Page 669

टोरंटो फिल्म फेस्टिवल में प्रियंका चोपड़ा का होगा सम्मान

0

इस साल 7 से 17 सितंबर तक होने वाले 42वें टोरंटो फिल्म फेस्टिवल के दौरान विशेष रुप से अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा को सम्मानित किया जाएगा। ये सूचना प्रियंका चोपड़ा ने सोशल मीडिया पर शेयर की, तो उनको बधाई देने वालों का तांता लग गया। प्रियंका चोपड़ा ने हाल ही में हालीवुड की फिल्म बेवाच से अपना अंतर्राष्ट्रीय करिअर शुरू किया है।

अमेरिका की टेली सीरिज क्वांटिको की दो कड़ियों में काम कर चुकी प्रियंका की पहली हालीवुड फिल्म भले ही भारत में ज्यादा कारोबार नहीं कर पाई हो, लेकिन हालीवुड में प्रियंका की डिमांड लगातार बढ़ रही है और बेवाच के बाद वे हालीवुड की दो नई फिल्में साइन कर चुकी हैं। साथ ही चर्चा है कि क्वांटिको की नई सीरिज में भी प्रियंका काम करने जा रही हैं।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रियंका को विश्व विख्यात अकादमी पुरस्कारों (आस्कर) की आयोजन कमेटी ने 42 ऐसी हस्तियों की टीम में जगह दी है, जो आस्कर के विस्तार की योजनाओं को लेकर अपनी सलाह देगी। इसके अलावा यूनिसेफ की ओर से प्रियंका चोपड़ा उनकी ब्रैंड अंबेसडर के तौर पर पिछले तीन साल से काम कर रही हैं। भारत में प्रियंका चोपडा की प्रोडक्शन कंपनी प्रादेशिक फिल्में बना रही है।

प्रियंका की फिल्म कंपनी ने हाल ही में मराठी में वेंटिलेटर और पंजाबी में सर्वानन नाम से फिल्में बनाई हैं, जिनको काफी सफलता मिली है। अब उनकी कंपनी भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की भाषाओं में फिल्में बना रही है। हाल ही में प्रियंका की कंपनी की सिक्कमी भाषा की फिल्म का ट्रेलर कांस फिल्म फेस्टिवल में लांच किया गया। 

संगठनिक चुनाव, कांग्रेस दिग्गजों के बीच संघर्ष शुरू

0

भले ही कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई पर आपसी उठापटक नहीं थम रही है, जिसके कारण कांग्रेस संगठन में लगातार घमासान मची हुई है। नए प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के आने के बाद कार्यकारिणी में जमे दिग्गजों द्वारा नई कार्यकारिणी में भी जोड़-तोड़ गठजोड़ का दौर जारी है। अब कांग्रेस ने विकासखंडों, जनपदों से लेकर प्रदेश स्तर पर संगठन में दबदबा बनाने का काम जारी है। जिसके कारण दिग्गजों में खींचतान और बढ़ रही है।

दिग्गजों के लिए छटपटाहट का अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि हर गुट अपने लोगों को संगठन में एकजुट करने को आमादा हैं। कांग्रेस ने नई संगठनिक इकाइयों के चुनाव में तेजी आने के साथ-साथ पार्टी के बड़े दिग्गज आपस में टकराते दिख रहे हैं। पिछले दिनों बड़े नेताओं में जो कुछ चर्चाएं हुई वह इसी बातचीत का अंग मानी जा रही है। हर नेता संगठन पर परोक्ष रूप से प्रभाव जमाना चाहता है, जबकि पार्टी के दिग्गज इसी प्रभाव को जमाने में लगे हुए हैं। प्रदेश के नए मुखिया प्रीतम सिंह इस मामले में दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंककर पीता है कि कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं। उसके बावजूद उन्हें क्षेत्रीय क्षत्रपों को एकजुट रखने में अच्छी खासी मेहनत करनी पड़ रही है। पूर्ण बहुमत से 11 विधायकों तक पहुंची कांग्रेस के इस परिणाम का मोदी मैजिक कारण तो है ही जिस ढंग से उस समय पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत तथा संगठन के मुखिया किशोर उपाध्याय के बीच धींगामुश्ती मची हुई थी, वह विजय बहुगुणा के पार्टी छोड़ने के बाद भी बरकरार रही और हरीश रावत जो सत्ता के मुखिया थे और किशोर उपाध्याय जो संगठन के मुखिया थे, दोनों अपनी सीट तक नहीं बचा पाए।

अलग-अलग बातचीत के दौरान नाम ना छापने की शर्त पर पार्टी सूत्रों ने बताया कि क्षेत्रीय और प्रादेशिक क्षत्रपों की इस अंदरखाने की खींचतान का परिणाम पार्टी को भुगतना पड़ सकता है। कांग्रेस संगठन में निचले स्तर पर पकड़ बनाने के लिए नेता प्रतिपक्ष, प्रदेशाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री तीनों गुटों ने पूरा जोर लगा रखा है।

इतना ही नहीं राज्य में कांग्रेस पार्टी के 274 सांगठनिक क्षेत्र हैं। चुनाव प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। बूथ स्तर से संगठन में एक प्रतिनिधि क्षेत्र में भेजा जाएगा। इसी प्रकार क्षेत्र से जिले के लिए छह और प्रदेश कार्यकारिणी के लिए एक प्रतिनिधि चुना जाएगा। यह चुनाव सितम्बर माह तक पूरा हो जाना है। जिला स्तर की इकाइयां गठित होने के बाद प्रदेश स्तर के इकाइयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय चाहते हैं कि संगठन में उनके लोगों को अच्छा खासा स्थान मिले। दूसरी ओर वर्तमान प्रदेशाध्यक्ष प्रीतम सिंह अपने लोगों को समायोजित करना चाहते हैं, लेकिन उनके सामने सांगठनिक चुनाव में दिग्गजों से तालमेल बिठाने की चुनौती है। हालांकि पार्टी हाईकमान खुद इसतरह की चुनौती को लेकर अलर्ट है। यही वजह है कि राज्य में चुनाव के लिए प्राधिकरण का गठन किया गया है। प्राधिकरण की देखरेख में ही निचली इकाइयों का गठन होना है। 

फिल्म बरेली की बर्फी का ट्रेलर जारी

0

आयुष्मान खुराना, कीर्ति सेनन और राजकुमार राव की प्रमुख भूमिकाओं वाली फिल्म ‘बरेली की बर्फी; का ट्रेलर आज मुंबई में लांच किया गया। इस मौके पर फिल्म की पूरी टीम मौजूद रही। इस लव ट्रेंगल फिल्म का निर्देशन अश्विनी अयैर तिवारी ने किया है, जो इससे पहले स्वारा भास्कर की एवार्ड विनिंग फिल्म ‘निल बटे सन्ना’टा की निर्देशक रही हैं। अश्विनी अयैर तिवारी रिश्ते में दंगल वाले निर्देशक निलेश तिवारी की पत्नी लगती हैं।

कहा जाता है कि इस फिल्म की पटकथा पर अश्विनी के साथ निलेश तिवारी ने भी काम किया है। इस फिल्म में तीनों ही कलाकार यूपी के एक छोटे से शहर के किरदारों को निभा रहे हैं। पहले ये फिल्म 21 जुलाई को रिलीज होनी थी, लेकिन अब इसे 18 अगस्त तक आगे बढ़ाया गया है। ट्रेलर लांच के मौके पर कीर्ति सेनन ने कहा कि ऐसा किरदार उन्होंने पहले कभी नहीं किया। आयुष्मान और राजकुमार राव ने कहा कि वे खुद छोटे शहरों से आते हैं, इसलिए वे इन किरदारों के साथ खुद को कनेक्ट करते हैं।
इन तीनों के लिए ही ये फिल्म काफी अहम मानी जा रही है। कीर्ति सेनन की हाल ही में सुशांत सिंह राजपूत के साथ फिल्म ‘राबता’ बाक्स आफिस पर फ्लाप रही, तो राजकुमार राव को ‘बहन होगी तेरी’ का झटका लगा और आयुष्मान खुराना की फिल्म ‘मेरी प्यारी बिंदू’, बाक्स आफिस पर असफल साबित हुई थी। 

लिपस्टिक अंडर माई बुरका : बोल्ड के नाम पर हॉट सीन की भरमार

0

सेंसर बोर्ड के साथ विवादों में फंसी रही प्रकाश झा प्रोडक्शन की फिल्म ‘लिपस्टिक अंडर माई बुरका’ पहली नजर में महिलाओं की आजादी और सम्मान के साथ उनके हक की लड़ाई का चेहरा बनती है, लेकिन जल्दी ही समझ में आ जाता है कि मामला इतने भर तक का नहीं है। दरअसल कहानी की बुनियाद महिलाओं की सेक्शुलियटी को लेकर है, जिसमें 55 साल की प्रौढ़ा से लेकर 18 साल की नवयुवती तक शामिल हैं।

कहानी भोपाल की चार महिलाओं की हैं, जो एक दूसरे के पड़ोस में रहती हैं। पहली महिला ऊषा (रत्ना पाठक शाह) हैं, जो मुहल्ले में बुआजी के नाम से जानी जाती हैं। दूसरी महिला शीरिन (कोंकणा सेन शर्मा) हैं, जिसके शौहर दुबई में काम करते हैं और शीरिन सेल्स गर्ल के तौर पर कमाती है, ताकि बच्चों की परवरिश कर सके। शौहर के लौट आने के बाद शीरिन की जिंदगी परेशानियों में घिर जाती है। तीसरी महिला लीला (आहना कुमार) है, जिसका अफेयर एक फोटोग्राफर के साथ है और उसकी शादी कहीं और तय हो जाती है। चौथी महिला कॉलेज जाने वाली रेहाना (प्लबिता) है, जो घर से बुर्का पहनकर निकलती है और कॉलेज में जींस पहनकर पहुंचती है।

एक दूसरे के पड़ोस में रहने वाली ये चारों महिलाएं अपने-अपने हालात में जकड़ी दिखाई गई हैं। बुआजी को चोरी छिपे फंतासी नॉवेल पढ़ने का शौक है, जिसमें सेक्शुअल कंटेंट होता है। शीरिन का शौहर लौट आता है और अपनी पत्नी के साथ जबरन सेक्स करने में गुरेज नहीं करता। वहीं घर से बाहर उसका किसी और महिला के साथ भी अफेयर चल रहा है। लीला इस उलझन में कैद है कि जिसके साथ शादी होने जा रही है, उसके साथ रहूं या जिसके साथ अफेयर है, उसके साथ रहूं। रेहाना को जींस पहनने के अलावा पॉप, जैज गाने का शौक है। ऊंचे शौक पूरे करने के लिए रेहाना शहर के मॉल्स से चोरी करने से भी परहेज नहीं करती और एक दिन जेल पहुंच जाती है।

फिल्म की निर्देशिका अलंकिृता श्रीवास्तव ने फिल्म को बोल्ड बनाने के इरादे से ही पटकथा तैयार की और हरसंभव तरीके से बोल्डनेस के नाम पर सेक्शुअल कंटेंट से फिल्म को भर दिया। फिल्म महिलाओं की घुटन, पुरुषत्व की सत्ता और उनकी आजादी जैसे मुद्दों की वकालत करती है, लेकिन इन सबको सेक्स के साथ जोड़ने से मामला कहीं से कहीं पहुंच जाता है।  महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वत्रंता को लेकर फिल्में पहले भी बनी हैं और आगे भी बनती रहेंगी, लेकिन इन तीनों मुद्दों को लेकर अलंकिृता श्रीवास्तव ने जो बनाया है, उसमें इस मुद्दे से कहीं ज्यादा सेक्स पर फोकस किया गया है और यही फिल्म की सबसे बड़ी गड़बड़ है और बहस का मुद्दा भी यही है।

परफॉरमेंस की बात करें, तो चारो मुख्य किरदारों में रत्ना पाठक शाह और कोंकणा सेन शर्मा की अदायगी के बारे में तो हर कोई जानता है, आहना कुमार और प्लबिता ने भी अपने किरदारों के साथ न्याय किया है। अपनी-अपनी जगह चारों महिला कलाकारों का अभिनय दर्शनीय है।  महिला अधिकारों की पैरवी करने वाला हर व्यक्ति सेक्शुअल कटेंट से आगे जाकर फिल्म की कहानी से जुड़ेगा, लेकिन असली बाधा यही है कि इस बोल्ड कटेंट में आप कितना भरोसा रखते हैं।

फिल्म का बोल्ड कटेंट महानगरों में महिलाओं की आजादी के समर्थन वाली युवा पीढ़ी को आकर्षित करेगा, तो हॉट सीन छोटे केंद्रों पर मसालेदार दर्शकों को खुश करेंगे, फिर भी बॉक्स ऑफिस पर ऐसी फिल्मों से कामयाबी की बड़ी उम्मीद नहीं रहती। बॉक्स ऑफिस पर ये फिल्म सीमित कारोबार ही कर पाएगी। 

नीलकंठ कावड़ यात्रा का अंतिम पड़ाव

0

सावन के महीने में शिवरात्रि मनो शिवभक्तों के लिए सोने पे सुहागा जैसा होता है। चथुर्ठमास के चलते शिवभक्त अपने आराध्य को जलाभिषेक करके प्रसन्न करने में जुटे है और ऋषिकेश के नीलकंठ महादेव सबकी मनोकामनायों को पूर्ण करने में लगे हुए है।

कहते है उत्तराखंड के कण कण में भगवन शिव का वास है। ऐसे में सावन का महीना आते ही शिवभक्त कावड़ उठा कर श्री नीलकंठ महादेव के दर्शन के लिए घरों से निलकते है। ये शिव भक्त गंगा जल लेकर अपने आराध्य का जलाभिषेक कर के पुण्य की प्राप्ति करते है, हर साल इस कावड़ यात्रा में सावन में लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुँचते है।

कहते है चथुर्ठमास में शिव परिवार की पूजा का विशेष महत्व होता है। भगवान भोले भी जलाभिषेक करने से अपने भक्तों की सभी मुरादों को पूरा करते है , यही कारण है बड़ी संख्या में श्रद्धालु नीलकंठ धाम पहुच रहे है और भक्तों का उत्साह बीते 12 दिनों में 30 लाख से उपर पहुच चूका है। नीलकंठ कावड यात्रा में हर साल लाखों की संख्या में कावड़िये हरिद्वार-ऋषिकेश पहुचते है, ऐसे मे व्यवस्थायों को बनाये रखना प्रशाशन के लिए किसी चुनोती से कम नहीं होता।

नीलकंठ कावड़ यात्रा में सावन की शिवरात्रि का एहम रोल है क्योंकि इस दिन जलाभिषेक करके कावड़िये अपने अपने शहरों, कज्बों की तरफ वापस लौटने लगते है और अपने अपने शिवलियों में जाकर पित्तरों के नाम पर जलाभिषेक करते है। ये परंपरा सालों से चली आ रही है इसे नीलकंठ कावड़ यात्रा का अंतिम पड़ाव भी कहते है

नैनीताल में ग्रीष्म उत्सव 22 जुलाई से 

0

संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत संचालित उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला, का ग्रीष्म उत्सव-2017 नैनीताल में डीएसबी परिसर के ऑडिटोरियम में होगा। जिसका शुभारंभ अपराह्न दो बजे मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. डीके नौडि़याल द्वारा किया जाएगा।

सरकारी सूत्रों के अनुसार तीन दिनी इस उत्सव में 22 जुलाई को मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत होंगे। जबकि समापन अवसर पर पंजाब के राज्यपाल व उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला के अध्यक्ष वीपी सिंह बदनोर मुख्य अतिथि होंगे।

इस उत्सव में तमाम सांस्कृतिक केंद्रों के 175 कलाकार हिस्सा लेंगे। जो लोक नृत्य, लोकसंगीत, गायन व लोग वाद्यों का प्रदर्शन करेंगे। पहले दिन कुमाऊंनी लोकगायिका माया उपाध्याय जबकि दूसरे दिन पंजाब के सूफी गायक मोहम्मद इरशाद द्वारा गायन किया जाएगा।

हरिद्वार कुंभ में भीड़ प्रबंधन पर होगा फोकस: कौशिक

0

इंदौर और उज्जैन दौरे के दौरान इंदौर में आयोजित अल्मा टुडे पत्रिका के नगर विकास विषय पर आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखंड के नगर विकास मंत्री, मदन कौशिक को सम्मानित किया गया। इस मौके पर उन्होंने उज्जैन कुंभ प्रबंधन को लेकर जानकारी भी ली, उन्होंने कहा कि आगामी हरिद्वार कुंभ में सरकार का फोकस भीड़ के बेहतर प्रबंधन पर रहेगा।

सफाई के राष्ट्रीय सर्वें में प्रथम स्थान पाने वाले इंदौर के सफाई व्यवस्था के अध्ययन और उद्देश्य की दृष्टि से शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने वहां के प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात की। उज्जैन में कुम्भ व्यवस्था की जनकारी लेने के दौरान उन्होंने हरिद्वार कुम्भ व्यवस्था के कुशल प्रबंधन के अनुभव भी साझा किए। कौशिक ने कहा कि, ‘आगामी हरिद्वार कुम्भ व्यवस्था को भीड़ प्रबंधन की दृष्टि से विशेष रूप से फोकस किया जाएगा, सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग करके धर्म आध्यात्म को अधिक आकर्षक ढ़ग से श्रद्धालुओं के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।’

इस दौरान नगर विकास मंत्री कौशिक ने कहा कि इस दौरे से मिले अनुभव का उपयोग संपूर्ण उत्तराखण्ड के स्वच्छता अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए किया जाएगा। स्वच्छता संबंधी कार्ययोजना के लिए अन्य राज्यों के अनुभवों का भी उपयोग किया जाएगा।

किसान की आत्महत्या पर कांग्रेस मुखर

0

बैंक कर्ज के दबाव में उत्तराखण्ड के जनपद टिहरी गढ़वाल में विकासखण्ड चम्बा के स्वाडी गांव निवासी किसान राजकुमार(47) ने आत्महत्या कर ली। इस मामले में मुख्यमंत्री ने बयान दिया है कि उत्तराखंड में सभी किसान हैं। इसको लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने किसान की आत्महत्या पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए इस घटना को देवभूमि के लिए कलंक बताया। साथ ही राज्य सरकार के रवैये पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार चुनाव से पहले के अपने वादे भूल गई है।

बुधवार देर रात किसान ने आत्महत्या कर ली थी। गुरुवार को यह मामला सामने आया तो राजनीति शुरू हो गई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि सरकार किसानों को लेकर असंवेदनशील है। मुख्यमंत्री किसानों के हित में कदम उठाने के बजाय प्रदेश के हर व्यक्ति को किसान बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं। प्रीतम सिंह ने कहा कि कांग्रेस किसानों को लेकर संवेदनशील है और जिला कांग्रेस का चार सदस्यीय प्रतिनिधिमण्डल, जिसमें प्रदेश प्रवक्ता शांति प्रसाद भट्ट, नरेन्द्र रमोला, राजेश्वर बडोनी एवं साहब सिंह सजवाण शामिल हैं को स्वाडी गांव भेजा गया है, जो घटना की विस्तृत जानकारी प्रदेश कांग्रेस कमेटी को देगा।
प्रीतम सिंह ने किसान की आत्महत्या पर गहरा दुःख प्रकट करते हुए ऐसी घटनाओं को उत्तराखण्ड राज्य को शर्मसार करने वाला बताया। प्रीतम सिंह ने सरकार से घटना का संज्ञान लेते हुए पीड़ित परिवार को शीघ्र राहत पहुंचाने की मांग की। प्रीतम सिंह ने कहा कि पर्वतीय राज्य होने के कारण यहां के किसानों की खेती वर्षा पर निर्भर रहती है। अधिक बारिश और ओलावृष्टि से सब्जी, फल आदि की फसलें बर्बाद हो जाती हैं। ऐसी परिस्थितियों में किसान ऋण लेने को बाध्य होते हैं। बैंकों की ओर से बार-बार कर्ज वसूली के लिए बनाया जा रहा दबाव किसानों को आत्महत्या के लिए मजबूर कर रहा है।
प्रीतम सिंह ने कहा कि बैंक जिस तरह किसानों पर दबाव बना रहे हैं, उससे स्थिति बिगड़ रही है। भारतीय जनता पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में किसानों के कर्ज माफ करने का वादा किया था, लेकिन अब सरकार इससे मुकर गई है। उलटा मुख्यमंत्री इन घटनाओं को नजरअंदाज कर रहे हैं। अतिवृष्टि और आपदा को देखते हुए उत्तराखण्ड राज्य के किसानों का सम्पूर्ण ऋण शीघ्र माफ किया जाना चाहिए।

कांवड़ियों की संख्या ने चार करोड़ के आंकड़े को किया पार

0

कांवड़ मेला सम्पन्न होने के बाद शुक्रवार को भी आसपास के क्षेत्र के कांवडिए जल भरकर अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए। पांच दिनों से सम्पूर्ण शहर पर कांवड़ियों का कब्जा रहने के बाद शुक्रवार राहत मिली। इस बार कांवड़ मेले ने अर्द्धकुंभ को भी फेल कर दिया। इस बार कांवड़ियों की संख्या ने चार करोड़ का आंकड़ा भी पार किया।

कांवड़ मेले के दौरान करीब 36 कांवड़ियों को इस बार अपनी जान से हाथ धोना पड़ा, जो कि पिछले कांवड़ मेले में कांवड़ियों की हुई मौत से अधिक रहा। वहीं 60 से अधिक कांवड़िए घायल भी हुए। कांवड़ियों की भीड़ के कारण शहर में अव्यवस्थाओं का जहां बोलबाला दिखाई दिया, वहीं आए दिन कांवड़ियों और पुलिस के बीच झड़प की खबरें भी आती रहीं। बावजूद इसके कांवड़ियों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती गई और अंतिम दिन कांवड़ियों की संख्या ने चार करोड़ के आंकड़े को भी पार कर लिया, जो कि विगत कांवड़ मेले में कांवड़ियों की संख्या से कहीं अधिक रही। विगत वर्ष कांवड़ियों की संख्या तीन करोड़ से अधिक रही। केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अलर्ट व आतंकी घटनाओं की आशंका भी कांवड़ियों की भक्ति को नहीं डिगा पाई।

मेला सकुशल सम्पन्न होने पर जहां पुलिस प्रशासन ने चैन की सांस ली, वहीं स्थानीय लोगों को भी सुकून मिला और वह अपने रुके हुए कार्यों को पूरा करने के लिए घरों से निकले। 11 दिनों तक चला कांवड़ मेला सकुशल तो सम्पन्न हो गया किन्तु अपने पीछे वह शहर में गंदगी के अंबार छोड़ गया।
कांवड़ मेला सकुशल सम्पन्न कराना पुलिस प्रशासन के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। मुस्तैदी के साथ पुलिस प्रशासन ने कांवड़ मेले को सकुशल सम्पन्न कराया। जहां मेला सकुशल सम्पन्न होने पर पुलिस प्रशासन ने राहत की सांस ली, वहीं स्थानीय लोगों को भी खासी राहत मिली।
बतादें कि विगत दस दिनों में कांवड़ियों के उमड़े हुजुम और शहर में लगे जाम के कारण स्थानीय लोग खासे परेशान थे। घरों से निकलना तक उनके लिए दूभर हो गया था। आलम यह था कि मरीज को चिकित्सक के पास ले जाने तक में दिक्कतें आ रही थीं। एक तो बेतहाशा भीड़ और ऊपर से कान फोड़ू डीजे व साइलेंसर वाली बाइकों की आवाजों ने लोगों का जीना मुहाल किया हुआ था। उनके लिए मुश्किल हो रखा था कि घर से चंद कदमों की दूरी तय करने के लिए भी घंटों जाम में फंसे रहना पड़ेगा। शुक्रवार कांवड़ मेला सम्पन्न होने से लोगों को खासी राहत मिली तथा रोजमर्रा के कामों को निपटाया।

मृतक किसान के परिवार का दुख बांटने पहुंचे कांग्रेस के नेता

0

राज्य में जहां एक तरफ सरकार किसानों की कर्ज माफी को सिरे से खारिज कर रही है वहीं प्रदेश में कर्ज के बोझ तले दबे किसानों की आत्महत्या का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है।

Farmer family

आपको बतादें कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह के निर्देश पर कांग्रेस की एक टीम ने प्रदेश प्रवक्ता शान्ति प्रसाद भट्ट के नेतृत्व में ग्राम स्वाडी, पटी बमुन्ड, चम्बा, टिहरी के मृतक किसान राजूकुमार के घर जाकर उनके परिवार और नादान बच्चो को ढान्ड्स बँधवाया। राजूकुमार की पत्नी रोशनी देवी और 7 बच्चों के पालन पोषण के लिये कोई नहीं है। राजूकुमार की पत्नी ने बताया कि मेरे पति पर जिला सहकारी बैंक का अौर उत्तरांचल ग्रामीण बैंक का कर्ज था ओर बैंक वाले चार बार घर पर आ गये थे ओर कर्ज वापसी के लिये दबाव बनाया था।रोशनी ने बताया कि बैंक द्वारा एक समय सीमा दी गई थी एक-दो दिन बाद वह समय सीमा ख़त्म हो रही थी, इसी दबाव मे राजूकुमार ने कीटनाशक पी लिया। राजूकूमार की एक कच्ची झोपड़ी है, जिसे पक्का करने के लिये आगे का काम स्वयं राजूकूमार कर रहा था।अंत्येष्टि के लिये ग्रामीणों ने चंदा एकत्र कर अंत्येष्टि की।