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मानसून के मंद पड़ने से पहाड़ में राहत

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राज्य में पिछले कुछ दिनों से आफत मचाने के बाद उत्तराखंड में मानसून की रफ्तार मंद पड़ गई है। बारिश थमने से लोग राहत महसूस कर रहे हैं। दो दिन से रोकी गई चारधाम यात्रा फिर से शुरू हो गई है। हालांकि चारधाम यात्रा मार्गों का खुलने व बंद होने का सिलसिला अभी जारी है, इसके साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों में बंद पड़े संपर्क मार्ग खोलने का काम भी तेज हो गया है।

मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून के निदेशक विक्रम सिंह के अनुसार अब एक हफ्ते तक मानसून की रफ्तार मंद रहने की संभावना है। हालांकि, कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होगी, लेकिन भारी अथवा बहुत भारी वर्षा की संभावना फिलहाल नहीं है। इसी तरह चमोली जनपद में बारिश तो थम गई लेकिन गत दिवस लामबगड़ में हुए भूस्खलन से बंद बदरीनाथ हाईवे को सुबह तक नहीं खोला जा सका। यहां करीब बीस मीटर हाइवे क्षतिग्रस्त हो गया था जिसे ठीक करने का काम चल रहा है।

इसी तरह राज्य के देहरादून, टिहरी, उत्तरकाशी, पौड़ी, हरिद्वार के साथ ही कुमाऊं के सभी जिलों में बारिश थमी है। हालांकि आसमान में हल्के बादल हैं और ज्यादातर स्थानों पर कोहरा छाया है। कहीं-कहीं धूप भी खिल गई है। उत्तरकाशी में गंगोत्री व यमुनोत्री हाईवे बंद होने व खुलने का सिलसिला जारी है। यमुनोत्री हाईवे हनुमान चट्टी के पास बंद हो गया था, इसे भी अब खोल दिया गया है।

राज्य के कुमाऊं मंडल में रानीखेत, कोसी व गगास घाटी में कोहरे की चादर बिछी है। चंपावत में बादलों के बीच धूप निखर आई। पिथौरागढ़-टनकपुर नेशनल हाईवे यातायात के लिए सुचारू है। चंपावत जिले 17 ग्रामीण मार्ग अब भी बंद हैं। बागेश्वर में भी आठ संपर्क मार्ग बंद हैं। पिथौरागढ़ में भी रातभर की बारिश के बाद सुबह मौसम साफ हो गया। जिले के करीब एक दर्जन संपर्क मार्ग अवरुद्ध हैं। 

सरकारी फरमान के बाद एक बार फिर खुली चार धाम यात्रा

आसमानी बारिश ने उत्तराखंड में 2 दिन आम जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया था, लेकिन अाज खिली धूप में ऋषिकेश में यात्रियों के चेहरे खिला दिए। 2 दिनों से चारधाम यात्रा पर निकल ना पा रहें यात्रियों को होटल, धर्मशाला में रुकना पड़ा आज एक बार फिर आस्था की यात्रा शुरू हुई है।

उत्तराखंड में बारिश के 36 घंटे का अलर्ट जैसे ही शुरू हुआ पूरा उत्तराखंड पानी-पानी हो गया। हर नदी नाले उफान पर थी और सभी प्रमुख राज्य मार्ग भूस्खलन के चलते बंद हो गए थे। आखिरकार बारिश के दो दिन बाद खुली धूप में चार धाम यात्रा जाने वाले यात्रियों के चेहरों में रौनक लौटा दी है। बीते दिनों से यात्रा पर जाने के लिए ऋषिकेश पहुंचे लोग होटल और धर्मशालाओं में समय बिता रहे थे, आज 2 दिनों के बाद सरकार द्वारा एतिहात के तौर पर लगाई गई रोक हटा दी गई, जिसके चलते यात्री चार धाम यात्रा पर निकल पड़े हैं।

vlcsnap-2017-07-13-13h14m41s19मानसून का असर चार धाम यात्रा सहित सिखों के पवित्र धाम श्री हेमकुंड साहिब पर भी पङनें लगा था। जगह-जगह रोड ब्लॉक और बारिश ने श्रद्धालुओं के कदम उत्तराखंड आने से रोक दिए थे जिसके चलते जुलाई से कमी आ गई थी। मौसम के अलर्ट को देखते हुए राज्य सरकार ने 2 दिन के लिए चार धाम यात्रा पर भी रोक लगा दी थी, अब एक बार फिर यात्रा शुरू हुई है और आस्था पथ पर लगभग ढाई हजार के आसपास यात्री ऋषिकेश से निकल पड़े हैं।

उत्तराखंड में चार धाम यात्रा हमेशा से ही देश विदेश में रहने वाले श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का एक केंद्र रही है, लेकिन मौसम की मार हर बार इस यात्रा को प्रभावित करती है।

 

पिथौरागढ़ में रात आठ बजे से सुबह पांच बजे तक नहीं चलेंगे वाहन

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पर्वतीय क्षेत्र के मार्गों की खराब हालत को देखते हुए प्रशासन ने रात आठ से सुबह पांच बजे तक वाहनों के संचालन पर रोक लगा दी है।

जिलाधिकारी सी. रविशंकर ने इस आशय के निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि लगातार बरसात से कई मार्ग क्षतिग्रस्त हैं और भूस्खलन की आशंका बनी हुई है। यात्रियों को यात्रा में किसी तरह की परेशानी न उठानी पड़े और संभावित दुर्घटनाओं पर नियंत्रण लगाया जा सके। इस उद्देश्य से रात्रि आठ बजे से सुबह पांच बजे तक वाहनों के संचालन पर रोक लगाई गई है। एम्बुलेंस, आपातकालीन सेवा वाहन, सेना, अ‌र्द्धसैनिक बलों के परिवहन को इस फैसले मुक्त रखा गया है। 

बारिश से पर्यटन उद्योग के चेहरे पर छाये काले बादल

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उत्तराखंड में दो दिन से हो रहीं बारिश ने जहां आम जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया वहीं मसूरी से काफी पर्यटकों ने वापस अपने घर जाने का मन बना लिया है।

बारिश के 48 घंटे का अलर्ट जैसे ही शुरू हुआ पूरा प्रदेश पानी-पानी हो गया। हर नदी नाला उफान पर था और सभी प्रमुख राज्य मार्ग भूस्खलन के चलते बंद हो गए। यहीं हाल मसूरी देहरादून, मसूरी-धनौल्टी मार्ग का भी था। मानसून का असर चार धाम यात्रा सहित मसूरी, धनौल्टी, काणाताल पर भी देखने को मिला। जगह जगह रोड ब्लॉक और बारिश ने पर्यटकों के कदम यहा आने से रोक दिए थे, जिसके चलते यहां अाये पर्यटक भी बारिश रुक अपने घर जाने को बेचैन दिखे।

मौसम के अलर्ट को मीङिया के जिरये काफी दिखाया गया, जिस के चलते लोगों के मन में ङर बैठ गया आज आखिरकार जब बारिश दो दिन बाद रुकी तो लोग होटलों और धर्मशालाओं से निकल कर घर वापस जाने के इच्छुक दिखे ।

दो दिन से बारिश से होटल व्यवसाय से जुड़े चेहरों की रौनक फींकी पड़ गई, संदीप साहनी होटल और रेस्टोरंट एसोसिएशन के प्रेसिडेंट का कहना है कि- बीते दो दिन होटल व्यवसायियों के लिए अच्छे नहीं गुजरे,पर्यटक नाहोने की वजह से बिजनेस मंदा रहा लेकिन उम्मीद है आने वाले दिनों में सबकुछ ठीक होगा।साहनी ने कहा कम पर्यटक होने की वजह एक तो मौसम है दूसरा सोशल मीडिया पर गलत अफवाहें हैं,जो भी हो नुकसान हुआ है,इस बीच लोगों की इन्कव्यायरी भी नहीं आई और साथ पहले से हुई बुकिंग भी कैंसिंल करवाई गई है।

मसूरी सदियों से देश विदेश में रहने वाले लोगों की पहली पसंद व आकर्षण का एक केंद्र रही है। लेकिन मौसम की मार हर बार यहा आने वालों को प्रभावित करती है जिसके चलते जून के अंतिम सप्ताह से सीजन में कमी आई, जो दो दिन की बारिश ने अौर भी पूरी कर दी।

हरिद्वार होटल में ठहरे थे दंपति, पति की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत

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शहर कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत शिव मूर्ति गली स्थित बग्गा होटल में रह रहे दंपति में से पति की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। आधी रात के बाद हाथ कटने से युवक को अस्पताल पहुंचाया गया था, जहां उसने दम तोड़ दिया।

बताया जा रहा है कि होटल में ठहरे युगल ने पति-पत्नी बताते हुए कमरा लिया था। दोनों होटल की तीसरी मंजिल पर रह रहे थे। नितिन नाम का युवक देर रात कमरे में आया। किसी बात को लेकर पति और पत्नी में बहस हुई तो युवक ने कमरे की खिड़की में लगे शीशे पर दाहिना हाथ जोर से मारा। इससे उसके हाथ की नस फट गई और तेजी से खून बहने लगा। युवती की सूचना पर होटल कर्मियों की मदद से उसे जिसे जिला अस्पताल पहुंचाया गया। जहां उपचार के दौरान तड़के युवक ने दम तोड़ दिया।
इस मामले में युवक के परिजनों द्वारा युवती पर हत्या का आरोप लगाया गया है। बताया गया है कि देवपुरा निवासी नितिन शर्मा का पड़ोस की युवती मनीषा के साथ करीब तीन साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था। जब नितिन शादी को तैयार नहीं हुआ मनीषा ने जुलाई 2017 में शहर कोतवाली में नितिन के खिलाफ शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था। सात जुलाई को दोनों पक्षों में समझौता हुआ था। इसके बाद से दोनों होटल में रुके थे।
मायापुर चौकी प्रभारी रमेश सैनी ने बताया कि मुकदमा दर्ज होने के बाद युवती ने कोर्ट में बयान दिया था कि युवक अगर उससे से शादी कर ले तो वह मुकदमा वापस ले लेगी। इसके बाद दोनों में समझौता कराया गया, लेकिन युवक के परिवार वालों ने युवती को घर में रखने से मना दिया। इसके बाद से दोनों होटल में रह रहे थे। युवती आठ महीने की गर्भवती है।

हेमकुंड साहिब दर्शन के लिए आए यात्रियों का दल लापता

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अमृतसर,पंजाब से हेमकुंड तीर्थ यात्रा के लिए आए 8 सिख तीर्थ यात्रियों का दल 6 जुलाई से कार सहित लापता है। इस संबंध में एक लिखित तहरीर लापता सिख तीर्थ यात्रियों के परिजन ने थाना गोविंदघाट को दी है।

हेमकुंड साहेब की यात्रा के लिए, अमृतसर, पंजाब से आठ तीर्थ यात्रियों का दल इनोवा कार PB 06Ab 5472 से पहुंचा था। 5 जुलाई को यात्रा करने के बाद 6 जुलाई को वाहन चालक महंगा सिंह ने अपने घर फोन कर बताया था कि वे सभी यात्रा कर गोविंदघाट से वापस अमृतसर घर लौट रहे है। मगर, वे आज तक घर नहीं लौटे है।

उस दिन के बाद से परिजनों ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की मगर किसी से उनका संपर्क नहीं हो पाया। परिजनों को चिंता होने लगी और परिजन लवप्रीत सिंह ने थाना गोविंदघाट में गुमशुदगी दर्ज कर मामले की छानबीन शुरू कर दी है। एसपी चमोली तृप्ति भट्ट ने बताया कि, ‘मामले की छानबीन के लिए पुलिस की एक टीम गठित की गई है जो यात्रा मार्ग के सीसीटीवी फुटेज, पार्किंग स्थलों, होटलों-ढाबों से जानकारी हासिल कर रही है।’ साथ ही साथ पुलिस सीमावर्ती जनपदों ,राजस्व क्षेत्र, एस.सी.आर.बी., एन.सी.आर.बी. आदि सभी को इस सम्बन्ध में सूचना दे दी गई है। पुलिस नदियों और खतरनाक रास्तो पर भी गाड़ी अौर लोगों की तलाश कर रही है ।

अगर आपको गुमशुदा व्यक्तियों या वाहन के बारे में कोई सूचना मिले तो कृपया 01372-252134 पर सूचित करने का कष्ट करें ।

विधायकों को मिली केन्द्रीय सुरक्षा हटेगी

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केंद्र सरकार ने प्रदेश के दो मंत्रियों डॉ. हरक सिंह रावत व सुबोध उनियाल के अलावा तीन मौजूदा भाजपा विधायकों और पिछले साल कांग्रेस से बगावत करने वाले चार अन्य पूर्व विधायकों को केंद्र की ओर से दी जा रही सुरक्षा व्यवस्था समाप्त कर दी है।

केंद्र ने शासन को प्रदेश में विशिष्ट लोगों को दी जा रही सुरक्षा के हिसाब से ही इन्हें सुरक्षा मुहैया कराने को कहा है। बताते चलें कि, प्रदेश में बीते वर्ष 18 मार्च को बजट सत्र के दौरान तत्कालीन कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत व पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा समेत नौ विधायक सरकार के खिलाफ बगावत कर भाजपा में चले गए थे।

इस दौरान प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए केंद्र ने पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, तत्कालीन कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत, विधायक सुबोध उनियाल, प्रदीप बत्रा, अमृता रावत, शैलारानी रावत, डॉ. शैलेंद्र मोहन सिंघल, उमेश शर्मा काऊ व कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन को विशेष सुरक्षा प्रदान की गईं थी, इसके तहत इनकी सुरक्षा में अर्द्धसैनिक बलों के जवान लगाए गए थे।

अब प्रदेश में विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। भाजपा प्रदेश में सरकार बना चुकी है और सभी बागी विधायक भाजपा खेमे हैं। इनमें से दो शैलेंद्र मोहन सिंघल व शैलारानी रावत चुनाव हार गयें, जबकि विजय बहुगुणा व अमृता रावत ने विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा। अब परिस्थितियां सामान्य हो चुकी हैं, लिहाजा केंद्र सरकार ने इन सभी को दी जा रही अर्द्धसैनिक बलों की सुरक्षा वापस लेने का निर्णय लिया है। इनमें दो मंत्रियों के अलावा भाजपा के तीन विधायक शामिल हैं, इसके लिए केंद्र की ओर से शासन को पत्र भेजा गया है।

केंद्र सरकार की ओर से दी जा रही सुरक्षा 22 जुलाई तक ही उपलब्ध रहेगी। इसके बाद इनकी सुरक्षा के लिए उत्तराखंड सरकार अपने स्तर से निर्णय ले, केंद्र के इस पत्र के आधार पर गृह विभाग ने पुलिस मुख्यालय को पत्र भेजकर कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत व सुबोध उनियाल की सुरक्षा को लेकर आख्या देने को कहा है। इसके आधार पर ही अब इन्हें यह सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी, हालांकि सूत्रों का कहना है कि दो बागी विधायकों से उनके अनुरोध पर पहले ही सुरक्षा हटा ली गई थी।

बरसात में कैसे बचें डायरिया के प्रकोप से

लगातार लूज मोशन यानि पतला दस्त आना, उल्टी होना डायरिया कहलाता है। डायरिया बैक्टिरियल इनफेक्शन के कारण तो होता ही है लेकिन सबसे मुख्य कारण है खान पान में गड़बड़ी, प्रदूषित पानी और आंत की गड़बड़ी। दिन में अगर तीन से अधिक बार पानी के साथ पतला दस्त हो रहा है तो यह डायरिया के लक्षण है।

डायरिया में शरीर में पानी की कमी हो जाती है, जिसे डीहाईड्रेशन कहते हैं। जो काफी गंभीर होता है, जिससे शरीर कमजोर हो जाता है। शरीर में संक्रमण फैलने का खतरा काफी बढ़ जाता है। समय पर इलाज न होने पर मरीज की जान भी जा सकती है। आमतौर पर डायरिया 3 से 7 दिनों तक परेशान करता है, डायरिया वैसे तो कभी भी हो सकता है, लेकिन बरसात में वायरल डायरिया ज्यादा होता है।

डायरिया के लक्षणः

  • आतों में सूजन से हुआ डायरिया।
  • पतला दस्त अगर 14 दिन तक रहे ।
  • दस्त के साथ अगर खून आता है तो इससे शरीर काफी कमजोर हो जाता है।
  • उल्टी के साथ पतला दस्त आता है। यह पेट और आंत में एसिडिटी बनने से होता है।

डायरिया का उपचारः 

डायरिया के लिये बहुत घरेलू इलाज तो है, लेकिन जब पतले दस्त लगातार आते रहें, दस्त के साथ पानी भी आए और शरीर में पानी की कमी हो जाए तो डाक्टर को दिखा लेना चाहिए। 2-3 दिन तक डायरिया रहता है तो इससे डीहाईड्रेशन हो जाता है और मरीज की स्थिति काफी गंभीर हो जाती है, डायरिया होने पर ज्यादा से ज्यादा इलेक्ट्रोलाईट्स पीते रहना चाहिए, ताकि पानी की कमी ना हो ।

चिकित्सकीय इलाजः

  • डायरिया में डीहाईड्रेशन होने पर मरीज को ग्लूकोज़ चढ़ाया जाता हैं, इससे शरीर में पानी की कमी दूर होती है। इसमें दवाई भी होती है और इलेक्ट्रोलाईट्स भी होता है।
  • वायरल डायरिया में संक्रमण को खत्म करने के लिए मरीज को एंटीबायोटिक दिया जाता है, बैक्टिरियल इनफेक्शन में भी मरीज को एंटीबायोटिक देते हैं।
  • डायरिया के लिए खासकर दस्त रोकने के लिए एंटी डायरल दवाएं भी दी जाती है। लोपरामाईड एंटी-डायरियल दवा भी होती है। जो आंत में हो रही परेशानी को ठीक करती है।
  • डायरिया होने पर तेल मसालों वाले खाने से परहेज करना चाहिए।
  • डायरिया में दूध और दूध से बने पदार्थ नहीं खाने चाहिए, मरीज की हालत और बिगड़ सकती है।
  • केला, चावल, सेब का मुरब्बा खाने से डायरिया में राहत मिलती है। केला और चावल आंतों की गति को नियंत्रित करने और दस्त रोकने में सहायता करते हैं।
  • पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लें लेकिन अगर फिर भी डायरिया बढ़ रहा हो तो तुरंत डाक्टर से संर्पक करें।

कक्षा 6 से 8वीं के पाठ्यक्रम में अनिवार्य होगा कृषि विषय

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आने वाले दिनों में स्कूलों की कक्षा छह से आठ के बच्चे पाठ्यक्रम में खेती करना भी सीखेंगे, बच्चों को कृषि से जोड़ने के मकसद से सरकार यह कदम उठाने जा रही है। खास बात यह है कि कृषि अनिवार्य विषय के रूप में पाठ्यक्रम में जोड़ा जाएगा।

बुधवार को प्रदेश के कृषि, कृषि विपणन, कृषि प्रसंस्करण, कृषि शिक्षा, उद्यान एवं फलोद्योग एवं रेशम विकास मंत्री सुबोध उनियाल ने किसानों के लिए संचालित कृषि विभाग की योजनाओं की प्रगति की समीक्षा के दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने यह बात कहीं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की लगभग दो तिहाई आबादी कृषि पर निर्भर हैं, कृषि गांव में पलायन रोकने का बेहतर माध्यम है। सरकार का प्रयास है कि कृषि क्षेत्र में केंद्र सरकार के सहयोग से अभिनव प्रयोग किये जाएं। बच्चों में कृषि के प्रति आकर्षण पैदा करने के लिए जिन विद्यालयों में कृषि भूमि उपलब्ध है। वहां पर छात्रों को खेती किसानी गतिविधि से जोड़ने के लिए कक्षा छह, सात व आठ में कृषि को अनिवार्य विषय के रूप में शामिल करने की योजना है।  कृषि महाविद्यालय खोलने की भी योजना गतिमान है, ताकि यहां के छात्रों को कृषि व उद्यान के क्षेत्र में युवा वैज्ञानिक के रूप में तैयार किया जाय जो उनके रोजगार का प्रभावी माध्यम बनेगा।

इस दौरान मंत्री उनियाल ने कृषि निदेशालय का औचक निरीक्षण भी किया। निरीक्षण के दौरान कृषि निदेशक व अन्य अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सभी अधिकारी और कर्मचारी अपने कार्य के प्रति सजग रहें। उन्होंने चेतावनी दी कि कार्य के प्रति किसी भी प्रकार की उदासीनता सहन नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देशित किया कि समस्त अधिकारी और कार्मिक समय पर कार्यालय में अपनी उपस्थिति दें और सरकार द्वारा कृषि के क्षेत्र में किसानों के हित में लिए गए निर्णयों का समयबद्धता व गुणवत्ता से क्रियान्वयन करें।

उन्होंने कृषि निदेशालय में हो रहे नवनिर्माण कार्यों का भी स्थलीय निरीक्षण किया गया और मौके पर निदेशक कृषि गौरीशंकर को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता नहीं होनी चाहिए व निर्माण कार्य गुणवत्ता युक्त हो। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा नीति आयोग के समक्ष प्रभावी पहल किए जाने से नीति आयोग द्वारा कृषि सहायता व अनुदान में अलग मानक निर्धारण हेतु 11 पर्वतीय राज्यों कि अलग से बैठक किए जाने का निर्णय लिया गया है।

अब दून में चलेंगी इलेक्ट्रिक बसें

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इंदौर, दिल्ली, बंगलुरू, मनाली की तर्ज पर अब उत्तराखंड में भी लो-फ्लोर इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। रोडवेज देहरादून, हरिद्वार, रुड़की, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में इटली की एक कंपनी के संग अनुबंध पर स्थानीय बस सेवा शुरू करने की तैयारी कर रहा है। बुधवार सुबह कंपनी के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मुलाकात कर प्रेजेंटेशन दिया। सीएम ने प्रस्ताव में रुचि दिखाते हुए सचिव परिवहन डी सेंथिल पांड्यिन को निर्देश दिए। रोडवेज अधिकारियों की मानें तो 20 से 50 किमी की दूरी वाले शहरों में यह इलेक्टिक बसें जल्द ही दौड़ती नजर आएंगी। इन बसों में प्रदूषण का खतरा नहीं होगा और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा।

राज्य बनने के 17 साल बाद भी राज्य में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था नहीं सुधर सकी। शहरों में बेलगाम सिटी बसें, विक्रम और ऑटो फिजां बिगाड़ने पर आमादा हैं। इन वाहनों में न गति पर नियंत्रण है न नियमों की परवाह। देहरादून, हरिद्वार व नैनीताल में सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं को दुरुस्त करने के लिए 2008 में जेएनएनयूआरएम के तहत सेमी लो-फ्लोर बसें दी गई थीं। इसका मकसद यात्रियों को आरामदायक और सुविधाजनक सफर मुहैया कराना था। देहरादून व हरिद्वार को 75-75 और नैनीताल को 45 बसें मिलीं, लेकिन इनके संचालन के लिए जिम्मेदार स्थानीय निकायों ने हाथ खड़े कर दिए। बसें पहले डेढ़ साल खड़ी रहीं, बाद में इन्हें रोडवेज के सुपुर्द कर दिया गया। अब ये बसें एक शहर से दूसरे शहर में दौड़ने लगीं और जर्जर स्थिति में पहुंच गई हैं।

इसी तरह रोडवेज भी अपनी जिन बसों का संचालन 20 से 50 किमी की दूरी के लिए करता है वे एकदम खटारा हैं। लिहाजा, रोडवेज अब यात्री सुविधा के हिसाब से बसों के संचालन की तैयारी कर रहा है। बसों में होगी ये सुविधाएं

  • ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन, प्रदेश में पहली बार कुछ बसों में होगी ऑटो गियर की सुविधा।
  • ऑटोमेटिक स्लाइडिंग डोर, जिसका कंट्रोल सवारी के बजाए ड्राइवर के पास होगा।
  • बसों में इलेक्टिक डिस्प्ले बोर्ड फ्रंट में लगा होगा, जिसमें यह पता लगेगा कि बस कहां-कहां होकर जाएगी।
  • बसों में दोनों ओर दो-दो सीटें होंगी। अंदर का स्पेस खुला-खुला होगा।
  • आइटीईएस प्रणाली होगी। आने वाले स्टेशन की सूचना माइक के जरिये मिल जाएगी।
  • बस लो फ्लोर होगी और आकार एयरोडायनामिक होगा। इससे माइलेज भी बढ़ेगी।
  • लो-फ्लोर होने के कारण बुजुर्गो और महिलाओं को सीढ़ी पर चढ़ने व उतरने में परेशानी नहीं होगी।
  • केंद्र भी दे रहा बढ़ावा देश में यातायात और ईंधन की समस्या से निजात पाने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने पर केंद्र सरकार काम कर रही है।

मिनिस्ट्री ऑफ हेवी इंडस्ट्रीज एंड पब्लिक इंटरप्राइजेस भी शहरों में लगातार एनवायरनमेंट फ्रेंडली पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है। लो-फ्लोर इलेक्ट्रिक बसें इसी का हिस्सा हैं, ये बसें बैटरी से चलेंगी। इससे न प्रदूषण होगा, न ही ईंधन का खर्च आएगा। संचालन लागत भी कम हो जाएगी, ये बसें एक बार फुल चार्ज होने पर 150 से 200 किमी तक चलेंगी।