महिला मंगल दल कर रहा सड़कों का रख-रखाव
देश के जाने माने पत्रकार मार्क टुली की तबियत बिगड़ी,जाॅली ग्रांट में भर्ती
बीबीसी के पूर्व भारतीय संवादाता मार्क तुली को शुक्रवार को देहरादून जिले के जॉलीग्रांट हिमालयन इंस्टीट्यूट अस्पताल ट्रस्ट के गहन देखभाल इकाई (आईसीयू) में दोपहर में भर्ती कराया गया, जहां उन्हें एम्बुलेंस सें हरिद्वार से लाया गया, तूली हरिद्वार में एक डाक्यूमेंट्री के सिलसिले में आए थे।
तुली 81 साल के हैं। बताया जा रहा है कि, “मरीज पिछले चार-पांच दिनों से दस्त और उल्टी से पीड़ित थे। शुक्रवार को गुर्दे से रक्तस्त्राव शुरु होने से उन्हे अस्पताल ले जाया गया। उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया है और अब उनकी हालत स्थिर है, लेकिन उन्हें निरीक्षण में रखा गया है।डॉक्टर ने कहा कि मरीज को शनिवार को कोलोनोस्कोपी से गुजरना होगा जिसके बाद उसकी स्थिति ज्ञात होगी।
अस्पताल के जनसंपर्क अधिकारी सुशील कप्तियाल ने कहा, “अस्पताल मार्क टुली की अच्छे से देखभाल कर रहा है।”
आपकों बतादें कि मार्क ने पीएम मोदी पर किताब लिखी है और साथ ही उन्हें राजनिति के कूटनितिज्ञ के नाम से भी जाना जाता है।
अब ”पीएसी” करेगी जंगल में छुपे अपराधियों को ढूंढने में मदद
उत्तराखंड में कुल भूमि क्षेत्र में जंगल का 60% से अधिक हिस्सा है – जो कि अपराधियों द्वारा अलग-अलग ठिकानों के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। राज्य पुलिस विभाग ने “जंगल सरवाइवल” में प्रशिक्षण के लिए अपने प्रांतीय सशस्त्र सेना (पीएसी) के कर्मियों को भेजने का निर्णय लिया है। गहन जंगल सरवाइवल में प्रशिक्षण के माध्यम से, पांच बटालियनों में तैनात पीएसी कर्मियों को जंगलों के मुश्किल इलाके से परिचित कराया जाएगा और जंगल में तलाशी अभियान चलाने के लिए भी तैयार किया जाएगा।
डिपार्टमेंट ऑफ पुलिस ऑफिस (डीजीपी) एम ए गणपति ने बताया कि, “शुरू में, प्रत्येक पीएसी बटालियन से एक टुकड़ी को विशेष जंगल सरवाइवल प्रशिक्षण से गुजरना होगा। सप्ताह भर के प्रशिक्षण में उन्हें जंगल के अस्तित्व और आपरेशन तकनीकों के विभिन्न पहलुओं के बारे में बताया जाऐगा।”
यह प्रशिक्षण उधम सिंह नगर, नैनीताल, अल्मोड़ा, हरिद्वार और पौड़ी के जंगल में आयोजित किया जाएगा। राज्य में तीन पीएसी बटालियन और दो भारतीय रिजर्व बटालियन (आईआरबी) हैं जो रुद्रपुर, हरिद्वार और रामनगर में स्थित हैं।
गणपति ने कहा कि इसका उद्देश्य जंगलों को अपराधियों के ठिकाने के रूप में इस्तेमाल करना और उत्तराखंड के वन क्षेत्र में शिकार गतिविधियों को रोकना है। डीजीपी ने कहा, “हम वन विभाग के समन्वय में इस प्रशिक्षण का संचालन करने जा रहे हैं।”
सूत्रों के मुताबिक, यह कदम कुमांऊ क्षेत्र के कुछ इलाकों जैसे अल्मोड़ा और नैनीताल जिलों के राजस्व इलाकों में ध्यान केंद्रित करने वाले वामपंथी उग्रवाद को भी कंट्रोल में लेने का इरादा है। हालांकि, कोई आधिकारिक इसकी पुष्टि करने के लिए तैयार नहीं है।
कर्मियों का चयन उम्र और फिटनेस के स्तर पर आधारित होगा; केवल योग्यतम को ही प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा। चयनित कर्मियों को जरूरी बुनियादी चीजों के साथ जंगल भेज दिया जाएगा, और उन्हें वन में प्राप्त भोजन और पानी पर जीवित रहने के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी।
इसके अलावा, उन्हें आवश्यक उपकरण और जंगल सरवाइवल किट उपलब्ध कराएं जाऐंगे। प्रशिक्षण के दौरान, उन्हें अलग-अलग टास्क जैसे नक्शा पढ़ने, जंगल में मार्ग ढूंढने और शिविरों की स्थापना के लिए कार्य दिए जाएंगे।
यह पता चला है कि पूरा प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तीन चरणों में आयोजित किया जाएगा, इनडोर और आउटडोर ब्रीफिंग सहित पहले चरण के साथ स्वथ; दूसरे चरण में वन विभाग के कर्मचारियों के साथ जंगल में संयुक्त गश्त को शामिल किया गया; और अंत में, कर्मियों को लगभग एक सप्ताह तक अस्तित्व प्रशिक्षण के लिए जंगल भेज दिया जाएगा।
यह पूरा प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तीन चरणों में आयोजित किया जाएगा, पहले चरण में इनडोर और आउटडोर ब्रीफिंग के साथ; दूसरे चरण में वन विभाग के कर्मचारियों के साथ जंगल में संयुक्त गश्त को शामिल किया जाएगा और अंत में कर्मियों को लगभग एक सप्ताह तक सरवाइवल प्रशिक्षण के लिए जंगल भेज दिया जाएगा।
पीएसी मुख्यालय अभी प्रशिक्षण के लिए रूपरेखा तैयार कर रहा है, लेकिन कावड़ यात्रा की समाप्ति के बाद ही इस योजना के शुरू होने की उम्मीद है।
उत्तराखण्ड के न्यायालयों में दो लाख से अधिक केस पेंडिंग
उत्तराखंड के न्यायालयों में कुल 2 लाख 31 हजार 478 केस लंबित है जिसमें 32190 मामले उच्च न्यायालय में लम्बित है। इसके अतिरिक्त उत्तराखंड के न्यायालयों में एक चौथाई से अधिक जजों व मजिस्ट्रेटों के पद रिक्त हैं। यह तथ्य सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन को उत्तराखंड उच्च न्यायालय के लोक सूचना अधिकारी द्वारा उपलब्ध करायी गयी सूचना से प्रकाश में आया है।
काशीपुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के लोक सूचना अधिकारी से उत्तराखंड में लम्बित केसों के विवरण की सूचना मांगी थी। इसके उत्तर में हाईकोर्ट के लोेक सूचना अधिकारी/उप निबंधक के.सी. सुयाल ने पत्रांक 2441 से सम्बिधित विवरणों की सत्यापित फोटो प्रतियां उपलब्ध करायी है।
नदीम को उपलब्ध कराये गये जनवरी-मार्च 2017 के विवरण के अनुसार 31 मार्च 2017 को उत्तराखंड उच्च न्यायालय में 32190 केस लम्बित है जिसमें 22537 सिविल तथा 9653 फौजदारी केस शामिल हैं। इसके अतिरिक्त अधीनस्थ न्यायालय में कुल 1 लाख 99 हजार 288 केस लम्बित है। जिसमें 32770 सिविल तथा 1 लाख 66 हजार 518 फौजदारी मामले शामिल हैं।
सूचना से मिली जानकार के अनुसार 31 मार्च 2017 को उच्च न्यायालय में 11 जजों के स्वीकृत पदों मेें से 4 रिक्त थे तथा अधीनस्थ न्यायालयों में जजों व न्यायिक अधिकारियों के कुल 291 पदों में से 75 पद रिक्त हैं। उल्लेखित है हाईकोर्ट में इसके बाद 3 जजों की नियुक्ति होने से हाईकोर्ट में 1 रिक्त पद रह गया है।
हाईकोर्ट में दिसम्बर 2014 के अन्त में कुल 23105 लम्बित केस लम्बित थे जो दिसम्बर 2015 में बढ़कर 26680, 2016 में बढ़कर 32004 तथा मार्च 2017 में 32190 हो गये है।
अधीनस्थ न्यायालय में दिसम्बर 2014 के अंत कुल लम्बित केसों की संख्या 1 लाख 45 हजार 326 थी, जो दिसम्बर 2015 में 1,66,618 दिसम्बर 2016 में 190948 तथा मार्च 2017 में 1,99,288 हो गयी है।
हाईकोर्ट व अधीनस्थ न्यायालयों में अपराधिक (फौजदारी) के लम्बित केसों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। जहां 2014 के अंत में हाईकोर्ट में अपराधिक मामले केवल 6436 लम्बित थे, 2015 में बढ़कर 8120 तथा 2016 में 9440 हो गये तथा मार्च 2017 में इनकी संख्या 9653 थी।
इसी प्रकार अधीनस्थ न्यायालयों में 2014 के अंत में कुल 1 लाख 15 हजार 723 अपराधिक मामले न्यायालयों में लम्बित थे जो 2015 में बढ़कर 135736 तथा 2016 में 1,58,886 हो गये तथा मार्च 2017 में 1,66,518 हो गये हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने गंगा को जीवित मनुष्य के दर्जे के हाई कोर्ट के फैसले पर लगाईं रोक
अब गंगा और यमुना नहीं रहेंगी जीवित मानव, गंगा को जीवित मानव का दर्जा दिए जाने के उत्तराखंड हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही दिन स्टे लगा दिया है। गंगा और यमुना नदी को जीवित मानव का दर्जा दिए जाने पर हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका के तहत स्टे लगा दिया है।
बता दे की जनहित याचिका पर कार्यवाही करते हुए हाई कोर्ट ने गंगा और यमुना को जीवित मानव का दर्जा दिया था जिसको त्रिवेंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चेलेंज किया था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर फिलहाल स्टे लगा दिया है जिससे गंगा प्रेमी काफी नाखुश दिखाई दे रहे है।
गौरतलब है कि नैनीताल हाई कोर्ट ने एक याचिका का निस्तारण करते हुए गंगा और यमुना नदी को जीवित का दर्जा दिया था इससे किसी भी तरह की छेड़छाड़ खनन और नदी के साथ ही गंदगी फेंकने वालों पर भी अाय.पी.सी. की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज करने का आदेश था। गंगा और यमुना को एक जीवित मानव की तरह कानूनी दर्जा देते हुए अदालत ने नमामि गंगे के निदेशक, उत्तराखंड के मुख्य सचिव और उत्तराखंड के महाधिवक्ता को नदियों के कानूनी अभिभावक होने के निर्देश दिए थे और उन्हें गंगा और यमुना और उसकी सहायक नदियों की सुरक्षा करने उनके संरक्षण की जिम्मेदारी दी थी।
अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कांग्रेस ने त्रिवेंद्र सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है, कांग्रेस के जिला अध्यक्ष जय निर्मला ने त्रिवेंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए इसे सिर्फ खनन माफिया को फायदा पहुंचाने की बात कही है।
मैड के प्रयास से दून की नदियों के पुनर्जीवन के लिये सीएम कार्यालय ने दियेे निर्देश
दून के शिक्षित छात्रों के संगठन, मेकिंग अ डिफरेंस बाय बीइंग द डिफरेंस (मैड) के सुझाव पर सीएम कार्यालय ने सिंचाई विभाग से दून की नदियों के पुनर्जीवन पर, केंद्र के नमामि गंगे कोष से सहायता लेने पर उचित कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। इस पत्र की एक प्रति मैड के संस्थापक अध्यक्ष अभिजय नेगी से भी सांझा की गई।
गौरतलब है कि अप्रैल में मैड के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से भेंट कर के यह सुझाव दिया था। मैड ने अपनी प्रस्तुति में बताया था कि संस्था के आग्रह पर केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय अप्रैल 2016 में ही रिस्पना-बिंदाल को गंगा रिवर बेसिन का भाग घोषित कर चुका है। इसलिए नमामि गंगे कोष से इन नदियों को पुनर्जीवित करने के लिये राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान रुड़की द्वारा अपनी 2014 की शोध रिपोर्ट में 1 करोड़ रुपये की तय की गई लागत को पूरा किया जा सकता है, जिनसे इन नदियों के पुनर्जीवन पर काम शुरू किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने जल संग्रक्षण से संबंधित उत्तरकाशी, डोईवाला, हल्द्वानी एवं देहरादून के चार सुझाव सिंचाई विभाग को कार्यवाही के लिए भेजे है, जिसमें दून से संबंधित सुझाव मैड के नदियों के पुनर्जीवन से संबंधित है। अपनी छठी वर्षगांठ मनाने के मौके पर मैड ने मैडाथान के आयोजन के ज़रिए हज़ारो युवाओ को नदियों की दयनीय स्थिति की तरफ संवेदनशील होने का आग्रह किया था। इसके बाद मैड ने ‘वाटर मैन’ राजेन्द्र सिंह से रिस्पना तल पर भेंट कर, लगातार नुक्कड़ नाटक के आयोजन के ज़रिए जागरूकता का प्रयास किया था।
पिक्क-अप वैन में मिली 900 शराब की बोतलें
कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले ही शराब तस्कर ऋषिकेश में सक्रिय होने लगे हैं। बड़ी संख्या में उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब से आने वाले कांवड़ियों में देशी शराब की सप्लाई करने के लिए प्रतिदिन बड़ी मात्रा में शराब तीर्थ नगरी ऋषिकेश में लाई जाती है।
गौरतलब है कि तीर्थ नगरी ऋषिकेश ड्राई एरिया है जँहा शराब सेवन पर और बिक्री पर पाबंदी है, जिसके चलते ऋषिकेश तीर्थनगरी हमेशा से ही शराब तस्करों की पसंदीदा जगह रही है। बड़ी मात्रा में यहां पर अवैध छपरा शराब की सप्लाई की जाती है।आज रूटीन चेकिंग के दौरान ऋषिकेश कोतवाली पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली मौके पर करीब 900 देशी शराब के पव्वे कट्टो में में भरे गए चेकिंग के दौरान पकड़े गए अभियुक्त का धारा 60/72 में चालान कर कल कोर्ट में पेश किया जायेगा
सड़क दुर्घटना में हेड कांस्टेबल की मौत
आज शुक्रवार को थाना नेहरूकालोनी में कैलाश अस्पताल के निकट ट्रक न0 यूके07 सीए 2777 जो कि जोगीवाला से रिस्पना की ओर आ रहा था, के द्वारा कार न0 यूके07 AG 0921, टेम्पो यूके 07 क्यू 6694 व मोटरसाईकिल न0 यूके07 एए 1726 को टक्कर मार दी जिसमे कुछ लोग घायल हो गए। घायल व्यक्तियों को उपचार हेतु पुलिस द्वारा कैलाश अस्पताल पहुचाया गया। जिसमें मोटर साईकिल सवार प्रमोद राणा पुत्र बी0एस0राणा निवासी देव सुमन नगर बल्लूपुर रोड़ उम्र 32 वर्ष की उपचार के दौरान मृत्त घोषित कर दिया गया। मृत्तक उत्तराखण्ड पुलिस में 2005 कास्टेबल के पद पर भर्ती हुये थे तथा वर्तमान में हेड कास्टेबल के पद पर सीएम0 आवास में तैनात थे । मोटरसाईकिल में सवार उनकी पत्नी निमा राणा वाईफ/आॅफ प्रमोद राणा का उपचार कैलाश अस्पताल में चल रहा है अन्य लोग को मामूली चोटे आयी है ।पुलिस द्वारा उक्त ट्रक को कारगीचौक के पास पकड़ लिया गया है। अग्रिम कार्यवाही प्रचलित है।
भारी बारिश से नदियां उफान पर

धर्मनगरी में पॉलीथिन के प्रयोग पर नपेंगे मुख्य नगर आयुक्त
धर्मनगरी से पाॅलिथिन की विदाई के लिए जिला प्रशास ने कमर कस ली है। इसी के तहत गुरुवार को यहां जिलाधिकारी दीपक रावत ने मुख्य नगर आयुक्त, नगर निगम हरिद्वार को निर्देश दिये कि कांवड मेले के दौरान किसी भी दशा में पाॅलीथीन बैग का इस्तेमाल न किया जाए तथा पाॅलीथीन बैग के व्यापक रोकथाम और उस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के लिए सम्पूर्ण मेला क्षेत्र और नगरीय क्षेत्र में साइनेज् बोर्ड लगाकर व्यापक प्रचार-प्रसार कर पाॅलीथीन बैग की रोकथाम कराना सुनिश्चित करें।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वर्तमान कांवड़ मेला अवधि में तथा कांवड़ मेला समाप्ति के बाद भी किसी व्यापारी और अन्य व्यक्तियों द्वारा पाॅलीथीन का प्रयोग किया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार अर्थदण्ड की वसूली सुनिश्चित की जाए और नगर निगम क्षेत्र में समय-समय पर पाॅलीथीन की रोकथाम एवं उसके चलन की रोकथाम के लिए स्वयं औचक निरीक्षण कर उसको प्रतिबंधित किया जाए।
उन्होंने कहा कि यदि निरीक्षण के दौरान भी कोई व्यापारी या अन्य व्यक्ति पाॅलीथीन का प्रयोग करते हुए पाया जाता है, तो उसके संबंध में मुख्य नगर आयुक्त, नगर निगम, हरिद्वार के विरुद्ध भी नियमानुसार प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, जिसके लिए वह स्वयं उत्तरदायी होंगे। जिलाधिकारी ने दिये गये निर्देशों का अनुपालन कड़ाई से सुनिश्चित करने को कहा है।





























































