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गोमुख में गंदगी फैलाने वालों से वसूला जाएगा जुर्माना

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गौमुख में यात्री या पर्यटकों ने गंदगी फैलाई तो पांच हजार रुपये जुर्माना वसूला जाएगा। इसके लिए डीएम डॉ आशीष कुमार श्रीवास्तव ने गंगोत्री नेशनल पार्क के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं।

दरअसल गंगोत्री से गोमुख के बीच कई रमणीय स्थल हैं। इसके अलावा तपोवन, नंदनवन आदि कई ट्रैकिंग स्थल हैं, जहां हर साल सैकड़ों पर्वतारोही जाते हैं। हर साल यात्रा सीजन पर सैकड़ों यात्री जल भरने गोमुख जाते हैं। कुछ यात्री व पर्यटक कई बार वहां प्लास्टिक व अन्य सामान छोड़ देते हैं जिसके कारण वहां गंदगी फैलती है। यह गंदगी वहां कई वर्षों तक ऐसे ही पड़ी रहती है, जिसके कारण ग्लेशियर आदि को भी नुकसान पहुंचता है।

ऐेसे में जिलाधिकारी डॉ आशीष कुमार श्रीवास्तव ने उप निदेशक गंगोत्री नेशनल पार्क को निर्देश दिए कि गंगोत्री से गौमुख जाने वाले पर्यटकों और यात्रियों द्वारा अगर गन्दगी फैलाई जाती है तो प्रति पर्यटक व यात्री से 5000/- रुपये का जुर्माना लिया जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि आवाजाही करने वालों पर स्वच्छता को लेकर कड़ी निगरानी रखें। 

हैदराबाद में शूटिंग कर रही कंगना हुई घायल

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झांसी की रानी, लक्ष्मीबाई की जिंदगी पर बनने जा रही फिल्म की शूटिंग के दौरान हैदराबाद में तलवारबाजी की शूटिंग कर रही कंगना बुधवार को घायल हो गईं। तलवारबाजी का सीन करते हुए कंगना के सिर पर चोट लग गई और उनके सिर से खून निकलने लगा, उनको तुरंत डॉक्टर के पास ले जाया गया, जहां उनको 15 टांके आए हैं।

डॉक्टरों ने दो सप्ताह तक कंगना को पूरी तरह से आराम करने की सलाह दी है, कंगना अभी अस्तपाल में ही भर्ती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कंगना को अस्पताल से छुट्टी के बारे में अगले दो-तीन दिनों में कोई फैसला लिया जाएगा। फिलहाल डॉक्टरों ने उनकी सेहत को बेहतर बताया है।

फिल्म की यूनिट के मुताबिक, कंगना को बताया गया था कि ये सीन खतरनाक हो सकता है और उनको बॉडी डबल इस्तेमाल करने की सलाह भी दी गई थी, लेकिन कंगना ने इससे मना कर दिया और खुद सीन करने के लिए तैयार हो गईं। फिल्म के निर्माता कमल जैन के मुताबिक, ‘कंगना जल्दी से जल्दी सेट पर लौटना चाहती हैं। हो सकता है कि अगले सप्ताह ही कंगना फिर से इस फिल्म की शूटिंग फिर से शुरू कर दें।’ इस फिल्म में कंगना के अलावा अंकिता लोखंडे और सुरेश ओबेरॉय को हाल ही में टीम का हिस्सा बनाया गया है।

साउथ के डायरेक्टर कृष इस फिल्म का निर्देशन कर रहे हैं। इस फिल्म के कटेंट को लेकर फिल्मकार केतन मेहता के साथ कंगना का विवाद भी चल रहा है। 

गुलदार ने किया एक व्यक्ति का शिकार

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उत्तरकाशी नौगांव भंकोलि में गुलदार ने बुधवार की देर रात एक व्यक्ति को निवाला बना लिया। ग्रामीणों को घटना की जानकारी सुबह मिली, मृतक का अध खाया शव घटना स्थल से करीब 200 मीटर दूर झाड़ियों में मिला। इलाके में हुई इस घटना से स्थानीय लोेगों में भारी आक्रोश है।

भंकोलि के रहने वाला सरदार सिंह, गांव से दो किमी दूर गैरोगी तोक स्थित छानियों में रहता थे। उसकी पत्नी उमा देवी गांव गई हुई थीं। गुरुवार सुबह गांव से जब लोग गैरोगी छानी पहुंचे तो छानी का दरवाजा खुला हुआ मिला। सीढ़ी पर खून के निशान देखते ही लोगों को अनहोनी की आशंका हुई। निशानदेही पर सरदार सिंह का शव करीव 200 मीटर दूर मिला, घटना से लोगों में आक्रोश है। ग्रामीण का कहना है कि वन विभाग को घटना की जानकारी नौ बजे दी गई थी, लेकिन विभाग के कर्मचारी दो बजे घटना स्थल पर पहुंचे।

उनका कहना था कि क्षेत्र में पिछले 15 दिनों से गुलदार का आतंक है। गुलदार 15 दिनों में एक गाय, एक बछड़ा व तीन बकरियों को मार चुका है और विभाग मूक दर्शक बना हुआ है। ग्रामीणों ने गुलदार को आदम खोर घोषित करने की मांग की है।

दून में रसोई पर भारी रही कांवड़ यात्रा

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बीते एक सप्ताह से कांवड़ यात्रा के कारण दून में रसोई गैस की आपूर्ति प्रभावित हो गई है। हरिद्वार प्लांट से रास्ते बंद होने के बाद करनाल से भी पर्याप्त मात्रा में गैस की आपूर्ति नहीं हो पा रही है, इस कारण दून में कई दिन से गैस की किल्लत हो रही है।

हरिद्वार के लंढौरा प्लांट से इंडियन ऑयल कंपनी हर रोज 30 गाड़ी गैस की आपूर्ति करता है। इसमें से 18 गाड़ी देहरादून व 12 गाड़ी रसोई गैस गढ़वाल के अन्य जिलों के लिए भेजी जाती हैं। कांवड़ यात्रा के कारण हरिद्वार से दून आने वाले रास्ते बंद हैं। इसलिए तेल कंपनी ने दून की सप्लाई को करनाल जिले से जोड़ दी थी, लेकिन अब तक करनाल से पर्याप्त गैस नहीं मिल पा रही। इसके चलते शहरी की अधिकांश एजेंसियों पर सुबह से ही नो स्टॉक की स्थिति आ गई थी। अभी दो दिन और यह स्थिति रह सकती है।

आधार से लिंक होंगे मनरेगा के खाते

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पौड़ी गढ़वाल के विभिन्न ब्लॉकों में मनरेगा के तहत जॉब कार्डधारकों के बैंक खातों को आधार नंबर से लिंक करने के लिए ब्लॉक स्तर पर आधार सीडिंग शिविर लगाये जाने के लिए विशेष अभियान चलाया जायेगा। सीडीओ ने इस अभियान के लिए कार्ययोजना तैयार कर दी है, जिसमें खंड विकास अधिकारियों तथा बैंकर्स के संयुक्त प्रयासों से खातों में आधार नंबर जोड़कर जॉब कार्ड धारकों को आधार बेस्ड भुगतान प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा, सीडीओ ने सीडिंग कार्य को गंभीरता से पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

विकास भवन सभागार में मुख्य विकास अधिकारी विजय कुमार जोगदंडे की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में उन्होंने सभी खंड विकास अधिकारियों व बैंकर्स के साथ बैठक कर इस अभियान की रणनीतियों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि केेंद्र सरकार के निर्देशों के बाद जिले में सभी जॉब कार्डधारकों के बैंक खातों को आधार से जोड़ा जाना है,  जिले में 1 लाख 16 हजार के सापेक्ष 1 लाख 8 हजार मनरेगा जॉब कार्डधारकों के खातों को आधार से जोड़ा जा चुका है। जबकि 63 हजार जॉब कार्ड धारकों को आधार बेस्ड भुगतान प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अवशेष के लिए विशेष आधार सीडिंग शिविर आयोजित किये जा रहे हैं।

मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि, ‘पूर्व में कई जॉब कार्डधारकों के एक से अधिक या अन्य लोगों के खातों का विवरण जॉब कार्ड में दिया गया था, लेकिन अब आधार नंबर से जुड़े बैंक खाते में ही उनकी मजदूरी का भुगतान सीधे तौर पर किया जायेगा। विशेष सीडिंग अभियान के दौरान पिछले दो वर्षों से जॉब कार्ड का उपयोग न करने वालों का चिह्निकरण कर उन्हें निरस्त किया जाएगा।ब्लाक स्तर पर 25 व 26 जुलाई को विशेष अभियान चलाया जायेगा। इसके बाद न्याय पंचायत व अवशेेष जॉब कार्ड धारकों के लिए समापन शिविर पुनः ब्लाक मुख्यालयों में आयोजित किये जायेंगे।’

विजय कुमार जोगंडे ने आधार नंबर को बैंक खातों में जोड़ने के लिए बैंकर्स की भूमिका को अहम बताया। उन्होंने कहा कि बैंकर्स ग्राम पंचायत स्तर पर जाकर जॉब कार्डधारकों के खातों को आधार से जोड़ेंगे, इस मौके पर मौके पर परियोजना निदेशक एसएस शर्मा, जिला विकास अधिकारी वेद प्रकाश, पीई दीपक रावत, डीपीआरओ एमएम खान, लीड बैंक अधिकारी नंद किशोर एवं विभिन्न बैंकों के बैंकर्स, बीडीओ भाष्करानंद भट्ट, रामेश्वर सिंह चौहान, आशाराम पंत समेत एडीओ पंचायत आदि उपस्थित रहे।

दून अस्पताल में अब आसान होगा कैंसर का उपचार

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दून अस्पताल में अब कैंसर रोग का इलाज करना आसान होगा। इसके लिए अस्पताल में ‘पेट स्केन’ मशीन स्थापित की जाएगी, अस्पताल जल्द ही मशीन खरीदने जा रहा है। अस्पताल की ओर से इसका प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया गया है।

‘पेट स्केन’ मशीन की बात करें तो यह मशीन अभी तक दिल्ली के चुनिंदा अस्पतालों में ही स्थापित है। आमतौर पर कैंसर विशेषज्ञ सीटी स्केन और एमआरआई के जरिए शरीर में फैले हुए कैंसर का पता कर पाते हैं, लेकिन ये दोनों ही जांचे कैंसर के लिए उतनी सटीक साबित नहीं होती, जबकि ‘पेट स्केन’ मशीन के जरिए सिर से पांव तक का कैंसर का सही आकंलन हो पाता है। सही आकंलन होने से कैंसर विशेषज्ञ उपचार भी सटीक कर पाते हैं।

दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा ने बताया कि, ‘दून अस्पताल विशेषज्ञों की मदद से इसका प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजने जा रहा है। शासन की स्वीकृति के बाद अगर ये मशीन दून अस्पताल में लग गई तो मरीजों को फिर किसी भी जांच के लिये दिल्ली या बड़े प्राइवेट अस्पतालों का रुख करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।’

डॉ टम्टा ने बताया कि, ‘मशीन की अनुमानित लागत दस करोड़ के करीब है। साथ ही ‘रोबोटिक ऑपरेशन थियेटर’ का भी प्रस्ताव भेजा गया है, अगर ये दोनों ही प्रस्ताव पर काम हो गया तो दून अस्पताल मरीजों के लिए और बेहतर हो सकेगा। पहाड़ के इलाकोें के मरीजों के लिए यह मशीन संजीवनी की तरह कार्य करेगी। 

कुमांऊ के बाद गढ़वाल में किसान ने की आत्महत्या

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राज्य में जहां एक तरफ सरकार किसानों की कर्ज माफी को सिरे से खारिज कर रही है वहीं प्रदेश में कर्ज के बोझ तले दबे किसानों की आत्महत्या का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। कुमाऊं के बाद गढ़वाल में भी एक किसान ने जहर खाकर जान देने की घटना लामने आई है।किसान के घर वालों का कहना है कि बैंक बार-बार कर्ज के लिए तकादा कर रहे थे, इसलिए किसान तनाव में था।

गढ़वाल में किसान की आत्महत्या का यह पहला मामला है। वहीं,टिहरी की जिलाधिकारी सोनिका ने ऐसी किसी जानकारी से इन्कार किया। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा है तो मामला संवेदनशील है, लेकिन जांच से पहले किसी नतीजे पर पहुंचना ठीक नहीं है। घटना टिहरी जिले के चंबा ब्लाक के स्वाड़ी गांव की है। राजकुमार (47 वर्ष) बुधवार को घर नहीं लौटा तो परिजन ने समझा कि संभव है किसी दोस्त के घर रुक गया हो, लेकिन गुरुवार सुबह भी जब वह नहीं आया तो परिजनों ने ग्रामीणों के साथ तलाश शुरू की। राजकुमार का शव खेत में पड़ा मिला। उसके मुंह से झाग निकल रहा था और पास में नुआन की खाली शीशी थी। ग्राम प्रधान घनानंद सुयाल ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। चंबा के थाना प्रभारी यूएस भण्डारी ने बताया कि पहली नजर में ये मामला आत्म हत्या का लगता है। किसान की पत्नी रोशनी देवी से पूछताछ में पता चला कि राजकुमार ने उत्तरांचल ग्रामीण बैंक से 40 हजार और कॉआपरेटिव बैंक से 25 हजार का कर्ज लिया था।

बताया गया कि बैंक लगातार कर्ज लौटाने के लिए तकादा कर रहे थे। इससे वह तनाव में था। ग्राम प्रधान घनानंद के अनुसार हो सकता है इसी वजह से किसान ने जान दी। राजकुमार के चार लड़कियां और तीन लड़के हैं।

इससे पहले उत्तराखंड में दो महीने के भीतर कर्ज में डूबे पांच किसानों की मौत हो चुकी है, इसमें से तीन ने आत्महत्या की, जबकि दो किसानों की हार्ट-अटैक से मौत हुई।

”नाइट वाॅक टू मसूरी” में नहीं रही वो बात

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लगभग 160 देहरादून निवासी जब अपने घरों से निकलकर देहरादून से मसूरी तक की पैदल यात्रा में भाग लेने के लिए निकले तो शायद उन्होंने सोचा भी नहीं था कि उन्हें यह सब देखने को मिलेगा।जी हां, रात को 12 बजे यह सोच के निकले थे कि इस वाॅक को अपने जीवन का एक अनुभव बनाना चाहते थे, लेकिन जो देखने को मिला वह खुशी से बहद दूर था।

मसूरी की सड़के रात को 12 बजे के बाद भी गाडियों से खचाखच भरी हुई थी और इतना ही नहीं गाड़ियों में तेज आवाज़ में संगीत के साथ गाड़ी में बैठे लोग सड़क पर यहां-वहां कचरा भी फेंक रहे थे।हम बात कर रहे हैं ग्रुप ”बिन देयर दून दैट” की, जो दूनाइट्स को अलग-अलग अनुभव देने के लिए जाना जाता है। लेकिन दून टू मसूरी की यह वाॅक शायद लोगों के लिए उतनी अच्छी साबित नहीं हुई जितनी अच्छी सोचकर वह अपने घरों से निकले थे।

traffic in mussoorie

लोकेश ओहरी जो बीटीडीटी के फाउंडर हैं और इस वाॅक के लीडर हैं उनसे न्यूज़पोस्ट से हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि, ‘हम काफी समय से लगभग हर रविवार इस वाॅक का आयोजन करते हैं।’ उन्होंने बताया कि इस वाॅक में वह दून से ऋषिकेश,मसूरी,सहस्त्रधारा और ऐसी जगह पर जाते हैं जहां आम लोगों ने यह सोच कर जाना छोड़ दिया है कि यह जगह दूर है या यहां पर भीड़-भाड़ ज्यादा होती है। उन्होंने कहा ,कि’ इस वाॅक के जरिए लोगों को यह बताना चाहते हैं कि यह जगह हमारी हैरिटेज है जिनको छोड़ना हमारी किसी समस्या का समाधान नहीं है।’ हालांकि पिछली वाॅक में जो हुआ उससे खुद लोकेश भी स्तब्ध थे कि रात के 12 बजे जब सड़के खाली होनी चाहिए थी ऐसे में पूरी सड़क बड़ी गाडियों और उनमें बजने वाले तेज आवाज के गानों से गूंज रही थी।

आपको बतादें कि देहरादून से मसूरी केवल 35-36 किलोमीटर की दूरी पर है और इस दौरान किसी तरह की कोइ चेकिंग नहीं होती।शनिवार और रविवार को तो मसूरी की तरफ जाने वाली सड़क गाड़ियों से भरी रहती हैं लेकिन अब आलम यह है कि हफ्ते के सारे दिन मसूरी लगभग गाड़ियों से भरी रहती है।

garbage in mussoorie

लोकेश ने बताया कि इस वाॅक के दौरान उन्होंने देखा कि कभी साफ सुथरी रहने वाली मसूरी कूड़े से भरी हुई है। गौरतलब है कि कहने के लिए मसूरी पहाड़ों की रानी है जिसकी खुबसूरती दुनियाभर में मशहूर है लेकिन इस भीड़-भाड़ ने मसूरी की उस खुबसूरती पर दाग लगा दिया है।

देहरादून से मसूरी तक होने वाले इस वाॅक से इतना तो पता चल गया है कि रात के 12 बजे भी मसूरी अपने पर्यटकों से भरी रहती है और पर्यटकों का दिल खोल के स्वागत करने वाली मसूरी को बदले में मिलता है सड़कों पर कचड़ा अौर ध्वनि प्रदूषण।

हालांकि लोकेश जैसे लोग अपनी विरासत को बचाने के लिए आए दिन नए प्रयास करते रहते हैं लेकिन यह प्रयास तब तक सफल नहीं होगा जबतक सब एकजुट होकर इनके बारे में नहीं सोचेंगे।

श्रेयस तलपड़े की पत्नी को स्वाइन फ्लू

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हिंदी और मराठी फिल्मों के जाने-माने अभिनेता श्रेयस तलपड़े की पत्नी दीप्ति तलपड़े भी स्वाइन फ्लू का शिकार हो गई हैं और उनको हाल ही में मुंबई के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। श्रेयस तलपड़े ने सोशल मीडिया पर ये जानकारी शेयर की।

इन दिनों सनी देओल और बाबी देओल को लेकर बतौर निर्देशक अपनी पहली फिल्म ‘पोस्टर ब्वाय’ का निर्देशन कर रहे श्रेयस तलपड़े ने सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट में लिखा कि प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ में तालमेल बैठाने की कोशिश कर रहा हूं। बतौर निर्देशक फिल्म ‘पोस्टर ब्वायज’ के अलावा श्रेयस बतौर एक्टर इन दिनों रोहित शेट्टी की फिल्म गोलमाल की चौथी सीरिज में भी काम कर रहे हैं। 

श्रेयस ने सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट में लिखा है कि, ‘मैं इस वक्त ज्यादा से ज्यादा समय अपनी पत्नी के साथ रहना चाहता हूं, लेकिन मुझे गोलमाल 4 की शूटिंग भी पूरी करनी है और ‘पोस्टर ब्वायज’ के ट्रेलर का काम भी पूरा करना है। ये सब एडजेस्ट करना आसान तो नहीं है, लेकिन मेरे पास कोई विकल्प भी नहीं है।’ श्रेयस की पत्नी दीप्ति ‘पोस्टर ब्वायज’ के प्रोडक्शन में अपने पति की हमेशा मदद करती हैं, इसलिए श्रेयस पर दोहरा दबाव आ गया है। जानकारी मिली है कि एक सप्ताह में श्रेया की पत्नी को अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी। 

कांवड़ मेले में दुर्घटनाओं का सबब बन रहा नशा

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कांवड़ मेले के दौरान तीर्थनगरी में बम-बम भोले के जयकारों के साथ हरिद्वार और ऋषिकेश इन दिनों शिवभक्ति के रंग में रंगे हैं, लेकिन भक्ति के इस अनूठे संगम में रोजाना कई शिवभक्त अपनी जान गंवा रहे हैं। कभी गंगा में डूबकर तो कभी ट्रेन की छत पर बैठकर, कभी खतरनाक तरीके से गाड़ी चलाकर तो कभी पुलिसकर्मियों से भिड़कर, इस सभी हादसों की जो वजह सामने आई है वह है नशे की प्रवृत्ति। जानकारी के अनुसार, जितने लोग भी इन हादसों और मामलों में सामने आये हैं वह ज्यादातार नशे की हालत में ही पाये गए हैं। हरिद्वार-ऋषिकेश में इस कांवड़ मेले में करोड़ों रुपये के नशे का कारोबार हो रहा है।

कांवड़ मेले में लाखों शिव भक्त गंगा जल लेकर सैकड़ों किलोमीटर की पैदल यात्रा कर हरिद्वार-ऋषिकेश पहुंचते हैं लेकिन भक्ति और श्रद्धा के इस विशाल मेले में आस्था के नाम पर चल रहा है काले सोने यानि चरस का काला कारोबार। अवैध रूप से कांवड़ मेले में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जा रहे हैं चरस, गांजे जैसे मादक पदार्थ। कांवड़िये इन दिनों इनका खुलकर उपयोग कर रहे हैं और प्रशासन इस पर कोई रोक नहीं लगा पा रहा है।
हरिद्वार नगरी में कांवड़ियों को चरस-गांजे के दम लगाते हुए देखा जा सकता है। सिगरेट और चिलम में दम लगाते हुए और धुंआ उड़ाते हुए कांवड़ियों की टोली कांवड़ मेले में जगह-जगह देखी जा सकती है। कहने को तो सभी जगह सुल्फा, चरस व गांजे जैसे नशे के पदार्थों की बिक्री और उनके इस्तेमाल पर प्रतिबंध है पर कांवड़ मेले में इनका उपयोग आम है और वह भी पुलिस की नाक के नीचे।
कांवड़िये यात्रा के दौरान सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा पैदल ही पूरी करते हैं। कांवड़ियों का मानना है कि लगातार लम्बी यात्रा के दौरान थकावट आदि से बचने के लिए ही वह इसका सेवन करते हैं। कांवड़िये सुल्फे, चरस को भोले शिव की बूटी कहते हैं। वह कहते हैं कि ये तो भोले का प्रसाद है। इसके सेवन से ये सफर कैसे कट जाता है इसका पता ही नहीं चलता है। भले ही कांवड़िये इसे भोले का प्रसाद मानकर इसका सेवन करते हों, किन्तु भोले जैसा आचरण कोई नहीं करता।
कांवड़ियों का कहना है कि सुल्फा या चरस का सेवन करने के बाद उनपर मस्ती का खुमार छा जाता है और फिर तो वो पूरी तरह से भोले की मस्ती में मस्त होकर चलते रहते हैं।
उधर, पुलिस नशे के इस काले धंधे को रोक पाने में पूरी तरह नाकाम रही है। हालांकि पुलिस अधिकारी लगातार दावे कर रहे हैं कि वह इन पर निगाह रखे हुए हैं। ड्रग माफिया चरस को काला सोना के नाम से पुकारते हैं। काले सोने का कारोबार कांवड़ के इन 15 दिनों में खूब फलता-फूलता है। हालांकि, पुलिस ने हर साल बढ़ रहे इस नशे के प्रचलन को देखते हुए साधू-संतों से भी अपील की है कि वह शिव भक्तों को समझाएं कि वह ऐसा ना करें साथ ही ये सब बेचने वाले पर भी कड़ी निगरानी से नजर भी रखे हुए हैं।