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नाबालिग ने बच्चे को जन्म देते ही दूसरी मंजिल से फेंका

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प्रेम प्रसंग में नाबालिग लड़की ने एसा काम कर डाला कि जिसे सुनकर सभी हैरान रह जाएंगे। प्रेमी ने नाबालिग को पहले गर्भवती बना दिया और नाबालिग ने बच्चे को जन्म देते ही दूसरी मंजिल से नीचे फेंक कर उसे मारने की पूरी कोशिश की मगर बच्चा किसी तरह से बच गया। नाबाल‌िग लड़की की इस शर्मनाक हरकत से मां के वजूद पर सवाल खड़े कर दिये हैं।

शहर की पॉश कॉलोनी के एक घर में नौकरानी का काम करने वाली एक नाबालिग किशोरी ने मंगलवार को बच्चे को जन्म देने के बाद उसे मारने की नीयत से दो मंजिले मकान से नीचे फेंक दिया। बच्चे की आवाज सुनकर पहुंचे लोगों के सूचना देने पर पहुंची पुलिस ने बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस ने पूछताछ के लिए मकान मालिक के साथ नौकरानी और उसके प्रेमी को हिरासत में ले लिया है। सिडकुल की एक कंपनी में काम करने वाले एक व्यक्त‌ि ओेमेक्स के एब्रो एच टॉवर के दूसरी मंजिल पर बने फ्लैट में अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रहते हैं। शरद ने एक नाबालिग किशोरी को घर के काम के लिए रखा हुआ है।
कुछ सिक्योरिटी गार्ड उसके फ्लैट के नीचे ग्राउंड फ्लोर पर बैठकर खाना खा रहे थे इसी दौरान उन्होंने कुछ गिरने की आवाज सुनी। वह टोह लेने के लिए गए तो एक नवजात शिशु को रोता हुआ पाया। इसी बीच पास ही से गुजर रही एक महिला बच्चे को कपड़े में लपेटकर अपने घर ले गई और पड़ोसियों की मदद से पुलिस को सूचना दी गई।  सूचना पर सीओ सिटी स्वतंत्र कुमार पंतनगर थाना प्रभारी संजय पाठक और सिडकुल चौकी प्रभारी नरेश पाल पड़ताल करते हुए जब उसके घर पहुंचे तो वहां मौजूद नौकरानी ने बताया कि बच्चा उसका है।मंगलवार शाम को पैदा होने के बाद उसने ही मारने की नीयत से उसे फेंका था। बच्चे के पिता के बारे में पूछे जाने पर उसने बताया कि बहेड़ी निवासी युवक उसका प्रेमी है और बच्चा भी उसी का है। पुलिस मामले की पड़ताल के लिए कॉलोनी में लगे सीसीटीवी कैमरों को भी जांच कर  रही है।

अब अल्मोड़ा के सतीश विदेश में देंगे टक्कर

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खेल के क्षेत्र में बढता अल्मोडा जिले का योगदान बढता जा रहा है। महिला क्रिकेटर एकता बिष्ट ने जहां जिले और प्रदेश का नाम उंचा किया तो वहीं अब देश दुनिया में अपनी कोटिंग का लोहा मनवाने के लिए सतीश भी निकल पडे हैं जीं हां ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया के तत्वावधान में 17 सितंबर से 27 सितंबर तक तुर्कमेनिस्तान की राजधानी असगाबट में होने जा रहे पांचवें एशियन इंडोर एवं मार्शल आर्ट्स गेम्स 2017 में सतीश जोशी मार्शल आर्टस में देश की टीम के कोच रहेंगे। भारतीय कराटे महासंघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, अंतर्राष्ट्रीय कोच व रेफरी हैं और मूलरूप से लालकुआं हल्द्वानी निवासी सतीश कई साल से रानीखेत में खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं।भारतीय ओलंपिक संघ के तत्वावधान में भारतीय टीम 21 खेलों के बीच पांचवें एशियन इंडोर एवं मार्शल आ‌र्ट्स गेम्स में भी चुनौती पेश करेगी। इन खेलों में कुश्ती, बैडमिंटन, एथलेटिक्स, ताइक्वांडो, जूडो व बालीवाल, जू जित्सू, ताइक्वांडो, जूडो, किक, बाक्सिंग, सैंबो, कराटे आदि कई खेल शामिल हैं। तुर्कमेनिस्तान की राजधानी असगाबट में उक्त खेलों में 62 देशों के पांच हजार से अधिक खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। मार्शल आर्ट में ढाई दशक पूर्व से सक्रिय कदम रखने वाले अंतर्राष्ट्रीय कोच एवं रेफरी सतीश जोशी राज्य के पहले कोच हैं, जो इस बड़े आयोजन में कोच हैं। यहां एक मुलाकात में सतीश जोशी ने बताया कि एशियन इंडोर गेम्स प्रत्येक चार साल में अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी के निर्देशन एवं ओलंपिक काउंसलिंग ऑफ एशिया द्वारा आयोजित किए जाते हैं। ओलंपिक खेलों के बाद यह एशिया का सबसे बड़ा खेल आयोजन माना जाता है। इनके अलावा राज्य के छह मार्शल आ‌र्ट्स खिलाड़ी भी एशियन खेलों में हिस्सा ले रहे हैं। इनमें हल्द्वानी के विनय जोशी, उधमसिंह नगर के किशन साना, देहरादून के राजेंद्र गुप्ता, पिथौरागढ़ के दीपक पांडे, नैनीताल की नव्या पांडे, खटीमा की लखविंदर कौर शामिल हैं।

सतीश जोशी के प्रशिक्षित तमाम खिलाड़ी सेना, पुलिस व अ‌र्द्धसैनिक बलों में कार्यरत हैं। वह सालों से रानीखेत में खिलाड़ियों को तराशने के काम में जुटे हैं। वर्तमान में जिला खेल विभाग अल्मोड़ा में उनके निर्देशन में नौ कराटे खिलाड़ी खेल प्रशिक्षक के रुप में तैयार हो रहे हैं। गत चार सालों से जिला खेल विभाग के मुख्य कराटे कोच के रुप में कार्यरत हैं। वह उत्तराखंड स्पो‌र्ट्स कराटे डू एसोसिएशन के महासचिव व उत्तराखंड मार्शल आर्ट गेम्स कमेटी के निदेशक भी हैं।

छात्राओं के कपड़े उतारने के मामले में शिक्षिका को स्कूल से निकाला

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लंढौरा के एक प्राइवेट स्कूल में टेस्ट में कम नंबर आने पर दो छात्राओं के कपड़े उतारने के मामले में स्कूल प्रबंधन ने शिक्षिका की सेवा समाप्त कर दी है। पुलिस ने एक अभिभावक की तहरीर पर शिक्षिका के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। स्कूल प्रबंधन ने पूरे मामले से पुलिस को अवगत करा दिया है।

मंगलवार को कस्बे के जेपी इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल में कक्षा छह का अंग्रेजी विषय का टेस्ट था। आरोप है कि इस दौरान दो छात्राओं के नंबर कम आए। इस पर शिक्षिका ने दोनों छात्राओं के स्कूल कक्ष में कपड़े उतरवा दिए थे। बाद में छात्राओं को डरा धमकाकर घर पर भेज दिया गया था।
छात्राओं की ओर से शिकायत किए जाने पर परिजनों ने जमकर हंगामा किया था। साथ ही पुलिस से पूरे मामले की शिकायत की। पुलिस ने एक अभिभावक की तहरीर पर शिक्षिका शेफाली के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। वहीं स्कूल प्रबंधन ने शिक्षिका की सेवा समाप्त कर दी हैं। स्कूल की प्रधानाचार्या अमिता राठौर ने स्कूल प्रबंधन की ओर से की गई कार्रवाई के बारे में पुलिस को अवगत करा दिया है। 

भारतीय सेना जुटी हैं चीन सीमा पर बंकरो के निर्माण में

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मोली में चीनी सैनिकों की घुसपैठ और डोकलाम में भारत-चीन के बीच बढ़ रही तनातनी का असर उत्तराखंड से लगी सीमा पर भी नजर आने लगा है। वर्ष 1962 के युद्ध के बाद यह पहला मौका है कि जब सेना सक्रिय हुई है।

सेना के बंगाल इंजीनियरिंग ग्रुप (बीईजी) ने पुराने बंकरों की मरम्मत के साथ ही नए बंकरों का निर्माण शुरू कर दिया गया है। भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) के कमांडेंट केदार सिंह रावत ने बताया कि सीमा पर हाई अलर्ट है और सुरक्षा के लिए सभी इंतजाम किए जा रहे हैं।

किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सीमाओं पर तैयारी की जा रही है। उत्तराखंड में 345 किलामीटर लंबी सीमा चीन से लगती है। इसमें से 122 किलोमीटर उत्तरकाशी जिले में हैं। समुद्रतल से 3800 से लेकर 4600 मीटर की ऊंचाई पर पडऩे वाला इस शीत मरुस्थल में आइटीबीपी के जवान नौ चौकियों में चौबीसों घंटे निगहबानी कर रहे हैं।

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की चीन यात्रा के बावजूद दोनों देशों के संबंधों में तल्खी बरकरार है। रविवार को चीनी राष्ट्रपति ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को संबोधित करते हुए सेना को हर जंग के लिए तैयार रहने के लिए कहा तो भारतीय सेना भी पूरी तरह सतर्क है।

दरअसल वर्ष 1962 से पहले इस इलाके में दो गांव थे जादूंग व नेलांग गांव थे। युद्ध के बाद इन गांवों को विस्थापित कर दिया गया। उस समय सेना ने हर्षिल कारछा, नेलांग के साथ ही कुछ अन्य स्थानों पर बंकर बनाए थे। हालांकि इसके बाद हालात सामान्य रहे। अब एक बार फिर परिस्थितियां बदली हुई लग रही हैं।

हर्षिल से सेना की टुकडी को अग्रिम चौकियों की ओर रवाना किया गया है। पुराने बंकरों की मरम्मत के साथ ही नेलांग घाटी में नए बंकर बनाए जा रहे हैं। गौरतलब है कि चमोली के बाड़ाहोती क्षेत्र में जुलाई में ही चीनी सैनिकों के दो बार घुसपैठ की सूचनाएं हैं।

तस्करों की गिरफ्त में है शक्ति कोष का कीड़ा जड़ी

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कीड़ा जड़ी पर राष्ट्रीय तस्करों और उन लोगों की दृष्टि है जो राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप में प्रश्रय देते हैं। इसका कारण इस कीड़ा जड़ी का बेशकीमती होना तो है ही। इसके नाम नाम पर करोड़ों रुपये मिलते हैं, जो राष्ट्र विरोधी कार्यों में प्रयुक्त हो सकते हैं। पिथौरागढ़ और चमोली जैसे जनपदों में कीड़ा जड़ी पाई जाती है।

अकेले चमोली जनपद के कीड़ा जड़ी के प्रकरणों का जिक्र किया जाए तो लगभग दो दर्जन से अधिक मामले पिछले महीने प्रकाश में आए थे। छोटी मात्रा के साथ-साथ कुछ बड़ी मात्रा भी पकड़ी गई है, जिसमें लाखों की कीड़ा जड़ी तस्करों से प्राप्त की गई।
आंकड़े बताते हैं कि चमोली में नौ जुलाई को थराली पुलिस द्वारा डेढ़ किलो कीड़ा जड़ी के साथ एक अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया। इसकी कीमत अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में 22 लाख रुपये आंकी गई। 13 जुलाई को चमोली के ही जोशीमठ में 13 लाख रुपये के 875 ग्राम कीड़ा जड़ी के साथ दो लोग गिरफ्तार किए गए। 15 जुलाई को चमोली में ही चमोली पुलिस द्वारा 508 ग्राम कीड़ा जड़ी के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया। एक अगस्त को कोतवाली जोशीमठ पुलिस ने 500 ग्राम कीड़ा जड़ी के साथ राष्ट्रीय राजमार्ग तिराहे पर मान सिंह पुत्र जय सिंह निवासी दारचूला जंगतोली नेपाल के कब्जे से पांच सौ ग्राम अवैध कीड़ा जड़ी बरामद की गई, जिसकी कीमत 7 लाख 30 हजार बताई गई। यह इस तरह की दो दर्जन से अधिक घटनाओं को खुलासा अकेले चमोली पुलिस ने किया।

जानकार बताते हैं कि यार्सागुम्बा यानि कीड़ा जड़ी एक कीड़े नुमा जड़ी होती है जो हिमालय के ऊंचे क्षेत्रों में पाई जाती है। इसे शक्ति का खजाना कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। इस जड़ी को हिमालयी वियाग्रा कहा जाता है। इसका कारण शक्ति के इस कोष का कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं होना है, जबकि वियाग्रा हृदय रोगियों के लिए जानलेवा साबित होती है। इसका उपयोग सांस और गुर्दे की बीमारी में होता है, यह बुढ़ापे को भी बढ़ने से रोकता है। साथ ही शरीर में रोग प्रतिरोधक शक्ति भी बढ़ाता है।

भारत में यह जड़ी बूटी प्रतिबंधित श्रेणी में है इसलिए इसे चोरी छुपे इकट्ठा किया जाता है। नेपाल में भी 2001 तक इस पर प्रतिबंध था पर इसके बाद नेपाल सरकार ने प्रतिबंध हटा लिया। अब नेपाल सरकार ने इसके उत्पादक क्षेत्रों में यार्सागुम्बा सोसायटी बना दी है जो की लोगो से यार्सागुम्बा को लेकर आगे बेचती है। बीच में नेपाल सरकार प्रति किलोग्राम 20 हजार रुपये रॉयल्टी वसूलती है। उत्तराखंड और नेपाल में मई-जून में यार्सागुम्बा को इकठ्ठा करने की होड़ मच जाती है और गांव के गांव खाली हो जाते हैं। लोग पहाड़ों पर ही टेंट लगाकर रहते है और इसे इकठ्ठा करते हैं।

कीड़ा जड़ी के अवैध व्यापार को लेकर तस्कर माफिया और पुलिस का एक बड़ा नेटवर्क खड़ा हो गया है। लोकल डीलर कीड़ा जड़ी हिमालय के उच्च क्षेत्रों से जुटाकर दिल्ली सप्लाई करते हैं। इंटरनेशनल तस्कर माफि या कीड़ा जड़ी को दुनियाभर में सप्लाई करता है।यह नेटवर्क बेहद संगठित है। अगर नेटवर्क से बाहर का कोई व्यक्ति इस धंधे में घुसता है तो तस्कर पुलिस को खबर कर देते हैं और उसे पकड़वा देते हैं। स्थानीय स्तर पर यार्सागुम्बा की कीमत 9 लाख से 15 लाख रुपये किलो तक पहुंच जाती है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत दोगुनी है। बताया जा रहा है कि इस वर्ष कीड़ा जड़ी बहुत कम मिल रही है, इसलिए कीमत भी ज्यादा वसूली जा रही है।

पर्यावरणविद् अनिल जोशी का कहना है कि यह जड़ी-बूटी का अवैध खनन है, जिस तरह हाथी दांत और शेर के पंजों की तस्‍करी होती है यार्सागुम्‍बा की तस्‍करी उसी तरह चल रही है। उन्‍होंने अरोप लगाया कि कहीं न कहीं इस पूरे अवैध कारोबार में पुलिस-प्रशासन की भी मिलीभगत है।

अब बूट पहनकर रोपाई करेंगी उत्तराखंडी महिलाएं

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पहाड़ में नंगे पैर धान की रोपाई करने वाली महिलाएं अब गमबूट पहनकर रोपाई करेंगी। पहली बार टिहरी जिला प्रशासन यह पहल करने जा रहा है। इसके तहत बुधवार को जौनपुर ब्लॉक के मंजगांव में अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास निधि के तहत आयोजित होने वाली बैठक में महिलाओं को गमबूट प्रदान किए जाएंगे। बाद में जिले के अन्य क्षेत्रों में भी इस तरह की पहल होगी।

 पहाड़ में धान की रोपाई के लिए महिलाओं को दिनभर पानी में रहकर काम करना पड़ता है। इस दौरान खेतों में घुटनों तक पानी भरा रहता है और महिलाएं नंगे पैर ही धान की रोपाई करती हैं। मानूसन शुरू होते ही गढ़वाल में धान की रोपाई शुरू हो जाती है। सो, इन दिनों भी ग्रामीण महिलाएं धान की रोपाई में जुटी हैं।

 कई-कई दिनों तक लगातार पानी में रहने के कारण उनके पैरों में एलर्जी समेत अन्य तरह के रोग हो जाते हैं। यही नहीं, जोंक और अन्य तरह के कीट भी पैरों में लग जाते हैं। लेकिन, संसाधन न होने के कारण महिलाएं इसका विधिवत उपचार नहीं कर पातीं और तमाम तरह की बीमारियों का खतरा बना रहता है। बावजूद इसके रोपाई करना भी नहीं छोड़ा जा सकता।

 टिहरी की जिलाधिकारी सोनिका ने बताया कि कुछ दिन पहले मैंने एक महिला को खेतों में नंगे पैर रोपाई करते देखा। उसने मुझे अपनी परेशानी भी बताई। इसी को ध्यान में रखते हुए जौनपुर ब्लाक के मंजगांव में महिलाओं को गमबूट दिए जा रहे हैं। कृषि विभाग को इसके लिए निर्देशित कर दिया गया है। धीरे-धीरे जिले के अन्य क्षेत्रों में इस पहल को आगे बढ़ाया जाएगा।

अमित शाह : अपनों को प्रेरणा, विरोधियों को परेशानी

अमित शाह की सक्रियता भाजपा के लिए प्ररेणा बन रही है, लेकिन विपक्ष के लिए यह परेशानी का सबब है। शाह पार्टी संगठन को मजबूत बनाने के लिए सभी प्रदेशों में प्रवास कर रहे हैं। उनकी यह यात्रा विरोधियों की धड़कनें बढ़ा देती हैं। वह अपने आंतरिक हलचल के लिए भी अमित शाह को दोषी बता रहे हैं। गुजरात में कांग्रेस के छह विधायक भाजपा में शामिल हो गये। इसका आरोप भी शाह पर लगाया गया। वह मजबूत बनाने, संगठन और सरकार में बेहतर तालमेल सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से लखनऊ आये थे। यह संयोग था कि इसी समय सपा के दो और बसपा के एक विधान परिषद सदस्य ने इस्तीफा दे दिया। इसे भी अमित शाह की यात्रा से जोड़ा गया। वास्तविकता इसके विपरित थी। अमित शाह का उद्देश्य केवल भाजपा को मजबूत बनाना है। उनके प्रयास इसी दिशा में चल रहे हैं। इसमें भाजपा का जनाधार बढ़ाने का वह प्रयास कर रहे हैं। अन्य पार्टियों के विधायकों को भाजपा में शामिल कराने का विचार इसमें शामिल नहीं है। यह तो विपक्षी पार्टियों की अपनी कमजोरी का परिणाम है। कांग्रेस, सपा, बसपा, राजद जैसी पार्टियों के हाई कमान को इसपर आत्मचिंतन करना चाहिए। अमित शाह को दोष देना आसान है लेकिन अपने कार्यों का मूल्यांकन करना कठिन है। गुजरात में छह विधायकों के भाजपा में जाने पर कांग्रेस की नींद टूटी। यहां राज्यसभा चुनाव होने हैं। इसके बाद वह अपने अन्य विधायकों को प्रदेश से बाहर ले गयी। इसका भी विपरित असर हुआ। गुजरात के मुख्यमंत्री को कहने का अवसर मिला। यहां लोग बाढ़ से बेहाल हैं। कांग्रेस के विधायक रिसार्ट में मौज मस्ती कर रहे हैं। उधर दिल्ली में कांग्रेस के दिग्गज नेता चुनाव आयोग में शिकायत करने पहुंच गये। गुजरात में छह महीने पहले ही यह दिखाई देने लगा था कि शंकर सिंह बघेला कांग्रेस का दामन छोड़ देंगे। बघेला गुजरात के प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। यही कारण था कि भाजपा से अलग होने के बाद कांग्रेस हाईकमान ने उनका स्वागत किया था। उन्हें केन्द्र में मंत्री बनाया था। तब भाजपा ने नहीं कहा था कि कांग्रेस ने दबाव बनाकर हमारे एक बड़े नेता को अपने पाले में खींच लिया। यह बघेला का अपना फैसला था। कांग्रेस से अलग होने का फैसला भी उनका अपना था। छह महीने पहले इसकी जानकारी मिलने के बाद भी कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें रोकने का प्रयास नहीं किया।
बघेला के प्रभाव वाले विधायक कांग्रेस छोड़ रहे हैं। इसपर कांग्रेस को ज्यादा परेशानी नहीं होनी चाहिए। दूसरी बात यह है हि कांग्रेस छोड़ने वालों का हाईकमान से भी मोह भंग हो रहा है। उन्हें पार्टी में अपना भविष्य सुरक्षित नहीं लग रहा है। इसलिए भी उन्होंने कांग्रेस छोड़ने का निर्णय लिया। फिलहाल यही संदेश गया कि कांग्रेस ने बाढ़ से परेशान लोगों की अपेक्षा अहमद पटेल के राज्यसभा चुनाव को ज्यादा महत्व दिया। यह अपने विधायकों के प्रति कांग्रेस के अविश्वास को भी उजागर करता है। यही स्थिति बसपा में रही है। इसमें तो भगदड़ पहले से है। प्रायः दिग्गज समय-समय पर बसपा छोड़ते रहे हैं। लम्बे समय तक बसपा में मायावती के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य और नसीमुद्दीन का स्थान रहा है। उसके पहले आरके चौधरी की भी महत्वपूर्ण हैसियत थी। ये सभी मायावती का साथ छोड़ गये। सर्वजन फार्मूले में सतीश चंद्र मिश्र के बाद बृजेश पाठक का स्थान था। मायावती के रुख ने ही ऐसा माहौल उत्पन्न किया था। इसमें भाजपा का कोई दोष नहीं था। आज भी बसपा में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं है। मायावती ने अपने भाई को उपाध्यक्ष बनाया है। इससे भी कई नेता निराश हैं। सपा का आंतरिक या पारिवारिक विवाद समाप्त होने का नाम नहीं ले रहा है। इसका प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है। इसमें भी अमित शाह का कोई दोष नहीं। बिहार में महागठबंधन चलाने का नीतीश ने अंतिम सीमा तक प्रयास किया। जांच एजेंसियों को हजारों करोड़ की अवैध संपत्ति के प्रमाण मिलने लगे। मीसा भारती व उनके पति के फार्म हाउस तक पर जांच एजेंसी का शिकंजा है। इसी के बाद कांग्रेस को सावधान हो जाना चाहिए था। उसे समझना चाहिए था कि इस स्थिति में नीतीश ज्यादा दूर तक साथ नहीं चलेंगे। कांग्रेस हाईकमान ने अदूरदर्शिता दिखाई। उसने समाधान का कोई प्रयास नहीं किया। नीतीश अपनी छवि बचाने के लिए परेशान थे। मतलब यह अलगाव महागठबंधन की आंतरिक व घोटालों का परिणाम था। इसमें अमित शाह की कोई भूमिका नहीं थी। इसके बाद नीतीश के नेतृत्व में राजग की सरकार बनाने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं था। इसी में बिहार का हित था। अमित शाह ने बिहार के लोगों के कल्याण को ध्यान में रखकर फैसला किया।
गोवा, मणिपुर में भी चुनाव परिणाम आने के बाद कांग्रेस हाईकमान उदासीन बना रहा। जब कोई भी दल कांग्रेस को समर्थन देने को तैयार नहीं था, तब इसके लिए कोई संभावना ही नहीं थी। क्षेत्रीय दलों व निर्दलियों ने भाजपा को समर्थन दिया। बहुमत उसके पक्ष में हो गया। संविधान के अनुसार यही सरकार बननी थी।
विपक्ष के हाईकमान अमित शाह से अपनी तुलना करें, तब फर्क समझ आयेगा। अमित शाह अपने पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने का प्रयास कर रहे हैं। विपक्ष के नेता केवल हवा में तैयारी कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि मोदी, गऊरक्षा, असहिष्णुता आदि पर भाषण देकर उनका बेड़ा पार हो जायेगा। सच यह है कि इसका उल्टा असर हो रहा है।

पहाड़ों पर लगातार बारिश से ऋषिकेश में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान पर पहुंचा

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मौसम विभाग की भारी बारिश की चेतावनी सही हो रही है।पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही बारिश ने बढ़ा दी हैं लोगों की मुसीबतें। ऋषिकेश में गंगा में पानी बढ़ने का असर मैदानी भागो में पड़ रहा है। इनमें खासतौर पर हरिद्वार और पशिचमी उत्तरप्रदेश के गंगा तटों पर पानी खतरे के निसान के पास पहुंच रहा है। 

इन दिनों पूरा उत्तराखंड मौसम की मार झेल रहा है, पहाड़ो से लेकर मैदानों तक पानी ही पानी देखने को मिल रहा है ऐसे में मैदानी इलाकों में बाढ़ का खतरा भी मंडराने लगा है। तीर्थनगरी ऋषिकेष में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है जिससे गंगा के किनारे रह रहे लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है। 

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उत्तराखंड में मौसम विभाग की चेतावनी बिल्कुल सटीक बैठी है। ऋषिकेश-देहरादून समेत उत्तराखंड के ज्यादातर हिस्सों में देर रात और सुबह से मध्यम और तेज़ बारिश की सूचनाये मिल रही है। ख़ासकर पहाड़ों में जिस तरह तेज बारिश हो रही है उससे मैदानी इलाकों में बाढ़ के खतरों के संकेत देने शुरू कर दिए है। बात करे ऋषिकेश की तो यहां गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को छूने को बेताब नजर आ रहा है। पहाड़ों पर हो रही लगातार बारिश के चलते यहां गंगा का पानी घाटों तक पहुँच गया है जिससे गंगा के तटों पर रह रहे लोगों में डर का माहौल बन गया है। 

प्रदेश में हो रही लगातार बारिश से भागीरथी-मंदाकनी और अलकनंदा नदी उफान पर है। उत्तरकाशी-टिहरी में हो रही बारिश के चलते टिहरी डाम का जलस्तर भी लगातार बढता जा रहा है। प्रदेश में मौसम के अलर्ट को देखते हुए प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। तो वहीं मौसम विभाग ने अभी और अधिक बारिश की संभावनाओ को जताया है, ख़ासकर अगले एक-दो दिनों तक पहाड़ो पर तेज बारिश जारी रह सकती है। आपको बता दे कि यहाँ हो रही बारिश से गंगा की सभी सहायक नदिया और गदेरे बढ़ने लगे है जिसका सीधा असर मैदानी भागो में पड़ता दिख रहा है। 

माना जा रहा है  प्रदेश में 6 अगस्त तक आसमानी आफत बरसती रहेगी, जिसके चलते एतिहात के तौर पर प्रसाशन ने लोगो को सुरक्षित स्थानों की जाने की अपील है, अब देखने लायक बात होगी कि ऐसी प्रस्तिथि से निपटने के लिए प्रशाशन क्या काम करता है।

फिर आगे बढ़ी ‘हसीना पारकर’ की रिलीज डेट

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भारत के सबसे दुर्दांत अपराधी कहे जाने वाले दाऊद इब्राहिम की बहन हसीना पारकर की जिंदगी पर बनी फिल्म ‘हसीना पारकर’ की रिलीज डेट एक बार फिर आगे बढ़ गई है। ये दूसरा मौका है, जब फिल्म की रिलीज डेट को बदला गया है। अब तक ये फिल्म 18 अगस्त को रिलीज होनी थी लेकिन मिल रही खबरों के मुताबिक, अब ये फिल्म कब रिलीज होगी, इसका फैसला नहीं हुआ है।

इससे पहले ये फिल्म 14 जुलाई को रिलीज की जानी थी लेकिन तब रणबीर कपूर और कटरीना कैफ की फिल्म ‘जग्गा जासूस’ के साथ टकराव को टालने के लिए इस फिल्म को आगे बढ़ाकर 18 अगस्त कर दिया गया था। फिल्म के निर्देशक अपूर्व लाखिया का मानना है कि अगले दो सप्ताह में दो बड़ी फिल्में रिलीज होने वाली हैं, जिनके साथ हम कोई मुकाबला नहीं करना चाहते। 4 अगस्त को इम्तियाज अली के निर्देशन में बनी शाहरुख खान-अनुष्का शर्मा की जोड़ी वाली फिल्म ‘जब हैरी मेट सेजल’ रिलीज होने जा रही है, तो 11 अगस्त को अक्षय कुमार और भूमि पेडणेकर की फिल्म ‘टॉयलेट एक प्रेमकथा’ रिलीज होनी है। अपूर्व लाखिया का कहना है कि टीम जल्दी ही फिल्म की नई रिलीज डेट घोषित करेगी। 

अगले साल शुरू होगी ऋतिक रोशन की ‘कृष 4’

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इस साल जनवरी में रिलीज हुई फिल्म ‘काबिल’ के बाद ऋतिक रोशन की नई फिल्म को लेकर अटकलों का बाजार गरम रहा है। इन तमाम अटकलों के बीच अब ये साफ हो गया है कि ऋतिक रोशन की अगली फिल्म ‘कृष 4’ होगी, जिसकी शूटिंग अगले साल के शुरू में अमेरिका में शुरू होगी। ये बात ऋतिक के पिता और कृष सीरिज के निर्माता-निर्देशक राकेश रोशन ने कही है।

उनका कहना है कि फिल्मर कागजी काम लगभग पूरा हो गया है और फिल्म की पटकथा का लेखन अंतिम दौर में है, जो अगले महीने तक पूरा हो जाएगा। इसके बाद फिल्म की लोकेशन फाइनल करने के लिए राकेश रोशन और ऋतिक रोशन सितंबर के अंत में अमेरिका के दौरे पर रहेंगे। राकेश रोशन इस सवाल को टाल गए कि ‘कृष 4’ में ऋतिक रोशन के साथ किसकी जोड़ी होगी। ‘कृष 2’ और ‘कृष 3’ में ऋतिक के साथ प्रियंका चोपड़ा की जोड़ी बनी थी। चौथी सीरिज की हीरोइन के लिए जहां एक तरफ कटरीना कैफ के होने की चर्चा लंबे समय से चली आ रही है, वहीं ‘काबिल’ के बाद ऋतिक रोशन ने सोशल मीडिया पर इस रोल के लिए यामी गौतम का नाम उछालकर मामले को दिलचस्प बना दिया था।

राकेश रोशन ने इस सवाल को भी टाल दिया कि क्या 2018 में दीवाली के मौके पर ‘कृष 4’ का मुकाबला शाहरुख खान की अनाम फिल्म से होगा, जिसका निर्देशन आनंद एल राय कर रहे हैं और शाहरुख खान इसमें बौने का रोल कर रहे हैं। इस साल जब बॉक्स ऑफिस पर राकेश रोशन की ‘काबिल’ का मुकाबला शाहरुख खान की ‘रईस’ से हुआ था, तो राकेश रोशन ने खुद कहा था कि ‘कृष 4’ को वे शाहरुख की फिल्म के साथ रिलीज करेंगे, लेकिन फिल्म के शेड्यूल को देखते हुए ये मुश्किल लग रहा है।