राज्य में पिछले कुछ दिनों से आफत मचाने के बाद उत्तराखंड में मानसून की रफ्तार मंद पड़ गई है। बारिश थमने से लोग राहत महसूस कर रहे हैं। दो दिन से रोकी गई चारधाम यात्रा फिर से शुरू हो गई है। हालांकि चारधाम यात्रा मार्गों का खुलने व बंद होने का सिलसिला अभी जारी है, इसके साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों में बंद पड़े संपर्क मार्ग खोलने का काम भी तेज हो गया है।
मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून के निदेशक विक्रम सिंह के अनुसार अब एक हफ्ते तक मानसून की रफ्तार मंद रहने की संभावना है। हालांकि, कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होगी, लेकिन भारी अथवा बहुत भारी वर्षा की संभावना फिलहाल नहीं है। इसी तरह चमोली जनपद में बारिश तो थम गई लेकिन गत दिवस लामबगड़ में हुए भूस्खलन से बंद बदरीनाथ हाईवे को सुबह तक नहीं खोला जा सका। यहां करीब बीस मीटर हाइवे क्षतिग्रस्त हो गया था जिसे ठीक करने का काम चल रहा है।
इसी तरह राज्य के देहरादून, टिहरी, उत्तरकाशी, पौड़ी, हरिद्वार के साथ ही कुमाऊं के सभी जिलों में बारिश थमी है। हालांकि आसमान में हल्के बादल हैं और ज्यादातर स्थानों पर कोहरा छाया है। कहीं-कहीं धूप भी खिल गई है। उत्तरकाशी में गंगोत्री व यमुनोत्री हाईवे बंद होने व खुलने का सिलसिला जारी है। यमुनोत्री हाईवे हनुमान चट्टी के पास बंद हो गया था, इसे भी अब खोल दिया गया है।
राज्य के कुमाऊं मंडल में रानीखेत, कोसी व गगास घाटी में कोहरे की चादर बिछी है। चंपावत में बादलों के बीच धूप निखर आई। पिथौरागढ़-टनकपुर नेशनल हाईवे यातायात के लिए सुचारू है। चंपावत जिले 17 ग्रामीण मार्ग अब भी बंद हैं। बागेश्वर में भी आठ संपर्क मार्ग बंद हैं। पिथौरागढ़ में भी रातभर की बारिश के बाद सुबह मौसम साफ हो गया। जिले के करीब एक दर्जन संपर्क मार्ग अवरुद्ध हैं।

















































मानसून का असर चार धाम यात्रा सहित सिखों के पवित्र धाम श्री हेमकुंड साहिब पर भी पङनें लगा था। जगह-जगह रोड ब्लॉक और बारिश ने श्रद्धालुओं के कदम उत्तराखंड आने से रोक दिए थे जिसके चलते जुलाई से कमी आ गई थी। मौसम के अलर्ट को देखते हुए राज्य सरकार ने 2 दिन के लिए चार धाम यात्रा पर भी रोक लगा दी थी, अब एक बार फिर यात्रा शुरू हुई है और आस्था पथ पर लगभग ढाई हजार के आसपास यात्री ऋषिकेश से निकल पड़े हैं।












