Page 702

भारी बारिश से नदियां उफान पर

0
पिछले चार दिन से क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश से नदियां उफान पर हैं। बैकुल और कैलाश नदी में अत्यधिक पानी आ गया है। इससे आसपास के गांवों के लोग भयभीत हैं। वहीं, बैगुल नदी पुल से करीब पांच फुट नीचे से बह रही है। हालांकि, सिंचाई विभाग ने नदी से किसी भी तरह का खतरा न होने का दावा किया है। ईई ने बताया कि नदियों को नहरीकरण करने से इस बार नदी गहरी हो गई हैं और भूमि कटाव भी नहीं होगा।
nadi me badh
बुधवार को सुबह आठ बजे तक बैगुल नदी में ढाई हजार और कैलाश में तीन हजार क्यूसेक पानी आया। जो शाम पांच बजे तक बढ़ते-बढ़ते बैगुल में 20 हजार और कैलाश में 22 हजार क्यूसेक हो गया। बैगुल और कैलाश नदी के उफान पर होने से नदी किनारे बसे गांवों के लोग बाढ़ की संभावना से सहमे हुए हैं।
तहसीलदार शेर सिंह ग्वाल ने बताया कि सभी बाढ़ चौकियां पूरी तरह अलर्ट हैं। प्रत्येक चौकी पर दिन-रात कर्मचारी तैनात हैं। जो निगरानी कर रहे हैं। क्षेत्र में अभी तक बाढ़ जैसी कोई स्थिति नहीं है। इधर, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता संजय राज ने बताया कि रिवर ट्रेनिंग पॉलिसी के तहत बैगुल और कैलाश नदी में जमी सिल्ट हटाकर उन्हें गहरा कर दिया गया है। नदियों के नहरीकरण होने से अब बाढ़ का कोई खतरा नहीं है।
पानी की निकासी नहीं होने से तहसील परिसर में जलभराव हो गया। अंग्रेजी शासनकाल में बनी तहसील की हालत बद से बदतर हो गई है। बरसात के दिनो में तहसील की छत टपकने से उसमें रखे अभिलेख भीगते हैं। इस बार भी बारिश के कारण तहसील भवन में पानी टपक रहा है। इससे कर्मचारियों में अनहोनी की आशंका पैदा हो गई है। कई बार शासन में तहसील भवन के निर्माण का मुद्दा उठा। लेकिन, अभी तक तहसील का निर्माण नहीं हुआ। आठ माह तक तो तहसील के अधिकारी व कर्मचारियों का वक्त गुजर जाता है। लेकिन, जैसे ही बरसात के दिन आते हैं, तो तहसील के कर्मचारियों में भय बना रहता है।

धर्मनगरी में पॉलीथिन के प्रयोग पर नपेंगे मुख्य नगर आयुक्त

0

धर्मनगरी से पाॅलिथिन की विदाई के लिए जिला प्रशास ने कमर कस ली है। इसी के तहत गुरुवार को यहां जिलाधिकारी दीपक रावत ने मुख्य नगर आयुक्त, नगर निगम हरिद्वार को निर्देश दिये कि कांवड मेले के दौरान किसी भी दशा में पाॅलीथीन बैग का इस्तेमाल न किया जाए तथा पाॅलीथीन बैग के व्यापक रोकथाम और उस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के लिए सम्पूर्ण मेला क्षेत्र और नगरीय क्षेत्र में साइनेज् बोर्ड लगाकर व्यापक प्रचार-प्रसार कर पाॅलीथीन बैग की रोकथाम कराना सुनिश्चित करें।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वर्तमान कांवड़ मेला अवधि में तथा कांवड़ मेला समाप्ति के बाद भी किसी व्यापारी और अन्य व्यक्तियों द्वारा पाॅलीथीन का प्रयोग किया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार अर्थदण्ड की वसूली सुनिश्चित की जाए और नगर निगम क्षेत्र में समय-समय पर पाॅलीथीन की रोकथाम एवं उसके चलन की रोकथाम के लिए स्वयं औचक निरीक्षण कर उसको प्रतिबंधित किया जाए।
उन्होंने कहा कि यदि निरीक्षण के दौरान भी कोई व्यापारी या अन्य व्यक्ति पाॅलीथीन का प्रयोग करते हुए पाया जाता है, तो उसके संबंध में मुख्य नगर आयुक्त, नगर निगम, हरिद्वार के विरुद्ध भी नियमानुसार प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, जिसके लिए वह स्वयं उत्तरदायी होंगे। जिलाधिकारी ने दिये गये निर्देशों का अनुपालन कड़ाई से सुनिश्चित करने को कहा है।

खुले में शौच व गंदगी करने पर होंगे दंडित

0

हरिद्वार, जिलाधिकारी दीपक रावत ने समस्त जिला स्तरीय अधिकारियों को अवगत कराया कि सर्वव्यापी स्वच्छता कवरेज हासिल करने के प्रयासों में वृद्धि करने तथा स्वच्छता पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए भारत सरकार द्वारा स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत की। इस मिशन के अंतर्गत खुले में शौच प्रथा से मुक्त, स्वच्छ एवं साफ-सुथरा परिसर बनाना है।
इस कार्यक्रम के अंतर्गत लोगों को खुले में शौच के दुष्परिणाम, साफ-सफाई और पर्यावरण स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल आदि पर समुदाय के लिए जन-जागरूकता अभियान भी पूर्व से चलाये जा रहे हैं। विगत कई वर्षों से आमजन को प्रेरित भी किया जा रहा है। जिन कार्यालय परिसर में शौचालय निर्मित हैं, उनका उपयोग आमजन के लिए भी होता है। परन्तु प्रायः देखा जा रहा है कि फिर भी कई लोग अभी भी खुले में शौच आदि कार्य कर रहे हैं, जो भारत सरकार की प्रगतिशील एवं महत्वपूर्ण कार्यक्रम स्वच्छ भारत मिशन के विपरीत है।कार्यालय परिसर में जो भी शौचालय बने हैं उनमें प्रत्येक समय सफाई, पेयजल की सुदृढ़ व्यवस्था हो तथा वह आम जनता के लिए भी खुला रहे।

डॉक्टर और नर्स के तबादलों से मरीज परेशान

0

डाक्टरों के बाद अब दून अस्पताल में नर्सों और पेरामेडिकल स्टॉफ के ट्रांसफर कर दिए गए हैं। शासन ने कुल 40 ट्रांसफर दून अस्पताल से किए हैं। जिनमें से 25 नर्स हैं। पहले से स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहे दून अस्पताल में नए स्थानांतरण मरीजों को परेशानी में लाने वाले है।

दून अस्पताल से नर्सों के ट्रांसफर इस समय मरीजों पर भारी पड़ेंगे, क्योंकि अन्य अस्पतालों में रिलीव होने वाले स्टाफ के बदले नया स्टाफ आएगा, लेकिन दून अस्पताल में जाने के बाद कोई नया नहीं आएगा। क्योंकि ट्रांसफर किया गया स्टाफ स्वास्थ्य विभाग के तहत आता है। जबकि दून अस्पताल में अब नया स्टाफ चिकित्सा शिक्षा के जरिये आएगा। इसकी प्रक्रिया में अभी समय लगेगा।
इसलिए ट्रांसफर की जानकारी मिलते ही राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रदीप भारती गुप्ता ने निदेशक चिकित्सा शिक्षा से वार्ता कर तब तक के लिए नर्सों की रिलीविंग रोकने का आग्रह किया है, जब तक नया स्टाफ न आ जाए। प्राचार्य डॉ. पीबी गुप्ता ने बताया कि इसे लेकर शासन से भी आग्रह किया गया है कि अभी दून अस्पताल के स्टाफ का ट्रांसफर न किया जाए।

जल्द ही उत्तराखंड में इमरजेंसी का होगा एक नंबर ”112”

0

उत्तराखंड अपने कई आपातकालीन हेल्पलाइन नंबरों को खत्म करने जा रहा है और आने वाले कुछ महीनों में एक ही आपातकालीन नंबर 112 को जारी करने की कवायद तेज कर रहा है। अधिकारियों ने बताया कि मौजूदा आपातकालीन संख्या जैसे 100 (पुलिस), 101 (अग्नि), 102 (एम्बुलेंस) और 108 (आपदा प्रबंधन) को 112 नंबर में शामिल किया जाएगा, जो राज्य में सभी प्रकार की आपातकालीन कॉलों का मुख्य आधार बन जाएगा।

देहरादून एसएसपी के कार्यालय में एक सेंटर कमांड केंद्र स्थापित किया जाएगा जो सभी प्रकार की इमरजेंसी कॉल को रिसीव करेंगे और उसके बाद संबंधित प्रभागों को कॉल के अलग-अलग डिर्पाटमेंट में फारवर्ड किए जाऐंगे। महानिदेशक पुलिस (डीजीपी) एम ए गणपति ने कहा कि इस परियोजना को कार्यान्वित करने के लिए केंद्र से 6.5 करोड़ रुपये पहले से ही प्राप्त हो चुके हैं।

गणपति ने कहा, “नई आपातकालीन सेवा के तहत, संकट में एक व्यक्ति को 112 पर कॉल करने की आवश्यकता होगी। केंद्रीकृत कमांड सेंटर को यह कॉल प्राप्त होगा और वह संबंधित विभाग को यह काल फारवर्ड करेगा जिससे रेस्पांस समय काफी कम हो जाएगा।”

डीजीपी ने कहा कि प्रशिक्षित कर्मियों और पर्याप्त फोन लाइनों की कमी से पुलिस हेल्पलाइन (100) को कई शिकायतों को संबोधित करने में देरी हो जाती है। पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) अमित सिन्हा, जो इस परियोजना के प्रबंधक भी हैं, उन्होंने कहा कि, “हमारे पास नियंत्रण कक्ष में 140 कॉल अटेंडेंट हैं। इनमें से वर्तमान में, केवल छह लोग हेल्पलाइन के लिए किए गए कॉल का प्रबंधन करते हैं।”

प्रस्तावित प्रपोजल के अनुसार प्रतिक्रिया प्रणाली के तहत, एक शिकायत दर्ज करने के बाद एक कॉल अटेंडेंट तुरंत कॉल डिस्पैचर को इमरजेंसी कॉल भेज देगा।

सिन्हा ने कहा कि पुलिस विभाग चार पहिया और दुपहिया वाहन भी खरीदेगी ताकि पुलिस शिकायतकर्ता के पास थोड़े समय के भीतर पहुंच सके। सिन्हा ने कहा कि, “हमारा लक्ष्य प्रतिक्रिया समय को 5 से 6 मिनट तक कम करने का है, इससे जैसे ही हमें कोई संदेश मिलेगा हम निकटतम जीपीएस-सक्षम आपातकालीन वाहन को भेज कर आगे की कार्यवाही सकते है।

सहसपुर में बनेगा उत्तराखंड का विज्ञान नगरः मुख्यमंत्री

0

राज्य वासियों को नागरिक दायित्व निभाने चाहिए। यदि कहीं कुछ गलत हो रहा है, तो उसकी शिकायत अधिकारियों से करें। यदि अधिकारी समय पर उचित कार्रवाई नहीं करते हैं, तो कोई भी व्यक्ति मुख्यमंत्री से ऐसे अधिकारी की शिकायत कर सकता है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गुरुवार को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जन्मदिवस पर सहसपुर विधानसभा के ग्राम भाऊवाला में आयोजित सम्मेलन में यह बात कही।

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि सहसपुर नहर का नाम डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर रखा जाएगा तथा इसके स्रोत पर डॉ.मुखर्जी के नाम पर एक जलाशय का निर्माण भी किया जाएगा। उन्होने कहा कि साइंस सिटी भी सहसपुर में ही विकसित की जाएगी। साइंस सिटी राज्य के लिए सम्मान का विषय है। सहसपुर में पहले से ही विभिन्न उच्च शिक्षा तथा तकनीकी संस्थान है। अतः साइंस सिटी के लिए यह एक उपयुक्त स्थान है। उन्होंने कहा कि सरकार ने लगभग साढे तीन माह का कार्यकाल पूरा कर लिया हैं और इस बीच हमने अनुभव किया है कि राज्य के पास सीमित संसाधन है, परंतु संसाधनों के सदुपयोग द्वारा राज्य का विकास सुनिश्चित किया जा सकता है। राज्य सरकार विकास के कार्यों में कोई बाधा उत्पन्न नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि हमने अपने विधायकों को कहा है, कि प्रत्येक विधायक अपनी-अपनी विधानसभा में होने वाले विकास संबंधित कार्यों को निर्धारित करें।

प्रत्येक विधायक अपने क्षेत्र की प्राथमिकता जनभागीदारी से तय करें। 98 प्रतिशत घोषणाओं को समयबद्ध रूप से पूरा किया जाएगा। त्रिवेंद्र ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि सबसे पहले भ्रष्टाचार को समाप्त किया जाए तथा पारदर्शी तथा संतुलित विकास सुनिश्चित किया जाए। राज्य सरकार मात्र दो प्रतिशत ब्याज दर पर लघु और सीमांत किसानों को ऋण उपलब्ध करवा रही है। राज्य में माध्यमिक शिक्षा की स्थिति अच्छी है, परंतु हमें अपनी उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारनी होगी। इस दिशा में राज्य सरकार द्वारा शीघ्र एनआईएफटी, एनआईआईटी, प्लास्टिक टेक्नोलॉजी का संस्थान हॉस्पिटैलिटी यूनिवर्सिटी स्थापित किया जा रहा है।

बुलंद हौंसले की मिसाल है 17 साल का मुकुल पंवार

17 साल के मुकुल पंवार आज एक मशहूर नौजवान हैं। मुकुल एक नेशनल चैंपियन हैं, पिछले साल मार्च में मुकुल ने हिमाचल प्रदेश में हुई स्पेशल ओलंपिक भारत में स्नो-शूइंग कैटेगरी में दो गोल्ड मेडल जीते। इसके साथ साथ हाल ही में आॅस्ट्रिया में हुए अंतर्राष्ट्रीय स्पेशल ओलंपिक में मुकुल ने स्नो-शूइंग कैटेगरी में ब्रांज मेडल कमा कर अपना नाम किया।

मुकुल एक खास खिलाड़ी है। ये सिर्फ इसलिये नहीं कि मुकुल पैदाइश से ही सुन औऱ बोल नहीं सकता, बल्कि इसलिये भी कि मुकुल ने कभी भी अपनी शारीरिक क्षमता को अपने सपने साकरा करने के आढ़े नहीं आने दिया। मुकुल की इस कामयाबी के पीछे उनके माता-पिता का भी खासा योगदान हैं। पिता प्रताप पंवार ने अपनी अाफिस की नौकरी छोड़ कर अपने बेटे को उसकी मंजिल तक पहुंचने में मदद करने का फैसला किया, तो टीचर माँ बिजया पंवार ने भी अपने बेटे को भरपूर प्यार और हौंसला दिया। अपने बेटे की कामयाबी को याद करते हुए वो कहते हैं कि, “हमने कभी भी इतनी उम्मीद नहीं की थी, लेकिन अच्छा लगता है कि जिन लोगों के लिये मुकुल कुछ समय पहले तक कुछ नहीं था उनके लिये अब वो रोल माॅडल बन गया है।”

mukul panwar

मुकुल के जीवन में ये बदलाव तब आया जब 3 साल पहले उसने दिल्ली कैंट स्थित आर्मी स्कूल में दाखिला लिया। मुकुल के स्पोर्टस टीचर सुधीर प्रसाद बताते हैं कि, “जब मैने पहली बार मुकुल को देखा था तो वो अपने जैसे और बच्चों की भीड़ में भी अलग दिख रहा था। उसकी शारीरिक बनावट देखकर मुझे यकीन था कि वो जरूर आने वाले दिनों में कामयाबी हासिल करेगा”  

वहीं जब मुकुल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिये सफर नहीं कर रहा होता तो आप इस क्लास 12 के छात्र को कैनवस पर रंग भरते देख सकते हैं। मुकुल न सिर्फ अपने जैसे और बच्चों के लिये मिसाल है नहीं बल्कि हम सभी को ये सबक याद दिलाया है कि जहां चाह है वहां राह है।  

पूर्व सीएम हरीश रावत ने मनाई ”हरेला पार्टी”

1

उत्तराखंड का लोकपर्व हरेला अब राजनीति की उबड़खाबड़ राह पर अपनी मंजिल की तलाश में है। सत्ता से बाहर हो चुके हरीश रावत ने आज देहरादून में हरेला पर्व मनाया तो सत्ता में बैठी बीजेपी ने अभी इस मसले पर किसी खास कार्यक्रम का ऐलान नहीं किया है। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि कहीं हरेला का दम राजनीतिक लड़ाई में ना निकल जाए।

16056de4-a749-4262-9e72-cfb5e4c57a13

प्रकृति और इंसान के बीच के संबंधों की हरी भरी दास्तान हरेला को बुजुर्गों ने संभाल कर रखा लेकिन बदलते वक्त के साथ लोग भूलने लगे। हरीश रावत सरकार ने हरेला की बिसरी हुई कहानी को नए सिरे से सुनाया है। इसी का नतीजा रहा कि पूरे राज्य में हरेला को लेकर नए सिरे से जागरुकता आई। अब हरीश रावत सत्ता में नहीं हैं लेकिन अपने घर में हरेला मना रहें हैं। इसके साथ ही हरीश रावत ने राज्य के मुख्यमंत्री को अपने अंदाज में नसीहत भी दे डाली है।

हरेला ना सिर्फ उत्तराखंड की आत्मा से जुड़े पर्वों में से एक है बल्कि प्रकृति के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करने का मौका भी है। हरीश रावत ने हरेला और घी संक्राद जैसी परंपराओं को मुख्य धारा में लाकर एक बेहतर संदेश दिया था। अब जिम्मेदारी त्रिवेंद्र सरकार पर है। बेहतर हो कि राजनीतिक वर्जनाओं को तोड़कर ऐसी परंपराओं के लिए सभी साथ आएं।पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि हरेला और घी संग्रांद प्रकृति, संस्कृति और उत्पादकता का पर्व है। इनके संरक्षण और संवर्धन के लिए हमें सामूहिक प्रयास करने होंगे।

कार्यक्रम में लोगों ने विभिन्न लोक व्यंजनों जैसे कि मंडुए का रोटी, झंगोरे की खीर, उड़द की दाल की पकौड़ी, अरसे, आदि का खूब आनंद लिया।

सरकारी अस्पताल के परिसर में शुरू किया धरना

उत्तराखंड में चार धाम यात्रा यात्रा के प्रवेश द्वार ऋषिकेश के एक मात्र सरकारी अस्पताल के हाल सरकार के तमाम वादों की हकीकत बताने के लिए काफी है, यहाँ काफी लंबे समय से डाक्टर की कमी के चलते मरीजों को काफी दिक्केतें हो रही है।

डॉक्टर्स की नियुक्ति को लेकर अब लोगों ने सर्वदलीय धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है जिसमे स्थानीय लोगों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मीडिया से बात करते हुए प्रदेश कांग्रेस जिलाध्यक्ष जयेन्द्र रमोला ने बताया कि ऋषिकेश के एकमात्र सरकारी अस्पताल में पिछले कई समय से डॉक्टर्स की कमी के बावजूद अभी तक यहां डॉक्टर्स के खाली पड़े पद नहीं भरे है जिससे लोगों को काफी दिक्कतें हो रही है, उन्होंने बताया कि ये प्रदर्शन तब तक चलता रहेगा जब तक प्रदेश सरकार यहां डॉक्टर्स उपलब्ध नही करती।

पर्वतारोही लवराज के गृह क्षेत्र में जोरदार स्वागत

0

एक बार नहीं बल्कि छह बार एवरेस्ट फतह कर चुके पद्मश्री लवराज धर्मसत्तू का गुरुवार को उनके गृह क्षेत्र मुनस्यारी में नागरिक अभिनंदन हुआ। अभिनन्दन समारोह से गदगद लवराज ने क्षेत्र के युवाओं को जहां पर्वतारोहण के क्षेत्र में आगे आने का आह्वान किया। वहीं उन्होने कहा कि पहाड के युवाओं का पलायन रोकने के लिए जरुरी है कि वो अपने रोजगार के साधन अपने ही पहाड में तलाशें।

नागरिक अभिनंदन समारोह में खुशाल धर्मसत्तू, तारा पांगती, मनोहर दरियाल, ईश्वर कोरंगा आदि ने कहा कि दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर छह बार फतह कर लवराज ने न केवल मुनस्यारी बल्कि पूरे देश को विश्व स्तर पर गौरवान्वित किया है। उन्होंने कहा कि वे क्षेत्र के लोगों के प्रेरणास्रोत है। समारोह में बोलते हुए लवराज ने कहा कि अपने गृह क्षेत्र में सम्मानित होने से उन्हें नई ऊर्जा मिलेगी। उन्होंने पर्वतारोहण के क्षेत्र में कैरियर की जानकारी देते हुए युवाओं से इस क्षेत्र में आगे आने का आह्वान किया। उनकी धर्मपत्नी रीना कौशल धर्मसत्तू ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्र के लोगों में साहसिक खेलों के लिए नैसर्गिक प्रतिभा होती है। युवाओं को अपनी प्रतिभा का उपयोग करते हुए इस क्षेत्र में आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि लवराज और वे युवाओं को इस क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव मदद को तैयार हैं।