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लहरों में बह रहे कांवड़िये को एसडीआरएफ के जवान ने बचाया

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हरिद्वार में गंगा में डुबकी लगाने के दौरान एक कांवड़िया गंगा की लहरों में फंस गया। जिसे एसडीआरएफ और पुलिस ने बाहर निकाल लिया।

बताया जा रहा है कि कांवड़िया गंगा में डुबकी लगाने आया था इस दौरान लहरों की चपेट में आकर गंगा में डूब गया। पानी का बहाव इतना तेज था कि यह शिवभक्त गंगा में ही डूबता चला गया। यह देख आस-पास खड़े लोगों ने हल्ला मचाना शुरू कर दिया, तभी गंगा घाट पर तैनात एसडीआरएफ और जल पुलिस के जवानों ने गंगा में छलांग लगा दी। घटना हरिद्वार के कांगड़ा घाट की है।

बताया जा रहा है कि एसडीआरएफ और जल पुलिस के जवानों की कड़ी मशक्कत के बाद युवक को बचा लिया गया। जिससे वहां उपस्थित भक्तों में खुशी की लहर दौड़ गई। बतादें कि कांवड़ मेले के चलते हरिद्वार में इस समय भक्तों की भारी भीड़ दिखाई दे रही है, वहीं बारिश के कारण गंगा उफान पर हैं। जिसके चलते आए दिन नदियों में डूबने की घटनाएं सामने आ रही हैं।

 

एक अौर अन्नदाता की मौत

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अन्नदाता आत्महत्या करने को मजबूर है और सरकार आत्महत्याओं पर जांच करते नहीं थक रही है, यह हाल उधमसिंहनगर जिले का है जहां अब तक चार किसान आत्महत्या कर चुके है। वहीं ताजा मामला खटिमा का सामने आया है जहां किसान को बैंक से कर्ज अदायगी के लिए फोन आना ही मौत का कारण बन गया।

बैंक कर्ज के तकादे से प्रतापपुर के एक किसान को हार्ट अटैक पड़ गया, अस्‍पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई। कर्ज के तकादे से प्रतापपुर के किसान भजन सिंह को दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई है। परिजनों ने बताया की वसूली के लिए संग्रह अमीन ने शुक्रवार की शाम को फोन किया था, इसके बाद रात दो बजे उन्हें अटैक पड़ गया। बरेली अस्पताल ले जाते समय किसान ने रास्ते मे ही दम तोड़ दिया।

किसान के ऊपर 20 लाख रुपये का बैंक ऋण बताया जा रहा है। उत्तराखंड ग्रामीण बैंक ने चार लाख रुपये के लिए आरसी भी काटी है। इसके बाद से किसान तनाव में चल रहा था। वहीं, प्रशासन ने ऐसी घटना की जानकारी होने से इन्‍कार किया है।

आफत की बारिश, दो मासूमों की डूब कर मौत

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पहाड़ों की बारिश से उफान पर आई परवीन नदी का पानी नौसर गांव, खटीमा में घुस गया है। इसमें दो मासूमों की डूब कर मौत हो गई। बाढ़ से बेहाल ग्रामीणों में इस घटना से कोहराम मच गया।

शुक्रवार की शाम को गांव के रहने वाले अनिल मसीह का 14 वर्षीय पुत्र वंश, अंश, पुत्री रोशनी अपने मौसा गुरदासपुर पंजाब निवासी पीटर के पुत्र साहिल व 12 वर्षीय पुत्री पूजा के साथ खेल रहे थे।

इस दौरान गांव में धीरे-धीरे बाढ़ का पानी भरने लगा। पानी में खेलते बच्चों को गड्ढे में भरे पानी का अंदाज नहीं लगा, इसी दौरान सभी बच्चे डूबने लगे। जैसे-तैसे रोशनी पानी से बाहर आई, उसने हो-हल्ला किया। जिससे आस-पास के लोग घटना स्थल की तरफ दौड़ पड़े।

उन्होंने डूब रहे बच्चों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक वंश व पूजा की मौत हो चुकी थी, जबकि साहिल को बेहोशी की हालत में अस्पताल लाया गया। जहां उसकी चिंताजनक बनी हुई है। एसडीएम विजयनाथ शुक्ल ने बताया कि घटना की जानकारी के लिए क्षेत्रीय पटवारी को भेजा गया है।

कनाडा फिल्म फेस्टिवल में दिखाई जाएगी गढ़वाली फिल्म ”सुबैरो घाम”

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गढ़वाली फिल्म ‘सुबैरो घाम’ रविवार को कनाडा के इंडिया फिल्म फेस्टिवल अलबर्टा (आईएफएफए) 2017 में प्रदर्शित की जाएगी जिसमें और भी बहुत सी पुरस्कार विजेता फिल्मों की स्क्रीनिंग की जाएगी।

सुबैरो घाम (मॉर्निंग सनशाइन) उन 13 फिल्मों में से एक है जिसमें 9 भारतीय भाषाएं जिसमें बंगाली, गुजराती भाषा की फिल्में भी चुनी गई है।आपको बतादें कि यह एक गढ़वाली भाषा में बनी फिल्म है और गढ़वाली उत्तराखंड की मूल भाषा है।

इस फिल्म को कॅनाडा के अल्बर्टा प्रांत की राजधानी एडमोंटन में दिखाया जाएगा, जो कि इस वर्ष के लिए फेस्टिवल के डेस्टिनेशन के 6 कनाडाई शहरों में से एक है। आईएफएफए का उद्देश्य कनाडा में अलग-अलग भाषाओं में भारतीय सिनेमा को बढ़ावा देना है।

य़ह फिल्म उत्तराखंड के गांवों की कहानी है जिसमें दिखाया गया है कि कैसे शराब की लत परिवार को तोड़ देती है और कैसे एक औरत इस बुरी लत के खिलाफ अपनी लड़ाई लड़ती है।

अभिनेत्री-निर्माता उर्मी नेगी, जिन्होंने महिलाओं को ध्यान में रखकर फिल्म को लिखा और तैयार किया है, उन्होंने कहा कि इस फिल्म की पूरी टीम प्रतिष्ठित फिल्म समारोह में अपने चयन के बारे में काफी “रोमांचित” थी।

नेगी का मानना है कि, ‘इस फिल्म के माध्यम से ना केवल यह मुद्ददा अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर जाएगा बल्कि लोगों के बीच इसको लेकर जागरुकता भी पैदा होगी।’ नेगी कहती हैे कि इस फिल्म के माध्यम से वह दुनियाभर में उत्तराखंड की खूबसबरती दिखाना चाहती है, कि लोगों को पता चल सकें कि यह राज्य हर क्षेत्र में बहुत खुबसूरत है।नेगी यू तो पौड़ी की रहने वाली है लेकिन अब मुंबई में बस गई  हैं।

यह फिल्म स्वर्गीय फिल्म निर्माता नरेश खन्ना द्वारा निर्देशित कि गई है, और यह फिल्म को 2014 रिलीज हो गई थी। इस फिल्म में राज्य के दूरदराज के पहाड़ी स्थानों में बड़े पैमाने पर शूटिंग की गई थी। इसमें अभिनेता बलराज नेगी, बलदेव राणा और घनानंद भी शामिल हैं।

नेगी ने कहा, “एक निर्माता और अभिनेता के रूप में, मैं अपने भविष्य के फिल्मों के माध्यम से हमारे राज्य के लिए ऐसे ऐसे सामाजिक मुद्दों को लोगों के सामने लेकर आउंगी जिससे राज्य की स्थिति बेहतर हो सके और अपने राज्य की खुबसूरती को अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर दिखाने में मेरी फिल्में एक बहुत बड़ा माध्यम बनेंगी।’

रसोई गैस सब्सिडी बैंक के साथ अब ई-वॉलेट में भी

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बैंक खाते के अलावा यदि उपभोक्ता रसोई गैस की सब्सिडी को अपनी जेब में रखना चाहते हैं तो इसके लिए भी तेल कंपनियों ने रास्ते खोल दिए हैं। तेल कंपनियों ने उपभोक्ताओं को राहत देते हुए रसोई गैस सब्सिडी को ई-वॉलेट में भेजने की भी व्यवस्था कर दी है। हालांकि, तेल कंपनी के स्थानीय अधिकारी अभी तक इस संबंध में आधिकारिक निर्देश आने का इन्कार कर रहे हैं, लेकिन कंपनी की ओर से सभी गैस एजेंसियों को इस संबंध में मेल के माध्यम से सूचना दे दी गई।

अब तक इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम एवं हिंदुस्तान पेट्रोलियम कंपनियां उपभोक्ताओं को रसोई गैस सब्सिडी सिर्फ आधार लिंक बैंक खाते में ही ट्रांसफर करती थी। चूंकि, सब्सिडी की रकम सौ से दो सौ रुपये के बीच होती है तो कई उपभोक्ताओं के आने का भी पता नहीं चलता था। अब कंपनी चाहती है कि सब्सिडी के पैसे का उपभोक्ताओं को पता रहे और यह पैसा सीधे उनकी ई-वॉलेट में जमा हो सके और आसानी से उपभोक्ता ऑनलाइन पेमेंट में भी इसका इस्तेमाल कर सकें। कंपनी ने यह सुविधा उन उपभोक्ताओं के लिए दी है, जो इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं और ई-वॉलेट का उपयोग करते हैं। इस सुविधा का लाभ लेने के लिए उपभोक्ताओं को ई-वॉलेट से संबंधित जानकारी अपनी गैस एजेंसी पहुंचकर अपडेट करानी पड़ेगी। जिसके बाद उनकी सब्सिडी ई-वॉलेट में ही पहुंचेगी।

दून एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष चमनलाल ने बताया कि, ‘ई-वॉलेट में सब्सिडी भेजने के संबंध में गैस एजेंसियों को अभी मेल से सूचना भेजी गई है। अधिकारियों की ओर से निर्देश के बाद नई व्यवस्था चालू कर दी जाएगी।

हो सकता है गैस का संकट
कांवड यात्रा के चलते शनिवार रात से हरिद्वार प्लांट, दून व गढ़वाल मंडल जाने वाले रास्ते बंद हो गए हैं। ऐसे में दून समेत पूरे गढ़वाल मंडल में रसोई गैस का संकट मंडरा सकता है। हालांकि, तेल कंपनियां इस समय में करनाल, होशियारपुर आदि शहरों से आपूर्ति देने का दावा कर रहे हैं, लेकिन अधिकारी भी स्पष्ट नहीं हैं कि इस आपूर्ति से काम चल जाएगा या नहीं। आईओसी के एरिया मैनेजर एसके सिन्हा ने बताया कि वह आपूर्ति सुचारू रखने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन रविवार को ही स्थिति का पता चल पाएगा।

दून में पानी के संकट से जूझ रही एक लाख आबादी

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बांदल जलस्रोत की पाइप लाइन जहां जल संस्थान चौथे दिन भी ठीक नहीं कर पाया, वहीं रही सही कसर बीजापुर स्रोत से शनिवार को आए गंदे पानी ने पूरी कर दी, इसका परिणाम ये रहा कि राजधानी की करीब एक लाख की आबादी को पूरा दिन बिना पानी के गुजारना पड़ गया। हालांकि, ये संकट पिछले चार दिन से बना हुआ है, लेकिन बीजापुर का जलस्रोत चलने से कुछ लोगों को पानी की आपूर्ति की जा रही थी।

जल संस्थान को बांदल स्रोत से प्रतिदिन एक करोड़ तो बीजापुर से 80 लाख लीटर पानी उपलब्ध होता है। इस पानी को जल संस्थान वाटर वर्क्स लाकर शहर के विभिन्न इलाकों में करीब एक लाख लोगों को सप्लाई देता है। अब चार दिन पहले आई बारिश से बांदल की 18 इंच की पाइप लाइन रायपुर में बह गई। जिससे एक करोड़ लीटर पानी कम हो गया और 60 हजार लोगों की पेयजल आपूर्ति। अब जल संस्थान बीजापुर स्रोत से कुछ जगहों पर पानी भेज रहा था, लेकिन शनिवार को बीजापुर से मिट्टीयुक्त पानी वाटर वर्क्स पहुंचा, जिसे भी सप्लाई नहीं किया जा सका और संकटग्रस्त लोगों की संख्या पहुंच गई एक लाख। पानी न आने से परेशान लोग जल संस्थान के अधिकारियों को फोन मिलाते रहे, लेकिन दिनभर पानी नहीं पहुंच सका। हालांकि, जल संस्थान ने कई इलाकों में पानी के टैंकरों के जरिए सप्लाई दी, लेकिन इससे भी कुछ ही लोगों को राहत मिली, जबकि आबादी का एक बड़ा हिस्सा पानी को तरसता रहा। उधर, जल संस्थान ने बांदल की लाइन को ठीक करने का काम शुरू कर रखा है, लेकिन शनिवार को भी अधिकारी लाइन ठीक नहीं कर पाए थे।

जल संस्थान के अधिशासी अभियंता यशवीर मल्ल ने बताया कि, ‘लाइन को ठीक करने का कार्य प्रगति पर है। चूंकि, लाइन बड़ी है इसलिए ठीक करने में समय लग रहा है। जल्द ही लाइन ठीक हो जाएगी। हालांकि, संकट वाले क्षेत्रों में पानी के टैंकर भेजकर सप्लाई दी जा रही है।

स्कूली बच्चों को दिखायेंगे फिल्में

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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार की स्वायत संस्था ‘‘बाल चित्र समिति’’ द्वारा 17- 22 जुलाई 2017 तक देहरादून जनपद के सिनेमाघरों में प्रतिदिन सुबह के शो में फिल्म दिखाई जायेंगी। यह फिल्में जनपद के सिनेमाघर पी.वी.आर, बिग सिनेमा, मूवी लांउज सिनेमा, मुक्ता सिनेमा, सिलवर सिटी सिनेमा गिलिट्ज सिनेमा तथा रामा पैलेस ऋषिकेश में सुबह के शो में प्रदर्शित की जायेंगी। इस फिल्म के आयोजन का मुख्य उद्देश्य स्कूल बच्चों के मनोरंजन एवं उनको ज्ञानवर्धक फिल्म दिखाना है, जिसमें जनपद के लगभग 14 हजार स्कूली बच्चों को फिल्म दिखाने का लक्ष्य रखा गया है।
हिन्दी बाल फिल्मों में  ‘‘लगी शर्त’’, ‘‘लुक्का छुप्पी’’ ‘‘ द गोल’’ ‘‘पप्पू की पगडंडी‘‘ ‘‘आसमान से गिरा’’ ‘‘ हैप्पी मदर डे’’ दिखाई जायेंगी।  उक्त फिल्मों को दिखाने एवं इसका सफल आयोजन के लिये  जिलाधिकारी एस.ए मुरूगेसन ने मुख्य शिक्षा अधिकारी को निर्देश देते हुए कहा कि, ‘जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक एवं माध्यमिक फिल्म दिखाने के लिये बच्चों की संख्या एवं सूची शिक्षा विभाग को प्रस्तुत करेंगे तथा सिनेमाघरों में सीटों के अनुसार ही स्कूली बच्चों को फिल्म दिखाने तथा बच्चों के साथ अनुशासन बनाये रखने के लिए पर्याप्त अध्यापकों की भी ड्यूटी लगायेगें।

गंगा कलश यात्रा का समापन

गंगा को स्वछ निर्मल बनाने के उदेश्य से ऋषिकेश से गोमुख तक हर साल गंगाकलश यात्रा का आयोजन किया जाता है, जिस में बड़ी संख्या में युवा और संत हिस्सा लेतें है। ये कलश यात्रा ऋषिकेश से गोमुख तक सभी गंगा तटीय छेत्रो में जन जागरूकता फैलाने के साथ ही पर्यावरण सरक्षण का सन्देश भी देती है। 11 जुलाई को प्रारंभ हुई इस यात्रा का आज समापन हो गया। लाखों लोगों की आस्था का प्रतीक माँ गंगा को स्वचछ और निर्मल बनाने के लिए सरकारी योजनायों के बाद श्री रामायण प्रचार समिति और सारथी संस्था द्वारा 11 से 15 जुलाई तक गंगाकलश यात्रा का आयोजन किया गया ।

इस गंगाकलश यात्रा का मुख्य उद्देशय गंगा को साफ़ और प्रदूषण मुक्त करना है। ये गंगा कलश यात्रा ऋषिकेश से गोमुख तक की जाती है जिसमे गंगा के तटों पे बसे कजबों, छेत्रों और शहरों में लोगों को गंगा के प्रति जागरूक किया गया । इस मौके पर तीर्थ पुरोहित रवि शास्त्री ने बताया कि, ‘गंगा कलश यात्रा बेहद अहम यात्रा है जिसका मुख्य उदेश्य गंगा की स्वछता के  प्रति लोगों को जागरूक  करना है। आज जिस तरह गंगा में लगातार प्रदुषण हो रहा है ये आने वाले समय में गंगा के वजूद पर सवालिया निशान लगा देगा, गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए अब गंगा तटों के लोगो को संकल्प लेना होगा।’

ऐसे में श्री रामायण प्रचार समिति और सारथी  संस्था  द्वारा शुरू की गयी ये मुहीम एक नयी जागरूकता को लेकर चलेगी, जब गंगा अपने घर में साफ़ होगी तभी इसका अस्तित्व बच पाएगा। आपको बता दे कि गोमुख से आया गंगा जल पीएम नरेंद्र मोदी को भेंट किया जाएगा । एक तरफ जहाँ गंगा को साफ़ बनाए रखने के लिए गंगा कलश यात्रा उपयोगी साबित हो सकती है, तो वहीँ इससे लाखों लोगों में गंगा के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी। अब देखने वाली बात होगी की इस यात्रा से गंगा का स्वरुप कितना बदलता है।

नेशनल गेम्स के लिए करनी होगी तैयारी, किसी भी खेल में संसाधन नहीं

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भले ही शासन से लेकर खेल विभाग तक उत्तराखंड में होने वाले अगले नेशनल गेम्स में बेहतर प्रदर्शन करने का दावा करते नजर आ रहे हो, लेकिन यदि राज्य की अब तक की तैयारियों पर ध्यान दें तो तैयारी पूरी तरह से धराशायी होती नजर आ रही है। कारण ये है कि न राज्य के पास नेशनल गेम्स जैसे इवेंट के लिए प्रशिक्षक हैं और न संसाधन। स्थिति ये है कि कई खेल तो ऐसे हैं जिनके लिए राज्य के पास खेलने की जगह तक उपलब्ध नहीं है। ऐसी स्थिति में खिलाडिय़ों से पदक जीतने की उम्मीद लगाना बेमानी होगा।

दरअसल, गुरुवार को बैठक के दौरान जब सचिव खेल व राज्य के खेल संघों के पदाधिकारी आमने-सामने आए तो उत्तराखंड में खेल की स्थिति से पदा उठ गया। अब जिमनास्टिक को ही ले लीजिए, राज्य पदक जीतने का दावा ठोक रहा है और हालत ये है कि उत्तराखंड में जिमनास्टि के लिए एक अदद हॉल तक नहीं है। ये बात जब बैठक में सामने आई तो सब हैरान रह गए। इसके बाद हॉकी संघ के पदाधिकारी ने कहा कि पदक जीतने के लिए उन्हें टफ के अलग-अलग शहरों में चार मैदान चाहिए, जहां वह 12 प्रशिक्षण कैंप लगाकर खिलाडिय़ों को बेहतर तैयारी करा सके। लेकिन, सचिव ने हाथ खड़े करते हुए कह दिया कि ‘हमारे पास स्पोट्र्स कॉलेज में सिर्फ एक टफ का ग्राउंड उपलब्ध है, जो भी तैयारी करनी है इसी पर करनी होगी।’

अब बारी आई कबड्डी के प्रतिनिधि के बोलने की तो उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में कबड्डी के कोच की बात तो बहुत दूर, यहां खिलाडिय़ों के लिए एक मैट भी उपलब्ध नहीं है। एक पदाधिकारी ने कहा कि राज्य नेशनल गेम्स की तैयारी तो कर रहा है, लेकिन आईओए से कोई तकनीकी सलाहकार अब तक नहीं मंगाया गया। कहीं ऐसा न हो जाए कि जब राज्य इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करें और तकनीकी सलाहकार आकर उसे रद्द कर दें। इससे बचने के लिए राज्य को पहले ही तकनीकी सलाहकार बुलाकर काम करना चाहिए। बैठक के दौरान इसके अलावा भी कई खामियां नजर सामने आई।

सीबीएसई ने दी सुविधा, एक क्लिक पर 14 साल के सभी रिजल्ट

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सेंट्रल बोर्ड आॅफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) के बीते 14 सालों के सभी परिणाम एक क्लिक पर आपके सामने होंगे। बोर्ड ने सभी रिजल्ट को कम्पाइल करते हुए एक ऐसा लिंक तैयार किया है, जहां बोर्ड द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं के परिणाम प्राप्त हो सकेंगे।

सीबीएसई से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाओं से लग कई तरह की परीक्षाओं का आयोजन करता है। इनमें नीट, जेईई मेंस, सीटीईटी,यूजीसी नेट जैसी प्रमुख परीक्षाएं भी शामिल हैं। बोर्ड इन सभी के परिणाम अलग-अलग जारी करता है। अभी तक यदि किसी को बीते सालों के परिणामों की जानकारी लेनी होती थी तो वे सीबीएसई की रिजल्ट वाली वेबसाइट पर लाॅगइन कर अलग-अलग सालों में जाकर यह परिणाम देख सकते थे। इसके अलावा अलग-अलग सालों में री परीक्षा के लिए अलग से परिणामों की खोज करनी पड़ती थी। लेकिन, अब बोर्ड ने इस फजीहत को खत्म करते हुए एक ही लिंक पर यह तमाम जानकारी प्रदान करने की सुविधा दी है।
बोर्ड ने इसके लिए http://www.cbse.nic.in/newsite/results.html लिंक प्रदान किया है। लिंक पर बोर्ड ने साल 2004 से 2016 तक की सभी परीक्षाओं के परिणामों के लिंक दिए हैं। केंद्रिय विद्यालय नंबर एक हाथीबड़कला के प्रधानाचार्य डा. इंद्रजीत सिंह ने बताया कि पहले परिणामों को लेकर काफी परेशानी होती थी। अब एक ही क्लिक पर सभी तरह के परिणाम उपलब्ध हैं, जो सीबीएसई द्वारा आयोजित किए जाते हैं। इसका सबसे बड़ा लाभ यह भी होगा कि यदि किसी अभयर्थी का परिणाम आदि जांच करना हो तो संबंधित लिंक पर जाकर उसके रोल नंबर जानकारी को डालते ही परिणाम से जुड़ी तमाम जानकारी उपलब्ध हो जाएगी। बोर्ड ने शिक्षा व्यवस्था में पारदिर्शता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया है। छात्रों को भी इसका काफी लाभ होगा।