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हेमकुंड साहिब दर्शन के लिए आए यात्रियों का दल लापता

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अमृतसर,पंजाब से हेमकुंड तीर्थ यात्रा के लिए आए 8 सिख तीर्थ यात्रियों का दल 6 जुलाई से कार सहित लापता है। इस संबंध में एक लिखित तहरीर लापता सिख तीर्थ यात्रियों के परिजन ने थाना गोविंदघाट को दी है।

हेमकुंड साहेब की यात्रा के लिए, अमृतसर, पंजाब से आठ तीर्थ यात्रियों का दल इनोवा कार PB 06Ab 5472 से पहुंचा था। 5 जुलाई को यात्रा करने के बाद 6 जुलाई को वाहन चालक महंगा सिंह ने अपने घर फोन कर बताया था कि वे सभी यात्रा कर गोविंदघाट से वापस अमृतसर घर लौट रहे है। मगर, वे आज तक घर नहीं लौटे है।

उस दिन के बाद से परिजनों ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की मगर किसी से उनका संपर्क नहीं हो पाया। परिजनों को चिंता होने लगी और परिजन लवप्रीत सिंह ने थाना गोविंदघाट में गुमशुदगी दर्ज कर मामले की छानबीन शुरू कर दी है। एसपी चमोली तृप्ति भट्ट ने बताया कि, ‘मामले की छानबीन के लिए पुलिस की एक टीम गठित की गई है जो यात्रा मार्ग के सीसीटीवी फुटेज, पार्किंग स्थलों, होटलों-ढाबों से जानकारी हासिल कर रही है।’ साथ ही साथ पुलिस सीमावर्ती जनपदों ,राजस्व क्षेत्र, एस.सी.आर.बी., एन.सी.आर.बी. आदि सभी को इस सम्बन्ध में सूचना दे दी गई है। पुलिस नदियों और खतरनाक रास्तो पर भी गाड़ी अौर लोगों की तलाश कर रही है ।

अगर आपको गुमशुदा व्यक्तियों या वाहन के बारे में कोई सूचना मिले तो कृपया 01372-252134 पर सूचित करने का कष्ट करें ।

विधायकों को मिली केन्द्रीय सुरक्षा हटेगी

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केंद्र सरकार ने प्रदेश के दो मंत्रियों डॉ. हरक सिंह रावत व सुबोध उनियाल के अलावा तीन मौजूदा भाजपा विधायकों और पिछले साल कांग्रेस से बगावत करने वाले चार अन्य पूर्व विधायकों को केंद्र की ओर से दी जा रही सुरक्षा व्यवस्था समाप्त कर दी है।

केंद्र ने शासन को प्रदेश में विशिष्ट लोगों को दी जा रही सुरक्षा के हिसाब से ही इन्हें सुरक्षा मुहैया कराने को कहा है। बताते चलें कि, प्रदेश में बीते वर्ष 18 मार्च को बजट सत्र के दौरान तत्कालीन कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत व पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा समेत नौ विधायक सरकार के खिलाफ बगावत कर भाजपा में चले गए थे।

इस दौरान प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए केंद्र ने पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, तत्कालीन कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत, विधायक सुबोध उनियाल, प्रदीप बत्रा, अमृता रावत, शैलारानी रावत, डॉ. शैलेंद्र मोहन सिंघल, उमेश शर्मा काऊ व कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन को विशेष सुरक्षा प्रदान की गईं थी, इसके तहत इनकी सुरक्षा में अर्द्धसैनिक बलों के जवान लगाए गए थे।

अब प्रदेश में विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। भाजपा प्रदेश में सरकार बना चुकी है और सभी बागी विधायक भाजपा खेमे हैं। इनमें से दो शैलेंद्र मोहन सिंघल व शैलारानी रावत चुनाव हार गयें, जबकि विजय बहुगुणा व अमृता रावत ने विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा। अब परिस्थितियां सामान्य हो चुकी हैं, लिहाजा केंद्र सरकार ने इन सभी को दी जा रही अर्द्धसैनिक बलों की सुरक्षा वापस लेने का निर्णय लिया है। इनमें दो मंत्रियों के अलावा भाजपा के तीन विधायक शामिल हैं, इसके लिए केंद्र की ओर से शासन को पत्र भेजा गया है।

केंद्र सरकार की ओर से दी जा रही सुरक्षा 22 जुलाई तक ही उपलब्ध रहेगी। इसके बाद इनकी सुरक्षा के लिए उत्तराखंड सरकार अपने स्तर से निर्णय ले, केंद्र के इस पत्र के आधार पर गृह विभाग ने पुलिस मुख्यालय को पत्र भेजकर कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत व सुबोध उनियाल की सुरक्षा को लेकर आख्या देने को कहा है। इसके आधार पर ही अब इन्हें यह सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी, हालांकि सूत्रों का कहना है कि दो बागी विधायकों से उनके अनुरोध पर पहले ही सुरक्षा हटा ली गई थी।

बरसात में कैसे बचें डायरिया के प्रकोप से

लगातार लूज मोशन यानि पतला दस्त आना, उल्टी होना डायरिया कहलाता है। डायरिया बैक्टिरियल इनफेक्शन के कारण तो होता ही है लेकिन सबसे मुख्य कारण है खान पान में गड़बड़ी, प्रदूषित पानी और आंत की गड़बड़ी। दिन में अगर तीन से अधिक बार पानी के साथ पतला दस्त हो रहा है तो यह डायरिया के लक्षण है।

डायरिया में शरीर में पानी की कमी हो जाती है, जिसे डीहाईड्रेशन कहते हैं। जो काफी गंभीर होता है, जिससे शरीर कमजोर हो जाता है। शरीर में संक्रमण फैलने का खतरा काफी बढ़ जाता है। समय पर इलाज न होने पर मरीज की जान भी जा सकती है। आमतौर पर डायरिया 3 से 7 दिनों तक परेशान करता है, डायरिया वैसे तो कभी भी हो सकता है, लेकिन बरसात में वायरल डायरिया ज्यादा होता है।

डायरिया के लक्षणः

  • आतों में सूजन से हुआ डायरिया।
  • पतला दस्त अगर 14 दिन तक रहे ।
  • दस्त के साथ अगर खून आता है तो इससे शरीर काफी कमजोर हो जाता है।
  • उल्टी के साथ पतला दस्त आता है। यह पेट और आंत में एसिडिटी बनने से होता है।

डायरिया का उपचारः 

डायरिया के लिये बहुत घरेलू इलाज तो है, लेकिन जब पतले दस्त लगातार आते रहें, दस्त के साथ पानी भी आए और शरीर में पानी की कमी हो जाए तो डाक्टर को दिखा लेना चाहिए। 2-3 दिन तक डायरिया रहता है तो इससे डीहाईड्रेशन हो जाता है और मरीज की स्थिति काफी गंभीर हो जाती है, डायरिया होने पर ज्यादा से ज्यादा इलेक्ट्रोलाईट्स पीते रहना चाहिए, ताकि पानी की कमी ना हो ।

चिकित्सकीय इलाजः

  • डायरिया में डीहाईड्रेशन होने पर मरीज को ग्लूकोज़ चढ़ाया जाता हैं, इससे शरीर में पानी की कमी दूर होती है। इसमें दवाई भी होती है और इलेक्ट्रोलाईट्स भी होता है।
  • वायरल डायरिया में संक्रमण को खत्म करने के लिए मरीज को एंटीबायोटिक दिया जाता है, बैक्टिरियल इनफेक्शन में भी मरीज को एंटीबायोटिक देते हैं।
  • डायरिया के लिए खासकर दस्त रोकने के लिए एंटी डायरल दवाएं भी दी जाती है। लोपरामाईड एंटी-डायरियल दवा भी होती है। जो आंत में हो रही परेशानी को ठीक करती है।
  • डायरिया होने पर तेल मसालों वाले खाने से परहेज करना चाहिए।
  • डायरिया में दूध और दूध से बने पदार्थ नहीं खाने चाहिए, मरीज की हालत और बिगड़ सकती है।
  • केला, चावल, सेब का मुरब्बा खाने से डायरिया में राहत मिलती है। केला और चावल आंतों की गति को नियंत्रित करने और दस्त रोकने में सहायता करते हैं।
  • पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लें लेकिन अगर फिर भी डायरिया बढ़ रहा हो तो तुरंत डाक्टर से संर्पक करें।

कक्षा 6 से 8वीं के पाठ्यक्रम में अनिवार्य होगा कृषि विषय

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आने वाले दिनों में स्कूलों की कक्षा छह से आठ के बच्चे पाठ्यक्रम में खेती करना भी सीखेंगे, बच्चों को कृषि से जोड़ने के मकसद से सरकार यह कदम उठाने जा रही है। खास बात यह है कि कृषि अनिवार्य विषय के रूप में पाठ्यक्रम में जोड़ा जाएगा।

बुधवार को प्रदेश के कृषि, कृषि विपणन, कृषि प्रसंस्करण, कृषि शिक्षा, उद्यान एवं फलोद्योग एवं रेशम विकास मंत्री सुबोध उनियाल ने किसानों के लिए संचालित कृषि विभाग की योजनाओं की प्रगति की समीक्षा के दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने यह बात कहीं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की लगभग दो तिहाई आबादी कृषि पर निर्भर हैं, कृषि गांव में पलायन रोकने का बेहतर माध्यम है। सरकार का प्रयास है कि कृषि क्षेत्र में केंद्र सरकार के सहयोग से अभिनव प्रयोग किये जाएं। बच्चों में कृषि के प्रति आकर्षण पैदा करने के लिए जिन विद्यालयों में कृषि भूमि उपलब्ध है। वहां पर छात्रों को खेती किसानी गतिविधि से जोड़ने के लिए कक्षा छह, सात व आठ में कृषि को अनिवार्य विषय के रूप में शामिल करने की योजना है।  कृषि महाविद्यालय खोलने की भी योजना गतिमान है, ताकि यहां के छात्रों को कृषि व उद्यान के क्षेत्र में युवा वैज्ञानिक के रूप में तैयार किया जाय जो उनके रोजगार का प्रभावी माध्यम बनेगा।

इस दौरान मंत्री उनियाल ने कृषि निदेशालय का औचक निरीक्षण भी किया। निरीक्षण के दौरान कृषि निदेशक व अन्य अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सभी अधिकारी और कर्मचारी अपने कार्य के प्रति सजग रहें। उन्होंने चेतावनी दी कि कार्य के प्रति किसी भी प्रकार की उदासीनता सहन नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देशित किया कि समस्त अधिकारी और कार्मिक समय पर कार्यालय में अपनी उपस्थिति दें और सरकार द्वारा कृषि के क्षेत्र में किसानों के हित में लिए गए निर्णयों का समयबद्धता व गुणवत्ता से क्रियान्वयन करें।

उन्होंने कृषि निदेशालय में हो रहे नवनिर्माण कार्यों का भी स्थलीय निरीक्षण किया गया और मौके पर निदेशक कृषि गौरीशंकर को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता नहीं होनी चाहिए व निर्माण कार्य गुणवत्ता युक्त हो। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा नीति आयोग के समक्ष प्रभावी पहल किए जाने से नीति आयोग द्वारा कृषि सहायता व अनुदान में अलग मानक निर्धारण हेतु 11 पर्वतीय राज्यों कि अलग से बैठक किए जाने का निर्णय लिया गया है।

अब दून में चलेंगी इलेक्ट्रिक बसें

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इंदौर, दिल्ली, बंगलुरू, मनाली की तर्ज पर अब उत्तराखंड में भी लो-फ्लोर इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। रोडवेज देहरादून, हरिद्वार, रुड़की, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में इटली की एक कंपनी के संग अनुबंध पर स्थानीय बस सेवा शुरू करने की तैयारी कर रहा है। बुधवार सुबह कंपनी के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मुलाकात कर प्रेजेंटेशन दिया। सीएम ने प्रस्ताव में रुचि दिखाते हुए सचिव परिवहन डी सेंथिल पांड्यिन को निर्देश दिए। रोडवेज अधिकारियों की मानें तो 20 से 50 किमी की दूरी वाले शहरों में यह इलेक्टिक बसें जल्द ही दौड़ती नजर आएंगी। इन बसों में प्रदूषण का खतरा नहीं होगा और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा।

राज्य बनने के 17 साल बाद भी राज्य में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था नहीं सुधर सकी। शहरों में बेलगाम सिटी बसें, विक्रम और ऑटो फिजां बिगाड़ने पर आमादा हैं। इन वाहनों में न गति पर नियंत्रण है न नियमों की परवाह। देहरादून, हरिद्वार व नैनीताल में सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं को दुरुस्त करने के लिए 2008 में जेएनएनयूआरएम के तहत सेमी लो-फ्लोर बसें दी गई थीं। इसका मकसद यात्रियों को आरामदायक और सुविधाजनक सफर मुहैया कराना था। देहरादून व हरिद्वार को 75-75 और नैनीताल को 45 बसें मिलीं, लेकिन इनके संचालन के लिए जिम्मेदार स्थानीय निकायों ने हाथ खड़े कर दिए। बसें पहले डेढ़ साल खड़ी रहीं, बाद में इन्हें रोडवेज के सुपुर्द कर दिया गया। अब ये बसें एक शहर से दूसरे शहर में दौड़ने लगीं और जर्जर स्थिति में पहुंच गई हैं।

इसी तरह रोडवेज भी अपनी जिन बसों का संचालन 20 से 50 किमी की दूरी के लिए करता है वे एकदम खटारा हैं। लिहाजा, रोडवेज अब यात्री सुविधा के हिसाब से बसों के संचालन की तैयारी कर रहा है। बसों में होगी ये सुविधाएं

  • ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन, प्रदेश में पहली बार कुछ बसों में होगी ऑटो गियर की सुविधा।
  • ऑटोमेटिक स्लाइडिंग डोर, जिसका कंट्रोल सवारी के बजाए ड्राइवर के पास होगा।
  • बसों में इलेक्टिक डिस्प्ले बोर्ड फ्रंट में लगा होगा, जिसमें यह पता लगेगा कि बस कहां-कहां होकर जाएगी।
  • बसों में दोनों ओर दो-दो सीटें होंगी। अंदर का स्पेस खुला-खुला होगा।
  • आइटीईएस प्रणाली होगी। आने वाले स्टेशन की सूचना माइक के जरिये मिल जाएगी।
  • बस लो फ्लोर होगी और आकार एयरोडायनामिक होगा। इससे माइलेज भी बढ़ेगी।
  • लो-फ्लोर होने के कारण बुजुर्गो और महिलाओं को सीढ़ी पर चढ़ने व उतरने में परेशानी नहीं होगी।
  • केंद्र भी दे रहा बढ़ावा देश में यातायात और ईंधन की समस्या से निजात पाने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने पर केंद्र सरकार काम कर रही है।

मिनिस्ट्री ऑफ हेवी इंडस्ट्रीज एंड पब्लिक इंटरप्राइजेस भी शहरों में लगातार एनवायरनमेंट फ्रेंडली पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है। लो-फ्लोर इलेक्ट्रिक बसें इसी का हिस्सा हैं, ये बसें बैटरी से चलेंगी। इससे न प्रदूषण होगा, न ही ईंधन का खर्च आएगा। संचालन लागत भी कम हो जाएगी, ये बसें एक बार फुल चार्ज होने पर 150 से 200 किमी तक चलेंगी।

एसडीआरएफ टीम ने केदारनाथ यात्रियों को सुरक्षित निकाला

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उत्तराखंड में बारिश के कारण सामान्य जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। राज्यभर में हो रही मूसलाधार बारिश से जगह जगह भूस्खलन और जल भराव की स्थिति हो रही है।ताजा मामला केदारनाथ में भीमबली मार्ग में सामने आया जब कल शाम लगभग 150 यात्री रास्ते में पड़ने वाले नाले मे पानवी आ जाने कारण पंस गये। इन यात्रियों को एसडीएरएफ की टीम ने सुरक्षित निकाला। भारी बारिश से ये मार्ग लगभग बन्द हो गया था।WhatsApp Image 2017-07-13 at 09.39.20

वहीं बारिश से देहरादून, हरिद्वार, डोईवाला, ऋषिकेश, हल्द्वानी, भीमताल में सड़कें जलगग्न हो गई। पूरे प्रदेश में पुलिस बल व आपदा प्रबंधन की टीमों द्वारा किसी भी स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट पोजीशन में रहने को बताया गया है। जिला प्रशासन व पुलिस की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
चमोली जिले में बद्रीनाथ हाईवे बंद होने व खुलने का सिलसिला जारी है। लामबगड़ के पास सड़क पर मलबा आने से बद्रीनाथ हाईवे सुबह बंद हो गया था, जिसे खोल दिया गया। चमोली जिले के करीब 47 मोटर मार्ग बंद पड़े हैं। रुद्रप्रयाग जनपद में मौसम विभाग की चेतावनी के मद्देनजर केदारनाथ यात्रियों को गौरीकुंड व सोनप्रयाग में रोका हुआ है। वहीं, गौरीकुंड हाईवे फाटा व मुनकुटिया में मलबा आने से बंद हो गया। ऋषिकेश-बद्रीनाथ हाईवे देवप्रयाग के पास मूल्यागांव, तोताघाटी और ब्यासी के समीप कौडियाला में भूस्खलन से बंद हो गया था। इस मार्ग से मलबे को हटा दिया गया है।
उत्तरकाशी में गंगोत्री हाईवे संगलाई के पास काफी देर तक बंद रहा। यमुनोत्री हाईवे स्याना चट्टी और ओरछा बैंड के भूस्खलन से बंद हो गया। उत्तरकाशी में पांच संपर्क मार्ग भी बंद होने की सूचना है। टिहरी में ऋषिकेश गंगोत्री राजमार्ग पर खाड़ी से पहले बेमुंडा गदेरा उफान पर होने से यात्रियों को रास्ते पर ही रोका गया है। यहां पानी कम होने का इंतजार किया जा रहा है। पौड़ी जिले में हाईवे के बंद होने व खुलने का सिलसिला जारी है। इसके साथ ही करीब 20 संपर्क व ग्रामीण मार्ग बंद पड़े हैं। अवरुद्ध मार्गों को खोलने के लिए लोनिवि कार्य कर रहा है। ऋषिकेश में लगातार बारिश से सड़कें गलियां जलमग्न हो गई हैं।
मौसम अलर्ट को देखते हुए सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। मौसम को देखते हुए, हालांकि ऋषिकेश से सटे हरिद्वार और टिहरी के जिलाधिकारियों द्वारा स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। कुमाऊं मंडल के हल्द्वानी जिले में रात से लगातार हो रही बारिश के चलते जगह-जगह जलभराव की स्थिति बन रही है। भीमताल-हल्द्वानी मोटर मार्ग मलबा आने से बंद है।
बागेश्वर जिले में भारी बारिश का दौर जारी है। जिले की आठ सड़कें भूस्खलन से बंद हैं। हल्द्वानी में मूसलाधार बारिश से शहर में जगह जगह जलभराव हो गया है। हल्द्वानी में रकसिया नाला उफान पर आने से कई घरों में पानी घुस गया। गौला नदी उफान पर आ गई है। नैनीताल जिलेभर में बीते 24 घंटे में 150 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है। काठगोदाम के ब्यूराखाम गांव में भूस्खलन होने से पांच घरों में मलबा घुस गया है। इससे लोगों में दहशत है। एसडीएम एबी वाजपेयी ने मौका मुआयना कर स्थिति का जायजा लिया है। गौला नदी का जलस्तर 30 हजार क्यूसेक पहुंचने ने सिंचाई विभाग ने सभी गेट खोल दिए हैं।

उत्तराखंड के नए डीजीपी हो सकते हैं अनिल रतूड़ी

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एडीजी अनिल कुमार रतूड़ी प्रदेश के नए डीजीपी होंगे। डीजीपी एमए गणपति प्रतिनियुक्ति पर केंद्र जाने वाले हैं। केंद्र ने उनकी प्रतिनियुक्ति को हरी झंडी दे दी है। वे सीआईएसएफ में बतौर एडीजी प्रतिनियुक्ति पर जाएंगे।

कांवड़ के बाद गणपति प्रतिनियुक्ति पर सीआईएसएफ में अपनी सेवाएं देंगे। डीजीपी एमए गणपति 2012 में आईजी गढ़वाल रहते हुए केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर चले गए थे। इसके बाद 2012 से 2016 तक केंद्रीय गृह मंत्रालय और सीबीआई में प्रतिनियुक्ति पर रहे। इसके बाद 2016 में डीजीपी बनकर दोबारा उत्तराखंड आए थे। राज्य में डीजीपी एमए गणपति के बाद एडीजी अनिल रतूड़ी ही वरिष्ठता में सबसे ऊपर हैं। ऐसे में उनको प्रदेश पुलिस की कमान मिलना तय माना जा रहा है।

कर्ज के बोझ तले एक और किसान ने खाया जहर

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बाजपुर, उधमसिंह नगर के किसान बलविंदर ने पंजाब नेशनल बैंक की शाखा से ट्रैक्टर के लिए सात लाख रुपये का लोन ले रखा था, लोन पिछले साल ही जमा होना था, लेकिन वह जमा नहीं कर पाया। लोन जमा न होने से पीएनबी की बेरिया शाखा, ने 30 जून को नोटिस जारी किया। नोटिस में 7,49,846/- रुपये जमा न करने पर कुर्की, गिरफ्तारी और संपत्ति की नीलामी कर वसूली की चेतावनी दी थी। इसको लेकर वह परेशान था।

बताया गया कि यह ट्रैक्टर ऋण 21 मार्च 2016 को जमा होना था, लेकिन लगातार फसलों का भुगतान समय से नहीं मिलने से वह समय लेता रहा, लेकिन कर्ज नहीं चुका पाया। इसके चलते 30 जून को पेशी का अंतिम नोटिस दिया गया और मौखिक रूप से 14 जुलाई तक रुपये जमा करने की बात कही गई। इतना ही नहीं पैसा जमा नहीं होने पर नोटिस में लिखी कार्रवाई करने को कहा गया। बताया जा रहा है कि बलविंदर ने कर्जा चुकाने के लिए अनेक जगह से और कर्ज लेने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर मौत को गले लगा लिया।

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मृतक बलविंदर सिंह के पिता मलूक सिंह पंजाब से 1960 के दशक में यहां आए और खेतीबाड़ी शुरू की। पत्नी विमला के सहयोग से खेती के साथ परिवार हंसी-खुशी जीवन व्यतीत कर रहा था। कुलदीप दो बेटों, एक बेटी, माता-पिता के साथ बेरिया दौलत में रहने लगा, जबकि बलविंदर ने बांसखेड़ी में परचून की दुकान खोल ली। देहात होने के कारण दुकान का काम भी इतना अच्छा नहीं था। हिस्से में आई लगभग साढ़े चार एकड़ भूमि पर खेतीबाड़ी शुरू की और कर्ज ले लिया। ऋण इतना हो गया कि खेतीबाड़ी से लोन का ब्याज भी देना भारी पड़ रहा था।

जहरीले पदार्थ का सेवन करने के बाद बलविंदर अपनी पत्नी नीलम रानी के गले मिला, उसने पत्नी को बताया कि अब कर्ज का बोझ सहन नहीं हो पाता। कर्ज के चलते काफी परेशानी झेलने पड़ रही है। उसने बच्चे के सिर पर हाथ रखा। उसके मुंह से बदबू आने पर नीलम ने तत्काल आसपास के लोगों और अपने जेठ का सूचना दी। उसे तत्काल बाजपुर लाया गया, लेकिन बचाया नहीं जा सका। घटनास्थल पर पहुंचे एसडीएम पीएस राणा घटना पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि किसान पर कितना कर्ज था इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। जल्द ही रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज दी जाएगी।

अनियंत्रित बस पेड़ से टकराई,यात्री सुरक्षित

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गुरुवार यानि आज सुबह 6:30 बजे एक बस नंबर UK 07PA 1772 जो आई0एस0बी0टी0 से सेलाकुई टोयोटा कंपनी के कर्मचारियों को लेकर जा रही थी, झाझरा पुलिया के पास अनियंत्रित होकर रोड से नीचे उतर कर एक पेड़ से टकरा गयी। बस में टोयटा कंपनी के 16 कर्मचारी बैठे थे, जिन्हें मामूली चोटें आयी। सभी घायलों को उपचार हेतु 108 के माध्यम अस्पताल भेजा गया।

रोटी के लिए उफनती गंगा से गुजरते हैं वन गुर्जर

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श्यामपुर कोतवाली क्षेत्र में वन गुर्जर जान जोखिम में डाल गंगा पार करने को मजबूर हैं। दो जून की रोटी के लिए गंगा पार से वन गुर्जर, रोजाना दूध लेकर गाजीवाली और श्यामपुर आते हैं। गंगा नदी के उफान पर होने से वन गुर्जरों को जान जोखिम में डालकर दूध देने जाना पड़ा।

एक गुर्जर तो गंगा के उफान में फंसकर रह गया और जैसे-तैसे जान बच सकी। हरिद्वार वन प्रभाग की श्यामपुर रेंज से सैकड़ों वन गुर्जरों को विस्थापित किया गया है, लेकिन सरकार की लेटलतीफी के कारण अभी भी सैकड़ों वन गुर्जर परिवार जंगल में ही रहते हैं। कुछ वन गुर्जर अपने परिवारों के साथ पुराने गुरुकुल कांगड़ी गंगा पार रहते हैं। वन गुर्जरों के छह परिवारों के मुखिया रोजाना गंगा पार से दूध से भरे गैलन लेकर ट्यूब के सहारे इस पार आने को मजबूर हैं।

पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश के चलते बुधवार को गंगा का जलस्तर 292.60 पर पहुंच गया था, जो चेतावनी के निशान से सिर्फ 60 मीटर नीचे बह रही थी, मगर उसके बाद भी वन गुर्जर गंगा पार आने को मजबूर हैं। बुधवार सुबह नौ बजे एक वन गुर्जर दूध के भरे गैलन लेकर ट्यूब के सहारे गंगा पार कर रहा था, लेकिन तेज बहाव से उसका पांव फिसल गया। गाजीवाली से पुराने कांगड़ी भवन तक पहुंचने में उसे कई बार जिंदगी और मौत के बीच जूझना पड़ा, और किसी तरह जान बच सकी। गंगा पार रह रहे सद्दीक और फिरोज ने बताया कि उनके परिवार का गुजर-बसर दूध बेचकर ही होता है। अगर हम दूध नहीं बेचेंगे तो हमारे बच्चे भूखे मर जाएंगे। ट्यूब के सहारे ही वो अपने जानवरों के लिए चोकर और अपने लिए राशन भी ले जाते हैं।

बताया कि अगर सरकार उनको भी विस्थापित कर दें, तो उन्हें अपने जीवन से खिलवाड़ नहीं करना पड़ेगा। बताया कि वो रोजाना दो बार सुबह और दो बार शाम को गंगा पार करते हैं। वहीं, वन क्षेत्राधिकारी श्यामपुर वाई.एस. राठौर ने कहा कि गुर्जरों के विस्थापन की प्रक्रिया चल रही है। विस्थापन से बचे हुए गुर्जर परिवारों की रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। शासन के आदेश के बाद उन्हें भी विस्थापित कर दिया जाएगा।