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अधिकारियों के अवकाश लेने पर रोक

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जनपद पौड़ी गढ़वाल, में मौसम विभाग की ओर से जारी पूर्व चेतावनी के मध्यनजर राज्य सरकार द्वारा जिलाधिकारियों को सर्तक रहने के निर्देश जारी किये हैं। शासन से प्राप्त निर्देशों के क्रम में जिलाधिकारी सुशील कुमार ने जनपद में 12-13 जुलाई को सभी सरकारी और गैर सरकारी स्कूल, कॉलेज व आंगनबाड़ी केंद्रों में एक दिन का अवकाश रहेगा।

जिलाधिकारी ने मुख्य शिक्षा अधिकारी को उक्त निर्देशों का परिपालन सुनिश्चित करने को कहा। जनपद में लगातार हो रही भारी वर्षा को देखते हुए जिला प्रशासन ने आईआरएस सिस्टम से जुड़े विभागों को मुस्तैद रहने के निर्र्देश जारी किये हैं। जिलाधिकारी ने जिला, तहसील व ब्लाक स्तरीय अधिकारियों के अवकाशों पर रोक लगा दी है। अधिकारियों को निर्देशित किया है कि बिना उनकी अनुमति के मुख्यालय न छोडें।

उन्होंने तहसीलदारों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के वॉलेनटियरों, स्वयं सेवक संगठनों, पूर्व सैनिकों, ग्राम प्रधानों, ग्राम विकास अधिकारियों तथा ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों की टीम बनाकर तहसील स्तर पर आपदा की घटनाओं के लिए प्रशिक्षण दिया जाये। उन्होंने आपदा की घटना के दौरान पैंकिंग सामग्री, पानी, फस्ट ऐड बॉक्स, चना, जूस, लाइट, टार्च, माचिस आदि जरुरी सामग्रियों की किट तैयार करने को कहा है। 

बिल्डरों का रजिस्ट्रेशन नहीं, शिकायतें शुरू

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बिल्डरों की मनमानी पर अंकुश लगाने और निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए लागू किए गए रियल एस्टेट (रेगुलेशन एण्ड डेवलपमेंट) एक्ट यानी रेडा को लेकर बिल्डर गंभीर नजर नहीं आ रहे। 1 मई 2017 से एक्ट के प्रभावी हो जाने के बाद भी अब तक किसी भी बिल्डर ने रियल एस्टेट रेगुलेशन अथॉरिटी में अपना पंजीकरण नहीं कराया है जबकि, पंजीकरण की अंतिम तिथि 31 जुलाई है।

ऐसा नहीं है कि देहरादून में बिल्डरों की मनमानी की शिकायतें नहीं हैं, बल्कि यहां सबसे अधिक मामले फ्लैट अलॉटमेंट को लेकर सामने आते हैं। रेडा की रेगुलेटरी अथॉरिटी उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण (उडा) के अधीक्षण अभियंता एनएस रावत के मुताबिक अभी तक किसी भी बिल्डर ने पंजीकरण भले ही न कराया हो, लेकिन इनके खिलाफ तीन शिकायतें प्राप्त हो चुकी हैं। तीनों शिकायत फ्लैट का कब्जा देने में विलंब संबंधी हैं, इन पर 31 जुलाई के बाद कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। उम्मीद है कि इस बीच बड़ी संख्या में बिल्डर अपना पंजीकरण भी करा देंगे।

पंजीकरण में बिल्डरों के रुचि न लेने को देखते हुए उडा ने एमडीडीए (मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण) समेत राज्य के अन्य तीन विकास प्राधिकरणों से उनके यहां कार्य कर रहे बिल्डरों की सूची तलब की है। ताकि पंजीकरण न कराने वाले बिल्डरों पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सके, हालांकि अभी तक प्राधिकरणों से सूची प्राप्त नहीं हो पाई है।

रेडा के प्रमुख प्रावधान

  • 500 वर्ग मीटर क्षेत्रफल से अधिक व आठ अपार्टमेंट से अधिक वाले प्रोजेक्ट दायरे में।
  • एक मई 2017 तक परियोजनाओं का कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र न ले सकने वाले प्रोजेक्ट आएंगे दायरे में।
  • ग्राहकों से ली गई 70 फीसदी राशि अलग खाते में रखने व उसका प्रयोग सिर्फ निर्माण कार्य में किया जाएगा
  • परियोजना संबंधी जानकारी जैसे-प्रोजेक्ट ले-आउय, स्वीकृति, प्रोजेक्ट समाप्त करने की अवधि आदि की जानकारी निवेशकों को देना।
  • पूर्व सूचित समय के भीतर निर्माण पूरा न करने पर बिल्डर का निवेशकों को ब्याज समेत भुगतान का प्रावधान। ब्याज की दर वही होगी, जिस पर बिल्डर ग्राहकों की चूक पर उनसे वसूली करते हैं।
  • रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी के आदेश की अव्हेलना पर बिल्डर को तीन वर्ष की सजा व जुर्माने का प्रावधान।
  • रियल एस्टेट एजेंट या ग्राहक के लिए एक वर्ष की सजा का प्रावधान।

आयुष मंत्रालय के एनएबीएच बोर्ड से जुड़ेगा पतंजलि चिकित्सालय

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पतंजलि चिकित्सालय के चिकित्सकीय एप्रोच से प्रेरित होकर आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फार हॉस्पिटल एण्ड हेल्थ केयर प्रोवाइडर एनएबीएच के अधिकारियों का तीन सदस्यीय दल बुधवार को पतंजलि योगपीठ पहुंचा।

दल के सदस्यों और पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण के मध्य पतंजलि चिकित्सालय को एनएबीएच के साथ जोड़ने, चिकित्सालय की क्वालिटी इम्प्रूव करने में बोर्ड एवं पतंजलि योगपीठ चिकित्सालय द्वारा संयुक्त रूप से सम्भावनाएं तलाशने, चिकित्सालय में आने वाले रोगियों की सुरक्षा एवं उसके उपचार की गुणवत्ता बढ़ाने मे मदद करने सहित पतंजलि चिकित्सालय की विविध सुविधाओं को आयुष मंत्रालय के मापदण्डों के अनुरूप विकसित करने पर चर्चा हुई।

इस अवसर पर पतंजलि रिसर्च फाउण्डेशन में संबोधन के दौरान एनएबीएच के अधिकारियों की ओर से क्वालिटी मॉडल का प्रजेन्टेशन भी हुआ। अपने उद्बोधन में बोर्ड की डिप्टी डॉयरेक्टर डाॅ. बंदना ने कहा कि आचार्य बालकृष्ण के मार्गदर्शन में पतंजलि आयुर्वेद ने उच्चस्तरीय चिकित्सा आयाम स्थापित कियें हैं। साथ ही पतंजलि चिकित्सालय की सेवाओं से देश-विदेश के लाखों रोगियों को स्वास्थ्य लाभ प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि पतंजलि चिकित्सालय को बोर्ड के मानकों में शामिल करने से जहां पतंजलि को स्वास्थ्य गुणवत्ता के नये मानक गढ़ने में मदद मिलेगी, वहीं बोर्ड भी इससे अपने को गौरवांवित अनुभव करेगा। दल के सदस्य डाॅ. अनुराग मित्तल एवं डाॅ. रोहित ने भी अपने विचार रखे।
आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि प्राचीन ऋषियों द्वारा अनुसंधित योग-आयुर्वेद आधुनिक वैज्ञानिक मानकों के साथ जन-जन के बीच पहुंचे और लोगों को स्वास्थ्य लाभ मिले यही पतंजलि का संकल्प है। उन्होंने कहा पतंजलि चिकित्सालय एवं एनएबीएच दोनों एक दूसरे के पूरक बनकर अपने गुणवत्तापरक अनुसंधानात्मक अभियान से आयुर्वेद चिकित्सा को नयी ऊचाइयों तक पहुंचाने में मददगार साबित होंगे।
विदित हो कि, आयुष मंत्रालय का यह नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फार हॉस्पिटल एण्ड हेल्थ केयर प्रोवाइडर एनएबीएच देश भर के आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट से जुड़ी सेवायें एवं आयुर्वेदिक हॉस्पिटल सेवाओं की क्वालिटी इम्प्रूवमेंट के लिए कार्य करती है। 

कनाडा की तकनीक पर तैयार होगी ‘स्मार्ट सिटी’

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देहरादून को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के लिए कनाडा की तकनीक और अनुभवों का उपयोग किया जाएगा। इसे लेकर कनाडा के ‘द काउंसिल जनरल’ ने भी रूचि दिखाई है। सब ठीक रहा तो स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए कनाडा की तकनीक व विशेषज्ञों की सेवाएं ली जाएंगी।

सचिवालय में प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से ‘द काउंसिल जनरल ऑफ कनाडा इन चंडीगढ़,’ क्रिस्टोफर गिबिन, ने भेंट की। मुख्यमंत्री और क्रिस्टोफर गिबिन के मध्य मुख्य राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में सीवरेज डिस्पोजल सिस्टम लगाने, यूजेवीएनएल के पावर प्रोजेक्टस की क्षमता विकास के लिए आधुनिकीकरण में फंडिंग व सलाहकारी सेवाएं देने, छिबरौ और खोदरी पावर प्रोजेक्टस के एकीकरण, राज्य के 13 नए पर्यटन स्थल विकसित करने के साथ ही स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में अवस्थापना सुविधाओं के प्रबंधन व विकास में कनाडा की बेस्ट प्रैक्टिसेज का उपयोग आदि पर चर्चा हुई।

बैठक में चर्चा की गई कि कनाडा की पर्यटन विकास क्षेत्र में ऐसी बेस्ट प्रैक्टिसेज जो उत्तराखंड के अनुकूल हों का राज्य में नए पर्यटन स्थल विकसित करने में उपयोग किया जा सकता है। कौशल विकास के क्षेत्र में कनाडा की स्किल डेवलपमेंट में विशेषज्ञ कम्युनिटी कॉलेज का राज्य की शिक्षण संस्थानों व आइआइटी आदि से एमओयू पर विचार किया गया।

गिबिन द्वारा स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिये तकनीक और विशेषज्ञ सेवाएं प्रदान करने मे रुचि दिखाई गई। हॉर्टिकल्चर क्षेत्र में कनाडा द्वारा ऑर्गर्बल फार्मिंग तथा फलों के उत्पादन एवं प्रोसेसिंग में विशेषज्ञ सेवाएं देने हेतु एमओयू पर विचार किया गया। 

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पीएम मोदी ने उत्तराखण्ड के सड़क और आवास की ली जानकारी

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उत्तराखण्ड के मुख्य सचिव एस. रामास्वामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रगति (प्रोएक्टिव गवर्नेस एण्ड टाइमली इंप्लीमेंटेशन) की समीक्षा के दौरान मुजफ्फरनगर-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग के फोर लेनिंग और प्रधानमंत्री आवास योजना के प्रगति की जानकारी दी।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मुख्य सचिव ने पीएम को बताया कि फोर लेन के कार्य में राज्य में 67 प्रतिशत की भौतिक प्रगति है। इस कार्य को मार्च 2018 तक कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। एत्मालपुर, बहेड़ी, राजपुताना और बिझौली गांव में कार्य रुका हुआ था। प्रशासनिक हस्तक्षेप से इन गांव का कार्य भी शुरू हो गया है।

मुख्य सचिव ने बताया कि राज्य सरकार ने हरिद्वार और देहरादून में मिट्टी, आरबीएम, कंक्रीट मिक्सिंग प्लांट की अनुमति दे दी है। हॉट मिक्स प्लांट लगाने के लिए सितंबर से दिसंबर तक की अनुमति दे दी जाएगी। मुख्य सचिव ने बताया कि मंगलोर में मस्जिद शिफ्ट कर अन्य स्थान पर बनाने के लिए 36 लाख रुपये दे दिए गए हैं, जमीन की तलाश भी कर ली गई है। जमीन के लिए छह लाख रुपये जल्द मस्जिद समिति को दे दिए जाएगा। इसी तरह से बहेड़ी में भी मस्जिद शिफ्ट करने के लिए 38.17 लाख रुपये दे दिए गए हैं, मस्जिद समिति द्वारा नये चिन्हित स्थानों पर जल्द मस्जिद निर्माण का कार्य शुरु कर दिया जाएगा।

गौरतलब है कि, 1563 करोड़ रुपये की लागत से 80 किमी मुजफ्फरनगर-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग के फोर लेनिंग का कार्य चल रहा है। इसके लिए फोर 479.70 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध है।  उन्होंने बताया कि राज्य में है एएचपी (एफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट), बीएलसी (बेनिफिशियरी लेड कंस्ट्रक्शन) और आईएसएसआर (इन-सीटू स्लप रीडेवलपमेंट) के अंतर्गत 75,000 आवश्यक की मांग है। इसमें 25000 सीएलएसएस (क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम) के तहत आवासों की मांग शामिल नहीं है। आवासों की मांग का का सत्यापन कर लिया गया है।

वर्ष 2020 तक 70000 आवासों का निर्माण किया जाना है। वर्ष 2017-18 में 18000, 2018-19 में 26000 और 2019-20 में 26000 आवासों का निर्माण किया जाएगा। बीएलसी के तहत 5000 आवासों का निर्माण इस वर्ष कर लिया जाएगा। बताया कि भारत सरकार द्वारा बताए गए पांच सुधारों में तीन सुधार कर लिए गए हैं। सिर्फ दो सुधार एक माह में पूरे कर लिए जाएंगे।

आसन नदी के टापू पर फसें 3 लोग को सकुशल निकाला

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मूसलाधार बारिश से आसन नदी, विकासनगर के जलस्तर मे वृद्धि दिनों दिन हो रही थी लेकिन अाज बैराज पर यमुना नदी का पानी छोड़े जाने से बैराज पर पानी का दबाव बढ गया। नदी मे मछली पकड़ने गये 3 लोग, कंजा मटक माजरीके रहने वाले, नदी के बीच मे टापू पर फंस गये।

सूचना पर प्रभारी निरी. कोतवाली विकासनगर, श्री एस.एस. नेगी, उ.नि. रामनरेश शर्मा, चौकी प्रभारी हरबर्टपुर फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस द्वारा तत्काल बैराज में नियुक्त कर्मचारियो से संपर्क स्थापित कर बैराज के गेट को बंद कराकर पानी के बहाव को कम किया, नहीं तो टापू में फसे व्यक्ति बहाव में बह सकते थे। उसके पश्चात् स्थानीय गोताखोरो की कडी मश्कत के बाद तीनो व्यक्तियो को सकुशल नदी से बहार निकाला गया, जिसकी स्थानीय जनता द्वारा भूरी भूरी प्रशंसा की गयी।

डीएम दीपक रावत ने किया वृक्षारोपण

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जिलाधिकारी दीपक रावत ने आज हरेला पर्व की शुरूआत कलेक्ट्रेट प्रांगण में पौधारोपण के साथ की। जिलाधिकारी कार्यालय रोशनाबाद में प्रेम नर्सिंग होम की संचालिका डा. संध्या शर्मा के सौजन्य से वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजत किया गया। जिलाधिकारी, डा संध्या तथा जिलाधिकारी कार्यालय के अधिकारियों ने रूद्राक्ष, नीम, बरगद तथा फलों के पौधे रोपित किये। जिलाधिकारी दीपक रावत ने कहा कि प्रत्येक वर्ष जुलाई माह में मनाये जाने वाले हरेला पर्व को सभी कार्यालयाध्यक्ष व्यापक रूप से मनायंे। क्योंकि यह एक ऐसा पर्व है जो पृथ्वी को हरा भरा बनाने का संदेश देता है।

डा. संध्या शर्मा ने कहा कि पृथ्वी पर जीवन जीने के लिए हवा, पानी और मिट्टी तीन आधार हैं। और इन तीनों के अभाव स्वस्थ जीवन सम्भव नहीं है।
अवसर पर ज्वांइट मजिस्ट्रेट आर. भण्डारी, सीएमओ डा0 रविन्द्र थपलियाल, डिप्टी सीएमओ डा0 एच0डी0 शाक्य, अध्यक्ष प्रेस क्लब हरिद्वार मनोज सैनी, वरिष्ठ पत्रकार राजेश शर्मा, राजकुमार, धर्मेन्द्र चैधरी, आशीष मिश्रा, तनवीर अली, राहुल वर्मा, सुनील पाल, आदि उपस्थित थे।

आयुर्वेदिक व्यवसाय के लिए उत्तराखंड में लागू हो सकता है नया कानून

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उत्तराखंड सरकार आयुर्वेद के व्यापार को विनियमित करने के लिए एक अधिनियम पेश करने की योजना बना रही है, जो प्राचीन भारतीय चिकित्सा प्रणाली है जिसे भारत में बड़े पैमाने पर अनुसरण किया जाता है।

यदि लागू किया जाता है, तो उत्तराखंड संभवतः आयुर्वेद उत्पादों और दवाओं की बिक्री की जांच करने के लिए नियमों को लागू करने वाला पहला राज्य होगा। लोकसभा चुनाव से पहले, भाजपा ने अपने चुनाव घोषणापत्र में कहा था कि यह आयुष को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक निवेश में वृद्धि करेगा और भारतीय दवाओं और आधुनिक औषधियों के लिए एकीकृत पाठ्यक्रम शुरू करेगा।

आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी (आयुष) मंत्री हरक सिंह रावत ने कहा कि एक बार यह अधिनियम लागू हो गया तो कोई भी चिकित्सा दुकान राज्य में प्रिस्क्रिप्शन के बिना आयुर्वेद की दवा बेचने में सक्षम नहीं होगा।एक्जिम बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय हर्बल उद्योग का अनुमानित बजट 4,205 करोड़ रुपये है। आयुर्वेदिक और संबद्ध हर्बल उत्पाद का निर्यात 440 करोड़ रुपये अनुमानित  है।2020 तक घरेलू व्यापार 7,000 करोड़ तक पहुंचने की संभावना है।

उत्तराखंड आयुर्वेद की दवाओं और उत्पादों का केंद्र है, योगगुरु रामदेव ने हरिद्वार में पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के मुख्यालयों हैं तो श्री श्री रविशंकर द्वारा पदोन्नत कंपनी श्री श्री आयुर्वेद, उत्तराखंड में स्थित है। इसके अलावा, हरिद्वार, कोटद्वार और अलग-अलग हर्बल और आयुर्वेद उत्पादों को बनाने वाली अन्य औद्योगिक स्थलों में कई अन्य छोटे उत्पादन इकाइयां हैं।

एलोपैथिक दवा की दुकानों और यहां तक कि सामान्य दुकानों में आयुर्वेद की दवाएं बेची जाती हैं, जो आयुष मंत्री हरक सिंह रावत के मुताबिक, सरकार को रोकना है, “काउंटर पर आयुर्वेद उत्पाद खरीदने की प्रवृत्ति को बंद करने की जरुरत है। हम आयुर्वेद के व्यापार को विनियमित करने के लिए एक अधिनियम पर काम कर रहे हैं। एक बार कानून लागू हो जाता है, तो केवल सरकारी दवा भंडार पर ही आयुर्वेद दवाओं को बेचा जा सकेगा।

इसके अलावा, इस अधिनियम में एक और खास बात होगी आयुर्वेद की दवाएं केवल अधिकृत चिकित्सकों द्वारा बेची जा सकती हैं और वह भी एक डॉक्टर के पर्चे देने पर हीं। आयुर्वेद से जुङे लोगों जैसे कि वेद्ध शिखा प्रकाश का मानना है कि, ‘अगर उत्तराखंड सरकार आर्युवेदिक दवांईयों की सुरक्षा के लिए नए नियम लेकर आते हैं तो इससे अच्छा कुछ नहीं होगा। आर्युवेदा का गढ़ माने जाने वाले राज्य में नियमों की कमीं से बहुत नुकसान होता है, नियम लागू होने से दवांईयों के गलत इस्तेमाल को रोका जा सकता है। “

उत्तराखंडः मौसम की मार के बाद,मौसम में बदलाव

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पिछले 48 घंटो से हो रही बारिश ने उत्तराखंड के जीवन क अस्त व्यस्त कर दिया है, चाहें वह पहाड़ी क्षेत्र हो या मैदानी इलाके।जहां देहरादून में भारी बारिश के बाद सड़के नदियों में तब्दील हो गई हैं वहीं पहाड़ी क्षेत्रों नदिंयों ने उग्र रुप ले लिया है। शहर के कुछ स्कूलों में पानी भरने से स्कूलों को बंद करना पड़ा, दूसरी ओर रिस्पना, बिंदाल, सोंग व सुसवा नदियों का जलस्तर बढ़ने की वजह से आसपास के घरों में पानी भर गयें जिसके चलते लोगों के सुरिक्षत जगह ले जाया गया।

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देहरादून जिला भी मौसम के असर से खासा प्रभावित हुआ, कल मसूरी के पास एक पिकअप वाहन पर बोल्डर गिरने से वाहन में सवार तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि एक घायल हो गया। दून शहर में भी एक व्यक्ति की परसों देर रात रिस्पना नदी में डूब जाने की खबर मिली, देर रात भारी बारिश के बीच वह घर में घुसे बरसाती पानी को निकाल रहा था कि उसका पैर फिसल गया। इसके अलावा सिल्ला गांव में बादल फटने के बाद 10 मवेशी मलबे में दब गए।

मौसम विभाग की सटीक और समय से मिली मौसम की जानकारी के साथ-साथ प्रशासन की पूरी तैयारी ने बारिश की वजह से आने वाली भारी संकट को कुछ हद तक रोक दिया। प्रदेशभर से भूस्खलन, मलबा गिरना, बरसाती नदियां उफान में और जगह-जगह मवेशी और मानव मृत्यु दर्ज की गई; लेकिन जिस तरह जून 2013 में आई तबाही ने प्रदेश को हिला दिया था इस बार अतीत से पाठ पढ़ सरकार और प्रशासन की सूझ-बूझ से भारी तबाही को रोका जा सका हैं। प्रशासन व पुलिस, एसजीएरएफ पूरी तरह मुस्तेद दिखी अौर हर जगह रखी गई पैनी नजर।

इस साल जबसे चारधाम यात्रा शुरु हुई है ,पहली बार ऐसे 48 घंटो के लिए मौसम को ध्यान में रखते हुए चारधाम यात्रा को लिए स्थगित कर  दिया गया जिससे कियी भी प्रकार की अनहोनी ना होने पाए।चार जिलों के डीएम, नैनीताल,रुद्रप्रयाग,हरिद्वार और देहरादून ने समय होते ही स्कूल बंद कर दिए ताकि बच्चों को कोई परेशानी ना हो और वह अपने घरों में सुरक्षित रहें।

मौसम विभाग की मानें तो आने वाले दिनों में अच्छी खबर है।मौसम विभाग के डायरेक्टर विक्रम बक्शी बताते हैं कि आने वाले 13 से 20 के बीच में मानसून की बारिश में कमी आएगी और मौसम खुशनूमा बना रहेगा।

दून सिटी के अंदर दौड़ेगी मेट्रो

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मेट्रो ट्रेन दून शहर के भीतर भी दौड़ेगी और इसके लिए दो रूट प्रस्तावित किए गए हैं, एक रूट आइएसबीटी से कंडोली (राजपुर), जबकि दूसरा रूट एफआरआइ (वन अनुसंधान संस्थान) से रायपुर तक होगा। मेट्रो की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) का प्रस्तुतीकरण मुख्य सचिव के सम्मुख किया जाएगा।

उत्तराखंड मेट्रो रेल कार्पोरेशन लिमिटेड, के प्रबंध निदेशक जितेंद्र त्यागी, के मुताबिक अब तक मेट्रो रेल का प्रस्तावित प्लान देहरादून से हरिद्वार व ऋषिकेश तक मुख्य मार्ग तक सीमित था। हालांकि, इसकी अधिक लागत और मुख्य मार्ग पर उसके अनुरूप पर्याप्त यात्रियों के अभाव को देखते हुए इसका विस्तार संबंधित शहरों के अंदरूनी हिस्सों में भी करने का निर्णय लिया गया है।

इस तरह मेट्रो रेल का जो कुल रूट पहले 73 किलोमीटर के करीब था, वह बढ़कर अब 100 किलोमीटर हो गया है। देहरादून के भीतर के दो रूट के अलावा हरिद्वार में बहादराबाद से हरिद्वार शहर के भीतर का रूट भी इसमें शामिल किया गया है। इसी तरह मेट्रो रेल परियोजना की जो लागत पहले 17 से 20 हजार करोड़ रुपये आंकी गई थी, वह अब बढ़कर 26 से 27 हजार करोड़ रुपये हो जाएगी। डीपीआर की प्रस्तुति के बाद इस पर स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी, साथ ही मेट्रो रेल के कोचों की संख्या आदि को लेकर भी काफी कुछ तय कर लिया जाएगा। अगस्त तक डीपीआर को अंतिम रूप देकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।

मेट्रो ट्रेन की तुलना बस से की जाए तो मेट्रो में बसों के मुकाबले सातवें हिस्से तक ऊर्जा की कम खपत होगी। इसके साथ ही यह ग्रीन ट्रांसपोर्ट पर आधारित व्यवस्था है और इसमें कार्बन उत्सर्जन का स्तर अपेक्षाकृत काफी कम रहेगा। मेट्रो का संचालन शुरू होने से ट्रैफिक जाम की समस्या पर भी अंकुश लग जाएगा।

दून में कुछ हिस्सा हो सकता है भूमिगतः वैसे तो मेट्रो ट्रेन का ट्रैक सड़क के बीचों-बीच डिवाइडर वाले भाग पर बनाया जाएगा। इसके लिए सड़क पर पिलर बनाए जाएंगे और उसके ऊपर बने ट्रैक पर मेट्रो चलेगी, लेकिन दून की मौजूदा स्थिति को देखते हुए माना जा रहा है कि यहां कुछ हिस्सों में भूमिगत (अंडरग्राउंड) ट्रैक भी बनाए जाएंगे।