा सिंह के यहां भी चार महीने पहले शौचालय बनाया गया। लेकिन, शौचालय चालू नहीं हुआ। दीवार भी लगता है मानो बिना सीमेंट की बनाई। एक आंधी में ही दीवार टूट गई। बाद में शौचालय सीट खुद ही उन्होंने हटा ली।

सेमलपुरी की ही अतरकली ने बताया कि चार महीने पहले सरकारी मदद के नाम पर एक ठेकेदार ने दीवार खड़ी कर दी। आरोप है कि नींव ही नहीं खोदी। इससे दस दिन में ही दीवार गिर गई। गटर नहीं बनाए जाने के कारण कनेक्शन शुरू ही नहीं हो सका। अब तो दीवारें भी नहीं रह गईं। अतरकली ने बताया कि उसकी छह बेटियां हैं। वो कई बार अधिकारियों और नेताओं को शौचालय के लिए बोल चुकी है। लेकिन, कोई कार्रवाई नहीं हुई।

जिला पंचायत सदस्य जितेन्द्र सिंह ने आरोप लगाया है कि शौचालय निर्माण में बड़ा घोटाला हुआ है। उन्होंने बताया कि शौचालय निर्माण के लिए सरकार से 12000 रुपये का अनुदान मिला था। लेकिन, मौके पर जिस तरह सिर्फ दीवार खड़ी की गई है उसमें 3000 रुपये से अधिक की लागत नहीं आई है। लिहाजा साफ है प्रत्येक शौचालय में 9000 रुपये का गबन किया गया है। पूरे जिले में अगर ऐसा ही हुआ है तो यह घोटाला करोड़ों रुपये में पहुंचेगा।

जिला प्रशासन यूएस नगर को अखबारों और टीवी चैनलों में खुले में शौचमुक्त (ओडीएफ) घोषित दिखा चुका है। यहीं नहीं राष्ट्रीय रिकॉर्ड बताकर अधिकारी अपने नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज करवा चुके हैं। 13 अक्तूबर 2016 को तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी  डॉ.आशीष श्रीवास्तव को भी सर्टिफिकेट से नवाजा गया था। अब सोचने का विषय है कि क्या अधिकारियों ने बिना जांच किये ही आंख बंदकर जिले को ओडीएफ मान लिया था।

देशविरोधी नारेबाजी करने वाला कश्मीरी छात्र निलंबित

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कश्मीरी छात्रों द्वारा राजधानी में एक बार फिर देश् विरोधी नारे लगाए जाने का मामला सामने आया है। देहरादून के एक निजी संस्थान के छात्र ने बीते रोज देश विरोधी नारे लगाए। मामले को वीडियो भी वायरल हो गया। जिसके बाद दून के स्थानीय छात्रों ने विरोध शुरू कर दिया है। इसी क्रम में गुरुवार को एबीवीपी से जुड़े छात्रों ने मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए संबंधित छात्रों को निलंबित करने की मांग की। मामले में कार्रवाई करते हुए संस्थान ने एक छात्र को निलंबित कर दिया।
गुरुवार को डीएवी पीजी कॉलेज के छात्र संघ अध्यक्ष राहुल कुमार के नेतृत्व में छात्रों ने आईटीम संस्थान क घेराव किया। छात्रों ने आरोप लगाया कि संस्थान में पढ़ाई कर रहे कश्मीरी छात्र मो. शफी मिर देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त है। छात्रों ने कहा कि बीते दिनों संस्थान के छात्रों का वीडियो भी वायरल हुआ जिसमें छात्रों ने देश के खिलाफ नारेबाजी करने के साथ ही भारतीय सेना के खिलाफ गलत बयानबाजी भी की।
सोशल मीडिया पर अपलोड की गई इस वीडियो को लेकर छात्रों के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट भी दर्ज की जा चुकी है। छात्रों ने कहा कि कश्मीरी छात्र राजधानी में इस प्रकार की गलत बयानबाजी राजनीतिक संरक्षण के चलते कर रहे है। उन्होंने शासन से भी इस प्रकार की गतिविधियों में लिप्त लोगों के खिलाफ दशद्रोह के मकदमे दर्ज किए जाने की मांग की।
छात्रों ने मांग की कि राजधानी व आसपास देश की सुरक्षा से जुड़े कई संस्थान हैं। इसके अलावा केंद्रीय संस्थान व राजकीय संस्थान भी मौजूद हैं। ऐसी गतिविधियां इन संस्थानों की सुरक्षा के लिए भी हानिकारक है। उन्होंनें मांग की कि इस प्रकार के मामलों को गंभीरता से लेते हुए कड़ी कार्रवाई की जाए।
मामले में संस्थान की ओर से छात्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके अलावा मुख्त आरोपी छात्र मो. शफी मिर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। 

बलूनी को उपचार के लिए दिल्ली भेजने की मांग

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उत्तराखंड कांग्रेस के मुख्य प्रचार समन्वयक एवं पूर्व राज्य मंत्री, धीरेन्द्र प्रताप ने उत्तराखंड आन्दोलन की स्तंभ रही एवं आन्दोलनकारी बोर्ड की पूर्व चेयरमैन सुशीला बलूनी को उपचार हेतु तत्काल एयरलिफ्ट कर दिल्ली भेजने की मांग की है।

गुरुवार को धीरेन्द्र प्रताप ने पूर्व राज्य मंत्री मनीष नागपाल के साथ मैक्स अस्पताल जाकर वहां ईलाज करा रही सुशीला बलूनी और प्रसिद्व लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी का हालचाल जाना तथा उनके परिजनों से भेंट की। धीरेन्द्र प्रताप ने सुशीला बलूनी और नरेन्द्र सिंह नेगी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए कहा कि जहां नरेन्द्र सिंह नेगी में हुए आंशिक सूधार पर उनके शुभचिन्कों ने सन्तोष व्यक्त किया वहीं सुशीला बलूनी की बिगड़ती स्थिति पर दु़ख व्यक्त करते हुए उनकी जान बचाने के लिए सर्वश्रेष्ठ इलाज हेतु उन्हें दिल्ली भेजने की मुख्यमंत्री से मांग की है।